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| अपने खाने मे मोटा अनाज को मौसम के हिसाब से शामिल करे |
भारत मे मोटा अनाज (Millets) जिसे "श्री अन्न" भी कहा जाता है अब केवल पारंपरिक भोजन ही नहीं,बल्कि सुपर फूड बन चुका है। बदलती जीवनशैली,बढ़ती बीमारिया और जलवायु परिवर्तन के दौर मे मोटा अनाज एक ऐसा विकल्प है जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद है।
मोटा अनाज (Millets) क्या होता है
मुख्य मोटा अनाज -
- ज्वार (Sorghum Millet)
- बाजरा (Pearl Millet)
- रागी (Finger Millet)
- कोदो (Kodo Millet)
- कुटकी (Little Millet)
- सांवा (Barnyard Millet)
- कांगनी (Foxtail Millet)
मोटा अनाज के स्वास्थ्य लाभ
मोटा अनाज अन्य अनाजों की तुलना मे अधिक पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इसे "पोषक अन्न" भी कहा जाता है। इनमे कार्बन तथा जलकणों की मात्रा कम होती है।
- मोटा अनाज मे चावल से 100 गुना ज्यादा फाइबर होता है जो बेहतर पाचन मे सहायक होता है।
- इसमे चावल से 20 गुना ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है जो मांसपेशियों और स्वस्थ्य शरीर के निर्माण मे सहायक है।
- इसमे चावल से 300 गुना ज्यादा लोहा होता है जो रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
- इसमे चावल से 600 गुना ज्यादा फोलेट होता है जो शरीर मे रक्त प्रवाह मे सहायक होते है।
डॉक्टर की राय:मोटा अनाज के बारे मे डाक्टरों का कहना है की ये ब्लड शुगर कंट्रोल करता है,दिल के रोगों के खतरों को कम करता है और वजन कम करने मे भी मदद करता है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते है की सप्ताह मे व्यक्ति को 3-4 बार मोंटे अनाज का सेवन जरूर करना चाहिए।
मुख्य मोटा अनाज और उसके लाभ
1.बाजरा (Pearl Millet)
बाजरा अपनी स्वादिष्ट रोटियों और मलीदा के लिए जाना जाता है जिसमे प्रति 100 ग्राम मे 361 कैलोरी ऊर्जा मिलता है। इसको भोजन मे शामिल करने से हमे बिना अतिरिक्त लागत के विटामिन B-12 मिल जाता है।
प्रति 100 ग्राम बाजरा मे -
- इसमे बीटा कैरोटीन प्रचुर मात्र मे पाया जाता है।
- इसमे दूध की तुलना मे 6 गुना ज्यादा मैग्नीशियम पाया जाता है।
- इसमे 1 अंडे के बराबर प्रोटीन होता है।
- एक सेव के बराबर फाइबर होता है।
- बाजरा मे आयरन की मात्र पालक से 3 गुना अधिक होता है।
2.ज्वार (Sorghum Millet)
ज्वार न केवल लाखों भारतीयों का मुख्य भोजन है बल्कि ये स्वादिष्ट और पौष्टिक होने के साथ इसका चिकित्सकीय प्रयोग भी है। यह प्रोटीन और आयरन से भरपूर होता है।साथ मे यह उतना ही ये सुपाच्य भी होता है।
प्रति 100 ग्राम बाजरा मे -
- चावल की तुलना मे 2 गुना ज्यादा फाइबर होता है।
- एक अंडे के बराबर प्रोटीन होता है।
- केले की तुलना मे 4 गुण ज्यादा मैग्नेशियम होता है।
- बादाम की तुलना म 3 गुण ज्यादा आयरन होता है।
3. रागी (Finger Millet)
यह अपने स्वाद के साथ ही सबसे ठंढा और समृद्ध मिलेट है। इसमे भरपूर मात्रा मे खनिज पदार्थ और कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों व दातों को मजबूत बनता है। इसमे प्रति 100 ग्राम मे 344 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है।साथ ही विटामिन B-1 और B-2 भरपूर मात्रा मे होता है।
प्रति 100 ग्राम रागी मे -
- चावल और गेहू की तुलना मे 4 गुना ज्यादा आयरन होता है।
- चावल की तुलना मे 4 गुना ज्यादा आयरन होता है।
- गेहू की तुलना मे 2 गुना ज्यादा पोटैशियम होता है।
- गेहू और चावल की तुलना मे 3 गुना फाइबर होता है।
4. कोदो (Kodo Millet)
यह बंजर भूमि मे भी उग जाता है। इसमे विटामिन B विशेष रूप से नियासीन,विटामिन B-6 और फोलिक ऐसिड भरपूर मात्र मे पाया जाता है।
- साथ ही इसमे कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन भी प्रचुर मात्र मे पाया जाता है। यह एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा से भी भरपूर होता है।
- साथ ही इसमे, लेसिथिन की उच्च मात्र होती है जो तांत्रिक तंत्र को मजबूत बनाने मे सहायक होता है।
5. कुटकी (Little Millet)
कुटकी एक हल्का और पौष्टिक मोटा अनाज है जो पाचन को बेहतर बनता है। यह बरसात के दिन मे खाने के लिए सबसे बेहतर है क्योंकि पेट पर ज्यादा भार नहीं डालता है। यह प्रोटीन,आयरन और नियासीन से भरपूर होता है।
- इसमे 5% वसा होती है और "पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी ऐसिड "(PUFA)होता हो जो हृदय के लिए अच्छा माना जाता है।
- इसमे आयरन प्रति 100 ग्राम मे 9.3 मिलीग्राम जो बहुत ज्यादा होता है पाया जाता है। यह एनीमिया को दूर करने मे बहुत प्रभावी है।
- यह विशेष रूप से महिलाओं के प्रजनन और हार्मोनल संतुलन के लिए वरदान जैसा होता है।
6. सांवा (Barnyard Millet)
अन्य मोंटे अनाजों की तुलना मे सांवा मे फाइबर और आयरन की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसमे कार्बोहाईड्रेट कम होता है और धीरे धीरे पचता है जिससे मधुमेह रोगियों के लिए सबसे अच्छा विकल्प होता है।
- इसमे गामा अमीनो ब्यूटीरिक ऐसिड और बीटा-ग्लूकोन जैसे कार्यात्मक घटक होते है जो रक्त मे वसा के स्तर को कम करने के लिए आक्सीडेंट के रूप मे इस्तेमाल किया जाता है।
- इसमे फाइबर सबसे अधिक 12% पाया जाता है।
- ग्लाइसेमीक इंडेक्स बहुत कम होने से डाइबीटीज रोगियों के लिए बेहतर होता है।
7. कांगनी (Foxtail Millet)
कांगनी मोटा अनाज आसानी से पचने योग्य और एलर्जी रहित होता है। इसमे भी भरपूर पोषक तत्व पाया जाता है।
- इसमे लगभग 12% प्रोटीन होता है और 8% फाइबर पाया जाता है।
- इसमे पॉलिफेनोल्स जैसे तत्व होते है जो शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकल देते है।
- यह ग्लूटेन मुक्त और लेसिथियान युक्त होता है जो नर्वस सिस्टम को मजबूत बनता है।
1.सर्दियों के लिए खाने वाले मोटा अनाज (Winter Millets)
सर्दियों मे शरीर के लिए अंदरूनी गर्माहट और अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। इस मौसम मे गरम तासीर वाले अनाज सर्वश्रेष्ठ होते है।
- बाजरा: इसकी तासीर ग्राम होती है और इसमे ओमेगा-3 फैटी ऐसिड एवं आयरन भरपूर मात्र मे होता है जो ठंढ से लड़ने और ऊर्जा प्रदान करने मे मदद करता है।
- रागी: रागी कैल्शियम और विटामिन-D का भंडार है।सर्दियों मे धूप कम निकलने के कारण हड्डियों के लिए सबसे अच्छा होता है।
- मक्का: सर्दियों मे 'मक्के की रोटी और सरसों का साग' तो प्रसिद्ध ही है क्योंकि इसका तासीर गरम होता है। विटामिन A और C इसमे भरपूर मिलता है।
2.गर्मियों मे खाने के लिए मोटा अनाज (Summer Millets)
गर्मियों में शरीर को ठंढा रखने और डिहाइड्रेशन से बचने वाले अनाज चुनने चाहिए जिसकी तासीर ठंडी हो। साथ ही हल्का और पचने मे भी आसान हो।
- ज्वार: यह शरीर को ठंडक देता है और पचने मे भी आसान होता है।
- सांवा: यह पचने मे बहुत हल्का और ठंडा होता है। गर्मियों मे पेट की जलन कम करने के लिए इसका सेवन लाभदायी होता है।
- कांगनी: इसकी भी तासीर ठंडी होती है और शरीर को डिटॉक्स करने मे मदद करता है जो चिलचिलाती गर्मी मे जरूरी होता है।
3. बरसात के लिए मोटा अनाज (Monsoon Millets)
बरसात के मौसम मे ऐसा मोटा अनाज खाना चाहिए जो हल्का,जल्दी पचने वाला और पेट को सुरक्षित रखे, क्योंकि इस मौसम मे पाचन कमजोर हो जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- रागी: यह कैल्शियम और आयरन से भरपूर होता है और शरीर को ताकत देता है। इसए बरसात के साथ-साथ सर्दियों मे भी खाया जा सकता है।
- कोदो: कोदो मे औषधीय गुण होते है और यह मानसून के दौरान होने वाले संक्रमणों(Infections) से लड़ने मे मदद करता है।
- ज्वार: ज्वार पाचन मे हल्का होता है। इसको सर्दियों के साथ बरसात मे भी खाया जा सकता है।
मौसम के हिसाब से मोटा अनाज का उपयोग करने से न केवल जरूरी पोषक तत्व उसी समय मिलते है जब शरीर को उसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, बल्कि यह खेती की पारंपरिक पद्धतियों और फसल चक्र के साथ भी सुंदर तालमेल बैठाता है।
मोंटे अनाज को सही खाद्य संयोजनों के साथ खाना चाहिए और हर रूप मे खाना चाहिए। और हाँ यह चावल और गेहूं का पूर्ण विकल्प नहीं हो सकता है। इसलिए चावल और गेहूं को भी साथ मे खाना चाहिए। और मोंटे अनाज को ऊपर से सप्लीमेंट के रूप मे या चावल और गेहू के साथ मिला कर भी खा सकते है।
मोंटे अनाज को सरकार द्वार प्रोत्साहन
मोंटे अनाज को सरकार के द्वारा भी प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। भारत सरकार के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र ने 172 देशों के समर्थन से वर्ष 2023 को "अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष" के रूप मे मनाया था। सरकार के द्वारा निम्न प्रकार से मोंटे अनाज को प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है -
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मोंटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवटित किया है।
- MSP(Minimum Support Price): सरकार ने रागी,ज्वार,बाजरा और मक्का जैसे अनाजों के लिए MSP मे काफी बढ़ोतरी की है जैसे -2025-26 मे रागी के लिए MSP मे 596 रुपये की वृद्धि की गई है।
- PDS(Public Distribution System): सरकार राशन कार्ड धारकों को मोंटे अनाज भी मुहैया करने लगी है और साथ मे ही मिड-डे-मिल मे भी स्कूलों मे बच्चों को मोटा अनाज दिया जाने लगा है।
- स्टार्टअप सपोर्ट: PLI(Production Linked Incentive) स्कीम के तहत सरकार ने मोंटे अनाज आधारित उत्पादों(बिस्कुट,पास्ता आदि)के लिए 800 करोड़ रुपये की स्कीम शुरू की है।देश के 21 जिलों मे मोंटे अनाज को 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' के तहत पहचान डि हई है ताकि मोंटे अनाज की ब्रांडिंग मे मदद मिल सके।
- उत्कृष्टता केंद्र: हैदराबाद स्थित "भारतीय मोटा अनाज अनुसंधान संस्थान "(IIMR) को वैश्विक उत्कृष्ठता केंद्र घोषित किया गया है ताकि नई तकनीक और बेहतरीन चीजों पर शोध हो सके।

Good suggestion
जवाब देंहटाएंOkay 👍 Nice 🥰 achcha Dale Hai
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