भारत की "बीज विरासत":NBPGR और कम्युनिटी सीड बैंक के माध्यम से सुरक्षित होता कृषि का भविष्य

भारत का नेशनल जीन बैंक NBPGR और कम्युनिटी सीड बैंक का परंपरग बीज संरक्षण में योगदान

  • भारत की बीज विरासत क्या है?
  • NBPGR और कम्युनिटी सीड बैंक का महत्व
  • क्लाइमेट चेंज और फूड सिक्युरिटी में बीज संरक्षण का महत्व
  • हाइब्रिड और पारंपरिक बीज का तुलनात्मक अध्ययन
  • भविष्य की खेती और निष्कर्ष

Seed Conservations in india with NBPGR and Community Seed Bank
Sustainable Lifestyle और खाद्य सुरक्षा के लिए पारंपरिक बीज संरक्षण 


प्रस्तावना(Introduction)


भारत सदियों से कृषि प्रधान देश रहा है। हमारी सभ्यता,संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार खेत और किसान रहे है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खेती की असली ताकत क्या है ? ट्रैक्टर,उर्वरक या सिंचाई ! बिल्कुल नहीं ! बल्कि -बीज ही खेती की असली ताकत है। 

बीज केवल अनाज का स्रोत ही नहीं होता है,बल्कि यह जैव विविधता,परंपरा और भविष्य की सुरक्षा का आधार है। पिछले कुछ दशकों में और खासकर 'हरित क्रांति' के बाद हमने उत्पादन बढ़ाने के लिए 'हाइब्रीड' और 'जीएम'(GM-Genetically Modified) जैसे व्यावसायिक बीजों का प्रयोग बढ़ा दिया है। 

इससे उत्पादन तो बढ़ा है इसमें कोई संकोच ही नहीं है, लेकिन इससे हमारी हजारों पारंपरिक देशी बीज कि किस्में धीरे धीरे लुप्त होने लगी है।   

आज जब जलवायु परिवर्तन के इस दौर में सूखा,अनिश्चित वर्षा,कीटों के साथ नई बीमारियों और प्राकृतिक आपदाओं से हमारा सामना हो रहा है तब,इस 'बीज विविधता' (Seed Diversity) का महत्व और भी बढ़ गया है और हमें समझ भी आने लगा है। अब यही वह समय है जब भारत की इस 'बीज विविधता' को समझना और संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। 

इस दिशा में दो महत्वपूर्ण स्तम्भ है -
  • NBPGR:(National Bureau of Plant Genetic Resources)
  • कम्युनिटी सीड बैंक:(Community Seed bank)
हम विस्तार से जानने और समझने की कोशिश करेंगे की कैसे ये दोनों संस्थानों के द्वारा मिलकर हमारी 'लुप्त होई बीज विरासत' को सहेज कर भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ले जा रही है। 

भारत की बीज विरासत क्या है ?

भारत दुनिया के उन देशों में से एक है जहां जैव विविधता अत्यंत समृद्ध है। भारत की 'बीज विरासत'(Seed Heritage) भी केवल कृषि का हिस्सा नहीं है,बल्कि यह हजारों वर्षों की सभ्यता,विज्ञान और संस्कृति का निचोड़ है। इसें हम "जीवित विरासत" भी कहते है क्योंकि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी किसानों के द्वारा बचाई और सवारी गई है। 

1. जैव विविधता का खजाना (Immense Biodiversity):

भारत दुनियां के 12 प्रमुख 'Mega-Biodiversity' केंद्रों में से एक है। 
  • चावल की विविधता: एक समय भारत में चावल की लगभग 1,10,000 से अधिक किस्में मौजूद थी। देश के हर क्षेत्र की अपनी खास किस्म होती थी,जैसे पश्चिम बंगाल का "तुलाईपंजी" मणिपुर का "काला चावल" और केरल का "पोक्कली" जो खारे पानी में भी उग सकता है। 
  • अनाज और दलहन: हमारे पास गेहूं,बाजरा,अरहर और मूंग की ऐसी हजारों किस्में है जो अलग-अलग जलवायु के लिए अनुकूलित है। 

2. पारंपरिक ज्ञान और संरक्षण तकनीक:

हमारी बीज विरासत में केवल बीज शामिल नहीं है,बल्कि उन्हे रखने के 'देशी विज्ञान' भी शामिल है। 
  • बीज भंडारण: बीजों को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी की बर्तनों,बास की टोकरियों और लकड़ी के संदूकों का उपयोग किया जाता रहा है। 
  • प्राकृतिक उपचार: बीजों को कीटों से बचाने के लिए उनमें नीम की पत्तियां,सूखा राख,चुना और हल्दी को मिलाया और लेप किया जाता रहा है। 
  • बीज चयन: किसान उन सभी बीजों में से सबसे बाली,पुष्ट और स्वस्थ्य बीजों को ही चुनते थे जिससे फसल की गुणवत्ता बनी रहती थी। 

3. सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव:

भारत में बीजों को 'बीज भगवान' के रूप में पूजा जाता है। 
  • देश में बहुत सारे त्योहारों को नई फसलों और बीजों के सम्मान में मनाया जाता है। 
  • बीजों का आदान-प्रदान गांव में भाईचारे और सामुदायिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। 

4. बीजों की स्मृति (Genetic Memory):

  • परंपरिक बीजों में एक जेनेटिक मेमोरी' होती है। वे जानते है कि उस विशेष मिट्टी और वातावरण में कैसे जीवित रहना है। हाइब्रीड बीजों के विपरीत,ए बीज रसायनों के बिना भी पोषण से भरपूर होते है।

इसीलिए इन पारंपरिक बीजों को सुरक्षित और संवर्धित रखने के लिए देश में दो स्तर -संस्थागत स्तर और समुदायिक स्तर पर काम हो रहे है ताकि हमारी बीज विरासत से देश की 'खाद्य संप्रभुता'(Food Sovereignty) भी सुरक्षित रहे। 

बीज संरक्षण क्यों जरूरी है ?

बीज संरक्षण (Seed Conservation) आज के समय में अब केवल खेती का ही हिस्सा नहीं रह गया है,बल्कि यह मानवता की सुरक्षित भविष्य के लिए एक 'जीवन बीमा'(Life Insurance) की तरह महत्वपूर्ण हो गया है। निम्न बिंदुओं में इसे समझ सकते है -


1. खाद्य सुरक्षा (Food Security):

दुनिया की बढ़ती आबादी के लिए भोजन सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है। यदि हमारे पास बीजों की विविधता नहीं होगी और हम केवल 2-3 किस्मों पर ही निर्भर रहेंगे, तो किसी एक बीमारी या प्रकृतिक आपदा से पूरी फसल बर्बाद हो सकती है,जिससे अकाल की स्थिति पैदा हो जाएगी। 
  • जबकि बीज संरक्षण हमें भोजन के कई विकल्प देता है। 


2. जलवायु परिवर्तन से लड़ने की क्षमता (Climate Resilience):

आजकल मौसम अनिश्चित हो गया है --कही सूखा पड़ता है तो कही अचानक से बाढ़ आ जाती है।जलवायु परिवर्तन और जलवायु वित्त का प्रबंधन आज के समय में चुनौतुपूर्ण होता जा रहा है। इस स्थिति में -
  • पारंपरिक बीज हजारों सालों के मौसम को झेल कर विकसित हुए है। 
  • हमारें पास ऐसे बीज है जो खारे पानी में उग सकते है या जो बिना पानी के भी जीवित रह सकते है। जबकि हाइब्रीड बीजों में यह गुण नहीं होता है। 


3. पोषण और स्वस्थ्य (Nutrition):

आधुनिक हाइब्रीड बीजों को वजन और दिखावट बढ़ाने के लिए बनाया जाता है,जिनसे उनमें सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। बीज संरक्षण से हम उन विरासत (Heirloom) किस्मों को बचाते है जो औषधीय गुणों से भरपूर है और कुपोषण को दूर करने में सहायक है। 


4. किसानों की आर्थिक स्वतंत्रता (Economic Independence):


जब किसान अपना बीज खुद संरक्षित करता है,तो उसे हर साल बड़ी कंपनियों से महंगी बीज खरीदनें के लिए कर्ज नहीं लेना पड़ता है। पारंपरिक बीज किसानों को आत्मनिर्भर बनाता है और उनकी खेती की लागत को बहुत कम कर देता है। 


5. जैव विविधता का संरक्षण (Preserving Biodiversity):


प्रकृति का संतुलन विविधता पर टीका हुआ है। यदि हम केवल एक जैसी फसलें उगाने लगेंगे तो मिट्टी की उर्वरता कम हो जाएगी,और मित्र कीट लुप्त हो जाएंगे। बीज संरक्षण मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। 


6.आनुवंशिक शोध का आधार (Base for Genetic Research):


भविष्य में नई और बेहतर फसलें विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों को 'रॉ मैटेरियल' के रूप में पुरानी और जंगली बीजों की जरूरत होती है। NBPGR जैसे संस्थानों में संरक्षित बीज वैज्ञानिकों के लिए एक पुस्तकालय की तरह काम करते है,जहां से वे नई प्रतिरोधक क्षमता के गुण वाले किस्में विकसित कर लेते है। 

7. पारंपरिक बीजों का महत्व:

ऊपर उल्लिखित विवरणों से ये स्पष्ट हो जाता है कि पारंपरिक बीजों का देश की बीज विरासत को बचाए रखने और खाद्य सुरक्षा,जलवायु परिवर्तन से बचाव,पोषण और स्वस्थ्य,जलवायु विविधता को बचना,किसानों की आर्थिक स्वतंत्रता एवं देश में शोध के लिए जरूरी है। 

एक चार्ट के माध्यम से समझते है कि पारंपरिक बीज हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है -


फसल का नाम

क्षेत्र/राज्य

प्रमुख विशेषता और लाभ

क्यों बचाना जरूरी है?

काला नमक चावल

उत्तर प्रदेश (सिद्धार्थनगर)

इसे "बुद्ध का प्रसाद" कहा जाता है। इसमें जबरदस्त सुगंध और ओमेगा-3 व 6 होता है।

यह मधुमेह (Diabetes) के रोगियों के लिए अच्छा है और सूखा सहने में सक्षम है।

नवारा चावल

केरल

यह अपनी औषधीय शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। इसका उपयोग आयुर्वेद में उपचार के लिए होता है।

यह रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है और हड्डियों को मजबूत करता है।

सोना मोती गेहूँ

पंजाब/हरियाणा

यह प्राचीन किस्म का गेहूँ है जिसमें 'ग्लूटेन' बहुत कम और 'फोलिक एसिड' बहुत अधिक होता है।

यह रक्तचाप (BP) और शुगर को नियंत्रित करने में सहायक है।

ब्लैक राइस (चक-हाओ)

मणिपुर

यह गहरे काले रंग का होता है और एंथोसायनिन (एंटी-ऑक्सीडेंट) से भरपूर होता है।

यह कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।

सिद्दि विनायक अरहर

महाराष्ट्र/कर्नाटक

यह कीटों के प्रति बहुत प्रतिरोधी है और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है।

रासायनिक कीटनाशकों के बिना भी इसे आसानी से उगाया जा सकता है।

कंगनी (Millets)

राजस्थान/मध्य भारत

यह एक प्राचीन मोटा अनाज है जो फाइबर और खनिजों से भरपूर होता है।

यह सबसे खराब जलवायु और कम उपजाऊ मिट्टी में भी उग सकता है।




उपरोक्त विवरणों से स्पष्ट हो जाता है कि बीज संरक्षण इसलिए जरूरी है कि भारत की बीज विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं,बल्कि भविष्य की सुरक्षा है। यदि हम आज बीजों को बचाते है,तो आनेवाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध कृषि सुनिश्चित कर सकते है।
 

भारत का बीज प्रहरी--NBPGR क्या है ?

1. NPGR का परिचय:

राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरों (National Bureau of Plant Genetic Resources) भारत में पादप आनुवंशिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए सर्वोच्च निकाय है। इसकी स्थापना 1976 में की गई थी। 

इसका मुख्य उदेश्य है -
  • बीज संग्रह:देश की कृषि जैव विविधता को एकत्र करना,मूल्यांकन करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए बीजों को संरक्षित करना। 
  • बीज शोध: यह संस्था 'भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद' ICAR के अंतर्गत काम करती है। इसका मुख्य काम बीजों का अनुसंधान करना और उन्हें विकसित करना है।
  • जर्मप्लाज्म संरक्षण: यानि पौधों की आनुवंशिक सामग्री को विशेष परिस्थितियों में सुरक्षित रखना। 
  • जीन बैंक: इसके पास भारत का राष्ट्रीय जीन बैंक है,जहां लाखों बीज सुरक्षित रखे गए है। 


2. नेशनल जीन बैंक (National Gene Bank):

NBPGR का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका नेशनल जीन बैंक है, जो दुनियां के सबसे आधुनिक और बड़े जीन बैंको में से एक है। 
  • संरक्षण की तकनीक: यहां बीजों को दीर्घकालिक भंडारण के लिए 18 डिग्री सेल्सियस से 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा जाता है। 
  • क्षमता: इस बैंक में लाखों बीजों के नमूनों को संरक्षित करने की क्षमता है। 
  • क्रयोंप्रीजर्वेशन: यहां तरल नाइट्रोजन (-196 डिग्री सेल्सियस)का उपयोग करके पौधों के उत्तकों और बीजों को संरक्षित किया जाता है, जो सदियों तक सुरक्षित रह सकते है। 


3. किसानों और वैज्ञानिकों के लिए महत्व:

NBPGR केवल स्टोर हाउस नहीं है। बल्कि -
  • जब भी वैज्ञानिकों को ऐसी फसल विकसित करनी होती है जो सूखे को झेल सके,या जिसमें विटामिन की मात्रा अधिक हो,तो वे NBPGR के खजानें से पुरानें जर्मप्लाज्म को निकालते है। 
  • इसी विधि से बासमती की नई किस्म विकसित की गई है और की जा रही है। 
  • इसीलिए इससे देश के किसानों को लाभ पहुंचता है। 

नोट: आप अधिक जानकारी के लिए NBPGR की वेबसाइट पर विज़िट कर सकते है। अभी तक के जानकारी के आधार पर यहां पर कुल जमा बीजों की संख्या 4.5 लाख से भी अधिक है। 

नवीनतम आंकड़ों (2025-26) के अनुसार नई दिल्ली स्थित 'नेशनल जीन बैंक' में 4,71,000 से अधिक बीजों के नमूनों का विशाल संग्रह किया गया है। 

यहां प्रमुख फसलों और उनके संग्रह को चार्ट में भी देख सकते है -

फसल श्रेणी (Crop Category)

संग्रह की संख्या (Approx. Accessions)

मुख्य फसलें

अनाज (Cereals)

~1,70,000+

धान (1,03,538), गेहूं (21,107), मक्का (14,221), जौ।

मोटा अनाज (Millets)

~60,000+

ज्वार (13,742), बाजरा (9,074), रागी (12,918)।

दलहन (Grain Legumes)

~70,000+

चना (16,300), अरहर (14,436), मूंग, उड़द।

तिलहन (Oilseeds)

~45,000+

मूंगफली (12,014), तिल (10,275), सरसों, सोयाबीन।

सब्जियां (Vegetables)

~30,000+

मिर्च (8,069), भिंडी (4,462), बैंगन (6,251), टमाटर।

मसाले और औषधीय पौधे

~28,000+

हल्दी, काली मिर्च, अदरक और विभिन्न जड़ी-बूटियाँ।

रेशेदार फसलें (Fibre)

~18,000+

कपास (14,202), जूट, सनहेम्प।

फल और मेवे

~8,000+

आम, नींबू प्रजाति (Citrus), सेब, अखरोट।

 

स्मरणीय तथ्य:
  • स्थान: भारत का नेशनल जीन बैंक दुनियां में दूसरे स्थान पर आता है। 
  • कुल प्रजातियां: यहां 2,157 से अधिक विभिन्न पौधों की प्रजातियों के बीजों को संग्रहीत किया गया है। 
  • भविष्य का लक्ष्य: भारत सरकार ने बजट 2025-26 में एक और दूसरे नेशनल जीन बैंक की स्थापना का लक्ष्य रखा है जिनमें 10 लाख बीजों के नमूनों को संग्रहीत करने की क्षमता होगी। 

Seed Bank of India by NBPGR
NBPGR के संग्रहीत बीजों का नमूना 


कम्यूनिटी सीड बैंक क्या है ?

जीन बैंक जहां बीजों को फ्रीजर में रखते है,वही कम्युनिटी सीड बैंक उन्हें खेतों में जीवित रखते है। 


1. कम्युनिटी सीड बैंक क्या है ?

  • यह स्थानीय किसानों का एक समूह होता है जो अपने क्षेत्र की पारंपरिक और देशी किस्म के बीजों को एकत्र करते है,उसे उगाते है और आपस में बांटते है। इसे बीजों का पुस्तकालय भी कहा जा सकता है। 


2. कार्यप्रणाली - साझा विरासत और साझा जिम्मेदारी:

  • बीज संग्रहण: गांव के बुजुर्ग और अनुभवी किसानों से पुरानें बीज इकठ्ठे किए जाते है। 
  • बीज ऋण: बैंक किसी किसान को बुआई के लिए 5 किलों बीज देता है। 
  • वापसी: फसल कटनें के बाद किसान 10 किलो बीज बैंक को वापस करता है। इससे बैंक का स्टॉक बढ़ता रहता है। 

3. CSB के लाभ:

  • कम लागत: किसानों को महंगे हाइब्रीड बीज खरीदनें के लिए कर्ज नहीं लेना पड़ता है। 
  • अनुकूलन: देशी बीज स्थानीय मिट्टी और जलवायु के प्रति अधिक सहनशील होते है। 
  • पोषण: पारंपरिक किस्म में सूक्ष्म पोषक तत्व हाइब्रीड की तुलना में अधिक होते है। 
  • जैविक खेती को बढ़ावा: स्थानीय किस्म जैविक खेती के लिए अनुकूल होते है। 

सरकारी योजनाएं और कानूनी अधिकार 

बीज संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने कई मजबूत कदम उठाए है -

1. PPV & FR Act - 2001:

"पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम" दुनिया का एकमात्र ऐसा कानून है जो किसानों को 'प्रजनक' (Breeder) के समान अधिकार देता है।क्योंकि पहले कई किसान अपने से बीजों का खोज कर चुके थे लेकिन उनको अपनी विकसित बीज का अधिकार नहीं मिल पाया । 

जैसे शक्तिशाली ग्रामीण उद्यमी 'दादाजी रामाजी खोबरागड़े' ने HMT धान की नई किस्म का खोज किया था। 
  • इस कानून के तहत किसान अपनी संरक्षित किस्म का पंजीकरण करा सकते है। 
  • यदि कोई बड़ी कंपनी किसान के बीज का उपयोग करती है,तो किसान को उसका रॉयल्टी/मुआवजा पाने का अधिकार यह कानून प्रदान करती है। 

2. पादप जीनोम संरक्षक पुरस्कार (Plant Genome Savior Award):

NBPGR और कृषि मंत्रालय उन किसानों या समुदायों को लाखों का पुरस्कार प्रदान करते है जिन्होंने दुर्लभ बीजों को लुप्त होने से बचाया है। यह किसानों को संरक्षक बनने के लिए प्रेरित करती है। 

(कम्युनिटी सीड बैंक के पोर्टल पर जाकर आप और भी विस्तार से जानकारी प्राप्त के सकते है।)

केस स्टडी: सीड संरक्षक किसान 

भारत में कई ऐसे किसान है जो प्राचीन और परंपरागत बीजों को संरक्षण करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है और उनके काम से उनकी पहचान बन गई है। 
  • राहीबाई पोपेरे: इनको 'सीड मदर'(Seed Mother) उपनाम से जाना जाता है। महाराष्ट्र की राहिबाई नें सैकड़ों देशी किस्मों को बचाया है,इनके लिए उनको 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया है। 
  • साबरमती और विनायक हेगड़े: इन्होंने ओडिसा और कर्नाटक में हजारों चावल की किस्मों का बैंक बनाया है। 

बीज संरक्षण प्रक्रिया का मार्गदर्शिका (for Blog Readers):

यदि आप और हम में से कोई किसान या गार्डेन प्रेमी अपने स्तर पर बीजों को संरक्षित करना चाहता है,तो उसे इन चरणों का पालन करना चाहिए -
  • स्वस्थ्य पौधे का चयन: बीज केवल उन्ही पौधों से ले जो सबसे मजबूत और रोगमुक्त हो। 
  • पूर्ण परिपक्वता: बीजों को तभी निकाले जब फल पूरी तरह पक जाए। 
  • सुखाना:देशी उपचार: भंडारण के लिए मिट्टी के बर्तनों में नीम के पत्ते,सुखी राख या चुने का उपयोग करें। यह कीड़ों को दूर रखता है। 

संक्षेप में कहा जाए तो,बीज बचाना मतलब जीवन बचाना है। यदि हम आज बीजों को संरक्षित नहीं करते है,तो हम न केवल अपनी विरासत को खो देंगे,बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक असुरक्षित और रसायनों पर निर्भर भविष्य को छोड़ देंगे। 

ताजा खबर:
ताजा खबर यह है कि भारत में बीज विकास पर काम तेज हुआ है।कृषि मंत्री के अनुसार सरकार ने 2026 की शुरुआत में करीब 185 नई उपज वाली उच्च किस्मों को जारी किया है। जिनमें भले ही कुछ हाइब्रिड किस्म भी है।लेकिन अधिकतर देशी बीज ही है।

वर्ष 2024 में 109 उन्नत किस्में जारी की गई थी जो उच्च उपज, जलवायु सहनशीलता और पोषण सम्पन्नता पर केंद्रित थी।

हाइब्रिड बीजों से क्या नुकसान है ?

हाइड्रिड बीजों (Hybrid seeds) ने उत्पादन बढ़ाने में निश्चित रूप से मदद की है, लेकिन एक Sustainable Lifestyle और पर्यावरण के नजरिए से इसके कई गंभीर नुकसान भी है। जैसे -
  • आर्थिक निर्भरता (Economic Dependency): हाइब्रिड फसलों और बीजों का सबसे बड़ा नुकसान ये है की इसे हर साल नया खरीदना पड़ता है। इससे किसान बीजों के लिए बड़ी निजी कंपनियों पर पूरी तरह से निर्भर हो जाते है। 
  •  खेती कि उच्च लागत: हाइब्रिड बीज भी केवल तभी अच्छे उत्पादन प्रदान करते है जब उन्हे भारी मात्रा में रासायनिक खाद और कीटनाशक दिए जाते है। साथ ही इसमें ज्यादा पानी की भी जरूरत होती है। इससे कृषि की लागत बहुत बढ़ जाती है। 
  • पोषण की कमी: हाइब्रिड को मुख्य रूप से दिखावट (चमक-दमक) के लिए लैब में तैयार किया जाता है। इनमें सूक्ष्म पोषक तत्व और स्वाद काफी कम मात्रा में होता है। 
  • मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान: चुकी इन बीजों को रसायनों की भारी मात्रा में जरूरत पड़ती है,जिनके लगातार उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर हो जाती है। मिट्टी बंजर होने लगती है और रसायनों के रिसाव से भूमिगत जल भी प्रदूषित होने लगता है। 
  • जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता: हाइब्रिड नाजुक होते है। इनमें सहनशीलता कम होती है और अचानक तापमान बढ़ने या कम होने या ज्यादा पानी बारिश आदि को नहीं झेल पाते है और नष्ट हो जाते है जिससे किसानों को नुकसान ज्यादा हो जाता है। 
  • जैव विविधता का ह्रास: लगातार हाइब्रिड के उपयोग करने से किसानों के पास उपलब्ध पारंपरिक बीज धीरें धीरें लुप्त होने लगते है। और यदि एक बार कोई बीज लुप्त हो जाती है तो उसे दुबारा वापस नहीं पाया जा सकता है। 
  • कीटों का बढ़ता प्रकोप: हाइब्रिड फसलें अक्सर कीटों को अपनी ओर आकर्षित करती रहती है। इसके कारण किसानों को और भी ज्यादा जहरीले कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है जिससे किसानों के साथ साथ समाज और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचती है। 
-- नीचे दिए गए चार्ट के माध्यम से इस विषय को आसानी से समझा जा सकता है --


तुलना का आधार

पारंपरिक / देशी बीज (Desi Seeds)

हाइब्रिड बीज (Hybrid Seeds)

स्त्रोत (Source)

ये प्राकृतिक रूप से विकसित होते हैं और पीढ़ियों से चले आ रहे हैं।

इन्हें लैब में दो अलग-अलग प्रजातियों के क्रॉस-ब्रीडिंग से बनाया जाता है।

बीज संप्रभुता

किसान फसल के बाद बीज बचा सकते हैं और अगले साल फिर से बो सकते हैं।

किसानों को हर साल बाजार से नए बीज खरीदने पड़ते हैं (ये दोबारा बोने पर अच्छे परिणाम नहीं देते)।

लागत (Cost)

ये लगभग मुफ्त या बहुत सस्ते होते हैं।

ये काफी महंगे होते हैं और पेटेंट के अधीन हो सकते हैं।

पोषण मूल्य

इनमें सूक्ष्म पोषक तत्व, स्वाद और सुगंध अधिक होती है।

इनका ध्यान मुख्य रूप से आकार और वजन बढ़ाने पर होता है, जिससे स्वाद और पोषण कम हो सकता है।

पानी की खपत

ये स्थानीय जलवायु के अनुकूल होते हैं और कम पानी में भी जीवित रह सकते हैं।

इन्हें बहुत अधिक सिंचाई और नियमित पानी की आवश्यकता होती है।

खाद और कीटनाशक

ये जैविक खाद (गोबर, वर्मीकम्पोस्ट) के साथ अच्छा प्रदर्शन करते हैं।

इन्हें रसायनिक उर्वरकों (Urea, DAP) और जहरीले कीटनाशकों की बहुत जरूरत होती है।

जलवायु सहनशीलता

ये सूखे, अत्यधिक गर्मी या अधिक बारिश को सहने में अधिक सक्षम होते हैं।

ये जलवायु परिवर्तन और तापमान में बदलाव के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं।

उपज (Yield)

उपज औसत होती है, लेकिन लगातार और स्थिर रहती है।

उपज शुरुआत में बहुत अधिक होती है, लेकिन मिट्टी की उर्वरता कम होने पर घट सकती है।



यही कारण है कि NBPGR और Community Seed Bank आज देशी बीजों को बचाने के लिए इतना जोर दे रहे है। सतत खेती (Sustainable Farming) के लिए हमें वापस फिर से उन बीजों की ओर मुड़ना होगा जो हमारी मिट्टी और हमारी सेहत के अनुकूल है।  

community seed bank for seed conservations
सीड कान्सर्वैशन में किसानों का योगदान अतुलनीय हैं। 


भविष्य की खेती कैसी होगी ?

पूरे विवरणों को गहराई से अध्ययन करने के बाद अब मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर भविष्य की खेती कैसी होगी। इसका सीधा सा उत्तर है कि - 

भविष्य की खेती में इन तीन चीजों के संतुलन होगा -
  1. पारंपरिक ज्ञान। 
  2. आधुनिक विज्ञान,और 
  3. स्थानीय भागीदारी। 
NBPGR जैसे संस्थान वैज्ञानिक स्तर पर बीजों को संरक्षित करेंगे और कम्युनिटी सीड बैंक गांव स्तर पर। 

👉सरकार और किसानों को क्या करना चाहिए -
  • बीज संरक्षण पर प्रशिक्षण की व्यापक व्यवस्था। 
  • हर जिलें में कम्युनिटी सीड बैंक की स्थापना। 
  • देशी किस्मों और उसकी खेती को प्रोत्साहन प्रदान करना। 
  • स्कूल और कॉलेज में जागरूकता अभियान चलाना। 

जब तक जागरूकता का स्तर नहीं बढ़ेगा पूरी तरह से बीज संरक्षण की दिशा में सफलता प्राप्त नहीं की जा सकेगी। साथ में जिला,ब्लॉक और पंचायत स्तर पर बीज संरक्षण के प्रयास की संरचना तेजी से विकसित करनी होगी। 

निष्कर्ष (Conclusion)

निष्कर्ष के तौर पर यह तो स्पष्ट हो गया है कि बीज केवल मिट्टी में बोया जाने वाला एक दाना नहीं है,बल्कि यह वह कड़ी है जो हमें हमारे अतीत से जोड़ती है और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। आधुनिक खेती की दौड़ में हमने उत्पादन को तो बढ़ाया, लेकिन पोषण,पर्यावरण का स्वास्थ्य,और किसानों की आत्मनिर्भरता कही न कही पीछे छूट गयी। 

साथ ही हाइब्रिड बीजों का चमक और रसायनों के बोझ ने हमारी उपजाऊ मिट्टी को भी थका दिया है। 

NBPGR की अत्याधुनिक तकनीक और कम्युनिटी सीड बैंक का जमीनी आंदोलन हमें उम्मीद की एक नई किरण को दिखाते है। 

साथ ही सतत जीवनशैली (Sustainable Lifestyle) का मतलब तकनीक का विरोध करना नहीं,बल्कि तकनीक और परंपरा के बीच सही संतुलन बनाना है। हमें अपनी बीज संप्रभुता को बचाने के लिए, हम और आप भी मिलकर इस बदलाव का हिस्सा बन सकते है। 

आज से स्थानीय और पारंपरिक बीजों से उगाए गए अनाज को बढ़ावा दे,छोटे बीज बैंको का समर्थन करें और अपनी जड़ों की इन अनमोल विरासत को लुप्त होने से बचाने में सहयोग प्रदान करें। याद रखिए -
   
"जब किसान के हाथ में उसका अपना बीज होगा , तभी हमारा अन्न और भविष्य सुरक्षित होगा"

सादर धन्यवाद !!

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल(FAQ)


प्रश्न 1:पारंपरिक और देशी बीज हाइब्रिड बीजों से बेहतर क्यों है?
उत्तर: देशी बीज प्रकर्तिक रूप से स्थानीय जलवायु के प्रति अनुकूलित होते है। इनमें हाइब्रिड बीजों की तुलना में ज्यादा पोषण,बेहतर स्वाद और औषधीय गुण होते है। साथ ही इन्हें उगाने के लिए महंगे रासायनिक उर्वरक की आवश्यकता बहुत कम होती है।
प्रश्न 2: क्या हाइब्रिड से निकाले फसलों को बीज के रूप में दोबारा प्रयोग किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं! हाइब्रिड बीजों से निकले हुए फसलों के दानें यदि दोबारा बोया जाय तो,अगली फसल की पैदावार और गुणवत्ता बहुत कम हो जाती है। इसीलिए किसानों को हर साल नये हाइब्रिड बीजों को खरीदना पड़ता है।
प्रश्न 3:NBPGR में बीज जमा करने की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: यदि आपके पास कोई दुर्लभ या प्राचीन बीज है,तो आप NBPGR,नई दिल्ली से संपर्क कर सकते है। वें आपके बीज का परीक्षण करेंगे और यदि वह महत्वपूर्ण पय जाता है तो 'नेशनल जीन बैंक' में आपके नाम से सुरक्षित रखा जाएगया।
प्रश्न 4: कम्युनिटी सीड बैंक CSB कैसे काम करता है?
उत्तर:यह एक 'बीज पुस्तकालय' की तरह है। यहां किसान अपने बीज जमा करते है और अन्य किसान को बुआई के लिए उधर देते है। फसल कटनें के बाद किसान दुगुना करके बीजों को वापस बैंक में जमा कर देता है। इस प्रकार बीज चक्र चलता रहता है।
प्रश्न 5:क्या पारंपरिक बीजों का पैदावार हाइब्रिड बीजों से कम होता है?
उत्तर: शुरुआत में हाइब्रिड की उपज अधिक लग सकती है,लेकिन यदि आप लागत और लंबें समय में मिट्टी की स्वास्थ्य को देखें तो पारंपरिक बीज अधिक लाभदायक और स्थिर परिणाम देते है।
प्रश्न 6: भारत का नेशनल जीन बैंक दुनिया में किस स्थान पर है?
उत्तर: भारत का नेशनल जीन बैंक दुनिया के जीन बाँकों में दूसरा स्थान पर आता है जो आधुनिक तकनीकों से भी लैस है।
प्रश्न 7:घर पर बीजों को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
उत्तर: बीजों को पूरी तरह से सुखाकर नमी मुक्त कांच के जार या मिट्टी के बर्तन में रखे। कीड़ों से बचाव के लिए उसमें नीम की पत्तियां या लकड़ी की राख मिलाना एक अच्छा स्वदेशी तरीका है।
प्रश्न 8: क्या सरकार बीजों को बचाने वालों को कोई पुरस्कार देती है?
उत्तर: हां! भारत सरकार "पादप जीनोम संरक्षण पुरस्कार"प्रदान करती है। इसके तहत दुर्लभ किस्म के बीजों को बचाने वाले व्ययक्तिगत किसानों को या किसान समुदायों को 1 लाख से 10 लाख तक की सम्मान राशि दी जाती है।
प्रश्न 9:क्या जलवायु परिवर्तन में देशी बीज मददगार है?
उत्तर: बिल्कुल! देशी बीजों में सूखे,अत्यधिक गर्मी और अचानक आने वाली बाढ़ को सहन करने की प्राकृतिक क्षमता होती है। ये बीज भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए सबसे मजबूत हथियार है।


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