📌अपने छत पर बागवानी (Terrace Gardening) कैसे करें ?:
प्रस्तावना (Introduction)
वर्तमान समय में जब हमारे शहर कंक्रीट के जंगलों में बदलते जा रहे है,कीटनाशक और रसायनयुक्त सब्जियों को लेकर चिंता दिनों पर दिन बढ़ती ही जा रही है और शुद्ध एवं ताजी चीजों जैसे सब्जी और फल आदि को पाना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। ठीक ऐसे ही समय में हमारे घर की छत वरदान के रूप में उभर रहे है और ये ताजी जहरमुक्त सब्जियों को प्रदान करने के साथ साथ इस भीषण गर्मी में हमारे घर की तापमान को कम करने,मानसिक तनाव को कम करने और आय का एक नया जरिया भी बनने लगी है।
घर के छत पर बागवानी यानि --'टेरेस गार्डनिंग' केवल गमलों में पौधों को रख देने का नाम नहीं है,बल्कि यह कला और विज्ञान का अद्भुत मेल है। क्योंकि एक सफल 'टेरेस गार्डनिंग' की शुरुआत करने के लिए मिट्टी के छत की बनावट की तकनीक से लेकर गमलों,मिट्टियों और सिंचाई की तकनीक को बढ़िया से समझने की जरूरत होती है।
छत पर बागवानी यानि --'रुफटाफ फार्मिंग' का अर्थ है घर,स्कूल,ऑफिस या किसी भी छत के इमारत की छत पर फल,सब्जियां,मशालें और औषधीय पौधों एवं फूलों को उगाना। इसे हिन्दी में छत पर फार्मिंग या टेरेस फार्मिंग भी कहा जाता है।
ताकि आगे चलकर छत को या पौधों को या पर्यावरण को कोई नुकसान न हो पाए और हम अपने लक्ष्य में सफल भी हो जाए। इस लेख में इसी बारीकी को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया गया है। उम्मीद है यह आपके लिए काम का होगा और आपको सहयोग प्रदान करेगा।
भारत में टेरेस गार्डेनिंग का बढ़ता क्रेज:क्या कहते है आकड़े
यदि आप सोंच रहे होंगे की आप छत पर बागवानी करने वाले एक अकेले शख्स है तो आप अंधेरे में है। भले ही भारत सरकार का रुफटॉफ फार्मिंग को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं जारी किया गया है लेकिन कृषि तकनीक से जुड़े निजी सर्वे और पर्यावरण संस्थाओं की रिपोर्टों के अनुसार शहरों में इसका ग्राफ काफी तेजी से ऊपर की ओर बढ़ता जा रहा है --
- महानगरों में 10-15% तक का अनुमान: दिल्ली एनसीआर,मुंबई,चेन्नई,बेनगुलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में रहने वाले लगभग 10 से 15 प्रतिशत लोग अपने घरों के छतों पर किसी न किसी बागवानी को जरूर लगा रहे है। विशेषकर दक्षिण भारत के शहरों में --'माई वेजीटेबल गार्डन' जैसी योजनाओं के तहत सब्सिडी और किट बांटी गई है जिसके चलते यह चलन बढ़ी है एवं और भी बढ़ने की उम्मीद है।
- महामारी के बाद 300% का उछाल: एक हालिया ई-कामर्स और गार्डनिंग स्टार्टअप के अनुसार पिछले कुछ समय या वर्षों में खासकर कोरोना महामारी के बाद घरों में खुद के पौधों को उगाने के प्रति लोगों की रुचि में 300% की वृद्धि हुई है।
- शहरी मध्यवर्ग की बदलती आदतें: आज के समय में देश में शहरी मध्यवर्ग अपने घरों एवं छतों पर 5-8% परिवार सक्रिय रूप से मौसमी सब्जियों को उगा रहे है। भले ही यह पूरे देश के स्टार पर 1% तक का आकड़ा होता है लेकिन आने वाले समय में 'स्मार्ट सिटीज' और 'वर्टिकल फार्मिंग' के दौर में टेरेस गार्डनिंग ही भारत के शहरों का भविष्य बनने जा रही है।
हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी कोई खास जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि वहां बागवानी के लिए जमीन और खेत उपलब्ध होते है। फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में भी फूल एवं छोटी सब्जियों की खेती भी छतों पर करने का प्रचलन बढ़ रहा है।
छत पर बागवानी शुरू करने से पहले जरूरी बातें:तकनीकी तैयारियां
यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे नदारन्दाज करने का चलन भी है। क्योंकि ज्यादातर लोग उत्साह में आकर सीधे नर्सरी से भारी-भरकम गमलों को खरीद लाते है और बाद में छत पर सीलन या वजन की समस्या से परेशान होने लगते है। इसलिए पौधा लगाने से पहले आपको इन 3 बुनियादी स्तंभों (Pillars) पर ध्यान देकर काम करना होगा --
1. छत की वजन सहने की क्षमता का आंकलन:
मिट्टी जब सुखी होती है तब तो उसका वजन सामान्य ही होता है,लेकिन जब पानी डालने के बाद वह गीली हो जाती है तो उसका वजन 3 गुना ज्यादा तक बढ़ जाता है। अतः छत पर लोड मैनेजमेंट को समझना और करना जरूरी हो जाता है --
- बीम और पिलर की पहचान: हमेशा भारी और बड़े गमलें को छत के किनारों पर या उसे वहा रखे जहां नीचे से दीवार,बीम या पिलर का सपोर्ट हो। छत के बिल्कुल बीच वाले हिस्सों में भारी गमलों को रखने से बचें।
- लाइटवेट गार्डनिंग का नियम: पारंपरिक भरी मिट्टी के बजाए हल्के वजन वाले कंपोनेन्ट का उपयोग करे। इसके बारे में हम आगे मिट्टी वाले भाग में भी बताएंगे।
2. वाटरप्रूफिंग और सीलन से बचाव:
लगातार पानी देने से छत में नमी बैठ सकती है जो अंदर घुसकर घर के लेटर को कमजोर कर सकती है। इससे बचने के लिए यह उपाय जरूर करें ---
- प्लास्टिक शीट्स या ग्रो-बैग ट्रेश: गमलों को सीधे घर के छत पर रखने के बजाए --'गमला स्टैन्ड' या प्लास्टिक की ड्रेनेज ट्रे पर रखे। इससे गमलों के अंदर और नीचे से निकलने वाला पानी सीधे छत के संपर्क में नहीं आता है। और नीचे झाड़ू लगाना भी आसान हो जाता है।
- वाटरप्रूफ कोटिंग: यदि संभव हो तो बागवानी शुरू करने से पहले छत पर एक अच्छी क्वालिटी का वाटर प्रूफिंग प्राइमर या लिक्विड रबर कोटिंग करवा दे। पूरी कोशिश करें की शुरुआत में ही यह काम हो जाए।
3. सन मैपिंग (Sunlight Mapping):
छत पर बागवानी शुरू करते समय तो इसपर कोई ध्यान ही नहीं देता है। लेकिन यह भी सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात है क्योंकि पौधों का भोजन धूप ही होता है और लेकिन प्रत्येक पौधों को एक जैसे ही धूप की जरूरत भी नहीं पड़ती है। अतः --
- पहले निरीक्षण: पौधा लगाने से पहले ही करीब कम से कम 2-3 दिनों पहले ही पूरे छत का निरीक्षण करे की छत के किस हिस्से पर सुबह से शाम तक 6-8 घंटे की तेज धूप आती है और कहां पर केवल सुबह की हल्की धूप ही आती है।
- धूप के हिसाब से पौधा: तेज धूप वाले हिस्से में--टमाटर,मिर्च,बैगन और चम्पा जैसे पौधों को रखे और जहां कम धूप एवं छाव वाली हिस्सा है वहां पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक,धनियां और इंडोर पौधों को लगानी चाहिए।
गमलें और ग्रो-बैग्स का चुनाव कैसे करें
छत पर बागवानी के लिए गमला चुनते समय आपको दो चीजों पर ध्यान देना चाहिए --वजन और टिकाऊपन। इन दोनों बातों का ध्यान रखते हुए आप --
- ग्रो-बैग्स (Grow-Bags) छत के लिए सर्वोतम: आज टेरेस गार्डनिंग के लिए HDPE (हाई डेन्सिटी पॉलिथीन) ग्रोबैग्स का प्रचालन सबसे ज्यादा हो रहा है। क्योंकि ये वजन में बहुत ही हल्का होता है और आसानी से फटता भी नहीं है। साथ में इसमें पौधों की जड़ों को हवा भी आसानी से मिलती रहती है।
- प्लास्टिक के गमलें: ये दिखने में सुंदर होते है और पानी की नमी को लंबे समय तक रोककर रखते भी है। छत के लिए ये हल्के भी होते है। हां इसका कवालिटी अच्छा रखे ताकि धूप को सन कर सके और जल्दी ही न चटके।
- मिट्टी और सीमेंट के गमलें: ये पौधे के स्वास्थ्य के लिए तो बहुत अच्छे होते है लेकिन इसका खुद का वजन ज्यादा होता है। इसलिए छत पर इसका उपयोग सीमित मात्रा में ही किया करे।
👜गमलों के प्रकार - फायदे और नुकसान (Quick Comparison) : |
गमले का प्रकार | वजन (Weight) | टिकाऊपन (Durability) | HDPE ग्रो बैग्स | बेहद हल्का | 4 - 5 साल (बहुत बढ़िया) ⭐⭐⭐⭐⭐ (5/5) | प्लास्टिक के गमले | हल्का | 2 - 3 साल (धूप में कमजोर) ⭐⭐⭐⭐ (4/5) | मिट्टी के गमले | भारी | नाजुक (जल्दी टूटने का डर) ⭐⭐⭐ (3/5) | सीमेंट के गमले | अत्यधिक भारी | बहुत मजबूत और लंबा ⭐⭐ (2/5) |
💥छत के लिए रेटिंग : सबसे अच्छा रेटिंग छत के लिए HDPE ग्रो बैग्स का है। भले ही थोड़ा महंगा पड़े एक ही बार होता है लेकिन छत को राहत पहुंचता है। |
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इतनी तैयारी करने के बाद ही अब आप छत पर गार्डनिंग के बारे में आगे बढ़े। ये इसकी नीव है। अब असली कहानी की शुरुआत करते है।
पौधों के लिए परफेक्ट पॉटिंग मिक्स (Soil Mix)कैसे बनाएं
मिट्टी को उपजाऊ भी बनाए रखना है और उसका वजन भी कम रखना है और इसी बिन्दु को ध्यान में हमेशा रखना है। यह चुनौती से कम नहीं होता है। और इस चुनौती से आपको घबराना भी नहीं है क्योंकि हम उसका समाधान और बेहतर उपाय बता रहे है।
छत के लिए एक हवादार,आदर्श और पोषक तत्वों से भरपूर 'लाइटवेट सॉइल मिक्स' तैयार करने का सीक्रेट फार्मूला इस प्रकार से है ---
- 50% कोकोपीट (Cocopeat): यह नारियल के छिलकों का बुरादा होता है जो वजन में हल्का होता है और अपने से चार गुणा ज्यादा पानी सोख सकता है तथा पोषक तत्वों वाला भी होता है। आप घर पर भी इसे बना सकते है। पूजा के लिए नारियल लाइए और उसका छिलका खुजा निकाल कर बुरादा बना लीजिए।
- 30% वर्मिकम्पोस्ट या गोबर की खाद: यह पौधों को सम्पूर्ण विकास के साथ उन्हे नाइट्रोजन,फास्फोरस और पोटैशियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व उपलब्ध करा देता है। केंचुओं की खाद भी बेस्ट होती है।
- 20%% सामान्य बगीचे की मिट्टी: यह पौधों की जड़ों को मजबूत आधार प्रदान करती है।
- एक मुठ्ठी नीम की खली: इसे पूरी मिट्टी,कोकोपीट,वर्मिकम्पोस्ट में मिक्स कर दे। ये गमलों में हानिकारक फंगस और कीड़ों को पनपने नहीं देता है।
➢बनाने की विधि:
उपरोक्त सभी सामग्रियों को एक बड़े तिरपाल या फर्श पर डालकर बढ़िया से मिला ले। इसे गमलों में डालने से पहले गमलें के ठीक नीचे सबसे पहले सुखी पत्तियां या नारियल का सूखा रेशा रखे। इससे जल निकासी बेहतर रहती है।
🌰लाइटवेट मिट्टी (Soil Mix) का परफेक्ट अनुपात |
सामग्री (Ingredients) | सही अनुपात (%) | यह क्यों जरूरी है? (मुख्य लाभ) | कोकोपीट (Cocopeat) | 50% | वजन को बेहद हल्का रखता है और नमी सोख कर रखता है। | वर्मीकंपोस्ट / गोबर खाद | 30% | पौधों को नाइट्रोजन और जरूरी पोषक तत्व (पोषण) देता है। | बगीचे की सामान्य मिट्टी | 20% | जड़ों को मजबूती से पकड़ कर रखने का आधार देता है। | नीम खली पाउडर | 1 मुठ्ठी प्रति गमला | मिट्टी को हानिकारक फंगस और कीड़ों से बचाता है। |
🌱फार्मूला : सभी को एक बड़े तिरपाल पर रखकर बढ़िया से मिला दीजिए। |
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शुरुआती लोगों के लिए कौन से पौधे लगाना आसान है
जब आप छत पर बागवानी की शुरुआत कर रहे है तब आपको ऐसे पौधों को चुनना चाहिए जो कम देख भाल में भी आसानी से उग जाए और जल्दी फल या फूल देने लगे क्योंकि इससे आपका उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ जाता है।
1. आसानी से उगने वाली सब्जियां:
सबसे पहले कुछ ऐसी सब्जियों का चुनाव करना चाहिए जो कम मेहनत और देखभाल में जल्दी फल प्रदान कर देती है जैसे --
- हरी मिर्च और टमाटर: क्योंकि आप इन्हे छोटे 12 इंच के ग्रो बैग्स में भी सासनी से उगा सकते है। इन्हे 6-8 घंटे की अच्छी धूप की आवश्यकता होती है।
- पालक और धनियां: इन्हे उगाने के लिए ज्यादा गहरा गमला का जरूरत नहीं पड़ता है और इसे 6-8 इंच की गहराई वाली चौड़ी क्यारियां काफी होती है। ये बहुत जल्दी 30-40 दिनों में तैयार हो जाती है।
- पुदीना: इसे आप बाजार से सब्जी के लिए लाई गई पुदीना के डंडियों में से बो सकते है। यह कम से कम देखभाल में भी तेजी से फैलता है।
2. छत की शोभा बढ़ाने वाले फूल:
पूजा से लेकर घर की सजावट और उत्सवों में फूल की जरूरत पड़ती है। साथ ही छत की शोभा और सजावट के लिए भी। अतः --
- गेंदा (Marigold): इसे बगीचे का रक्षक भी कहा जाता है क्योंकि इसके गंध से हानिकारक किट दूर भागते है। और ये कम देखभाल में आसानी से हो जाती है।
- सदाबहार: नाम से ही स्पष्ट हो जा रहा है यह हर मौसम में बिना किसी खास देखभाल के फूल देता रहता है।
- चम्पा (Plumeria): यदि आप अपने छत पर छोटा,भीनी खुशबू और महक वाला पेड़ जैसा लुक चाहते है तो चम्पा की कोई भी वेरायटी गमलें में लगा सकते है। यह कितना भी तेज धूप को आसानी से सह लेता है।
टेरेस गार्डेन की देखभाल के जरूरी नियम
अब अपने गार्डेन की देखभाल और कीटों से सुरक्षा की है। छत पर जब आप सब्जियां उगाते है तब उन पर छोटी मक्खियां,आफिट्स या फंगस का हमला होता ही है। लेकिन कभी भी अपनी शुद्ध सब्जियों पर रासायनिक कीटनाशक आदि का छिड़काव नहीं करनी चाहिए।
इसके बजाय आप शुद्ध ऑर्गेनिक कीटनाशक घर पर भी बना सकते है। और इस पर तो आपका होममेड 'नई ऑइल स्प्रे' ही काफी है।
- कैसे बनाए: आप 1 लीटर गुनगुने पानी में 1 चम्मच शुद्ध नीम का तेल और 4-5 बूंद लिक्विड डिसवॉश को डालकर अच्छी तरह से हिला ले।
- इस्तेमाल का तरीका: हर 15 दिनों पर शाम के समय इस मिक्स को अपने पौधों की पत्तियों पर करनी चाहिए। यह पूरी तरह से सुरक्षित और ऑर्गेनिक है।
इसके बाद बारी आती है सिंचाई की।छत पर सिंचाई करना भी आसान ही होता है। आप इसके लिए छोटे ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई पद्धति को अपनाएंगे तो ज्यादा बेहतर रहेगा। लेकिन यह बड़े स्तर के लिए ज्यादा उपयोगी होता है। अतः आप अपने छत पर Hydroponic farming को अपना सकते है या इसकी प्रतिशत मात्रा को अपना सकते है।
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| घर की छत पर बागवानी समय की मांग है |
छत पर बागवानी शुरू करने में कितनी लागत आएगी
कोई भी नया काम करने में मेहनत के साथ खर्च यानि लागत भी आती ही है। अतः नया गार्डेन शुरू करते समय हर किसी के मन में यह सवाल आता है कि इस शौक को पूरा करने में जेब पर कुल कितना खर्च आ जाएगा। सही कहा जाए तो यह निवेश आपके कितने बड़े पैमाने पर शुरू करना चाहते है इसी बात पर निर्भर करता है।
अपनी सुविधा अनुसार समझने के लिए इसे तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है --
- लो बजट शुरुआत (500-1000 रुपया): अगर आप 4-5 पौधों से शुरू करना चाहते है तो यह बेस्ट है और इसमें आप घर में बेकार पड़ी बाल्टी थर्मोकोल बॉक्स और तेल के बेकार पड़े डिब्बों का उपयोग गमलों के रूप में कर सकते है। इससे घर का कचरा मनेजमेंट भी हो जाता है। अब आपको केवल 150 रुपये की कोकोपीट,100 रुपये की वर्मिकम्पोस्ट,और 100,रुपये के बीज खरीदने होंगे। आपका काम शुरू हो जाएगा।
- मीडियम बजट शुरुआत (2000-5000 रुपये): यह शुरुआती लोगों के लिए सबसे बेस्ट होता है। इसमें आप छत के एक छोटे हिस्सों को 10-15 पौधों का बागवानी बना सकते है।इसमें आप 1,000 रुए के अच्छे ग्रो-बॉक्स और 1500 रुपये में मिट्टी खाद का पूरा इंतजाम हो जाएगा। बाकी पैसे में खुरपी,वाटरिंग केन और कुछ पौधा एवं नीम ऑइल का काम पूरा हो जाएगा।
- हाई बजट प्रीमियम सेटअप (10,000 से उपर): इससे आप अपनी पूरी छत को एक ग्रीन्हाउस सेटअप बना सकते है। इसमे लोहे का मजबूत गमला स्टैंड,चारों तरफ से ग्रीन नेट,ड्रिप सिंचाई सिस्टम और बड़े फ़ैन्सी प्लांटर्स शामिल कर सकते है।
टेरेस गार्डनिंग का लागत विश्लेषण:
आप इस टेबल के मध्यम से अच्छी तरह से लागत का अंकलन कर सकते है --
🌱टेरेस गार्डनिंग का लागत विश्लेषण: |
सामग्री का नाम (Items) | अनुमानित लागत (Rs.) | खर्च का प्रकार (Expense Type) | HDPE ग्रो बैग्स (10 पीस) | ₹800 - ₹1,200 | एक बार का खर्च (One-time) | कोकोपीट और वर्मीकंपोस्ट | ₹700 - ₹1,000 | बार-बार होने वाला (6-Monthly) | पौधे और बीज (सब्जियां/फूल) | ₹300 - ₹500 | मौसमी खर्च (Seasonal) | गार्डनिंग टूल्स (खुरपी/स्प्रेयर) | ₹400 - ₹600 | एक बार का खर्च (One-time) | लोहे के स्टैंड (वैकल्पिक) | ₹1,500 - ₹3,000 | एक बार का खर्च (छत की सुरक्षा के लिए) |
🌷स्मार्ट टिप: नए गार्डनर्स को हमारी सलाह यही है कि शुरुआत हमेशा मीडियम बजट से करें। पहले साल केवल 8-10 आसान पौधों से शुरुआत करें। |
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यदि आप पहली बार ट्राई करना चाहते है तो केवल 4-5 पौधों के साथ घर के बेकार पड़े प्लास्टिक की बाल्टियों,डब्बों और अन्य सामानों से कर सकते है। इसमें खर्च भी कम आएगा और काम भी शुरू हो जाएगा। साथ ही बेकार की चीजों का इस्तेमाल करके आप पर्यावरण की सुरक्षा में भी भागीदार बन जाते है।
घर की छत पर बागवानी यानि रुफटफ फार्मिंग का पर्यावरण पर प्रभाव:
- तापमान कम करने में सहायक होती है।
- कार्बन को अवशोषित करती है।
- पक्षियों और मधुमक्खियों को आकर्षित करती है।
- वर्षा जल संरक्षण में मदद करती है।
- शहरी जैव विविधता को बढ़ाती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
इस प्रकार से रुफटाफ फार्मिंग केवल छत पर सब्जियां उगाने का तरीका मात्र नहीं है,बल्कि यह स्वास्थ्य जीवन,पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। यह आपके परिवार की सेहत के लिए 100% शुद्ध और केमिकल-फ्री सब्जियां उपलब्ध करा सकता है। अतः यह पहल --परिवार के स्वास्थ्य,घर के खर्च और हरित पर्यावरण --इन तीनों के लिए लाभदायक है।
और अधिकतर लोगों के पास घरों में छत होती ही है। अतः जिनके घरों में छत है वह इस फार्मिंग सिस्टम का लाभ उठा सकता है। यह भी संयोग ही है कि आपके पास छत है। उस छत का इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण और परिवार के लिए बिना केमिकल वाली मूल स्वाद प्रदान करने वाली सब्जियों के साथ पूजा के लिए फूलों को उगाने के लिए इस्तेमाल कर सकते है।
तो देर न करते हुए अभी और आज से ही आप प्लानिंग शुरू कर दीजिए और अपने छत पर गमलों को लेकर जाईए और एक पौधा लगा कर आईए। देखिए कितना खुशी मिलता है। और जब खुश हो जाईए तब आप विधिवत इसका शुरुआत कीजिए और उसका एक फोटो खिचकर हमारे पास इस ब्लॉग के कमेन्ट बॉक्स में भी अपलोड कर दीजिए। ताकि आपके साथ हम सभी भी खुश हो सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1:रुफटॉप फार्मिंग क्या है? ▼
उत्तर:घरों और इमारतों की छतों पर सब्जियां,फूल और अन्य पौधों को उगाने की प्रक्रिया को रुफटॉप फार्मिंग कहा जाता है।
प्रश्न 2: क्या छत पर बागवानी शुरू करने से लेन्टर या सीलन की समस्या शुरू हो सकती है? ▼
उत्तर: यदि आप सही सावधानी नहीं बरतते है तो लगातार पानी गिरने से सीलन आ सकती है। इससे बचने के लिए पौधों को सीधे फर्श पर रखने के बजाय हमेशा गमला स्टैंड या प्लास्टिक ड्रेनेज ट्रे का उपयोग करना चाहिए। और बागवानी शुरू करने से पहले छत का वाटर प्रूफ कोटिंग करवा लेनी चाहिए।
प्रश्न 3:छत के लिए हल्की और उपजाऊ मिट्टी कैसे तैयार करें? ▼
उत्तर: छत के लिए एक हवादार,आदर्श और पोषक तत्वों से भरपूर 'लाइटवेट सॉइल मिक्स' तैयार करने का सीक्रेट फार्मूला इस प्रकार से है ---
50% कोकोपीट (Cocopeat),30% वर्मिकम्पोस्ट या गोबर की खाद,20%% सामान्य बगीचे की मिट्टी,एक मुठ्ठी नीम की खली---उपरोक्त सभी सामग्रियों को एक बड़े तिरपाल या फर्श पर डालकर बढ़िया से मिला ले। इसे गमलों में डालने से पहले गमलें के ठीक नीचे सबसे पहले सुखी पत्तियां या नारियल का सूखा रेशा रखे। इससे जल निकासी बेहतर रहती है।
प्रश्न 4:छत पर बागवानी शुरू करने में कितना खर्च आता है? ▼
उत्तर:यह आपके ऊपर निर्भर करता है की आप कितने बड़े पैमाने पर इसे शुरू करना चाहते है। बहुत छोटे और ट्राइ करना हो तो 500 रुपये में भी शुरू हो सकताई है। मध्यम स्तर के लिए 5000 -7000 तक में बढ़िया से हो सकती है और बड़े स्तर के लिए करना हो तो 10,000 से अधिक की लागत में आसानी से हो सकती है।
प्रश्न 5:क्या चम्पा का पौधा गमलें में आसानी से उगाया जा सकता है? ▼
उत्तर:हां!आप 16-20 इंच के अच्छे से जल निकासी वाले गमलें में इस पौधा को घर पर लगा सकते है। इसे प्रतिदिन 6-8 घंटे धूप मिलने से अच्छा और बढ़िया फूल फूलता है।
प्रश्न 6:टेरेस गार्डनिंग के लिए गमलें अच्छे होते है या ग्रो बैग्स? ▼
उत्तर: छत की बागवानी के लिए HDPE ग्रो बैग्स सर्वोत्तम माने गए है। क्योंकि ये वजन में बहुत ही हल्के होते है और तेज धूप में भी जल्दी खराब नही होते है और इसमें पौधों की जड़ों को हवा भी मिलती रहती है। बाकी मिट्टी और सीमेंट के गमलें वजन में बहुत भारी होते है।
प्रश्न 7:शुरुआती लोगों के लिए छत पर कौन सा पौधा लगाना सही रहता है? ▼
उत्तर: शुरुआती लोगों को वैसा पौधा लगाना चाहिए जो कम मेहनत और कम देखभाल में तथा कम दिनों में ही जल्दी तैयार हो जाए।सब्जियों में आप हरी मिर्च,टमाटर,धनिया और पालक पुदीना को लगा सकते है। फूलों में गेंदा,सदाबहार और चम्पा बेस्ट विकल्प है क्योंकि ये धूप को अच्छी तरह से सहन कर लेते है।
प्रश्न 8:बिना केमिकल के पौधों को कीड़ों और फंगस से कैसे बचाए? ▼
उत्तर: छत पर जब आप सब्जियां उगाते है तब उन पर छोटी मक्खियां,आफिट्स या फंगस का हमला होता ही है। लेकिन कभी भी अपनी शुद्ध सब्जियों पर रासायनिक कीटनाशक आदि का छिड़काव नहीं करनी चाहिए।
इसके बजाय आप शुद्ध ऑर्गेनिक कीटनाशक घर पर भी बना सकते है। और इस पर तो आपका होममेड 'नई ऑइल स्प्रे' ही काफी है।
कैसे बनाए: आप 1 लीटर गुनगुने पानी में 1 चम्मच शुद्ध नीम का तेल और 4-5 बूंद लिक्विड डिसवॉश को डालकर अच्छी तरह से हिला ले।
इस्तेमाल का तरीका: हर 15 दिनों पर शाम के समय इस मिक्स को अपने पौधों की पत्तियों पर करनी चाहिए। यह पूरी तरह से सुरक्षित और ऑर्गेनिक है।
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