📑 Table of Contents
![]() |
| LiFE पहल मे भारत के वैदिक जीवनशैली से लिया गया पर्यावरण सुरक्षा का संदेश |
प्रस्तावना
यह पहल एक क्रांतिकारी मॉडल है जो व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों का आह्वान करता है जिसमे मानव पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के साथ सामंजस्य स्थापित कर सके।
इस 'लाइफ' पहल मे जो मूल सिद्धांतों को अपनाया गया है वे प्राचीन भारत मे सदियों से व्यावहारिक बुद्धिमता के रूप मे पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। वैदिक दर्शन हमेशा से संयम,संतुलन और सजग उपभोग को महत्व दिया है।
लाइफ पहल(Mission LiFE) के प्रमुख क्षेत्र
भारत का लाइफ मिशन सामूहिक सोच और कार्यों मे स्थिरता लाने की दिशा मे तीन मूलभूत परिवर्तन करने का प्रयास करता है -
चरण 1 (मांग मे परिवर्तन): यह चरण व्यक्तियों को पर्यावरण सचेत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर देता है।
चरण 2 (आपूर्ति मे परिवर्तन): सतत उत्पादों की बढ़ती मांग के माध्यम से उद्योगों और बाजारों को अपनी आपूर्ति शृंखला को जिम्मेदार उत्पादन सिद्धांतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर प्रदान करना।
चरण 3 (नीति मे परिवर्तन): मांग और आपूर्ति दोनों पर प्रभाव डालकर 'लाइफ' का उद्देश्य ऐसी नीतियों को प्रेरित करना है जो सतत उपभोग और उत्पादन सुनिश्चित करे।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र और पर्यावरणीय सम्मेलनों मे हुए समझौते के अनुरूप अपना लाइफ मिशन को जारी किया है। साथ ही भारत का कहना है की वैश्विक समुदाय द्वारा स्वीकार किए जाने वाले अधिकतर पर्यावरणीय उपाय हमारे प्राचीन वैदिक काल के सिद्धांतों के अनुरूप ही है।
ये सिद्धांत सदियों से लेकर आज भी भारतीय लोगों द्वारा स्वतः अपनाए जाते रहे है।
वैदिक दर्शन और जिम्मेदार उपभोग
वैदिक दर्शन एक यथार्थवादी जीवन आचार प्रदान करता है जो सामूहिक कल्याण के प्रति नैतिक जिम्मेदारी पर आधारित है। वैदिक विचारधारा के चार प्रमुख सिद्धांत 'लाइफ पहल'(LiFE Mission) की भावना से गहराई से जुड़े हुए है -
1. मिताहार (संयम): ऋग्वेद (1.81)यह बताता है की सच्चा संतुलन तभी प्राप्त होता है जब मनुष्य प्राकृतिक व्यवस्था के अनुरूप संयम और संतुलन के साथ काम करता है। इसी प्रकार यजुर्वेद (19.30) संसाधनों के उद्देश्यपूर्ण और सार्थक उपयोग का उपदेश देता है। यह 'लाइफ' की भावना से मेल खाता है जो नागरिकों को संसाधन संरक्षण और अपशिष्ठ न्यूनीकरण के लिए प्रेरित करता है।
2. यज्ञ (त्याग): ऋग्वेद (10.90.16)मे कहा गया है की त्याग ही ब्रह्मांडीय व्यवस्था का आधारशिला है। यज्ञ निस्वार्थ दान और साझा उत्तरदायित्व की भावना का प्रतीक है। यह विचारधारा 'लाइफ' से गहराई से जुड़ती है। जो सजग उपभोग और हरित व्यवहारों का संदेश देती है।
3. अपरिग्रह (असंग्रह,अधिकार न रखना): योगसूत्र (2.39) यह घोषित करता है की अपरिग्रह मन की पवित्रता और शांति से उत्पन्न होता है। यह संचय निरोध और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करता है। यही सिद्धांत 'लाइफ' मे भी परिलक्षित होती है।
4. धर्म और सत्य (नीति एवं सत्यनिष्ठा): ऋग्वेद (10.85.1) यह प्रतिपादित करता है की सत्य और धर्म ही संसार को संचालित करते है। इससे युक्त नैतिक जीवन मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य सुनिश्चित करता है। 'लाइफ' मे भी ईमानदारी पूर्ण जिम्मेदारी और वितरण की बात कही गई है।
वैदिक ग्रंथों मे पृथ्वी,जल,वायु,अग्नि और आकाश को पंच महाभूत कहा गया है।यानि इन तत्वों को जीवन का आधार माना गया है और इसके संरक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। ये सिद्धांत आज के समय मे 'सतत जीवन' (Sustainable Living) के मूल सिद्धांतों से पूरी तरह मेल खाते है।
वैदिक संस्कृति मे प्रकृति का महत्व और व्यवहार
भारत की वैदिक जीवन संस्कृति मे प्रकृति को केवल संसाधन नहीं बल्कि "देवता" के रूप मे पूजनीय माना गया है जैसे -
- नदियों को माता कहा जाता है।
- पेड़ो की पूजा की जाती है।
- सूर्य और अग्नि को देवता माना जाता है।
भारत की परंपरा मे कई ऐसे पर्व और त्योहार है जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है जैसे -
- वट सावित्री व्रत: पेड़ो के महत्व को दर्शाता है।
- नाग पंचमी: जीवों के संरक्षण का संदेश देता है।
- मकर संक्रांति: कृषि और प्रकृति के समन्वय का त्योहार।
LiFE Mission के अनुरूप सरकार का पहल
सरकार ने जिम्मेदार सतत उपभोग और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2024 और 2025 मे विभिन्न कार्यक्रम प्रारंभ किए है। इनमे शामिल है -
- केन्द्रीय बजट 2024-2025: इस बजट मे जलवायु सहिष्णु कृषि और स्वच्छ ऊर्जा को प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत 109 उच्च उपज वाली फसल किस्मों का परिचय,जैविक खेती को प्रोत्साहन,10,000 बायो इनपुट केंद्रों की स्थापना और 'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत एक करोड़ परिवारों को सोलर पैनलों की स्थापना को बढ़ावा देना जैसे उपाय शामिल किया गया है।
- इकोमार्क नियम: पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 24 सितंबर 2024 को 'लाइफ' के अनुरूप इकोमार्क नियम पेश किया जिसने 1991 के इकोमार्क योजना को प्रतिस्थापित कर दिया। इसमें इकोमार्क मानक के नियम वर्तमान परिस्थितियों के अनुकूल बना दिए गए है जिससे इसका अब दुरुपयोग नहीं हो पाएगा।
- उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य: मंत्रालय ने 282 औद्योगिक इकाइयों को उनके ग्रीन हाउस गैस के पिछले साल की तुलना मे सीमित करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दिए गए। इसमें कार्बन क्रेडिट व्यापार के अंतर्गत जो इकाई आवंटित कोटा से कम कार्बन उत्सर्जन करती है वे अतिरिक्त क्रेडिट को उन इकाइयों को बेच सकती है जो ज्यादा कार्बन का उत्सर्जन करती है।
- यूनिफाइड इंडिया ऑर्गेनिक लोगो: फूड सेफ्टी एण्ड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एग्रीकल्चर एण्ड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्टस एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी ने मिलकर "यूनिफाइड इंडिया ऑर्गेनिक" लोगो जारी किया जो भारतीय जैविक खेती के मानकों की समानता सुनिश्चित करता है।
- यूज्ड कुकिंग ऑइल का पुनः उपयोग: 10 अगस्त 2018 को FSSAI ने RUCO पहल शुरू की ताकि पेशेवर रसोई और खाद्य व्यवसाय इकाइयों से उपयोग किए गए खाना पकाने के तेल को सुरक्षित रूप से एकत्र किया जा सके और इसे बायो डीजल मे परिवर्तित किया जा सके। इसके लिए हाल ही मे 63 गैर खाद्य उत्पादन इकाइयों के अस्थाई आवंटन का विस्तार किया गया।
- विकसित भारत 2047 का एजेंडा: विकसित भारत 2047 के समावेशी,पारिस्थितिक रूप से जिम्मेवार और सांस्कृतिक संवहनीय लक्ष्यों को ध्यान मे रखते हुए 'पहल' मिशन के अंतर्गत विभिन्न एजेंडा बनाकर उसपर कार्य किया जा रहा है।
- मार्गदर्शन से व्यावहारिक बनना: विभिन्न व्यावहारिक कार्यक्रमों की शुरुआत की जा रही है। ताकि सरकार की भूमिका केवल मार्गदर्शन की ही न रहे।जैसे गोवर्धन योजना के माध्यम से 500 नए बायोगैस संयंत्र की स्थापना की जा रही है।जैविक खेती को प्रोत्साहन,गावों मे शून्य अपशिष्ट उत्पादन,जल संरक्षण आदि योजनाएं शुरू हो चुकी है।
निष्कर्ष
आज जब दुनिया पर्यावरण संकट का सामना कर रही है तब भारत की लाइफ पहल एक महत्वपूर्ण दिशा दिखाती है और बताती है की पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें अपनी जीवन शैली मे बदलाव लाना होगा। और इनमे वैदिक जीवन शैली मार्गदर्शन का काम करती है।
सीख और समझ यही होनी चाहिए की प्रकृति और पर्यावरण पर केवल हमारा ही अधिकार नहीं है बल्कि ये हमारे आने वाली पीढ़ियों का भी धरोहर है। जिसे हमे अच्छे से संजोकर और सामंजस्य बनाकर उपभोग करनी चाहिए।
पूछे जानेवाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1. LiFE पहल क्या है?
उत्तर: LiFE - Lifestyle for Environment भारत सरकार का एक पहल है जिसका उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
प्रश्न 2. LiFE पहल किससे प्रेरित है?
उत्तर: यह पहल काफी हद तक भारतीय परंपरा और वैदिक जीवन शैली से प्रेरित है जिसमे प्रकृति के साथ संतुलित जीवनशैली पर जोर दिया गया है।
प्रश्न 3. वैदिक जीवन पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: वैदिक जीवनशैली मे प्रकृति को पूजनीय माना गया है और संसाधनों के संतुलित उपभोग की शिक्षा दी गई है।
प्रश्न 4. LiFE पहल का मुख्य उदेश्य क्या है?
उत्तर: लोगों को Sustainable Lifestyle अपनाने के लिए प्रेरित करना और पर्यावरण की रक्षा करना है।
