अमेरिका VS भारत: प्लास्टिक का इस्तेमाल,छिपे खतरे और ग्रामीण भारत पर इसका सच
📌 इस लेख में आप जानेंगे
✔️ प्लास्टिक हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा कैसे बना।
✔️ प्लास्टिक के 7 प्रकार और कौन-सा Food-Grade सुरक्षित है।
✔️ BPA और माइक्रोप्लास्टिक क्या हैं तथा इनके संभावित स्वास्थ्य प्रभाव।
✔️ भारत और अमेरिका में प्लास्टिक उपयोग व रीसाइक्लिंग का अंतर।
✔️ ग्रामीण भारत पर प्लास्टिक प्रदूषण का असर और सरकार की प्रमुख पहलें।
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| प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट और रीसाइक्लिंग का भारत एवं अमेरिका में तुलनात्मक अध्ययन |
प्रस्तावना (Introduction)
प्लास्टिक आखिर हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा कैसे बन गया ?
- बेजोड़ बहुमुखी प्रतिभा: यानी इसको आप जैसा चाहे वैसा ढाल सकते है जैसे - जैसा रंग चाहे वैसा या जैसा रूप चाहे या जैसा आकर, मोटाई या मजबूती में भी।इसे सीसा की तरह पारदर्शी,स्टील की तरह मजबूत या पालीथीन की तरह लचीला बना सकते हैं।आप चाहे तो इसे कपड़े की तरह धागों में पिरो सकते है।ऐसा प्रतिभावान पदार्थ सबको पसंद है।
- उत्पादन लागत भी उतनी ही सस्ती: हां! ये इसका दूसरा बेजोड़ खूबी है।यह मुख्य रूप से "पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस" के उप - उत्पादों से बनते हैं। इसलिए यह और भी सस्ता हो जाता है।ऊपर से ये इतना हल्का होता है कि परिवहन खर्च बहुत कम बैठता है जो इसे और भी सस्ता बनाए रखता है।
- थ्रो अवे और सुविधा की संस्कृति: इसको 1950 और 1960 के दशक में "सुविधा" के रूप में प्रचारित करके बेचा गया और इसने लोगों को यह छूट दे दिया कि "मुझको इस्तेमाल करके फेंक दो" जिसके चलते आदमी सुविधा भोगी और आलसी हो गया एवं प्लास्टिक पर पूरी तरह से निर्भर हो गया।
- वजन में हल्का और टिकाऊ होना: हल्का तो होता ही है इसमें जंग नहीं लगती,पानी से खराब नहीं होता और दीमक इसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है।हां और जल्दी टूटता भी नहीं है।
- आधुनिक तकनीक और मेडिकल क्षेत्र में क्रांति: प्लास्टिक ने स्वास्थ्य क्षेत्र को आधुनिक बना दिया।सिरिंज,IV drip बोतले,सर्जिकल उपकरण और भी बहुत सारे मेडिकल उपकरण जो एक ही बार यूज़ किया जाता है जिससे संक्रमण का खतरा नहीं होता है।साथ ही पूरा का पूरा इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग प्लास्टिक के बिना अधूरा हो जाएगा।
अमेरिका बनाम भारत: प्लास्टिक उपयोग और रीसाइक्लिंग में क्या अंतर है ?
1. प्रति व्यक्ति खपत (Per Capita Consumption):
सबसे पहले हम दोनों देशों के प्रति व्यक्ति प्लास्टिक के खपत का विश्लेषण करते हैं -
- अमेरिका: अमेरिका प्लास्टिक का दुनियां में सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। यहां प्रति व्यक्ति प्लास्टिक की खपत "लगभग 100 से 110 किलोग्राम प्रति वर्ष" होता है।पैकेजिंग,ग्रोसरी बैग्स और डिस्पोजल सामानों में इसका सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है।
- भारत: भारत में प्रति व्यक्ति प्लास्टिक की खपत लगभग "15 से 20 किलोग्राम प्रति वर्ष" है और यह वैश्विक औसत से भी कम है।क्योंकि वैश्विक प्लास्टिक के खपत का औसत 30-35 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है।हालांकि भारत में अधिक आबादी होने के कारण कुल प्लास्टिक का कचरा ज्यादा दिखता है।
2. प्लास्टिक के प्रकार और गुणवत्ता (Plastic Grades):
अमेरिका में सबसे ज्यादा PET (बोतले),HDPE (दूध के कैन),PP (कंटेनर) और इंजीनियरिंग ग्रेड प्लास्टिक का अधिक उपयोग किया जाता है।
जबकि भारत में PET,HDPE,LDPE (पतली पॉलीथिन) और MLP (मल्टी लेयर प्लास्टिक) का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है।
यदि खाद्य सुरक्षा यानी FDA नियमों की बात की जाए तो अमेरिका में यह बहुत सख्त है। वहां पर "BPA -FREE" प्लास्टिक उपयोग अनिवार्य होता है।
भारत में भी FSSAI के नियम तय किया गया है। लेकिन यहां स्थानीय एवं अनौपचारिक बाजारों में "गैर फूड ग्रेड प्लास्टिक" का इस्तेमाल आसानी से और बहुत किया जाता है।
अमेरिका में मल्टी लेयर प्लास्टिक का उपयोग बहुत ही सीमित या बहुत कड़े रीसाइक्लिंग नियमों के तहत होता है।जबकि भारत में मल्टी लेयर प्लास्टिक का उपयोग धड़ल्ले से किया जाता है।
भारत में चिप्स,नमकीन,बिस्किट पैकेजिंग में "मल्टी लेयर प्लास्टिक" का हिस्सेदारी बहुत बड़ा है।इसी को रीसाइकल करने में सबसे ज्यादा कठिनाइयां होती है।
3.रीसाइक्लिंग का तरीका (Recycling Process):
भारत में औपचारिक तरीका में तो कम रीसाइक्लिंग होता है लेकिन अनौपचारिक तरीकों से रीसाइक्लिंग अमेरिका से भी ज्यादा होता है।
- अमेरिका: अमेरिका में रीसाइक्लिंग प्रक्रिया "ऑटोमेटेड (Single Stream Recycling) रूप से ज्यादा होता है।लोग एक ही बिन में प्लास्टिक को डाल देते हैं और मशीनें उसको अलग अलग करती है।फिर भी अमेरिका में कुल प्लास्टिक कचरे का वास्तविक रूप से 8 से 10% तक ही रीसाइकल हो पाता है।बाकी कूड़े के ढेर में चला जाता है।
- भारत: बात भारत की आती है तो यहां "कबाड़ी वाला और वेस्ट पिकर नेटवर्क" प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग की रीढ़ का काम करते हैं।भारत में PET बोतलों जैसे - पानी और सॉफ्ट ड्रिंक की बोतलों की रीसाइक्लिंग 60-70% तक हो जाती है।हालांकि पतली थैलियों और पैकेजिंग चिप्स के रैपर जिसका बहुत अधिक उपयोग किया जाता है इसका प्रबंधन उतना ही ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
4. नियम और प्रतिबंध (Regulations & Bans):
जब हम नियम कानून और नियमन की बात करते हैं तो यह दोनों जगह है लेकिन कुछ मूलभूत अंतर और व्यवहारिक बात थोड़ा अलग अलग है।
- अमेरिका: अमेरिका में कोई भी और किसी भी प्रकार का केंद्रीय रूप से प्लास्टिक पर प्रतिबंध नहीं है।वहां नियम राज्य दर राज्य के अनुसार बदलते रहते हैं।जैसे "कैलिफ़ोर्निया" और "न्यूयॉर्क" में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर कड़े प्रतिबंध है जबकि कई अन्य राज्यों में प्लास्टिक बैग्स बिना किसी झिझक के मिल जाते हैं।
- भारत: केंद्र सरकार ने "1 जुलाई 2022 से" पूरे देश में विशिष्ट रूप से 19 प्रकार के "सिंगल यूज प्लास्टिक"(SUP) पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसमें प्लास्टिक स्ट्रा, कटलरी, 100 माइक्रोन के बैनर आदि शामिल हैं। इसके अलावा प्लास्टिक की थैलियों की न्यूनतम मोटाई को "120 माइक्रोन" तक तय की गई है।
5. उपयोग की संस्कृति (Usage Cultural):
इसको हमलोग समझते हैं इस प्रकार से :
- अमेरिका: अमेरिका में "Convenience Culture" यानी सुविधा एवं डिस्पोजेबल संस्कृति बहुत ज्यादा हावी है। यहां पर हर छोटी खरीददारी या टेक अवे फूड में बहुत ज्यादा प्लास्टिक पैकेजिंग का उपयोग किया जाता है।
- भारत: भारत में प्लास्टिक का पुनः उपयोग करने का रुझान काफी अधिक होता है।जैसे तेल के डिब्बों को घर के सामान रखने या गमलों की तरह इस्तेमाल करने में।यह तो पालीथीन की थैलियों जो भी घरों में लोग सम्भल कर रखते हैं फिर से किसी काम में उपयोग कर लेते हैं।हालांकि बढ़ती शहरीकरण के साथ यहां भी सिंगल यूज पैकेजिंग का चलन बढ़ गया है।
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| प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट अमेरिका और भारत में |
प्लास्टिक के 7 प्रकार:कौन सुरक्षित और कौन खतरनाक ?
| कोड | प्लास्टिक का नाम | कहाँ उपयोग होता है? | खाद्य उपयोग |
|---|---|---|---|
| ♻️ 1 | PET | पानी, कोल्ड ड्रिंक की बोतलें | ⚠️ एक बार उपयोग बेहतर |
| ♻️ 2 | HDPE | दूध के कंटेनर, तेल के डिब्बे | ✅ सुरक्षित |
| ♻️ 3 | PVC | पाइप, वायर, फ्लोरिंग | ❌ भोजन के लिए नहीं |
| ♻️ 4 | LDPE | ब्रेड बैग, फूड रैप | ✅ अपेक्षाकृत सुरक्षित |
| ♻️ 5 | PP | टिफिन, दही के डिब्बे, माइक्रोवेव कंटेनर | ✅ सबसे सुरक्षित |
| ♻️ 6 | PS | डिस्पोज़ेबल कप, प्लेट | ❌ गर्म भोजन के लिए नहीं |
| ♻️ 7 | Other | मिश्रित प्लास्टिक, कुछ बोतलें | ⚠️ सावधानी आवश्यक |
1. खाद्य पदार्थों के लिए सबसे सुरक्षित प्लास्टिक कौन सा है ?(Green Zone):
- ♻️ नंबर 5 (Code - 5 PP- Polypropylene): सबसे सुरक्षित:यह सबसे सुरक्षित और बेस्ट प्लास्टिक होता है।इसका उपयोग ग्राम भोजन को रखने के लिए,टिफिन बॉक्स,माइक्रोवेव फूड बर्तन,दही और छाछ के बर्तन एवं बच्चों के पानी को बोतलों के लिए किया जाता है।यह प्लास्टिक गर्मी और रसायनों के प्रति सबसे ज्यादा सहनशील यानी प्रतिरोधी होता है।
- ♻️ नंबर 2 (Code - 2 HDPE -High Density Polyethylene) बहुत सुरक्षित: यह मजबूत और टिकाऊ प्लास्टिक होता है जिसका उपयोग दूध के कंटेनर,तेल के कैन,शैंपू की बोतलों और पानी की टंकियों में होता है।यह प्लास्टिक आसानी से रीसाइकल हो जाता है।
- ♻️ नंबर 4 (Code- 4 LDPE -Low Density Polyethylene) सुरक्षित: यह मुलायम तथा लचीला प्लास्टिक होता है जो भोजन के सीधे संपर्क में आने पर भी सुरक्षित माना जाता है।इसका उपयोग ब्रेड की थैलियों, किराने की थैलियों,फ्रोजन फूड की थैलियों और रैप में किया जाता है।यानी खाद्य पैकेजिंग में सबसे ज्यादा इसका उपयोग किया जाता है।
- ♻️ नंबर 1 (Code- 1 PETE या PET -Polyethylene Terephthalate)केवल एक बार इस्तेमाल के लिए "Singal Use": यह दुनियां में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला प्लास्टिक है जिसका उपयोग मिनरल वाटर, जूस,कोल्ड ड्रिंक और कई प्रकार की खाद्य पदार्थों के बोतलों के लिए होता है। लेकिन सावधानी यह रखनी होती है कि इसे दुबारा उपयोग नहीं करनी चाहिए और इसे अधिक धूप में रखने से बैक्टीरिया पनपने तथा प्लास्टिक के अंश के घुलने का खतरा रहता है।
- ♻️ नंबर 3 (Code - 3 PVC - Polyvinyl Chloride): इसमें विषैले रसायन होते हैं जो हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़कर नुकसान पहुंचाते वो।खे के चीजों के लिए इसका इस्तेमाल हानिकारक होता वो।इसका उपयोग मुख्य रूप से PVC पाइप,बिजली के तार,दरवाजों की शीट और निर्माण कार्यों में किया जाता है।खाने की चीजों के लिए इसका इस्तेमाल हानिकारक होता है।
- ♻️ नंबर 6 (Code - 6 PS -Polystyrene/Styrofome): इसका उपयोग डिस्पोजेबल चाय के कप,टेक अवे बॉक्स आदि में किया जाता है। इसमें गरम चीज डालने से "स्टाइरिन"(Styrene) रसायन खाने में घुलता है जो कैंसरकारी माना जाता है।इसे आमतौर पर थर्मोकोल के नाम से जाना जाता है।भारत में चाय आदि गर्म पेय को पीने के लिए जो कप होता है वह इसका भी बनाया जाता है।गर्म भोजन और पेय पदार्थों के लिए इससे बचना बहुत जरूरी है।
- ♻️ नंबर 7 (Code 7-Other/Polycarbonate): इस श्रेणी में कई अलग अलग प्रकार के प्लास्टिक शामिल होते हैं। इसमें BPA (Bisphenol A) होने के चांस अधिक होते हैं।ये हमेशा नुकसानदायक होते है।
Food -Grade प्लास्टिक क्या होता है ?
फूड ग्रेड प्लास्टिक वह होता है जिनको बनाते समय यह परीक्षण किया जाता है कि उसको सामान्य उपयोग करने के समय खतरनाक रसायनों को न छोड़े।
- Fork 🍽️ and Glass 🍷 Symbol: किसी भी कंटेनर या बोतल पर यदि कांटा और ग्लास का चिन्ह बना हुआ हैं तो यह संकेत है कि यह उत्पाद भोजन के संपर्क के लिए बनाया गया है और यह food Grade प्लास्टिक है।
- Food Safe या Food Grade लिखा हो: कई कंपनियां अपने उत्पाद पर "Food Grade" "Foodie Safe" या "Suitable for Food Contant" जैसे शब्द भी लिखा हुआ मिलता है।
- रीसाइक्लिंग कोड देखे: जैसे ऊपर बताए गए खाद्य पदार्थों के लिए सुरक्षित कोड लिख हो - PP Code -5,HDPE Code -2 और LDPE Code -4 लिखा हुआ होना चाहिए।
- BPA Free का उल्लेख हो:यदि उत्पाद पर BPA Free लिखा हुआ है तो यह "बायोस्फिल A" se रहित प्लास्टिक है और इसका उपयोग सुरक्षित है।
- विश्वसनीय ब्रांड और गुणवत्ता का ध्यान: यदि प्लास्टिक के पदार्थ आप किसी भी विश्वसनीय ब्रांड एवं अच्छी गुणवत्ता का लेंगे तो ये कंपनियां इन मानकों का ध्यान रखती है।लेकिन यदि आप सस्ते के चक्कर में लोकल उत्पाद खरीदेंगे तो कोई भरोसा नहीं रहता है और उसमें इन सभी मानकों का पालन नहीं किया जाता है।
| ✅ प्रतीक / चिह्न | इसका मतलब क्या है? |
|---|---|
| 🍴🥛 Fork & Glass Icon | यह अंतर्राष्ट्रीय चिन्ह बताता है कि प्लास्टिक खाद्य पदार्थों के संपर्क (Food Contact) के लिए उपयुक्त है। |
| 🟢 BPA-Free | यह दर्शाता है कि उत्पाद में Bisphenol A (BPA) का उपयोग नहीं किया गया है या उससे बचा गया है। |
| 🌊♨️ Microwave / Freezer Symbol | यह संकेत बताता है कि कंटेनर माइक्रोवेव या फ्रीजर में उपयोग के लिए उपयुक्त है। हमेशा निर्माता के निर्देशों का पालन करें। |
BPA क्या होता है ?
- बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है।
- प्रजनन संबंधी समस्याएं हो सकती है।
- थायराइड, ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
माइक्रोप्लास्टिक (Micro plastic) क्या होता है ?
- शरीर के हिस्सों में सूजन होना
- ऑक्सीडेटिव तनाव का बढ़ना
- हारमोन प्रणाली पर विपरीत प्रभाव
भारत में प्लास्टिक प्रदूषण की भयावह तस्वीर
1. हर साल भारत में कितना प्लास्टिक कचरा निकलता है ?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार भारत में प्लास्टिक कचरा की मात्रा बढ़ती ही जा रही है।वर्ष 2022-23 में देश में लगभग 41.6 लाख टन (4.3 मिलियन टन) प्लास्टिक के कचरे उत्पन्न हुए थे।
जबकि विशेषज्ञों के अनुसार इसकी वास्तविक मात्रा और भी अधिक हो सकती है क्योंकि देश के कई क्षेत्रों में कचरे का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध ही नहीं हो पाता है।
- 2020-21 में 41.26 लाख टन प्लास्टिक कचरा
- 2021-22 में 39.01 लाख टन प्लास्टिक कचरा
- 2022-23 में 41.36 लाख टन प्लास्टिक कचरा
2. सबसे बड़ी समस्या: प्लास्टिक का गलत निबटान
सबसे बड़ी समस्या प्लास्टिक का उपयोग करना नहीं है बल्कि उसको उपयोग करने के बाद सही तरीकों से एकत्र करना,अलग करना और उसका रिसाइक्लिंग करना है।
भारत में उत्पन्न होने वाले कचरे का केवल 60% हिस्सा ही रीसाइकल हो पाता है ऐसा नीति आयोग का कहना है। इसमें भी PET बोतलों का रिसाइकल सबसे अधिक होता है करीब 70-80% जो कबाड़ी वालों और वेस्ट पिकर्स के नेटवर्क के कारण संभव होता है।
देश के अनेक हिस्सों में आज भी प्लास्टिक -
- खुले में फेंक दिया जाता है।
- नालियों में बह जाता है।
- नदियों और तालाबों तक पहुंच जाता है।
- खेतों में जमा रहता है।
- या फिर खुले में जला दिया जाता है।
3. सिंगल यूज प्लास्टिक ने बढ़ाई चुनौती
पिछले एक दशक में देश में Singal-Use Plastic (SUP) का उपयोग तेजी से बढ़ गया है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार यह कुल प्लास्टिक कचरे का लगभग 43% हिस्सा है।
इसमें पॉलीथिन की थैलियां,पानी की छोटी बोतलें,चिप्स और नमकीन के पैकेट,डिस्पोजल कप और प्लेट एवं ऑनलाइन डिलीवरी की पैकिंग आदि शामिल हैं
इसमें से कई वस्तुएं केवल कुछ मिनटों के लिए उपयोग की जाती है लेकिन पर्यावरण में वर्षों तक बनी रहती है।
4. इसका पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर क्या है ?
प्लास्टिक प्रदूषण केवल सफाई की समस्या नहीं है बल्कि इसका प्रभाव कई क्षेत्रों पर पड़ता है।"राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान" के अनुसार भारत के विभिन्न शहरों के पेयजल और नल के पानी के नमूनों में से "80% से अधिक में माइक्रोप्लास्टिक" के अंश पाए गए है।
यह सबसे ज्यादा चिंता करने वाली बात है।जबकि भारत में अभी प्लास्टिक की प्रति व्यक्ति खपत 15 किलोग्राम प्रति वर्ष ही है। इसमें तेजी से वृद्धि का ही अनुमान है।
फिक्की (FICCI) के अनुमान के अनुसार रीसाइकल नहीं होने वाले कचरे के कारण भारत को 2030 तक लगभग "11 लाख करोड़ रुपये" का आर्थिक नुकसान हो सकता है।
इसके अलावा -
- नालियां जाम होने से शहरी और ग्रामीण बाढ़ का खतरा।
- नदियों और जलाशयों का प्रदूषित होना।
- पर्यावरण स्थलों की सुरक्षा प्रभावित होना।
- नगर निकायों पर कचरा प्रबंधन का खर्च बढ़ना।
- पशुओं एवं वन्यजीवों के लिए जानलेवा स्थिति होना।
ग्रामीण भारत पर प्लास्टिक का सबसे बड़ा असर
- पशुओं को नुकसान: जानलेवा हो जाता है।ये पशु कूड़े के ढेर में पालीथीन में रखे सब्जियों के छिलको एवं भोजन के साथ उस पालीथीन को भी चबा जाती है।यानी निगल लेती है।यह पशुओं के पेट में जमा होकर पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है जिससे इनकी मौत हो जाती है।
- मिट्टी की उर्वरता में गिरावट: खेतों मे यह मिट्टी की परतों में बैठकर मिट्टी में हवा एवं पानी के रिसाव को रोक देता है।साथ ही इसके कारण केंचुए एवं अन्य मिट्टी के मित्र कीट और जीवाणु मरने लगते हैं जिससे मिट्टी की उपजाऊपन कम हो जाती है।
- भूजल संचयन में रुकावट: पानी के स्रोतों,गड्ढों,तालाबों और खेतों आदि में पालीथीन जमा हो गया है जिससे पानी का सही रिसाव भूमि में नहीं हो रहा है।इससे भूमिगत जल का रिसाइकल नहीं हो पाता है।
- वायु प्रदूषण और गंभीर बीमारियां: ग्रामीण भारत में कचरा प्रबंधन न होने के कारण इसको घर के सामने ही खुले में जला दिया जाता है।जलने पर उसमें से डाईऑक्सिन और फ्यूरेन जैसी जहरीली गैस निकलती है।इससे आंखों में जलन,सांस की बीमारियां और लंबे समय में कैंसर भी हो सकती है।
- नालियां जाम और मच्छर का प्रकोप: जब न तब पालीथीन नालियों में चला जाता है और उसे जाम कर देता है।पानी जमा होने से मच्छर पनपते है।इससे डेंगू और मलेरिया गांवों में भी फैलने लगी है।
प्लास्टिक से कौन कौन सी बीमारियां हो सकती है ?
- हार्मोन असंतुलन का खतरा।
- प्रजनन क्षमता प्रभावित होना।
- बच्चों के विकास से जुड़ी चिंताएं।
- श्वसन संबंधी बीमारियों का होना।
- लंबे समय में कैंसर की संभावना।
- पेट एवं पाचन विकार होना।
- हृदय एवं रक्त वाहिकाओं पर माइक्रोप्लास्टिक के खतरनाक दुष्प्रभाव।
- गर्भवती महिलाओं को कई समस्या।
- आंखों में जलन और दुष्प्रभाव।
- डेंगू और मलेरिया को बढ़ाने में सहायक।
सरकार क्या कर रही है ?
- Plastic Waste Management Rules,2016: भारत सरकार ने वर्ष 2016 में इस कानून को लागू किया और समय समय पर इसमें सुधार कर और प्रभावी भी बनाया गया है।इसका मुख्य उद्देश्य है -
- प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक संग्रह करना।
- स्रोत पर ही कचरे को अलग करना।
- रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना।
- स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी तय करना।
- प्लास्टिक निर्माताओं और ब्रांड कम्पनियों की जवाबदेही बढ़ाना।
- इसी नियम के तहत स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों को भी प्लास्टिक कचरे की बेहतर प्रबंधन की जिम्मेदारी प्रदान की गई है।
- Singal Use Plastics (SUP) पर प्रतिबंध: 1 जुलाई 2022 से भारत सरकार ने कुछ विशेष चिन्हित "सिंगल यूज प्लास्टिक"(SUP) को उसके निर्माण,बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।इसके प्रतिबंधित वस्तुओं में शामिल है -
- प्लास्टिक स्ट्रा
- प्लास्टिक कटलरी - चमच्च,कांटा और चाकू आदि
- प्लास्टिक स्टीक वाले गुब्बारे
- थर्मोकोल की कुछ सजावटी वस्तुएं
- प्लास्टिक स्टिकर
- इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन प्लास्टिक का उपयोग कम करना है जिनका उपयोग कुछ मिनटों के लिए ही होता है लेकिन उसका प्रभाव वातावरण में वर्षों तक बना रहता है।
- Extended Producer Responsibility (EPR): भारत सरकार ने EPR प्रणाली को लागू किया है जिसका अर्थ यह है कि अब केवल उपभोक्ता ही नहीं बल्कि प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियां,आयातक और ब्रांड मालिक भी अपने उत्पादों से उत्पन्न प्लास्टिक कचरों के संग्रहण और रीसाइक्लिंग के जिम्मेदार है।इस व्यवस्था से कंपनियों को -
- प्लास्टिक कचरा वापस एकत्र करना
- रीसाइक्लिंग सुनिश्चित करना
- और निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करना होता है
- यह भारत की प्लास्टिक कचरा नीति में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव बनकर उभरा है।
- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) Phase -2: ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए "स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण Phase 2" के तहत "Solid and Liquid Waste Management (SLWM)" पर विशेष जोर दिया जाता है।अगले टॉपिक में इसकी थोड़ा विस्तार से चर्चा की जाएगी
- GOBARdhan योजना: गोबर्धन योजना -"Galvanizing Organic Bio - Agro Resorceses Dhan" का मुख्य उद्देश्य भले ही जैविक कचरे का बेहतर उपयोग करना है फिर भी यह ठोस कचरा प्रबंधन को भी मजबूत बनाने में मदद करता है।इस योजना के तहत -
- जैविक कचरे से बायोगैस और जैविक खाद बनाई जाती है।
- गांवों में स्वच्छता को बढ़ावा मिलता है।
- मिश्रित कचरे की मात्रा को कम करने में सहायता मिलती है।
- प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण: कई राज्यों में "Plastic Waste Road" को बनाया जा रहा है। इसमें उपयोग किए गए प्लास्टिक को सबसे पहले प्रोसेस किया जाता है।उसके बाद उसे बिटुमेन (डामर)के साथ मिलाकर सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जाता है।इसके लाभ -
- प्लास्टिक कचरे का उपयोग बढ़ता है।
- सड़के अधिक टिकाऊ हो सकती है।
- लैंडफिल में जाने वाला प्लास्टिक कम हो सकता है।
- जन जागरूकता अभियान: सरकार समय समय पर लोगो को जागरूक करने के लिए विभिन्न अभियान भी चलाती है जैसे -
- कपड़े के थैले के उपयोग को बढ़ाना।
- प्लास्टिक कचरे को अलग एकत्र करना।
- रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना।
- स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना।
- शौचालय का निरंतर उपयोग: गांव का कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न करे और साथ ही नए नए बने हुए परिवारों को भी शौचालय उपलब्ध कराया जा सके।
- ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन (SLWM): गांव में फैले कचरे और गंदे पानी के निपटारे का स्थाई ढांचा उपलब्ध कराना।
- जैविक कचरा प्रबंधन (Biodegradable Waste Management): रसोई घर के कचरे और गोबर को खाद में बदलने के लिए घरेलू और सामुदायिक कम्पोस्ट पिट को बनाना।इसी के अंतर्गत GOBARdhan योजना में पशुओं के गोबर एवं कृषि कचरे से गोबर गैस बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
- प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (Plastic Waste Management): दूसरा स्तंभ गांवों में प्लास्टिक कचरा को इकठ्ठा करने और उसको अलग करने तथा उसे ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक कचरा प्रबंधन इकाइयों (PWMI) तक पहुंचाना है।इस प्लास्टिक का उपयोग रीसाइक्लिंग और सड़को के निर्माण में किया जाएगा।
- गंदे पानी का प्रबंधन (Greywater Management): नहाने,कपड़े धोने और रसोई से निकलने वाले गंदे पानी को सड़कों पर बहने से रोकना।इसके लिए घरों और सार्वजनिक स्थलों पर सोक पीट (सोखता गड्ढा),मैजिक पिट और किचन गार्डन को बढ़ावा देना मुख्य था।
- मल कीचड़ प्रबंधन (Faecal Sludge Management): शौचालय की सोक पीट और सैप्टिक टैंको में जमा मल को मशीनों द्वारा सुरक्षित तरीकों से खाली करना और उसका निपटारा करना ताकि भूमिगत जल प्रदूषित न हो पाए।
- शौचालय निर्माण: ऐसे नए या छूटे हुए गरीब परिवार जो शौचालय नहीं बनवा पाए थे उन्हें आज भी ₹12,000 की सहायता राशि दी जाती है।
- सामुदायिक शौचालय (CSC): गांवों में सार्वजनिक या सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों को धन प्रदान किया जाता है।
- फंडिंग मॉडल: इस योजना के लिए बजट का इंतजाम केंद्र सरकार,राज्य सरकार और 15वें वित्त आयोग के फंड को मिलाकर किया जाता है।
- अधिक से अधिक कपड़ा या जुट का थैला इस्तेमाल करे।
- प्लास्टिक कचरों को अलग अलग एकत्र करे।
- खुले में प्लास्टिक को न जलाए।
- Food Grade और BPA Free प्लास्टिक उत्पाद ही खरीदे।
- जहां तक संभव हो सके स्टील,जांच एवं मिट्टी के बर्तनों को प्राथमिकता दे।
- प्लास्टिक को कूड़ेदान में डाले और उसे रीसाइकल के लिए केंद्र पर भेज दे।
🌿 सारांश (Quick Summary)
प्लास्टिक आधुनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसका सही उपयोग, सही प्रकार का चयन और जिम्मेदारीपूर्ण निपटान बेहद आवश्यक है। हर प्लास्टिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होता, इसलिए Food-Grade, BPA-Free और Code 2, 4 एवं 5 वाले उत्पादों को प्राथमिकता दें।
माइक्रोप्लास्टिक, खुले में प्लास्टिक जलाना और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग पर्यावरण, खेती, पशुओं और मानव स्वास्थ्य के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर रहा है। सरकार के प्रयास तभी सफल होंगे जब हम सभी प्लास्टिक कचरे को अलग करें, रीसाइक्लिंग अपनाएँ और अनावश्यक प्लास्टिक के उपयोग को कम करें।
♻️ याद रखें — "प्लास्टिक समस्या नहीं, बल्कि उसका गलत उपयोग और गलत निपटान सबसे बड़ी समस्या है।"
निष्कर्ष (Conclusion)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1:क्या सभी प्रकार के प्लास्टिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं? ▼
प्रश्न 2: Food Grade प्लास्टिक की पहचान कैसे करें ? ▼
प्रश्न 3: BPA Free का मतलब क्या होता है ? ▼
प्रश्न 4:Microplastics (माइक्रोप्लास्टिक) क्या है और यह हमारे शरीर में कैसे पहुंचता है? ▼
प्रश्न 5:क्या एक बार इस्तेमाल होने वाली पानी की प्लास्टिक बोतलों को बार बार इस्तेमाल करना चाहिए ? ▼
प्रश्न 6:भारत सरकार प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कर रही है ? ▼
प्रश्न 7: माइक्रोवेव (Microwave) और फ्रिजर (Freezer) सिंबल से क्या संकेत मिलता है ? ▼
प्रश्न 8:प्लास्टिक प्रदूषण रोकने में आम नागरिक क्या योगदान दे सकते हैं ? ▼
- Central Pollution control Board (CPCB): प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट पोर्टल। एनुअल रिपोर्ट एवं डेशबोर्ड।वेबसाइट:https://pwm.cpcb.gov.in।
- Ministry of Environment,Forest and Climate Change(MoEFCC): Plastic Waste Management Rools -2016, एवं संशोधन। वेबसाइट:https://moef.gov.in/index.php/rules-regulations-3।
- Centralized EPR Portal for Plastic Packaging (Government of India): वेबसाइट https://eprplastic.cpcb.gov.in।
- Food Safety and Standard Authority of India (FSSAI): फूड पैकेजिंग और फूड सेफ्टी स्टैण्डर्ड। वेबसाइट:https://fssai.gov.in/cms/amendment-fss-packaging.php।
- United Nations Environment Program (UNEP): प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स एवं वैश्विक प्लास्टिक नीति। वेबसाइट:https://leap.unep.org/en/countries/in/national-legislation/plastic-waste-management-rules-2016।
- World Health Organization (WHO): पीने के पानी में माइक्रोप्लास्टिक एवं रिपोर्ट। वेबसाइट:https://www.who.int/publications/i/item/9789241516198।
- Organisation for Economic Co-Opration and Devlopment (OECD): ग्लोबल प्लास्टिक आउटलुक। वेबसाइट:https://www.oecd.org/environment/plastics/।
- Parliament of India (लोकसभा और राज्यसभा): प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट और fssai संबंधी प्रश्नों के उतर। वेबसाइट:https://sansad.in/getFile/annex/251/AU1178.pdf?source=pqars।
- Our World in Data: प्लास्टिक प्रदूषण और ग्लोबल डाटा। वेबसाइट:https://ourworldindata.org/plastic-pollution।





Ye bdhiya lga ki kaun sa plastic use krne layak hai khana ke liya
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