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| मानसिक स्वास्थ्य उपचार मे फेमिली थेरपी (Family Therapy)भारत मे |
आज के डिजिटल और तेजी से बदलते समाज मे मानसिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। तनाव,अवसाद,चिंता और अकेलापन जैसी समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय मे मानसिक स्वास्थ्य देखभाल केवल अस्पताल और डाक्टरों तक सीमित नहीं रहती।
- परिवार प्रणाली सिद्धांत(Family System Theory): इसमे परिवार को एक ऐसे सामाजिक तंत्र के रूप मे देखा जाता है जिसमे सदस्यों के व्यवहार और भावनाएं एक-दूसरे पर परस्पर निर्भर होती है। व्यक्ति के लक्षण या समस्याए परिवार स्तर पर चल रही प्रक्रियाओ के परिणामस्वरूप विकसित होती है।
- चक्रीय कारणता(Circular Causality): इसमे कोई घटना जैसे - परिवार मे बढ़ी हुई संघर्ष, ऐसी प्रतिक्रियाए उत्पन्न करती है जो वापस उसी मूल कारण को और मजबूत कर देती है।
- अत्यधिक घुलना मिलना(Enmeshment): ये स्थिति तब आती है जब आपसी सीमाये अत्यंत ढीली हो जाती है। इसमे परिवार के साथ भावनात्मक लगाव इतना बढ़ जाता है की व्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पहचान प्रभावित होने लगती है।
- अलगाव(Disengagement): ये स्थिति तब आती है जब परिवार मे आपसी सीमाये अत्यंत कठोर हो जाती है। इससे परिवार के सदस्य एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से दूर हो जाते है।
- व्यक्त भावनाएं(Expressed Emotions-EE): इसका आशय, उन आलोचनात्मक,शत्रुतापूर्ण या अत्यधिक हस्तक्षेपकारी व्यवहारों से है, जो परिवार के सदस्य किसी रोगी के प्रति व्यक्त करते है।
- पुनरावृति(Relapse): जिस परिवार मे EE का स्तर ज्यादा होता है वहां मानसिक स्वास्थ्य होने के बाद ठीक होकर गए मरीजों मे भी इसकी पुनरावृति हो जाती है।
3.1 संरचनात्मक पारिवारिक चिकित्सा (Structural Family Therapy -SFT)
- इसका विकास 'साल्वाडोर मिनुचिन' ने किया जिसके अनुसार परिवार के संरचना मे मौजूद 'अव्यवस्थित संगठन' कई समस्याओ का कारण बन सकता है।
- इसमे चिकित्सक द्वारा परिवार के भीतर मौजूद 'अन्तः क्रिया पैटर्न,गठबंधन और सीमाओ' को देख कर परिवार के संरचना का आकलन करता है फिर विश्लेषण के बाद अंतः कारण मे परिवर्तन विशेष तकनीक के माध्यम से करता है।
- इसमे परिवार की संरचना का मैपिंग, और सक्रिय भागीदारी द्वारा पारिवारिक भूमिकाओं का पुनर्गठन की तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
3.2 रणनीतिक पारिवारिक चिकित्सा (Strategic Family Therapy)
- इस दृष्टिकोण का विकास 'जय हेली' द्वारा किया गया जिनपर 'एरिक एरिक्सन' के विचारों का भी प्रभाव था। यह एक "समस्या समाधान आधारित और निर्देशात्मक शैली" पर आधारित मॉडल है।
- इसमे चिकित्सक जानबूझकर कुछ कार्य या कभी-कभी विरोधाभासी हस्तक्षेप निर्धारित करता है ताकि परिवार के भीतर मौजूद अस्वस्थ व्यावहारिक पैटर्न को तोड़ा जा सके।
- भारत मे इस मॉडल को कम और संतुलित रूप मे ही इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि इसमे अत्यधिक कठोर निर्देशात्मक हस्तक्षेप परिवारों द्वारा स्वीकार्य नहीं होते है।
3.3 बोवेनियन (परिवार प्रणाली) चिकित्सा (Bowenian Family System Therapy)
- मरे बोवेन द्वरा विकसित यह मॉडल परिवार के भावनात्मक तंत्र के भीतर "व्यक्ति की अलग पहचान और आत्म विभेदीकरण" पर केंद्रित है।
- इसके अनुसार यदि व्यक्ति भावनात्मक रूप से 'अत्यधिक जुड़ाव' से मुक्त नहीं हो पाता, तो चिंता और प्रक्रियात्मक व्यवहार पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है।
- इसमे "बहु-पीढ़ी-संचरण प्रक्रिया" और "परिवरिक प्रक्षेपण प्रक्रिया" के माध्यम से परिवार के एक व्यक्ति के जीनोग्राम का अध्ययन करके समस्या को पहचाना जाता है। फिर उस समस्या को वही रोक कर आगे की पीढ़ी मे प्रवाहित होने से अवरुद्ध कर दिया जाता है।
3.4 अनुभवात्मक और मानवतावादी पारिवारिक चिकित्सा (Experiential and Humanistic Family Therapy)
- इस दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व 'वर्जीनिया सतीर' और कार्ल व्हिटेकर जैसे विचारकों ने किया।इसमे भावनात्मक अभिव्यक्ति,रचनात्मकता और परिवार के प्रत्येक सदस्य की व्यक्तिगत वृद्धि पर विशेष जोर दिया जाता है।
- इसमे परिवार के भीतर रचनात्मक और कभी कभी अराजक अभिव्यक्ति के माध्यम से पुराने और जड़ हो चुके पैटर्न को समाप्त किया जाता है।
- परिवार के सदस्यों की भावनाओ की मान्यता देना और आत्म सम्मान को बढ़ाने पर फोकस किया जाता है।
3.5 संज्ञानात्मक-व्यावहारिक पारिवारिक चिकित्सा (Cognitive-Behavioural family Therapy)
- इसमे अवचेतन प्रक्रियाओ पर ध्यान देने के बजाय उन गलत मान्यताओ,संचार शैलियों और व्यवहारों को लक्ष्य बनाया जाता है जो समस्या को बनाए रखते है।
- इसके लिए इसमे संरचित मनोशिक्षा, व्यवहारिक अनुबंध और कौशल विकास जैसे-संचार प्रशिक्षण और समस्या-समाधान कौशल का प्रयोग किया जाता है।
- बच्चों मे चिंता से जुड़े परिवरिक हस्तक्षेप मे माता-पिता और अभिभावक को सीखने के लिए इस विधि का प्रयोग ज्यादा किया जाता है।
3.6 फेमली फोकस्ड थेरपी (Family-Focused Therapy -FFT)
- इसका विकास मुख्य रूप से 'बाइपोलर डिसऑर्डर' के उपचार के लिए किया गया था। इसमे मनोशिक्षा और कौशल विकास को एक साथ जोड़ा जाता है।
- यह उपचार 9 महीनों मे 21 सत्रों मे पूरा किया जाता है जिनमे तीन प्रमुख चरण है -1. मनोशिक्षा 2. संचार कौशल मे सुधार और 3. सहयोगात्मक समस्या समाधान।
- इस मॉडल मे पुनरावृति की रोकथाम पर विशेष जोर दिया जाता है। साथ ही मूड मे होने वाले शुरुआती परिवर्तनों को पहचान कर उसे दूर किया जाता है।
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| मानसिक रोग निदान मे परिवार की भूमिका और मानसिक परिवार शिक्षा |
4. मुख्य मानसिक विकार मे फेमिली थेरपी का प्रयोग
विभिन्न शोधों के उपरांत ये साबित हो गया है की फेमली थेरपी के द्वारा पारिवारिक हस्तक्षेप कई बीमारियों मे विशेष प्रभावी है।विशेष रूप से जब उनकी तुलना सामान्य उपचार से किया जाता है तब इसके परिणाम बहुत आश्चर्य जनक रूप से बढ़िया काम करते है।
4.1 सीजोफ्रेनिया और मनोविकृति विकार (Schizophrenia and Psychotic Disorders)
- इसमे पारिवारिक हस्तक्षेपों से रोग की पुनरावृति नहीं हो पाती है। इस रोग मे मरीज वास्तविकता से कट जाता है। इस थेरपी के कारण मरीज को दुबारा अस्पताल मे नहीं जाना पड़ता है।
- इससे प्रभावित मरीज को घर का तनावपूर्ण माहौल जहर के समान होता है। थेरपी परिवार को सिखाती है की मरीज की आलोचना कम करे और उसे सहारा दे।
- परिवार के लोग नियमित दवा देते है जिससे मरीज का इलाज निरंतर चलता रहता है।साथ ही परिवार को सिखाया जाता है की यह एक रोग है कोई जादू-टोना नहीं है।
- यदि मरीज हिंसक हो जाए तो परिवार को उसे हैंडील करना सिखाया जाता है।
4.2 अवसाद और चिंता (Depression and Anxiety)
- इसमे परिवार का काम 'भावनात्मक जुड़ाव' और 'सक्रियता' बढ़ाना है। परिवार को सिखाया जाता है की मरीज के साथ बहस न करे और उसे अकेला न छोड़े।
- परिवार के सदस्य मरीज को छोटी-छोटी गतिविधियों मे शामिल करने के लिए धीरे-धीरे प्रोत्साहित करते है।
- परिवार को सिखाया जाता है की आपस मे दोषारोपण करने के बजाय अपनी भावनाओ को सही तरीके से कैसे व्यक्त करे।
- परिवार को सिखाया जाता है की किसी न किसी रूप मे हमेशा मरीज के साथ इंगेज रहे और उसे फिर से अवसाद मे न जाने दे।
4.3 बाइपोलर विकार और मनोदशा अस्थिरता (Bipolar Disorder and Mood Instability)
- इसमे परिवार को मूड अस्थिरता के दौरान बीमारी को समझने,दोषारोपण को कम करने और संभावित ट्रिगर को मिलकर प्रबंधित करना सिखाया जाता है।
- उपचार मे पारिवारिक हस्तक्षेप का प्रयोग मुख्य रूप से "व्यक्त भावनाओ" को कम करने के लिए किया जाता है।
- परिवार मे आपसी सामंजस्य और सहयोग की भावना को विकसित किया जाता है क्योंकि इस रोग का भी कारण और निदान दोनों मे परिवार का होता है योगदान।
4.4 बाल एवं किशोर विकार (Child and Adolescent Disorders)
- बाल और किशोर मानसिक स्वास्थ्य उपचार मे परिवार की केन्द्रीय भूमिका होती है। साथ ही किशोर मानसिक स्वास्थ्य उपचार मे परिवार के साथ साथ साथियों का समूह,स्कूल और पड़ोस के वातावरण की भी भूमिका होती है।
- इसमें परिवार के साथ सहयोग और विश्वास स्थापित करना,समस्याग्रस्त व्यवहारों को बदले के लिए पारिवारिक रणनीतियां विकसित करना और वास्तविक जीवन स्थितियों मे सीखे गए कौशल को लागू करने के लिए पारिवारिक सहयोग लिया जाता है।
- परिवारों को बच्चों का व्यवहार प्रबंधन सिखाया जाता है जिसके माध्यम से उपचार और रिकवरी जल्दी होता है।
4.5 मादक द्रव्य उपयोग विकार (Substance Use Disorders)
- किशोर मे नशे से संबंधित विकारों के उपचार मे परिवरिक चिकित्सा का प्रभाव बहुत मजबूत पाया गया है। परिवार के शामिल करने से उपचार मे निरन्तरता बनी रहती है।
- विभिन्न शोधों से ये पता चलता है की पारिवारिक चिकित्सा ने किशोर के नशे के उपयोग को व्यक्तिगत उपचार की तुलना मे लगभग 40% ज्यादा अच्छा प्रभावी रहा है।
- इसमे माता-पिता की निगरानी और समर्थन मे वृद्धि किया जाता है,और परिवार मे मौजूद संघर्षों को दूर किया जाता है जिसके चलते बच्चे नशे की ओर चले जाते है।
- इसमे बहु परिवार तकनीक का भी प्रयोग किया जाता है जिसमे किशोर के साथियों के परिवारों को भी शामिल किया जाता है।
4.6 भोजन विकार (Eating Disorders)
- इसमें FBT- फैमिली बेस ट्रीटमेंट को अपनाया जाता है जिसमे मुख्य रूप से माता-पिता को शामिल किया जाता है।
- परिवार और माता पिता को बच्चों के पोषण और वजन पुनर्स्थापना की जिम्मेदारी दी जाती है। जिसका सही और गुणात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।
5. भारत मे पारिवारिक चिकित्सा (Family Therapy)की स्थिति
भारतीय समाज मे पारिवारिक संरचना पारंपरिक रूप से संयुक्त या विस्तारित परिवारों पर आधारित रही है। यह संरचना स्वभाविक रूप से 'संबंधों और पारस्परिक निर्भरता' पर आधारित होती है जो पारिवारिक चिकित्सा (Family Therapy) के सिद्धांतों के साथ अच्छी तरह मेल खाती है।
भारतीय परिवारों मे -
- निर्णय अक्सर सामूहिक रूप से लिए जाते है।
- परिवार के वरिष्ठ सदस्य विवादों को सुलझाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
- सामाजिक और भावनात्मक समस्याओ का समाधान सामूहिक रूप से लिया जाता है।
- व्यवस्थित विवाह (Arrange Marriage)
- जाती संबंधी संघर्ष (Caste Conflicts)
- पीढ़ियों के बीच मूल्यगत अंतर (Generation Gap)
अक्सर पूछे जानेवाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1. फैमिली थेरपी क्या होती है?
उत्तर: फैमिली थेरपी मानसिक स्वास्थ्य उपचार की एक ऐसी पद्धति है जिसमे रोगी के साथ-साथ उसके परिवार के सदस्यों को भी उपचार प्रक्रिया मे शामिल किया जाता है ताकि रिश्तों और संचार को बेहतर बनाया जा सके।
प्रश्न 2. क्या परिवार मानसिक रोगों के इलाज मे मदद कर सकता है?
उत्तर: हां,शोध से पता चलता है की परिवार का सहयोग मानसिक रोगों के उपचार मे और पुनर्वास मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 3. भारत मे फेमली थेरपी क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: भारत मे परिवार भावनात्मक और सामाजिक समर्थन का मुख्य स्रोत होता है इसलिए मानसिक स्वास्थ्य उपचार मे परिवार की भागीदारी अत्यंत प्रभावी हो सकती है।
प्रश्न 4. मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्यकर्ता क्या करते है?
उत्तर: मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्यकर्ता रोगी और उसके परिवार की सामाजिक परिस्थितिओ का आकलन करते है,मनोशिक्षा प्रदान करते है और पुनर्वास योजनाओ का समन्वय करते है।
प्रश्न 5. क्या अनलाइन फेमिली थेरपी संभव है?
उत्तर: हां डिजिटल प्लाटफ़ार्म के माध्यम से अनलाइन फेमिली थेरपी संभव है और इससे दूर रहने वाले परिवार के सदस्य भी उपचार मे शामिल हो सकते है।
प्रश्न 6. क्या नशे का शिकार किशोरों का भी फेमिली थेरपी मे इलाज होता है?
उत्तर: हां नशे के शिकार किशोरों के इलाज और नशा छुड़ाने एवं पुनर्वासन मे फेमिली थेरपी सबसे कारगर साबित हो रहा है जो व्यक्तिगत इलाज के तुलना मे 40% ज्यादा रिकवरी प्रदान करता है।



Insightful
जवाब देंहटाएंबहुत धन्यवाद ! सादर आभार
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