प्रस्तावना (Introduction)
बढ़ती गर्मी और गिरते जलस्तर के करण खेती करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है,ऐसे मे 'ड्रिप' और 'स्प्रिंकलर' सिंचाई की तकनीकें किसानों के लिए वरदान के समान लाभ दे रही है। इसीलिए भारत सरकार ने भी अपने 'प्रति बूंद अधिक फसल' (Per Drop More Crop) योजना के तहत खेती को आसान बनाने के साथ, लागत को कम करने के लिए सब्सिडी भी प्रदान कर रही है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम आधुनिक सिंचाई की दो प्रमुख तकनीकें है,जो पानी की बचत करने और पौधों को सही मात्र मे नमी प्रदान करने के लिए उपयोग की जाती है। इसमें खाद की 30% और मजदूरी की 40% बचत हो जाती है। और इसका सबसे बड़ा फायदा गर्मियों के मौसम मे फलों,सब्जियों एवं फसलों को उगाने मे मिलता है।
इस लेख मे इसके सभी पक्षों को देखते और समझते है ताकि कैसे सब्सिडी के लिए अप्लाई करके इसका अधिक से अधिक फायदा उठाया जाए।
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम क्या है ?
इस बदलते समय और पर्यावरण चुनौतियों के बीच मे भी खाद्यान्नों और सब्जियों की मांग मे कमी नहीं आने वाली है। इसलिए किसान सालों भर कोई न कोई फसल उगाते ही रहते है। लेकिन उनको सबसे बड़ी चुनौती सिंचाई को लेकर आती है।
इन्ही चुनौतियों का समाधान है ये दिनों सिस्टम -
1. ड्रिप सिंचाई प्रणाली (Drip Irrigation System) क्या है ?
इसे 'टपक सिंचाई' भी कहते है। इसमें पानी को पाइपों के जाल के जरिए सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।
- कैसे काम करता है: इसमें छोटे-छोटे एमीटर्स (Emitters), या 'नोजल' लगे होते है,जिनसे पानी बूंद-बूंद करके टपकता रहता है।
मुख्य लाभ क्या है ? -:
- इसमे पानी की बर्बादी लगभग शून्य होती है। (90-95% दक्षता)
- खर-पतवार कम उगते है क्योंकि पानी केवल पौधों की जड़ों की ही मिलता है,पूरी जमीन को नहीं।
- मिट्टी के कटाव को रोकता है जिससे खाद एवं पोषक तत्व हमेशा पौधों को मिलते रहते है।
उपयुक्तता -: यह बागवानी,फलों के पेड़ों(जैसे नींबू,आम अंगूर आदि) और कतार वाली फसलों के लिए सबसे अच्छा है।
2. ड्रिप सिंचाई के लिए उपयुक्त फसलें कौन कौन सी है ?
- फल(Orchards): अंगूर,केला,पपीता,अनार,नींबू,आम,अमरूद,संतरा आदि।
- सब्जियां(Vegetables):टमाटर,मिर्च,बैगन,फूलगोभी,भिंडी,कददुवर्गीय फसलें(बेल वाली सब्जियां)
- नगदी फसलें: गन्ना और कपास।
- विशेष:मोंटे अनाज(Millets ): जैसे बाजार या रागी के लिए भी ड्रिप का उपयोग सब-सरफेस तकनीक से किया जा रहा है ताकि पैदावार बढ़ायी जा सके।
विशेषता | ड्रिप सिस्टम (Drip) | स्प्रिंकलर सिस्टम (Sprinkler) |
पानी देने का तरीका | बूंद-बूंद करके जड़ों में | बारिश की तरह ऊपर से छिड़काव |
पानी की बचत | बहुत अधिक (सबसे कुशल) | मध्यम (नहर सिंचाई से बेहतर) |
मिट्टी का प्रकार | हर तरह की मिट्टी के लिए | रेतीली मिट्टी के लिए बहुत अच्छा |
लागत | स्थापना खर्च थोड़ा अधिक होता है | ड्रिप की तुलना में थोड़ा कम |
3. स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली (Sprinkler Irrigation System)क्या है ?
इसे 'छिड़काव सिंचाई' भी कहते है। यह तकनीक बारिश की तरह काम करती है।
- कैसे काम करता है: इसमे पम्प की मदद से पानी को पाइपों के जरिए खेतों तक ले जाया जाता है,और 'नोजल' के माध्यम से हवा मे छिड़का जाता है, जो बूंदों के रूप मे जमीन पर गिरता है।
मुख्य लाभ क्या है ?-:
- ऊबड़-खाबड़ या ढलान वाली जमीन के लिए यह बहुत उपयोगी है जहां पानी भरना मुश्किल होता है।
- मिट्टी मे नमी का समान वितरण होता है।
- गर्मी के मौसम मे फसलों के तापमान को नियंत्रित करने मे मदद करता है।
उपयुक्तता -: यह गेहूं,बाजार,दलहन, और मूंगफली जैसे फसलों के लिए सबसे ज्यादा प्रभावी है।
4. स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए उपयुक्त फसलें कौन सी है ?
यह उन फसलों के लिए बेहतरीन है जो घनी बोई जाती है,और जिन्हे ऊपर से पानी की बौछार पसंद है।
- अनाज और दलहन: गेहूं,चना,मूंग,मसूर,सोयाबीन आदि।
- तिलहन: सरसों,मूंगफली और सूरजमुखी।
- चारा फसलें: बरसिम,लूसर्न और अन्य पशु चारा।
- मोंटे अनाज: ज्वार और बाजरा के लिए स्प्रिंकलर बहुत ही प्रभावी है,खासकर रेतीली मिट्टी मे।
- पत्तेदार सब्जियां: पालक, धनियां,मेथी।
फसल का प्रकार | सुझाई गई प्रणाली | मुख्य कारण |
बागवानी / फल | ड्रिप | पानी सीधा पेड़ के तने/जड़ के पास जाता है। |
ऊंची फसल (गन्ना) | ड्रिप | पाइप बिछाना आसान है, खाद (Fertigation) देना सरल है। |
कम ऊंचाई की घनी फसल (गेहूं) | स्प्रिंकलर | पूरे खेत में समान छिड़काव होता है। |
नर्सरी / छोटे पौधे | माइक्रो-स्प्रिंकलर | पौधों को कोमल बौछार मिलती है। |
5. गर्मियों मे इन सिस्टम के विशेष लाभ क्या है ?
1. लू (Heat Wave)से बचाव: स्प्रिंकलर चलाने से खेत का तापमान 2 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक कम हो जाता है,जिससे फसल जलने से बच जाती है।
2. कम पानी मे अधिक क्षेत्र:गर्मी मे ट्यूबवेल और नहर मे पानी का बहाव कम हो जाता है। इन सिस्टम से आप उतने ही पानी मे तीन गुना से अधिक सिंचाई कर सकते है।
3. मिट्टी की पपड़ी नहीं बनती: तेज धूप मे खुला पानी देने से जमीन सख्त हो जाती है,लेकिन ड्रिप और स्प्रिंकलर से मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है।
उपयोगी सुझाव -: यदि आप उत्तर प्रदेश या बिहार मे है, और इस समय मूंग या तरबूज लगाने की सोच रहे है तो,स्प्रिंकलर मूंग के लिए और ड्रिप तरबूज के लिए उपयोग करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।
6. सरकारी सब्सिडी कितना और कैसे मिलता है ?
इन सिस्टम को अपनाने के लिए भारत सरकार की "प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना"(PMKSY-Per Drop More Crop) द्वारा सब्सिडी प्रदान की जाती है सरकार किसानों को उनकी श्रेणियों के आधार पर अलग-अलग प्रतिशत मे सब्सिडी मदद देती है -
- लघु और सीमांत किसान(Small and Marginal Farmers): इन्हे कुल लागत का 55% केंद्र सरकार और बाकी राज्य सरकार की ओर से जो अलग अलग राज्यों मे अलग -अलग है मिलता है जो कुल मिलाकर 80 से 90 प्रतिशत तक हो जाता है।
- अन्य किसान(Others Farmers): बड़े किसानों के लिए यह सब्सिडी 45% निर्धारित है।
- विशेष क्षेत्र: इसमे उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए सब्सिडी की राशि और भी अधिक होती है।
अनुमानित लागत (Estimated Cost-2026) मे क्या है ?
सिस्टम की लागत खेत की दूरी और फसल की आकार पर निर्भर करती है। 1 हेक्टेयर (लगभग 2.5 एकड़) के लिए एक सामान्य अनुमान इस प्रकार से है -
(जो उत्तर प्रदेश और बिहार के सब्सिडी के हिसाब से है)-
विवरण | ड्रिप सिस्टम (Drip) | स्प्रिंकलर (Sprinkler) |
कुल अनुमानित लागत | ₹1,00,000–₹1,25,000 | ₹50,000 – ₹60,000 |
सरकारी सब्सिडी (80% औसत) | ₹80,000 – ₹1,00,000 | ₹40,000 – ₹48,000 |
किसान को देना होगा | ₹20,000 – ₹25,000 | ₹10,000 – ₹12,000 |
नोट: यह निवेश केवल एक बार का निवेश है,लेकिन इसमे बिजली,मजदूरी और खाद के खर्च मे जो बचत होती है, उसमे 2 से 3 साल मे ही पूरी लागत वसूल हो जाती है।
सब्सिडी के लिए आवेदन करने के लिए आप अपने नजदीकी कृषि विभाग या ब्लॉक स्टार के अधिकारी से मिल सकते है। बहुत सारे राज्यों मे अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जा रहा है। आप पंजीकृत कंपनियों के अधिकृत विक्रेताओं से भी संपर्क कर सकते है, वे आपका आवेदन प्रक्रिया मे मदद करते है।
बिहार मे सब्सिडी कितनी मिलती है
बिहार सरकार "प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना"(PMKSY) के तहत सूक्ष्म सिंचाई को बहुत बढ़ावा दे रही है।
- दर:बिहार मे ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर सिस्टम पर 80% तक सब्सिडी प्रदान किया जा रहा है।
- आवेदन: बिहार मे बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय का कार्यालय की आधिकारिक बेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जा कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते है।
- विशेषता: बिहार मे सब्जी और फलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या अधिक है,अतः उनके लिए ये बहुत फायदेमंद है।
उत्तर प्रदेश मे सब्सिडी कितनी मिलती है
उत्तर प्रदेश सरकार भी केंद्र की योजना के साथ साथ अपनी ओर से अतिरिक्त 'टॉप-अप' बोनस देती है।
- लघु और सीमांत किसान: इन्हे कुल लागत पर 80% से 90% तक की सब्सिडी मिल जाती है। जिसमे केंद्र का 55% और बाकी राज्य का हिस्सा होता है।
- बड़े किसान: यहां बड़े किसानों को 70% से 75% तक की सब्सिडी मिल जाती है।
- पंजीकरण:उत्तर प्रदेश के किसानों को upagriculture.com पर अपना पंजीकरण करना अनिवार्य है। यहां 'पहले आओ-पहले पाओं' के आधार पर लाभ दिया जाता है।
आवेदन के लिए जरूरी कागजात क्या होना चाहियें
- आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज़ का फोटो।
- जमीन के कागज (खतौनी और जमाबंदी)।
- जाती प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
इस प्रकार से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसान 80% से 90% तक की सब्सिडी ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम के लिए 2026 में आसानी से पा सकते है। और अपने खेती के खर्चे को करने के साथ-साथ अपनी पैदावार को बढ़ा सकते है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पर ड्रॉप मोर क्रॉप)
- Rs 2393.97 करोड़ की मंजूरी
- स्प्रिंकलर और ड्रिप इरीगेशन पर शासकीय अनुदान
- 31 मार्च 2031 तक योजना का विस्तार
- माइक्रो इरीगेशन से बढ़ेगी जल दक्षता
निष्कर्ष (Conclusion)
किसानों को जिनके लिए खेती पूरी तरह से प्रकृति और भूजल पर निर्भर है, वहां 90% तक की सब्सिडी का लाभ उठाना हर जागरूक किसान के लिए जरूरी है। यह तकनीक खेती को एक 'स्मार्ट बिजनेस' बनाने की दिशा मे एक सकारात्मक कदम है। याद रखिए,खेतों मे 'कम लागत' ही 'अधिक मुनाफे' की असली कुंजी है।
अब आपकी बारी है..
क्या आप अपने खेत मे ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने की सोच रहे है ? या आपको ऑनलाइन आवेदन करने मे कोई दिक्कत आ रही है ?
आप नीचे कमेन्ट बॉक्स मे अपने जिले का नाम लिखकर बता सकते है की क्या समस्या आ रही है ताकि ! हम और हमारी टीम आपकी पूरी मदद करने की कोशिश कर सके!
.. .. और हां आप, इस जानकारी को WhatsApp ग्रुप मे साथी किसान भाइयों को शेयर करना न भूले। हम मिलकर खेती को आसान बनाते है !!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या इस सिस्टम को लगाने मे बहुत ज्यादा पैसा देने पड़ते है ? ▼
उत्तर: नहीं!सरकारी सब्सिडी के करण किसान को कुल लागत का केवल 10% से 20% तक ही लगाना पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि सिस्टम की लागत 1 लाख रुपया है तो किसानों को 10,000 से 20,000 तक ही लगाना पड़ता है।
प्रश्न 2: क्या पुराने कुएं या बोरवेल पर यह सिस्टम लागू हो सकता है? ▼
उत्तर: हां! बिल्कुल लागू हो सकता है और सब्सिडी मिल सकता है। आपके पास जो भी पानी के स्रोत है उसे एक पंप और पाइप के जरिए ड्रिप और स्प्रिंकलर से जोड़ा जा सकता है।
प्रश्न 3: क्या सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक अकाउंट मे आती है? ▼
उत्तर: हां!अधिकांश राज्यों मे सब्सिडी की राशि
DBT(Direct Benefit Transfar)के माध्यम से सीधे किसानों के आधार लिंक बैंक आकॉउन्ट मे डाली जाती है।कुछ मामलों मे यह सीधे कंपनी को भी दी जाती है और किसानों को केवल अपने हिस्से का पैसा जमा करना होता है।
प्रश्न 4: ड्रिप और स्प्रिंकलर की लाइफ कितनी होती है? ▼
उत्तर: यदि अच्छी गुणवता वाली पाइप और नोजल का प्रयोग किया जाय और उनकी सही समय पर सफाई किया जाय तो,यह सिस्टम 7 से 10 सालों तक आराम से चल जाती है।
प्रश्न 5: क्या खराब पानी से ड्रिप के छेद बंद हो जाते है? ▼
उत्तर: खारे या गंदे पानी से छेद बंद होने का खतरा रहता है,लेकिन इसके लिए सिस्टम के साथ 'सैड फ़िल्टर'या डिस्क फ़िल्टर'लगाया जाता है जो कचरे को पहले ही रोकरोक देता है। समय समय पर ऐसिड ट्रीटमेंट से इन्हे साफ भी किया जा सकता है।
प्रश्न 6: क्या किराये की जमीन पर भी सब्सिडी मिल सकती है? ▼
उत्तर: हां!यदि आपके पास जमीन के मालिक के साथ एक वैध 'लीज एग्रीमेंट'(7-10 साल का )है तो आप उस जमीन पर भी सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते है।
प्रश्न 7: बिहार मे ऑनलाइन आवेदन करने का साइट क्या है? ▼
उत्तर: बिहार मे ऑनलाइन आवेदन बिहार के उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट https://horticulture.bihar.gov.in/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते है।
प्रश्न 8: भारत सरकार की किस योजना के तहत इसे बढ़ावा दिया जा रहा है? ▼
उत्तर: भारत सरकार की भारत सरकार की "प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना"(PMKSY-Per Drop More Crop) "प्रति बूंद,अधिक फसल" के तहत इन्हे बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रश्न 9: उत्तर प्रदेश मे इसके सब्सिडी आवेदन के लिए पंजीकरण करने के लिए वेबसाइट क्या है? ▼
उत्तर: यूपी के किसानों को upagriculture.com (पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल) पर अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है। यहाँ 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर लाभ दिया जाता है।
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