Redox Flow Battery क्या है और यह एनर्जी स्टोरेज की दुनिया को कैसे बदलेगी?

Redox Flow Battery क्या है और यह कैसे काम करती है? जानिए इसके फायदे,नुकसान,उपयोग और Renewable Energy Storage मे इसकी भूमिका 


Redox Flow Battery for Energy Storage
Redox Flow Battery -AI Generated Image 

प्रस्तावना 

वर्तमान समय मे पूरे विश्व मे Renewable Energy का प्रचालन तेजी से बढ़ता जा रहा है और भारत मे भी। क्योंकि भारत ने जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुरूप 2070 तक नेट-ज़ीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन प्राप्त करने का महत्वकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसलिए देश मे तेजी से सोलर एनर्जी के साथ अन्य Renewable Energy का उत्पादन तेजी से बढ़ता जा रहा है। 

इस बढ़ते रेन्युवल एनर्जी के उत्पादन ने इससे उत्पन्न ऊर्जा को स्टोर करने की चुनौती पैदा कर दी है। क्योंकि वर्तमान मे इसको स्टोर करने के लिए लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग किया जा रहा है जिसकी अपनी सीमाएं है और बड़े स्तर पर ऊर्जा का भंडारण इससे संभव नहीं हो पा रही है। 


ऐसी स्थिति मे रेडॉक्स फ्लो बैटरी वरदान के रूप मे नजर आ रही है। दुनिया के कई देशों मे जैसे चीन और अमेरिका मे इसका तेजी से प्रचालन बढ़ रहा है। और आनेवाले दिनों मे भारत मे भी इसका प्रचालन तेजी से बढ़ने वाला है। ऐसी स्थिति मे इसके बारे मे जानकारी होना हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है। 


रेडॉक्स फ्लो बैटरी(Redox Flow Battery)क्या है ?

रेडॉक्स फ्लो बैटरी एक तरह की रिचार्जेवल बैटरी ही होती है जिसमें ऊर्जा को स्टोर करने के लिए दो तरल रसायनों (Electrolytes) का इस्तेमाल किया जाता है। आम बैटरी जिसमे सबसे ज्यादा प्रचलित लिथियम-आयन बैटरी के मुकाबले इसका डिजाइन थोड़ा अलग और बड़े स्तर का होता है। 

Redox शब्द दो प्रक्रियाओ से मिलकर बना है  "Reduction(अपचयन) + Oxidation(आक्सीकरण)" इन दोनों रासायनिक क्रियाओ के माध्यम से इलेक्ट्रानो का आदान प्रदान होता है जिससे बिजली उत्पन्न होती है। 

1. रेडॉक्स फ्लो बैटरी काम कैसे करती है 

  • दो टैंक होता है: इसमे दो बड़े टैंक होते है जिनमे अलग अलग तरल "Electrolytes" भरे होते है -जिनमे एक पॉजिटिव और एक निगेटिव होता है। 
  • सेंट्रल सेल: ये तरल रसायन टैंक से पंप के द्वारा एक सेंट्रल सेल स्टैक मे जाता है। 
  • आयन एक्सचेंज: सेल स्टैक के बीच मे एक मेम्ब्रेनस यानि पर्दा होता है। जब तरल रसायन वहां से गुजरता है तो इलेक्ट्रान का एक्सचेंज होता है जिससे बिजली बनती है और स्टोर होती है। 
इस प्रकार से रेडॉक्स फ्लो बैटरी काम करती है और बड़े पैमाने पर ऊर्जा का उत्पादन और स्टोर करती है। 

2. मुख्य तीन प्रकार के होते है ये बैटरी 

वैसे तो रेडॉक्स बैटरी कई प्रकार के पाए जाते है और इसका और उन्नत विकास हो रहा है। लेकिन इसमें सबसे लोकप्रिय तीन प्रकार है जो प्रचालन मे है -
  • Vanadium Redox Flow Battery: इसमें वैनाडियम आधारित इलेक्ट्रान का प्रयोग किया जाता है। 
  • Zinc-Bromine Flow Battery: जिसमे जिंक और ब्रोमीन का उपयोग होता है। 
  • Iron Flow Battery: जो आयरन पर आधारित होता है।  

3. रेडॉक्स फ्लो बैटरी के फायदे क्या है 

इस बैटरी का ज्यादा उपयोग घरों की तुलना मे 'पावर ग्रिड' और 'सोलर/विंड फार्म' के लिए बेहतर होता है -
  • मापनीयता (Scalability): इस सिस्टम मे ये खूबी है की यदि आपको ज्यादा एनर्जी पाने के लिए आप टैंक का साइज़ बड़ा कर सकते है या तरल रसायन की मात्रा को बढ़ाकर भी आप एनर्जी ज्यादा पैदा कर सकते है। इसमे "पावर"(Cell Stack) और "एनर्जी"(Tank Size) दोनों को अलग अलग कंट्रोल किया जा सकता है। 
  • लंबे समय तक उपयोगी: जहां 'लिथियम-आयन बैटरी' कुछ सालों मे खराब होने लगती है वही पर 'रेडॉक्स फ्लो बैटरी' 20 सालों से भी ज्यादा चल सकती है क्योंकि इनके रसायन जल्दी डिग्रैड नहीं होते है।
  • बहुत ही सुरक्षित: इस बैटरी की सबसे बड़ी खूबी यह भी है की इनमे आग लगने की संभावना ना के बराबर होती है।क्योंकि इसमे उपयोग किया जानेवाला तरल अक्सर नॉन फ्लैमबल होता है। 
  • डीप डिस्चार्ज: आप इसे पूरी तरह से खाली (0%)कर सकते है और वो भी बिना बैटरी को नुकसान पहुंचाए। 
वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी जो सबसे ज्यादा प्रचलित है उसका सबसे बड़ा फायदा यह है की इसके दोनों टैंक मे एक ही एलीमेंट (वैनाडियम) होता है केवल उसका ऑक्सिडेशन स्तर अलग होता है। यदि किसी कारण से तरल रसायन आपस मे मिल भी जाय तो बैटरी परमानेंट खराब नहीं होती है। 


जैसा की हम जान चुके है रेडॉक्स बैटरी का असली फायदा वहां होता है जहां 'बहुत बड़े लेवल पर' और 'लंबे समय तक' बिजली का भंडारण करना हो। क्योंकि ये काफी भारी और बड़ी होती है। वास्तविक रूप से यह निम्न रूपों से उपयोगी है -

1. सोलर और विंड पॉवर प्लांट्स:

सूरज ढल जाए और प्रकाश ही न हो या हवा रुक जाय लेकिन बिजली की सप्लाइ नहीं रुकनी चाहिए इसके लिए रेडॉक्स फ्लो बैटरी सबसे उत्तम है क्योंकि -
  • जहां लिथियम बैटरी 2-4 घंटे का बैकअप देती है वही Rfb's 10-12 घंटे या उससे भी ज्यादा देर तक बैकअप दे सकती है। 
2. ग्रिड स्टेबलाइजेशन (बिजली घरों के लिए):

क्योंकि कभी कभी पॉवरग्रिड मे अचानक से लोड बढ़ जाता है ऐसी स्थिति मे Rfbs पीक सैविंग का काम करती है जब बिजली ज्यादा हो तब ये उसे भंडारण करके रखती है और जब बिजली कम पड़ने लगे तो ये भंडारित की हुई बिजली उपयोग मे आ जाती है। 

3. सुदूर एरिया और द्वीपों जैसे क्षेत्रों मे:

जिस क्षेत्रों मे पॉवर ग्रिड को पहुंचने मे बहुत कठिनाई आती है वैसे एरिया मे इसका उपयोग "माइक्रो ग्रिड" के तौर पर किया जाता है। क्योंकि वहां सोलर और विंड एनर्जी सीमित समय या मात्रा मे ही सेवा दे पाती है लेकिन ये इस स्थिति मे बहुत ही लाभदायक हो जाती है क्योंकि इसका बैकअप बहुत अच्छा होता है। 

4.इन्डस्ट्रीअल  कमर्शियल बैकअप:

बड़ी फैक्ट्री,अस्पताल या ऐसा डाटा सेंटर जहां 27/7 बिजली की जरूरत होती है वहां ये बैकअप के रूप मे बहुत उपयोगी होता है क्योंकि इसका लाइफ 20+ सालों से अधिक का होता है। कमर्शियल और बिजनेस के लिए लॉंग टर्म मे इसका प्रयोग काफी सस्ता पड़ता है। 

5. ईवी चार्जिंग स्टेशन मे:

जब एकसाथ 50 या 100 से अधिक वाहन चार्ज होती है तो ग्रिड पर अधिक भार पड़ता है। ऐसी स्थिति मे रेडॉक्स फ्लो बैटरी बहुत ही उपयोगी भूमिका निभा सकती है। 

  • रेडॉक्स फ्लो बैटरी की एक और खूबी ये है की -- "जब इसका तरल डिस्चार्ज हो जाय तो इस तरल को आप बाहर निकाल कर नया चार्ज किया हुआ तरल उसमे डाल सकते है इससे बैटरी तुरंत 100% चार्ज हो जाएगी"

भारत मे रेडॉक्स फ्लो बैटरी की स्थिति:

चीन और अमेरिका मे इस बैटरी का उपयोग बड़े और बृहद पैमाने पर शुरू हो चुका है। भारत मे भी रेडॉक्स फ्लो बैटरी पर काम ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। भारत अपने ग्रीन एनर्जी लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट करने के लिए लिथियम-आयन बैटरी के अलावा दूसरे तरीकों पर भी काम शुरू कर रहा है -
  • आईआईटी मद्रास: यहा वानाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी का स्वदेशी रूप विकसित किया गया है। इनका फोकस भारतीय जलवायु के हिसाब से विकसित करने और इसे सस्ता बनाने पर है।  
  • आईआईटी दिल्ली और आईआईएससी बैंगलुरु: ये संस्थान इसके नॉन जलीय और ऑर्गैनिक फ्लो बैटरी बनाने पर काम कर रहे है ताकि इसकी लागत को और कम किया जा सके। 
  • डेलेक्ट्रिक सिस्टम (Delectric System): ये गुरुग्राम की स्टार्टर कंपनी है जो वानाडियम फ्लो बैटरी बनाती है। इसकी यूनिट भारत के अलावा अमेरिका,आस्ट्रेलिया और यूरोप मे भी है। इसका सिस्टम 10 kw से लेकर मेगावाट तक काम कर सकता है। 
  • एल & टी: लर्सन एण्ड टूब्रो ने रेन्युवल एनर्जी के क्षेत्र मे ऊर्जा भंडारण मे दिलचस्पी दिखते हुए ग्लोबल टाईअप पर काम कर रही है। 
  • वानाडियम की खोज: भारत वानाडियम के मामले मे आयात पर निर्भर है। लेकिन जियॉलॉजीकल सर्वे ऑफ इंडिया ने अरुणाचल प्रदेश मे वानाडियम के भंडार की खोज कर दी है। इसका उत्पादन शुरू होने के बाद भारत वानाडियम के मामले मे आत्मनिर्भर हो जाएगा और यह सस्ता भी उपलब्ध होने लगेगा। 

चूंकि रेडॉक्स फ्लो बैटरी भारत के लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि लिथियम-आयन बैटरी ज्यादा गर्मी नहीं सहन कर पाती है जबकि रेडॉक्स फ्लो बैटरी 45-50 डिग्री तक के तापमान को आसानी से झेल जाती है। 

क्या एक आम घर मे फ्लो बैटरी लगाई जा सकती है ?

हाँ इसे आम घर मे भी लगाया जा सकता है लेकिन ये लगाने मे थोड़ा विशिष्ट सेटअप और थोड़ा महंगा पड़ेगा। हमलोग आम घरों मे लिथियम-आयन वाला बैटरी प्रयोग करते है जो रखने मे आसान होती है। लेकिन रेडॉक्स फ्लो बैटरी का सेटअप थोड़ा अलग टाइप का होता है -
  • जगह: फ्लो बैटरी मे दो बड़े तरल टैंक होते है। इसके लिए घर मे छोटा सा स्टोर रूम या गैराज होना चाहिए जहां इसे लगाया जा सके। 
  • सुरक्षा: इसमे आग लगने का डर नहीं रहता है। शॉर्ट शार्किट मे भी नहीं।
  • जीवन काल: कम से कम 20-25 सालों तक ये आसानी से चल जाती है। 
  • डिस्चार्ज की संभावना: डिस्चार्ज होने से डरने की जरूरत नहीं पड़ती आप इसे 100% इस्तेमाल कर सकते है और खराब भी नहीं होगी जबकि लिथियम-आयन बैटरी को 10-20% बचाकर रखना पड़ता है नहीं तो बैटरी खराब हो जाती है। 

क्या मार्केट मे घरेलू प्रयोग वाली फ्लो बैटरी उपलब्ध है?

कुछ अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय कंपनियां घर मे प्रयोग की जाने वाली फ्लो बैटरी को बनाना शुरू कर दिया है-
  • Redflow(zcell): ये ऑस्ट्रेलिया की कंपनी है जो घरों के लिए 10 किलोवाट की क्षमता वाली रेडॉक्स फ्लो बैटरी बनाती है। 
  • Delectrik: ये भारतीय कंपनी है जो "i-flow" नाम से ऐसे यूनिट का निर्माण करती है जिसे घरों मे लगाया जा सकता है। 

किसे अपने घरों मे फ्लो बैटरी लगवानी चाहिए ?

घरों मे फ्लो बैटरी लगवाने के लिए निम्न बातों पर विचार करनी चाहिए -
  • जब बड़ा सोलर पैनल हो: जब आपका घर पूरी तरह से सोलर पैनल पर चलता हो ऐसी स्थिति मे फ्लो बैटरी बहुत लाभदायक भूमिका निभा सकता है। 
  • लंबी प्लैनिंग हो: क्योंकि फ्लो बैटरी की उम्र लंबी होती है और इसमे शुरुआती लागत ज्यादा होती है। 
  • घर मे जगह की कमी न हो: क्योंकि आपको घर मे दो टैंक रखने होंगे तो उसके लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए। 
  • खर्च करने मे सक्षम हो: ये सबसे बड़ी बात है क्योंकि फ्लो बैटरी लिथियम-आयन बैटरी की तुलना मे 3 गुना से अधिक महंगी होती है। लेकिन हो सकता है की आनेवाले 2-3 सालों मे इसकी कीमत कम हो जाय।

क्या लगवाने से पैसा वसूल हो जाएगा ?

  • इसको लगाने मे शुरुआती खर्चा तो बैठता है लेकिन यदि आप 20-25 सालों के इनवेस्टमेंट के तौर पर देखेंगे तो ये खर्चीला नहीं बल्कि सस्ता ही पड़ेगा यानि पूरी तरह से खर्च वसूल। यदि आप 10-15 किलोवाट का बिजली घर के लिए चाहते है तो रेडॉक्स फ्लो बैटरी की कीमत लगभग 6 लाख से लेकर 9 लाख तक बैठ सकती है।फिर आपको 20-25 सालों तक बैटरी मे खर्च नहीं करना पड़ेगा। 
  • यदि आप इतनी ही कैपिसिटी का लिथियम-आयन बैटरी लेते है तो आपका खर्च 2.5 लाख से लेकर 4 लाख तक मे ही हो जाएगा।इसमे आपको 6-8 सालों तक बैटरी मे खर्च नहीं करना पड़ेगा। 

विशेषज्ञों का कहना है की आनेवाले दिनों मे रेडॉक्स फ्लो बैटरी की मांग तेजी से बढ़ेगी। और जब मार्केट मे जब कई सारे खिलाड़ी आ जाएंगे तो प्रतिस्पर्धा और अन्य कारकों के चलते इसकी लागत मे कमी आएगी। 


निष्कर्ष (Conclution):

रेडॉक्स फ्लो बैटरी समय की मांग है। आज कल सभी लोग घरों मे सोलर पैनल लगवा रहे है। जो लिथियम-आयन बैटरी से चालित होती है। जिससे बिजली के स्टोरेज की समस्या बनी रहती है। जैसे ही मार्केट मे रेडॉक्स आयन बैटरी की उपलब्धता बढ़ेगी इसकी मांग भी बढ़ेगी। 

साथ ही यह सुरक्षित टिकाऊ और ग्रीन एनर्जी के लिए एक महत्वपूर्ण समाधान है। 


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1. रेडॉक्स फ्लो बैटरी क्या है?

उत्तर: रेडॉक्स फ्लो बैटरी एक रिचार्जेबल बैटरी है,जिसमे ऊर्जा तरल इलेक्ट्रोलाइट्स मे रासायनिक रूप मे संग्रहीत होती है। इन तरल को बाहरी टैंकों मे रखा जाता है और पंप के माध्यम से प्रवाहित किया जाता है। 


प्रश्न 2. यह सामान्य बैटरी से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: सामान्य बैटरी मे ऊर्जा इलेक्ट्रोड के अंदर ही रहती है जबकि फ्लो बैटरी मे ऊर्जा बाहरी टैंकों मे रखी तरल रसायनों मे संग्रहीत रहती है। इसमे पॉवर और ऊर्जा को स्वतंत्र रूप से डिजाईन किया जा सकता है। 


प्रश्न 3. वैनेडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी क्या है?

उत्तर: यह सबसे लोकप्रिय प्रकार की फ्लो बैटरी है जो वैनेडियम आयनों के विभिन्न आक्सीकरण अवस्थाओ का उपयोग करती है। यह लंबे जीवन काल और सुरक्षा के लिए जानी जाती है। 


प्रश्न 4. रेडॉक्स फ्लो बैटरी के मुख्य लाभ क्या है?

उत्तर: इसके मुख्य लाभ है -1.अत्यधिक लंबी उम्र (20-25 वर्ष) 2. बड़े पैमाने पर भंडारण क्षमता 3. अग्नि सुरक्षा 4. बिजली और ऊर्जा का स्वतंत्र स्केलिंग। 


प्रश्न 5. इस बैटरी की सीमाए या नुकसान क्या है?

उत्तर: इसकी ऊर्जा घनत्व कम होती है इसलिए ज्यादा जगह चाहिए,और शुरुआती स्थापना लागत अधिक होती है, साथ ही इसमे पंप और पाईप जैसे यंत्रों की आवश्यकता होती है। 


प्रश्न 6. फ्लो बैटरी कहाँ उपयोग किया जाता है?

उत्तर: मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर स्टेशनरी ऊर्जा भंडारण मे,नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और भंडारण मे,रिमोट समुदायों के लिए ऊर्जा पाहुचाने मे। 


प्रश्न 7. रेडॉक्स फ्लो बैटरी की दक्षता कितनी होती है?

उत्तर: आमतौर पर रेडॉक्स फ्लो बैटरी की ऊर्जा दक्षता 70% से 80 % के बीच होती है। 


प्रश्न 8. क्या रेडॉक्स फ्लो बैटरी लिथियम आयन बैटरी से बेहतर है?

उत्तर: बड़े स्तर पर भंडारण और और लंबे समय तक भंडारण एवं सुरक्षा के लिए यह लिथियम आयन बैटरी से बेहतर है। 


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(लास्ट अपडेट:01/07/2026)

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