AI खेती 2035: आने वाले 10 सालों में कैसे बदलेगी भारतीय कृषि ?
संक्षेप में(AI आधारित कृषि 2035)
- क्या है: अब भारतीय कृषि मानसून का जुआ से निकल कर साल 2035 तक बीज से लेकर मंडी तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी,ड्रोन और रोबोट मशीनों के माध्यम से इस धारणा को बदल देगी।
- मुख्य लाभ: कृषि में खाद(उर्वरक),पानी और कीटनाशक का बचत होने से लगत कम हो जाएगा।समय का बचत होगा।और उत्पादन बढ़ने से लाभ बढ़ जाएगा।
- किसके लिए उपयोगी: किसान, ग्रामीण युवा, ग्रामीण महिलाएं, ग्रामीण व्यवसायी।
- जरूरी जानकारी: Artificial Intelligence क्या है,विश्व और भारत में AI आधारित कृषि का वर्तमान स्थिति एवं भविष्य
- इस लेख में: पूरी जानकारी,AI आधारित कृषि के फायदे, चुनौतियां और उनका समाधान।
📌AI खेती 2035: आने वाले 10 सालों में कैसे बदलेगी भारतीय कृषि ?
📑 Table of Contents:
- ➤ प्रस्तावना(Introduction)
- ➤AI क्या है ?(What is Artificial Intelligence)
- ➤ दुनिया में AI खेती कहां कहां पहुंच गई?
- ➤ 2035 तक भारत में आने वाले क्रांतिकारी बदलाव
- ➤ 'मंडी में एआई' – लॉजिस्टिक्स, मूल्य निर्धारण और बिचौलियों का अंत (The Mandi & Supply Chain Revolution)
- ➤ जलवायु परिवर्तन और एआई: 'क्लाइमेट-स्मार्ट' एग्रीकल्चर
- ➤ एआई और भारतीय पशुपालन: 'स्मार्ट डेयरी' 2035
- ➤ फिनटेक और एआई: बिना कागजी कार्रवाई के ऋण और फसल बीमा
- ➤ निष्कर्ष
- ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
प्रस्तावना (Introduction)
AI क्या है ?(What is Artificial Intelligence)
- खेत में लगे सेंसर से मिट्टी और मिट्टी की नमी एवं तापमान की जानकारी।
- सेटेलाइट और ड्रोन से प्राप्त फसल की तस्वीरें।
- मौसम विभाग के पूर्वानुमान।
- मिट्टी परीक्षण (Soil Test) की रिपोर्ट।
- फसल की किस्म और उसकी वृद्धि का चरण।
- मंडियो के भाव और बाजार की मांग।
- किसानों के पिछले अनुभव और उत्पादन का रिकॉर्ड।
🔧AI, मशीन लर्निंग और रोबोट:
| तकनीक | सरल अर्थ |
|---|---|
| AI (Artificial Intelligence) | सोचने और निर्णय लेने की तकनीक |
| मशीन लर्निंग (Machine Learning) | डाटा से सीखकर समय के साथ बेहतर होने वाली तकनीक |
| रोबोट (Robotics) | AI के निर्देश पर काम करने वाली मशीनें |
खेती में AI क्यों जरूरी होता जा रहा है?
- मौसम का लगातार बदलता स्वरूप।
- पानी की कमी।
- उत्पादन लागत में वृद्धि।
- कीट एवं रोगों का बढ़ता प्रकोप।
- मजदूरों की कमी।
- बाजार में कीमतों की अनिश्चितता।
| 🌍 विश्व मानचित्र | 🏳️ देश | 🤖 AI की मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| उत्तरी अमेरिका | 🇺🇸 अमेरिका | Precision Farming |
| मिडल ईस्ट | 🇮🇱 इज़राइल | Smart Irrigation |
| एशिया पैसिफिक | 🇯🇵 जापान | Robot Farming |
| यूरोप | 🇳🇱 नीदरलैंड | Smart Greenhouse |
| पूर्वी एशिया | 🇨🇳 चीन | Drone Agriculture |
| दक्षिण एशिया | 🇮🇳 भारत | AI + छोटे किसानों के समाधान |
दुनिया में AI खेती कहां कहां पहुंच गई?
1. अमेरिका: डेटा आधारित खेती का वैश्विक नेतृत्व:
अमेरिका को "Precision Agriculture" का अग्रणी देश माना जाता है और क्योंकि यहां बड़े खेतों में AI आधारित तकनीक का बहुत बड़े स्तर पर उपयोग तेजी से बढ़ गया है।
वर्तमान में बहुत सारे अमेरिकी किसान ऐसे ट्रैक्टर और कृषि मशीनों का इस्तेमाल कर रहे है जिसमें GPS, सेंसर और स्वचालित AI सिस्टम के उपयोग पर आधारित है।
भारत क्या सीख सकता है:
भारत के लिए:
- हर खेत के बधार या खेत के हर हिस्से को अलग इकाई मानकर खेती करना।
- डेटा के आधार पर निर्णय लेना।
- उर्वरकों और पानी का वैज्ञानिक उपयोग।
2. इजरायल:पानी की हर बूंद का बुद्धिमानी से उपयोग:
इजरायल का अधिकतर भूभाग शुष्क क्षेत्र वाला है और वहां पानी बहुत ही सीमित मात्रा में उपलब्ध होता है।फिर भी इन चुनौतियों के बाद भी इजरायल की गिनती कृषि उत्पादन में दुनियां के एक अग्रणी देशों में शुमार होता है।
ड्रिप सिंचाई सिस्टम तो पहले से प्रयोग करता था अब AI को साथ मिलाकर जल प्रबंधन में कमाल कर दिखाया है।सेंसर से लैस खेतों में नमी को हर पल मापते हुए यह AI ही तय करता है कि किस फसल को कब और कितनी मात्रा में पानी देना है।
इस तकनीक से पानी की भी बचत हो रही है और उत्पादन भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ रही हैं।
भारत क्या सीख सकता है?
इजरायल की इस AI तकनीक के उपयोग से भारत:
- जल संकट वाले क्षेत्रों में स्मार्ट सिंचाई प्रबंधन।
- हर खेत के लिए अलग अलग सिंचाई योजना।
- पानी की बर्बादी को न्यूनतम करना।
- सिंचाई के सर उर्वरक प्रबंधन।
3. जापान:रोबोट और AI के साथ खेती:
जापान में खेती करने वाले लोगों की औसत आयु लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन कृषि मजदूरों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।और इस चुनौती का समाधान एवं सहयोगी बना है AI और रोबोटिक्स आधारित खेती ने।
जापान में AI और रोबोट मिलकर फलों एवं फूलों कि तुड़ाई कर रहे है। ग्रीनहाउस खेतों में AI तापमान, आर्द्रता, प्रकाश और कार्बन डाई ऑक्साइड के स्तर को स्वतः नियंत्रित कर रहा है।
भारत क्या सीख सकता है?
- बागवानी और संरक्षित खेती (Protected Cultivation) में AI का अधिक उपयोग
- मजदूरों की कमी वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मशीनों का उपयोग।
- उच्च गुणवत्ता वाले फलों एवं सब्जियों का उत्पादन।
4. नीदरलैंड:छोटी भूमि लेकिन बड़ी उपलब्धि:
नीदरलैंड क्षेत्रफल में बहुत छोटा देश है लेकिन इस क्षेत्रफल की तुलना में कृषि निर्यात के मामलों में दुनियां के अग्रणी देशों में अपना मजबूत स्थान रखता है।
और इसका मुख्य कारण है "High Tech Greenhouse Farming"
और AI इन ग्रीनहाउस खेतों को पूरी तरह से नियंत्रित एवं प्रबंधित करती है।कितना पानी,प्रकाश और पोषक तत्व पौधों को देना है यह AI ही तय करती है।इससे वहां संसाधनों की बचत होने के साथ ही उत्पादन भी कई गुना बढ़ गया है।
भारत क्या सीख सकता है?
- कम और सीमित भूमि पर अधिक उत्पादन यह नीदरलैंड से भारत सीख कर अपना सकता है।
- आधुनिक ग्रीनहाउस तकनीक और प्रबंधन।
- गुणवता आधारित कृषि निर्यात।
5. चीन:बड़े पैमाने पर AI और ड्रोन का उपयोग:
चीन कृषि में AI तकनीक को बहुत तेजी से अपनाने वाला देश हैं और यहां लाखों हेक्टेयर खेती की भूमि पर ड्रोन से ही कीटनाशक और यूरिया आदि पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा रहा है।
AI यहां मौसम,मिट्टी और उत्पादन का सही विश्लेषण करके किसानों को समय पर सही सलाह दे रहा है।कई स्थानों पर स्वचालित कृषि मशीन का उपयोग किया जा रहा है।
भारत क्या सीख सकता है?
- छोटे किसानों के लिए ड्रोन सुविधाओं का विस्तार।
- AI आधारित कृषि सलाह जो गांव गांव तक पहुंचाना।
- डिजिटल कृषि अवसंरचना को मजबूत करना।
6. ऑस्ट्रेलिया:विशाल खेती की स्मार्ट निगरानी:
ऑस्ट्रेलिया में तो कई खेत इतने बड़े है कि उनकी नियमित निगरानी पारंपरिक तरीकों से संभव ही नहीं हो पाती है।इसलिए वहां AI सेटेलाइट और ड्रोन खेती में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इन सेटेलाइट और ड्रोन के माध्यम से फसल, पशुधन और जल संसाधनों की सही निगरानी की जाती हैं।इससे समय और लागत दोनों की बचत हो रही है।
भारत क्या सीख सकता है ?
- कृषि और वन क्षेत्र में डिजिटल निगरानी की व्यवस्था।
- पशुपालन में AI का अधिक से अधिक उपयोग।
- प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन।
क्या भारत इस दिशा में आगे बढ़ रहा है ?
हां! भारत में भी AI आधारित खेती चुनिंदा क्षेत्रों में हो रही है लेकिन यह अभी शुरुआती दौर में है।AI आधारित मोबाइल ऐप और कृषि स्टार्टअप द्वारा सेंसर आधारित सिंचाई और पोषक तत्व छिड़काव आदि कई जगहों की किसानों द्वारा उपयोग किया जा रहा है।
हालांकि भारत की सबसे बड़ी चुनौती छोटे और बिखरे हुए खेत,सीमित संसाधन और डिजिटल जागरूकता की कमी है।
अतः भारत को AI आधारित खेती के लिए अपनी परिस्थितियों के अनुकूल AI,ड्रोन और सेंसर तकनीक को विकसित करना होगा।और इसपर शोध एवं विकास बढ़ रहा है।आने वाले दिनों में AI का कृषि में और भी अधिक उपयोग देखने को मिल सकते है।
इसलिए विशेषज्ञो द्वारा AI जो कृषि की "अगली हरित क्रांति" (Next Green Revolution) के प्रमुख आधारों में से एक मान रहे है।
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2035 तक भारत में आने वाले क्रांतिकारी बदलाव
1.रिमोट सेंसिंग लोकल वेदर फोरकास्टिंग:
अब मौसम विभाग का जो अनुमान मौसम को लेकर किया जाता है वह अब केवल राज्य या जिला स्तर तक ही नहीं सिमटा रहेगा।साल "2035 में हाइपर लोकल वेदर प्रेडिक्शन" का जमाना हो जाएगा।
इसका मतलब यह है कि अब AI के द्वारा उपग्रहों, स्थानीय आईओटी (IoT) सेंसरों और मौसम के ऐतिहासिक डेटा को प्रोसेस करके आपको यह बता सकता है कि "आपके विशेष खेत जैसे उजेनी पीपर वाले 2 एकड़ खेत में ठीक दोपहर के 2.45 बजे ओलावृष्टि होने की 95% संभावना है"।
2. साइल इंटेलीजेंस (Soil Intelligence) और प्रिसिजन प्लाटिंग (Precision Planting):
साइल इंटेलीजेंस का मतलब है कि 2035 में "स्मार्ट साइल प्रोब"(Smart Soil Probes) हरेक किसान के पास होगा।यह एक तरह से हर खेत का अपना खुद का "डिजिटल हेल्थ कार्ड" की तरह होता है।क्योंकि ये उसी खेत की मिट्टी के भीतर चौबीसों घंटे तैनात रहते है।
अभी आप बिना सोचे समझे यूरिया और डीएपी के बोरो को खेत में उड़ेल देते है।और इससे होता क्या है? मिट्टी बंजर हो रही है और भूजल प्रदूषित हो रही है।
लेकिन ये सेंसर मिट्टी की नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K), मिट्टी का पीएच स्तर (pH) और नमी को 24 घंटे मापता रहता है।
AI उन सेंसर से डेटा और रिपोर्ट लेकर विश्लेषण करता है फिर आपको बताता एवं सलाह देता है कि ठीक इतना ही और यही पोषक तत्व इस पौधों को दीजिए और केवल इतना ही पानी ड्रिप सिस्टम से दीजिए।इसे ही "प्रिसिजन फॉर्मिंग (Precision Farming) या "सटीक खेती" कहते हैं।
🔄 एआई प्रिसिजन फार्मिंग वर्कफ़्लो (AI Precision Farming Workflow)
3. स्वायत्त ट्रैक्टर और स्मार्ट एग्री रोबोटिक्स (Autonomous Ag Robots):
अब भारत के ग्रामीण इलाकों में मजदूरों की भारी कमी होने लगी है।क्योंकि युवा पीढ़ी शहरों की ओर तेजी से पलायन कर रही हैं।ऐसे में 2035 में "रोबोट और स्वायत्त ट्रैक्टर" का बोलबाला रहेगा।इसका मतलब है बिना ड्राइवर के अपने से सेंसर के माध्यम से चलने वाली कृषि मशीन ही खेतों में काम करेंगे।
- मिनी रोबोट्स (Wedding Robots): छोटे रोबोट जो कंप्यूटर विजन (Cimputer Vision) से लैस होते है ये खेतों में कतारों के बीच भी चल सकते है।ये खर पतवार और मुख्य फसल के बीच के अंतर को आदमी से भी बढ़िया से पहचानते है।ये लेजर से या यांत्रिक रूप से उसे जड़ से भी उखाड़ देते है।और किसान को रसायनिक कीटनाशक झोंकने की जरुरत ही नहीं पड़ती है।
- स्वायत्त कल्टीवेटर: ये इलेक्ट्रिकल ट्रैक्टर होते है जो बिना ड्राइवर के ही "एआई पाथ फाइंडिंग एल्गोरिदम" पर काम करता है और ये बिना किसी इंसानी मदद के ही रात भर और दिनभर खेतों को जोतते हुए मिल जायेंगे।
- जुताई,बुआई और खर पतवार निकालना: ये दोनों तरह के मशीन मिलकर खेतों की जुताई और बुआई से लेकर खर पतवार को निकाल कर खेती को इतना बढ़िया बना देते है जितना बढ़िया कोई इंसान नहीं बना पाएगा।
4. ड्रोन एनालिटिक्स और नैनो लिक्विड स्प्रे (Drone Analytics):
"गुरुड़ एयरोस्पेस" और अन्य भारतीय "ड्रोन स्टार्टअप्स" ने मिलकर भारत के गांवों में किसानों को घर घर ड्रोन पहुंचा देंगे।वर्ष 2035 में मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरों से लैस ड्रोन" खेतों के उपर उड़ान भरते हुए मिल जायेंगे।
वे ऐसी चीजें देख सकते है जो इंसानी आंखें नहीं देख सकती है।जैसे कि पौधों के किस हिस्से में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) धीमा हो गया है।और इसको सही करने के लिए किस पोषक तत्व का छिड़काव करना है।
वह भी केवल उसी पौधे के केवल प्रभावित एरिया पर ही नैनो यूरिया या कीटनाशक का छिड़काव करता है।इससे पानी की 90% बचत और रसायनों पर लगने वाला खर्च 70% तक कम हो जाता है।
🚰पारंपरिक बनाम AI संचालित खेती:
| पारंपरिक खेती (2026 तक) | AI संचालित खेती (2035 का लक्ष्य) |
|---|---|
| पूरे खेत में अंधाधुंध कीटनाशक छिड़काव | केवल संक्रमित पौधों पर लक्षित (Spot) स्प्रे |
| पानी की भारी बर्बादी (बाढ़ सिंचाई) | आईओटी और एआई आधारित ड्रिप सिंचाई (सटीक बूंद-बूंद) |
| अंदाजे से बुआई और फसल चक्र | डेटा-आधारित 'क्लाइमेट-रेसिलिएंट' फसल चयन |
| फसल नुकसान का अनुमान बाद में | कंप्यूटर विजन द्वारा शुरुआती दौर में ही रोग की पहचान |
'मंडी में एआई' – लॉजिस्टिक्स, मूल्य निर्धारण और बिचौलियों का अंत (The Mandi & Supply Chain Revolution)
🌾 2035 एआई कृषि मूल्य श्रृंखला (AI Agriculture Value Chain)
5. एआई संचालित मूल्य भविष्यवाणी (Predictive Pricing Models):
हमलोग देखते रहते है कि जिस साल आलू का बम्पर उत्पादन होता है उस साल उसको सड़को पर फेंकना पड़ता है और जिस साल कम उत्पादन होता है उस साल उसकी कीमतें आसमान छूने लगती है।वर्ष 2035 आते आते AI इस "बूम एंड बस्ट" चक्र को ही समाप्त कर देगा।
"लार्ज स्केल मशीन लर्निंग मॉडल" क्या करेगा कि ये पूरे देश का बुआई का डेटा, उत्पादन का डेटा,वैश्विक व्यापार पैटर्न,भू राजनीतिक स्थितियों और मौसम के पूर्वानुमानों का वृहद एवं सूक्ष्म विश्लेषण करेगा।
आप जब खेत में कोई फसल बोने जायेंगे या मान लेते है आप टमाटर बोने जा रहे है,तभी AI आपको सचेत करेगा कि
"आप खेत में टमाटर बोने जा रहे हैं,इस बार आपके क्षेत्र में 75% किसान टमाटर बो रहे हैं जिससे मार्च में इसकी कीमतें गिर सकती है।इसके बदले आप औषधीय पौधे या सरसों उगाएं तो आपको 40% लाभ होने की संभावना है।"
6. कम्प्यूटर विजन आधारित "अल्ट्रा फास्ट" ग्रेडिंग और सॉर्टिंग:
पारंपरिक मंडियों में किसान की फसल की गुणवत्ता का निर्धारण आढ़तियां अपनी मर्जी से करता है।वह अच्छी फसल को भी कमजोर बताकर दाम काट लेता था।
लेकिन 2035 की डिजिटल मंडियों में किसान अपनी उपज को एक "कन्वेयर बेल्ट" पर डालता है और उसपर लगे "हाई स्पीड कंप्यूटर विजन कैमरे" और "एक्सरे सेंसर" सेकेंड में ही अनाज के एक एक दानें,फल या सब्जी के आकर,रंग,रूप,नमी और अंदरूनी सड़न की जांच कर लेते है।
जांच करने के बाद AI खुद एक "क्वालिटी सर्टिफिकेट" और "फेयर प्राइस ग्रेड" जारी कर देता है।इससे कोई विवाद नहीं और कोई हेरा फेरी भी नहीं होती है।
7. स्मार्ट लॉजिस्टिक और कोल्ड चेन ऑप्टिमाइजेशन:
भारत में अनाज और प्याज जैसे सब्जी एवं फल हर साल करोड़ों रुपये के मूल्य का सड़ जाता है और वह भी "कोल्ड स्टोरेज" एवं "परिवहन की कमी" के कारण।
यह भी पढ़े देश में प्याज की बर्बादी और उसे बचाने के लिए प्याज पाउडर का व्यवसाय: कम लागत में शुरू होने वाला लाभदायक ग्रामीण उद्योग।
वर्ष 2035 में AI से संचालित लॉजिस्टिक नेटवर्क जैसे "अपग्रेड किया गया ONDC" और "ई नाम eNAM" जो सीधे खेतों से ही जुड़े होते है।
जैसे ही किसी खेत में कटाई का समय नजदीक आता है,AI खुद ब खुद सबसे पास के "सबसे खाली और किफायती" "इलेक्ट्रिक वाहन (EV Truck) को बुक कर देता है।और AI रूट ऑप्टिमाइजेशन अल्गोरिदम द्वारा यह भी सुनिश्चित करता है कि ऐसे रस्ते से ही जाए जिसमें कम से कम समय लगेगा।
और अनाज खेत से सीधे "प्रसंस्करण केंद्र"(Processing Centre) पहुंच जाता है और ऐसे ही अंतिम उपभोक्ता तक भी पहुंच जाता है।
जलवायु परिवर्तन और एआई: 'क्लाइमेट-स्मार्ट' एग्रीकल्चर
8. AI द्वारा नई जीनोम सीक्वेंसिंग और सूखा रोधी बीज (AI Driven Gene Editing):
सुखा और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए हमें ऐसे बीजों की आवश्यकता होती है जो कम पानी में,उच्च तापमान में और नमकीन मिट्टी में भी उग सकें।और इस काम के लिए ही "भारत की बीज विरासत को संजोने एवं सुरक्षित करके उनका जलवायु परिवर्तन अनुकूल विकसित करने के लिए NBPGR के द्वारा प्रयास किया जा रहा है।
लेकिन इन संस्थाओं द्वारा पारंपरिक रूप से प्रयोगशाला में नया बीजों को विकसित करने में 10 से 15 साल तक का समय लग जाता है।
इसका समाधान "मशीन लर्निंग " और "बायो इन्फ्रामेटिक्स" के संयोजन से "एआई मॉडल कंप्यूटर सिमुलेशन" के भीतर अरबो जेनेटिक्स संयोजनों का परीक्षण कुछ ही सप्ताह में करके किया जा सकता है।2035 में AI के इसी सहयोग के कारण "भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद "(ICAR) ऐसी फसलों को अत्यधिक तेजी से विकसित कर रहे है जो बहुत अधिक मौसम के मार को भी झेल सकती है।
यह भी पढ़े:भारत की "बीज विरासत":NBPGR और कम्युनिटी सीड बैंक के माध्यम से सुरक्षित होता कृषि का भविष्य।
9. कार्बन फार्मिंग और एआई (Carbon Farming & Credits):
इसको भी समझने का प्रयास करते है।दरअसल 2035 में खेती सिर्फ भोजन उगाने का माध्यम ही नहीं रहेगी,बल्कि खेती से कमाई का एक नया रूप विकसित हो जाएगा।और वह होगा "कार्बन क्रेडिट"।
इसमें होता ये है कि यदि कोई किसान ऐसी फसल या पौधों को लगाया है जो कार्बन को सोखती है।तो जितना कार्बन को उस किसान के पौधों द्वारा सोखा जाएगा उसके बराबर पैसा अंतरराष्ट्रीय समुदाय या संस्थानों से मिल जाएगी उस किसान को।
अब इसमें "एआई एल्गोरिदम" सेटेलाइट डाटा के माध्यम से यह पता कर लेगा की किसान ने अपनी जमीन पर "नो टिल"(बिना जुताई वाली खेती) या "एग्रो फॉरेस्ट्री"(कृषि वानिकी) को कितनी मात्रा में अपनाया है।और इससे मिट्टी ने वातावरण से कितना कार्बन को सोखा है।
एआई स्वचालित रूप से उस किसान के खाते में "अंतरराष्ट्रीय बाजार से कार्बन क्रेडिट का पैसा" ट्रांसफर कर देता है।
एआई और भारतीय पशुपालन: 'स्मार्ट डेयरी' 2035
10. पहनने योग्य एआई डिवाइस (Wearable AI IoT Tags):
अभी के समय में हमारे गायो,भैंसों या किसी भी पशुओं को कोई दिक्कत होता है तो हम समझ ही नहीं पाते है कि आखिर इसको क्या हुआ है।हम दौड़ते हुए पशु डाक्टर के पास जाते है तब जाकर कुछ समस्या का समाधान निकलता है और मालूम होता है कि वह किस दिक्कत में और क्यों थी उसका इलाज भी होता है।
लेकिन फिर भी पशु डाक्टरों की भारत में बहुत कमी है।और जब जल्दी इलाज या समस्या समाधान की बात हो तब तो और मुश्किल हो जाता है।किसान अपना सब काम छोड़कर इसके पीछे भागता रहता है।
लेकिन 2035 के AI के जमाने में गायों या भैंसों के कानों या गलों में छोटे और सौर ऊर्जा चालित "आईओटी टैग्स" लगे होते है।ये टैग्स पशु के शरीर का तापमान,उसके चलने फिरने के पैटर्न और जुगाली (Rumination) की दर को हमेशा मॉनिटर करते रहते है।
यदि कोई गाय बीमार पड़ने वाली होती है उससे 48 घंटे पहले से ही AI पशुपालक को अलर्ट भेज देती है:
"गाय नंबर 03 की जुगाली करने की रफ्तार धीमी हो गई है और शरीर का तापमान 0.5 डिग्री बढ़ गया है।इसे थनैला(Mastitis) रोग के शुरुआती लक्षण हो सकते है।इसे अन्य पशुओं से अलग कर दीजिए"।
11. एआई आधारित दुग्ध विश्लेषण और पोषण:
हम पशुपालन तो करते है और हमारे पशु दुग्ध भी देते है लेकिन हमें ये नहीं मालूम चल पाता है कि दूध में कितना पोषक तत्व है और अच्छे पोषक तत्व के लिए हमें उनको कौन सा खुराक देना यानी खिलाना है।
वर्ष 2035 में मिल्किंग मशीन में ही AI सेंसर जुड़े रहेंगे जो दुग्ध निकलते समय ही उसकी वसा (Fat), एसएनएफ (SNF) और संभावित एंटीबायोटिक अवशेषों की रियल टाइम जांच कर लेते है।
इस आधार पर प्रत्येक पशुपालक को AI द्वारा हरेक पशु के लिए एक कस्टमाइज आहार योजना तैयार करके मिल जाता है।इससे दुग्ध उत्पादन में "30% तक की वृद्धि" देखी गई है।
फिनटेक और एआई: बिना कागजी कार्रवाई के ऋण और फसल बीमा
12. एआई क्रेडिट स्कोरिंग (Alternetive Credit Scoring):
अब 2035 में बैंको द्वारा केवल परंपरिक CIBIL Score नहीं देखे जाएंगे,बल्कि कृषि,किसानों और ग्रामीण भारत के लिए AI द्वारा जनरेटेड सिबिल स्कोर को महत्व देंगे।
इसमें AI द्वारा किसान के खेत के उपग्रह इतिहास, पिछले पांच वर्षों में कृषि का उत्पादन और उत्पादकता, डिजिटल लेन देन का इतिहास और "साइल हेल्थ कार्ड" का विश्लेषण करके एक "एग्री क्रेडिट स्कोर" को तैयार करता है।
इस स्कोर के आधार पर किसान मात्र पांच मिनट में लोन के लिए अप्लाई करता है और 10 मिनट में लोन अप्रूव्ड हो जाता है।
13. प्रिसिजन इंश्योरेंस और तत्काल क्लेम सेटलमेंट:
जब भी बाढ़ , सुखा या ओला पढ़ने से क्षति हुई फसल का फसल बीमा क्लेम लेना हो बीमा राशि मिलने में सालों लग जाते है।क्योंकि सरकारी सर्वेक्षक भौतिक सत्यापन करने के लिए खेतों पर जल्दी पहुंच ही नहीं पाते है।
या किसी न किसी बहाने से क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना भी रहती है जैसे समय से आवेदन नहीं मिला,नुकसान का फोटो और वीडियो नहीं है आदि।
लेकिन 2035 में "स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स" (Smart Contracts) और "एआई" का जादू चलता है। उपग्रह का डेटा और स्थानीय मौसम स्टेशन यह प्रमाणित करते है कि अमुक गांव में अमुक समय पर या 15 दिनों तक सुखा पड़ा है,या ओला गिरा है,या बाढ़ आई है और उस क्षेत्र में इतना नुकसान हुआ है।
ऐसी स्थिति में AI बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के नुकसान की तीव्रता की गणना करता है और "72 घंटों के भीतर" सीधे प्रभावित किसान के बैंक अकाउंट में (DBT) दावा राशि को ट्रांसफर कर देता है।
AI से 2035 तक गांव कैसे बदलेंगे?
1. हर किसान की जेब में होगा AI कृषि सलाहकार:
वर्ष 2035 तक भारतीय गांवों के किसानों के मोबाइल में एक ऐसा AI सहायक होगा जो कृषि सलाहकार होगा और किसानों से बात करके उसकी समस्याओं का समाधान करेगा:
वह किसान से कहेगा:
- आज सिंचाई करे या न करे और करें तो कितना एवं किस फसल और किस खेत को करें।ड्रिप से करें या ड्रोन से करे।ये सब सही सलाह किसान को देगा।
- यह AI सलाहकार बताएगा फसल को बोने के समय में ही कि कौन सी फसल लगाए और किसमें ज्यादा मुनाफा इस साल मिलने वाला है।
- मंडी में फसल बेचने में सहयोग करेगा और कब बेचने से मुनाफा अधिक होगा पहले से ही बता देगा।
- फसल में कौन सी बीमारी लगने वाली है पहले ही बता कर दवा का भी सलाह दे देगा।
2. गांव में खुलेंगे "एआई कृषि सेवा केंद्र":
जिस तरह से आजकल गांवों में "कॉमन सर्विस सेंटर"(CSC) या "जन सेवा केंद्र" काम करते है,ठीक उसी तरह से 2035 में इसका स्थान "AI कृषि सेवा केंद्र"(AI ASC) विकसित हो जाएंगे।
इन केंद्रों पर किसान:
- ड्रोन किराए पर ले सकेंगे।
- मिट्टी की डिजिटल जांच करा सकेंगे।
- AI आधारित फसल सलाह प्राप्त कर पाएंगे।
- सेटेलाइट रिपोर्ट देख सकेंगे।
- CSC की भी सभी सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे।
3. युवाओं के लिए नए रोजगार:
AI आधारित खेती केवल मशीने और ड्रोन ही नहीं लाएगी,बल्कि अपने साथ ग्रामीण क्षेत्रों में नए नए तरह के रोजगार को भी पैदा कर देगी।बस समय रहते उस रोजगार को अपना लेना ही हितकर रहेगा।
उदाहरण के लिए:
- ड्रोन पायलट।
- AI कृषि सलाहकार।
- सेंसर तकनीशियन।
- डेटा विश्लेषक।
- स्मार्ट सिंचाई विशेषज्ञ।
- डिजिटल कृषि उद्यमी।
- ड्रोन और सेंसर स्पेयर पार्ट्स शॉप: गांवों में ड्रोन और सेंसर के स्पेयर पार्ट्स के दुकान खुल जाएंगे।
- डिजिटल & सेंसर कैमरा इंस्टॉलेशन सेंटर: गांवों में डिजिटल कैमरा के इंस्टॉलेशन सेंटर की मांग बढ़ जाएगी।
- AI & ड्रोन साफ्टवेयर डाउनलोडिंग सेंटर: AI आधारित मशीनों में नयी सॉफ्टवेयर को डाउनलोड और इंस्टॉल करने का सेंटर खुल सकते है।
4. महिलाओं की भूमिका और भी होगी मजबूत:
वर्ष 2035 तक AI आधारित मोबाइल ऐप और कई तरह के डिजिटल प्लेटफार्म की मदद से ग्रामीण महिलाएं:
- मशरूम उत्पादन।
- डेयरी और डेयरी प्रोडक्ट्स।
- मधुमक्खी पालन।
- खाद्य प्रसंस्करण।
- ऑनलाइन बिक्री।
5. पशुपालन होगा अधिक वैज्ञानिक:
AI तकनीक का बहुत अच्छा फायदा गांवों में पशुओं एवं पशुपालन को होने वाला है।
- AI पशु सलाहकार हर किसान के और पशुपालक के जेब में ही रहेंगे।
- पशुओं के बीमारी की होगी शुरुआत में ही पहचान।
- बढ़ जायेगा दुग्ध उत्पादन।
- पोषण संबंधी सुझाव AI और सेंसर प्रतिदिन देंगे।
- टीकाकरण समय से होगा।
- पशुओं का इंश्योरेंस ऑटोमेटिक होगा।
6. गांवों के बच्चों की पढ़ाई बदलेगी:
वर्ष 2035 तक AI आधारित शिक्षा प्लेटफार्म बच्चों को उनकी गति और समझ के अनुसार सीखने में मदद करेंगे।
- स्थानीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री उपलब्ध हो जाएगी जिससे शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो जाएगी।
- स्कूलों में डिजिटल रोबोट के साथ बच्चे खेल पाएंगे और खेलते हुए सीखेंगे।
7. स्वास्थ्य सेवाएं होगी अत्यधिक सुलभ:
वर्ष 2035 तक AI "प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र" में डाक्टरों और मरीजों की सहायता करते हुए मिल जायेंगे:
- शुरुआती जांच में AI का सहयोग।
- रोग की संभावित पहचान में AI डाक्टर को हेल्प करेगा और विश्लेषण करके बताएगा।
- दवा संबंधी जानकारी में डॉक्टर को तुरंत सहायता करेगा।
- विशेषज्ञों से ऑनलाइन परामर्श में सहायक होगा।
8. डिजिटल बाजार से सीधे जुड़ेंगे किसान:
AI किसानों को यह समझने में मदद करेगा कि किस बाजार में मांग अधिक है और किस समय बिक्री लाभदायक हो सकती है साथ ही किस खरीददार तक पहुंचना सबसे उचित रहेगा।
इससे बिचौलियों पर निर्भरता बहुत हद तक कम हो जाएगी।
9.पंचायतों का काम होगा और अधिक पारदर्शी:
समय के साथ गांवों में 2035 में पंचायतों में डिजिटल तकनीक का प्रयोग बहुत बढ़ जाएगा।
इससे गांवों में:
- जल संरक्षण में AI प्रभावी रूप से मदद करेगा।इसके उपयोग से फालतू में कोई भी पानी को नहीं बहा पाएगा।
- सड़क और सिंचाई परियोजनाओं में AI की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी।इसकी निगरानी सही,सटीक और डिजिटली ऑनलाइन होने लगेगा।
- सरकारी योजनाओं में AI की भूमिका बढ़ जाएगी और यह अधिक पारदर्शी,तेज और पहुंच प्रदान करने वाली बन जाएगी।
10. स्मार्ट गांव की अवधारणा और मजबूत होगी:
अब 2035 का स्मार्ट गांव केवल वाईफाई वाला गांव नहीं होगा,बल्कि अब इन गांवों में:
- खेती पूरी तरह से वैज्ञानिक रूप से होगी।
- पानी का उपयोग पूरी तरह से संतुलित रूप से होगा।
- युवाओं को स्थानीय रूप से रोजगार मिल सकेगा।
- महिलाएं डिजिटल उद्यमी बन जाएगी।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो जाएगी।
- मानव के हित में तकनीक का प्रयोग और भी बढ़ जाएगा।
भारत के संदर्भ में चुनौतियां और उनका समाधान
1. खंडित भूस्वामित्व (Fragmented Land Holding):
भारत ऐसा देश है जहां के किसानों के पास खेतों की बहुत छोटी छोटी जोतें है। यहां के 85% से अधिक किसान ऐसे है जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है और वह एक "छोटे और सीमांत किसान"(Small & Marginal Farmers) है।
इतने छोटे खेत में महंगे रोबोट या ड्रोन को व्यक्तिगत रूप से खरीदना किसी भी किसान के लिए व्यवहारिक रूप से सही नहीं लग रहा है।और ये खरीद भी नहीं सकते है।
- समाधान:
- FaaS Farming As a Service: यानी कि किसान इसको खरीद नहीं सकते है लेकिन किराए पर ले सकते है।तो 2035 में ऐसी व्यवस्था बनेगी कि सभी किसानों चाहे वे छोटे किसान ही क्यों न हो आसानी से किराए पर मिल जाए।
- ड्रोन ऑन डिमांड: जैसे हम उबर (Uber) से टैक्सी बुलाते है ठीक वैसी ही ग्रामीण युवा "ड्रोन ऑन डिमांड" या "रोबोट ऐज ए सर्विस" ऐप चलाते है।किसान जब चाहे तब अपने खेत के लिए बुक कर सकते है।
- किसान उत्पादक संगठन (FPOs): इस संगठन के माध्यम से इन जरूरी रोबोट और ड्रोन की खरीददारी होगी।और संगठन के सभी किसान मामूली किराया देकर इसका इस्तेमाल कर सकते है।
2. डेटा गोपनीयता और एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह (Data Privacy & Bias):
AI के इस दौर में अभी से ही बहुत बड़ी बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय किसानों के खेती और खेतों का डेटा एकत्र कर रही हैं।खतरा और समस्या यह है कि इस डेटा का उपयोग करके ये कंपनियां बाजार को प्रभावित कर सकती हैं।
हो सकता है कि यह कंपनियां उपलब्ध डेटा के आधार पर बाजार में कृत्रिम कमी दिखा सकती है या बीजों के दाम बढ़ा सकती है।और AI एवं डेटा के दुरूपयोग करके ऐसा किया भी जा सकता है।
- समाधान:
- सरकार के द्वारा सुरक्षा: इसके लिए भारत सरकार का "डिजिटल एग्रीस्टैक" (Digital Agri Stack) ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि किसानों का डेटा सुरक्षित रहे और "संप्रभु एआई" (Sovereign AI) मॉडल केवल जन कल्याण के लिए ही काम करें।
3. अन्य चुनौतियां:
भले ही भारतीय कृषि में AI और रोबोट एवं ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता जा रहा है।और 2035 की तस्वीर हमारे आंखों के सामने दिख रही है।फिर भी कुछ और भी विशेष चुनौतियां है जिनकी चर्चा बिना ये जानकारी अधूरा ही रह जायेगा।
वह चुनौतियां निम्नलिखित हो सकती है:
- इंटरनेट और डिजिटल कनेक्टिविटी: अभी भी देश के ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट हमेशा भाग जाता है।कहने के लिए 5G है लेकिन इसका सर्विस बहुत ही खराब है।ऐसे में कृषि में AI का प्रयोग पूरी तरह सफल नहीं हो सकता है।हालांकि सरकार के द्वारा पंचायत लेवल एवं ग्रामीण स्तर तक हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने पर तेजी से काम चल रहा है।
- डिजिटल साक्षरता की कमी: अभी भी देश में किसान एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लोग स्मार्टफोन एवं बहुत सारे जरूरी ऐप्स का सही से इस्तेमाल नहीं कर पाते है।अतः ड्रोन एवं रोबोट का चालन और उसके डेटा का अध्ययन में उनको दिक्कत ही आएगी।
- किसानों का भरोसा जितना: नई तकनीक को अपनाने में समय लगता है।जब तक किसान इसका इस्तेमाल करके संतुष्ट नहीं हो जाएंगे तब तक खेतों में AI का लाभ नहीं दिख पाएगा।
- बिजली और ऊर्जा की कमी: देश में अभी भी ऊर्जा की कई तरह की समस्याओं से घिरा हुआ है।ऊर्जा की खपत में दिनों ब दिन बढ़ोतरी ही हो रही है।अतः देश में ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना ही होगा।
- AI में वित्त और इन्वेस्टमेंट की कमी: AI और इससे संबंधित स्टार्टअप में भारी मात्रा में निवेश की आवश्यकता पड़ सकती है।देश के पास इतनी भारी मात्रा में निवेश के लिए वित्त की कमी है।जिससे तेजी से विकास में दिक्कत आ सकती है।
भारत सरकार कृषि में एआई (AI) को बढ़ावा देने के लिए क्या क्या कदम वर्तमान में उठा रही है
1. डिजिटल एग्रीस्टैक (Digital AgriStack):
यह भारत सरकार की सबसे महत्वकांक्षी AI परियोजना है।जिस तरह से हर नागरिक की पहचान के लिए "आधार"(Adhar) है,ठीक उसी तरह से हर किसान और उसके खेत का एक अनूठा "डिजिटल डेटाबेस" तैयार किया जा रहा है।
- इसके तहत किसानों को एक "यूनिफार्म फार्मर आईडी (Farmer ID) प्रदान की जा रही है।
- इसमें किसानों का भूमि रिकॉर्ड,कौन सी फसल बोई गई है और मिट्टी का स्वास्थ्य कैसा है सब कुछ AI System से लिंक होगा।
- फायदा: एआई कंपनियां और सरकारी एजेंसियां इस डेटा का उपयोग करके किसानों को सीधे उसके मोबाइल पर ही कस्टमाइज (सटीक) कृषि सलाह और सब्सिडी दे सकेगी।
2. भारत एआई मिशन (IndiaAI Mission):
भारत सरकार ने देश में एआई के विकास के लिए भारी भरकम बजट के साथ "IndiaAI Mission" को मंजूरी प्रदान किया है।
- इसके तहत सरकार बड़े पैमाने पर "कंप्यूटिंग क्षमता"(GPU Infrastructure) को स्थापित कर रही हैं।
- इस सुपरकंप्यूटिंग का एक बड़ा हिस्सा "कृषि अनुसंधान"(Agricultural Research) के लिए आरक्षित किया गया है।इससे भारतीय वैज्ञानिक एआई मॉडल के जरिए मौसम,फसलों के रोगों और सूखा रोधी बीजों पर तेजी से रिसर्च कर सकते हैं।
3. आइडिया (Idea: Indian Digital Ecosystem of Agriculture):
केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा विकसित यह एक ऐसा डिजिटल फ्रेमवर्क है जो एग्री टेक स्टार्टअप,वैज्ञानिकों और सरकारी विभागों को एक मंच पर लाता है।
- इसके तहत स्टार्टअप को सरकारी डेटा का सुरक्षित एक्सेस मिलता है।जिससे वे किसानों के लिए सस्ते एआई टूल्स,जैसे कीट पहचान ऐप्स,फसल स्वास्थ्य मॉनिटर आदि को बना सकें।
4."सुबाम" ओर उपग्रह आधारित एआई (Subham ISRO Collaboration):
इसरो (ISRO) और कृषि मंत्रालय आपस में मिलकर उपग्रहों (Satellites) और रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।एआई अल्गोरिदम इन उपग्रह तस्वीरों को प्रोसेस करके:
- देश भर में किस फसल की कितनी बुआई हुई है इसका सटीक अनुमान(Yield Estimate) पहले ही लगा लेते है।
- बाढ़ या सूखे जैसी आपदाओं के समय किस क्षेत्र में कितना नुकसान हुआ है,इसका आंकलन भी बिना इंसानी सर्वे के एआई के जरिए तुरंत हो जाता है।इससे बीमा क्लेम जल्दी पास हो जाते है।
5. ड्रोन और एआई तकनीक के लिए वित्तीय प्रोत्साहन (Subsidies & Grants):
सरकार ड्रोन को एआई (AI) का सबसे प्रभावी जमीनी टूल्स मानती है।इसीलिए इसपर बहुत अधिक छूट प्रदान की जा रही है:
- 100% सब्सिडी: कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) संस्थानों को ड्रोन का प्रदर्शन करने के लिए 100% यानी पूरी छूट।
- 75% सब्सिडी: किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को कस्टमर हायरिंग सेंटर को स्थापित करने के लिए ताकि वे छोटे किसानों को किराए पर ड्रोन को दे सकें।
- CHCs (कस्टमर हायरिंग सेंटर): सरकार गांवों में ऐसे केंद्र बना रही है जहां से छोटे किसान मामूली किराया पर एआई पॉवर्ड मशीनें और आधुनिक कृषि यंत्र ले सकते हैं।
वर्ष 2040 की कल्पना:एक प्रेरक कहानी:
- पानी की बचत 28%
- उर्वरक की बचत 17%
- कीटनाशक की बचत 41%
- अनुमानित उत्पादन: पिछले वर्ष से 12% अधिक
निष्कर्ष (Conclusion)
सबसे पहले अभी इस समय में ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी (AI) की सबसे बड़ी देन यह है कि इसने "भारतीय युवा पीढ़ी के मन में कृषि के प्रति सम्मान" और रुचि को दोबारा जगा दिया है।आज कल गांव के युवा अच्छी पढ़ाई करने के बाद भी शहरों की नौकरी के बजाय गांव में रहकर "एआई पावर्ड स्मार्ट फार्मर" या "एग्री टेक इंटरप्रेन्योर" बनना ज्यादा पसंद कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी (AI) से भारतीय कृषि को क्या फायदा होगा ? ▼
प्रश्न 2: क्या भारत के छोटे और गरीब किसान 2035 में AI तकनीक का खर्च उठा पाएंगे ? ▼
प्रश्न 3:प्रिंसिजिंग फार्मिंग (Precision Farming) या सटीक खेती क्या है ? ▼
प्रश्न 4:AI मंडियो में बिचौलियों या आढ़तियों की मनमानी को कैसे खत्म करेगा ? ▼
प्रश्न 5:जलवायु परिवर्तन से निबटने में एआई कैसे मददगार साबित होगा ? ▼
प्रश्न 6:क्या AI के आने से गांव में युवाओं के लिए रोजगार कम हो जाएंगे ? ▼
प्रश्न 7:भारत सरकार कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठा रही है? ▼
प्रश्न 8:स्मार्ट डेयरी (Smart Dairy) में एआई पशुपालकों की कैसे मदद करता है? ▼
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR):
- यह भारत में कृषि अनुसंधान,नई तकनीकों,डिजिटल कृषि और कृषकों के लिए वैज्ञानिक जानकारी का सबसे विश्वसनीय स्रोत है। वेबसाइट:https://icar.gov.in।
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare):
- कृषि योजनाएं,डिजिटल कृषि मिशन, सरकारी नीतियां और कृषि संबंधित आधिकारिक जानकारी। वेबसाइट:https://agriwelfare.gov.in।
- डिजिटल एग्रिकल्चर मिशन: भारत में डिजिटल कृषि,AI, ड्रोन, डेटा आधारित कृषि,और आधुनिक तकनीकों से संबंधित सरकारी पहल। वेबसाइट:https://agriwelfare.gov.in।
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM KISAN): किसानों के लिए सरकारी सहायता और डिजिटल सेवाओं की जानकारी। वेबसाइट:https://pmkisan.gov.in।
- किसान सुविधा (Kisan Suvidha): मौसम,बाजार भाव,कृषि सलाह और अन्य डिजिटल सेवाओं से जुड़ी जानकारी। वेबसाइट:https://mkisan.gov.in।
- FAO (Food and Agriculture Organization of United Nations): विश्व कृषि,खाद्य सुरक्षा,स्मार्ट कृषि और टिकाऊ खेती पर सबसे विश्वसनीय वैश्विक संस्था। वेबसाइट:https://www.fao.org।
- World Bank - Agriculture: कृषि विकास,ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि तकनीकों पर विस्तृत रिपोर्ट। वेबसाइट:https://www.worldbank.org/en/topic/agriculture।
- CGIAR: विश्व की सबसे बड़ी कृषि अनुसंधान साझेदारी,जो जलवायु स्मार्ट कृषि और नवाचार पर कार्य करती है। वेबसाइट:https://www.cgiar.org।
- International Rice Research Institute (IRRI): धान अनुसंधान,AI आधारित कृषि और आधुनिक खेती पर शोध। वेबसाइट:https://www.irri.org।
- NASA Earth Observatory: सेटेलाइट आधारित कृषि निगरानी, जलवायु और पृथ्वी अवलोकन संबंधी जानकारी। वेबसाइट:https://earthobservatory.nasa.gov।
- Microsoft AI for Good: एआई का कृषि, पर्यावरण और समाज में उपयोग। वेबसाइट:https://www.microsoft.com/ai/ai-for-good।
- Google AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी,मशीन लर्निंग और AI आधारित शोध। वेबसाइट:https://ai.google।
- World Economic forum -Agriculture: भविष्य की कृषि,AI और वैश्विक कृषि नवाचारों पर रिपोर्ट और विश्लेषण। वेबसाइट:https://www.weforum.org/topics/agriculture-food।
- नीति आयोग:https://www.niti.gov.in।
- ISRO:https://www.isro.gov.in।
- Digital Public Infrastructure for Agriculture (AgriStack):https://agristack.gov.in।


Bahut hi aacha bircher hai 👍🏻
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