👉क्यों आज हर दूसरा व्यक्ति Gut Problems से परेशान है?
आपने अक्सर सुना होगा — 👉 “सभी बीमारियों की जड़ पेट से शुरू होती है।”
Gut Health Problems आधुनिक विज्ञान भी अब इस बात को मान चुका है कि हमारी 70% से ज्यादा इम्युनिटी आंतों में रहती है।
किसके लिए उपयोगी: किसान,ग्रामीण भारत,ग्रामीण बच्चे,अन्य लोग
मुख्य लाभ:
✔ 👉 हमारी आंतों में लगभग 100 ट्रिलियन बैक्टीरिया रहते हैं जिन्हें Gut Microbiome कहा जाता है।
✔ 👉 जब ये बैक्टीरिया संतुलित रहते हैं → शरीर स्वस्थ रहता है
✔ 👉 जब संतुलन बिगड़ता है → बीमारी शुरू होती है
✔ 👉 इसीलिए Gut को कहा जाता है:
Second Brain (दूसरा दिमाग)
✔ Gut Health क्या होती है✔ Gut खराब होने के 7 संकेत,✔ खराब Gut के कारण,✔ प्राकृतिक उपचार,✔ डाइट प्लान
महत्वपूर्ण क्यों आंतों की सेहत सुधारने के प्राकृतिक उपाय👇
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| गांवों में पेट की समस्या गलत खान पान और जीवनशैली के कारण बढ़ती जा रही है |
📑 इस लेख में क्या है?
प्रस्तावना (Introduction)
आज के वर्तमान समय में पेट की समस्याएं (Gut Issue) एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बन चुकी है। गैस,कब्ज,एसिडिटी,थकान,स्किन प्रॉब्लम और कमजोर इम्यूनिटी ---ये सब पेट खराब होने से जुड़ी समस्या हो सकती है।
क्या आप जाने है कि एक हाल ही में हुए एक सर्वे (TumGard 2026) के अनुसार,भारत के लगभग 82% लोग एसिडिटी से परेशान है ? चौंकाने वाली बात यह है कि ये समस्या अब शहरों से ज्यादा गांवों में पैर पसार रही है।
अक्सर आपने ये सुना होगा --
👉"सभी बीमारियों की जड़ पेट से शुरू होती है"
आधुनिक विज्ञान भी इस बात को मान चुका है कि हमारी 70% से ज्यादा इम्यूनिटी आंतों में रहती है। क्योंकि हमारी आंतों में लगभग 1,000 ट्रिलियन बैक्टीरियां रहते है,जिनको Gut Microbiome कहा जाता है। जब ये बैक्टीरियां संतुलित रहते है,तब हमारा शरीर स्वास्थ्य रहता है। और जब इनमें संतुलन बिगड़ता है,तब हमारा शरीर बीमारियों के चंगुल में फंस जाता है।
इसीलिए Gut (पेट) को "Second Brain" (दूसरा दिमाग) भी कहा जाता है।
समस्या तब होती है जब लोगों को पता ही नहीं होता की उनका Gut Health खराब हो चुका है। लेकिन वे इस समस्या के चलते परेशान रहते है। और ये समस्या आजकल सबसे अधिक ग्रामीण भारत में ज्यादा ही असर कर गया है। क्योंकि कई सर्वे और डाक्टर एवं अस्पतालों की रिपोर्ट से ये बात साबित हो रही है कि गांवों में पेट की समस्या बढ़ती जा रही है।
मैंने ये सवाल 'बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय' के आयुर्वेद विभाग के डॉ श्री राजेश जैन,सर से पूछा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जिसकी पहचान 'शुद्ध हवा' और 'ताजी खान-पान' रही है वहां ये समस्या क्यों ज्यादा फैल गई है।
उन्होंने बताया की इसके कई कारण है,लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारण रहन सहन और खान-पान में आए बदलाव मुख्य है।
उनका कहना था कि "पहले लोग शाम को प्रतिदिन --भुंजा,मोटा अनाज का भुंजा,सत्तू (सत्तू में दूध,देशी गाय का घी और गुड़ डालकर बनाया गया लड्डू) को नास्ता के रूप में खाते थे,लेकिन अभी के समय में इसका स्थान --समोसा,चाउमीन,बर्गर,मैगी और पास्ता आदि ने ले लिया है" जो पेट के सेहत के लिए बिल्कुल ही ठीक नहीं होता है।
अतः इस लेख में हम आज पूरी जानकारी प्राप्त करेंगे--की Gut Health क्या होती है,इसके खराब होने के क्या संकेत है,आँकड़े और रिसर्च क्या कहते है और इसको सही करने के क्या उपाय हो सकते है। पूरी जानकारी के लिए मैं डॉ जैन सर का हमेशा आभारी रहूँगा।
➢Gut Health क्या होती है ?
Gut Health का मतलब होता है आपकी और हमारी पाचन प्रणाली (Digestive System) और उसमें मौजूद बैक्टीरियां का संतुलन। हमारी पाचन प्रणाली में शामिल है -
- पेट
- बड़ी आंत
- छोटी आंत
- लीवर
- पैंक्रियाज यानि अग्न्याशय
अगर ये सभी अंग सही से काम करते है और Gut Bacteria संतुलित रहते है तब,खाना सही से पचता है,पोषक तत्व सही से अवशोषित होते है,इम्यूनिटी सही से मजबूत होती है और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।
क्या कहते है रिसर्च और आंकड़े
चूंकि गांवों में लोग ज्यादा पेट से संबंधित बीमारियों से परेशान होने लगे है। इसलिए इससे संबंधित कई रिसर्च और सर्वे हुए है जिनके आँकड़े हमारे लिए जानना अति महत्वपूर्ण हो जाते है।
1. TumGard India Gut Health Report 2026:
यह सबसे ताजा रिपोर्ट है जो मई-2026 में जारी किया गया है। इसका रिपोर्ट भारत में करीब 20,000 से अधिक लोगों पर सर्वेक्षण करने के बाद जारी किया गया है।
- आंकड़ा: इसके अनुसार भारत के करीब 82% लोगों में एसिडिटी जलन और करीब 62% लोगों में H. Pylori इन्फेक्शन से पीड़ित है।
- निष्कर्ष: यह रिपोर्ट बताती है कि लोगों को लगता है कि उन्हे सिर्फ गैस की समस्या है,जबकि वास्तव में यह गंभीर इन्फेक्शन हो सकता है।
2. ICMR-NIN (National Institute of Nutrition) 2025-26:
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के तहत 'राष्ट्रीय पोषण संस्थान' ने 2025-26 में "Dietary Guidelines for Indians" और पोषण सर्वेक्षण को जारी किया है।
- आंकड़ा: ग्रामीण और शहरी बच्चों में पेट दर्द और दस्त के तुलनात्मक आंकड़े जो शहरों में 19% बच्चों के मुकाबले 4% ज्यादा,यानि गांवों के बच्चों में यह 23% है।
- निष्कर्ष: ग्रामीण इलाकों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) का बढ़ता हुआ स्तर बच्चों से लेकर बड़ों तक में पोषण संबंधी विकारों का मुख्य कारण बन रहा है।
3. NFHS-6 (National family Health Survey) 2023-25:
यह भारत सरकार का सबसे बड़ा स्वास्थ्य सर्वेक्षण है। इसकी रिपोर्ट 2025 के अंत और 2026 के शुरुआत में पूरी तरह से जारी हो गया है।
- आंकड़ा: ग्रामीण परिवारों में स्वच्छता,पानी की गुणवत्ता और बीमारी की दर के आंकड़े NFHS-6 से प्रमाणित है।
- निष्कर्ष:यह बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खराब पानी और स्वच्छता के कारण संक्रमण की दर शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक है।
4. अन्य वैज्ञानिक शोध (जैसे BioRxiv और रिसर्च पेपर):
इसके अलावा अन्य शोध एवं रिसर्च पेपर भी कई संस्थानों द्वारा समय समय पर होते रहते है जिनमें BioRxiv का शोध प्रमुख है।
- आंकड़ा:गांवों में 'H. Pylori' का प्रसार 58.5% है।' साथ ही यह डाटा हाल के क्रास-सेक्शनल अध्ययन जैसे -'Southern India Meta-analysis 2025' से लिया गया है।
- निष्कर्ष: इनका निष्कर्ष भी यही बताता है की ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों की तुलना में Gut Health Problems ज्यादा है।
इन स्रोतों से स्पष्ट हो जाता है कि गांवों में बदलता खान-पान और पानी की गुणवत्ता की कमी पेट की समस्याओं का मुख्य कारण बन रहा है।
गांव में पेट की समस्या के छुपे हुए कारण
गांव में पेट की समस्याओं के बढ़ने के पीछे कुछ ऐसे कारण है जिन्हे हमलोग नजरंदाज कर देते है। शोध,सर्वे और विशेषज्ञों के अनुसार गांव में बढ़ती पेट की बीमारियों के मुख्य कारण निम्नलिखित है -
- अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की आसान पहुंच:
- पहले गांवों में नास्ता का मतलब दलिया,गुड़-चना या ताजा फल होता था,लेकिन अब हर गली की दुकान पर मिलने वाले चिप्स,नूडल्स और कोल्ड ड्रिंक्स ने इसका जगह ले लिए है। शोध के अनुसार,ग्रामीण बच्चों में शहरी बच्चों की तुलना में पेट दर्द के मामलें अब 4% अधिक देखी जा रही है।
- खेतों में रसायनों का बढ़ता असर:
- अधिक पैदावार के लिए इस्तेमाल होने वाले पेस्टिसाइड और रासायनिक खाद मिलकर हमारे भोजन की शृंखला (Food Chain) के जरिए हमारे शरीर में पहुंच रहे है। ये रसायन हमारे पेट के 'गुड बैक्टीरियां' को खत्म कर देते है,जिससे पाचन तंत्र बिगड़ जाता है।
- पानी के स्रोतों में प्रदूषण:
- गांवों में हैडपम्प और कुओं का पानी अक्सर कई कारणों से दूषित होता जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक,गांवों में H. Pylori संक्रमण की दर 62% तक पंहुच गई है। जिसका मुख्य कारण असुरक्षित पेयजल और स्वच्छता की कमी होता है।
- दवाइयों का गलत इस्तेमाल:
- ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग मामूली पेट दर्द या गैस होने पर बिना डाक्टर की सलाह के ही 'काउंटर' से एंटीबायोटिक्स या पैनकिलर खा लेते है। ये दवाइयाँ पेट की सुरक्षा परत (Gut Lining) को नुकसान पहुंचाती है।
- तनाव और बदलती जीवनशैली:
- आधुनिकता की दौड़ में अब गांवों में भी शारीरिक श्रम कम हुआ है और मानसिक तनाव बढ़ा है। तनाव का सीधा असर हमारी 'गट हेल्थ' पर पड़ता है,जिससे एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं स्थाई रूप से घर कर लेती है।
➢खेतों पर पॉलिथीन में खाना पहुंचाना:एक छपी हुई बीमारी
पॉलिथीन में गर्म खाना रखना सेहत के लिए एक 'साइलेंट किलर' की तरह होता है। यह हमारे स्वास्थ्य को जो नुकसान पहुचाते है उनके बारे में विभिन्न शोध के माध्यम से निम्न जानकारियाँ निकल कर आती है -
- केमिकल लीचिंग (Chemical Leaching): जब गर्म रोटी,सब्जी या दाल को प्लास्टिक की थैली में रखा जाता है,तो प्लास्टिक में मौजूद Bisphenol A (BPA) और Phthalates जैसे जहरीलें रसायन पिघलकर खाने में मिल जाते है।
- हार्मोनल असंतुलन: शोध बताते है कि ये रसायन शरीर के 'अंतः स्रावी ग्रंथि तंत्र' (Endocrine System) को बिगाड़ देते है,जिससे पुरुषों और महिलाओं दोनों में हार्मोनल संबंधी समस्या बढ़ती जा रही है।
- पेट का कैंसर और अल्सर: प्लास्टिक के सूक्ष्म कण (Microplastic) लगातार पेट में जाने से आंतों की परतों को नुकसान पहुंचता है। 'TumGard India Report 2026' के अनुसार,पेट के गंभीर संक्रमणों और कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग भी एक बड़ा कारण बनकर उभर रहा है।
- बैक्टीरियां का पनपना: धूप में रखी पॉलिथीन की थैलियों के अंदर गर्मी और नमी की वजह से बैक्टीरियां बहुत तेजी से पनपते है,जिससे खेत पर पहुंचते पहुंचते खाना दूषित हो जाता है। इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।
👉बदलाव का सुझाव:
"खेतों पर खाना भेजनें के लिए पॉलिथीन की जगह 'सूती कपड़ा' में लिपटी रोटियों और 'स्टील के टिफिन' का उपयोग करें । यह न केवल हमारे पूर्वजों की स्वास्थ्य परंपरा है,बल्कि यह आपके परिवार को कैंसर जैसी बीमारियों से बचाने के सबसे सरल तरीका भी है"
Gut Health खराब होने के 7 संकेत
अब हम सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर चर्चा करेंगे। आखिर कैसे मालूम होगा की हमारा Gut Health खराब हो चुका है। क्योंकि गांवों में लोग इसके लक्षणों को मामूली समझकर नजरंदाज कर देते है,जो आगे चलकर गंभीर बीमारियों का रूप ले सकता है।
हम यहां मुख्य 7 ऐसे लक्षणों की चर्चा करेंगे,यदि आपके अंदर ये 7 लक्षण दिखे तो समझ जाईए की आपकी Gut मदद मांग रही है -
1.बार-बार पेट फूलना,गैस और एसिडिटी:
यह सबसे पहला और सबसे सामान्य संकेत है,और जिसे हम सबसे ज्यादा नजरंदाज कर देते है। अगर आपको खाना खाने के बाद --पेट फूलना,डकार आना,गैस बनना,छाती में जलन और भारीपन जैसा लगे,और ऐसा लगातार महसूस हो रहा हो तो यह खराब Gut के संकेत है।
- ऐसा क्यों होता है:
- जब Gut Bacteria असंतुलित हो जाते है,तो खाना सही से नहीं पचता है और भोजन आंतों में सड़ने लगती है जिससे बहुत गैस बनने लगता है। यदि रोज गैस बनती है। तो ये नॉर्मल नहीं है।
2. बार-बार कब्ज या दस्त होना:
जब शरीर स्वास्थ्य रहता है और नॉर्मल पाचन होता है,तब दिन में 1-2 बार में पेट साफ हो जाता है। लेकिन यदि लगातार 3-4 दिनों तक कब्जियत या बार-बार दस्त हो या दोनों साथ में भी हो सकता है। तो यह लक्षण है की आपका Gut Imbalance हो गया है।
- कब्ज क्यों होता है:
- जब हमारे Gut सिस्टम में खराब बैक्टीरियां की मात्रा ज्यादा बढ़ जाती है,भोजन और पेट में फाइबर की कमी हो जाती है और हम कम पानी पीते है तब,आंतों की गति धीमी हो जाती है।
- लंबे समय से कब्ज के खतरे: बाबासीर और फिशर जैसे रोगों को जन्म दे सकती है और पेट में टाक्सिक ज्यादा जमा हो जाता है जिससे और भी कई तरह की स्किन प्रॉब्लेम्स हो सकती है।
3. बिना कारण थकान और कमजोरी:
आपने ध्यान दिया होगा कि कभी-कभी हमारी नींद भी अच्छी होती है,खाना भी ठीक होता है और फिर भी हमें हमेशा थकान जैसा महसूस होते रहता है। यह हमारे Gut Health से जुड़ी समस्या है।
हमारे शरीर की 70% से ज्यादा ऊर्जा हमारे ही भोजन के पाचन में खर्च होती है। अगर Gut खराब है तो ये हमारे भोजन को ठीक से पाचन एवं पोषक तत्वों का अवशोषण ही नहीं कर पाता है। जिससे हमे थकान जैसा लगता है।
- कारण:
- आयरन अवशोषित नहीं होता है ठीक से हमारे शरीर मे,विटामिन B12 का भी अवशोषण नहीं होता है और मैग्नेशियम ऐब्सॉर्ब नहीं हो पाता है जिससे लगातार थकान,कमजोरी और एनर्जी की कमी हो जाती है।
4. बार-बार बीमार पड़ना (कमजोर इम्यूनिटी):
क्या आपको बार-बार सर्दी,खांसी,एलर्जी और इन्फेक्शन होते रहता है और बार बार बुखार आते रहता है,तो इसका करण केवल मौसम ही नहीं बल्कि आपका खराब Gut भी हो सकता है।
- आपके Gut में आपकी 70% इम्यूनिटी होती है और इसके खराब होने पर शरीर की रक्षा शक्ति कमजोर हो जाती है जिससे बैक्टीरियां एवं वायरस का जल्दी हमला हो जाता है। और आप बार-बार बीमार होने लगते है।
5. स्किन प्रॉब्लेम्स:
स्किन और पेट का बहुत गहरा संबंध होता है और इसे --Gut-Skin Connection कहते है। यदि आपको मुहांसा,एग्जीमा,एलर्जी,खुजली और त्वचा पर लाल चकत्ते होते रहते है तो ये आसान लक्षण है की आपका Gut Health खराब हो चुका है।
- कारण:
- जब Gut खराब होता है तब,शरीर में विषैले पदार्थ,टाक्सिक आदि बढ़ने लगते है। और ये टाक्सिक त्वचा के माध्यम से बाहर निकलने का प्रयास करते है। इसीलिए कहा जाता है कि --Healthy Gut = healthy Skin।
6. अचानक वजन बढ़ना या घटना:
आपने देखा और गौर किया होगा की कुछ लोग बहुत कम खाते है फिर भी मोंटे होते है और कुछ लोग ज्यादा खाते है फिर भी दुबले ही रहते है,ये Gut Effect ही है।
- कैसे और क्यों:
- ये Gut Bacteria ही तय करते है कि शरीर कैलोरी का उपयोग कैसे करेगा और शरीर में फैट कैसे जमा होगा। खराब Gut होने से मोटापा,या वजन घटना और शुगर जैसी समस्याएं हो सकती है।
7. मूड स्विंग,तनाव या डिप्रेशन:
पेट और दिमाग का भी सीधा संबंध होता है। और पेट को दूसरा दिमाग भी कहा जाता है। आपको ये जानकार आश्चर्य होगा कि ---90% Serotonin (Happy Hormone) हमारे पेट (Gut) में ही बनते है।
😃Gut खराब ===Mood खराब।
- लक्षण:
- यदि आपको चिंता,तनाव,चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन महसूस होता है और बार-बार महसूस होता है,तो आप अपना Gut Health को जरूर जांच करवाए।
अतः आज के बाद इन लक्षणों और संकेतों को मामूली मत समझने की भूल कीजिएगा,बल्कि जरूर किसी विशेषज्ञ या डाक्टर से सलाह लीजिएगा और इसके तात्कालिक उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक उपायों पर भी जरूर ध्यान दीजिएगा।
Gut Health सुधारने के 10 प्राकृतिक उपाय
अब हम बात करेंगे Gut हेल्थ को सुधारने के प्राकृतिक उपायों के बारे में। गांवों की पारंपरिक जीवनशैली में ही पेट को स्वास्थ्य रखने के बेहतरीन राज छुपे हुए है,जिन्हे हम धीरे-धीरे भूलते जा रहे है और उसका दुष्परिणाम खराब Gut हेल्थ,खराब स्वास्थ्य और पैसों की बर्बादी।
हमारे प्राचीन ऋषि मुनि में महत्वपूर्ण 'महर्षि वाग्भट्ट' जिन्होंने कई पुस्तके लिखी जिनमें "अष्टांगहृदयम" प्रमुख है,उनका कहना था की मनुष्य के होनेवाले रोगों और बीमारियों में से 90% को अपने खान-पान रहन सहन और घर पर घरेलू इलाज से ही दूर किया जा सकता है।
ये उपाय परंपरा से हमारे पूर्वजों के माध्यम से चली आ रही थी जिसे वर्तमान में हमने नजरंदाज करना शुरू कर दिया है,जिसका नतीजा गांवों में भी पेट से संबंधित बीमारिया बढ़ती जा रही है।
हम उन्ही में से 10 प्रमुख उपायों की चर्चा करेंगे जो आपके 'Gut Health' को मजबूत और स्वास्थ्य बना देगा -
1. Probiotic food जमकर खाएं:
प्रोबायोटिक फूड्स ऐसे खाद्य पदार्थ होते है,जिनमें जीवित सूक्ष्मजीव (Live Microorganism) पाए जाते है,और यह पाचन तंत्र को स्वास्थ्य रखने एवं इम्यूनिटी को मजबूत रखने में मदद करते है। इन्हे 'फ़्रेंडली बैक्टीरिया' भी कहा जाता है जो आंतों में 'हानिकारक बैक्टीरियां' से लड़ते है और हमे सुरक्षित एवं स्वास्थ्य बनाते है।
अतः अपने आहार में -
- दही
- छाछ
- कांजी
- आचार
- इडली
- ढोकला
को जरूर शामिल करे। और इस आहार को उसी समय लीजिए यानी रिप्लेस कर दीजिए जब आप पिज्जा,बर्गर,चाउमीन,पास्ता एवं कोल्डड्रिंक आदि लेते है।
2. Prebiotic Food को भोजन में शामिल करें:
ये अच्छे बैक्टीरियां का भोजन होता है। दूसरे तरह से समझा जाय तो,प्री-बायोटिक फूड्स विशेषकर ऐसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ होते है जिसको हमारा शरीर नहीं पचा पाता है,लेकिन ये हमारे शरीर में मौजूद अच्छे बैक्टीरियां का भोजन बनकर उनके विकास को बढ़ावा देते है।
अतः ये भोजन और अच्छे बैक्टीरियां हमारे आंतों के स्वास्थ्य को सुधारने,पाचन को दुरुस्त करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में हमारी मदद करते है।
अतः अपने भोजन में इन चीजों को शामिल करें --
- सब्जियां: लहसुन,प्याज,शतावरी और कच्चा केला।
- फल: सेव,केला और जामुन।
- अनाज: जई,जौ,मोटा अनाज और सबूत अनाज।
- अन्य: आलसी के बीज,कोको और दलहन।
3. रोज 25 g-30 g फाइबर जरूर ले:
फाइबर युक्त भोजन और भोज्य पदार्थ Gut Health के लिए बहुत महत्वपूर्ण है,क्योंकि यह पाचन को नियमित रखता है,कब्ज को रोकता है और अच्छे बैक्टीरियां को पोषण प्रदान करता है। यह मल् को नरम बनाकर पेट को साफ रखता है,पेट फूलने को कम करता है और वजन घटाने में मदद करता है।
साथ ही यह हृदय रोग और मधुमेह के जोखिम को कम करता है। इसके लिए अपने भोजन में इन पदार्थों का सेवन जरूर करें -
- मोटा अनाज (Millets): इसे 'श्रीअन्न' के नाम से भी जाना जाता है। आप गेहूं के बजाय बाजरा,ज्वार,रागी जैसे मोटा अनाज को भोजन में शामिल करें। मौसम के हिसाब से खाएं मोटा अनाज को जरूर पढे।
- फल: आप छिलके सहित सेव खाएं और जामुन एवं नाशपाती भी बहुत कारगर है।
- सब्जियां: पत्तेदार सब्जियां,गाजर,साग और ब्रोकली।
- अन्य: चिया सीड्स,आलसी के बीज,बीन्स और दाल अपने भोजन में शामिल करे।
4. चीनी कम करें:
जब Gut Health खराब होता है तब मीठा खाने का मन बहुत करता है। मीठा और शुगर हमारे शरीर में खराब बैक्टीरियां का भोजन होता है और जब इनकी संख्या हमारे शरीर में बढ़ती है तो ये और भी मीठा मांगने लगते है। जिससे हमारा Gut और भी खराब होने लगता है।
- क्या होता है: शरीर में अच्छे बैक्टीरियां कमजोर होने लगते है और खराब बैक्टीरियां मजबूत बनने लगते है। नतीजा हमारा पाचन सिस्टम और आंत भी कमजोर होने लगता है और हम बीमार पड़ जाते है।
5. पानी ज्यादा पियें:
पानी ज्यादा पीना चाहिए और प्रतिदिन कम से कम तो 3 लीटर जरूर पीनी चाहिए। साथ ही पानी पीने से ज्यादा पानी पीने के तरीकों को भी बदलना चाहिए और हमारे परंपरागत रूप से चली आ रही परंपरा के अनुसार ही पानी पीनी चाहिए।
- तांबा और मिट्टी के बर्तन का पानी: यह हानिकारक बैक्टीरियां को खत्म करने में मदद करता है और फ्रीज का पानी हानिकारक बैक्टीरियां को मजबूत करता है। अतः फ्रीज के पानी को बिल्कुल न पिए।
- उबला हुआ या फिल्टर का पानी: यदि आपका पानी दूषित हो तब तो बिल्कुल ही उबला हुआ और पानी को छानकर जरूर पियें।
6. तनाव कम करें:
जैसा कि हम देख चुके है कि पेट और मन का सीधा संबंध होता है और 'पेट शरीर का दूसरा दिमाग' के रूप में जाना जाता है। जब भी हम तनाव में होते है तब हमारा पेट खराब हो जाता है,आंत ठीक से काम नहीं कर पाती है और कब्जियत बढ़ जाती है।
- करे योगाभ्यास: प्रतिदिन शारीरिक योगाभ्यास,योगासन और प्राणायाम करनी चाहिए।
- टहलना: सुबह शाम को टहलना अनिवार्य कर देना चाहिए। प्रतिदिन कम से कम 10,000 कदम पैदल टहलने का अभ्यास करना चाहिए।
7. प्लास्टिक को कहे 'ना':
हमलोग अभी अभी ऊपर में प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को देख चुके है। अतः खेतों पर खाना ले जाने के लिए स्टील का टिफिन और सूती कपड़ा का प्रयोग करे।
- प्लास्टिक पैक खाद्य पदार्थ: जितने भी प्लास्टिक के रैपर और थैलियों में पैक खाद्य पदार्थ है --जैसे चिप्स,कुरकुरे,नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थ भी,उन्हे कम से कम उपयोग में लाए और उन सभी खाद्य पदार्थों को घर पर ही बनाए।
- प्रोसेस्ड फूड बंद करे: ये हमारे Gut Health के लिए बहुत खराब और हानिकारक होते है। एक तो पॉलिथीन का दुष्प्रभाव दूसरा इसमे कई रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है जिसको लगातार प्रयोग करने से अच्छे अच्छे लोगों का Gut Health खराब हो जाता है।
8. पर्याप्त नींद ले:
डिजिटल जमाना है,मोबाइल है,डाटा फ्री है,5G है---अब क्या चाहिए आपको रात भर जगाने के लिए या देर से जगाने के लिए--लेकिन ये आपके Gut Health को आराम भी नहीं करने देता है एवं मानसिक परेशानियों को बढ़ाता है। क्योंकि नींद कम होने से मानसिक दुष्प्रभाव तो होगा ही,और आपके Gut को डबल नुकसान करेगा।
अतः पर्याप्त नींद बहुत जरूरी है,और यह समय पर होनी चाहिए। असमय नींद भी बहुत ही नुकसान करती है।
9. एंटी-बायोटिक का सीमित उपयोग:
छोटी-मोटी समस्याओं के लिए तुरंत दवाइयाँ न खाया करे। डाक्टर के सलाह के बिना लिया गया दवा शरीर के अच्छे बैक्टीरियां को मार देती है।
- साइड इफेक्ट: दवाओं के साइड इफेक्ट के बारें में आपको जानकारी नहीं होती है। अतः अपने से दवा न ले।
- प्राकृतिक और आयुर्वेदिक दवा: आप एंटी-बायोटिक का तुरंत प्रयोग न करे इसके बदले प्राकृतिक और आयुर्वेदिक दवा का इस्तेमाल करे। जब बहुत जरूरी हो जाय तब डाक्टर को दिखाकर एंटी-बायोटिक दवा लिया करे।
10 हर्बल पेय पिए:
आप कोल्ड ड्रिंक के बदले में 'हर्बल पेय पदार्थ' का प्रयोग करे। इससे आपका मूड भी अच्छा रहेगा और स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।
- जीरा पानी
- नींबू पानी
- हर्बल चाय
- आम का पन्ना
- सत्तू का घोल
ये तुरंत और असरदार रूप से आपके Gut Health को ठीक भी करती है और मजबूत भी करती है।
➢आप बताइए
"इनमें से कौन सा तरीका आपके घर में आज भी अपनाया जाता है ?"
Gut Health सुधारने वाला डाइट प्लान
Gut Health के खराब होने से घबराने की भी कोई बात नहीं है,इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। ऊपर बताए गए जीवनशैली के साथ ही साथ यदि आप अपना 'डाइट प्लान' को सेट कर लेंगे तो ये काम और भी हो जाएगा आसान।
इस डाइट प्लान से मुझे बहुत राहत मिली है। और डॉ जैन साहब का प्रयास इसके लिए सराहनीय है। ये डाइट प्लान आपके Gut Health को कभी बिगड़ने भी नहीं देगा।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस डाइट प्लान को गांवों की जीवनशैली और आसानी से उपलब्ध होने वाली चीजों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है --
1. सुबह की शुरुआत (सुबह 6-7 बजे):
- रात भर तांबे के जग में रखा हुआ गुनगुना पानी पिए। यह आंतों की सफाई में मदद करता है।
- यदि संभव हो,तो 5 भीगे हुए बादाम और 1 चम्मच मेथी दाना जो रात में ही भिंगोकर रखा हुआ होता है।
- बाजरा या रागी की रबड़ी या दलिया जो फाइबर का बेहतरीन स्रोत है।
- घर का बना हुआ ताजा पोहा या उपमा जिसमें हरी सब्जियां भरपूर मात्रा में हो।
3. दोपहर का भोजन (दोपहर 1-2 बजे):
- सबसे महत्वपूर्ण: खाने के साथ 1 ग्लास ताजा छाछ जिसमें भुना हुआ जीरा और काला नमक डाला गया हो।
- चना,गेहू या जौ की रोटी या मिक्स अट्टा की रोटी।
- मौसमी हरी सब्जी और एक कटोरी दाल।
- सब्जी बनाने के लिए 'रिफाइन' की जगह 'शुद्ध सरसों' के तेल का प्रयोग करे।
4. शाम का नास्ता (4.30-5.30 बजे):
- भुने हुए चना या मखाना या मोटा अनाज भुना हुआ।
- मौसमी फल। फल को हमेशा चबाकर खाए,उसका जूस न पिए।
5. रात का भोजन (7-8 बजे):
- रात का खाना हल्का रखे और सूर्यास्त के बाद खा ले।
- खिचड़ी या दलिया सबसे अच्छा विकल्प है।
- रोटी भी खा सकते है।
- रात में दही या भारी भोजन जैसे राजमा,छोला आदि से बचे।
➢इस डाइट प्लान के 3 सुनहरें नियम:
- पानी का गैप: खाना खाने से 30 मिनट पहले और खाना खाने के 45 मिनट बाद तक पानी न पिए।
- अच्छी तरह चबाए: आयुर्वेद के अनुसार "खाने को पिए और पानी को खाए' यानि खाना को इतना चबाकर खाए की वह मुह में ही पानी बन जाए।
- प्लास्टिक मुक्त: खेत पर खाना ले जाते वक्त स्टील का टिफिन और सूती कपड़ा का प्रयोग करे और प्लास्टिक को 'ना' कर दे।
➢विशेष निर्देश यदि संभव हो:
- बर्तन का चुनाव: खाना पकाने के लिए मिट्टी की हांडी या लोहे की कड़ाही और बर्तनों का प्रयोग करे। आप 'नॉन स्टिक बर्तनों' का प्रयोग न करे क्योंकि उसमें PAFS (फॉरएवर केमिकल्स) होते है जो स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा नुकसान पहुचाते है।
यदि इस प्रकार से हम अपने पूर्वजों के बताए हुए परंपरागत रूप से भोजन और रहन सहन को अपनाते है तो Gut Health और इससे जुड़ी समस्याओं से हमेशा मुक्त रहेंगे। ये विचार केवल मेरा नहीं, बल्कि डाक्टर और विशेषज्ञ ऐसा कह रहे है।
आप नीचे दिए गए चेकलिस्ट को प्रिंट करके इसके अनुसार अपनी दिनचर्या को अपना कर अपने Gut Health को मजबूत बना सकते है।
निष्कर्ष (Conclusion)
इस प्रकार से Gut Health सिर्फ पाचन तक ही सीमित नहीं है,बल्कि यह पूरे शरीर की नींव है। जहां आज के दौर में गांवों का बदलता स्वरूप अपने साथ कई चुनौतियों को साथ लेकर आया हुआ है।
राहत की बात यह है कि इसका समाधान किसी महंगी दवाई में नहीं,बल्कि हमारे अपने ग्रामीण संस्कारों और प्राकृतिक जीवनशैली में ही छुपा हुआ है। अगर हम फिर से पारंपरिक मोंटे अनाज,मिट्टी और लोहे और तांबे के बर्तनों आदि को अपना ले तो इन बीमारियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
आपकी क्या राय है ? क्या आपने भी अपने आस-पास पेट की इन समस्याओं को देखा है ? यदि हां तो कमेन्ट करके जरूर बताएं और यदि ये जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने व्हाट्सअप ग्रुप में जरूर शेयर करें।
💪स्वास्थ्य गांव ! समृद्ध किसान !!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1:क्या मिट्टी के घड़े का पानी सच में सेहत के लिए फायदेमंद है? ▼
उत्तर: हां! मिट्टी के घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से क्षारीय होता है,जो शरीर के PH को संतुलित रखता है और एसिडिटी को कम रखने में मदद करता है।
प्रश्न 2: पॉलिथीन में खाना रखने से कौन सी गंभीर बीमारी हो सकती है? ▼
उत्तर: गर्म खाना जब पॉलिथीन के संपर्क में आता है,तब BPA जैसे जहरीलें रसायन खाना में मिल जाते है,जिससे हार्मोनल असंतुलन और लंबे समय में पेट के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
प्रश्न 3:H. pylori इन्फेक्शन के मुख्य लक्षण क्या है? ▼
उत्तर: पेट में बार-बार जलन होना,भूख न लगना,अचानक वजन कम होना,और पेट फूलना इसके मुख्य लक्षण है। गांवों में प्रदूषित पानी इसका सबसे बड़ा मुख्य कारण है।
प्रश्न 4:क्या घर की बनी छाछ को रोज पिया जा सकता है? ▼
उत्तर:हां!बिल्कुल छाछ एक बेहतरीन प्रोबायोटिक है जो पेट के गुड बैक्टीरियां को बढ़ाती है,दोपहर के भोजन के साथ लेना इसको पाचन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
प्रश्न 5:क्या बाजार के पैकेट बंद चिप्स-बिस्कुट बच्चों के पेट को नुकसान पहुंचाते है? ▼
उत्तर:हाँ! इनमें मौजूद प्रीजरवेटिव्स एवं अधिक नमक बच्चों की आंत की परत को नुकसान पहुचा देते है,जिससे गांवों के बच्चों के पेट दर्द के मामले शहरों से अधिक देखे जा रहे है।
प्रश्न 6: बिना दवाई के गैस और कब्ज को कैसे ठीक करें? ▼
उत्तर: अपने आहार में फाइबर युक्त मोंटे अनाज को शामिल करें,खाना को 32 बार चबाकर खाए,और सूर्यास्त के आसपास हल्का भोजन करे।
प्रश्न 7:Gut Health सुधरने में कितना समय लेता है? ▼
उत्तर:लगभग 2-3 महीनों में असर दिखने लगता है और इन उपायों को अपनाया जाय एवं अपने जीवन पद्धति में शामिल किया जाय तो आगे ये खराब नहीं होगी।
प्रश्न 8:क्या उपवास Gut के लिए अच्छा होता है? ▼
उत्तर: हां!उपवास से इसमें बहुत लाभ पहुंचता है।
प्रश्न 9:क्या चाय Gut Health को खराब करती है? ▼
उत्तर:हां!चाय Gut Health को बहुत ज्यादा मात्रा में खराब करती है और यह पेट में खराब बैक्टीरियां को पोषण प्रदान करती है।
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Bahut hi upyogi or saral bate hai jo daily life me apne swasth ko achha or behatar banati hai
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