📑 Table of Contents
- ➤ प्रस्तावना
- ➤ हम खाना क्यों खाते है?र
- ➤ हमे क्या क्या खाना चाहिए?
- ➤ कब कब भोजन करना चाहिए?
- ➤ चरक संहिता के अनुसार भोजन करने के 10 अनमोल नियम
- ➤ स्वास्थ्य रहने के लिए खाना बनाने के नियम बदले
- ➤ उपवास रोग निवारक और शक्तिवर्धक
- ➤ रसाहर प्रकृति का चमत्कारष
- ➤विशिष्ट रसहार की सामग्री
- ➤ निष्कर्ष
- ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
![]() |
| भोजन करने के 10 अनमोल नियम |
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी मे हम अपनी सेहत का ध्यान रखना लगभग भूल से गए है।लेकिन क्या आप जानते है की स्वस्थ्य रहने के लिए भोजन के नियम इतने ही जरूरी है जितना की खुद भोजन?अक्सर हम यह तो जानते है की क्या खाना चाहिए, लेकिन खाना कब,क्यों और कैसे खाना चाहिए इसपर हमारा ध्यान नहीं जाता।
गलत खान-पान और गलत भोजन के तरीके हमारी पाचन शक्ति को कमजोर कर देते है,जिससे कई बीमारियां जन्म लेती है। अगर आप भी हमेशा फिट और ऊर्जावान रहना चाहते है तो आयुर्वेद और विज्ञान पर आधारित भोजन के ये 10 अनमोल नियम आपकी पूरी जीवनशैली बदल सकते है।
हम खाना क्यों खाते है?
जब से हम जन्म लेते है शरीर को शक्ति की आवश्यकता होती है और इसके दो प्रमुख स्रोत है -
- नींद
- भोजन
- शक्ति के लिए और
- स्वाद के लिए
हम खाना पकाकर क्यों खाते है? --
- भले ही हम कह देते है की खाना पकाकर खाने से खाद्य वस्तुओ मे कीड़े आदि होती है उससे सुरक्षित हो जाती है पर मुख्यतः हमलोग तो खाना 'स्वाद' के लिए ही पकाकर खाते है।
हमे क्या क्या खाना चाहिए?
छांदोग्य उपनिषद मे कहा गया है कि -
आहारशुद्धोें सत्वशुद्धिः सत्वशुद्धोे ध्रुवास्मृतिः, स्मृतिलभ्ये सर्वग्रंथीनां ।
विप्रमोक्षस्तस्मै मृदित काषायाय तमसस्पारमं , दर्शयति भगवन् सनत्कुमारः।।
- अर्थात् आहार पवित्र होने से अंतःकरण पवित्र होता है। अंतःकरण की शुद्धि से विवेक,बुद्धि प्रखर होती है,उस विवेक से अज्ञानजन्य निविड़ बंधन खुलते है। यह ज्ञान नारद को भगवान सनत्कुमार ने दिया।
यानि हमारे ऋषि मुनियों के अनुसार हमारा भोजन निश्चय ही पवित्र होनी चाहिए साथ मे जो शरीर मे वात, पित्त और कफ की मात्रा को संतुलित भी करने की सामर्थ्य रखे।
आधुनिक वैज्ञानिक धारणा के अनुसार भी हमे संतुलित भोजन करनी चाहिए --जो निम्नानुसार होनी चाहिए -
- दूध एवं डेयरी पदार्थ:दूध एवं डेयरी पदार्थों मे शरीर के लिए कई आवश्यक पोषक तत्व एकसाथ मिल जाते है। अतः इनका सेवन भोजन मे रह गई बाकी कमी को पूरा करने मे सहायक होती है और पौष्टिकता को भी बढ़ाती है।
- कैलोरी: एक सामान्य व्यक्ति को प्रतिदिन 2000 कैलोरी का भोजन करना चाहिए। शारीरिक श्रम करने वाले 10-20 प्रतिशत अधिक अर्थात 2200-2400 कैलोरी तक का भोजन कर सकता है। जिनका शारीरिक श्रम बहुत कम हो वह 10-20 प्रतिशत कम अर्थात 1600-1800 कैलोरी का भोजन कम से कम करनी ही चाहिए।
- माप: सबसे बड़ा सवाल है प्रतिदिन कैलोरी की माप कैसे की जाय। इसका नियम यह है कि "जितनी भूख हो उससे कम भोजन करनी चाहिए" यानि जब भोजन करते करते भारी लगने लगे उससे पहले ही खाना छोड़ देनी चाहिए।
कब कब भोजन करना चाहिए?
भोजन कब कब खाना चाहिए यह देश और परिस्थितियों के हिसाब से निश्चित होनी चाहिए। साथ मे यह नियमबद्ध होनी चाहिए। हमेशा कही भी कभी भी जब मन मे आए तब भोजन नहीं करना चाहिए। यह नियमबद्ध होना चाहिए।
- सामान्य व्यक्ति को दिन मे दो बार भोजन पर्याप्त माना जाता है।
- श्रमशील व्यक्ति को प्रातः व्यायाम के बाद पौष्टिक नाश्ता भी करनी चाहिए।
- शाम को भोजन से 3 घंटे पहले हल्का नाश्ता करनी चाहिए।
- सुबह मे ऊषापान (पानी),दोपहर को छाछ और रात मे सोने से पहले दूध पीना अमृत समान है।
चरक संहिता के अनुसार भोजन करने के 10 अनमोल नियम
चरक संहिता मे भोजन करने के नियमों को गहराई से बताया गया है। इन नियमों का पालन हमारे यहां साधु-संत और अन्य धार्मिक आश्रमों से जुड़े हुए लोग करते है जिनका लाभकारी परिणाम उन्हे होता है। इन नियमों को कोई भी आम आदमी पालन कर सकता है और अपने को हमेशा स्वस्थ्य और निरोगी बनाए रख सकता है -
स्वास्थ्य रहने के लिए खाना बनाने के नियम बदले
खाना खाने के साथ-साथ पकाने की गलत विधि से भी खाद्य पदार्थों के अधिकांश पोषक तत्व नष्ट हो जाते है -
- कम तले-भुने: यदि आप चाहते है की आपका भोजन स्वास्थ्यवर्धक और पौष्टिक हो तो उसे पकाते समय कम से कम तले भुने।
- जरूरी छिलका न निकाले: प्रायः ऐसी चलन हो गई है की फलों और सब्जियों के छिलकों को बढ़िया से छिलका को निकाल कर उसे खाना बनाने या खाने मे प्रयोग किया जाता है। इससे उसके अधिकांश पोषक तत्व नष्ट हो जाते है -
(1.) आलू के छिलके मे एस्कार्बिक एसिड'(विटामिन-C) की अधिकांश मात्रा होती है छिलका निकाल देने पर 12-35% विटामिन-C नष्ट हो जाती है।
(2.) गाजर के छिलकों मे ही विटामिन-B काम्प्लेक्स, थियामिन, रिवाॅफ्लेबिन की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है।छिलका निकाल देने से हम इससे वंचित रह जाते है।
(3.) सेव के छिलकों मे 'एस्कार्बिक एसिड' उसके गुदे की तुलना मे 10% ज्यादा पाई जाती है।
(4.) एस्कार्बिक एसिड(विटामिन-C)स्कर्वी रोग,रक्तस्राव,एनीमिया और दांतों के टूटने से बचाता है। व्यक्ति के लिए प्रतिदिन एस्कार्बिक एसिड' की 70 मिलीग्राम मात्र की आवश्यकता होती है।
- छिलका सहित अनाज का उपयोग: सब्जियों की भांति ही आज कल अनाजों के छिलके निकाल दिए जाते है। ऐसा कम से कम करे और चोकर सहित आटे का उपयोग अधिक से अधिक करे। चावल को उसके अतिरिक्त जल (माड़) सहित बनाए व खाए।
- कृत्रिम रंगों से भोजन को बचाए: आजकल भोजन और भोज्य पदार्थों मे कृत्रिम रंगों का ज्यादा प्रयोग होने लगा है इससे बचने का प्रयास शुरू कर दे। उसके जगह पर प्राकृतिक रंगों जैसे-केशर,धनिया और अन्य वनस्पतियों से मिलने वाले रंगों का उपयोग करे। ये थोड़ा महंगा जरूर पड़ेगा लेकिन स्वस्थ्य के लिए सही रहेगा।
(आजकल फलों और सब्जियों मे कीटनाशकों का उपयोग ज्यादा हो रहा है इसलिए इनको उपयोग करने से पहले एक घंटे तक पानी मे भिंगोकर रखे)
उपवास रोग निवारक और शक्तिवर्धक
स्वस्थ्य रहने के लिए जितना महत्व नियम से भोजन करने का है, उतना ही ज्यादा महत्व नियम से उपवास रहने का भी है।
जिस प्रकार से व्यवस्थित रूप से कार्यालयों,कारखानों आदि को चलाने के लिए सप्ताह मे एक दिन अवकाश रहता है। ठीक उसी प्रकार से एक दिन उपवास रहने से हमारे शरीर के अंदर के कार्यालयों और कारखानों आदि के द्वारा व्यवस्थित और सुचारु रूप से कार्य सम्पादन होता है और हम स्वस्थ्य रहते है।
- उपवास का न करे दुरुपयोग: आज कल उपवास का चलन भी बढ़ गया है और उसके दुरुपयोग का भी। उपवास के दिन ज्यादा मात्रा मे फल,दूध-दही और अन्य चीजे खाई जाने लगी है जिससे उपवास का लाभ मिलने के जगह पर लोगों को इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे है।
- वास्तविक उपवास वह है जिसमे पानी तो बार-बार और अधिक मात्रा मे पिया जाए लेकिन पेट पर वजन डालने वाला कोई भी आहार न लिया जाय।
- अल्पाहार एक दिन: उपवास की तरह ही सप्ताह मे एक दिन अल्पाहार करे। इस दिन केवल सादा और सुपाच्य भोजन जैसे खिचड़ी का ही सेवन दोनों समय करे।
("रोगी को भूखा रखकर आप रोग को भूखा मार सकते है।")
"----आप जितना खाते है उसके आधे भोजन से आपका पेट भरता है,और आधे भोजन से डाक्टरों का पेट भरता है। आप आधा भोजन ही करे तो आप बीमार ही नहीं पड़ेंगे और डाक्टरों की कोई खास आवश्यकता नहीं रह जाएगी ---डॉ केनेथ वाकर।
रसाहर प्रकृति का चमत्कार
वर्तमान मे आहार वैज्ञानिकों का भी कहना है की रस के आहार(रसाहर) से शरीर को अतुल्य शक्ति प्राप्त होती है और साथ ही इससे रोग प्रतिरोधक शक्ति भी कई गुणा बढ़ जाती है। रसाहर(Juice)को कैसे ले -
- ताजे सामग्री का करे उपयोग: इसके लिए फल,सब्जी या अंकुरित अनाज आदि खाद्य पदार्थों को पूर्णतया ताजा ही उपयोग मे कर ले।
- फ्रीज या पुराने सामग्री न ले : फ्रीज मे रखे फल,सब्जी और अन्य खाद्य पदार्थों का उपयोग बिल्कुल न करे अन्यथा रसाहर का लाभ नहीं मिल पाएगा।
- ताजे रस का सेवन करे: लोग रस को निकाल कर रख देते है और दिन मे कई बार उसका सेवन करते है। ऐसा बिल्कुल न करे अन्यथा इसका उल्टा प्रभाव मिल सकता है।
- हाथ से चलने वाली मशीन से निकाले: रस को निकालने के लिए बिजली से चलने वाले मशीन की जगह हाथ से चलने वाली मशीन से निकाला गया रस ज्यादा पौष्टिक और स्वादिष्ट रहता है।
- खुजे या अपशिष्ट उपयोगी: रस निकालने के बाद बची हुई खुजे या अपशिष्ट को न फेंके। यह भी रसोई मे ताजी प्रयोग कर ले। ये खुजे पेट मे कब्जियत दूर करने मे कारगर होता है।
विशिष्ट रसहार की सामग्री
यहां कुछ विशिष्ट रसहार बनाने की सामग्री का विवरण दिया गया है जिसे आप अपनी जरूरत के अनुसार घर मे बनाकर स्वस्थ्य लाभ ले सकते है -
उपरोक्त रस सामग्री को अपने जरूरत के अनुसार कभी भी अपने घर पर बिल्कुल ताजे ताजे बनाकर इस्तेमाल करके अपना स्वस्थ्य लाभ ले सकते है।
कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि भोजन करना वाकई मे केवल स्वाद को ध्यान मे रख कर नहीं बल्कि सम्पूर्ण स्वस्थ्य के नजरिए से करना चाहिए।क्योंकि यह केवल शरीर ही नहीं बल्कि हमारे मन को भी प्रभावित करती है। इसीलिए कहा गया है की 'जैसा खाए अन्न वैसा रहे मन'।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1. स्वस्थ्य रहने के लिए सुबह का भोजन किस समय करना चाहिए?
उत्तर: आयुर्वेद और विज्ञान के अनुसार सुबह का नाश्ता या भोजन सूर्योदय के 2-3 घंटे के भीतर कर लेनी चाहिए। यह आपके मेटाबोलिज्म को दिनभर सही रखता है।
प्रश्न 2. क्या खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना सही है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। खाना खाने के बाद पानी पीने से जठराग्नि तुरंत शांत हो जाती है जिससे खाना पचने के बजाय सड़ने लगती है। खाना खाने के 45 मिनट से 1 घंटे बाद पानी पीना चाहिए।
प्रश्न 3. रात का खाना कब खाना चाहिए?
उत्तर: रात का भोजन सोने से पहले कम से कम 2-3 घंटा पहले कर लेनी चाहिए। इससे सोने से पहले ही भोजन का अधिक भाग पच चुका होता है जिससे नींद अच्छी आती है।
प्रश्न 4. क्या भोजन के तुरंत बाद टहलना सही है?
उत्तर: भोजन के तुरंत बाद तेज दौड़ना या भारी व्यायाम नहीं करना चाहिए, लेकिन 10-15 मिनट वज्रासन मे बैठना या 100 कदम धीमी गति से टहलना पाचन के लिए सही रहता है।
प्रश्न 5. क्या टीवी या मोबाईल देखते हुए भोजन करना चाहिए?
उत्तर: नहीं ये नुकसानदायक हो सकता है। क्योंकि मन स्क्रीन पर होने के कारण हमारा मस्तिष्क भोजन के बारे मे सही सूचना नहीं दे पता जिससे Overeating भी हो सकता है।
हमे भोजन और अपने स्वस्थ्य के बारे मे हमेशा जागरूक रहना चाहिए। कई बार हम जागरूक रहते हुए भी भोजन के नियमों का पालन नहीं करते है। ऐसी जागरूकता किस काम की जो शरीर और मन को भी लापरवाह बना दे। बल्कि भोजन तो ऐसा होना चाहिए की लापरवाह आदमी को भी तरोताजा और स्फूर्ति प्रदान कर दे।
