बिहार में सहकारी संस्था कैसे खोले ?2026 की पूरी प्रक्रिया,लगत और लाभदायक क्षेत्र

🌾 एक नजर में

बिहार में सहकारी संस्था खोलने की सोच रहे हैं? इस गाइड में जानिए सदस्य संख्या, जरूरी दस्तावेज, पंजीकरण प्रक्रिया, लागत और सहकारी व्यवसाय के लिए सबसे बेहतर क्षेत्रों की जानकारी।

📌 मखाना • डेयरी • फल-सब्जी • मक्का • शहद • मत्स्य


बिहार में सहकारी संस्था का रजिस्ट्रेशन का पूरा प्रोसेस,लगने वाले दस्तावेज की जानकारी
बिहार में सहकारी संस्था का रजिस्ट्रेशन करने की पूरी प्रक्रिया और जानकारी 


 

प्रस्तावना (Introduction) 

अक्सर लोग पूछते हैं और जानना चाहते हैं कि क्या कोई भी सहकारी संस्था को खोल सकता है और यदि हां तो उसकी प्रक्रिया क्या है, क्या क्या कागजात लगते है और कैसे अप्लाई किया जाए।

इसी विषय को ध्यान में रखते हुए आज का यह लेख है।सबसे पहले बिहार में ही सहकारी संस्था को खोलने की प्रक्रिया पर बात की जाएगी।क्योंकि लगभग इसी तरह की प्रक्रिया हरेक राज्यों की है, बस थोड़ा बहुत अंतर है।

हां बहु-राज्यीय सहकारी संस्था को खोलने की प्रक्रिया अलग है।उसके बारे में अगली बार बात करेंगे।

बिहार में सहकारी संस्था का भविष्य बहुत ही उज्ज्वल भी है।क्योंकि यहां गांव और छोटे किसानों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सहकारी संस्थाओं की जरूरत है।

यहां किसान,पशुपालक,मछली उत्पादक, मधुमक्खी पालक,मखाना उत्पादक या ग्रामीण कारीगर अकेले उत्पादन तो करते हैं और बाजार में काम करते हैं। लेकिन उन्हें अक्सर छोटी उत्पादन मात्रा होने के कारण साथ ही कमजोर ब्रांडिंग, भंडारण की कमी और बिचौलियों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

यही काम यदि संगठित रूप से सहकारिता के माध्यम से किया जाए तो सामूहिक रूप से उत्पादन, भंडारण,खरीद, प्रसंस्करण, पैकेजिंग,ब्रांडिंग और बिक्री को आसानी से कर सकते हैं।

अब सवाल फिर से वही है कि बिहार में सहकारी संस्था को कैसे खोला जाए और किस क्षेत्र में खोलना ज्यादा फायदेमंद रहेगा ?

आइए इसे बिल्कुल शुरुआत से एक एक स्टेप और बारीकी से जानने का प्रयास करते हैं।

सहकारी संस्था क्या होती है ? 

सहकारी संस्था ऐसे लोगों का संगठन होती है जो किसी समान आर्थिक या सामाजिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए स्वेच्छा से मिलकर संस्था बनाते हैं और उसके माध्यम से सामूहिक आर्थिक गतिविधियां करते हैं।

इसका मूल विचार है कि --

"एक व्यक्ति अकेला कमजोर हो सकता है, लेकिन संगठित सदस्य सामूहिक रूप से मजबूत हो सकते हैं" 

यदि व्यक्ति एक सहकारी संस्था बनाकर 

उत्पादन ⇛संग्रहण⇛ग्रेडिंग⇛भंडारण ⇛प्रोसेसिंग⇛पैकेजिंग⇛मार्केटिंग 

को सामूहिक रूप से करने लगता है तो मूल्य श्रृंखला का बड़ा हिस्सा उसके नियंत्रण में आ जाता है।और साथ ही बहुत काम आसान हो जाती है।

बिहार में सहकारी संस्था किस कानून के तहत बनती है ? 

बिहार में सामान्य सहकारी समितियों के लिए जो प्रमुख कानून है वह इस प्रकार से है --
  • Bihar Co-operative Societies Act,1935
और 
  • Bihar Cooperative Societies Rules, 1959
इन दोनों कानूनों को बिहार में सहकारी संस्था खोलने में लागू किया जाता है।India Code के अनुसार 1935 का अधिनियम बिहार में सहकारी समितियों से संबंधित मुख्य राज्य कानून है।

इसी कानून को 1959 के नियम सहकारिता के गठन,संचालन,सदस्यता और इसके नियमों आदि की प्रक्रिया को विस्तार देते है।

इसके अतिरिक्त बिहार में Bihar Self - Supporting Co-operative Societies Act, 1996 के द्वारा भी एक अलग कानूनी ढांचा को प्रदान किया गया है। इसीलिए संस्था का मॉडल तय करने से पहले यह देखना जरूरी हो जाता है कि आपके प्रस्तावित व्यवसाय के लिए कौन सा ढांचा सबसे उपयुक्त है।

बिहार में सहकारी संस्था के लिए कितने सदस्य चाहिए ? 


यह सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक सवाल है।

Bihar Co-operative Societies Act की धारा 8 के अनुसार सामान्यतया ऐसी समितियों में कम से कम 10 व्यक्ति होने चाहिए और जिनकी आयु भी कम से कम 18 वर्ष की होनी चाहिए। हां कुछ विशेष वर्गों के लिए सरकार अधिसूचना द्वारा इसके न्यूनतम संख्य में परिवर्तन कर सकती है।

साथ ही अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि आवेदन पर हस्ताक्षर करने वाले यह 10 व्यक्ति अलग अलग परिवारों से होने चाहिए।

सबसे अच्छा व्यवहारिक क्या रहेगा ?

सबसे अच्छा व्यवहारिक मॉडल यह रहेगा कि यदि आप किसान सहकारी संस्था को बना रहे है तो शुरुआत में ही 10 सदस्यों की जगह कम से कम 25-50 सदस्यों जो केवल नाम का नहीं बल्कि सक्रिय सदस्य हो -- से करना सबसे अच्छा रहेगा।


तय कीजिए:आप किस तरह का सहकारी संस्था खोलना चाहते है ? 

यह सहकारी संस्था खोलने या उसका रजिस्ट्रेशन करने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

क्योंकि गलत बिजनेस मॉडल वाली सहकारी संस्था का रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी असफल होने का संभावना हो सकता है।

बिहार में 2026 के लिए संभावित क्षेत्रों को एक विश्लेषणात्मक अनुमान के आधार पर इस प्रकार से तालिका में देखा जा सकता है --

आप किस क्षेत्र में सहकारी संस्था खोलना चाहते हैं?

बिहार में 2026 के लिए संभावित सहकारिता क्षेत्र एवं प्राथमिकता

क्षेत्र संभावित अवसर प्राथमिकता
मखाना उत्पादन, processing, packaging, branding, export ⭐⭐⭐⭐⭐
डेयरी दूध collection, chilling, dairy products ⭐⭐⭐⭐⭐
फल-सब्जी collection, grading, cold chain, processing ⭐⭐⭐⭐⭐
मक्का feed, starch, processing ⭐⭐⭐⭐⭐
शहद honey collection, processing, branding ⭐⭐⭐⭐
मत्स्य fish production, seed, feed, marketing ⭐⭐⭐⭐
बीज seed production एवं processing ⭐⭐⭐⭐
औषधीय/सुगंधित पौधे cultivation + processing ⭐⭐⭐⭐
मशरूम production + processing ⭐⭐⭐⭐
चाय production + processing, खासकर किशनगंज ⭐⭐⭐
💡 नोट: यह ranking किसी सरकारी "best sector" सूची का दावा नहीं है, बल्कि बिहार के उपलब्ध सरकारी कार्यक्रमों, उत्पादन क्षमता और value-addition opportunities के आधार पर व्यावसायिक विश्लेषण है।

 

बिहार में मखाना सहकारी संस्था क्यों बहुत बड़ा अवसर हो सकता है ? 

यह बिहार की सबसे विशिष्ट "एग्रीकल्चर वैल्यू चैन" वाला देश विदेश में प्रसिद्ध और लोकप्रिय खाद्य पदार्थ है।

बिहार सरकार ने 2025-26 में मखाना क्षेत्र के विस्तार के लिए 16 जिलों में विशेष योजना को लागू किया है। इसमें खेत प्रणाली में मखाना खेती,उन्नत बीज,उपकरण और अन्य सुविधाओं को शामिल किया गया है।

अभी वर्ष 2026-27 के लिए National Makhana Board के तहत योजन में मखाना की खेती के साथ साथ -- उत्पादन,बीज, प्रशिक्षण, पोस्ट हार्वेस्टिंग मैनेजमेंट,प्रोसेसिंग,ब्रांडिंग,मार्केटिंग,निर्यात और सर्टिफिकेशन जैसी पूरी की पूरी वैल्यू चैन पर जोर दिया गया है।

अतः बिहार में इन सभी योजनाओं का लाभ उठाते हुए मखाना सहकारिता संस्था को खोलना एक सही कदम हो सकता है।

सबसे बड़ी बात यह है कि बिहार के मखाना को GI Tags भी मिला हुआ है जिससे यह देश विदेश में भी लोकप्रिय हो चुकी है।इसका फायदा उठाने का मौका मिल जाएगा।


बिहार में मखाना आधारित सहकारी संस्था खोलना अधिक संभावना वाला क्षेत्र साबित हो सकता है
बिहार में मखाना आधारित सहकारी संस्था खोलना अधिक संभावना वाला क्षेत्र साबित हो सकता है 


डेयरी सहकारी संस्था भी बिहार के लिए सबसे मजबूत मॉडल 


डेयरी के क्षेत्र में बिहार में पहले से भी सहकारी संस्था और ढांचा विकसित हो चुका है।फिर भी यह बिहार में सहकारिता के लिए एक सबसे मजबूत संभावित मॉडल में से एक बना हुआ है।

राज्य के Dairy Development Directorate के अनुसार गांव स्तर पर Milk Cooperative Societies के संगठन और रजिस्ट्रेशन,जिला स्तर पर मिल्क यूनियन,मिल्क कलेक्शन,प्रोसेसिंग और मार्केटिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बिहार सरकार के "Dairy, Fisheries and Animal Resources Department" के अनुसार राज्य में वर्तमान समय में दूध का उत्पादन 128.30 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष है।इसको बढ़ाकर वर्ष 2028 तक 159.9 लाख मीट्रिक टन  तक ले जाने का लक्ष्य को रखा गया है।

इसी तरह Milk Processing Capacity को भी बढ़ने का लक्ष्य रखा गया है।इसलिए डेयरी सहकारी संस्था के लिए केवल दूध बेचने तक ही सीमित अवसर नहीं हैं।बल्कि इसका प्रोसेस करके अन्य उत्पादों को भी मार्केटिंग करने का अवसर है।



फल और सब्जी सहकारी संस्था 


बिहार में फल और सब्जी आधारित सहकारिता संस्था काफी मजबूत हो सकता है।क्योंकि यहां फल और सब्जियों का उत्पादन तो अच्छा होता है, लेकिन उत्पादन के बाद का प्रक्रिया कमजोर है।

किसानों की सबसे बड़ी समस्या उत्पादन के बाद --

कटाई के बाद का नुकसान + सही ग्रेडिंग करने की समस्या + मार्केट लिंकेज + सही कीमत की समस्या

इन सब सुविधाओं की कमी है।

वर्ष 2025-26 की बिहार सरकार के Horticulture Scheme में सब्जियां,क्लस्टर आधारित सब्जियों का उत्पादन और उच्च तकनीक बागवानी जैसी गतिविधियों पर जोर प्रदान किया गया है।

इस मॉडल में यदि बिहार में सहकारिता की शुरुआत की जाती है तो सफलता की काफी संभावना बन सकती है।



बिहार में Horticulture Value Chain में आम और लीची का विशेष महत्व है।बिहार के जर्दालू आम और मुजफ्फरपुर की लीची को GI Tags भी मिला हुआ है और ये पूरी दुनियां में मशहूर है।

वर्ष 2025-26 की राज्य की योजना में आम का क्षेत्र विस्तार सभी 38 जिलों में और लीची का विस्तार मुज्जफरपुर,भागलपुर,पूर्वी चंपारण,समस्तीपुर,शिवाल और वैशाली जिलों के लिए विशेष उल्लेख किया गया है।

इसलिए इन क्षेत्रों में "Fruit Growers Cooperative Society" का मॉडल विशेष उपयोगी और सफल हो सकता है।

मक्का आधारित सहकारी संस्था 


बिहार में मक्का को केवल अनाज के रूप में बेचने की जगह इसका प्रोसेसिंग करके मूल्य संवर्धन उत्पादों और फीड इंडस्ट्री से भी जोड़ा जा सकता है।

बिहार सरकार की Agri Investment Promotion Policy में मक्का को विशेष फोकस वाले क्षेत्र में रखा गया है।इस नीति में Cattle Feed,Fish Feed, Poultry Feed,Corn flakes,Corn Grits,Corn Starch तथा Post Hsrvesting Infrastructure का उल्लेख किया गया है।

इसलिए मक्का उत्पादक किसान मिलकर इससे संबंधित सहकारी संस्था की शुरुआत कर सकते हैं और आगे चलकर प्रोसेसिंग यूनिट को भी खोल सकते हैं।

मक्का और इसके जैसे अन्य मोटे अनाज (Millets) को भारत सरकार भी पूरे विश्व भर में प्रचारित कर रही है।इसे श्री अन्न के रूप में भी पेश किया जा रहा है।


मधुमक्खी पालन सहकारी संस्था 

बिहार में मधुमक्खी पालन एक अच्छा संभावनाशील क्षेत्र है।राज्य की Agri Investment Promotion Policy में Honey को भी फोकस सेक्टर में रखा गया है।

इसमें प्रोसेस्ड honey के अलावा Bee Wax, Propolis,Pollen,Royal Jelly और अन्य Value Added प्रोडक्ट्स के बारे में बताया गया है।

इसलिए केवल शहद बेचने के बजाए इसका प्रोसेसिंग,पैकेजिंग और वैल्यू एडेड ब्रांड का मॉडल बनाया जा सकता है।


मत्स्य सहकारी संस्था का भविष्य 

बिहार में मत्स्य पालन भी एक मजबूत सहकारिता अवसर हो सकता है।

राज्य Fisheries डायरेक्टरेट का वर्तमान लक्ष्य मत्स्य उत्पादन और उसके उत्पादकता को बढ़ाना Aquaculture को आधुनिक तकनीकों से विकसित करना तथा मार्केटिंग को मजबूत करना है।

वर्ष 2026-27 में राज्य की Fisheries Schemes के लिए आवेदन को आमंत्रित किया जा रहा है और विभाग Biofloc Technology तथा Prawan Culture जैसी नई पहलों को भी सूचीबद्ध कर रहा है।

अतः यदि पूरी प्लानिंग के साथ मत्स्य पालन में सहकारिता संस्था को बिहार में शुरू किया जाए तो यह आपके लिए एक सही विकल्प हो सकता है।

बीज उत्पादन सहकारी संस्था 

किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हमेशा से ही रहा है।यदि इसको साफी तरीकों से अपनाया जाए तो ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण सहकारी संस्था का विकल्प हो सकता है।

बिहार राज्य की Agri Investment Promotion Policy में बीज(Seed ) को भी फोकस सेक्टर में शामिल किया गया है।साथ ही Seed Processing के लिए अवसर को भी बताया गया है।

ऐसी सहकारी संस्था -- Certified Seeds Production,Seeds Cleaning,Grading, Processing,Packging और लोकल डिस्ट्रिब्यूशन पर भी काम किया जा सकता है।

हां इसमें एक बात ये ध्यान रखना होगा की Regulatory Satanderds और Certification का पालन आपको हमेशा करना होगा। यदि आप ऐसा करते हैं तो आपकी सफलता सुनिश्चित है।


अब जानते हैं:बिहार में सहकारी संस्था खोलने की पूरी प्रक्रिया 


बिहार में सहकारिता आंदोलन तेजी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और नए बिजनेस मॉडल की रीढ़ बनता जा रहा है और उतना ही ज्यादा भविष्य में और भी विकास करने की संभावना है।

बिहार सरकार के सहकारिता विभाग ने  e -Sahkari पोर्टल के माध्यम से सहकारी समितियों के पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है।

बिहार में सहकारी समिति शुरू करने के लिए 2026 की अद्यतन प्रक्रिया,दस्तावेज,अनुमानित लगत और स्टेप बाय स्टेप प्रॉसेज को नीचे दिया गया है --

स्टेप 1. आवश्यक दस्तावेज (Required Documents) 

ई - सहकारी पोर्टल के अनुसार पंजीकरण के लिए निम्नलिखित कागजात डिजिटल प्रारूप में तैयार रखने होते हैं --

  • उप विधियां (Bye - Laws): यह समिति के नियमों का लिखित दस्तावेज होता है जो समिति के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर से युक्त होने चाहिए।
  • प्रवर्तक सदस्यों की आमसभा का प्रारूप: यह इसकी पहली बैठक की सत्यापित कार्यवाही विवरणी होती है।
  •  मुख्य प्रवर्तक का शपथ पत्र: विहित प्रपत्र में नोटरी द्वारा सत्यापित एफिडेविट होता है।
  •  कार्यालय का प्रमाण और किरायानामा: इसमें ₹1,000 के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर रेंट एग्रीमेंट या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट होता है।
  • घोषणापत्र एवं आवेदन: सभी प्रवर्तक सदस्यों का सदस्यता आवेदन पत्र और नोटरी द्वारा सत्यापित शपथ पत्र होता है।
  • सदस्यों का पहचान पत्र: सभी सदस्यों का आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी होता है।
  • सरकारी चालान: निबंधन शुल्क भुगतान की ई - चालान रशीद।

आप सबसे पहले इन सभी दस्तावेजों को क्रमबद्ध तरीकों से नियमों के अनुसार तैयार कर लीजिए।

 

स्टेप 2. उद्देश्य तय कीजिए 

सबसे पहले आप एक वाक्य में लिखिए -- "हम यह सहकारी संस्था क्यों बना रहे हैं ?"

उदाहरण के लिए "इस संस्था का उद्देश्य क्षेत्र के मखाना उत्पादक किसानों को संगठित करके मखाना उत्पादन,संग्रह,प्रोसेसिंग, पैकेजिंग,ब्रांडिंग और मार्केटिंग के माध्यम से बेहतर मुख्य दिखाना है"


स्टेप 3. कार्यक्षेत्र तय कीजिए 

अब आपको यह तय करना है कि आप किस किस क्षेत्र में अपने काम की शुरुआत करेंगे --

  • क्या आप शुरुआत एक ही गांव से करना चाहते हैं।
  • क्या आप कई गांवों से शुरुआत करना चाहते हैं।
  • की आप एक पूरे ब्लॉक स्तर से शुरुआत करना चाहते हैं।
  • या आओ जिला स्तर से ही शुरुआत करेंगे।
कार्यक्षेत्र ऐसा चुनना चाहिए जहां वास्तविक रूप से आपके लिए पर्याप्त सदस्य और उत्पादन के साधन उपलब्ध हो।

स्टेप 4. कम से कम 10 पात्र सदस्य को तैयार कीजिए 

चूंकि Bihar Co-operative Societies Act के अनुसार सामान्य शर्त के हिसाब से कम से कम 10 वयस्क सदस्य आवश्यक होते हैं।साथ ही ये आवेदक एक परिवार से न होकर अलग अलग परिवार से होने चाहिए।

अतः सबसे अच्छा व्यवहारिक यह रहेगा कि आप 10 के जगह कम से कम 25 से अधिक सदस्यों जो करीब 50 के लगभग हो और जो सक्रिय हो सहकारिता के काम जो करने के लिए।इसने साथ आप शुरुआत कीजिए।


स्टेप 5. संस्था का नाम चुनिए 

नाम ऐसा चुनिए जो --

  •  जो संस्था के उद्देश्य से संबंधित हो।
  • किसी दूसरे रजिस्टर्ड संस्था के नाम के साथ भ्रम पैदा न करे।
  • भविष्य के विस्तार के लिए उपयोगी हो।
  • क्षेत्र विशेष की पहचान को समाहित करता हो।
उदाहरण के लिए --"मिथिला मखाना उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड" 

या "शाहाबाद मक्का उत्पादक संघ सहकारी समिति लिमिटेड"

सीमित दायित्व वाली समिति के संबंध में नाम में Limited शब्द संबंधी वैधानिक प्रावधान अधिनियम में दिया गया है।

स्टेप 6. चीफ प्रोमोटर और प्रमोटर टीम बनाईये 

संस्था बनाने की शुरुआती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रमोटर एवं प्रमोटर समूह बनाया जाता है।ये समूह अपनी प्रारंभिक बैठके करके आगे की योजना और प्रक्रिया को बढ़ाते हैं।

ये प्रमोटर समूह सदस्यों को जुटाने,प्रस्ताव तैयार करने,Bye- Laws तैयार करने, डॉक्यूमेंट्स तैयार करने और रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन को आगे बढ़ाने का काम शुरू करते हैं।


स्टेप 7. प्रमोटर्स की बैठक कीजिए

प्रमोटर और चीफ प्रोमोटर बनने के बाद सबसे पहले इनकी बैठक होती है।इस बैठक में होने वाले निर्णय के आधार पर ही आगे की सभी गतिविधियां की जाती है।


स्टेप 8. उपविधि (By - Laws) तैयार कीजिए

उपविधि यानी By -Laws संस्था की Rule Book यानी संविधान होती है। इसमें सामान्यतः निम्नलिखित चीजें शामिल होती है --

  • संस्था की पहचान: इसमें मुख्य रूप से संस्था का नाम,पता और उसका कार्यक्षेत्र होता है।
  • उद्देश्य: संस्था क्या करेगी ? इसके पास कौन कौन से उत्पाद और सेवाएं आदि होगी।
  • सदस्यता: इसके सदस्य कौन बन सकता है ? सदस्य बनाने की प्रक्रिया क्या होगी और सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया क्या होगी आदि।
  • शेयर पूंजी: एक सदस्य कितने शेयर ले सकता है,शेयर का मूल्य क्या होगा,शेयर कैपिटल की व्यवस्था कैसे होगी।
  • प्रबंधन: जनरल बॉडी,प्रबंधक समिति, पदाधिकारी,बैठक,चुनाव और मतदान आदि।
  • वित्त: आय,व्यय,रिजर्व,सरप्लस और प्रॉफिट एवं उसका वितरण आदि।
  • लेखांकन और ऑडिट: पूरी प्रक्रिया की जानकारी।
  • विवाद समाधान: तरीका,क्षेत्र आदि।
  • संस्था के विघटन की प्रक्रिया: की पूरी जानकारी।

स्टेप 9. प्रारंभिक पूंजी की व्यवस्था कीजिए 

पूंजी की व्यवस्था को थोड़ा स्पष्ट करके समझते हैं ।एक तो पूंजी चाहिए आपको संस्था का रजिस्ट्रेशन करने के लिए जो सरकार के द्वारा जो भी निर्धारित फीस लगता है।इसके साथ ही अन्य कागजी प्रक्रिया आदि में जो खर्च लगता है।

दूसरी है बिजनेस शुरू करने के लिए आवश्यक कुल पूंजी।जैसे प्रोसेसिंग यूनिट्स और मिशनरीज,बिल्डिंग और किराया,बिजली बिल और पैकिंग मैटेरियल आदि।

इसके साथ ही कुछ वर्किंग कैपिटल भी चाहिए होता है।ताकि काम निरंतर जारी रहे। शुरुआत में एक छोटा ही बिजनेस प्लान का DPR बनाना चाहिए ताकि कम पूंजी में भी शुरुआत हो जाए।

आगे चलकर और पूंजी लगाकर काम को बढ़ा सकते हैं।


स्टेप 10. Registration Application तैयार कीजिए 

Bihar Co-operative Societies Act 1959 के नियम 3 के अनुसार Registration Application Form l में किया जाता है।

इसके साथ By -Laws की प्रतियां और Organizer की Report आदि दस्तावेजों को भी जमा किया जाता है।


स्टेप 11. आवेदन को Registrar के ऑफिस में जमा कीजिए 

Registration Application को संबंधित Registrar of Co-operative Societies के पास प्रस्तुत किया जाता है।

या आप चाहे तो बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट esahkari.bihar.gov.in पर विजित करे और New Registration पर क्लिक करके मुख्य प्रवर्तक के नाम और मोबाइल नंबर के OTP वेरिफाई करके एक यूजर अकाउंट बना लीजिए।

अब पोर्टल में लॉगिन करके पूरे विवरण को भर दिए।इसके बाद सभी संबंधित दस्तावेजों को अपलोड कर दीजिए।


स्टेप 12. Registrar दस्तावेजों की जांच करेगा 

जब आप पोर्टल के अनुसार निर्धारित शुल्क का चालान को जमा कर देते हैं।उसके बाद 1959 के Rule 2 के अनुसार रजिस्ट्रार आपके एप्लिकेशन और संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच करेगा।

वह देखेगा कि --

  • आवेदन कानून के अनुरूप है या नहीं है।
  • Bye-laws कानून के अनुरूप है कि नहीं है।
  • आवश्यक जानकारी उपलब्ध है या नहीं है।
यदि उसे कोई और दस्तावेज आदि यदि जरूरी लगे तो मांग सकता है।या अतिरिक्त जानकारी या संशोधन का प्रस्ताव रख सकता है।

स्टेप 13. Registration Certificate प्राप्त कीजिए 

यदि Registrar या अन्य संबंधित अधिकारी यदि संतुष्ट हो जाता है कि संस्था और उसका Bye- Laws लागू कानून और नियमों के अनुरूप है तो रजिस्ट्रेशन सफल किया जाता है और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को जारी किया जाता है।

1959 के नियम में Registration Certificate के लिए Form IV का उल्लेख है।इसके मिलने के बाद अब आपको सहकारी संस्था का दर्जा मिल जाता है।


स्टेप 14. रजिस्ट्रेशन के बाद क्या करना होगा 

रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद अब कुछ हो नहीं गया है।क्योंकि यह तो अब शुरुआत है।

इसके बाद अब संस्था को व्यवस्थित रूप से --

  • Bank Account 
  • PAN 
  • Accounting System 
  • Books of Accounts 
  • General Body 
  • Managing Committee 
  • Audit
  • Annual Compliance 
जैसे सभी कामों को दुरुस्त करने होंगे।आपको अपनी संस्था को पूरी तरह से कानून के अनुरूप चलाना होगा।

सहकारी संस्था को खोलने की पूरी जानकारी स्टेप बाय स्टेप
सहकारी संस्था के लिए रजिस्ट्रेशन के लिए सदस्यों की बैठक 


अनुमानित लागत और सरकारी फीस 

आपको संस्था का शुरुआत करने के लिए लागत आपके संस्था के प्रकार,रूप,उद्देश्य और लक्ष्य आदि पर निर्भर करता है। फिर भी पूरा प्रोसेस बढ़िया से समझ में आ जाए इसके लिए एक संभावित अनुमानित लागत की जानकारी भी जरूरी है।

अनुमानित लागत को आप निम्न सारणी से समझ सकते हैं --

अनुमानित लागत और सरकारी फीस (Estimated Cost & Fees)

सहकारी समिति पंजीकरण एवं प्रारंभिक संचालन व्यय विवरण

मद (Head) अनुमानित लागत (INR) विवरण
सरकारी निबंधन शुल्क (Govt Fee) ₹1,000 - ₹5,000 संस्था के प्रकार व कार्यक्षेत्र (पंचायत/जिला) के अनुसार निर्धारित ट्रेजरी चालान।
स्टाम्प पेपर व नोटरी व्यय ₹1,500 - ₹2,500 ₹1,000 का किरायानामा स्टाम्प + एफिडेविट व नोटरी चार्ज।
ड्राफ्टिंग व स्टेशनरी व्यय ₹2,000 - ₹4,000 उपविधियों की छपाई, रजिस्टर और फाइलिंग खर्च।
प्रारंभिक शेयर कैपिटल (Capital) ₹10,000 - ₹50,000+ यह सदस्यों द्वारा जमा की जाने वाली कार्यशील पूंजी है (लागत नहीं, बल्कि समिति का फंड)।


अतः यह कहा जा सकता है कि यदि आप सही में सहकारी संस्था को एक भविष्योन्मुखी सोच के साथ शुरू करना चाहते हैं तो यह 50,000 के लगत में शुरू हो सकता है।

लेकिन यदि आप और भी बड़े स्तर पर काम शुरू करना चाहते हैं तो लगत बढ़ सकती है।

सहकारी संस्था केवल रजिस्ट्रेशन का नाम नहीं है 


बहुत से लोग सोचते हैं कि --

"अब समिति बना ली है,सरकार से पैसा मिलेगा और व्यवसाय चल जाएगा"

और यदि आप भी ऐसा सोच रहे हैं तो आप ग़लतफहमी में है।क्या आप केवल सरकार से सब्सिडी या पैसा के लिए संस्था को खोले थे।या आप इसके सदस्यों को लाभ और सुविधा प्रदान करने के लिए एक अच्छा बाजार और ब्रांड बनाने के लिए खोले थे।

आपको अब इस पर काम करना चाहिए और संस्था को अपने राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश में एक महत्वपूर्ण ब्रांड बनानी चाहिए।जो आगे चलकर ग्लोबल पहचान को भी हासिल कर सके।

निष्कर्ष (Conclusion) 

बिहार में सहकारी संस्था को खोलना केवल एक कानूनी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ही नहीं है बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सामूहिक व्यवसाय में बदलने का एक सशक्त माध्यम है।

आप कानूनी रूप से लेख में बताए गए तरीकों से इसका रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। लेकिन सफलता का असली स्वाद रजिस्ट्रेशन नहीं बल्कि बिजनेस मॉडल है।

बिहार की वर्तमान कृषि एवं संबंधित व्यवसाय को देखते हुए मखाना,डेयरी,फल सब्जी,मक्का,शहद और प्रमाणित बीज के क्षेत्र में सहकारिता संस्था की अच्छी संभावना दिखाई देती है।

आप सबसे पहले अपने क्षेत्र की बाजार को देखिए पहचानिए और फिर सदस्यता तैयार कीजिए और बिजनेस मॉडल पर चर्चा कीजिए।और फिर एक नई सहकारी संस्था का शुरुआत कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)

1. बिहार में सहकारी संस्था खोलने के लिए कम से कम कितने सदस्य होने चाहिए ?

सामान्यतया बिहार में सहकारी संस्था के पंजीकरण के लिए कम से कम 10 व्यक्ति जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो आवश्यक है।आवेदन पर हस्ताक्षर करने वाले सदस्य अलग अलग परिवार से होने चाहिए।

2. बिहार में सहकारी संस्था का पंजीकरण किस कानून के तहत होता है ?

बिहार में सामान्य सहकारी समितियों का पंजीकरण मुख्यतः Bihar Co-operative Societies Act 1935 और Bihar Co-operative Societies Rules 1959 के तहत होता है।विशेष प्रकार की सहकारी संस्था के लिए अन्य कानून वी नियम भी लागू हो सकता है।

3. सहकारी संस्था के पंजीकरण के लिए कौन कौन सी दस्तावेज होने चाहिए ?

मुख्य दस्तावेजों में पंजीकरण आवेदन, प्रस्तावित Bye-laws, सदस्यों की सूची, सदस्यों का पता/व्यवसाय और share participation का विवरण तथा प्रथम Board से संबंधित जानकारी शामिल हो सकती है। 1959 के नियमों के अनुसार registration application Form I में किया जाता है और Bye-laws की निर्धारित प्रतियां तथा organiser की report भी देनी होती है।

4. बिहार में सहकारी संस्था का पंजीकरण कहां कराया जाता है ?

सहकारी संस्था के रजिस्ट्रेशन का आवेदन Registrar of Co-operative Societies के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।Registrar आवेदन,Bye-Laws और अन्य दस्तावेजों की जांच करता है।और आवश्यकता पड़ने पर और दस्तावेज, जानकारी या संशोधन को मांग सकता है।

5. क्या किसान मखाना,डेयरी,मक्का,सब्जी और फल,शहद,मछली पालन और प्रमाणित बीज आदि के लिए सहकारी संस्था को खोल सकता है ?

हाँ। किसानों और उत्पादकों के लिए कृषि, डेयरी, मत्स्य, horticulture, मखाना, शहद तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों से संबंधित सहकारी संस्थाएं बनाई जा सकती हैं, बशर्ते उनका उद्देश्य और Bye-laws लागू कानून एवं संबंधित क्षेत्र के नियमों के अनुरूप हों। बिहार में संस्था बनाने से पहले स्थानीय उत्पादन, सदस्य संख्या और बाजार की मांग का अध्ययन करना सबसे जरूरी है।

6. क्या सहकारी संस्था बनने या खोलने के बाद सरकार से सब्सिडी या पैसा मिलता है ?

सिर्फ सहकारी संस्था का रजिस्ट्रेशन करा लेने से स्वतः सब्सिडी या पैसा नहीं मिल जाता है।बल्कि अलग-अलग सरकारी योजनाओं में पात्रता, project type, सदस्यता, निवेश, infrastructure और अन्य शर्तों के आधार पर सहायता मिल सकती है। इसलिए registration के साथ-साथ संबंधित विभाग की वर्तमान योजना और eligibility criteria भी जांचना चाहिए।

7. बिहार में कौन कौन से सहकारी संस्था को खोलना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है ?

एक ही जिले के लिए सभी क्षेत्रों के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक नहीं कहा जा सकता है।स्थानीय संसाधन और बाजार के आधार पर मखाना,डेयरी,फल सब्जी,शहद,मक्का, मत्स्य और प्रमाणित बीज उत्पादन जैसे क्षेत्रों में अच्छी संभावना हो सकती है।सबसे अच्छा क्षेत्र को चुनने के लिए कच्चा मॉल,किसानों की संख्या,बाजार,प्रोसेसिंग की संभावना और वर्किंग कैपिटल की जरूरत का विश्लेषण कर लेना चाहिए।

8. क्या 10 सदस्य को जुटाकर तुरंत सहकारी संस्था को शुरू कर देना चाहिए ?

कानूनी न्यूनतम सदस्य संख्या पूरी होना और सफल व्यवसाय शुरू करना दो अलग बातें हैं। 10 सदस्य registration की सामान्य न्यूनतम शर्त हो सकती है, लेकिन व्यावसायिक सहकारी संस्था के लिए अधिक संख्या में सक्रिय सदस्य, स्पष्ट Business Plan, बाजार की पहचान, पर्याप्त working capital और पारदर्शी प्रबंधन व्यवस्था रखना अधिक सुरक्षित है।

संबंधित विषय:


📚 स्रोत एवं संदर्भ
ℹ️ लेख में दी गई कानूनी एवं सरकारी जानकारी संबंधित आधिकारिक स्रोतों के आधार पर संकलित की गई है। नियमों/योजनाओं में समय के साथ बदलाव संभव है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

AI खेती 2035: आने वाले 10 सालों में कैसे बदलेगी भारतीय कृषि ?

क्या आप भी बनना चाहते है "फॉरेंसिक साइंस मे एक्सपर्ट " कैसे जानिए पूरी प्रोसेस

भारत का LiFE पहल:कैसे वैदिक जीवनशैली से पर्यावरण सुरक्षा को प्रेरित करती है

स्वस्थ्य रहने के लिए भोजन के 10 नियम:सही तरीके से क्या,कब और कैसे खाए ?

Zero Budget Natural Farming : क्या सच में 1 गाय से 30 एकड़ खेती संभव है ? जानिए पूरा सच

भारत मे अब E20 Petrol,BS6 और Flax Engine Tractor ये तीन बड़ी टेक्नोलॉजी 2026 मे खेती को कैसे बदल देगी?

स्वदेशी और स्वावलम्बन:घर पर दंत-मंजन बनाने का लघु व्यवसाय कैसे शुरू करे?

Redox Flow Battery क्या है और यह एनर्जी स्टोरेज की दुनिया को कैसे बदलेगी?

क्या PM कुसुम योजना मार्च 2026 के बाद बंद हो रही है ? जानिए पूरी सच्चाई (Fact Check)

PFAS क्या है ? "फॉरेवर केमिकल्स"(Forever Chemicals) के दुष्प्रभावों से बचने हेतु समय रहते करना होगा प्रयास