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Redox Flow Battery क्या है और यह कैसे काम करती है? जानिए इसके फायदे,नुकसान,उपयोग और Renewable Energy Storage मे इसकी भूमिका
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| Redox Flow Battery -AI Generated Image |
प्रस्तावना
इस बढ़ते रेन्युवल एनर्जी के उत्पादन ने इससे उत्पन्न ऊर्जा को स्टोर करने की चुनौती पैदा कर दी है। क्योंकि वर्तमान मे इसको स्टोर करने के लिए लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग किया जा रहा है जिसकी अपनी सीमाएं है और बड़े स्तर पर ऊर्जा का भंडारण इससे संभव नहीं हो पा रही है।
ऐसी स्थिति मे रेडॉक्स फ्लो बैटरी वरदान के रूप मे नजर आ रही है। दुनिया के कई देशों मे जैसे चीन और अमेरिका मे इसका तेजी से प्रचालन बढ़ रहा है। और आनेवाले दिनों मे भारत मे भी इसका प्रचालन तेजी से बढ़ने वाला है। ऐसी स्थिति मे इसके बारे मे जानकारी होना हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है।
रेडॉक्स फ्लो बैटरी(Redox Flow Battery)क्या है ?
रेडॉक्स फ्लो बैटरी एक तरह की रिचार्जेवल बैटरी ही होती है जिसमें ऊर्जा को स्टोर करने के लिए दो तरल रसायनों (Electrolytes) का इस्तेमाल किया जाता है। आम बैटरी जिसमे सबसे ज्यादा प्रचलित लिथियम-आयन बैटरी के मुकाबले इसका डिजाइन थोड़ा अलग और बड़े स्तर का होता है।
Redox शब्द दो प्रक्रियाओ से मिलकर बना है "Reduction(अपचयन) + Oxidation(आक्सीकरण)" इन दोनों रासायनिक क्रियाओ के माध्यम से इलेक्ट्रानो का आदान प्रदान होता है जिससे बिजली उत्पन्न होती है।
1. रेडॉक्स फ्लो बैटरी काम कैसे करती है
- दो टैंक होता है: इसमे दो बड़े टैंक होते है जिनमे अलग अलग तरल "Electrolytes" भरे होते है -जिनमे एक पॉजिटिव और एक निगेटिव होता है।
- सेंट्रल सेल: ये तरल रसायन टैंक से पंप के द्वारा एक सेंट्रल सेल स्टैक मे जाता है।
- आयन एक्सचेंज: सेल स्टैक के बीच मे एक मेम्ब्रेनस यानि पर्दा होता है। जब तरल रसायन वहां से गुजरता है तो इलेक्ट्रान का एक्सचेंज होता है जिससे बिजली बनती है और स्टोर होती है।
- Vanadium Redox Flow Battery: इसमें वैनाडियम आधारित इलेक्ट्रान का प्रयोग किया जाता है।
- Zinc-Bromine Flow Battery: जिसमे जिंक और ब्रोमीन का उपयोग होता है।
- Iron Flow Battery: जो आयरन पर आधारित होता है।
- मापनीयता (Scalability): इस सिस्टम मे ये खूबी है की यदि आपको ज्यादा एनर्जी पाने के लिए आप टैंक का साइज़ बड़ा कर सकते है या तरल रसायन की मात्रा को बढ़ाकर भी आप एनर्जी ज्यादा पैदा कर सकते है। इसमे "पावर"(Cell Stack) और "एनर्जी"(Tank Size) दोनों को अलग अलग कंट्रोल किया जा सकता है।
- लंबे समय तक उपयोगी: जहां 'लिथियम-आयन बैटरी' कुछ सालों मे खराब होने लगती है वही पर 'रेडॉक्स फ्लो बैटरी' 20 सालों से भी ज्यादा चल सकती है क्योंकि इनके रसायन जल्दी डिग्रैड नहीं होते है।
- बहुत ही सुरक्षित: इस बैटरी की सबसे बड़ी खूबी यह भी है की इनमे आग लगने की संभावना ना के बराबर होती है।क्योंकि इसमे उपयोग किया जानेवाला तरल अक्सर नॉन फ्लैमबल होता है।
- डीप डिस्चार्ज: आप इसे पूरी तरह से खाली (0%)कर सकते है और वो भी बिना बैटरी को नुकसान पहुंचाए।
- जहां लिथियम बैटरी 2-4 घंटे का बैकअप देती है वही Rfb's 10-12 घंटे या उससे भी ज्यादा देर तक बैकअप दे सकती है।
- रेडॉक्स फ्लो बैटरी की एक और खूबी ये है की -- "जब इसका तरल डिस्चार्ज हो जाय तो इस तरल को आप बाहर निकाल कर नया चार्ज किया हुआ तरल उसमे डाल सकते है इससे बैटरी तुरंत 100% चार्ज हो जाएगी"
- आईआईटी मद्रास: यहा वानाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी का स्वदेशी रूप विकसित किया गया है। इनका फोकस भारतीय जलवायु के हिसाब से विकसित करने और इसे सस्ता बनाने पर है।
- आईआईटी दिल्ली और आईआईएससी बैंगलुरु: ये संस्थान इसके नॉन जलीय और ऑर्गैनिक फ्लो बैटरी बनाने पर काम कर रहे है ताकि इसकी लागत को और कम किया जा सके।
- डेलेक्ट्रिक सिस्टम (Delectric System): ये गुरुग्राम की स्टार्टर कंपनी है जो वानाडियम फ्लो बैटरी बनाती है। इसकी यूनिट भारत के अलावा अमेरिका,आस्ट्रेलिया और यूरोप मे भी है। इसका सिस्टम 10 kw से लेकर मेगावाट तक काम कर सकता है।
- एल & टी: लर्सन एण्ड टूब्रो ने रेन्युवल एनर्जी के क्षेत्र मे ऊर्जा भंडारण मे दिलचस्पी दिखते हुए ग्लोबल टाईअप पर काम कर रही है।
- वानाडियम की खोज: भारत वानाडियम के मामले मे आयात पर निर्भर है। लेकिन जियॉलॉजीकल सर्वे ऑफ इंडिया ने अरुणाचल प्रदेश मे वानाडियम के भंडार की खोज कर दी है। इसका उत्पादन शुरू होने के बाद भारत वानाडियम के मामले मे आत्मनिर्भर हो जाएगा और यह सस्ता भी उपलब्ध होने लगेगा।
- जगह: फ्लो बैटरी मे दो बड़े तरल टैंक होते है। इसके लिए घर मे छोटा सा स्टोर रूम या गैराज होना चाहिए जहां इसे लगाया जा सके।
- सुरक्षा: इसमे आग लगने का डर नहीं रहता है। शॉर्ट शार्किट मे भी नहीं।
- जीवन काल: कम से कम 20-25 सालों तक ये आसानी से चल जाती है।
- डिस्चार्ज की संभावना: डिस्चार्ज होने से डरने की जरूरत नहीं पड़ती आप इसे 100% इस्तेमाल कर सकते है और खराब भी नहीं होगी जबकि लिथियम-आयन बैटरी को 10-20% बचाकर रखना पड़ता है नहीं तो बैटरी खराब हो जाती है।
- Redflow(zcell): ये ऑस्ट्रेलिया की कंपनी है जो घरों के लिए 10 किलोवाट की क्षमता वाली रेडॉक्स फ्लो बैटरी बनाती है।
- Delectrik: ये भारतीय कंपनी है जो "i-flow" नाम से ऐसे यूनिट का निर्माण करती है जिसे घरों मे लगाया जा सकता है।
- जब बड़ा सोलर पैनल हो: जब आपका घर पूरी तरह से सोलर पैनल पर चलता हो ऐसी स्थिति मे फ्लो बैटरी बहुत लाभदायक भूमिका निभा सकता है।
- लंबी प्लैनिंग हो: क्योंकि फ्लो बैटरी की उम्र लंबी होती है और इसमे शुरुआती लागत ज्यादा होती है।
- घर मे जगह की कमी न हो: क्योंकि आपको घर मे दो टैंक रखने होंगे तो उसके लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
- खर्च करने मे सक्षम हो: ये सबसे बड़ी बात है क्योंकि फ्लो बैटरी लिथियम-आयन बैटरी की तुलना मे 3 गुना से अधिक महंगी होती है। लेकिन हो सकता है की आनेवाले 2-3 सालों मे इसकी कीमत कम हो जाय।
- इसको लगाने मे शुरुआती खर्चा तो बैठता है लेकिन यदि आप 20-25 सालों के इनवेस्टमेंट के तौर पर देखेंगे तो ये खर्चीला नहीं बल्कि सस्ता ही पड़ेगा यानि पूरी तरह से खर्च वसूल। यदि आप 10-15 किलोवाट का बिजली घर के लिए चाहते है तो रेडॉक्स फ्लो बैटरी की कीमत लगभग 6 लाख से लेकर 9 लाख तक बैठ सकती है।फिर आपको 20-25 सालों तक बैटरी मे खर्च नहीं करना पड़ेगा।
- यदि आप इतनी ही कैपिसिटी का लिथियम-आयन बैटरी लेते है तो आपका खर्च 2.5 लाख से लेकर 4 लाख तक मे ही हो जाएगा।इसमे आपको 6-8 सालों तक बैटरी मे खर्च नहीं करना पड़ेगा।
