बिहार में सहकारी संस्था कैसे खोले ?2026 की पूरी प्रक्रिया,लगत और लाभदायक क्षेत्र
बिहार में सहकारी संस्था खोलने की सोच रहे हैं? इस गाइड में जानिए सदस्य संख्या, जरूरी दस्तावेज, पंजीकरण प्रक्रिया, लागत और सहकारी व्यवसाय के लिए सबसे बेहतर क्षेत्रों की जानकारी।
📌 मखाना • डेयरी • फल-सब्जी • मक्का • शहद • मत्स्य
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| बिहार में सहकारी संस्था का रजिस्ट्रेशन करने की पूरी प्रक्रिया और जानकारी |
- सहकारी संस्था क्या होती है?
- बिहार में सहकारी संस्था का कानून
- कितने सदस्य चाहिए?
- बिहार में कौन-से क्षेत्र बेहतर हैं?
- मखाना सहकारी संस्था
- डेयरी सहकारी संस्था
- फल और सब्जी सहकारी संस्था
- मक्का आधारित सहकारी संस्था
- शहद और मधुमक्खी पालन
- मत्स्य सहकारी संस्था
- बीज उत्पादन सहकारी संस्था
- सहकारी संस्था खोलने की Step-by-Step प्रक्रिया
- Bye-laws कैसे तैयार करें?
- जरूरी दस्तावेज और आवेदन
- पंजीकरण के बाद क्या करें?
- निष्कर्ष
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रस्तावना (Introduction)
सहकारी संस्था क्या होती है ?
बिहार में सहकारी संस्था किस कानून के तहत बनती है ?
- Bihar Co-operative Societies Act,1935
- Bihar Cooperative Societies Rules, 1959
बिहार में सहकारी संस्था के लिए कितने सदस्य चाहिए ?
तय कीजिए:आप किस तरह का सहकारी संस्था खोलना चाहते है ?
आप किस क्षेत्र में सहकारी संस्था खोलना चाहते हैं?
बिहार में 2026 के लिए संभावित सहकारिता क्षेत्र एवं प्राथमिकता
| क्षेत्र | संभावित अवसर | प्राथमिकता |
|---|---|---|
| मखाना | उत्पादन, processing, packaging, branding, export | ⭐⭐⭐⭐⭐ |
| डेयरी | दूध collection, chilling, dairy products | ⭐⭐⭐⭐⭐ |
| फल-सब्जी | collection, grading, cold chain, processing | ⭐⭐⭐⭐⭐ |
| मक्का | feed, starch, processing | ⭐⭐⭐⭐⭐ |
| शहद | honey collection, processing, branding | ⭐⭐⭐⭐ |
| मत्स्य | fish production, seed, feed, marketing | ⭐⭐⭐⭐ |
| बीज | seed production एवं processing | ⭐⭐⭐⭐ |
| औषधीय/सुगंधित पौधे | cultivation + processing | ⭐⭐⭐⭐ |
| मशरूम | production + processing | ⭐⭐⭐⭐ |
| चाय | production + processing, खासकर किशनगंज | ⭐⭐⭐ |
बिहार में मखाना सहकारी संस्था क्यों बहुत बड़ा अवसर हो सकता है ?
डेयरी सहकारी संस्था भी बिहार के लिए सबसे मजबूत मॉडल
फल और सब्जी सहकारी संस्था
लीची और आम के लिए विशेष सहकारी मॉडल
मक्का आधारित सहकारी संस्था
मधुमक्खी पालन सहकारी संस्था
मत्स्य सहकारी संस्था का भविष्य
बीज उत्पादन सहकारी संस्था
अब जानते हैं:बिहार में सहकारी संस्था खोलने की पूरी प्रक्रिया
स्टेप 1. आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)
ई - सहकारी पोर्टल के अनुसार पंजीकरण के लिए निम्नलिखित कागजात डिजिटल प्रारूप में तैयार रखने होते हैं --
- उप विधियां (Bye - Laws): यह समिति के नियमों का लिखित दस्तावेज होता है जो समिति के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर से युक्त होने चाहिए।
- प्रवर्तक सदस्यों की आमसभा का प्रारूप: यह इसकी पहली बैठक की सत्यापित कार्यवाही विवरणी होती है।
- मुख्य प्रवर्तक का शपथ पत्र: विहित प्रपत्र में नोटरी द्वारा सत्यापित एफिडेविट होता है।
- कार्यालय का प्रमाण और किरायानामा: इसमें ₹1,000 के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर रेंट एग्रीमेंट या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट होता है।
- घोषणापत्र एवं आवेदन: सभी प्रवर्तक सदस्यों का सदस्यता आवेदन पत्र और नोटरी द्वारा सत्यापित शपथ पत्र होता है।
- सदस्यों का पहचान पत्र: सभी सदस्यों का आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी होता है।
- सरकारी चालान: निबंधन शुल्क भुगतान की ई - चालान रशीद।
स्टेप 2. उद्देश्य तय कीजिए
सबसे पहले आप एक वाक्य में लिखिए -- "हम यह सहकारी संस्था क्यों बना रहे हैं ?"
उदाहरण के लिए "इस संस्था का उद्देश्य क्षेत्र के मखाना उत्पादक किसानों को संगठित करके मखाना उत्पादन,संग्रह,प्रोसेसिंग, पैकेजिंग,ब्रांडिंग और मार्केटिंग के माध्यम से बेहतर मुख्य दिखाना है"
स्टेप 3. कार्यक्षेत्र तय कीजिए
अब आपको यह तय करना है कि आप किस किस क्षेत्र में अपने काम की शुरुआत करेंगे --
- क्या आप शुरुआत एक ही गांव से करना चाहते हैं।
- क्या आप कई गांवों से शुरुआत करना चाहते हैं।
- की आप एक पूरे ब्लॉक स्तर से शुरुआत करना चाहते हैं।
- या आओ जिला स्तर से ही शुरुआत करेंगे।
स्टेप 4. कम से कम 10 पात्र सदस्य को तैयार कीजिए
चूंकि Bihar Co-operative Societies Act के अनुसार सामान्य शर्त के हिसाब से कम से कम 10 वयस्क सदस्य आवश्यक होते हैं।साथ ही ये आवेदक एक परिवार से न होकर अलग अलग परिवार से होने चाहिए।
अतः सबसे अच्छा व्यवहारिक यह रहेगा कि आप 10 के जगह कम से कम 25 से अधिक सदस्यों जो करीब 50 के लगभग हो और जो सक्रिय हो सहकारिता के काम जो करने के लिए।इसने साथ आप शुरुआत कीजिए।
स्टेप 5. संस्था का नाम चुनिए
नाम ऐसा चुनिए जो --
- जो संस्था के उद्देश्य से संबंधित हो।
- किसी दूसरे रजिस्टर्ड संस्था के नाम के साथ भ्रम पैदा न करे।
- भविष्य के विस्तार के लिए उपयोगी हो।
- क्षेत्र विशेष की पहचान को समाहित करता हो।
स्टेप 6. चीफ प्रोमोटर और प्रमोटर टीम बनाईये
संस्था बनाने की शुरुआती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रमोटर एवं प्रमोटर समूह बनाया जाता है।ये समूह अपनी प्रारंभिक बैठके करके आगे की योजना और प्रक्रिया को बढ़ाते हैं।
ये प्रमोटर समूह सदस्यों को जुटाने,प्रस्ताव तैयार करने,Bye- Laws तैयार करने, डॉक्यूमेंट्स तैयार करने और रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन को आगे बढ़ाने का काम शुरू करते हैं।
स्टेप 7. प्रमोटर्स की बैठक कीजिए
प्रमोटर और चीफ प्रोमोटर बनने के बाद सबसे पहले इनकी बैठक होती है।इस बैठक में होने वाले निर्णय के आधार पर ही आगे की सभी गतिविधियां की जाती है।
स्टेप 8. उपविधि (By - Laws) तैयार कीजिए
उपविधि यानी By -Laws संस्था की Rule Book यानी संविधान होती है। इसमें सामान्यतः निम्नलिखित चीजें शामिल होती है --
- संस्था की पहचान: इसमें मुख्य रूप से संस्था का नाम,पता और उसका कार्यक्षेत्र होता है।
- उद्देश्य: संस्था क्या करेगी ? इसके पास कौन कौन से उत्पाद और सेवाएं आदि होगी।
- सदस्यता: इसके सदस्य कौन बन सकता है ? सदस्य बनाने की प्रक्रिया क्या होगी और सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया क्या होगी आदि।
- शेयर पूंजी: एक सदस्य कितने शेयर ले सकता है,शेयर का मूल्य क्या होगा,शेयर कैपिटल की व्यवस्था कैसे होगी।
- प्रबंधन: जनरल बॉडी,प्रबंधक समिति, पदाधिकारी,बैठक,चुनाव और मतदान आदि।
- वित्त: आय,व्यय,रिजर्व,सरप्लस और प्रॉफिट एवं उसका वितरण आदि।
- लेखांकन और ऑडिट: पूरी प्रक्रिया की जानकारी।
- विवाद समाधान: तरीका,क्षेत्र आदि।
- संस्था के विघटन की प्रक्रिया: की पूरी जानकारी।
स्टेप 9. प्रारंभिक पूंजी की व्यवस्था कीजिए
पूंजी की व्यवस्था को थोड़ा स्पष्ट करके समझते हैं ।एक तो पूंजी चाहिए आपको संस्था का रजिस्ट्रेशन करने के लिए जो सरकार के द्वारा जो भी निर्धारित फीस लगता है।इसके साथ ही अन्य कागजी प्रक्रिया आदि में जो खर्च लगता है।
दूसरी है बिजनेस शुरू करने के लिए आवश्यक कुल पूंजी।जैसे प्रोसेसिंग यूनिट्स और मिशनरीज,बिल्डिंग और किराया,बिजली बिल और पैकिंग मैटेरियल आदि।
इसके साथ ही कुछ वर्किंग कैपिटल भी चाहिए होता है।ताकि काम निरंतर जारी रहे। शुरुआत में एक छोटा ही बिजनेस प्लान का DPR बनाना चाहिए ताकि कम पूंजी में भी शुरुआत हो जाए।
आगे चलकर और पूंजी लगाकर काम को बढ़ा सकते हैं।
स्टेप 10. Registration Application तैयार कीजिए
Bihar Co-operative Societies Act 1959 के नियम 3 के अनुसार Registration Application Form l में किया जाता है।
इसके साथ By -Laws की प्रतियां और Organizer की Report आदि दस्तावेजों को भी जमा किया जाता है।
स्टेप 11. आवेदन को Registrar के ऑफिस में जमा कीजिए
Registration Application को संबंधित Registrar of Co-operative Societies के पास प्रस्तुत किया जाता है।
या आप चाहे तो बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट esahkari.bihar.gov.in पर विजित करे और New Registration पर क्लिक करके मुख्य प्रवर्तक के नाम और मोबाइल नंबर के OTP वेरिफाई करके एक यूजर अकाउंट बना लीजिए।
अब पोर्टल में लॉगिन करके पूरे विवरण को भर दिए।इसके बाद सभी संबंधित दस्तावेजों को अपलोड कर दीजिए।
स्टेप 12. Registrar दस्तावेजों की जांच करेगा
जब आप पोर्टल के अनुसार निर्धारित शुल्क का चालान को जमा कर देते हैं।उसके बाद 1959 के Rule 2 के अनुसार रजिस्ट्रार आपके एप्लिकेशन और संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच करेगा।
वह देखेगा कि --
- आवेदन कानून के अनुरूप है या नहीं है।
- Bye-laws कानून के अनुरूप है कि नहीं है।
- आवश्यक जानकारी उपलब्ध है या नहीं है।
स्टेप 13. Registration Certificate प्राप्त कीजिए
यदि Registrar या अन्य संबंधित अधिकारी यदि संतुष्ट हो जाता है कि संस्था और उसका Bye- Laws लागू कानून और नियमों के अनुरूप है तो रजिस्ट्रेशन सफल किया जाता है और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को जारी किया जाता है।
1959 के नियम में Registration Certificate के लिए Form IV का उल्लेख है।इसके मिलने के बाद अब आपको सहकारी संस्था का दर्जा मिल जाता है।
स्टेप 14. रजिस्ट्रेशन के बाद क्या करना होगा
रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद अब कुछ हो नहीं गया है।क्योंकि यह तो अब शुरुआत है।
इसके बाद अब संस्था को व्यवस्थित रूप से --
- Bank Account
- PAN
- Accounting System
- Books of Accounts
- General Body
- Managing Committee
- Audit
- Annual Compliance
अनुमानित लागत और सरकारी फीस
अनुमानित लागत और सरकारी फीस (Estimated Cost & Fees)
सहकारी समिति पंजीकरण एवं प्रारंभिक संचालन व्यय विवरण
| मद (Head) | अनुमानित लागत (INR) | विवरण |
|---|---|---|
| सरकारी निबंधन शुल्क (Govt Fee) | ₹1,000 - ₹5,000 | संस्था के प्रकार व कार्यक्षेत्र (पंचायत/जिला) के अनुसार निर्धारित ट्रेजरी चालान। |
| स्टाम्प पेपर व नोटरी व्यय | ₹1,500 - ₹2,500 | ₹1,000 का किरायानामा स्टाम्प + एफिडेविट व नोटरी चार्ज। |
| ड्राफ्टिंग व स्टेशनरी व्यय | ₹2,000 - ₹4,000 | उपविधियों की छपाई, रजिस्टर और फाइलिंग खर्च। |
| प्रारंभिक शेयर कैपिटल (Capital) | ₹10,000 - ₹50,000+ | यह सदस्यों द्वारा जमा की जाने वाली कार्यशील पूंजी है (लागत नहीं, बल्कि समिति का फंड)। |
अतः यह कहा जा सकता है कि यदि आप सही में सहकारी संस्था को एक भविष्योन्मुखी सोच के साथ शुरू करना चाहते हैं तो यह 50,000 के लगत में शुरू हो सकता है।
सहकारी संस्था केवल रजिस्ट्रेशन का नाम नहीं है
निष्कर्ष (Conclusion)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)
1. बिहार में सहकारी संस्था खोलने के लिए कम से कम कितने सदस्य होने चाहिए ?
सामान्यतया बिहार में सहकारी संस्था के पंजीकरण के लिए कम से कम 10 व्यक्ति जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो आवश्यक है।आवेदन पर हस्ताक्षर करने वाले सदस्य अलग अलग परिवार से होने चाहिए।
2. बिहार में सहकारी संस्था का पंजीकरण किस कानून के तहत होता है ?
बिहार में सामान्य सहकारी समितियों का पंजीकरण मुख्यतः Bihar Co-operative Societies Act 1935 और Bihar Co-operative Societies Rules 1959 के तहत होता है।विशेष प्रकार की सहकारी संस्था के लिए अन्य कानून वी नियम भी लागू हो सकता है।
3. सहकारी संस्था के पंजीकरण के लिए कौन कौन सी दस्तावेज होने चाहिए ?
मुख्य दस्तावेजों में पंजीकरण आवेदन, प्रस्तावित Bye-laws, सदस्यों की सूची, सदस्यों का पता/व्यवसाय और share participation का विवरण तथा प्रथम Board से संबंधित जानकारी शामिल हो सकती है। 1959 के नियमों के अनुसार registration application Form I में किया जाता है और Bye-laws की निर्धारित प्रतियां तथा organiser की report भी देनी होती है।
4. बिहार में सहकारी संस्था का पंजीकरण कहां कराया जाता है ?
सहकारी संस्था के रजिस्ट्रेशन का आवेदन Registrar of Co-operative Societies के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।Registrar आवेदन,Bye-Laws और अन्य दस्तावेजों की जांच करता है।और आवश्यकता पड़ने पर और दस्तावेज, जानकारी या संशोधन को मांग सकता है।
5. क्या किसान मखाना,डेयरी,मक्का,सब्जी और फल,शहद,मछली पालन और प्रमाणित बीज आदि के लिए सहकारी संस्था को खोल सकता है ?
हाँ। किसानों और उत्पादकों के लिए कृषि, डेयरी, मत्स्य, horticulture, मखाना, शहद तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों से संबंधित सहकारी संस्थाएं बनाई जा सकती हैं, बशर्ते उनका उद्देश्य और Bye-laws लागू कानून एवं संबंधित क्षेत्र के नियमों के अनुरूप हों। बिहार में संस्था बनाने से पहले स्थानीय उत्पादन, सदस्य संख्या और बाजार की मांग का अध्ययन करना सबसे जरूरी है।
6. क्या सहकारी संस्था बनने या खोलने के बाद सरकार से सब्सिडी या पैसा मिलता है ?
सिर्फ सहकारी संस्था का रजिस्ट्रेशन करा लेने से स्वतः सब्सिडी या पैसा नहीं मिल जाता है।बल्कि अलग-अलग सरकारी योजनाओं में पात्रता, project type, सदस्यता, निवेश, infrastructure और अन्य शर्तों के आधार पर सहायता मिल सकती है। इसलिए registration के साथ-साथ संबंधित विभाग की वर्तमान योजना और eligibility criteria भी जांचना चाहिए।
7. बिहार में कौन कौन से सहकारी संस्था को खोलना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है ?
एक ही जिले के लिए सभी क्षेत्रों के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक नहीं कहा जा सकता है।स्थानीय संसाधन और बाजार के आधार पर मखाना,डेयरी,फल सब्जी,शहद,मक्का, मत्स्य और प्रमाणित बीज उत्पादन जैसे क्षेत्रों में अच्छी संभावना हो सकती है।सबसे अच्छा क्षेत्र को चुनने के लिए कच्चा मॉल,किसानों की संख्या,बाजार,प्रोसेसिंग की संभावना और वर्किंग कैपिटल की जरूरत का विश्लेषण कर लेना चाहिए।
8. क्या 10 सदस्य को जुटाकर तुरंत सहकारी संस्था को शुरू कर देना चाहिए ?
कानूनी न्यूनतम सदस्य संख्या पूरी होना और सफल व्यवसाय शुरू करना दो अलग बातें हैं। 10 सदस्य registration की सामान्य न्यूनतम शर्त हो सकती है, लेकिन व्यावसायिक सहकारी संस्था के लिए अधिक संख्या में सक्रिय सदस्य, स्पष्ट Business Plan, बाजार की पहचान, पर्याप्त working capital और पारदर्शी प्रबंधन व्यवस्था रखना अधिक सुरक्षित है।
संबंधित विषय:
- India Code — Bihar Co-operative Societies Act, 1935
- Bihar Cooperative Societies Rules, 1959
- Cooperative Department, Government of Bihar
- Directorate of Horticulture, Government of Bihar
- Directorate of Fisheries, Government of Bihar
- Dairy, Fisheries & Animal Resources Department, Bihar



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