📌 संक्षेप में (Quick Summary)
- “धान की फसल से पहले ढैंचा की खेती” इसे Green Manure King कहा जाता है।जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन मिल सकता है।
- ढैंचा बोने का सही समय धान से 45–50 दिन पहले बोना जरूरी।
- फायदे मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाता हैयूरिया की बचत धान की पैदावार बढ़ाता है मिट्टी भुरभुरी बनाता है।
- याद रखें: स्वस्थ मिट्टी, समृद्ध किसान!
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| धनी रोपाई से पहले 'ढेेंचा' की बुआई उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता दोनों को बढ़ाता है |
📑 Table of Contents
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प्रस्तावना (Introduction)
भारत में सबसे ज्यादा धान की खेती की जाती है और अब मानसून के शुरुआत के साथ ही इसकी खेती भी शुरू हो जाएगी। और किसान अभी से इसकी तैयारियों में लग भी गए होंगे एवं प्लैनिंग कर रहे होंगे की इस बार कौन सा बीज लगाया जाय और कैसे कैसे खेती की जाय की बंपर पैदावार हो सके।
हम किसान भाइयों के साथ उनके प्लानिंग में साथ मिलकर खड़े है। और आज हम बात करेंगे धान की खेती शुरू करने से पहले की तैयारी के एक महत्वपूर्ण विषय "हरी खाद" जिसे धान के लिए ढेेंचा भी कहा जाता है के बारे में पूरी जानकारी के साथ।
आज के दौर में खेती की लागत बढ़ती जा रही है और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम होती जा रही है। ऐसे में पुराने समय के हमारें पूर्वजों की बताई गई तकनीक चर्चा में आ गई है जिसे --"हरी खाद" कहा जाता है। अगर आप धान की खेती कर रहे है तो उससे पहले ढेेंचा लगाना बहुत ही समझदारी भरा कदम है।
हरी खाद क्या है ? पूरी जानकारी
हरी खाद (Green Manure) वह प्राकृतिक खाद होती है जो हरी पौधों (फसलों) को खेतों में उगाकर और फिर उन्हे मिट्टी में मिलाकर बनाई जाती है। इससे -
- मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है।
- मिट्टी में नाइट्रोजन एवं अन्य पोषक तत्व बढ़ते है।
- मिट्टी को नरम और भुरभुरी बनाती है।
- रासायनिक खाद की जरूरत कम कर देती है।
- मिट्टी में जैविक पदार्थों को बढ़ाती है।
हरी खाद को मुख्य फसल के उगाने से पहले मिट्टी को जोतकर उसमें बुआई किया जाता है। हां मिट्टी में थोड़ी नमी रहनी चाहिए कि बीज उग जाए -
- ढेेंचा,सनई,मूंग और उड़द मुख्य हरी खाद के पौधे है।
- प्रति एकड़ में ढेेंचा को 20-25 kg,सनई-20 kg,मूंग और उड़द-15-18 kg बीज की बुआई किया जाता है।
- बोने के 40-50 दिनों तक पौधों को बढ़ने दिया जाता है जबतक की घुटनों से कमर तक ऊंची न हो जाए।
- इसके बाद हल से जुताई करके मिट्टी में मिला कर 15-20 दिनों तक के लिए छोड़ दिया जाता है।
➢हरी खाद से कितना फायदा होता है ?
- खेत में इससे 40-60 kg प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन बढ़ जाती है।
- यूरिया की 1-2 बोरी तक की बचत हो सकती है।
- मिट्टी की ताकत 2-3 साल बढ़ सकती है।
ढेेंचा क्या है ? धान से पहले ढेेंचा क्यों बोया जाता है ?
ढेेंचा एक दलहनी पौधा है जिसे हरी घास के रूप में उगाया जाता है,यह मिट्टी में प्राकृतिक नाइट्रोजन को जोड़ता है। इसीलिए उसे Green Manure King कहा जाता है।ढेेंचा को धान की रोपाई से 40-50 दिन पहले ही बोया जाता है और और जब ये घुटने से बड़ा हो जाता है तो जोतकर मिट्टी में मिल दिया जाता है।यह शून्य बजट प्राकृतिक खेती के लिए भी बहुत उपयुक्त है।
धान की खेती से पहले ढेेंचा बोने से निम्नलिखित फायदा होता है -
1. मिट्टी को मिलता है नाइट्रोजन का खजाना:
धान की फसल को नाइट्रोजन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है,ढेेंचा एक ऐसा फलिदार फसल है जिसकी जड़ों में खास ग्रंथियां होती है। ये हवा से नाइट्रोजन को खिचकर मिट्टी में जमा कर देती है।
- फायदा: जब आप ढेेंचा खेत में जोत देते है,तो यह प्रति हेक्टेयर 60-100kg नाइट्रोजन मिट्टी को प्रदान करता है। इससे यूरिया पर आपकी निर्भरता कम हो जाती है।
2. जैविक कार्बन (Organic Carbon)में वृद्धि:
लगातार रासायनिक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी 'कड़क' हो जाती है हरी खाद मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा को बढ़ाती है।
- फायदा: मिट्टी भुरभुरी बनती है,जिससे धान की जड़ों का विकास तेजी से होता है और वो गहराई तक जा पाती है।
3. जल धरण क्षमता (Water Holding Capacity) में सुधार:
आज कल कम पानी में बंपर पैदावार होने वाली तकनीकों पर शोध हो रहा है क्योंकि जलवायु में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। ऐसे में ढेेंचा हरी खाद बहुत ही काम की साबित हो रही है।धान एक ऐसी फसल है जिसे बहुत ज्यादा पानी चाहिए। हरी खाद मिट्टी की संरचना को सुधारती है जिससे खेत में नमी लंबे समय तक टिकी रहती है।
- फायदा: सूखे की स्थिति में भी आपकी फसल अन्य खेतों के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित रहती है।
4. खर पतवार और बीमारी पर लगाम:
जब आप खाली खेत में ढेेंचा को उगाते है,तो यह तेजी से बढ़कर पूरे खेत को ढंक लेती है।
- फायदा: इससे धूप जमीन तक नहीं पहुच पाती और अनावश्यक खर पतवार नहीं उग पाते है। साथ ही यह मिट्टी में मित्र कीटों को बढ़ावा देता है।
➢ढेेंचा ही क्यों ?
- यह हर तरह की मिट्टी (ऊसर,रेतीली,चिकनी) में आसानी से उग सकती है।
- यह जलभराव को सहन कर सकता है।
- इसकी पत्तियां जल्दी सड़कर खाद में बदल जाती है।
ढेेंचा बोने का सही समय
ढेेंचा को हमेशा धान की बुआई माने रोपाई से 40-50 दिन पहले बोया जाता है।
ढेेंचा को मई के लास्ट और जून की शुरुआती सप्ताह में ही बारिश की पहली फुहार मिलते ही बो देना चाहिए। जब पौधे 3-4 फिट के हो जाय और फूल निकलने लगे तब इसे खेत में हल चलाकर जोत देनी चाहिए। हां जोतने के बाद खेत में पानी भर दे ताकि वो जल्दी सड़ जाए।
ढेेंचा से पैदावार कितनी बढ़ती है ?
धान की खेती में ढेेंचा का उपयोग केवल मिट्टी को नहीं सुधारता या केवल नाइट्रोजन की पूर्ति ही नहीं करता,बल्कि यह उपज पर भी सीधा और सकारात्मक असर दिखाता है और पैदावार को बढ़ा देता है।
- पैदावार में कुल वृद्धि: धान की फसल में ढेेंचा की हरी खाद का उपयोग करने से 15-25% तक बढ़ोतरी देखी गई है।
- कल्लों की संख्या: हरी खाद वाली खेत में धान के पौधों में कल्लो की संख्या अधिक होती है जिससे बालियां ज्यादा आती है।
ढेेंचा के लिए सरकारी सहायता
ढेेंचा का बीज हमारे पुरखों द्वारा संरक्षित करते हुए सदियों से चलती आ रही एक भारत की बीज विरासत है। ढेेंचा के बीज को कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश और बिहार में फ्री में उपलब्ध कराया गया था लेकिन फिलहाल ऐसी व्यवस्था नहीं है। फिर भी उत्तर प्रदेश और बिहार में इसके बीज पर भारी सब्सिडी मिलता है। इस समय 2026 के खरीफ फसल के लिए सरकारों ने खास योजना चलाई है -
1. उत्तर प्रदेश में स्थिति:
उत्तर प्रदेश सरकार वर्तमान में 'हरी खाद योजना' के तहत ढेेंचा के बीज को वितरित कर रही है।
- सब्सिडी: सरकार ढेेंचा बीज पर 50% सब्सिडी प्रदान कर रही है।
- मिनीकट: लगभग 4 लाख मिनीकट बांटे जा रहे है,जिसमें ढेेंचा के साथ-साथ मक्का और उड़द जैसी फसलों के बीज शामिल है।
- कैसे ले: किसान अपने जिलें के 'राजकीय बीज भंडार'(Government Seed Store) से संपर्क कर सकते है। इसके लिए किसान का 'पारदर्शी किसान सेवा योजना' (DBT) पोर्टल पर पंजीकरण होना आवश्यक है।
2. बिहार में स्थिति:
बिहार सरकार भी दलहनी फसलों और हरी खाद को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलाती है -
- सब्सिडी: यहां भी 'मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना' या अन्य स्थानीय बीज योजनाओं के जरिए 50-90% तक सब्सिडी का प्रवधान है। कई बार विशेष प्रदर्शन के लिए चुनिंदा किसानों को यह मुफ़्त में भी प्रदान किया जाता है।
- कैसे ले: बिहार के किसान brbn.bihar.gov.in (बिहार राज्य बीज निगम) पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते है या अपने पंचायत के 'कृषि समन्वयक' (AC) या किसान सलाहकार से मिल सकते है।
➢महत्वपूर्ण जानकारी (विशेष सूचना):
- सीमित समय: इन बीजों का वितरण धान की रोपाई से ठीक पहले (अप्रैल के अंत से जून की शुरुआत तक) होता है। अतः स्टॉक खत्म होने से पहले आवेदन करके बीजों को प्राप्त कर ले।
- दस्तावेज: सब्सिडी का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड,बैंक पासबुक और किसान पंजीकरण संख्या की आवश्यकता पड़ती है जिसे अपने पास रखे।
👉एक किसान भाई के रूप में परामर्श:
चूंकि एक किसान के रूप में मैं आपको बताना चाहूंगा की खुद हमनें ढेेंचा की बुआई करके इसके फ़ायदों को देखा,आजमाया और पाया है। फिर भी गावं में कई किसान इसकी बुआई इसलिए नहीं करना चाहते है की धान की रोपाई से पहले खेत की जुताई में ट्रैक्टर पर ज्यादा लोड पड़ता है ढेेंचा को बोने से।
सच है थोड़ा लोड पड़ता है तो क्या हुआ इसके फायदे के आगे वो लोड बहुत ही कम है। और मिट्टी की संरचना में सुधार होने से ये लोड अगले फसलों में खुद कम हो जाती है। जिससे इस लोड की भरपाई हो जाती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
यदि संक्षेप में कहा जाय तो, ढेेंचा केवल एक फसल नही है,बल्कि यह हमारी मिट्टी के लिए एक 'प्राकृतिक टॉनिक' है। आज सभी किसान भाई रासायनिक खादों की बढ़ती कीमतें और किल्लत से जूझ रहे है। उपर से अमेरिका-ईरान युद्ध ने इसमें आग में घी डालने का काम कर दिया है।
साथ ही रासायनिक खादों के प्रयोग से हमारी बहुमूल्य मिट्टी का स्वास्थ्य भी गिरता जा रहा है।
ऐसी परिस्थितियों में हरी खाद ढेेंचा को अपनाना और उपयोग करना अपना और अपने खेती के समस्या के समाधान का काम तो कर ही देगा।क्योंकि यह यूरिया और खाद के लागत को ही 25-30% तक कम कर देगा। साथ में देश के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' में भी योगदान को समाहित करेगा।
अतः इस सीजन में अपने खेत को ढेेंचा 'उपहार' में प्रदान करे और आगे ब्याज सहित अधिक पैदावार पाए और अपनी आनेवाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और उपजाऊ जमीन देकर जाए।क्योंकि ढेेंचा को अपनाकर हमारे द्वारा जाने अनजाने में ही सही हम इस खेती की शैली से पर्यावरण सुरक्षा को प्रेरित कर रहे होते है।
☝आपका क्या विचार है ?
क्या आप इस साल अपने खेत में ढेेंचा लगाएंगे ? यदि हां तो कॉमेंट में जरूर बताए!!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1:ढेेंचा की बुआई का सबसे सही समय क्या है? ▼
उत्तर: धान की रोपनी से 45-50 दिन पहले ढेेंचा की बुआई कर देनी चाहिए। आमतौर पर मई का महिना इसके लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
प्रश्न 2: एक एकड़ खेती के लिए कितने ढेेंचा के बीजों की आवश्यकता होती है? ▼
उत्तर: एक एकड़ में हरी खाद तैयार करने के लिए लगभग 12-15 किलो ढेेंचा के बीज की जरूरत पड़ती है।
प्रश्न 3:क्या ढेेंचा उगाने से मिट्टी की उर्वरता हमेशा के लिए बढ़ जाती है? ▼
उत्तर: यह मिट्टी की जैविक संरचना में स्थाई सुधार करता है,लेकिन अधिकतम लाभ लेने के लिए इसे हर साल या एक साल बीच लगाकर लगानी ही चाहिए।
प्रश्न 4:ढेेंचा को मिट्टी में कब पलटना चाहिए? ▼
उत्तर:जब ढेेंचा 40-45 दिनों का हो जाय और उसमें फूल निकलने लगे तब उसे हल जोतकर मिट्टी में मिला देना चाहिए। इस समय इसमें नाइट्रोजन की मात्रा सबसे अधिक होती है। मिट्टी में मिलने के बाद उसमें पानी भरकर 7 दिनों के लिए छोड़ देनी चाहिए ताकि ठीक से सड़ जाए।
प्रश्न 5:क्या ढेेंचा के बीजों पर कोई सरकारी सब्सिडी मिलती है? ▼
उत्तर:हां!उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में कृषि विभाग द्वारा ढेेंचा बीजों पर 50-90% तक की सब्सिडी प्रदान किया जाता है। इसके लिए नजदीकी राज्य कृषि बीज भंडार से संपर्क किया जा सकता है।
प्रश्न 6: क्या कम पानी वाले क्षेत्रों में भी ढेेंचा को उगाया जा सकता है? ▼
उत्तर: ढेेंचा एक बहुत ही सहनशील फसल है। यह कम पानी और जल भराव दोनों को झेल सकता है,इसलिए ये लगभग सभी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।
प्रश्न 7:ढेेंचा जोतने के कितनें दिनों बाद धान की रोपाई करनी चाहिए? ▼
उत्तर: ढेेंचा को मिट्टी में पलटने के बाद पानी भरकर 7-10 दिनों के लिए छोड़ देनी चाहिए,ताकि वह सड़कर खाद का रूप ले ले। इसके बाद धान की रोपाई करना उपयुक्त होता है।
प्रश्न 8:ढेेंचा बोने से कितनी यूरिया की बचत होती है? ▼
उत्तर: ढेेंचा बोने से लगभग 1-2 बोरी यूरिया की बचत प्रति एकड़ हो जाती है।
प्रश्न 9:क्या ढेेंचा एक दलहनी फसल है? ▼
उत्तर: हां! ढेेंचा एक दलहनी फसल है।
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