SHGs के इको फ्रेंडली हस्तनिर्मित त्योहार उत्पाद: ऑनलाइन कैसे खरीदें ?:

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Eco-Friendly Festival Shopping Guide
त्योहार की खरीदारी को पर्यावरण, महिला SHGs और ग्रामीण आजीविका से जोड़ने वाली यह विशेष गाइड आपको Seed Ganesha, गोमय दीपक, bamboo crafts, Laddu Gopal पोशाक, terracotta products, natural पूजा सामग्री और अन्य eco-friendly हस्तशिल्प की जानकारी देती है।
🛒 साथ में मिलेगा: SHG से जुड़े राज्यों की जानकारी • Online Sourcing Guide • Organic खरीदारी Checklist • प्रमाणित स्रोत • 8 महत्वपूर्ण FAQs
🌾 Local Crafts  •  ♻️ Sustainable Choice  •  👩‍🌾 Rural Livelihood

 


Eco Friendly Festival Producers ग्रामीण महिलाओं के समूह SHGs द्वारा बनाया गया
ग्रामीण महिलाओं के समूह SHGs द्वारा इको फ्रेंडली त्योहार उत्पादों को बनाते हुए 


📑 विषय सूची (Table of Contents)
  1. प्रस्तावना: हरित त्योहार और SHGs की भूमिका
  2. पारंपरिक बनाम इको-फ्रेंडली उत्पाद (तुलनात्मक चार्ट)
  3. जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी पर SHGs के शीर्ष 10 उत्पाद
  4. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण पर प्रभाव
  5. ऑनलाइन और थोक में कैसे खरीदें? (Buying Guide)
  6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
  7. निष्कर्ष

 

प्रस्तावना (Introduction) 

त्योहारों की रौनक तो भारतीय संस्कृति की आत्मा है। त्योहारी सीजन के आने से जहां गांव की गलियों में रौनक आ जाती है तो वही शेयर बाजार के गलियों में भी रौनक आ जाती है। और इस रौनक का प्रभाव प्रकृति, पर्यावरण और हमारे संसाधनों पर भी पड़ता है।

क्योंकि ये त्योहार केवल पूजा - पाठ और परंपराओं का अवसर ही नहीं है बल्कि यह हमारी स्थानीय कला, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामुदायिक जीवन को भी जीवंत बनाती है।

लेकिन पिछले कुछ दशकों में इस उत्सव की चमक के पीछे पर्यावरण को भारी नुकसान भी पहुंचा है।

प्लास्टर ऑफ पेरिस की भारी भरकम मूर्तियां, जहरीले लेड और पारे वाले रसायनिक रंग, प्लास्टिक की सजावट और रसायनिक अगरबत्तियां हमारे जलस्रोतों,मिट्टी और हवा को गंभीर रूप से प्रदूषित कर रही है।

इसी संकट के समाधान के रूप में उभर कर आती है -- "हरित त्यौहार" (Green Celebration) की अवधारणा। और इस बदलाव का केंद्र बिंदु केवल बड़े कॉरपोरेट ब्रांड नहीं बल्कि भारत के सुदूर गांवों में काम करने वाली ग्रामीण महिलाएं और उनका -- स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups- SHGs) है।

"दीनदयाल अंत्योदय योजना -- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन" (DAY -NRLM) के अंतर्गत संगठित ये महिला कारीगर न केवल हमारी पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित कर रही है बल्कि शून्य कचरा (Zero Waste) के साथ साथ पर्यावरण अनुकूल और जैविक उत्पादों के निर्माण से भारतीय त्यौहार को एक नया और टिकाऊ स्वरूप प्रदान कर रही है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय (DAY-N RLM) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार भी महिला स्वयं सहायता समूहों ने पिछले वित्त वर्ष में त्योहारी उत्पादों की बिक्री में रिकॉर्ड यानी उल्लेखनीय वृद्धि को दर्ज हुआ है।

"लोकल फॉर वोकल" और "आत्मनिर्भर भारत" का यह जमीनी स्तर पर जीता जागता सबसे प्रमाणिक उदाहरण है।

इस लेख में हम कुछ ऐसे ही प्रमुख इको फ्रेंडली त्यौहारों के पूजा उत्पादों के बारे में जानेंगे और साथ ही उनसे जुड़ी SHGs और ग्रामीण उद्यमिता मॉडल को समझेंगे एवं यह भी जानेंगे कि इन उत्पादों को कैसे ऑनलाइन और विश्वसनीय स्रोतों से खरीदा जा सकता है।

तो आइए, इस त्यौहार की खरीददारी को केवल उपभोग नहीं बल्कि प्रकृति, परंपरा और ग्रामीण महिलाओं की आजीविका से जुड़ा एक सकारात्मक कदम बनाने की दिशा में आगे बढ़े।

त्यौहारों में Eco -Friendly Products ही क्यों चुनें ? 

सबसे पहला सवाल हमारे मन में यह उठता है कि इको फ्रेंडली उत्पादों को क्यों चुने और पारंपरिक उत्पादों एवं इको फ्रेंडली उत्पादों में क्या अंतर है। साथ ही इन उत्पादों को बनाने की प्रक्रिया में क्या अंतर है।

यदि सही से इन चीजों की जानकारी हो जाए तो हम खुद ब खुद परंपरिक उत्पादों की तुलना में इको फ्रेंडली उत्पादों का चुनाव करने लगेंगे।

पारंपरिक और इको फ्रेंडली उत्पादों में अंतर नीचे दिए गए इस तालिका के माध्यम से आसानी से समझ सकते हैं ---
मापदंड पारंपरिक / रासायनिक उत्पाद SHG निर्मित इको-फ्रेंडली उत्पाद
मुख्य सामग्री प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), थर्माकोल, प्लास्टिक, सिंथेटिक पेंट प्राकृतिक शाडू/लाल मिट्टी, गाय का गोबर, जूट, बांस, सूखे फूल
पर्यावरण प्रभाव जल स्रोतों में घुलने में वर्षों लगते हैं; जलीय जीवन को घातक क्षति प्राकृतिक रूप से जैव-अपघटनीय (Biodegradable); पौधों के लिए पोषण
स्वास्थ्य प्रभाव हवा में रासायनिक धुआं, भारी धातुओं (Lead/Cadmium) से त्वचा विकार 100% हर्बल, चारकोल-मुक्त, गैर-विषाक्त और सुरक्षित
आर्थिक लाभ बिचौलियों और आयातित प्लास्टिक निर्माताओं को लाभ सीधे ग्रामीण महिला कारीगरों और हस्तशिल्पियों की जेब में आय

तालिका को ध्यान से देखने पर पूरी तस्वीर साधो जा रही है। क्योंकि इन इको फ्रेंडली उत्पादों के उपयोग करने से पर्यावरण से लेकर हमारे स्वास्थ्य और हमारी ग्रामीण महिलाओं एवं हस्तशिल्पियों का भी लाभ हो रहा है।

कृषि विशेषज्ञ डॉ प्रवीण शर्मा के अनुसार "प्राकृतिक बीजों और जैविक खाद से बनी प्रतिमाएं विसर्जन के बाद मिट्टी की उर्वरता को नुकसान नहीं पहुंचाती है"।


जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी के लिए SHGs के शीर्ष इको फ्रेंडली उत्पाद 

चूंकि अब त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है और कुछ ही दिनों में श्री गणेश चतुर्थी और श्री कृष्ण जन्माष्टमी की दस्तक होने वाली है। ऐसे में हमने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के (DAY-NRLM) और आधिकारिक ई कॉमर्स पोर्टल "eSARAS" से लेकर TRIFED तक के द्वारा प्राप्त जानकारी के आधार पर इन उत्पादों को प्रस्तुत कर रहे हैं।

ये उत्पाद ग्रामीण महिलाओं के SHGs द्वारा बनाए गए है और इको फ्रेंडली उत्पाद है। साथ ही इनको "केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड" (CPCB) द्वारा बताए गए मूर्ति विसर्जन और पर्यावरण अनुकूल सामग्री मानक के दिशा निर्देशों के अनुकूल तैयार किया गया है 

हम एक एक करके ऐसे उत्पादों की चर्चा शुरू करते हैं --


1. सीड गणेश और प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमाएं (Seeded Ganesha) 

जो पारंपरिक रूप से "प्लास्टर ऑफ पेरिस" की मूर्तियां उपयोग करते आ रहे हैं उसका सबसे प्रभावी विकल्प है "सीड गणेश" (Seed Ganesha) की मूर्तियां।

ये मूर्तियां शुद्ध लाल मिट्टी, साडु मिट्टी या नदियों के तलछट की मिट्टी से बनाई जाती है। साथ ही इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक बाइंडर या चमकीले वार्निश का प्रयोग नहीं किया जाता है।

सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मूर्तियों के निर्माण के दौरान उसके भीतर तुलसी,गेंदा, टमाटर और अन्य देशी पौधों के बीजों को डाल दिया जाता है।

इन मूर्तियों को नदी और तालाब या जलाशय में विसर्जित करने के साथ ही आप अपने घर में भी गमले या बगीचे में पानी डालकर विसर्जित कर सकते हैं। केवल 2-3 दिनों में ही मिट्टी पूरी तरह से घुल जाती है और वहां एक नया पौधा भी अंकुरित हो जाता है।

इसके प्रमुख निर्माता क्लस्टरों में "महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (उमेद और MAVIM), मध्य प्रदेश आजीविका मिशन और कर्नाटक के संजीवनी के अंतर्गत आने वाले कुम्हार समूह है।

आगे इस उत्पाद को ऑनलाइन खरीदने के बारे में जानकारी को भी प्रदान करूंगा।

भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने भी इन पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाओं के उदाहरण में Plantable Seed वाली प्रतिमाओं का उल्लेख किया है।

हाल ही में प्रधानमंत्री के मन की बात से संबंधित वक्तव्य में भी लोगों से देश की स्थानीय मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने और POP की प्रतिमाओं से बचने की अपील की गई है।

इसी वक्तव्य में स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों से प्रतिमा खरीदने को स्थानीय आजीविका तथा Vocal for Local से जोड़ा गया है।

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) के अध्ययन में भी पारंपरिक shadu Clay को प्राकृतिक मिट्टी के रूप में वर्णित किया गया है और इन मिट्टी की प्रतिमाओं को पानी में तेजी से विघटित होने का परीक्षण भी दर्ज किया है।

यह प्रतिमाएं केवल पूजा की प्रतिमा तक सीमित नहीं रहती है बल्कि ये "प्रतिमा से पौधों तक" का पर्यावरणीय संदेश देती है।

ऑनलाइन खरीददारी करते समय इन 6 बातों को जांचे --
  1. क्या वास्तव में प्राकृतिक लाल मिट्टी या शाडु मिट्टी से बनी है या नहीं।
  2. उसमें प्लास्टर ऑफ पेरिस का इस्तेमाल तो नहीं हुआ है।
  3. रंग और सजावटी सामग्री किस प्रकार की है। क्या ये केमिकल फ्री है।
  4. Seed Ganesha में किस पौधों के बीज को इस्तेमाल किया गया है।
  5. निर्माता/SHGs/कारीगर की वास्तविक पहचान और स्थान।
  6. विसर्जन या प्लाटिंग के लिए निर्माता द्वारा प्रदान की गई सही विधि।

अतः केवल "Eco-Friendly या"Seed Ganesha" लिखा होना ही पर्याप्त नहीं है। उत्पाद की सामग्री और निर्माता की जानकारी को जरूर जांच लेनी चाहिए।



Eco Friendly Seeds Ganesha की मूर्तियां जो ग्रामीण महिलाओं के समूह SHGs द्वारा बनाई जाती है
सीड्स गणेश की मूर्ति SHGs द्वारा निर्मित


2.गोमय (गाय के गोबर) से बने पंचगव्य उत्पाद और दीपक 


वैदिक परंपरा में गाय के गोबर (गोमय) को अत्यंत पवित्र माना गया है और आधुनिक विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि देशी गाय के गोबर में एंटी बैक्टेरियल गुण होते हैं।

भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने 2020 और2021 में "कामधेनु दीपावली अभियान" के माध्यम से गोबर एवं पंचगव्य आधारित उत्पादों विशेषकर गोमय दीपक, धूप, अगरबत्ती, हवन सामग्री और सजावटी वस्तुओं को बढ़ावा देने का उल्लेख किया था।

सरकारी विज्ञप्ति में भी किसानों, महिला उद्यमियों, युवाओं और SHGs को गोबर आधारित उद्यमों से जोड़ने की बात कही गई थी।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के एक उदाहरण में देहरादून में कृषि विज्ञान केंद्र ने ग्रामीण महिलाओं के साथ "गोबर और स्थानीय जड़ी बूटियों से "हर्बल दिया" को तैयार किया।

इसमें नीम, लेमनग्रास, तुलसी और अन्य स्थानीय पत्तियों का उपयोग किया गया था। इनकी सजावट भी प्राकृतिक रंगों से की गई थी।ICAR के अनुसार इस पहल के अंतर्गत 50 ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया और एक प्रशिक्षित महिला ने सीजन में 50,000 से अधिक दीपक बनाकर ₹70,000 से अधिक कमाई किया।

बाद में उन्होंने विभिन्न गांवों की 100 से अधिक महिलाओं और युवतियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जिन्होंने 7 SHG सदस्य भी शामिल थी।

यह उदाहरण दिखाता है कि त्योहारों की मौसमी मांग को ग्रामीण महिला उद्यमिता और स्थानीय कच्चे मल पर आधारित व्यवसाय से जोड़ा जा सकता है।

भारत सरकार के "North East Centre for Techonology Application and Reach" (NECTAR) ने भी गोबर से बने इको फ्रेंडली दीये, धूप और संब्रानी कप जैसे उत्पादों का उल्लेख किया है।

वही नीति आयोग (NITI Ayog) की एक रिपोर्ट में एक गौशाला आधारित उद्यम के एक उदाहरण में गोमय दीप, धूप और अगरबत्ती जैसे पंचगव उत्पादों के उत्पादन और बिक्री का विवरण दर्ज है।

उत्तर प्रदेश में UPSRLM के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार राज्य में लाखों SHGs सदस्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े हुए हैं। इनके नेटवर्क के कारण स्थानीय उत्पादों के निर्माण, पैकिंग और मार्केटिंग के लिए संस्थागत आधार मौजूद है।

कई लोग सवाल करते हैं कि - "क्या गोमय दीपक वास्तव में Eco-Friendly है ?

यहां थोड़ी सी सावधानी जरूरी है। सिर्फ गोबर से बना होना 100% इको फ्रेंडली होने की निशानी नहीं है। बल्कि उसमें इस्तेमाल किए गए रंग, बाइंडर, सजावटी सामग्री, पैकिंग और अन्य पदार्थ भी महत्वपूर्ण है।

उदाहरण के लिए ICAR द्वारा वर्णित "हर्बल दिया" में गोबर के साथ स्थानीय मिट्टी, स्थानीय वनस्पतियों और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया था।

अतः ऑनलाइन गोमय दीपक खरीदते समय यह जरुर देखे कि -
  • उत्पाद में इस्तेमाल सामग्री की पूरी जानकारी रहे।
  • रंग और सजावटी सामग्री के बारे में जानकारी दी हुई रहे।
  • अनावश्यक प्लास्टिक पैकिंग नहीं होना चाहिए।
  • निर्माता, SHGs और ग्रामीण उद्यमी की पहचान स्पष्ट हो।
  • ऑर्गेनिक,प्राकृतिक और केमिकल फ्री दावों के लिए प्रमाण और विवरण दर्ज रहे।
  • दीपक के साथ दिए गए निर्देश के अनुसार ही उसका उपयोग करें।

इन दियों की विशेषता या होती है कि इसे देशी गाय के गोबर और प्राकृतिक गोंद एवं लकड़ी के बारीक बुरादों से मोल्ड किया जाता है। इन दियों को घी या तेल डालकर जलने के बाद जब तेल या घी समाप्त हो जाता है तब यह दिया भी प्राकृतिक धूप जल जाता है और सुगंध पैदा करता है।

जलने के बाद बची हुई राख को सीधे गमले में उत्कृष्ट जैविक खाद के रूप में उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा इससे गोमय की छोटी गणेश प्रतिमाएं या अगरबत्ती स्टैंड भी बनाया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) और छत्तीसगढ़ के "गोधन न्याय योजना" से जुड़ी हुई महिला समूहों द्वारा इसका निर्माण किया जाता है।

ऑनलाइन खरीदने की जानकारी आगे प्रदान की जाएगी।



ग्रामीण महिलाओं के समूह SHGs द्वारा बनाई गई पंचगव्य आधारित उत्पाद एवं दीपक
गाय के गोबर और पंचगव्य से दीपक एवं अन्य उत्पाद बनती SHGs की महिलाएं 


3. लड्डू गोपाल जी के हस्तनिर्मित वस्त्र और श्रृंगार 


श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बाल गोपाल का पोशाक और श्रृंगार का विशेष महत्व होता है। बाजार में मिलने वाली प्लास्टिक और सिंथेटिक जरी के पोशाक के विपरीत ग्रामीण महिला SHGs द्वारा प्रमाणित भारतीय कपड़ों से इन पोशाकों को तैयार करती है।

बनारसी ब्रोकेड, चंदेरी और सूती एवं खादी कपड़ों पर हाथ से जरी, जरदोजी, गोटा पत्ती, और आरी तारी का बारीक काम किया जाता है। ये वस्त्र त्वचा का अनुकूल होते हैं और कई वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं।

साथ ही मोतियों और रेशम के धागों से बनी मुकुट, बांसुरी और कमरबंद भी बनाए जाते हैं।

महाराष्ट्र के ग्रामीण आजीविका मिशन UMED Marketplace पर धारावी जिले के "ईश्वरी महिला स्वयंसहायता समूह" द्वारा बनाए गए लड्डू गोपाल और राधा रानी के हस्तनिर्मित वस्त्र सूचीबद्ध है। उत्पाद वितरण में इन्हें महिलाओं के स्वयं सहायता समूह द्वारा तैयार Handcrafted Devotional Outfits बताया गया है।

राजस्थान में भी Rajeevika (Rajsthan Grameen Ajeevika Vikas Parishad) ग्रामीण महिला SHGs के हस्तशिल्प,वस्त्र और अन्य श्रृंगार एवं हस्तनिर्मित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है।

Rajeevika के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार उसके SHGs उत्पादों के लिए विभिन्न मार्केटिंग आउटलेट्स जैसे - Amazon,Flipkart और अन्य ई कॉमर्स चैनल का उपयोग किया जा रहा है।

Rajeevika का One Block One Product के पहल का उद्देश्य भी स्थानीय संसाधनों, ग्रामीण उत्पादों, महिला SHGs उत्पादों आदि को टिकाऊ बनाना और उनके लिए बाजार तैयार करना है।

हालांकि किसी मार्केटप्लेस पर उपलब्ध हर उत्पाद को SHGs Made उत्पाद मानना उचित नहीं है। बल्कि इसके sellar या Producer Group की जानकारी को खरीदते समय ठीक से जांच लेनी चाहिए।

लड्डू गोपाल जी की पोशाक को ऑनलाइन खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें --
  • सबसे पहले आप अपने अनुसार सही साइज को देख लीजिए तब ऑर्डर कीजिए।
  • उसपर कपड़ो, वेलवेट और अन्य मैटेरियल की जानकारी को ठीक से जांच कर लीजिए। कही उसमें प्लास्टिक का उपयोग तो नहीं किया गया है।
  • यदि उत्पाद को हस्तनिर्मित बताया गया है तो इसकी ठीक से जांच कर लीजिए। निर्माता की जानकारी से यह सही प्रमाणित हो जाएगा।
  • सजावटी सामग्री में गोटा,लेंस और मोती जैसे सामग्री हो तो इसको घर में बच्चों की पहुंच से दूर रखनी चाहिए। बच्चे इसको निगल सकते हैं।
  • इन सामग्री की धुलाई और देख भाल के निर्देशों को अच्छी तरह से पढ़ लीजिए तब ऑर्डर लगाइए।
  • आप ग्रामीण महिला SHGs और प्रोड्यूसर की जानकारी को जांच कर लीजिए ताकि इनका बढ़ावा हो सके।
  • पैकिंग पर ध्यान दीजिए जिसमें कम से कम प्लास्टिक का उपयोग हो वह पर्यावरण के लिए ठीक होता है।

इन सभी बारीकियों को ध्यान में रखते हुए आप ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं।

इस तरह से लड्डू गोपाल जी का श्रृंगार केवल धार्मिक परंपरा तक ही सीमित नहीं है बल्कि हस्तशिल्प, महिला उद्यमिता और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अपने में समाहित किए हुए हैं।



इको फ्रेंडली लड्डू गोपाल जी का पोशाक और श्रृंगार जो महिला SHGs द्वारा बनाई जाती है
ग्रामीण महिलाओं के SHGs द्वारा तैयार लड्डू गोपाल जी का पोशाक एवं श्रृंगार

4.बांस और लकड़ी के नक्काशीदार झूले 

बाल गोपाल के झूलनोत्सव के लिए तैयार किए जाने वाले ये झूले भारतीय लोक कला की जीती जागती मिसाल है।

पूर्वोत्तर भारत के कुशल कारीगर परिपक्व बांस और बेंत का उपयोग करके हल्के टिकाऊ और आकर्षक झूलों को बनाते हैं। इसके अतिरिक्त मध्य भारत के काष्ठ शिल्पी शीशम, नीम और आम की सूखी लकड़ियों पर पारंपरिक नक्काशी करके झूला को तैयार करते हैं जिन पर हल्दी और प्राकृतिक लाख की पॉलिश होती है।

भारत सरकार के "Office of the Development Commissioner" (Handicrafts) के अनुसार Cane & Bamboo Crafts भारत की प्राचीन हस्तशिल्प कलाओं में से एक है और पूर्वोत्तर भारत में इसका मजबूत आधार है।

असम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (ASRLM) के अनुसार वहां केन और बांस के हस्तशिल्प उत्पादों का घरेलू उद्योग के रूप में विकास हुआ है और वहां की SHGs महिलाएं भी सुंदर हस्तनिर्मित बांस के उत्पादों को बना कर आजीविका और आय का अर्जन करती है।

ASRLM के अनुसार असम में 500 से अधिक SHG सदस्य बांस के क्राफ्ट उद्योग से जुड़े हुए हैं। मिशन के ASOMI Brand के अंतर्गत बेंत और बांस के उत्पादों को भी विकसित किया गया है।

ASRLM की एक प्रकाशित Livelihood Story में Rupali SHG से जुड़ी "जुनकी नाथ" का उदाहरण मिलता है।दस्तावेजों के अनुसार उनके गांव में महिलाएं मुख्यतः बांस से बनी वस्तुओं को बनाती थी और SHG के माध्यम से कच्चा मॉल खरीदने तथा आजीविका गतिविधियों को बढ़ाने में सहायता मिली।

इसी तरह से "त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन" (TRLM) के एक आधिकारिक केस स्टडी में "Purba Nalchar Mahila Federation" का उदाहरण दिया गया है जिसमें अलग अलग SHGs के 6-7 सदस्य बांस का हस्तशिल्प तैयार करके उससे Livelihood Activities को चला रहे थे।

TRLM के अनुसार इस समूह को SHG के माध्यम से वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और Trade Fairs के माध्यम से मार्केट की पहुंच को बढ़ावा दिया गया और इससे सदस्यों की आय में बढ़ोतरी दर्ज किया गया।

भारत सरकार के Handicrafts Portal पर भी त्रिपुरा के विभिन्न जिलों में Cane & Bamboo Crafts की मौजूदगी दर्ज है।

लड्डू गोपाल जी के लिए झूला खरीदते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए --
  • साइज यानी झूले का आकार लड्डू गोपाल जी के साइज का होना चाहिए।
  • वजन को देख लीजिए खासकर निर्माता द्वारा जानकारी दी गई वजन कैपेसिटी क्या है।
  • झूला हिलने पर असंतुलित नहीं होता हो इसका ध्यान रखना चाहिए।
  • किनारो की फिनिशिंग को देख लीजिए कि कही नुकीली बांस या खुरदुरा हिस्सा तो नहीं है।
  • यदि झूला पेंटेड है तो पेंट की जानकारी ले लीजिए कही रासायनिक पेंट है या जैविक पेंट लगाया गया है।
  • हस्तनिर्मित होने के प्रमाण को जांच लीजिए कि यह किस SHGs या ग्रामीण कारीगर द्वारा बनाया गया है।
  • पैकिंग पर ध्यान दीजिए इसमें कम प्लास्टिक होना चाहिए और यह रिसाइकेबल होना चाहिए।

"प्राकृतिक बांस से हस्तनिर्मित झूला,कम प्लास्टिक पैकिंग और टिकाऊ फिनिशिंग के साथ त्योहारों की इको फ्रेंडली शॉपिंग का यह बेहतरीन विकल्प हो सकता है" 

साथ ही यदि इस जन्माष्टमी पर आप लड्डू गोपाल जी के लिए स्थानीय महिला SHGs द्वारा बनाया हुआ बांस या लकड़ी का हस्तनिर्मित झूला को खरीदते हैं तो आपके माध्यम से परंपरा, कारीगरी और ग्रामीण आजीविका -- इन तीनों को सहयोग मिलता है।

इको फ्रेंडली बांस, बेत और लकड़ी का झूला लड्डू गोपाल जी के लिए जिसे जनजातीय और ग्रामीण महिला समुदायों SHGs द्वारा बनाया जाता है
जनजातीय और ग्रामीण महिला समुदायों द्वारा बनाया गया लड्डू गोपाल जी का बांस का झूला

5.चारकोल मुक्त प्राकृतिक धूपबत्ती,अगरबत्ती और हवन कप 


पारंपरिक और साधारण अगरबत्तियों में प्रयुक्त चारकोल और सिंथेटिक इत्र फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी के समाधान के रूप में SHGs ने मंदिरों के सूखे फूलों का पुनर्चक्रण (Flower Recycling) शुरू किया है।

मंदिर से एकत्र किए गए गेंदा, गुलाब और चमेली जैसे फूलों को सुखाने के बाद उसे पीसकर उसमें लोबान, गुग्गल,कपूर और चंदन का चूर्ण और जड़ी बूटियों को मिलता जाता है।

ये उत्पाद चारकोल मुक्त और अधिकतम मात्रा में कार्बन न्यूट्रल होते हैं। "रेडी टू यूस" हवन सामग्री में प्राकृतिक जड़ी बिटियां भरी हुई होती है जिन्हें जलाकर पूरे घर में शुद्ध वातावरण को बनाया जा सकता है।

बिहार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (जीविका - Jeevika), झारखंड JSLPS और तेलंगाना SERP के द्वारा इसको तैयार किया जा रहा है।

भारत सरकार ने अगरबत्ती के क्षेत्र में SHGs और कारीगरों को मशीन, कच्चे मॉल तथा मार्केटिंग सपोर्ट से जोड़ने के लिए योजनाएं भी लागू किया है।

PIB के अनुसार 2020 में KVIC के माध्यम से SHGs और व्यक्तिगत निर्माता को ऑटोमेटिक एवं पैंडल से चलने वाला अगरबत्ती मेकिंग मशीन मुहैया कराया गया। इसका उद्देश्य SHGs से जुड़े 1500 कारीगरों को तत्काल सहायता और रोजगार मुहैया कराना था।

Rashtriy Kamdhenu Aayog से संबंधित PIB की 2020 की जानकारी में गाय के गोबर और पंचगव्य आधारित धूप, अगरबत्ती, संब्रानी कप और हवन सामग्री के निर्माण को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि "चारकोल मुक्त" "प्राकृतिक" और "धुआं मुक्त" ये तीन अलग अलग दावे है। अतः भले ही कोई 100% धुआं मुक्त का दावा करे ये पूरी तरह से सही नहीं होता है।

एक महत्वपूर्ण हालिया जानकारी के अनुसार BIS का IS 19412:2025 Incense Sticks (Agarbatti) --- Specification से संबंधित है। PIB के अनुसार दिसंबर 2025 में जारी इस भारतीय मानक में अगरबत्तियों में कुछ Insecticidal Chemicals और Synthetic Fragrance Substances के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया है।

इस प्रतिबंधित सूची में Alethrin,Permethrin,Cypermethrin,Deltamethrin और Fipronil जैसे केमिकल का सिंथेटिक फ्रेगरेंस शामिल है।

इसीलिए अगरबत्ती खरीदते समय केवल उसकी खुशबू या "नेचुरल" लेबल को देखने के बजाए Manufacturer, Ingredients और Applicable Quality Information को देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

क्योंकि हो सकता है कि कुछ उत्पाद इन SHGs के नाम पर या 100% प्राकृतिक के नाम पर बेचा जा रहा हो। कोशिश कीजिए सही प्लेटफार्म से और सभी जानकारियों को जांचने के बाद ऑर्डर करें।

NECTAR जो भारत सरकार के Department of Science and Technology के अंतर्गत काम करता है ने देशी गाय के गोबर से बने उत्पादों के उदाहरण में धूप और संब्रानी कप का उल्लेख किया है।

संस्था ने ऐसे गाय के गोबर के उत्पादों को ग्रामीण उद्यमियों, किसानों और महिला उद्यमियों के लिए Livelihood Oportunitis से भी जोड़ा है।

इसी तरह से PIB की जानकारी में पंचगव्य और गाय के गोबर आधारित Sambrani Cup,Havan Samgri,Dhoopbatti और अगरबत्ती जैसे उत्पादों का उल्लेख मिलता है। इसीलिए भारत सरकार ने KVIC कार्यक्रम के जरिये इनके उत्पादन को बढ़ावा देना के योजना को लागू किया है।

ऑनलाइन खरीददारी करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए --
  • Ingredients यानी उत्पाद में कौन कौन सी सामग्री को इस्तेमाल किया गया है यह स्पष्ट होनी चाहिए।
  • चारकोल मुक्त उत्पाद का पुष्टि कर लेनी चाहिए।
  • Fragrance की जांच कर लेनी चाहिए कि प्राकृतिक है या सिंथेटिक है।
  • अधिक बढ़ा चढ़ाकर किए जाने वाले दावों से सावधान रहें जैसे -"फेफड़ों को साफ कर देता है" या "हर बीमारी ठीक कर देता है" ऐसे उत्पादों से बचे।
  • BIS और Quality Information की जांच कर लीजिए।
  • SHGs की जानकारी को जरूर देख लीजिए ऐसा न हो कि उसके नाम पर किसी और का उत्पाद हो।
  • पैकिंग में कम से कम प्लास्टिक का उपयोग किया गया हो और रीसाइकल होने वाला पैकिंग होनी चाहिए।

प्राकृतिक सामग्री और चारकोल मुक्त जानकारी वाले उत्पादों में यदि ऊपर से अन्य इंग्रेडिएंट्स और साथ में पैकिंग भी उपयुक्त हो तो इको फ्रेंडली त्योहार का यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

अतः ऊपर बताए गए राज्यों के इन ग्रामीण SHGs को जांच कर आप त्योहारों में इन इको फ्रेंडली उत्पादों को खरीदते हैं तो अपने साथ में पर्यावरण अनुकूल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था अनुकूल पहलों में आपका भी योगदान हो जाता है।




चारकोल मुक्त प्राकृतिक धूपबती और हवन सामग्री बनती shgs महिलाएं
चारकोल मुक्त प्राकृतिक धूपबती,धूप और हवन सामग्री बनती SHGs की महिलाएं 



6.केले के रेशे और जूट से बने इको फ्रेंडली तोरण व गृह सज्जा 

त्योहारों में घर के मुख्य द्वार पर तोरण और वंदनवार को लगाने की परंपरा चली आ रही है। अतः इसके लिए भी अब चाइनीज प्लास्टिक के लटकनों को त्याग कर उसके स्थान पर प्राकृतिक रेशे से बनी सजावट को प्राथमिकता दिया जाने लगा है।

केले के तनों से निकले गए रेशों (Banana Fiber), मूंज घास,और जूट की कताई करके बनाई गई सुंदर वॉल हैंगिंग, तोरण और घंटिया एवं कलश सजावट को बनाया जाता है।

यह पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल है और इनका प्राकृतिक रस्टिक लुक आधुनिक घरों के इंटीरियर में भी अति सुंदर दिखाई देता है।

तमिलनाडु (TNSRLM), केरल के कुटुंबश्री और पश्चिम बंगाल के जुट क्राफ्ट क्लस्टरों में इसको मुख्य रूप से बनाया जाता है।

भारत सरकार के Office of the Development Commissioner (Handicrafts), Ministry of Textiles के आधिकारिक पोर्टल पर इन उत्पादों को भारत की पारंपरिक हस्तशिल्प श्रेणी के रूप में दर्ज किया गया है।

Development Commissioner Handicrafts के अनुसार केले के तने को काटकर उसकी बाहरी परत को हटा कर रेशों को निकल लिया जाता है और इन्हें सुखा कर विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है।

भारत सरकार के हस्तशिल्प पोर्टल के अनुसार Anegundi,Koppal District, Karnataka में "Banana Fiber Crafts" को स्थानीय स्तर पर विकसित करने की पहल 1990 के दशक में ही शुरू हो गई थी। साथ ही इसमें महिला कारीगरों को नियमित आय मिलती रहे इसके लिए बाद में Bhoomi Federation of Working Women का गठन हुआ था।

Development Commissioner Handicrafts के हालिया सूची में भी The Kishkinda Trust, Anegundi Koppal को प्राकृतिक फाइबर क्राफ्ट जिसमें बनाना क्राफ्ट भी शामिल है -- के लिए दर्ज किया गया है।

ठीक यही बात जुट से बने इन्हीं उत्पादों के लिए भी Development Commissioner Handicrafts ने कही है।

केला और जुट से बने इन उत्पादों को खरीदते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए --
  • क्या उत्पाद वास्तव में केला या जुट के फाइबर से बना है कि नहीं इसकी जांच कर लीजिए।
  • उसमें सजावट के लिए कही ज्यादा प्लास्टिक का प्रयोग तो नहीं किया गया है इसकी जांच कर लीजिए।
  • सेलर यानी विक्रेता की SHGs की जानकारी को जांच लेनी चाहिए।
  • रंगों की जानकारी देखनी चाहिए कि प्राकृतिक रंग इस्तेमाल किया गया है कि सिंथेटिक रंग को।
  • आकार आपके दीवार की साइज के अनुरूप है कि नहीं है।
  • पुनः उपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त कर लीजिए सही होगा तो त्यौहार के बाद भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
  • पैकिंग में भी प्लास्टिक कम से कम इस्तेमाल हो इसकी जानकारी जांच लेनी चाहिए।

अतः इस बार के त्यौहार में यदि आप प्लास्टिक की जगह पर जुट के सुनहरा रेशा और केल की प्राकृतिक रेशों से बनी इन उत्पादों को खरीदते हैं तो इसे पुनः कई बार उपयोग भी कर सकते हैं और ग्रामीण SHGs और स्थानीय कारीगरों को समर्थन भी प्रदान कर सकते हैं।



केले और जुट के रेशें से गृह सज्जा उत्पाद बनाती SHGs की महिला
केले के रेशे से इको फ्रेंडली उत्पाद बनाती SHGs की महिला


7.डोकरा कला एवं पीतल की हस्तनिर्मित पूजा थाली 

डोकरा (Dhokra) भारत की 4,000 वर्ष पुरानी लास्ट वॉक्स कास्टिंग (Lost -Wax -Casting) तकनीक पर आधारित धातु शिल्प है, जिसका उपयोग जनजातीय समुदायों के द्वारा किया जाता है।

इसमें पहले मिट्टी से आधार यानी कोर को तैयार किया जाता है फिर मोम की परत को चढ़ाकर उस पर डिजाइन को बनाया जाता है। इसके बाद मिट्टी की बाहरी परत को तैयार किया जाता है। फिर गर्म करने पर मोम बाहर निकल जाता है और उसके स्थान पर पिघली धातु को भर दिया जाता है।

भारत सरकार के Incredible India Portal के अनुसार डोकरा में तांबा और कांसा आधारित एलाय के साथ लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

पीतल और कांस्य के धातु के मिश्रण से बनी पूजा थाली, आरती दिया, पंचपात्र, और घंटी पर पारंपरिक जनजातीय चित्र को उकेरा जाता है। इसके अलावा ग्रामीण बढ़ई द्वारा सागौन और शीशम की लकड़ी पर पीतल की नक्काशी वाली थलिया बनाई जाती है जो पीढ़ियों तक चलती है।

इसको छत्तीसगढ़ के बिहान SHG और पश्चिम बंगाल के आनंदधारा एवं उड़ीसा के शिल्पकारों द्वारा बनाया जाता है।

बंगाल के डोकरा को भारत के GI Tags यानी Geographical Indication Tag (GI) में पंजीकृत उत्पाद है।Intellectual Property of India में भी डोकरा को अंकित किया गया है।

भारत सरकार के National Portal of India के ODOP पेज के अनुसार भी बंगाल के डोकरा की पहचान है और इस सरकारी पेज को 2026 में भी अपडेट किया गया है।

भारत सरकार के हस्तशिल्प संबंधी एक सर्वेक्षण में डोकरा को झारखंड के संदर्भ में जनजातीय समुदायों की आजीविका और आय प्राप्ति के साधन एवं महिलाओं को भी इस काम से जुड़े होने को संदर्भित किया गया है।

पश्चिम बंगाल के Self Help Group और Self Employment विभाग की सक्सेस स्टोरी सूची में पुरूलिया के डोकरा और बीरभूम के बेल मेटल का संदर्भ भी दर्ज किया गया है।

यदि आप इस बार त्यौहार में डोकरा पीतल पूजा थाली खरीदना चाहते हैं तो इन बातों पर ध्यान जरूर दीजिए --
  • वास्तविक मैटेरियल की जानकारी को जांच लीजिए।
  • हस्तनिर्मित है कि मशीन निर्मित है इसकी सही से पड़ताल कर लीजिए।
  • डोकरा स्टाइल वाली थाली नहीं बल्कि डोकरा थाली ही लीजिए। दोनों में अंतर है।
  • GI Tags की जांच कर लीजिए कि वह बंगाल का ही है कि नहीं।
  • पूजा थाली और भोजन थाली दोनों डोकरा में बनता है तो आप पूजा थाली को जांच लीजिए।
  • थाली की फिनिशिंग सही है कि नहीं है।
  • वजन की जांच कर लीजिए क्योंकि हस्तनिर्मित थाली भारी होती है।

अतः इस बार के त्यौहार में पूजा की थाली केवल डिजाइन देख कर मर खरीदियेगा बल्कि बनाने वाले कारीगर, उपयुक्त धातु, बनाने की जगह, हस्तनिर्मित प्रक्रिया और GI Tags को देख कर खरीदना ही बेहतर रहेगा।

इससे आपकी पूजा की थाली में केवल सुंदरता ही नहीं बल्कि भारतीय शिल्प परंपरा और कारीगरों की मेहनत भी शामिल रहेगी।

डोकरा कला में हस्तनिर्मित पीतल की पूजा थाली बनाते
डोकरा कला के पीतल की  हस्तनिर्मित पूजा थाली बनाते शिल्पकार 


8.प्रमाणिक जैविक भोग एवं प्रसाद सामग्री 

हम भारत के लोग जितनी श्रद्धा भगवान के प्रति रखते हैं उतनी ही श्रद्धा भगवान के भोग के प्रति भी रखते हैं। इसलिए भगवान के भोग और प्रसाद के लिए शुद्धता सबसे अनिवार्य तत्व हो जाता है।

SHGs से जुड़े जैविक कृषक समूह शुद्ध सामग्री को सीधे खेतों से उपभोक्ता तक पहुंचाते हैं।

पारंपरिक बिलोना विधि से तैयार देशी गिर और साहीवाल गाय का A2 दूध से बना शुद्ध घी, हिमालयी वनों से संकलित कच्चा शहद, बिना केमिकल वाला जैविक गुड़ और मोदक के लिए हाथ से कूटे हुए लाल और काले चावल का आटा।

इन उत्पादों में कोई भी प्रिजर्वेटिव या मिलावट नहीं होता है।

उत्तराखंड ग्राम विकास समिति का हिलांस ब्रांड, हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का हिम इरा और पूर्वोत्तर राज्यों के ऑर्गेनिक फॉर्मर प्रोड्यूसर ग्रुप FPOs के द्वारा इन उत्पादों को बनाया जाता है।

हां कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए। जैसे किसी किसान का यह कहना कि उसने फसल में रसायनिक खाद या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया है तो भी अपने आप वह उत्पाद Organic Certified नहीं हो जाता है।

FSSAI के "जैविक भारत पोर्टल" के अनुसार ऑर्गेनिक फूड को निर्धारित "ऑर्गेनिक फूड स्टैंडर्ड्स" के अनुसार उत्पादित किए जाने चाहिए और भारत में ऑर्गेनिक फूड को NPOP या PGS-India के तहत सर्टिफाइड किया जाता है।

NPOP -National Programme for Organic Production भारत की एक प्रमुख ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क है।

इसे APEDA, Ministry of Commerce and Industry के अंतर्गत संचालित किया जाता है और Accredited Certification Bodies के माध्यम से सर्टिफिकेशन होता है।

अतः यदि आप कोई भी ऑनलाइन पैकेज्ड ऑर्गेनिक फूड को खरीदते हैं तो उसके लेबल पर सर्टिफिकेशन से संबंधित जानकारी को जरूर देखना चाहिए।

दूसरा है PGS-India --- Participatory Guarantee System, यह छोटे और स्थानीय किसान समूहों के लिए महत्वपूर्ण Participatory Organic Assurance System है।FSSAI के अनुसार इसमें Producers और अन्य Stakeholders मिलकर स्थानीय स्तर पर Organic Guarantee Processing में भाग लेते हैं।

अतः किसी भी ऑर्गेनिक उत्पादों को पहचानने के लिए नीचे दिए गए टेबल को समझ कर उसका फॉलो कीजिए --
🌿 असली Organic Product कैसे पहचानें?
FSSAI • Jaivik Bharat • NPOP • PGS-India Checklist
🔎 NPOP-certified Organic Food
FSSAI के Jaivik Bharat consumer guidance के अनुसार label पर FSSAI Logo/License Number, organic certification की जानकारी, India Organic Logo तथा accredited certification body की जानकारी देखना चाहिए।
🌱 PGS-India Products
PGS-India certified products में label पर PGS-Organic, संबंधित PGS Group और unique identification information जैसी जानकारी देखी जा सकती है।
🛒 ऑनलाइन खरीदारी की आसान Checklist
✓ FSSAI License/Registration देखें
✓ Jaivik Bharat/India Organic जानकारी देखें
✓ NPOP या PGS-India certification देखें
✓ Certification Body/PGS Group देखें
✓ Ingredients List पढ़ें
✓ Origin/Producer की जानकारी देखें
✓ Manufacturing & Expiry Date जांचें
✓ Packaging & Storage Instructions देखें
💡 याद रखें: केवल “Organic”, “Natural” या “Farm Fresh” लिखे होने के आधार पर खरीदारी न करें। उपलब्ध certification और product-label information देखकर निर्णय लें।
स्रोत: FSSAI – Jaivik Bharat Consumer Guidance

 

FSSAI के अनुसार "जैविक भारत लोगो" किसी भी ऑर्गेनिक फूड को "सामान्य नॉन ऑर्गेनिक फूड" से अलग पहचानने के लिए बनाया गया है।

इस प्रकार से SHGs Made Organic Bhog Basket का मॉडल इस प्रकार से हो जाता है --

स्थानीय किसान ⇛Organic/PGS समूह ⇛SHG ⇛Sorting & Processing ⇛Packaging ⇛Branding ⇛Online Marketplace ⇛Consumer 

🌿 Organic Bhog Shopping Checklist
त्योहार के लिए जैविक भोग एवं प्रसाद सामग्री खरीदने की आसान गाइड
🛒 खरीदने से पहले देखें: केवल “Organic” या “Natural” लिखा देखकर खरीदने के बजाय certification, ingredients और producer information की जांच करें।
🥣 सामग्री 🔎 खरीदते समय क्या देखें?
🌰 मखाना Origin + certification/label
🌾 चावल NPOP/PGS information
🫘 दाल Organic certification
🍯 गुड़ Ingredients + certification
🍯 शहद FSSAI details + organic certification claim
🌿 मसाले Certification + ingredients
🌱 तिल Organic status
🥜 सूखे मेवे Certification + packaging
🧈 घी FSSAI + organic certification claim
🥛 पंचामृत सामग्री प्रत्येक ingredient की गुणवत्ता
🌾 निष्कर्ष
प्रमाणिक जैविक भोग एवं प्रसाद सामग्री त्योहारों की खरीदारी को केवल धार्मिक आवश्यकता से आगे ले जाकर जैविक कृषि, स्थानीय किसानों, महिला SHGs और ग्रामीण उद्यमिता से जोड़ सकती है।
🌿 Smart Festival Shopping • Support Farmers & Rural SHGs


इस प्रकार से प्रमाणिक जैविक भोग एवं प्रसाद सामग्री त्योहारों की खरीददारी को केवल धार्मिक आवश्यकता से आगे ले जाकर जैविक कृषि, स्थानीय किसानों, महिला SHGs और ग्रामीण उद्यमिता से भी जोड़ सकती है।

लेकिन इसका एक सबसे महत्वपूर्ण नियम है कि केवल ऑर्गेनिक लिखा देख कर खरीददारी नहीं करनी है बल्कि इसके सर्टिफिकेशन और लेवलिंग को भी जरूर चेक करना है।

9.टेराकोटा हांडी और मक्खन मटकियां 

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर माखन मिश्री का भोग लगाने और दही - हांडी उत्सव के लिए मिट्टी के बर्तनों की विशेष मांग रहती है।

ऐसे में टेराकोटा की मटकियां जिसे पारंपरिक कुम्हारों द्वारा चाक पर तैयार किया जाता है और जिसपर गेरु, हल्दी और चूना जैसे प्राकृतिक रंगों से पारंपरिक मांडणा एवं मधुबनी शैली की चित्रकारी किया जाता है।

भारत सरकार के Development Commissioner (Handicrafts) के अनुसार Terracotta & Pottery भारत की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण हस्तशिल्प परंपराओं में से एक है।

सरल शब्दों में -- Terracotta (टेराकोटा) का अर्थ है "पकाई हुई मिट्टी"। कारीगर प्राकृतिक Clay को साफ करके और फिर उसे गूंथकर फिर उसे आवश्यक आकार प्रदान करने के बाद सुखाते है और फिर उसे भट्ठे में पका देते है।

भारत सरकार के KVIC के Pottery प्रोग्राम में टेराकोटा को Utensil,Artefacts,Garden Products और अन्य उपयोगी वस्तुओं से जुड़ी Cottage Industries के रूप में वर्णित किया गया है।

भारत सरकार के National Portal of India के ODOP पेज पर दरभंगा, बिहार की टेराकोटा को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया है। इस सरकारी पेज को 28 जुलाई 2026 को अपडेट किया गया था।

उत्तर प्रदेश का "गोरखपुर टेराकोटा" भी भारत सरकार के ODOP पोर्टल पर GI Tags Craft के रूप में दर्ज है। अतः आप चाहे तो GI Tags टेराकोटा को भी खरीद सकते हैं।

इसी तरह से पश्चिम बंगाल का Bankura Panchmura Terracotta Craft भी भारत सरकार के ODOP पोर्टल पर GI Tags हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट के रूप में दर्ज है। बांकुरा का यह बहुत पुराना और प्रसिद्ध टेराकोटा है।

राजस्थान में भी टेराकोटा की मजबूत परंपरा है। भारत सरकार के ODOP पोर्टल पर Rajsamand Terracotta का उल्लेख है। आप राजस्थान की मिट्टी की बनी हुई टेराकोटा को भी खरीद सकते हैं।

भारत सरकार के MSME मंत्रालय के SFURTI Database में मध्य प्रदेश के Betul में टेराकोटा Pottery Culuster में 509 Artisans दर्ज है। इसी तरह से उत्तर प्रदेश के हापुड़ में 269 Artisans दर्ज है। यानी यह ग्रामीण आजीविका का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

इस Artisans से कई महिला SHGs भी जुड़ी हुई है।

ऑनलाइन टेराकोटा मटकी खरीदते समय क्या देखे --
  • देखे कि उत्पाद वास्तव में टेराकोटा है या टेराकोटा लुक वाला कोई सिंथेटिक प्रोडक्ट्स तो नहीं है।
  • अच्छी तरह से पका हुआ है कि नहीं।
  • पेंट और कीटिंग किया है तो मटके में खाद्य पदार्थ या मक्खन न रखे बल्कि उसके लिए खाद्य पदार्थ रखने वाला बिना पेंट वाला ऑर्डर करें।
  • सेलर से फूड सेफ्टी वाला टेराकोटा की जानकारी ले।
  • जो साइज आप लेना चाहते हैं उसे जांच लीजिए।
  • पैकिंग कम प्लास्टिक वाला भी हो और ऐसा मजबूत भी हो कि मिट्टी के बर्तन टूटे भी नहीं।
  • ग्रामीण आजीविका SHGs की जांच कर लीजिए।

साथ ही GI Tags की भी जांच कर लेनी चाहिए कि कही कोई भी तो GI Tags के नाम पर सेल नहीं कर रहा है।

आप भारतीय मिट्टी कला और ग्रामीण आजीविका को बाजार देने का एक छोटा एवं सार्थक प्रयास के तौर पर इनको बाजार प्रदान करने के लिए एक बार इस त्यौहार पर टेराकोटा मटकी की खरीददारी तो कर ही सकते हैं।



 
टेराकोटा हांडी और मक्खन मटकियां
टेराकोटा हांडी और मक्खन मटकियां बनाती महिला 


10.पूरी 100% प्राकृतिक हर्बल रोली,अष्टगंध और चंदन तिलक 

पूजा में माथे पर लगाया जाने वाला तिलक त्वचा के सीधे सम्पर्क में आता है। लेकिन बाजार में मिलने वाली अधिकतर रोली में अक्सर सिंथेटिक डाई और लेड ऑक्साइड मिला रहता है।

लेकिन जब यह पलाश (टेसू) के फूलों, कस्तूरी हल्दी, मंजिष्ठा और शुद्ध रक्त चंदन के सत्व से तैयार किया जाता है तो ये रोली और अष्टगंध केमिकल मुक्त हो जाते हैं।

भारत सरकार के आधिकारिक Oil of East Indian Sandalwood मानकों में Santalum Album Linn. से प्राप्त Sandalwood Oil को विशिष्टि रूप से परिभाषित किया गया है जो यह दिखाता है कि यह ऐसा पदार्थ है जिसकी गुणवत्ता और पहचान को विशेष मानक के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत TRIFED द्वारा संचालित Van Dhan कार्यक्रम का उद्देश्य वन आधारित उत्पादों को मूल्य संवर्धन करना एवं उसका प्रोसेसिंग, पैकिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़कर जनजातीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर को उपलब्ध कराना है।

TRIFED के वर्तमान वन धन डेटाबेस में विभिन्न राज्यों के Van Dhan Vikas Kendra (VDVKs) तथा उसके बेफिशियरी एवं उनके मूल्य संवर्धन कार्यक्रमों का विवरण उपलब्ध है।

TRIFED की आधिकारिक वेबसाइट पर दिसंबर 2023 की सूचना में बताया गया था कि Tribes India की "हर्बल होम रेमेडीज" को VDVKs से जुड़े ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के साथ लंच किया गया था।

ऑनलाइन हर्बल, रोली तिलक और अष्टगंध खरीदते समय क्या देखें --
  • इंग्रेडिएंट्स लिस्ट को जरूर देखिए की उसमें कौन कौन से पदार्थ मिलाया गया है।
  • मैन्युफैक्चरर का नाम और पता।
  • उत्पाद का बैच और लॉट नंबर।
  • उत्पादन संबंधित जानकारी उपलब्ध है कि नहीं है।
  • वास्तविक मात्रा कितनी है।
  • एक्सपायरी डेट और बेस्ट बीफोर Use कब तक है।
  • हर्बल और नेचुरल क्लेम का आधार क्या है।
  • त्वचा पर लगाने के लिए उत्पाद है कि केवल पूजा पथ के लिए है।

इस तरह से इस बार के त्योहारों में आप यदि Verified SHGs और जनजातीय उत्पादों एवं विश्वसनीय मार्केटप्लेस से इन हर्बल पूजा सामग्री को खरीदते हैं तो आपकी छोटी छोटी खरीददारी भी परंपरा, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण आजीविका को समर्थ दे सकती है।

🌿 ये Eco-Friendly उत्पाद किन राज्यों के SHGs से जुड़े हैं?
राज्य • SHG/Programme • प्रमुख उत्पाद • प्रमुख पर्व
भारत के विभिन्न राज्यों में SHGs, Rural Livelihood Missions, artisan clusters और tribal VDVKs स्थानीय संसाधनों से हस्तशिल्प एवं value-added products तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
🇮🇳 महाराष्ट्र
SHG/Programme: MAVIM
🌱 उत्पाद: Seed Ganesha / Eco-friendly festival craft
🪔 पर्व: गणेश चतुर्थी
🇮🇳 उत्तर प्रदेश
SHG/Programme: UPSRLM
🌱 उत्पाद: गोमय आधारित उत्पाद / दीपक
🪔 पर्व: दीपावली एवं अन्य पर्व
🇮🇳 राजस्थान
SHG/Programme: Rajeevika (RGAVP)
🌱 उत्पाद: Poshak / हस्तनिर्मित श्रृंगार एवं textile-craft products
🪔 पर्व: जन्माष्टमी एवं अन्य धार्मिक अवसर
🇮🇳 असम
SHG/Programme: ASRLM / ASOMI
🌱 उत्पाद: Bamboo & Cane handicrafts / Jhula-style décor
🪔 पर्व: जन्माष्टमी एवं अन्य उत्सव
🇮🇳 बिहार
SHG/Programme: JEEViKA
🌱 उत्पाद: धूप, अगरबत्ती एवं अन्य ग्रामीण value-added products
🪔 पर्व: सभी प्रमुख पर्व
🇮🇳 केरल
SHG/Programme: Kudumbashree
🌱 उत्पाद: प्राकृतिक सजावट, हस्तशिल्प एवं home décor
🪔 पर्व: दीपावली / ओणम एवं अन्य अवसर
🇮🇳 उत्तराखंड
SHG/Programme: HILANS / Rural SHG ecosystem
🌱 उत्पाद: स्थानीय हस्तशिल्प एवं पूजा/ग्रामीण उत्पाद
🪔 पर्व: विभिन्न पर्व
🇮🇳 मध्य प्रदेश
SHG/Programme: VDVK / Tribal SHG ecosystem
🌱 उत्पाद: वन-आधारित, हर्बल एवं जनजातीय value-added products
🪔 पर्व: विभिन्न पर्व
📌 प्रमाणिकता नोट:
विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के अंतर्गत SHGs द्वारा हस्तशिल्प, bamboo/cane, tribal products और अन्य value-added products तैयार किए जाते हैं। हालांकि किसी खास SHG द्वारा किसी खास festival product के निर्माण की पुष्टि product-level listing से अलग-अलग करनी चाहिए।
🌾 त्योहार की खरीदारी को ग्रामीण आजीविका से जोड़ें
स्थानीय SHGs, artisan groups और verified rural enterprises से खरीदारी करके आप पारंपरिक शिल्प और ग्रामीण value chains को बाजार से जोड़ने में योगदान दे सकते हैं।
📚 स्रोत: State Rural Livelihood Missions • RGAVP • ASRLM • TRIFED • Government portals

 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण पर प्रभाव 

स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित इन उत्पादों की खरीद करने से इसका जो प्रभाव है वह केवल पर्यावरण संरक्षण ताकि ही सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी पड़ता है।

इन प्रभावों को संक्षेप में हम इस प्रकार से देख सकते हैं --
  • ग्रामीण परिवारों की मौसमी आय में वृद्धि: त्योहारी सीजन के समय में हस्तशिल्प और पूजन सामग्री के निर्माण से एक SHGs महिला सदस्य की औसत मासिक आय में ₹8,000 से ₹25,000 तक की वृद्धि होती है जिससे वह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी कामों को पूरा कर पाती है।
  • बिचौलियों का उन्मूलन: सरकारी ई मार्केटप्लेस,ई सरस पोर्टल, और सीधे क्लस्टर सोर्सिंग से कारीगरों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल पाता है।
  • सामूहिक वित्तीय स्वतंत्रता और नेतृत्व: क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF), और ग्राम संगठनों के माध्यम से महिलाएं स्वयं मूल्य निर्धारण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लॉजिस्टिंग और डिजिटल भुगतान का प्रबंधन कर रही है जिससे ग्रामीण भारत में महिला उद्यमिता का नया दौर भी शुरू हुआ है।

इस प्रकार से ग्रामीण महिलाओं से लेकर जनजातीय समुदायों तक और किसानों से लेकर पर्यावरण प्रेमियों तक को इन उत्पादों का सीधा लाभ प्राप्त होता है।

इन उत्पादों को ऑनलाइन कैसे खरीदें ? 

भारत सरकार और उसकी संस्थाओं के द्वारा भी वर्तमान बदलते डिजिटल जमाने जो देखते हुए ऑनलाइन प्लेटफार्म उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण प्रयास किया गया है।

यदि आप अपने घर के लिए एकल उत्पाद या पूजा कीट मंगाना चाहते है तो आप --
  • eSARAS अधिकार पोर्टल:
  1. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के आधिकारिक ई कॉमर्स पोर्टल www.esaras.in पर जाए या गूगल प्ले स्टोर से eSARAS App को डाउनलोड कर लीजिए।
  2. Festive Collection या Puja Samgri सेक्शन में जाइए।
  3. अपने पसंद के उत्पादों को कार्ट में जोड़ लीजिए।
  4. अब सुरक्षित ऑनलाइन पेमेंट कर दीजिए।
  5. आपका उत्पाद इंडियन पोस्ट ऑफिस या अधिकृत कुरियर पार्टनर से आपके दिए गए पते पर आ जाएगा।
  • राज्य स्तरीय आजीविका स्टोर्स:
  1. केरल - kudumbashreebazar.com पर जाकर कर सकते हैं।
  2. उत्तराखंड (हिलांस): www.hilans.org पर जाकर पहाड़ी शहद, घी और दालों आदि की खरीददारी कर सकते हैं।
  3. ट्राइब्स इंडिया (TRIFED): tribesindia.com पर जाकर कर सकते हैं।

थोक, कार्पोरेट और B2B के लिए 

अपार्टमेंट सोसाइटियों, गणेशोत्सव पंडालों, कॉर्पोरेट गिफ्टिंग या रेसलिंग के लिए यदि बड़ी मात्रा में ऑर्डर करनी हो तो क्या करना होगा।

इसके लिए प्रक्रिया इस प्रकार से है --
  • eSARAS B2B Desk: आप - care@esaras.in पर ईमेल करके या 1800-102-0988 पर कॉल करके थोक कोटेशन मंगाकर ऑर्डर कर सकते हैं।
  • Government e-Marketplace (GeM): कॉर्पोरेट या सरकारी संस्थान GeM पोर्टल के "SARAS Collection" या "Womaniya" सेगमेंट के तहत सीधे पंजीकृत SHGs से थोक में खरीददारी कर सकते हैं।
  • जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) से संपर्क: अपने नजदीकी जिले के DRDA या राज्य आजीविका मिशन कार्यालय में जाइए और वहां "जिला कार्यक्रम प्रबंधक" (DPM - Non-Farm) से मिल लीजिए। वह आपको सीधे उन क्लस्टर फेडरेशन से जोड़ देंगे जहां उत्पादन क्षमता अधिक है। इससे आपको फैक्ट्री या उत्पादन लागत पर सामग्री मिलने लगेगी।
  • सरस आजीविका मेला: दिल्ली, नोएडा, मुम्बई,बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में त्योहारी सीजन से पहले आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सरस मेले में जाकर कारीगरों से सीधे मिलकर बल्क में भी ऑर्डर कर सकते हैं।

इस प्रकार से चाहे आप व्यक्तिगत तौर पर ऑनलाइन खरीदना चाहते हो या सोसाइटी के लिए चाहे बल्क में ऑर्डर करना हो या रिसेल करने के लिए थोक में करना हो, सभी तरह की खरीददारी की सुविधा उपलब्ध है।

एक नजर में समझे:Eco Friendly Festival Shopping और SHG Rural Livelihood 

🌿 Eco-Friendly Festival Shopping
त्योहार • प्राकृतिक उत्पाद • SHGs • ग्रामीण आजीविका
एक छोटी खरीदारी, बड़ा ग्रामीण प्रभाव
स्थानीय SHGs, कारीगरों और ग्रामीण उत्पादक समूहों से eco-friendly products खरीदकर त्योहारों को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।
🪔
1. त्योहार चुनें
गणेश चतुर्थी • जन्माष्टमी • दीपावली • ओणम आदि
↓
🌱
2. Eco-Friendly Product चुनें
मिट्टी • बांस • जूट • गोमय • प्राकृतिक/हर्बल सामग्री
↓
👩‍🌾
3. SHG / Artisan Producer खोजें
State Rural Livelihood Mission • SHG • Artisan Cluster • VDVK
↓
🔎
4. Product की जांच करें
Ingredients • Origin • Certification • Manufacturer • Packaging
↓
🛒
5. जिम्मेदारी से खरीदें
Verified seller / SHG / artisan / institutional marketplace
🌾 क्या खरीद सकते हैं?
🌱 Seed / Clay Ganesha
🪔 गोमय दीपक
🎋 Bamboo Décor
🏺 Terracotta Matki
🌿 Herbal Puja Items
🧵 Jute / Natural Décor
♻️ आपकी खरीदारी का ग्रामीण प्रभाव
👩‍🌾
SHG Income
महिला उद्यमिता
🧑‍🎨
Artisan Support
स्थानीय कारीगर
🌾
Local Economy
ग्रामीण बाजार
♻️
Less Plastic
कम अपशिष्ट
⭐ Smart Festival Shopping Rule
स्थानीय खरीदें • प्रमाणित जानकारी देखें • Plastic कम करें • SHGs को समर्थन दें
🌿 Eco-Friendly Festival • SHG Livelihood • Rural Entrepreneurship

 

निष्कर्ष (Conclusion) 

भारतीय त्यौहार सदियों से ही केवल उत्सव और उल्लास तक ही सीमित नहीं रहा है बल्कि यह प्रकृति, समाज और संस्कृति के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारियों को भी अपने में समाये हुए हैं। अतः इस विरासत को भी हमें सम्मान देना होगा और इन ग्रामीण एवं प्राकृतिक उत्पादों को फिर से अपनाना होगा। 

क्योंकि रसायनिक रंग, प्लास्टर ऑफ पेरिस और प्लास्टिक के बढ़ते चलन ने जाने अनजाने में हमारी पवित्र आस्था को भी पर्यावरण के लिए हानिकारक बना दिया है।

लेकिन स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिला कारीगरों ने यह सिद्ध कर दिया है कि उत्सव की दिव्यता को बनाए रखते हुए भी प्रकृति की पूरी तरह से रक्षा करना संभव है।

इन उत्पादों को जब आप उपयोग करते हैं तब आपका यह कदम इस दोहरे बदलाव की नींव को रखता है --
  1. पर्यावरण संरक्षण के तहत जलस्रोतों को जहरीले रसायनों से मुक्ति मिलती है और शून्य कचरा (Zero Waste) जीवनशैली को बढ़ावा मिलता है।
  2. ग्रामीण महिला स्वावलंबन के तहत आपकी खरीददारी का सीधा लाभ बिचौलियों के पास न जाकर किसी दूर दराज गांव के आंगन में बैठी एक मेहनती महिला और उसके परिवार की आजीविका को सशक्त बनाता है।

🌿 आप की पहल,उनका संबल: इस त्योहार में अपने नजदीकी सरस आजीविका मेला या eSARAS पोर्टल के माध्यम से इको फ्रेंडली उत्पाद को अपना कर आप भी "लोकल फॉर वोकल" अभियान का हिस्सा बनिए।

"इस साल कम प्लास्टिक और अधिक स्थानीय एवं अधिक प्राकृतिक खरीददारी का संकल्प लें"

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)

1. इको फ्रेंडली फेस्टिवल प्रोडक्ट्स क्या होते हैं ?

Eco Friendly Festivals Products ऐसे उत्पाद होते हैं जिनमें प्राकृतिक और पुनः उपयोग होने योग्य स्थानीय या कम अपशिष्ट वाली सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे मिट्टी की मूर्तियां, टेराकोटा मटकी, बांस के उत्पाद, प्राकृतिक सजावट और हस्तनिर्मित पूजा सामग्री आदि।

2. SHGs इन इको फ्रेंडली फेस्टिवल प्रोडक्ट्स से कैसे जुड़े हुए हैं ?

स्वयं सहायता समूह (SHG) स्थानीय संसाधनों और कारीगरों के साथ मिलकर हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद, पूजा सामग्री सजावटी वस्तुएं और अन्य Value Added Product's को तैयार और मार्केटिंग करते हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आमदनी और उद्यमिता के अवसरों का निर्माण होता है।

3. क्या SHGs से बना हुआ हर उत्पाद Eco Friendly या Organic होता है ?

नही! SHGs द्वारा बनाया गया उत्पाद अपने आप में स्वयं Organic या Eco Friendly प्रमाणित नहीं हो जाता है। ऑर्गेनिक होने के लिए सर्टिफिकेशन और मानक और इको फ्रेंडली क्लेम के लिए उत्पाद की सामग्री और निर्माण की प्रक्रिया को देखनी चाहिए।

4. आनलाइन Organic Bhog और प्रसाद सामग्री खरीदते समय क्या देखना चाहिए ?

इसके लिए आपको FSSAI Details, Ingredients List, Manufacturer Producer Information, Packing, Manufacturing Date और Expiry Date या Best Before Date को खरीदते समय देखना चाहिए। साथ ही ऑर्गेनिक होने पर NPOP या PGS -India से संबंधित जानकारी को भी जांच लेनी चाहिए।

5. क्या मिट्टी की मटकी या टेराकोटा उत्पाद Eco Friendly होते हैं?

मिट्टी आधारित उत्पाद प्लास्टिक डेकोर का अच्छा विकल्प हो सकता है लेकिन उन्हें ऐसे ही स्वतः में ही 100% इको फ्रेंडली नहीं माना जाना चाहिए। मिट्टी की सोर्सिंग, उसके पकाने के तरीकों और रंग, कोटिंग, पैकिंग और ट्रांसपोर्टेशन का भी पर्यावरणीय प्रभाव होता है।

6. त्योहारों के लिए SHGs के Eco Friendly Products को ऑनलाइन कहा से खरीदा जा सकता है?

आप इसे Verified SHGs,State Rural Livelihood Mission,eSARAS और Tribes India के पोर्टल एवं अन्य सरकारी और संस्थागत मार्केटप्लेस पर जाकर खरीद सकते हैं। प्रोडक्ट्स को खरीदते समय individual listing और Producer Information को जरूर देख लेनी चाहिए।

7. क्या "हर्बल" "नेचुरल और "ऑर्गेनिक" एक ही चीज है?

नहीं! "Harbal" "Natural" और"Organic" तीनों अलग अलग दावे है। किसी उत्पाद पर"नेचुरल" या "हर्बल" लिखा होने से जरूरी नहीं है कि वह उत्पाद "सर्टिफाइड ऑर्गेनिक" ही है। विशेषकर त्वचा पर लगाए जाने वाले कुमकुम, रोली और तिलक में उसके इंग्रेडिएंट्स लिस्ट और निर्माता की जानकारी को अवश्य देख लेनी चाहिए।

8. Eco Friendly Festivals Products खरीदने से ग्रामीण आजीविका को कैसे फायदा होता है?

इसको स्थानीय SHGs,महिला समूहों, कुम्हारों,बांस कारीगरों,हस्तशिल्पियों और ग्रामीण उत्पादक समूहों से खरीदने पर स्थानीय वैल्यू चैन में पैसा जाता है। इससे हस्तशिल्प को बाजार, ग्रामीण उद्यमियों को आय और पारंपरिक शिल्प को संरक्षण में मदद मिलती है।

💡 एक लाइन में इस त्योहार सिर्फ़ समान को न खरीदे बल्कि स्थानीय कारीगर,SHGs और ग्रामीण उद्यमिता को भी बाजार प्रदान करे।

संबंधित विषय:


📚 स्रोत एवं संदर्भ
Eco-Friendly Festival • SHGs • Organic Products • Rural Livelihood
इस लेख में Eco-Friendly Festival Products, SHGs, Organic Food, Tribal Livelihood और Traditional Crafts से संबंधित जानकारी के लिए भारत सरकार एवं संबंधित सरकारी संस्थाओं के आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता दी गई है।
1️⃣ FSSAI – Jaivik Bharat
Organic food की पहचान, Jaivik Bharat, FSSAI licence, NPOP और PGS-India से संबंधित consumer guidance।
2️⃣ FSSAI – NPOP Organic Standards
National Programme for Organic Production (NPOP), accreditation और organic certification framework से संबंधित जानकारी।
3️⃣ FSSAI – PGS-India
Participatory Guarantee System (PGS-India), group certification, standards और consumer verification से संबंधित आधिकारिक जानकारी।
4️⃣ TRIFED – Van Dhan Yojana
जनजातीय समूहों, VDVKs, Minor Forest Produce, value addition, processing, branding और marketing से संबंधित आधिकारिक जानकारी।
5️⃣ TRIFED – Van Dhan Resource Documents
Value Addition & Processing, Model Business Plans, Branding & Packaging तथा Quality Specifications जैसे संसाधन।
6️⃣ Assam State Rural Livelihoods Mission (ASRLM)
ASOMI brand के अंतर्गत Cane & Bamboo products तथा SHG महिलाओं के लिए bamboo handicraft livelihood opportunities की जानकारी।
7️⃣ Government Handicrafts Portal – Terracotta
भारत की terracotta एवं pottery traditions, raw materials, manufacturing process तथा उपयोगी एवं decorative products की जानकारी।
8️⃣ FSSAI – Organic Food Consumer FAQ
Organic food label पर FSSAI logo/license number और संबंधित organic certification information देखने संबंधी guidance।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य-जांच नोट
इस लेख में किसी राज्य के SHG programme से किसी विशेष product का संबंध बताते समय उपलब्ध सरकारी/संस्थागत जानकारी को प्राथमिकता दी गई है। किसी विशिष्ट SHG द्वारा किसी विशिष्ट festival product के निर्माण की पुष्टि अलग product-level listing से करना उचित है।
🌱 Organic खरीदारी के लिए: केवल “Natural”, “Herbal” या “Organic” शब्द देखकर निर्णय न लें। खाद्य उत्पादों में label पर FSSAI तथा लागू certification information, ingredients और producer details की जांच करें।
प्राथमिक स्रोत: Government of India • FSSAI • TRIFED • State Rural Livelihood Missions • Government Handicrafts Portal

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