जुआंग जनजाति ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार से संबंधित है जो 2011 की जनगणना के अनुसार इनकी जनसंख्या लगभग 47,000 है। जुआंग जनजाति ओडिसा की "विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह"(PVTG-Particularly Vulnerable Tribal Group) मे शामिल है।
भारत की सबसे पुरानी और खास जनजाति मे से एक जुआंग जनजाति समुदाय अधिकतर ओडिसा के क्योंझर जिले मे धुंधली "गोनासिका पहाड़ियों" मे निवास करता है। 'जुआंग'शब्द का अर्थ 'इंसान'है और वे अपने को गर्व से मानते है की गोनासिका के 'वैतरणी नदी' के पवित्र उद्गम स्थल से आने वाले वे पहले इंसान है।
जुआंग समुदाय प्राचीन समय मे पत्तों से बने कपड़े पहनते थे,जंगल मे रहते थे,शिफ्टिंग खेती-बारी करते थे। साथ ही वे शिकार करते थे और जंगली पौधों की जड़े एवं शहद तथा डालें इकठ्ठा करते थे।
वे बहुत कुशल कारीगर थे जो टोकरियां,कंघी और नक्काशीदार लकड़ी की वस्तुएं बनाते थे।
मांडाघर सामाजिक जीवन का केंद्र
जुआंग जनजाति के सामाजिक जीवन का केंद्र "मंडाघर" होता था। युवाओं के छात्रावास मे गीत,नृत्य,सामुदायिक निर्णय साझा किए जाते थे। साथ ही युवा अनुशासन,परम्परा तथा सामूहिक जिम्मेदारी सीखते थे। उनका जीवन सरल,लयबद्ध और प्रकृति की धड़कन के साथ गहराई से जुड़ा हुआ था।
जुआंग विकास एजेंसी और निर्भरता से विविधता की ओर
हाल के वर्षों मे यह जनजाति पारंपरिक रूप से वन पर निर्भर जीवन से आगे बढ़कर आधुनिक और सतत आजीविका साधनों की ओर बढ़ रही है। इस परिवर्तन यात्रा को जुआंग विकास एजेंसी(JDA) दिशा दे रही है,जो 120 से अधिक गावों मे समग्र विकास कार्यक्रम संचालित करती है।
इस अभियान के तहत सिंचाई सहायता के साथ स्थिर कृषि अपनाने,महिलाओ के नेतृत्व वाले 'स्वयं सहायता समूहों' (SHGs) के माध्यम से बाजार से जुड़ाव बनाने,तथा स्वच्छ ऊर्जा और सुरक्षित पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं मे सुधार जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल है।
इन प्रयासों से न केवल स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूत किया बल्कि ये सांस्कृतिक संरक्षण को भी नई ऊर्जा प्रदान किया है। समग्र रूप से यह पहल समावेशी रूप से जनजातीय सशक्तिकरण का एक प्रेरक और आदर्श मॉडल बनकर उभर रहा है।
अब कई परिवार झूम खेती छोड़कर स्थाई कृषि और बागवानी की ओर बढ़ चुके है। किसान अब सरकारी सिंचाई सुविधाओं और बीज वितरण योजनाओं की मदद से धान,मक्का,हल्दी और बाजरा उगा रहे है।
महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह जो विभिन्न सरकारी योजनाओं यथा "मिशन शक्ति' और 'ओडिसा लाइवलीहुड मिशन' द्वारा समर्थित है, वे अब पत्तल, टोकरियां,और अन्य हस्तशिल्प बना रहे है। इससे उनका जुड़ाव सीधे स्थानीय और ऑनलाइन बाजारों से भी हो रहा है।
अब इनका मौसमी प्रवासन मे भी कमी आ गई है। इसका मुख्य कारण है की ये अब मनरेगा(MGNREGA) जिसका नाम अब बदल कर 'विकसित भारत जी-राम-जी'(VB-G RAM G)हो गया है जैसे ग्रामीण रोजगार योजनाएं समुदाय के भीतर ही गारंटी रोजगार प्रदान कर रही है से जुड़ गए है।
साथ ही जुआंग युवाओं मे व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने और आस पास के शहरों मे छोटे उद्यमों की ओर जाने का चलन बढ़ रहा है।
जुआंग विकास एजेंसी:जुआंग जनजाति के समावेशी सशक्तिकरण का आदर्श मॉडल क्यों है?
समावेशी विकास के सरकारी पहल तक पहुंचाती JDA
- JDA(Juang Development Agency) के पहलों से सरकारी योजनाओ को 120 से अधिक गावों मे लागू किए जा रहे है-
1. हाल के वर्षों मे JDA ने जुआंग बहुल क्षेत्रों मे जीवन की गुणवत्ता सुधारने के उदेश्य से कई परिवर्तनकारी परियोजनाएं शुरू की है।
2. घरों मे सोलर लालटेन की स्थापना और सामुदायिक सोलर ग्रिड की स्थापना से लोगों को स्वच्छ ऊर्जा की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो रही है।
3. सौर आधारित सिंचाई परियोजनाएं चेक डैम और नहरें कृषि उत्पादकता और जल उपलब्धता को बढ़ रही है।
4. पेयजल आपूर्ति प्रणालियां और सड़क संपर्क परियोजनाएं दूर दराज के गावों मे बुनियादी अवसंरचना को मजबूत बना रही है।
5. मनरेगा के तहत काजू और आम के बागान,भूमि विकास और ट्रैक्टर एवं पॉवर टेलर के माध्यम से कृषि का यंत्रीकरण।
6. प्रोसेसिंग यूनिट, मार्केट यार्ड की स्थापना ने आय सृजन और मूल्य संवर्धन के नए अवसर पैदा किए है।
7. बैकयार्ड पोल्ट्री यूनिट,बकरी पालन इकाईयां,और सामुदायिक सेवा प्रदाता(IGAs) ने घरेलू आय मे विविधता लाई और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
8. सांस्कृतिक पहचान को बनए रखने के लिए एजेंसी ने पारंपरिक पोशाकों,सांस्कृतिक उपकरणों और पवित्र बाड़ का समर्थन किया साथ ही युवाओं को युवा छात्रावास और सूचना सांस्कृतिक केंद्र जैसी जगहें बनाई गई।
9. सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए PVTG परिवारों के लिए "प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना" एवं "प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना" और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजना को लागू किया गया है।
इन समग्र प्रयासों से जुआंग क्षेत्र मे बेहतर आवास,जल,आजीविका और सांस्कृतिक सुरक्षा का विकास सुनिश्चित किया है।
स्वास्थ्य सेवा एवं महिला सशक्तिकरण
जुआंग विकास एजेंसी के माध्यम से सभी सरकारी स्वास्थ्य एवं पोषाहार योजनाओ को अधिक से अधिक क्षेत्रों मे पहुंच सुनिश्चित किया जा रहा है -
- "मोबाईल स्वास्थ्य वाहन" और "मिशन सुरक्षा क्लिनिक" नियमित रूप से दूर दराज एरिया मे जाकर मातृ देखभाल,टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य जांच प्रदान कर रहे है। इसमें आशा कार्यकर्ताओ एवं स्थानीय स्वयंसेवकों के द्वारा सराहनीय काम किए जय रहे है।
- स्वयं सहायता समूह और उत्पादक समूहों के माध्यम से महिलाएं स्वतंत्र रूप से कमाई और वित्त प्रबंधन कर रही है तथा वे गांव की समितियों का नेतृत्व भी कर रही है।
- 'मिशन शक्ति बाजार' पहल उन्हें पारंपरिक शिल्प और वन आधारित उत्पाद बेचने के लिए सही प्लेटफॉर्म प्रदान कर रही है।
पर्यावरण संरक्षण भी साथ मे
एक समय था जब जुआंग क्षेत्र वनों की कताई और खनन से प्रभावित था लेकिन अब सामुदायिक नेतृत्व वाले संरक्षण केंद्र के माध्यम से इसपर नियंत्रण किया जा रहा है। 'वन अधिकार अधिनियम' और अमा जंगल योजना' के तहत जुआंग ग्राम सभाएं स्थानीय प्रजातियों का पुनः रोपण कर रही है,वन्यजीव मार्गों का सुरक्षा प्रदान कर रही है और साथ मे इकोटूरिज्म को बढ़ावा दे रही है।
वर्षा जल संचय,चेक डैम और अन्य सिंचाई परियोजनाओं ने मिट्टी संरक्षण पर फोकस करके विकास प्रदान कर रही है। सरकारी साझेदारियों के साथ NGO के सहयोग से सौर ऊर्जा सिंचाई परियोजनाएं कुशल मॉडल पेश किए है।
जुआंग समुदाय का यह विकास मॉडल इस बात का जीवंत उदाहरण है की समावेशी नीतियां और जमीनी स्तर पर सहभागिता कैसे भारत के आदिवासी लोगों की गरिमा और अवसरों को पुनः स्थापित कर सकती है।
निष्कर्ष
अब जुआंग जनजाति अलग-थलग और असुरक्षित नहीं है बल्कि अब ये परंपरा एवं आत्मविश्वास पर आधारित अपने प्रगति के मार्ग को बना रहे है। जुआंग लोगों के लिए विकास उनकी विरासत को बदलने मे नहीं बल्कि उसे मजबूत करने मे है। और इसके लिए हर पहल मे उनकी सहभागिता और उनके साथ मिलकर ही उस पहल को आकार प्रदान की जाए ऐसी होनी चाहिए।
साथ ही बहुत सारे योजनाएं अभी भी उनके पहुंच से दूर है जो आदिवासी विकास के लिए देश मे संचालित किए जा रहे है। उन योजनाओ तक भी पहुंच बढ़ाने के प्रयास उनके साथ मिलकर सुनिश्चित करने की जरूरत है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. जुआंग जनजाति कौन है?
उत्तर: जुआंग जनजाति भारत की एक आदिवासी जनजाति है जो ओडिसा के क्योंझर जिले मे निवास करती है। इसकी कुछ मात्रा झारखंड मे भी निवास करती है।
2. जुआंग विकास एजेंसी की क्या भूमिका है?
उत्तर: जुआंग विकास एजेंसी जिसका स्थापना 1978 मे हुआ था इस जनजाति के सहभागिता के साथ सामाजिक,आर्थिक,शैक्षिक एवं इनका समग्र समावेशी विकास प्रदान किया जा सके।
3. जुआंग विकास एजेंसी किन क्षेत्रों मे काम करती है?
उत्तर: जुआंग विकास एजेंसी मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों मे काम करती है-
- सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय सुरक्षा।
4. जुआंग जनजाति की मुख्य आजीविका क्या है?
उत्तर: जुआंग जनजाति मुख्य रूप से जंगल से उत्पाद एकत्र करना,झूम खेती और हस्तशिल्प जसे वस्तुएं बनाना जैसे काम करते है।
5. जुआंग जनजाति मे महिलाओ की स्थिति क्या है?
उत्तर: महिलाएं भी स्वतंत्र रूप से स्वयं सहायता समूह के माध्यम से जीविकोपार्जन का कार्य कर रही है और ग्राम समितियों मे नेतृत्व भी करने लगी है।
6. जुआंग जनजाति की जनसंख्या कितनी होगी देश मे?
उत्तर: वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इनकी जनसंख्या देश मे लगभग 47,000 थी।