खेत के किनारे बबूल और कोइत लगाना फायदेमंद या सिरदर्द? जानिए जमीनी हकीकत
लेख का संक्षिप्त सार (Quick Summary)
- ⚠️ बड़ी समस्या: खेतों की मेड़ या सड़कों के किनारे उगे कैथा (कोईत) और बबूल के कांटे आधुनिक कृषि मशीनों (टैक्टर/हार्वेस्टर) को रोकते हैं, टायर पंचर करते हैं और नीलगाय जैसी आफत के आगे बेअसर हैं।
- ⚖️ कानूनी नियम: सरकारी सड़क या वन विभाग की जमीन पर लगे कटीले पेड़ों को बिना अनुमति खुद काटना अपराध है। इसके लिए ग्राम प्रधान (मुखिया) या अंचल अधिकारी (CO) को लिखित आवेदन देना सही तरीका है।
- 🌱 स्मार्ट विकल्प: कांटों के झंझट से बचने के लिए पेड़ों की 7-8 फीट तक 'हाई प्रूनिंग' (छँटाई) करें या उनकी जगह लेमन ग्रास, करौंदा, मेहंदी की सुरक्षित 'बायो-फेंसिंग' अपनाएं।
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| कांटेदार पेड़ से किसान परेशान क्या है समाधान |
📌खेत के किनारे बबूल और कोइत लगाना फायदेमंद या सिरदर्द? जानिए जमीनी हकीकत:
📑 Table of Contents
- ➤ प्रस्तावना
- ➤पारंपरिक सोच बनाम आज का हकीकत:यह सिरदर्द क्यों बनी??
- ➤ सबसे बड़ा पेंच: कांटेदार पेड़ हटाने का कानूनी पक्ष
- ➤कांटेदार पौधों की समस्या का पक्का कानूनी समाधान क्या है?
- ➤ व्यवहारिक उपाय: बिना पेड़ो को काटे कांटो से मुक्ति कैसे पाए ?
- ➤भविष्य का रास्ता: कांटेदार बाड़ के 4 आधुनिक विकल्प
- ➤ विशेषज्ञों की राय और शोध क्या कहते हैं?
- ➤ निष्कर्ष
- ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
प्रस्तावना (Introduction)
पारंपरिक सोच बनाम आज का हकीकत:यह सिरदर्द क्यों बनी?
- कम पानी में भी आसानी से बढ़ने वाले पेड़:कांटेदार पेड़ कम पानी और सूखा क्षेत्रों में भी आसानी से बिना खास देखभाल के उग सकते है। इसीलिए इनको लगाया गया।
- मिट्टी के कटाव को रोकना: इन पेड़ों का जड़ गहराई में जाते हैं और गहरे जड़ वाले पेड़ मिट्टी को गहराई से बांधकर रखते हैं।
- हरित आवरण बढ़ाना: जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान को देखते हुए सरकार हरित आवरण बढ़ाने के लिए पेड़ो को लगा रही हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लकड़ी और ईंधन: बबूल की लकड़ी मजबूत होती है और जलावन में भी उपयोग की जाती है।
- जैव विविधता को बढ़ावा: पेड़ इसके अलावा पक्षियों, कीटों, मधुमक्खियों आदि को आश्रय देकर जैव विविधता को बढ़ाने में सहयोग प्रदान करते हैं।
1. कांटों से मजदूरों और पशुओं को चोट:
कोईत और बबूल जैसे पेड़ के कांटे बहुत कड़े और नुकीले होते हैं।तेज हवा चलने या डालियां टूटने के बाद ये कांटे रास्तों और खेत की मिट्टी में बिखर जाते है।जब खेत पर किसान,मजदूर आदि जाते है तो उनके पैरों में चुभ जाते है।
- इंफेक्शन का खतरा: जब कांटे पैर में चुभते है तो अंदर ही टूट जाते है।इससे पैरों में सूजन,दर्द और चुभन होने लगती है और कई बार तो टिटनेस जैसी बीमारियां हो जाती है।
- मजदूरों की समस्या: कंटीले मेड़ो के डर से आजकल मजदूर भी इन खेतों पर जाने और काम करने से कतराने लगे हैं।
- पशुओं को समस्या: यही समस्या बेजुबान पशुओं की हो जाती है और उनके पैरों एवं घास चरने के दौरान उनके मुंह भी चोटिल हो जाती है।जिनके इलाज में किसानों को पैसा भी खर्च करना पड़ता है।
- महिला मजदूरों की परेशानी: महिला मजदूर जो धान की रोपाई पानी से भरे खेतों में करती है।उनके पैरों और हाथों में भी कांटे चुभ जाते हैं।इससे वो इन खेतों में जाने से कतराने लगी है।
2. आधुनिक कृषि मशीनों को चलाने में बाधा:
अब बैल से खेती नहीं होती है और आज का किसान आधुनिक हो गया है।वह खेतों की जुताई, बुआई और कटाई के लिए ट्रैक्टर, पावर टिलर और हार्वेस्टर जैसे मशीनों का प्रयोग करता है और खेतों पर बाइक से ही चला जाता है।साइकल भी खेतों पर जाने और समान आदि पहुंचाने के लिए उपयोग करता है। लेकिन
- टायर पंचर होना: इससे बार बार इन मशीनरी गाड़ियों के टायर पंचर हो जाते हैं जिससे किसान को आर्थिक नुकसान के साथ समय का भी नुकसान हो जाता है।
- मशीनों से काम करने में दिक्कत: चूंकि कई बार मशीन ऊंचे भी होते हैं।इन पेड़ो की टहनियों से दिक्कत होती है।साथ ही इनकी जड़े खेतों में चली जाती है इससे खेतों की जुताई में दिक्कत होने लगती है।
3. फसल पर छाया का प्रभाव:
जहां तक फसल का सवाल है जब ये पेड़ बड़े होते हैं तो खूब फैलते हैं और इनकी छाया दूर तक खेतों के फसलों पर पड़ती है।इससे उतने दूर तक की फसलें कमजोर हो जाती है।
4. पानी और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा:
हां इनकी जड़े खेतों के अंदर दूर तक पहुंच जाती है। और पोषक तत्वों को पाने के लिए इन पेड़ो और फसलों में प्रतिस्पर्धा होने लगती है। हम जो खाद पानी फसलों में डालते है उसको ये पेड़ सोख लेते हैं।
5. खेत की उपयोगी भूमि कम होना:
उतना दूर में जितना दूर तक इन पेड़ो की जड़े और शाखाएं फैली रहती है,खेती की भूमि बेकार हो जाती है। अतः खेतों और छोटे पईनो के किनारे लगे इन पेड़ो से खेती योग्य भूमि भी कम हो जाती है।
6. राहगीरों को कांटा और टायर पंचर का डर:
ये सीधे किसानों को नहीं बल्कि उस रास्ते से जाने वाले बाइक से जो राहगीर होते है उनकी टायर पंचर होने का डर रहता है।साथ ही जब किसान तैयार होकर बाजार करने के लिए शहरों में जाता है तो घर से निकलते ही उनकी बाइक के टायर में कांटे चुभ जाते हैं और वह पंचर हो जाती है।
सबसे बड़ा पेंच: कांटेदार पेड़ हटाने का कानूनी पक्ष
1. पेड़ की स्थिति और जमीन का मालिकाना हक:
यह महत्वपूर्ण है यदि आप पेड़ को काटने के बारे में सोच रहे हैं तो। देखते है इन स्थितियों के बारे में ---
- यदि पेड़ और जमीन निजी हो: ऐसी स्थिति में आप कृषि कार्य में बाधा डालने वाली टहनियों को छांट सकते है, लेकिन कुछ प्रतिबंधित प्रजातियों के पूरे पेड़ को जड़ से काटने के लिए राजस्व अधिकारी या अंचल अधिकारी (CO) से अनुमति लेनी होती हैं।
- पेड़ और जमीन सरकारी हो: यदि पेड़ सरकारी सड़क, नहर, पाइन आदि के किनारे सरकारी जमीन जैसे वन विभाग,PWD या ग्रामीण विकास की तो इस पेड़ पर आपका कोई कानूनी अधिकार नहीं है।इसे बिना अनुमति काटना गंभीर और दंडनीय अपराध है।
- यदि पेड़ और जमीन सांझी हो: मान लीजिए दो मेड़ों के बीच में पेड़ हो और जमीन दो लोगों के एकदम बीच में हो तो बिना पड़ोसी किसान की लिखित या मौखिक सहमति के पेड़ काटना आपसी विवाद और FIR का कारण बन सकता है।
2. वन संरक्षण अधिनियम और राज्य के नियम:
अब इन पेड़ो के बारे में काटने को लेकर वन विभागों और राज्य सरकारों का नियम क्या कहता है:-
- वृक्ष संरक्षण अधिनियम: राज्यों जैसे बिहार, यूपी आदि के "वृक्ष संरक्षण अधिनियम" के अनुसार कुछ पेड़ो को काटने पर पूर्ण या आंशिक रूप से प्रतिबन्ध है।
- जंगली या स्वतः उगने वाली: यदि पेड़ जंगली और स्वतः उगने वाली है,बबूल और कोईत इसी श्रेणी में आती है, तो उन्हें हटाने के लिए नियम थोड़े लचीले है।फिर भी यदि पेड़ सरकारी जमीन पर है तो वन विभाग या स्थानीय ग्राम पंचायत की संपति मानी जाती है।उन्हें काटने पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के जुर्म में जुर्माना या जेल या दोनों हो सकता है।
कांटेदार पौधों की समस्या का पक्का कानूनी समाधान क्या है?
कदम 1. ग्राम पंचायत या सरपंच को लिखित शिकायत:
सबसे पहले आप ग्राम प्रधान यानी मुखिया जी और वार्ड सदस्य को एक लिखित आवेदन दीजिए।
- आवेदन में साफ लिखे कि "सड़क के किनारे इस कांटेदार पेड़ के कारण राहगीरों के पैर जख्मी हो रहे है और वाहनों के टायर पंचर हो रहे है एवं खेती की मशीनों को आने जाने में बाधा हो रही है।
- ग्राम पंचायतों को सार्वजनिक रास्तों को साफ और सुरक्षित रखने का अधिकार होता है।मुखिया जी पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पास करवा कर उस पेड़ की पूरी छंटाई करवा सकते हैं।
कदम 2. अंचल अधिकारी (CO) या PWD विभाग को आवेदन:
यदि पेड़ लोकनिर्माण विभाग (PWD) या किसी सरकारी सड़क की जमीन पर है तो एक साधारण आवेदन जिला या ब्लॉक के अंचल अधिकारी (CO) या स्थानीय PWD अधिशासी अभियंता को देनी चाहिए।
- आवेदन में इस बात का जिक्र जरूर करें कि पेड़ लोक सुरक्षा (Public Safety) के लिए खतरा बन चुका है।
- कानूनन यदि कोई पेड़ जन हानि या सार्वजनिक बाधा उत्पन्न करता है तो प्रशासन उसे हटाने या छंटने के लिए बाध्य है।
कदम 3. आपसी सहमति का पंचनामा:
अगर पेड़ आपके पड़ोसी की मेड़ पर है और आपके खेत में उसकी डालियां झुककर फसल को बर्बाद कर रही है तो --
- भारतीय नागरिक संहिता: के नियमों के अनुसार आपको अपनी सीमा में आने वाली डालियों को छांटने का अधिकार है। लेकिन विवाद से बचने के लिए गांव के दो लोगों के सामने एक सहमति पत्र बना ले ताकि आगे चलकर विवाद न हो।
व्यवहारिक उपाय: बिना पेड़ो को काटे कांटो से मुक्ति कैसे पाए ?
1. हाई प्रूनिंग (High Pruning) तकनीक:
पेड़ को जमीन और जड़ से काटने के बजाय उसकी निचली डालियों तक सफाई करें।यानी उसको एकदम ठूठ कर दीजिए।
- तरीका: जमीन से लेकर 7 से 8 फिट तक पेड़ के तने को बिल्कुल साफ कर दीजिए और ठूठ बना दीजिए।ऊपर एक छोटी सी कटीली शाखा को छोड़ दीजिए।
- फायदा: इससे रस्ते से गुजरने वाले लोगों या गाड़ियों को कांटे नहीं चुभेंगे और कृषि मशीन जैसे हार्वेस्टर खेत के मेड़ तक मुड़ सकते हैं।और नीचे की फसल को भी अच्छी धूप मिल जाएगी।
2. नए पौधों का रसायनिक और जैविक नियंत्रण (Root Treatment):
नए पौधे यानी इन पेड़ो बबूल और कोईत के पेड़ की खूबी होती है कि इनको जड़ से भी सफाई करने पर इनकी जड़ों से दोबारा कई कल्ले निकलते रहते है।ये बिना बीज के भी जड़ों में से ही हुए पौधें उग जाते हैं।अतः इन्हें हमेशा के लिए रोकने का तरीका --
- जैविक तरीका: जब आप छोटे अनचाहे और कंटीले पौधों को जड़ के पास से काटे तो उसकी बची हुई ठूंठ यानी कटे हुए हिस्से पर नमक का घोल और छाछ(मठ्ठा) लेकर डाल दीजिए।इससे वह जड़ अंदर ही अंदर सड़कर खत्म हो जाती है और दुबारा नहीं पनपती है।
- रसायनिक तरीका: कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर कटे हुए तने के हिस्से पर "ग्लाइफोसेट" (Glyphosate) जैसी खर पतवार नाशी दवा का लेप लगाने से जड़े पूरी तरह से खत्म हो जाती है।ध्यान रखें फसलों का नुकसान न हो।
3. कम्यूनिटी क्लिन अप (सामूहिक स्वच्छता):
जब भी सीजन आए यानी रबी और खरीफ की सीजन आने से ठीक पहले गांव के युवाओं और आस पास के किसानों को आपस में मिलकर एक दिन "कांटा सफाई अभियान" चलानी चाहिए।
सूखे कांटों को इकठ्ठा करके फिर सड़क के किनारे जला देनी चाहिए और गड्ढे में डाल देनी चाहिए।ताकि वे टायरों को नुकसान नहीं पहुंचा पाए।
भविष्य का रास्ता: कांटेदार बाड़ के 4 आधुनिक विकल्प
विकल्प 1. लेमनग्रास (Lemon Grass) या खस का बाड़:
- यह क्या है : यह एक औषधीय पौधा है जो मेड़ों पर घने रूप में लगाया जाता है।
- फायदा: इसकी पत्तियां इतनी घनी और तेज धार वाली होती है कि छूटा आवारा मवेशी या नीलगाय इसे पार नहीं कर पाते है।साथ ही इसकी तीखी नींबू जैसी खुशबू के कारण जानवर इसके पास नहीं जाते है।
- कमाई: इस घास को काटकर इसका तेल निकाला जाता है जो बाजार में बहुत महंगे दामों पर बिकता है।इसकी पत्तियां की भी होटल रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में अच्छी खासी मांग होती है।इससे किसान कमाई भी कर सकते हैं।
विकल्प 2. करौंदा (Karonda)की झाड़ी:
- यह क्या है: करौंदे में छोटे छोटे कांटे होते है लेकिन यह पेड़ जैसा नहीं होता है बल्कि एक झाड़ी जैसा होता है।
- फायदा: आप जब चाहे इसे मनचाहे रूप और आकार में छांट सकते हो। साथ ही इसकी ऊंचाई को 4 से 5 फीट तक से ऊंचा मत होने दीजिए।
- कमाई: इसके खट्टे मिट्ठे फलों का उपयोग आचार और जेली बनाने में किया जाता है।किसान इससे सीजन में अच्छी कमाई कर लेते हैं।
विकल्प 3. मेंहदी (Heena) की हरी दीवार:
- मेंहदी क्या है: मेंहदी के पौधे को मेड़ों में सटाकर खेतों पर लगा दीजिए।इसके बारे में तो सभी लोग जानते ही हैं।
- फायदा: यह इतनी घनी और मजबूत दीवार बन जाती है कि इसमें आर पार देखना भी मुश्किल हो जाता है। इसमें एक भी कांटा नहीं होता है।
- कमाई: इसके पत्तों को तोड़कर पीसकर मेंहदी लगाया जाता है और इसे मेंहदी उद्योगों को बेचकर कमाई की जा सकती है।
विकल्प 4. नीम,सहजन और अर्जुन से भी कमाई:
- यह क्या है: यह बड़े पेड़ है खासकर नीम और अर्जुन।सहजन को खेतों के मेड़ों पर और नीम एवं अर्जुन को सड़क के किनारे आदि जगहों पर लगाया जा सकता है।
- फायदा: सड़क पर छांव अच्छी मिलेगी और गांवों में लोगों को दातुन भी मिल जाएंगे।साथ ही सहजन की सब्जी भी मिल जाएगी।
- कमाई: नीम के बीजों से आप कमाई कर सकते है और अर्जुन की छाल का आयुर्वेदिक दवाई उद्योग में उपयोग होता हैं।सहजन की सब्जी से लेकर इसके पत्तों का पावडर बनता हैं जो बहुत महंगा बिकता है।इससे किसान कमाई कर सकते हैं।
विकल्प 5. सोलर फेंसिंग या झटका मशीन:
- सोलर फेंसिंग: यदि किसान पशुओं से खेत को बचाने के लिए पौधे लगाना चाहते है तो उससे बढ़िया उपाय है यदि पैसा खर्च कर सकें तो और वह हैं सोलर फेंसिंग।
- कैसे काम करता है: यह दिनभर धूप से चार्ज होने वाली बैटरियों से जुड़ा होता है और उसमें से धीरे धीरे करेंट छोड़ा जाता है।जब इसे आवारा पशु या नीलगाय छूती है तो उनको करेंट लगता है और वह दुबारा उस खेत पर नहीं आती है।
विशेषज्ञों की राय और शोध क्या कहते हैं?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1:क्या खेत की मेड़ों पर बबूल जैसे कांटेदार पेड़ लगाने से फसलों को नुकसान होता हैं? ▼
प्रश्न 2: क्या मैं अपने खेत की मेड़ पर लगे सरकारी पेड़ को खुद काट सकता हूं ? ▼
प्रश्न 3: कोइत या बबूल के कांटों से ट्रैक्टर के टायर को पंचर होने से कैसे बचाए ? ▼
प्रश्न 4:खेत की मेड़ के लिए कौन से पेड़ बेहतर माने जाते हैं? ▼
प्रश्न 5:एग्रोफोरेस्ट्री क्या होता है? ▼
प्रश्न 6:किसानों और सरकार के बीच बेहतर समाधान क्या हो सकता है? ▼
प्रश्न 7:सरकार इन पेड़ो को लगाती क्यों है ? ▼
प्रश्न 8:कांटेदार पेड़ से किसानों के समय के बचाव के लिए सबसे उचित और स्थाई समाधान क्या है? ▼
- 1. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR): वेबसाइट:https://icar.gov.in।
- 2. ICAR: Central Agroforestry Research Institute(CAFRI)झांसी, वेबसाइट:https://cafri.icar.gov.in।
- 3. भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE): वेबसाइट:https://icfre.gov.in।
- 4. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय,भारत सरकार। वेबसाइट:https://agriwelfare.gov.in।
- 5. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY): वेबसाइट:https://rkvy.nic.in।
- 6. राष्ट्रीय एग्रोफॉरेस्ट्री नीति (National Agroforestry Policy) नीति दस्तावेज। वेबसाइट:https://agricoop.gov.in।

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