🍯 सरसों का शहद: जानिए पूरी कहानी
सरसों के पीले फूलों से बनने वाला शहद भारत में
मधुमक्खी पालकों के लिए एक महत्वपूर्ण मौसमी उत्पाद है।
इस लेख में जानिए सरसों के खेत में व्यावसायिक मधुमक्खी पालन,
शहद उत्पादन, NBHM सहायता, ट्रेनिंग, सीजन के बाद माइग्रेशन,
बाजार मूल्य और निर्यात से जुड़ी जरूरी जानकारी।
🐝 मधुमक्खी पालन
🌼 सरसों का शहद
🏛️ NBHM
📦 निर्यात
 |
| सरसों के खेत में व्यवसायिक सरसों शहद का मधुमक्खी पालन और उत्पादन |
📑 इस लेख में क्या जानेंगे?
प्रस्तावना (Introduction)
सरसों के पीले फूलों से निकलने वाला शहद भारत के सबसे महत्वपूर्ण मौसमी और मोनोफ्लोर शहदों में से एक है।उत्तर भारत में नवंबर से फरवरी के बीच जब खेत सरसों के पीले फूलों से लहलहाते है उस समय केवल सरसों ही नहीं पैदा होता है बल्कि एक खास प्राकृतिक उपहार भी तैयार होता है -- "सरसों का शहद"(Mustard Honey)।
भारत में वैज्ञानिक ढंग से खेती कर लिया जाए तो बड़ी मात्रा में सरसों शहद को प्राप्त किया जा सकता है।
भारत में सरसों का शहद केवल घरेलू बाजार तक ही समिति नहीं है।भारत प्राकृतिक शहद का सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा निर्यातक देश है। यहां APED के अनुसार Rapesed और Musturd Honey भारत में उत्पादित प्रमुख शहद की किस्मों में शामिल है।
अभी हाल ही में 10 अगस्त 2026 को त्रिपुरा के "Dergang Farmar Producer Organisation (FPO) ने "APEDA" के सहायता से दुबई को 1 मीट्रिक टन सरसों शहद का निर्यात किया है।
अतः इस लेख में सरसों शहद क्या होता है,इसका उत्पादन,सरकार से मिलने वाली सब्सिडी,देश में उत्पादन के आंकड़े और निर्यात इन सभी विषयों पर क्रमबद्ध रूप से बात करेंगे।ताकि पाठकों को एक ही जगह सभी जानकारी सुलभ हो जाए।
सरसों शहद क्या होता है ?
सरसों का शहद वह प्राकृतिक शहद होता है जिसे मधुमक्खियां मुख्य रूप से सरसों के फूलों से प्राप्त नेक्टर यानी मकरकंद से बनाती है।
सरसों के शहद में ग्लूकोस की मात्रा अधिक होने के कारण यह सामान्य तापमान में जम जाता है और मक्खन या क्रीम जैसा हो जाता है।
जब किसी बड़े क्षेत्र में एक ही समय पर सरसों के फूल बहुतायत मात्रा में उपलब्ध होते हैं और मधुमक्खियों के छतों को उसी क्षेत्र में रखा जाता है तो मधुमक्खियां मुख्य रूप से उसी सरसों के पीले फूलों से पराग और मकरकंद को एकत्र करके शहद बना देती है।
इसी कारण इस प्रकार के शहद को मोनोफ्लोर या सिंगलफ्लोर हनी के रूप में बाजार में प्रस्तुत किया जाता है।
सरसों के शहद की सामान्य विशेषताएं --
- इसका रंग हल्का पीलापन लिए हुए सुनहरा रंग होता है।
- विशिष्ट हल्का और फूलों की सुगंध जैसी।
- हल्का से माध्यम तीखापन और फ्लोरल स्वाद।
- अपेक्षाकृत जल्दी क्रिस्टल बन जाना।
- मक्खन या क्रीम जैसी होना।
- सर्दी और खांसी में आराम पहुंचाने वाली।
- एंटी ऑक्सीडेंट और एंजाइम से भरपूर होती है।
अपनी इसी खूबियों और विशेषताओं के कारण यह आम लोगों में बहुत लोकप्रिय है और इसकी मांग विशेष रूप से किया जाता है।
| फायदा |
विवरण |
| पाचन में सुधार |
यह पेट के लिए बहुत सुपाच्य होता है और आंतों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। |
| सर्दी-खांसी से राहत |
इसकी गर्म तासीर और एंटी-बैक्टीरियल गुण सर्दियों में गले की खराश और कफ को शांत करते हैं। |
| एंटी-ऑक्सीडेंट्स |
इसमें प्राकृतिक एंज़ाइम्स, विटामिन और मिनरल्स होते हैं जो इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाते हैं। |
| हृदय और रक्तचाप |
इसमें मौजूद पोषक तत्व कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं। |
💡 उपयोग की सलाह:
जम जाने पर इसे गर्म पानी में डालकर या सीधे चम्मच से खाया जा सकता है। इसे कभी भी सीधे तेज़ आंच पर या उबालकर गर्म नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे इसके प्राकृतिक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
भारत में सरसों शहद कहां पैदा होता है ?
भारत में सरसों का उत्पादन उतरी और मध्य भाग में सबसे ज्यादा होता है इसीलिए इन्हीं क्षेत्रों में सरसों शहद का भी उत्पादन और संभावना ज्यादा होता है।
APEDA के अनुसार भारत में प्राकृतिक शहद के उत्पादक राज्यों में ---
🍯 भारत में प्राकृतिक शहद के प्रमुख उत्पादक राज्य
| राज्य |
उत्पादन में हिस्सेदारी* |
| उत्तर प्रदेश |
17.11% |
| पश्चिम बंगाल |
16.20% |
| पंजाब |
14.08% |
| बिहार |
12.33% |
| राजस्थान |
9.15% |
* APEDA द्वारा उद्धृत Ministry of Agriculture & Farmers Welfare (MoA&FW) के आंकड़ों पर आधारित।
🌼 सरसों के शहद के लिए:
उत्तर भारत के बड़े सरसों उत्पादक क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि सरसों की flowering के दौरान मधुमक्खियों को पर्याप्त nectar और pollen उपलब्ध होता है।
भारत में सरसों शहद का उत्पादन उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत के उन राज्यों में होता है जहां रबी के मौसम में सरसों की खेती बड़े पैमाने पर किया जाता है।
प्रमुख संभावित क्षेत्रों में शामिल है --
उत्तर प्रदेश में - लखनऊ,बाराबंकी,सीतापुर,लखीमपुर खीरी, उन्नाव, हरदोई,कानपुर क्षेत्र तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सरसों क्षेत्र।
राजस्थान में - अलवर, भरतपुर, जयपुर जयपुर, दौसा और आसपास के सरसों क्षेत्र।
पंजाब और हरियाणा में - विशेषकर वे इलाके जहां बड़े पैमाने पर सरसों की खेती जो किया जाता है और फूलों के दौरान कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता है।
बिहार में - पश्चिम चंपारण,पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर,मोतिहारी मुज्जफरपुर आदि अन्य सरसों उत्पादक क्षेत्रों में किया जा सकता है। यहां सरसों के साथ साथ बाद में लीची और अन्य फसलों के कारण यह क्षेत्र माइग्रेटरी मधुमक्खी पालन के लिए विशेष उपयोगी है।
APEDA की एक पुरानी शहद क्षेत्र पब्लिकेशन ने राजस्थान के सरसों क्षेत्र को शहद उत्पादन का और खासकर सरसों शहद उत्पादन के क्षेत्र विशेष Honey Culustar में शामिल किया है।
सरसों के खेत में व्यवसायिक मधुमक्खी पालक कैसे करे ?
सरसों शहद उत्पादन का मूल सिद्धांत बहुत ही सरल है --
अच्छा सरसों क्षेत्र + स्वस्थ मधुमक्खी कॉलोनी + सही समय पर माइग्रेशन + पर्याप्त फूल + वैज्ञानिक प्रबंधन == अच्छा सरसों शहद उत्पादन।
व्यवसायिक स्तर पर सामान्यतः Apis Mellifera जैसी प्रबंधित मधुमक्खी काॅलोनियों का इस्तेमाल किया जाता है।
खेत का चुनाव महत्व क्यों है ?
यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। क्योंकि सही खेत हो तो मधुमक्खियां परागण की गति को 15-20% ज्यादा करती है। यह खेत कीटनाशकों से मुक्त होना चाहिए।
ऐसा खेत और क्षेत्र चुने जहां --
- सरसों का बड़ा और लगातार फूल वाला क्षेत्र हो।
- फूलों की अवधि पर्याप्त हो।
- आसपास अन्य प्रतिस्पर्धी फूल बहुत अधिक मात्रा में न हो।
- पानी भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो।
- खतरनाक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता हो।
- वहां से बी बॉक्स-ले जाना आसान हो।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह होता है कि किसानों के साथ पहले से ही महत्वपूर्ण रूप से समन्वय कर लिया जाना चाहिए कि इस क्षेत्र में सरसों शहद के लिए मधुमक्खी पालन शुरू करने जा रहा हूं।
इसके लिए आप नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्रों की मदद भी ले सकते हैं। ताकि आसपास के किसान अत्यधिक जहरीले कीटनाशकों का छिड़काव न करे।
बी-बॉक्स खेत में कब रखना चाहिए ?
जैसे ही सरसों के खेत में सरसों पर फूल आने लगे उसी समय या ठीक उसके पहले मधुमक्खी की कालोनियों को खेतों के पास पहुंचाना चाहिए।
सटीक तारीख उस इलाके के मौसम और स्थिति पर निर्भर करती है। उत्तर भारत में सामान्यतः यह नवंबर से फरवरी के महीनों में ही होती है।
ICAR की एक सफलता की कथा में लखनऊ क्षेत्र का एक मधुमक्खी पालक किसान नवंबर से फरवरी तक सरसों के खेतों में 600 Bee Boxes को रखता है। इसके बाद मार्च से सितंबर तक बिहार के मुज्जफरपुर, दरभंगा, बेगूसराय और समस्तीपुर के क्षेत्रों में लीची, मक्का और बाजरा जैसी फसलों के लिए माइग्रेट करता है।
यह उदाहरण बताता है कि एक व्यवसायिक मधुमक्खी पालन केवल एक ही क्षेत्र और फसल पर निर्भर रहने के बजाए फूलों के कैलेंडर के अनुसार माइग्रेशन करना बहुत अधिक महत्वपूर्ण होता है।
सरसों के खेत में B-Box को कैसे रखना चाहिए ?
बी-बॉक्स को सरसों के खेत में जैसे का तैसे नहीं रख देनी चाहिए,बल्कि कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों पर ध्यान देना चाहिए।
B-Boxes को खेत के बीच में बिल्कुल ही खुली धूप में रखने की जगह उसे ऐसी जगह पर रखना ज्यादा बेहतर होता है जहां --
- दोपहर की तेज गर्मी से कुछ बचाव हो सके।
- हवा का अत्यधिक दबाव नहीं होता हो।
- बॉक्स जमीन से थोड़ा ऊपर ही हो।
- आसपास मानव आवाजाही नियंत्रित हो।
साथ ही B-Box के ऊपर उड़ान के लिए पर्याप्त खुली जगह होनी चाहिए। यदि ऐसा माहौल मिलता है तो मधुमक्खियां अधिक परागण कर पाती है और अच्छी शहद की पैदावार हो सकती है।
सरसों से शहद बनाने की प्रक्रिया
जब सरसों में पर्याप्त Flowering होती है तब मधुमक्खियां सरसों के फूल पर बैठकर उसका मकरकंद को परागण करती है और फिर उसको लाकर अपने छत्ते में जमा कर देती है। उसके छत्तों में एंजाइम की प्रक्रिया होती है और पानी की मात्रा कम हो जाती है।और वह शहद में बदल जाती है।
जब शहद का फ्रेम पूरी तरह से तैयार हो जाए और अधिकांश Honey Celles बंद हो उसी समय हार्वेस्टिंग करनी चाहिए।
अपरिपक्व और अधिक नमी वाले शहद का हार्वेस्टिंग करने से शहद का क्वालिटी और संरचना प्रभावित हो जाती है।अतः पूरी तरह से परिपक्व हो जाने पर ही हार्वेस्टिंग करनी चाहिए।
शहद निकालने की वैज्ञानिक प्रक्रिया क्या है ?
शहद पूरी तरह से परिपक्व हो जाने केबाद हमेशा वैज्ञानिक तरीके से ही निकालनी चाहिए। इसके लिए सबसे पहले किसी नजदीकी ट्रेनिंग सेंटर में इसका ट्रेनिंग कर लेनी चाहिए।
व्यवसायिक स्तर पर सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार से अपनानी चाहिए --
- सबसे पहले बॉक्स में से परिपक्व हनी फ्रेम को बाहर निकल कर उसमें से मधुमक्खी को सुरक्षित तरीके से बाहर निकल दीजिए।
- अब अच्छी चाकू से वॉक्स कैपिंग को हटाकर हनी एक्सट्रैक्टर में फ्रेम लगाकर सेन्ट्रीफ्यूगल एक्सट्रैक्शन से हनी को निकाल लेनी चाहिए।
- शहद को निकालने के बाद फूड ग्रेड फिल्टर से अच्छी तरह से छानकर सेटलिंक टैंक में रखे।
- फिर उसका नमी और अन्य गुणवत्ता मानक की जांच के लीजिए और फिर फूड ग्रेड कंटेनर में बेच नम्बर के रेकॉर्ड के साथ रख दीजिए।
निर्यात करने या बड़े स्तर पर रिटेल मार्केटिंग करने के लिए केवल शहद को निकाल देना ही पर्याप्त नहीं होता है। बल्कि उसके बाद क्वालिटी टेस्टिंग,ट्रेसबिलिटी,पैकेजिंग और डाक्यूमेंटेशन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
NBHM के तहत सरकार ने हनी टेस्टिंग लैब, प्रोसेसिंग यूनिट्स, कलेक्शन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दे रहा है।
मार्च 2025 तक NBHN के अंतर्गत 6 नए World Class Honey Testing Lab और 47 मिनी हनी टेस्टिंग लैब के साथ साथ और भी कई प्रोसेसिंग और मार्केटिंग सुविधाओं की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।
एक मधुमक्खी बॉक्स से कितना शहद निकलेगा ?
एक हनी बॉक्स से कितना शहद निकलेगा इसका कोई निश्चित मात्रा नहीं है क्योंकि यह कई चीजों पर निर्भर करती है। शहद की उत्पादन निम्न चीजों पर निर्भर करती है --
- रानी मधुमक्खी की गुणवत्ता
फिर भी सामान्य परिस्थितियों में वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करने पर प्रति बॉक्स 30-40 kg शहद निकल जाता है।
एक हालिया पंजाब के रिपोर्ट में खराब मौसम एवं कीटनाशकों की समस्या के कारण एक मधुमक्खी पालन ने केवल 18-20kg प्रति बॉक्स ही उत्पादन कर पाया था। जबकि वह सामान्य परिस्थितियों में 35-40kg का उत्पादन करता था।
अतः वास्तविक उत्पादन वर्ष दर वर्ष और अन्य परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।
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| पीले सरसों के फूल से मकरकंद परागण करती हुई मधुमक्खी |
सरसों का सीजन खत्म होने के बाद मधुमक्खियों को कहां माइग्रेट करें ?
यदि आप व्यवसायिक रूप से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं तो यह आपकी एक महत्वपूर्ण रणनीति होनी चाहिए।
सरसों का सीजन खत्म होने के बाद मधुमक्खियों को ऐसी जगह ले जानी चाहिए जहां अगली महत्वपूर्ण मकरकंद परागण वाली फसल उपलब्ध हो जाए।
आप अपने क्षेत्र के हिसाब से नीचे दिए गए तालिका के अनुसार अपनी मधुमक्खियों को माइग्रेट करा सकते हैं --
| समय (महीने) |
फसल / वृक्ष |
माइग्रेशन का स्थान (क्षेत्र/राज्य) |
| मार्च से अप्रैल |
शीशम, सफेदा (Eucalyptus) |
पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र। |
| अप्रैल से मई |
लीची (Litchi) |
मुजफ्फरपुर (बिहार), रामनगर/देहरादून (उत्तराखंड) और कांगड़ा (हिमाचल)। |
| मई से जून |
सूरजमुखी, बरसीम |
करनाल/अंबाला (हरियाणा), पंजाब और मध्य प्रदेश। |
| जून से जुलाई |
जामुन, नीम, मक्का |
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के वन क्षेत्र। |
| अगस्त से अक्टूबर |
तिल, बाजरा, अजवाइन, बेरी (Sidr) |
राजस्थान (श्रीगंगानगर, चित्तौड़गढ़ आदि) और मध्य प्रदेश। |
📌
नोट: यह फ्लोरल कैलेंडर स्थानीय मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर पूरे भारत में थोड़ा भिन्न हो सकता है।
इसीलिए सफल मधुमक्खी पालक केवल फसल ही नहीं बल्कि फ्लावर्स कैलेंडर के आधार पर माइग्रेशन प्लान को बनाता है।
ऑफ सीजन में मधुमक्खियों की देख भाल कैसे करें ?
जब सीजन न हो और फूलों की कमी हो उस समय मधुमक्खियों को ऐसे ही नहीं छोड़ देनी चाहिए। यह आपकी सबसे बड़ी गलती होगी।
आप ऑफ सीजन में --
- मधुमक्खियों के कमजोर कॉलोनी को किसी मजबूत कालोनी के साथ वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित कर दीजिए।
- अच्छी क्वीन यानी रानी मधुमक्खी कॉलोनी की उत्पादकता और संख्या बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होती है। इसलिए यदि उनके लिए प्राकृतिक भोजन की कमी हो तो सप्लीमेंट्री फीडिंग की व्यवस्था करनी चाहिए।
- अगल बगल पानी की व्यवस्था बनाए रखे और रोग एवं कीटों की निगरानी करते रहनी चाहिए। बारिश से बचाव भी होनी चाहिए।
- हर कॉलोनी का रिकॉर्ड रखनी चाहिए जैसे -- Queen की स्थिति, कालोनी की मजबूती, शहद का उत्पादन,माइग्रेशन,फीडिंग और खर्च आदि।
रिकॉर्ड रखना व्यवसायिक खेती के लिए अत्यंत आवश्यक रहता है। क्योंकि कभी भी विशेषज्ञों की सलाह में ये रिकॉर्ड काम आ सकते हैं।
भारत में मधुमक्खी पालन का ट्रेनिंग कहां से मिलती है ?
भारत में मधुमक्खी पालन के लिए ट्रेनिंग के कई रास्ते है। ओर व्यवसायिक रूप से मधुमक्खी पालन शुरू करने से पहले ट्रेनिंग ले ही लेनी चाहिए। यहां तक कि सब्सिडी लेने के लिए भी सब्सिडी अप्लाई करने से एक सप्ताह पहले 5 से 7 दिनों का आधिकारिक ट्रेनिंग लेना अनिवार्य है।
आप इन जगहों से ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते हैं --
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK): पूरे देश में आपके जिले में स्थित ICAR के कृषि विज्ञान केंद्र पर मधुमक्खी पालन पर निःशुल्क या रियायती दर पर शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग प्रदान करता है।मार्च 2025 तक देश में 731 KVK स्थापित थे।
- खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC): आप KVIC के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र में "हनी मिशन" या अन्य प्रोग्रामों के तहत ट्रेनिंग को पा सकते हैं।
- राज्य बागवानी कृषि विभाग: जिला बागवानी अधिकारी कार्यालय के द्वारा नियमित किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन होते रहता है।
- राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB): NBB और इससे संबंधित मान्यता प्राप्त संस्थान जैसे ICAR केंद्रों,राज्य कृषि विश्वविद्यालय और अन्य केंद्रों के माध्यम से भी आप शहद और मधुमक्खी पालन का ट्रेनिंग प्राप्त के सकते हैं।
अतः आप उपरोक्त किसी भी संस्थान के केंद्र से ट्रेनिंग और उसका सर्टिफिकेट प्रोत कर सकते है।
NBHM क्या है ?
National Beekeeping and Honey Mission (NBHM) भारत सरकार की वैज्ञानिक रूप से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख योजना है।
इसे Ministry of Agriculture and Farmers Welfare के अंतर्गत National Bee Board द्वारा लागू किया गया है।
NBHM के तीन प्रमुख मिनी मिशन है --
- Mini Mission 1: वैज्ञानिक रूप से मधुमक्खी पालन और Pollination के माध्यम से उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा देना।
- Mini Mission 2: शहद संग्रहण,प्रोसेसिंग,स्टोरेज,मार्केटिंग और उसका मूल्य संवर्धन करना एवं बढ़ावा देना।
- Mini Mission 3: मधुमक्खी पालक में रिसर्च करना एवं बढ़ावा देना और तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देना।
इस प्रकार से योजना का मूल उद्देश्य केवल शहद उत्पादन को बढ़ाना ही नहीं बल्कि Pollination,किसानों की आय, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और गुणवत्तापूर्ण शहद इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
NBHM में कितनी सब्सिडी मिलती है ?
NBHM के पुराने ऑपरेशनल गाइडलाइन में जो सब्सिडी पैटर्न बनाया गया था उसके अनुसार --
- व्यक्तिगत आवेदक/सोसाइटी/फर्म और कंपनी के लिए 50% तक सब्सिडी।
- SHGs,JLGs,FIGs, Cooperative,FPOs आदि के लिए 75% तक सब्सिडी।
- सरकारी संगठनों के लिए 10% तक सब्सिडी कही गई थी।
लेकिन हर व्यक्ति को 50% या 75% नगद सब्सिडी मिलती है ऐसा नहीं समझना चाहिए। यह सहायता कम्पोनेंट, लागत अनुमान, व्यक्तिगत श्रेणी, वार्षिक एक्शन प्लान और इंप्लीमेंटिंग एजेंसी पर भी निर्भर करती है।
सरकारी PIB दस्तावेजों के अनुसार NBHM को वर्ष 2023-24 से वर्ष 2025-26 तक बढ़ाया गया था।अतः अगस्त 2026 में नया आवेदन करने से पहले अपने राज्य की वर्ष 2026-27 की नोटिफिकेशन आदि को अवश्य जांच कर लेनी चाहिए।
| श्रेणी |
सब्सिडी प्रतिशत |
विवरण |
| सामान्य वर्ग (General) |
50% सब्सिडी |
बी-बॉक्स, मधुमक्खी कॉलोनी, सुरक्षा उपकरण और निष्कर्षण यंत्र पर। |
| महिलाएं, SC/ST व पूर्वोत्तर/पहाड़ी क्षेत्र |
75% सब्सिडी |
बी-बॉक्स, कॉलोनी और संबंधित टूल किट पर। |
| FPO / स्वयं सहायता समूह (SHG) |
75% तक |
ग्रुप में प्रोसेसिंग व स्टोरेज यूनिट स्थापित करने के लिए। |
NBHM पर सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें ?
मधुमक्खी पालन के लिए सब्सिडी को अप्लाई करने की पूरी तरह से व्यवहारिक प्रक्रिया को नीचे दिए गए क्रमबद्ध रूप से समझने की कोशिश करें --
स्टेप -1:
सबसे पहले अपने नजदीकी किसान विज्ञान केंद्र (KVK), जिला उद्यान विभाग, कृषि विभाग या स्टेट नोडल एजेंसी से संपर्क कीजिए।
स्टेप -2:
आप वहां जाकर पता कीजिए कि आपके जिले में वर्तमान में NBHM,Beekeeping या Honey Mission Assistant के लिए कोई खुला कंपोनेंट या टारगेट उपलब्ध है या नहीं है।
स्टेप -3:
यदि हां! तो आप वहां जाकर कम से कम 7 दिनों का Beekeeping की वैज्ञानिक विधि का ट्रेनिंग को कर लीजिए।
स्टेप -4:
ट्रेनिंग से मिले सर्टिफिकेट को लेकर आप "राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB) के वेबसाइट Madhukranti Portal या मोबाइल ऐप पर जाकर आधार और बैंक पासबुक के साथ स्वयं को Beekeeper के रूप में रजिस्टर्ड कर दीजिए।
स्टेप -5:
अब आप अपना दस्तावेज और बिजनेस प्लान तैयार कीजिए - कितने Bee Boxes होंगे,कितनी कालोनी होगी,Honey Extractor, संभावित मिशनरीज,प्रोसेसिंग,स्टोरेज,पैकिंग,ट्रांसपोर्टेशन और आपका लोकेशन जिसमें करना चाहते हैं।
स्टेप -6:
स्टेट इंप्लीमेंटेशन एजेंसी के माध्यम से आवेदन या प्रोजेक्ट प्रपोजल को जमा कीजिए। आप पोर्टल या जिला बागवानी अधिकारी के माध्यम से भी जमा कर सकते हैं।
स्टेप -7:
जरूरी दस्तावेज - राज्य या घटक के अनुसार दस्तावेज अलग अलग हो सकते हैं - आधार,बैंक खाता,फोटो,पता प्रमाण,ट्रेनिंग सर्टिफिकेट,भूमि या स्थान संबंधी दस्तावेज जहां आवश्यक हो,प्रोजेक्ट रिपोर्ट,कोटेशन,FPOs/SHGs रजिस्ट्रेशन यदि लागू हो।
स्टेप -8:
भौतिक सत्यापन और अनुदान राशि ट्रांसफर - विभाग द्वारा आपके Box और सेटअप का भौतिक सत्यापन किया जाता है। इसके बाद सब्सिडी की राशि आपके आधार लिंक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
Madhukranti Portal क्यों महत्वपूर्ण है ?
सरकार ने Madhukranti Portal शहद उत्पादों की स्रोत स्थायित्व और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए तैयार किया है।
अक्टूबर 2025 तक इस पोर्टल पर 14,859 Beekeeper,269 Beekeeping और Hony Societies,150 फर्म और 206 कंपनी रजिस्ट्रेशन होने की जानकारी PIB ने दिया है।
भविष्य में प्रीमियम हनी और उसका निर्यात और भी बढ़ सकता है जिससे इस पोर्टल का महत्व और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।
भारत में सरसों के शहद का बाजार कितना बड़ा है ?
भारत में प्राकृतिक शहद का बाजार केवल सरसों तक ही सीमित नहीं है। फिर भी भारत में सरसों शहद का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। भारत में उत्पादित होने वाला शहद का सबसे बड़ा हिस्सा लगभग 50-60% सरसों शहद का ही है।
वैसे देखा जाए तो आधिकारिक तौर पर कोई सरकारी स्पष्ट आंकड़ा इस बारे में उपलब्ध नहीं है। इसका मांग फूड इंडस्ट्री और दवाइयां एवं सप्लीमेंट में अधिक मात्रा में हो रहा है।
सरसों के शहद की कीमत कितनी होती है ?
सरसों शहद की कीमत थोक और खुदरा दोनों में अंतर होता है। इसकी कीमत थोक और खुदरा के अलावा फर्म से निकलने की कीमत,प्रोसेसिंग कीमत और ब्रांड रिटेल प्राइस भी अलग अलग होती है।
जून 2026 में ही एक व्यापारिक मार्केटप्लेस पर सरसों शहद की अलग अलग लिस्टिंग दिखाई गई जिसमें कीमत ₹150 से लेकर ₹600 के बीच दिखाई गई थी।वही प्रीमियम सरसों शहद की कीमत एक ब्रांडेड कंपनी पर ₹1094 दिखाई गई है।
एक अन्य जगह यह कीमत ₹320 की दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि सरसों शहद की कीमत --
Bulk Honey और Branded Retail Honey
के अनुसार अलग अलग होता है।
सरसों शहद की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि आप इसे थोक (Bulk) में खरीद रहे हैं या खुदरा (Retail / Branded Bottle) में:
| स्तर / श्रेणी |
औसत मूल्य (प्रति kg) |
विवरण |
थोक / फार्म स्तर (Bulk / Beekeeper) |
₹120 – ₹180 / kg |
मौनपालक जब ड्रमों में बड़ी कंपनियों या एक्सपोर्टर्स को बेचते हैं। |
थोक / ब्रांडेड ड्रम (Wholesale Bucket) |
₹190 – ₹250 / kg |
सप्लायर्स और ट्रेडर्स द्वारा रिफाइन/फिल्टर करके बल्क पैकेजिंग में। |
खुदरा / रिटेल जार (Glass Jar / Bottled) |
₹300 – ₹1000+ / kg |
आर्गेनिक, रॉ (Raw) या प्रोसेस किए गए जार (जैसे Dabur, HoneyVeda, स्थानीय ब्रांड्स)। |
भारत का कुल शहद उत्पादन कितना है ?
APEDA के अनुसार भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर भारत का कुल शहद उत्पादन लगभग 142 हजार मीट्रिक टन बताया गया है।
PIB के अनुसार मार्केटिंग ईयर 2024 में भारत ने लगभग 1.4 लाख मीट्रिक टन प्राकृतिक शहद का उत्पादन किया था। इसमें सरसों शहद का महत्वपूर्ण अनुपात रहा है।
ICAR - AICRP on Honey Bees & Pollinators के अनुसार भारत के द्वारा उत्पादित कुल शहद में से आधे से अधिक भाग करीब 55-65% सरसों के फूलों से आता है।
इस प्रकार से यदि देखा जाए तो देश में लगभग 75,000-85,000 मीट्रिक टन सरसों शहद का उत्पादन होता है --
| संकेतक |
आंकड़ा / अनुमान |
विवरण एवं स्रोत संदर्भ |
| कुल उत्पादन में हिस्सेदारी |
55% से 65% |
भारत में उत्पादित कुल शहद का आधे से अधिक भाग सरसों के फूलों से आता है।
स्रोत: ICAR-AICRP on Honey Bees & Pollinators
|
| अनुमानित वार्षिक उत्पादन |
~75,000 – 85,000 MT |
कुल राष्ट्रीय शहद उत्पादन के आधार पर अनुमानित।
मीट्रिक टन (MT) में दर्ज
|
| निर्यात में सरसों शहद का हिस्सा |
60% से अधिक |
अमेरिका और यूरोपीय बाजारों में जाने वाला अधिकांश बल्क शहद सरसों-आधारित या ब्लेंड होता है।
स्रोत: APEDA Trade Reports
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भारत शहद का कितना निर्यात करता है ?
भारत शहद के एक प्रमुख निर्यातक देशों में शुमार है। एपीडा (APEDA- वाणिज्य एम उद्योग मंत्रालय) के अनुसार भारत प्रति वर्ष 75,000 से 80,000 मीट्रिक टन शहद का निर्यात करता है।
APEDA के ही अनुसार वर्ष 2024-25 में भारत ने 100773.14 मीट्रिक टन प्राकृतिक शहद का निर्यात किया था। इसका कुल मूल्य लगभग 206.47 मिलियन डॉलर का था।
APEDA के Trade Reports के अनुसार भारत के कुल शहद निर्यात में सरसों शहद का हिस्सा लगभग 60% के करीब है।
भारत के कुल शहद निर्यात का 60-70% केवल अमेरिका को ही हो जाता हैं।
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| प्राकृतिक सरसों शहद पीलापन सुनहरा रंग का मक्खन जैसा अमेरिका में सबसे क्या निर्यात होता है |
त्रिपुरा से दुबई को पहला सरसों शहद का निर्यात
अभी हाल ही में 10 अगस्त 2026 को त्रिपुरा के "डेरगांग किसान उत्पादक संगठन" (Deegang FPO) के द्वारा दुबई को 1 मीट्रिक टन सरसों शहद का निर्यात किया गया है।
इसके शिपमेंट को APEDA ने फेसेलिटेट किया और इस क्षेत्र से सरसों शहद का यह पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात था।
इससे पता चलता है कि FPO और किसान सहकारिता संगठनों के माध्यम से भी शहद का उत्पादन और निर्यात किया जा सकता है और देश को मजबूत बनाया जा सकता है।
सहकारिता का यह मॉडल भारत के दूसरे क्षेत्रों में भी विकसित किया जा सकता है।
सरसों शहद के व्यवसाय में सबसे बड़ी चुनौती क्या है ?
मधुमक्खी पालक देखने में जितना आसान लगता है और जितनी आसानी से हमलोग लेख लिख दे रहे हैं उतना आसान नहीं है, बल्कि यह कई प्रकार की चुनौतियों से घिरा हुआ है।
सरसों शहद के उत्पादन की मुख्य चुनौतियां निम्नलिखित है --
- मौसम: असमय बारिश और तापमान में बदलाव आदि से सरसों की Flowering प्रभावित होती है। और जब सरसों का फूल प्रभावित होता है तो सरसों का शहद भी प्रभावित हो जाता है।
- कीटनाशक: अक्सर किसान सरसों के फूल लगते समय कीटनाशकों का छिड़काव करते ही करते हैं। इससे बहुत सारी मधुमक्खियों का जीवन प्रभावित होता है और शहद कम मात्रा में निकलती है।
- मिलावट: बाजार में बहुत सारे ऐसे कारक है जो सरसों शहद को मिलावट करके सस्ते दरों पर बाजार में बेचते हैं। इससे सही उत्पादकों का नुकसान होता है।
- बाजार: बाजार में सरसों शहद का मूल्य अनिश्चित रहता है। कभी कभी तो उत्पादन लागत के अनुपात में मुख्य कम ही मिलता है,जिससे उत्पादकों को घाटा उठाना पड़ता है।
- माइग्रेशन लागत: इसमें एक जगह से दूसरे जगह खासकर दूसरे राज्यों में सैकड़ों बक्सों को ले जाकर माइग्रेट करने में लागत बहुत ज्यादा हो जाता है। उसके मुकाबले कीमत उतनी नहीं मिल पाती और उत्पादकों को घाटा उठाना पड़ता है।
- कुशल श्रम की कमी: शहद उत्पादन में ट्रेन्ड और कुशल श्रमिकों की कमी होती है। जिससे उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
इसीलिए यह व्यवसाय केवल एक व्यवसाय ही नहीं बल्कि एक मैनेजमेंट होता है। हां इनमें से कुछ चुनौतियां तो अपने बस में नहीं है,इसलिए उनको झेलना ही पड़ता है। लेकिन जिस चुनौतियों को अपने से दूर किया जा सकता है। सरकार और समाज के प्रयास से दूर किया जा सकता है। उन्हें अवश्य दूर करके इस क्षेत्र में संभावनाओं को और भी गति प्रदान करनी चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
सरसों का शहद केवल सरसों के फूलों से बना एक मौसमी खाद्य उत्पाद ही नहीं है बल्कि यह -- कृषि + मधुमक्खी पालन + Pollination + ग्रामीण रोजगार + फूड प्रोसेसिंग + ब्रांडिंग और निर्यात -- को जोड़ने वाला एक संपूर्ण ग्रामीण व्यवसाय मॉडल है।
भारत में उत्तर प्रदेश,राजस्थान, हरियाणा,पंजाब,बिहार और अन्य राज्यों में सरसों उत्पादक क्षेत्रों में इसकी अपार संभावनाएं है। इन संभावनाओं को बल प्रदान करनी चाहिए। सरकार के द्वारा भी संबंधित संस्थाओं के द्वारा भी और समाज के द्वारा भी।
कीटनाशकों के चलते इस व्यवसाय में परेशानियां होती है तो इसका समाधान का रास्ता निकलना ही चाहिए। जैविक कीटनाशकों को सरसों के लिए विकसित किया जाना चाहिए।
और भी दिक्कतों को दूर कर सहकारिता और किसान सहकारी संस्थाओं को इस क्षेत्र के लिए विशेष विकसित किया जाना चाहिए।
यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो और आपके कोई दोस्त या मित्र या रिश्तेदार शहद के व्यवसाय से जुड़े हो तो यह लेख उनको जरूर भेजिएगा और कमेंट करके जरूर बताए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)
1. सरसों शहद क्या होता है ?
सरसों शहद वह शहद होता है जिसे मधुमक्खियां मुख्य रूप से सरसों के फूल से प्राप्त नेक्टर से तैयार करती है।इसे Mustard Honey या Rapeseed Honey भी कहा जाता है।
2. भारत में सरसों शहद मुख्य रूप से कहा उत्पादित किया जाता है?
उत्तर प्रदेश,राजस्थान, हरियाणा,पंजाब और बिहार के बड़े सरसों उत्पादक क्षेत्रों में सरसों के फूलों के मौसम के दौरान इसका उत्पादन किया जाता है।
3. सरसों के खेत में व्यवसायिक मधुमक्खी पालन कैसे करें?
सबसे पहले व्यवसायिक मधुमक्खी पालन का ट्रेनिंग लेकर तब उसके बाद स्वास्थ्य कालोनी और उपयुक्त B -Boxes को प्राप्त कर लीजिए।अब सरसों के Flowering शुरू होने से पहले Apiary को खेत के पास स्थापित कीजिए और कालोनियों की नियमित निगरानी एवं प्रबंधन करते रहिए।
4. सरसों के शहद का उत्पादन बढ़ाने के लिए मधुमक्खियों को कब खेत में रखना चाहिए?
सामान्यतः सरसों का फ्लावरिंग शुरू होने से पहले कालोनियों को खेतों के पास पहुंचाया जाता है।सही समय स्थानीय मौसम और सरसों के किस्मों पर भी निर्भर करता है।
5. सरसों का सीजन खत्म होने के बाद मधुमक्खियों को कहां ले जाना चाहिए ?
मधुमक्खियों को अगली उपलब्ध नेक्टर यानी मकरकंद परागण वाली फसलों के क्षेत्र में माइग्रेट करना चाहिए। उत्तर भारत में सरसों के बाद लीची, यूकेलिप्टस,सूरजमुखी और अन्य फूलों वाले फसल संभावित विकल्प हो सकते हैं।
6. भारत में मधुमक्खी पालन का ट्रेनिंग कहां से मिलती है ?
ICAR की कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs)Nstional Bee Board,KVIC तथा राज्यों के कृषि या बागवानी विभागों में मधुमक्खी पालन का ट्रेनिंग और मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।
7. NBHM के तहत मधुमक्खी पालन के लिए सरकारी सहायता या सब्सिडी कैसे प्राप्त करें ?
National Beekeeping and Honey Mission (NBHM) से संबंधित सहायता के लिए अपने जिले के कृषि/उद्यान विभाग, KVK या राज्य की संबंधित implementing agency से वर्तमान योजना और पात्रता की जानकारी लें। सहायता का स्वरूप और राशि component तथा राज्य के अनुसार बदल सकती है।
8. क्या भारत से सरसों के शहद का विदेशों में निर्यात होता है ?
हाँ, सरसों शहद भारत के प्रमुख हनी वैरायटी में शामिल है।भारत प्राकृतिक शहद का निर्यात अमेरिका, यूरोप,सऊदी अरब और अन्य देशों जो करता है।इनमें 60-70% निर्यात अकेले अमेरिका को किया जाता है।कुल निर्यात का 60% शहद सरसों शहद होता है।अभी हाल ही में त्रिपुरा के Dergang FPO से दुबई को 1 मीट्रिक टन सरसों शहद का निर्यात भी हुआ है जो यह इसकी बढ़ती निर्यात संभावना का उदाहरण है।
संबंधित विषय:
📚 स्रोत एवं संदर्भ
1. 🍯
APEDA – Natural Honey
— भारत में प्राकृतिक शहद का उत्पादन, प्रमुख किस्में, उत्पादक राज्य और निर्यात आंकड़े।
6. 🔎
Madhukranti Portal
— मधुमक्खी पालकों, शहद और bee products की registration तथा traceability से संबंधित सरकारी पोर्टल।
7. 📈
APEDA Agri Exchange
— कृषि उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार, बाजार और निर्यात संबंधी जानकारी।
8. 🎓
KVIC – Honey Mission
— मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण, bee boxes, colonies, equipment और practical training से संबंधित जानकारी।
12. 🧪
PIB – NBHM Backgrounder
— भारत के honey production, export, National Bee Board और Madhukranti से संबंधित विस्तृत पृष्ठभूमि।
नोट: शहद की कीमतें क्षेत्र, गुणवत्ता, मौसम, मात्रा, processing,
packaging और बिक्री चैनल के अनुसार बदलती हैं। बाजार में उपलब्ध व्यापारिक
quotations को सरकारी MSP या निश्चित बाजार मूल्य नहीं माना जाना चाहिए।
NBHM के अंतर्गत सहायता/सब्सिडी भी संबंधित component, पात्रता, स्वीकृत लागत,
राज्य और उस समय उपलब्ध योजना प्रावधानों पर निर्भर करती है।
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