📑 Table of Contents
- ➤ प्रस्तावना(Introduction)
- ➤ सामान्य वस्तुएं जिनमें PFAS का उपयोग किया जाता है
- ➤ PFSA को "FIREVER CHEMICALS" क्यों कहा जाता है
- ➤ आखिर ये PFAS मानव शरीर में कैसे पहुंचते है
- ➤ PFAS के स्वास्थ्य पर पढ़ने वाले प्रभाव
- ➤ PFAS के जोखिम को कैसे कम करे
- ➤ विभिन्न अध्ययन क्या कहते है
- ➤PFAS को कैसे विनियमित किया जा सकता है
- ➤ भारत में क्या है स्थिति
- ➤ निष्कर्ष
- ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
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| PFAS हमारे आम जीवन में प्रवेश के चुका है, हमें इससे बचना होगा |
प्रस्तावना (Introduction)
PFAS यानी "पर - एंड पालीफ्लोरोअल्काइड सब्सटेंस"(Per -And Polyfluoroalkyl Substances - PFAs) सिंथेटिक रसायनों का एक समूह है जिसमें 9,000 से ज्यादा रसायनें सम्मति है।इन्हें "फॉरेवर केमिकल्स"(Forever Chemicals) भी कहा जाता है।
ये मानव निर्मित होते है यानी दूसरे शब्दों में कहे तो ये प्रकृति में नहीं पाई जाती है।इसकी सबसे मुख्य विशेषता यह है कि ये प्राकृतिक वातावरण में बहुत ही मुश्किल से विघटित होती है या कहे तो ये अपने से विघटित ही नहीं होती है इसलिए इन्हें "हमेशा के लिये रसायन"कहा जाता है।
रसायनों का ये समूह अब तो हरेक जगह पाया जाने लगा है जैसे कि पीने के पानी से लेकर खाद्य पैकेजिंग और घरेलू उत्पादों से लेकर यहां तक की अब मानव रक्त मे भी पाया जाने लगा है।ये रसायन गर्मी, तेल, पानी और दागों के प्रति प्रतिरोधी होते है जिस कारण से ये विभिन्न उद्योगों में बहुत उपयोगी भूमिका निभाते है और उपयोग किए जाते है।
सामान्य वस्तुएं जिनमें PFAS का उपयोग किया जाता है
आज के वर्तमान समय में हमलोग रोजमर्रा के जीवन में ऐसी अनेक वस्तुएं है जिनका प्रतिदिन इस्तेमाल करते है और उनमें PFAS की मात्रा पाया जाता है। जैसे -
- नॉन स्टिक कुकवेयर जैसे टेफलॉन पैन
- खाद्य पैकेजिंग खासकर फास्ट फूड रैपर
- जल प्रतिरोधी कपड़े और कालीन आदि
- अग्निशामक फोम
- औद्योगिक अपशिष्ट और दूषित जल
- सौंदर्य प्रसाधनों में
- इलेक्ट्रोनिक उपकरणों में जैसे स्मार्ट फोन
चूंकि PFAS का उपयोग बहुत व्यापक पैमाने पर होता है साथ ही इसे विघटित या नष्ट करना बहुत ही मुश्किल होता है इसलिए ये धीरे धीरे हमारी मिट्टी, पानी और हवा में भी प्रवेश कर गए है और घुल मिल गए है और अंततः हमारे शरीर में भी इन माध्यमों से पहुंच गए है।
PFSA को "FIREVER CHEMICALS" क्यों कहा जाता है
दुनिया में पाए जाने वाले अन्य रसायन समय के साथ स्वयं टूटते जाते है यानी अपने से ही विघटित होते जाते है लेकिन PFSA अत्यंत अस्थिर होते है और अपने से टूटते या विघटित नहीं होते है।
- ये पर्यावरण या मानव शरीर में भी नहीं विघटित होते है।
- इसका मतलब ये है कि उनकी संख्या बढ़ती जा रही है।
- पर्यावरण में भी और मानव शरीर मे भी,क्योंकि छोटी मात्रा में भी लगातार अवशोषित होते रहने से वर्षों तक हानिकारक स्वास्थ्य प्रभाव पैदा कर सकता है।
➢"वे हमारे साथ रहते है और संभवतः हमेशा के लिए"
आखिर ये PFAS मानव शरीर में कैसे पहुंचते है
जैसा कि हम ऊपर देख चुके है कि इसका प्रयोग आज के समय मे बहुत व्यापक पैमाने पर हो रहा है और ये स्थाई बने रहते है इसलिए हमारे शरीर में पहुंचने के ये सबसे आम तरीके है -
- दूषित पानी पीने से
- दूषित मिट्टी में उगाए गए खाद्य पदार्थ खाने से
- नॉन स्टिक बर्तनों के इस्तेमाल करने से
- दाग प्रतिरोधी उत्पादों के उपयोग करने से
- विनिर्माण संयंत्रों के पास हवा में सांस लेने से
- अपशिष्ट स्थलों के पास हवा में सांस लेने से
ये PFAS एक बार शरीर के अंदर पहुंचने के बाद वर्षों तक शरीर और रक्त प्रवाह में बने रहते है और धीरे धीरे और भी अधिक जमा होते रहते है और फिर उसी के अनुसार संभावित नुकसान पहुंचाते है।
PFAS के स्वास्थ्य पर पढ़ने वाले प्रभाव
दुनिया में PFAS के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे मे कई सारे व्यापक अध्ययन हुए है और सभी अध्ययन बताते है कि खासकर लंबे समय से शरीर मे रहने से ये कई सारे चिंतनीय स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते है जैसे कि -
- कैंसर का खतरा: PFAS के बहुत सारे प्रकारों से किडनी और वृषण कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है खासकर लंबे समय से शरीर मे बने रहने के कारण।
- हार्मोनल असंतुलन: यह अतः स्रावि तंत्र में असंतुलन और व्यवधान उत्पन्न करता है जिससे शरीर में हार्मोन अनियंत्रित हो जाते है।जिसके चलते प्रजनन संबंधी समस्याएं, थायराइड जैसी समस्याएं और बच्चों में विकास संबंधी विभिन्न व्यवधान उत्पन्न हो सकते है।
- लीवर और किडनी को नुकसान: अध्ययनों से पता चला है कि PFAS से लिवर,यकृत और गुर्दे की कार्यप्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप की समस्या बढ़ सकती है।
- प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाता है: यह टीकों के प्रभावशीलता को कम कर देता है और साथ ही संक्रमण से लड़ने की शारीरिक प्राकृतिक क्षमता को कमजोर कर देता है।
- गर्भावस्था और जन्म संबंधी समस्याएं: गर्भावस्था में इसके संपर्क से बच्चों में विभिन्न प्रकार की समस्याएं जैसे कम वजन होना,समय से पहले प्रसव होना और बच्चों के विकास से सम्बन्धित समस्याओं का पाया जाना शामिल है।
PFAS के जोखिम को कैसे कम करे
आज के समय मे PFAS से पूरी तरह बचना असंभव सा हो गया है हालांकि असली खतरा लंबे समय तक और बार बार संपर्क में आने से है।फिर भी विभिन्न उपायों और सावधानियों से इसके खतरे को कम किया जा सकता है यथा-
- फिल्टर किया हुआ पानी पीए: खासकर सक्रिय कार्बन या रिवर्स ऑस्मोसिस फिल्टर का उपयोग करे जो PFAS के स्तर को कम करते है।
- नॉन स्टिक कुकवेयर से बचे: आप स्टेनलेस स्टील या लोहे से बनी हुई बर्तनों का इस्तेमाल शुरु कर दे और नॉन स्टिक को हमेशा के लिए त्याग दे।
- पैकेज वाले खाद्य पदार्थों का त्याग करे: खासकर फास्ट फूड और पॉपकॉर्न के पैकेज को बिल्कुल इस्तेमाल करना बंद कर दे क्योंकि इन सबने PFAS हो सकते है।
- उत्पाद लेवल पढ़े: जहां तक संभव हो यदि उत्पादों पर "दाग प्रतिरोधी" या "जलरोधी" या "नॉन स्टिक" का लेवल हो ऐसी वस्तुओं के उत्पादों का प्रयोग बिल्कुल न करें।
- अपने स्थानीय जल की गुणवत्ता जांचते रहे: क्योंकि इससे मालूम हो जाएगा कि आपके जल में PFAS की मात्रा आ रही है और बढ़ी हुई है। जानकारी हो जाने पर बचाव का रास्ता तलाशा जा सकता है।
विभिन्न अध्ययन क्या कहते है
PFAS के बारे में विभिन्न अध्ययन हुए है और इनके निष्कर्ष बहुत ही चौंकाने वाले है जिनके बारे मे हमें जानकारी होनी चाहिए ताकि खुद भी जागरूक हो सके और लोगों को भी जागरूक कर सके --
- वर्ष 2001 में पूरे यूरोप में लोकप्रिय फास्ट फूड चेन,टेकअवे रेस्टोरेंट और सुपर मार्केट के डिस्पोजेबल खाद्य पैकेजिंग में PFAS रसायन पाए गए।
- वर्ष 2023 में IPEN के 18 सदस्यों के समूह के द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि 17 से अधिक एशिया, अफ्रीका,यूरोप,उतरी अमेरिका और लैटिन अमेरिका के कैरिबियाई देशों में प्राप्त एकल उपयोग खाद्य संपर्क सामग्रियों में PFAS पाए गए।
- वर्ष 2024 के अध्ययन में एशिया, अफ्रीक,यूरोप आदि के 13 से अधिक देशों मे खरीदे गए कपड़ों,टी शर्ट आदि में PFAS रसायन पाया गया।
PFAS को कैसे विनियमित किया जा सकता है
- स्टॉकहोम कन्वर्सेशन: "स्टॉकहोम कन्वर्सेशन ऑन परसिस्टेंस आर्गेनिक पॉल्यूटेंटस" जो एक अंतरराष्ट्रीय संधि है इसके अनुसार सरकारें और देश इन हानिकारक PFAS के उपयोग को कम करे और बंद करे साथ ही प्रतिबंधित करे ताकि इसके बढ़ते प्रभाव को तुरंत रोका जा सके।
- प्रत्येक देश इसके बारे में नियम बनाए: अभी भी बहुत सारे देशों में PFAS सम्बन्धित कोई नियम आदि नहीं है जिससे इसका धड़ले से उपयोग हो रहा है।समय रहते इसके विनियमन का नियम और कानून देशों को बनानी चाहिए।
- लोगों में जागरूकता पैदा करना: लोग अभी भी अनभिज्ञ है और बहुत सारे लोग तो इस तरह की जानकारी को मिलने पर बकवास समझने लगते है।अतः सही जागरूकता को पैदा करने के प्रयास जन भागीदारी प्रयासों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से मिलकर करनी होगी।
भारत में क्या है स्थिति
भारत की स्थिति भयावह है।सबसे पहली बात ये कि अभी तक भारत में PFAS को लेकर कोई विशिष्ट और व्यापक नियम नहीं है।जबकि अमेरिका और बहुत सारे यूरोपीय देशों में PFAS को लेकर कठोर नियम बन चुके है और वहां पर इससे सम्बन्धित कई सारे प्रतिबंध भी लगाए जा चुके है।
- भारत में इसके उत्पादन, उपयोग और वितरण की खुलेआम छूट है।
- यहां तक की सरकार के द्वारा इसके उत्पादन को बढ़ावा भी दिया जा रहा है ताकि निर्यात से देश को आय प्राप्त हो सके।
सरकार की इन्हीं नीतियों और उदासीनता के चलते देश के विभिन्न क्षेत्रों में मिट्टी और पानी में PFAS की बढ़ी हुई मात्रा मिलने लगी है।यहां तक की जिन औद्योगिक क्षेत्रों में इसके उत्पादन के कारखाने है उन क्षेत्रों और उनमें काम करने वाली महिलाओं के दूध में भी PFAS की मात्रा मिलने की शिकायत मिल चुकी है।
अतः सरकार को चाहिए कि समय रहते ही एक सही और सख्त नियम और कानून इन PFAS रसायनों से संबंधित बनानी चाहिए।साथ ही इसके बारे में उचित जागरूकता को बढ़ावा देनेवाली कार्यक्रमों और गतिविधियों को भी तेज कर देनी चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
PFAS यानि "फॉरेवर केमिकल्स" आज मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के सामने एक गंभीर और छुपा हुआ खतरा बन चुका है। ये रसायन हमारे पानी,भोजन,हवा और रोजमर्रा की वस्तुओं में धीरे-धीरे और छुपकर प्रवेश कर चूकें है,और सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये आसानी से नष्ट नहीं होते है।
इसीलिए इन्हे नजरंदाज करना अब तो बिल्कुल भी संभव नहीं लग रहा है।
समय की मांग है कि ---सरकार,उद्योग और आम नागरिक तीनों मिलकर इस चुनौती का समाधान खोजें। सुरक्षित उत्पादों का चयन,प्लास्टिक और केमिकल के अनावश्यक उपयोग में कमी करना,स्वच्छ जल स्रोतों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाना --ये ऐसे छोटे-छोटे कदम है जो मिलकर बड़े बदलाव की शुरुआत के सकते है।
यदि हम आज ही सावधानी और जिम्मेवारी नहीं दिखाएंगे, तो हमारी आने वाली पीढ़ियां इसका भरी कीमत चकाएंगी और हमें इसके लिए जिम्मेदार ठहराएंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1:PFAS क्या होते है? ▼
उत्तर: PFAS (Per- and Polyfluoroalkyl Substances) ऐसे कृत्रिम रसायन हैं जो पानी, तेल और गर्मी से बचाने के लिए बनाए जाते हैं। ये बहुत धीरे-धीरे नष्ट होते हैं, इसलिए इन्हें “Forever Chemicals” कहा जाता है।
प्रश्न 2: PFAS हमें किं चीजों में मिल सकते है? ▼
उत्तर: ये रसायन आमतौर पर नॉन-स्टिक बर्तन, फास्ट-फूड पैकेजिंग, वाटरप्रूफ कपड़े, कॉस्मेटिक्स, फायर-फाइटिंग फोम और कुछ प्लास्टिक उत्पादों में पाए जाते हैं।
प्रश्न 3:PFAS हमारे शरीर में कैसे प्रवेश कर सकते है? ▼
उत्तर: मुख्य रूप से तीन तरीकों से:
दूषित पानी पीने से
पैकेज्ड या प्रोसेस्ड फूड खाने से
हवा और धूल के माध्यम से
प्रश्न 4:PFAS का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? ▼
उत्तर:लंबे समय तक संपर्क से:
हार्मोन असंतुलन
इम्यून सिस्टम कमजोर होना
थायरॉयड समस्या
कैंसर का खतरा बढ़ना
जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
प्रश्न 5:इन्हें “Forever Chemicals” क्यों कहा जाता है? ▼
उत्तर: क्योंकि ये पर्यावरण और शरीर में बहुत लंबे समय तक बने रहते हैं और आसानी से टूटते नहीं हैं।
प्रश्न 6: क्या भारत में भी PFAS का खतरा है? ▼
उत्तर: हाँ। औद्योगिक विकास, प्लास्टिक उपयोग और केमिकल प्रोडक्ट्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण भारत में भी PFAS प्रदूषण की चिंता बढ़ रही है।
प्रश्न 7:PFAS से बचने के लिए घर पर क्या सावधानियाँ अपनाएँ? ▼
उत्तर: नॉन-स्टिक बर्तनों का सीमित उपयोग करें
पैकेज्ड और फास्ट फूड कम खाएँ
पानी को फिल्टर करके पिएँ
“PFAS-free” उत्पादों का चयन करें
प्रश्न 8:क्या पानी उबालने से PFAS हट जाते है? ▼
उत्तर: नहीं। साधारण उबालने से PFAS नहीं हटते। इसके लिए विशेष फिल्टर (Activated Carbon या Reverse Osmosis) अधिक प्रभावी होते हैं।
प्रश्न 9:PFAS प्रदूषण को कम करने में सरकार और समाज की क्या भूमिका है? ▼
उत्तर: सख्त नियम, सुरक्षित औद्योगिक नीतियाँ, जल शुद्धिकरण और जनजागरूकता अभियान—ये सभी मिलकर PFAS के खतरे को कम कर सकते हैं।
