📌 संक्षेप में (Quick Summary)
- फर्टिगेशन = पानी + खाद।
- ✔ आधुनिक खेती की स्मार्ट तकनीक।
- इस सिस्टम से ✔ पानी की बचत✔ उत्पादन में वृद्धि ✔ मजदूरी कम✔ खाद की बचत।
- 🇮🇳 भारत में फर्टिगेशन का भविष्य:भारत में पानी की कमी बढ़ रही है। फर्टिगेशन भविष्य की खेती है। क्योंकि: पानी बचाता है उत्पादन बढ़ाता है स्मार्ट खेती को बढ़ावा देता है सरकार भी माइक्रो-इरिगेशन को बढ़ावा दे रही है।
📑 Table of Contents
- ➤ प्रस्तावना:कृषि और तकनीक का नया संगम
- ➤ 🌱 फर्टिगेशन क्या है? (What is Fertigation)
- ➤ 📌 फर्टिगेशन क्यों जरूरी है?
- ➤ 🌿फर्टिगेशन के लिए उपयुक्त उर्वरक
- ➤ 🧑🌾 किन फसलों में फर्टिगेशन सबसे उपयोगी?
- ➤ 💰 फर्टिगेशन सिस्टम की लागत
- ➤ 🇮🇳 भारत में फर्टिगेशन का भविष्य
- ➤ निष्कर्ष
- ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
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| फर्टिगेशन सिस्टम में सिंचाई के साथ उर्वरक का उपयोग |
🟢प्रस्तावना (Introduction)
वर्तमान समय में कृषि की कई आधुनिक विधियां मौजूद है जिनको अपना कर कृषि को बेहतर और लाभदायक बनाया जा सकता है। लेकिन हमारे किसान भाई इसकी जानकारी से वंचित है। और यदि जानकारी मिल रही है,तो केवल सतही जानकारी मिल रही है।
ऐसे में आज हम फर्टिगेशन सिस्टम की बात करेंगे। जिसके बारे में विस्तृत जानकारी को ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद), नई दिल्ली में PHD कर रही 'निधि कुमारी' से बात और निर्देश पर तैयार किया गया है जो किसान भाइयों के व्यावहारिक उपयोग पर आधारित है।
पहले किसान खेतों में हाथ से खाद डालते थे,और आज भी बहुत सारे किसान हाथ से ही खाद डालते है। लेकिन इससे किसान भाईओं को समय,मेहनत और लागत तीनों ही ज्यादा होता है। साथ ही कई बार पौधों को सही मात्रा में पोषक तत्व भी नहीं मिल पाता है।
इसी समाधान के लिए 'स्मार्ट खेती' (Smart Farming) की इस तकनीक में किसान 'पानी' के साथ ही खाद को भी दे सकते है --और यही तकनीक कहलाती है "फर्टिगेशन" (Fertigation)।
अब हम विस्तार से जानेंगे की फर्टिगेशन क्या है,कैसे काम करता है,इसके फायदे-नुकसान क्या है और किसान इसे कैसे शुरू कर सकते है।
🌱 फर्टिगेशन क्या है? (What is Fertigation)
फर्टिगेशन (Fertigation) आधुनिक कृषि की ऐसी तकनीक है जिसमें सिंचाई की पानी के साथ घुलनशील उर्वरक सीधे पौधों की जड़ों तक पहुचाएं जाते है। इससे फसल को सही समय पर,सही मात्रा में पोषण मिलता है। आज के समय में फर्टिगेशन को खेती का सबसे स्मार्ट और वैज्ञानिक तरीका माना जाता है।
यह तकनीक खास तौर पर -
- ड्रिप सिंचाई और
- स्प्रिंकलर सिंचाई
में उपयोग की जाती है और इसमें ये बेहद सफल भी है।
📌 फर्टिगेशन क्यों जरूरी है?
फर्टिगेशन आज के समय की एक तकनीकी जरूरत है। और इसे केवल विकल्प के तौर पर ही नहीं अपनाना चाहिए,बल्कि अपनी खेती को अधिक से अधिक लाभदायक बनाने के लिए एक आवश्यक कदम के रूप में अपनाना चाहिए।
इस नीचे दिए गए बिंदुओं के माध्यम से किसान भाई बेहतर तरीकें से समझ पाएंगे कि फर्टिगेशन क्यों जरूरी है -
- पोषक तत्वों की दक्षता के लिए (Nutrient Efficiency): पारंपरिक तरीकें से हाथ से खाद या उर्वरक को खेत में डालने से उसका केवल 30-50% हिस्सा ही पौधों को मिल पाता है। ऐसा कृषि विशेषज्ञ कहते है। बाकी खाद मिट्टी की गहराई में चली जाती है या वाष्प बनकर उड़ जाती है। लेकिन फर्टिगेशन तकनीक में खाद सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचती है जिससे 90% तक खाद की उपयोग दक्षता हो जाती है।
- पानी और उर्वरक का सटीक मेल: पौधे भोजन तभी ग्रहण करते है जब वह तरल रूप में होता है। फर्टिगेशन में हम खाद को जब पानी में घोलकर देते है तब पौधे उसे तुरंत सोखना शुरू कर देते है। यह "सटीक खेती" (Precision Framing) का आधार है।
- श्रम और लागत में कमी: इसमें खाद डालने के लिए मजदूरों की जरूरत खत्म हो जाती है जिससे मजदूरी की बचत होती है। और साथ में कम खाद में ही अधिक पैदावार मिलती है जिससे खेती की लागत कम हो जाती है।
- मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा: ज्यादा खाद छिड़कने से मिट्टी की ऊपरी परत सख्त हो जाती है और उसका PH संतुलन बिगड़ जाता है। जबकि फर्टिगेशन में केवल जरूरत के अनुसार ही खाद डाला जाता है जिसका नतीजा मिट्टी का अच्छा स्वास्थ्य बना रहता है और उसमें खारापन भी नहीं होता है।
- असमान जमीन के लिए बढ़िया: अगर आपका खेत एक बराबर और समतल नहीं है,तो ये आपके लिए बेस्ट है। ऊबड़-खाबड़ जमीन एवं खेतों में फर्टिगेशन से पौधों को सही और जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिल जाते है।
- खर-पतवार पर नियंत्रण: जब हम हाथ से पूरे खेत में खाद डालते है तो ये फसलों के साथ साथ पूरे खेत के खर-पतवारों को भी पोषण प्रदान करती है। फर्टिगेशन में अनचाहे खर पतवारों को पोषण नहीं मिल पाता है और खेत में खर पतवार ज्यादा नहीं उग पाते है,जिससे किसानों को फायदा होता है।
👉अतः फर्टिगेशन केवल खाद देना नहीं है,बल्कि पौधों को 'चम्मच से खाना खिलाने (Spoon Feeding) जैसी तकनीक है,जिसमें अनचाहे घास-फूस को पोषण नहीं मिलता है जिसकी उन्हे जरूरत है।
⚙️ फर्टिगेशन सिस्टम कैसे काम करता है?
फर्टिगेशन सिस्टम का काम करने का तरीका बहुत ही वैज्ञानिक और व्यवस्थित है। यह तकनीक मुख्य रूप से सिंचाई की पाइपलाइन और खाद के टैक के बीच एक "प्रेशर डिफरेन्स" (Pressure Difference) यानि दबाव के अंतर पर काम करती है।
फर्टिगेशन सिस्टम के मुख्य भाग (Components):
इसके काम करने की प्रक्रिया को जानने से पहले इसके हिस्सों को जानना जरूरी है -
- फर्टिलाइजर टैंक/वेंचुरी: जहां खाद का घोल रखा जाता है।
- इंजेक्शन उपकरण: जो खाद को मुख्य पानी की पाइपलाइन में खिचता है।
- कंट्रोल वाल्व: खाद की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए।
- फ़िल्टर: यह,सबसे जरूरी है,जो खाद के कचरे को ड्रिप लाइन में जाने से रोकता है।
इसके साथ आपके पास पानी के स्रोत जैसे ट्यूबवेल आदि होनी चाहिए जो अक्सर सभी किसानों के पास होती ही है।
➢यह कैसे काम करता है (Step-by-Step-Process):
1. घोल तैयार करना (Stock Solution):
सबसे पहले पानी में पूरी तरह घुलनशील खाद को एक अलग टैक में घोलकर उसका एक 'स्टॉक सोल्यूशंस' बनाया जाता है। इसमें ध्यान रखना होता है की घोल में कोई ठोस कड़ न रहने पाए। नहीं तो ये बार-बार फँसने लगता है जिससे परेशानी होती है।
2. प्रेशर के जरिए इंजेक्शन:
अब खाद को पानी की पाइपलाइन में डालने के लिए तीन मुख्य तरीकें इस्तेमाल किये जाते है -
- वेंचुरी सिस्टम: यह सबसे लोकप्रिय है। जब पानी एक संकरी नाली से तेज गति से गुजरता है तो वहां 'वैक्यूम' पैदा होता है। यह वैक्यूम अपने आप खाद के घोल को टैक से खींचकर मुख्य पाइपलाइन में मिला देता है।
- फर्टिलाइजर टैंक: इसमें पाइपलाइन के पानी का एक छोटा हिस्सा टैंक के अंदर भेजा जाता है जो खाद को घोलकर मुख्य पाइप में ले आता है।
- पंप इंजेक्शन: बड़े खेतों में बिजली से चलने वाले छोटे पंपों का इस्तेमाल खाद को सीधे पाइपलाइन में 'इन्जेक्ट' करने के लिए किया जाता है।
3. मिक्सिंग और डिस्ट्रब्यूशन:
जैसे ही मुख्य पाइपलाइन में खाद पहुँचती है,वह सिंचाई के पानी के साथ पूरी तरह से मिल जाती है। अब यह पोषक तत्वों वाला पानी खेतों की ओर बढ़ता है।
4. फिल्ट्रेशन (सफाई):
खेत में जाने से पहले यह मिश्रण एक 'डिस्क या स्क्रीन फ़िल्टर' से गुजरता है। यदि खाद का कोई कड़ पूरी तरह से नहीं घुला हुआ होता है तो फ़िल्टर उसे वही पर रोक लेता है ताकि ड्रिप की बारीक नलिया छिद्र जाम न हो।
5. सटीक डिलीवरी:
अंत में,ड्रिप के माध्यम से यह घोल बूंद बूंद करके सीधे पौधों की जड़ों के पास गिरता है। चूंकि जड़े हमेशा गीली रहती है,इसलिए वे तुरंत इन पोषक तत्वों को सोख लेती है।
फर्टिगेशन का चक्र:
एक आदर्श फर्टिगेशन चक्र को तीन भागों में बांटा जाता है -
- पहले चरण में: केवल साफ पानी को चलाए ताकि जड़े गीली हो जाय।
- दूसरे चरण में: फर्टिगेशन शुरू करें खाद और पोषक वाले पानी से।
- तीसरे चरण में: फिर से केवल पानी चलाए ताकि पाइपलाइन में बची खाद पूरी तरह से बाहर निकल जाए और जंग या जमाव न हो पाए।
🌿 फर्टिगेशन के लिए उपयुक्त उर्वरक
फर्टिगेशन के लिए हर तरह की खाद का उपयोग नहीं किया जाता है। इसके लिए विशेष रूप से "वाटर सॉल्युवल फर्टिलाइजर्स" (WSF) यानि पानी में पूरी तरह से घुलनशील उर्वरक का इस्तेमाल किया जाता है। ताकि पाइपलाइन और अन्य नालियों में जाम न हो पाए।
फर्टिगेशन के लिए उपयुक्त उर्वरक इस प्रकार से है -
1. मुख्य पोषक तत्व:
ये उर्वरक अलग-अलग अनुपात में आते है,जिन्हे फसल की अवस्था के अनुसार चुना जाता है। यदि कोई अनुभवी किसान आपके आसपास होंगे तो वो बता देंगे की कब किस फसल को कौन सा उर्वरक देना सही रहेगा। और हम भी समय समय पर आपको अपडेट करते रहेंगे।इन पोषक तत्वों में शामिल है -
- NPK 19:19:19 - यह "स्टार्टर" ग्रेड है। इसे फसल के शुरुआती विकास के समय दिया जाता है।
- NPK 12:61:0 (MAP): इसमे फास्फोरस ज्यादा होता है,जो जड़ों के विकास और फूलों की संख्या बढ़ाने में बेहतरीन काम करता है।
- NPK 0:52:34 (MKP): फल बनते समय और कंद (Tubers) के विकास के लिए इसका उपयोग किया जाता है। इसमें नाइट्रोजन नहीं होता है।
- NPK 13:0:45 (Potassium Nitrate): यह फलों की चमक,स्वाद और वजन बढ़ाने में मदद करता है।
- NPK 0:0:50 (Potassium Sulphate): यह उन फलों के लिए जरूरी होता है जिन्हे सल्फर की जरूरत होती है।
2. द्वितीय पोषक तत्व:
इसमें मुख्य रूप से शामिल है -
- कैल्शियम नाइट्रेट (Calcium Nitrate): फलों को फटने से बचाने और और उनकी सेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
- मैग्नीशियम सल्फेट: पत्तियों में क्लोरोफिल बढ़ाने और उन्हे हरियाली प्रदान करने के लिए।
3. सूक्ष्म पोषक तत्व:
पौधों को लोहा (Iron),जिंक (zinc) और बोरान एवं मैगनीज की बड़ी मात्रा में आवश्यकता पड़ती है। फर्टिगेशन के लिए "चिलेटेड" (Chelated) सूक्ष्म पोषक तत्व सबसे अच्छे होते है। क्योंकि ये पानी में आसानी से घुल जाते है और मिट्टी में लॉक नहीं होते है।
तीन जरूरी बातें -
- पूर्ण घुलनशीलता: उर्वरक ऐसा होना चाहिए जो पानी में 100% घुल जाए और नीचे कोई कचरा या अवशेष न छोड़े।
- संगतता: कुच्छ खादें आपस में मिलकर "थक्का" या अवक्षेप बना लेती है। अतः कैल्शियम नाइट्रेट और सल्फेट वाली खाद को काभी एक साथ नहीं मिलानी चाहिए,क्योंकि इससे जिप्सम बन जाती है जो पाइप को जाम कर देती है।
- शुद्धता और PH: फर्टिगेशन वाले उर्वरक में नमक (Salt) की मात्रा कम होनी चाहिए ताकि वे ड्रिप सिस्टम को नुकसान न पहुचाएं और मिट्टी का PH को न बिगाड़े।
🧑🌾 किन फसलों में फर्टिगेशन सबसे उपयोगी?
फर्टिगेशन तकनीक वैसे तो सभी फसलों के लिए अच्छी है,लेकिन कुछ खास फसल ऐसी है जिनमें इसका उपयोग करने से पैदावार में 30-50% तक का बढ़ोतरी देखा गया है। विशेषकर उन फसलों में जिनमे दूरी ज्यादा होती है और ड्रिप सिस्टम आसानी से लगाया जा सकता है।
फर्टिगेशन के लिए सबसे उपयोगी और सफल फसलें इस प्रकार से है -
1. बागवानी फसलें (Fruit Crop):
फलों के पेड़ों में दूरी और जड़े एक निश्चित स्थान पर होती है,इसलिए फर्टिगेशन यहां सटीक काम करता है।
- केला और पपीता
- अंगूर और अनार
- नींबू वर्गीय फल
- आम और अमरूद
फर्टिगेशन से फलों की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी होती है।
2. सब्जियां (Vegetables):
सब्जियों में फर्टिगेशन का असर बहुत जल्दी दिखाई देने लगता है।
- टमाटर,मिर्च और शिमला मिर्च
- खीरा और ककड़ी
- गोभी और ब्रोकली
- आलू
इसके उपयोग से आलू का साइज एक समान रहता है और खीरे एवं ककड़ी का लंबाई बढ़िया होता है।
3. नगदी फसलें:
नगदी फसलों में भी ये सिस्टम बढ़िया और आसानी से उपयोग किया जाता है।
- गन्ना
- कपास
- तंबाकू
4. फूलों की खेती:
फूलों की खेती में भी इसके जबरदस्त प्रभाव है। खासकर पोलीहाउस या ग्रीनहाउस में फूलों की व्यावसायिक खेती बिना फर्टिगेशन के संभव ही नहीं है,क्योंकि यहां मिट्टी की मात्रा सीमित होती है। साथ ही पोषक तत्वों की सटीक जरूरत होती है जो इस सिस्टम से ही संभव होता है।
5. मोंटे अनाज और मसालें:
- मक्का
- अदरक और हल्दी
कम दूरी वाली फसलों जैसे गेहूं और धान में फर्टिगेशन का उपयोग कम होता है,क्योंकि इसके लिए ड्रिप सिस्टम लगाना काफी महंगा और असुविधाजनक होता है। हालांकि "सब-सरफेश-ड्रिप-ट्रायल" तकनीक जिसमें मिट्टी के नीचे पाइप होता है का इन फसलों पर ट्रायल सफल होता दिख रहा है जो आने वाले दिनों में उपयोग में आ सकते है।
💰 फर्टिगेशन सिस्टम की लागत
फर्टिगेशन सिस्टम की लागत इस बात पर निर्भर करती है कि आप कौन सी तकनीक का चुनाव करते है और आपके खेत का क्षेत्रफल कितना है। चूंकि फर्टिगेशन ड्रिप सिस्टम का ही एक भाग है इसलिए इसकी लागत को दो भागों में समझा जा सकता है।
1. तकनीक के आधार पर लागत:
- वेंचुरी सिस्टम (Venturi सिस्टम): यह सबसे सस्ता और लोकप्रिय विकल्प है।
- अनुमानित लागत 1500 से 5000 रुपये तक।
- छोटे और माध्यम खेतों के लिए सबसे उपयुक्त।
- फर्टिलाइजर टैंक (Fertilizer Tank): यह लोहे या प्लास्टिक का बना होता है और प्रेशर के आधार पर काम करता है।
- अनुमानित लागत 8000 से 20000 तक।
- जहां खाद की मात्रा ज्यादा देनी होती है वहा ये सबसे उपयुक्त है।
- औटोमेटिक फर्टिगेशन मशीन: यह कंप्युटर और सेंसर द्वार नियंत्रित होता है।
- अनुमानित लागत 50,000 से 2,00,000 या उससे अधिक हो सकता है।
- बड़े फार्म और पोलीहाउस खेती के लिए।
2. कुल सेटअप लागत (प्रति एकड़ अनुमान):
अगर आप पूरे ड्रिप सिस्टम के साथ फर्टिगेशन यूनिट लगवाते है,तो औसत खर्च इस प्रकार से निकल कर आता है -
- सब्जियों और बागवानी के लिए: 50,000 से 80,000 प्रति एकड़।
- फलों और बागों के लिए: 35,000 से 50,000 प्रति एकड़।
नोट: इसमें पम्पसेट और पाइपलाइन का खर्चा अलग से होता है।
3. सरकारी सब्सिडी:
भारत सरकार के "प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना" के तहत 'हर खेत को पानी' और 'More Drop Per Crop' के उदेश्य से भारी सब्सिडी प्रदान की जाती है। सब्सिडी पाने की पूरी प्रक्रिया आप कम पानी मे बंपर पैदावार:किसान भाई ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर कैसे पाए 90% तक सब्सिडी लेख को पढ़कर आसानी से कर सकते है।
इस योजना के तहत -
- छोटे और सीमांत किसानों को 80-90% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है।
- अन्य किसानों के लिए 40-50% तक सब्सिडी की व्यवस्था है।
- सब्सिडी के बाद किसान को केवल 10,000 से 20,000 रुपये तक ही खर्च करने पड़ते है। हालांकि राज्यवार अलग अलग नियम होता है।
4. लागत की भरपाई:
भले ही शुरुआत में यह महंगा लगे लेकिन इसकी लागत की भरपाई बहुत जल्दी हो जाती है -
- खाद की बचत: यह सिस्टम हर साल 30-40% खाद की बचत कराता है।
- मजदूरी की बचत: खाद डालने का लेबर खर्च शून्य हो जाता है।
- ज्यादा पैदावार: फसल ज्यादा और बेहतर गुणवता वाले पैदा होते है जिसका मूल्य ज्यादा मिलता है।
🇮🇳 भारत में फर्टिगेशन का भविष्य
भारत में फर्टिगेशन न केवल आधुनिक तकनीक है,बल्कि 2026 के इस दौर में ही यह भारतीय कृषि का एक अनिवार्य अंग बन चुका है। जल संकट और खाद की बढ़ती कीमतों को देखते हुए,फर्टिगेशन का वर्तमान और भविष्य काफी उज्ज्वल है।
1. वर्तमान में भारत में फर्टिगेशन के उदाहरण:
भारत के कई राज्यों और फसलों में यह तकनीक सफलता से प्रयोग किया जा रहा है-
- महाराष्ट्र के अंगूर और अनार का बाग: नासिक और सांगली के किसान अंगूर की खेती के लिए 100% फर्टिगेशन का उपयोग कर रहे है। यहां आटोमेटिक फर्टिगेशन मशीनें आम हो चुकी है।
- कर्नाटक और तमिलनाडु में केला: कावेरी बेल्ट के किसान केलें की खेती में "साइकिल फर्टिगेशन" जिसमें निश्चित अंतराल के बाद खाद दिया जाता है,का उपयोग करके 40% से अधिक फसल का पैदावार उगा रहे है।
- गुजरात और राजस्थान में कपास: टपक (Drip) सिंचाई के साथ फर्टिगेशन का उपयोग अब कपास के खेतों में भी होने लगा है,जिससे खाद की लागत काफी कम हुई है।
- पॉलीहाउस खेती 'उत्तर भारत': हरियाणा और पंजाब के किसान शिमला मिर्च और खीरे की खेती में सेंसर आधारित फर्टिगेशन का उपयोग कर रहे है,जो सीधे पौधों को जरूरत के अनुसार ही खाद को छोड़ता है।
- एग्री-टेक स्टार्टअप का उदय: Fasal और DeHaat जैसे स्टार्टअप वर्तमान में भारतीय किसानों को "IoT" आधारित फर्टिगेशन सलाहकार प्रदान कर रहे है,जो मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों की जांच कर मोबाईल पर नोटफकैशन भेजते है।
इसके साथ ही हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार नें 'राष्ट्रीय कृषि विकास योजना' के तहत 'सेंसर आधारित आटोमेटिक फर्टिगेशन सिस्टम' को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में स्वीकृति प्रदान की है। जिसका फायदा बहुत से किसान करेंगे और लाभ उठाकर आगे इसका प्रचलन बढ़ेगा।
2. भारत में फर्टिगेशन का भविष्य (Future Trend 2026+):
इस प्रकार से आने वाले वर्षों में फर्टिगेशन निम्नलिखित दिशाओं में आगे बढ़ेगा -
- स्मार्ट और आटोमेटेड फर्टिगेशन (AI & IoT): 2026 के रुझानों के अनुसार अब ऐसे सिस्टम आ रहे है जो मिट्टी के PH और पोषक तत्वों के स्तर को खुद मापेंगे,और जरूरत के अनुसार खाद का घोल तैयार करेंगे। किसान इसे अपने स्मार्टफोन से नियंत्रित करेंगे।
- नैनो-फर्टिलाइजर का एकीकरण: भारत में 'नैनो-यूरिया' की सफलता के बाद,भविष्य में फर्टिगेशन सिस्टम के जरिए नैनो-खाद देना बहुत आसान हो जाएगा।
- ड्रोन-आधारित निगरानी: भविष्य में ड्रोन खेत की निगरानी करेंगे और जीन क्षेत्रों में पोषक तत्वों की कमी दिखेगी,वहां फर्टिगेशन तकनीक के जरिए तुरंत खाद भेजी जाएगी।
- सरकारी नीतियों का समर्थन (PMKSY 2.0): सरकार का लक्ष्य 'More Crop Per Drop' के तहत सूक्ष्म सिंचाई के दायरे को और भी बढ़ाना है। भविष्य में फर्टिगेशन किट की सब्सिडी को और भी सरल बनाया जाएगा।
- कम दूरी वाली फसलों: क्योंकि "सब-सरफेस ड्रिप इरिगेशन"(Z-Drip) जैसी नई तकनीकों के जरिए गेहूं और धान की फसलों में भी फर्टिगेशन का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर शुरू होगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
सच कहा जाय तो,फर्टिगेशन आधुनिक खेती की क्रांति है। इसका फायदा उठाकर किसान खेती में उर्वरक की बचत कर रहे है,समय की बचत कर रहे है और मजदूरी की बचत कर रहे है, जिससे उनका लागत कम हो रहा है। दूरी ओर फसल को पर्याप्त और सही पोषक मिलने से प्रति एकड़ उत्पादन बढ़ रहा है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बढ़ रही है।
फिर भी इसको शुरू करने के लिए निवेश का ज्यादा होना,इसके पोषण उर्वरकों का महंगा होना,तकनीक की जानकारी किसानों को न होना और मशीनों का कभी कभी जल्दी जाम हो जाना, ये सब अवरोध इस सिस्टम में मौजूद है।
यदि इन खामियों को दूर कर दिया जाय तो निश्चित ही ये किसानों के लिए एक वरदान के समान ही है। और आने वाले समय में और भी सुधार की उम्मीद भी है।
कुल मिलाकर आने वाला समय स्मार्ट फ़ार्मिंग और कृषि में तकनीक के उपयोग का ही होनेवाला है। अतः किसान भाई को इसे समय रहते कुछ फसलों के लिए इस सिस्टम को जरूर लगानी चाहिए। सब्सिडी मिलने से ये काम और भी आसान हो जाता है और ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1:क्या फर्टिगेशन से मिट्टी खराब होती है? ▼
उत्तर: नहीं! बल्कि ये मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखता है,क्योंकि इसमें खाद की बहुत ही सटीक मात्रा का उपयोग होता है।
प्रश्न 2: क्या हम ऑर्गैनिक खाद को भी फर्टिगेशन में दे सकते है? ▼
उत्तर: हां! लेकिन वह पूरी तरह से तरल और छनी हुई होनी चाहिए। मार्केट में लिक्विड ऑर्गैनिक खाद भी आ गए है। या आप चाहे तो घर पर भी लिक्विड ऑर्गनीक खाद को बना सकते है।
प्रश्न 3:क्या फर्टिगेशन के लिए सामान्य यूरिया या डीएपी का उपयोग किया जा सकता है? ▼
उत्तर:नहीं, फर्टिगेशन के लिए केवल 100% पानी में घुलनशील उर्वरकों (WSF) का उपयोग करना चाहिए। सामान्य खाद (जैसे दानेदार डीएपी) पानी में पूरी तरह नहीं घुलती और इसमें मौजूद कचरा ड्रिप सिस्टम की नलियों को जाम कर सकता है।
प्रश्न 4:फर्टिगेशन के लिए सबसे अच्छी तकनीक कौन सी है? ▼
उत्तर:मध्यम और छोटे किसानों के लिए 'वेंचुरी सिस्टम' सबसे अच्छा और किफायती है। वहीं, बड़े बागानों या पॉलीहाउस के लिए 'ऑटोमैटिक फर्टिगेशन मशीन' या 'फर्टिलाइजर इंजेक्शन पंप' अधिक प्रभावी होते हैं।
प्रश्न 5:क्या फर्टिगेशन से फसल जल सकती है? ▼
उत्तर:यदि खाद का घोल बहुत ज्यादा गाढ़ा (High Concentration) हो या उसे तेज धूप के समय दिया जाए, तो पौधों की जड़ों या पत्तियों को नुकसान पहुँच सकता है। हमेशा सुबह या शाम के समय और सही अनुपात में ही फर्टिगेशन करना चाहिए।
प्रश्न 6: फर्टिगेशन के बाद पाइपलाइन को कितनी देर तक साफ करना चाहिए? ▼
उत्तर: खाद देने के बाद कम से कम 15 से 20 मिनट तक साफ पानी (Flushing) चलाना अनिवार्य है। इससे पाइपलाइन में बची हुई खाद निकल जाती है और पाइप में काई या जंग नहीं जमती।
प्रश्न 7:किन खादों को एक साथ नहीं मिलाना चाहिए? ▼
उत्तर:कैल्शियम युक्त खादों (जैसे कैल्शियम नाइट्रेट) को कभी भी सल्फेट (जैसे मैग्नीशियम सल्फेट) या फॉस्फेट वाली खादों के साथ नहीं मिलाना चाहिए। ऐसा करने से पाइप के अंदर थक्का बन सकता है जो सिस्टम को चोक कर देगा।
प्रश्न 8:क्या फर्टिगेशन के लिए सरकार सब्सिडी देती है? ▼
उत्तर: हाँ, भारत सरकार की 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) के तहत ड्रिप इरिगेशन और फर्टिगेशन यूनिट पर 40% से लेकर 90% तक की सब्सिडी मिलती है। यह राशि अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकती है।
प्रश्न 9:फर्टिगेशन से खाद की कितनी बचत होती है? ▼
उत्तर: पारंपरिक छिड़काव विधि के मुकाबले फर्टिगेशन से 25% से 50% तक खाद की बचत होती है, क्योंकि खाद सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचती है और हवा या पानी के साथ बर्बाद नहीं होती।
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