थाई एप्पल बेर की वैज्ञानिक खेती कहां करें? जानिए पोषण और कमाई का पूरा गणित

⚡ क्विक समरी (Quick Highlights)
1-MIN READ
🍏 फल का वजन: 50–150 ग्राम
⏱️ प्रथम फलन: 8–10 महीने
📐 रोपण दूरी: 10 × 10 फीट
🌱 पौधे/एकड़: ~400 पौधे
🚜 मेड़ पर खेती: 100% उपयुक्त
💰 शुद्ध लाभ: ₹2–4 लाख/एकड़
📌 संक्षेप में: थाई एप्पल बेर गर्म व शुष्क जलवायु के लिए अत्यंत अनुकूल फसल है। इसमें संतरे से अधिक विटामिन C होता है। इसे खेत के साथ-साथ खाली मेड़ों पर लगाकर पहले ही साल से बंपर आय प्राप्त की जा सकती है।

 


भारत में थाई एप्पल बेर के फल से लदा हुआ बाग और किसान
थाई एप्पल बेर के पेड़ पर फलों का निरीक्षण करता किसान



📑 विषय सूची (Table of Contents)
10 अनुभाग


प्रस्तावना (Introduction) 

Thai Apple Ber यानी थाई एप्पल बेर पिछले कुछ वर्षों में भारतीय किसानों और बागवानी क्षेत्र में चर्चा के केंद्र में आया है। यह आकर में बड़ा और रूप में आकर्षक के साथ गूदा कुरकुरा और पोषक तत्वों से भरपूर होता है।

यह कम पानी में भी और शुष्क एवं अर्ध शुष्क क्षेत्रों में उग सकती है और अच्छा पैदावार कर सकती है। यानी यह बंजर, पथरीली, बलुई, दोमट मिट्टी तथा खेत की खाली रहने वाली मेडो पर भी भरपूर फल देती है।

इसकी खेती परंपरागत रूप से बोई जाने वाली फसलों की तुलना में अधिक आय प्रदान कर सकती है। लेकिन इसके बारे में इंटरनेट पर बढ़ा चढ़ाकर लाखो की इंकम जैसे कई तरह के भ्रामक दावे भी किए जा रहे हैं।

अतः किसान भाइयों के लिए इसकी सही और वैज्ञानिक जानकारी जरूरी हो जाती है। इसी को ध्यान में रखकर इस लेख में यह जानकारी प्रदान किया जा रहा है कि वास्तव में यह क्या है?

इस थाई एप्पल बेर की खेती भारत में कहा हो रही है और कहा हो सकती है। इसकी खेती की वैज्ञानिक विधि और जानकारी एवं इससे मिलने वाले पोषक तत्वों के बारे में जानकारी - यह सभी क्रमबद्ध तरीकों से प्रदान करने का प्रयास है।


थाई एप्पल बेर क्या है? 


थाई एप्पल बेर "रैम्नेसी" (Rhamnaceae) कुल का Ziziphus वंश का एक सदाबहार अर्थात अर्द्ध पतझड़ी संकर फलदार वृक्ष है। इसका वानस्पतिक नाम Ziziphus Mauritiana Lamk है।

यह सेव के प्रजाति का नहीं है बल्कि बेर के प्रजाति का है। लेकिन इसका फल कुछ बड़ा और गूदा कुरकुरा एवं बाहरी आवरण हरे सेव जैसा चिकना और चमकदार होता है।

वर्ष 2026 में Indian Journal of Horticulture में प्रकाशित एक अध्ययन में 'Thai Apple' को Ziziphus Mauritiana के सात बेर किस्मों में शामिल करके इसका परीक्षण किया गया।

सामान्य बेर और थाई एप्पल बेर में क्या अंतर है? 



थाई एप्पल बेर के बड़े हरे और पीले फल पेड़ पर लगे हुए
नजदीक से देखने पर थाई एप्पल बेर का फल


सामान्य बेर की खेती भी लगभग भारत के हरेक क्षेत्रों में होता है। इन देशी बेर के किस्मों में - गोला, उमरान, कैथी और बनारसी प्रमुख है।

लेकिन थाई एप्पल बेर इन सबसे आकर में बड़ा होता है और आकर्षक भी लगता है। वर्ष 2026 के एक वैज्ञानिक अध्ययन में थाई एप्पल बेर के फल का औसत वजन 44.66 ग्राम और एस्कार्बिक एसिड की मात्रा 102.29 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम में पाया गया।

जबकि सामान्य बेर 10-20 ग्राम तक का ही होता है। थाई एप्पल बेर कभी कभी 150 ग्राम तक का भी देखा गया है। इसमें 90% से अधिक खाद्य गूदा होता है और बीज छोटा और चपटा होता है।

एक ओर जहां देशी बेर की शाखाओं में कांटा होता है वही थाई बेर की शाखाओं में कांटा न के बराबर होता है। इसका ग्राफ्टेड यानी कलमी पौधा 8-10 महीनों में फल दे देता है।


थाई एप्पल बेर की मुख्य किस्में कौन सी है? 

थाई एप्पल बेर की कई किस्में होती है लेकिन भारत में इसकी मुख्य रूप से प्रचलित किस्में इस प्रकार से है -


1. ग्रीन थाई एप्पल बेर (Green Thai Apple Ber): 

यह सबसे लोकप्रिय किस्म है। फल का आकार अंडाकार गोल या हल्का अंडाकार होता है और रंग तोता रंग होता है कुरकुरापन अधिक होता है और मिठास हल्का रहता है।


2. रेड या कश्मीरी थाई एप्पल बेर (Red/Kashmiri Apple Ber): 

इस किस्म की बेर के फल पकने के बाद गहरे लाल या सिंदूरी रंग के हो जाते हैं। इसका स्वाद अधिक मीठा होता है और शहरों में प्रीमियम रेट पर बिक्री होता है।

3. थाई जंबो बेर (Thai Jumbo Ber): 

यह भी थाईलैंड की एक विशाल किस्म की बेर है। इसमें फल का वजन कभी कभी 150g से भी अधिक हो जाता है।




पोषक तत्वों का वैज्ञानिक विश्लेषण 


थाई एप्पल बेर केवल स्वाद ही नहीं बल्कि पोषक तत्वों के दृष्टिकोण से भी एक "सुपरफूड" की श्रेणी में आता है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) और विभिन्न खाद्य शोध पत्रिकाओं के अनुसार प्रति 100g ताजे थाई एप्पल बेर में संतरे और सेव से कई गुना ज्यादा विटामिन C पाया जाता है।

इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम (Low GI) होता है। फाइबर और प्राकृतिक फ्रुक्टोज के संतुलन के कारण यह शरीर में ब्लड शुगर को नहीं बढ़ाता है।

इसमें पोटैशियम उच्च मात्रा में होता है जबकि सोडियम बहुत कम मात्रा में होता है इससे यह हृदय रोग और रक्तचाप के लिए उपयोगी हो सकता है।




भारत में थाई एप्पल बेर की कितनी खेती होती है? 


थाई एप्पल बेर के पोषक तत्व, स्वास्थ्य लाभ, उपयोग और भारत में प्रमुख खेती क्षेत्रों को दर्शाता इन्फोग्राफिक
थाई एप्पल बेर फल और इसकी पौष्टिक तत्वों को दर्शाता इन्फोग्राफिक



भारत सरकार के सामान्य बागवानी के आंकड़ों में थाई एप्पल बेर को अलग कटेगरी दर्शाकर खेती का क्षेत्रफल नहीं बताया गया है।

वर्ष 2026 में ही एक साइंटिफिक रिपोर्ट में भारत में बेर की खेती का क्षेत्रफल लगभग 48,990 हेक्टेयर और उत्पादन 5,61,000 टन एवं उत्पादकता 11.46 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है।

यह कुल बेर का अकड़ा है थाई एप्पल बेर का नहीं है।


भारत में थाई एप्पल बेर की खेती के प्रमाण कहां मिलते हैं? 

उपलब्ध शोध और सरकारी केस स्टडी से यह स्पष्ट है कि Thai Apple Ber की खेती या परीक्षण भारत के कई हिस्सों में हो रहा है -


1. बुंदेलखंड, उत्तर प्रदेश: 

Banda University of Agriculture and Technology में 2024-25 के दौरान थाई एप्पल बेर सहित सात प्रकार के बेर के फसलों का अध्ययन किया गया।

इसमें थाई एप्पल बेर ने अधिक मात्रा में फूल के साथ फल और फलों का बड़ा साइज के साथ उनमें एस्कार्बिक एसिड भी दर्ज किया गया। विश्वविद्यालय ने बुंदेलखंड क्षेत्र में थाई एप्पल बेर के व्यवसायिक उत्पादन के लिए बेहतर क्षेत्र बताया।


2. प्रयागराज, उत्तर प्रदेश: 

वर्ष 2022-23 में प्रयागराज की कृषि परिस्थितियों में 7 बेर प्रजातियों का अध्ययन किया गया जिसमें थाई एप्पल बेर भी शामिल था।

परीक्षण में थाई एप्पल बेर पौधों की ऊंचाई, वृद्धि, फूल, फल और उत्पादन में बेहतर पाया गया। अतः इस क्षेत्र को भी थाई एप्पल बेर के उत्पादन के लिए अनुकूल बताया गया।


3. तेलंगाना: 

तेलंगाना के कामारेड्डी जिले की सरकारी MIDH Success Story में एक किसान को 2 एकड़ खेत में थाई एप्पल बेर के उत्पादन का रिकार्ड दर्ज है।

इस रिकॉर्ड के अनुसार किसान ने ड्रिप सिंचाई सिस्टम और ऑर्गेनिक मन्युर खादों के साथ थाई एप्पल बेर को 2 एकड़ में खेती किया जिससे 70 टन बेर का उत्पादन हुआ और ₹9.5 लाख का शुद्ध मुनाफा हुआ।


4. राजस्थान और शुष्क क्षेत्र: 

बेर भारत के लिए मुख्य रूप से शुष्क क्षेत्रों अर्ध शुष्क क्षेत्रों का ही फसल है। इसपर ICAR के अध्ययनों में यह सस्टेनेबल और कम पानी में भी अच्छा फसल प्रदान करने वाला लाभप्रद फसल बताया गया।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि थाई एप्पल बेर का व्यवसायिक खेती भी देश के कई क्षेत्रों में हो रहा है। साथ ही यह कम पानी वाले शुष्क क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है।


थाई एप्पल बेर के लिए जलवायु और मिट्टी कैसी होनी चाहिए? 

थाई एप्पल बेर सामान्यतया गर्म, शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों वाले जलवायु में अच्छी  से उगने वाला पौधा माना जाता है।

ICAR की रिव्यू में भी इसको अर्ध शुष्क क्षेत्रों में उगने वाला उपयोगी पौधा बताया गया है।Tamil Nadu Agriculture University ने भी इसको शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों  लिए उपयुक्त पौधा बताया है।

इसमें प्रतिकूल परिस्थितियों को सहने की क्षमता होती है। यह 7°C से लेकर 46°C तक का तापमान आसानी से सहन कर लेता है। साथ ही 300 मिमी से लेकर 1200 मिमी वर्षा  क्षेत्रों में बिना परेशानी के उग सकता है।

लेकिन इसको प्रतिदिन 6 से 8 घंटे धूप जरूरी होता है। अधिक छायादार जगह पर इसके बेर छोटे हो जाते हैं। अधिक लंबे दिनों तक इसकी जड़ों में पानी नहीं जमा होनी चाहिए।

मिट्टी: बेर मुख्य रूप से फलदार फसल है और यह कई प्रकार की परिस्थितियों में उगाया जा सकता है। यह 6 से 8.5 pH मान वाली मिट्टी में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।

इसके खेत में पानी का भराव 48 घंटे से ज्यादा नहीं होनी चाहिए अन्यथा इसकी जड़े गलनी शुरू हो जाती है।

तमिलनाडु एग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी के अनुसार इसको 7x7 के आकर का गड्ढा बनाकर उसमें लगानी चाहिए।

बिहार और उत्तर प्रदेश के दोमट और बलुई मिट्टी में भी यह अच्छा विकास करता है। साथ ही छोटानागपुर के पठारी हिस्सों की लाल मिट्टी में भी बढ़िया विकास करती है। अतः यह झारखंड के लिए भी वरदान के समान पौधा है।


थाई एप्पल बेर का छटाई क्यों जरूरी होता है? 


थाई एप्पल बेर के बाग में कतारों में लगे पौधे और ड्रिप सिंचाई
उचित दूरी पर क्यारियां और पौधों को लगाया हुआ थाई एप्पल बेर का बाग



थाई एप्पल बेर को 7x7 के आकर के गड्ढों में गोबर की सड़ी हुई खाद, नीम की खली, सिंगल सुपर फास्फेट 250 ग्राम और ट्राइकोडर्मा पाउडर को मिट्टी में मिलाकर भर देनी चाहिए।

पौधों को लगाकर सिंचाई करनी चाहिए। सामान्यतया जुलाई से सितंबर महीने में इसकी रोपाई ठीक रहती है। लेकिन इसको फरवरी मार्च तक में भी लगाया जाता है।

एक बार लगाने के बाद यह 20 सालों तक फल दे सकता है। अतः हमेशा विश्वसनीय जगह या अपने जिला कृषि केंद्र की सलाह से ही पौधों को लेनी चाहिए।

पौधों को लगाने के तुरंत बाद हल्के बांस को गाड़कर सहारा देना चाहिए।
रोपण लेआउट

थाई एप्पल बेर: 7 ft × 7 ft गड्ढा

🌱 पौधा
◀ 10 फीट ▶
🌱 पौधा
▲ 10 ft ▼
खाली जगह (इंटरक्रॉपिंग)
▲ 10 ft ▼
🌱 पौधा
◀ 10 फीट ▶
🌱 पौधा
💡 1 एकड़ में कुल: लगभग 400 पौधे (कतार से कतार: 10 ft | पौधे से पौधा: 10 ft)


थाई एप्पल बेर को छटाई करना बहुत जरूरी होता है। तेलंगाना की सरकारी थाई एप्पल बेर की सक्सेस स्टोरी में भी इसकी नियमित छटाई का उल्लेख किया गया है।

इसके अधिकतर फल नए शाखाओं में लगते हैं। अतः छटाई केने से अधिक नई शाखा बनती है और फल अधिक उगते है।


क्या थाई एप्पल बेर को खेत की मेड़ पर लगाया जा सकता है? 

हां इसको धान और गेहूं आदि खेतों के मेड़ों पर लगाया जा सकता है। इसकी शाखाओं में कांटे नहीं होते हैं और यह ऊंचे टीलों पर भी आसानी से विकास कर लेता है।

मेड़ कम से कम 2 फिट ऊंची और 3 फिट चौड़ी होनी चाहिए। करीब 1 एकड़ की खेत के मेड़ के चारों तरफ 60 से 70 पौधों को लगाया जा सकता है।

यह खेतों के मिट्टी के बहाव को भी रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


थाई एप्पल बेर में उत्पादन कितना हो सकता है? 


वर्ष 2026 के Banda University of Agriculture and Technology के अध्ययन में सबसे अधिक कैथी में प्रति पौधा 58.28kg थाई एप्पल बेर का उत्पादन हुआ था।

वही तेलंगाना की सरकारी सक्सेस स्टोरी में 2 एकड़ में 70 टन उत्पादन का अकड़ा दर्ज है। यानी प्रति एकड़ 35 टन तक।

यह दोनों आकड़े एक सफल किसान के और अधिकतम उत्पादन के है। यह औसत उत्पादन के आंकड़े नहीं है। यह देखा गया है कि थाई एप्पल बेर पहले वर्ष में प्रति पौधा औसत रूप से 20 से 25kg रहता है जबकि दूसरे और तीसरे साल यह बढ़ जाता है।


Thai Apple Ber की खेती से कमाई की कितनी हो सकती है? 


सरकारी किसान सक्सेस केस स्टडी में तेलंगाना के सफल किसान ने 2 एकड़ में सफल खेती किया था -

  • क्षेत्रफल - 2 एकड़
  • उत्पादन - 70 टन
  • बाजार भाव - ₹15,000 प्रति टन
  • खर्च - 1,00,000 प्रति वर्ष 
  • कुल आय ₹10.50 लाख
  • शुद्ध आय - 9.50 लाख

इसी रिपोर्ट में प्रति एकड़ कुल आय ₹5.25 लाख और शुद्ध आय ₹4.75 लाख बताया गया है।


अंतर्वर्ती खेती से भी होती है आय: 

थाई एप्पल बेर की खेती यदि खेत में किया जाता है तो दो पौधों के बीच दूरी अधिक होती है। इनके बीच में हल्दी, अदरक, सुरन और हरा मिर्च आदि जैसी खेती किया जा सकता है और इससे अतिरिक्त आय प्राप्त किया जा सकता है।


क्या थाई एप्पल बेर से ग्रामीण व्यवसाय बनाया जा सकता है? 



किसान थाई एप्पल बेर के फलों की तुड़ाई और ग्रेडिंग करते हुए
थाई एप्पल बेर फल की तुड़ाई  के साथ ग्रेडिंग करते हुए किसान



यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। अक्सर अभी तक थाई एप्पल बेर की खेती और उत्पादन के बाद इसको बड़ी मंडियों में बिक्री से होने वाली आय पर आधारित है।

अब यदि इसको ग्रामीण व्यवसाय के रूप में संभावना के रूप में देखना है तो सबसे पहले यह मालूम करना होगा कि इसके क्या क्या उत्पाद बनाए जा सकते हैं।

उपलब्ध रिपोर्ट और विवरणों के अनुसार इससे निम्नलिखित प्रकार के उत्पाद बनाए जा सकते हैं -

  • फ्रेश थाई एप्पल बेर पैक्ड
  • थाई एप्पल बेर कैंडी 
  • थाई एप्पल बेर जैम और जेली
  • थाई एप्पल बेर पल्प और मुरब्बा
  • सुखा थाई एप्पल बेर 
  • अन्य स्थानीय उत्पाद 

अब यदि ग्रामीण महिलाओं और इनके ग्रुप SHGs के माध्यम से इसको --

थाई एप्पल बेर का बाग ➠ ग्रेडिंग करना ➠ पैकेजिंग करना ➠ लोकल रिटेल सेल्स ➠ प्रोसेसिंग करना ➠ ब्रांडेड प्रोडक्ट  

यदि इस तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में SHGs के माध्यम से व्यवसाय शुरू किया जाता है तो यह निश्चित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए जीविका और आय उपार्जन का साधन भी बन सकता है।

हां इसके लिए लेवलिंग,FSSAI लाइसेंस और फूड बेस रेगुलेशन का पालन भी करना होगा।
COMMERCIAL ADVANTAGES

थाई एप्पल बेर: खेती के 5 बड़े फायदे

☀️ गर्म व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए वरदान

बेर प्राकृतिक रूप से Arid & Semi-Arid जलवायु के प्रति अत्यधिक सहनशील है। यह भीषण गर्मी, सीमित पानी और सामान्य मिट्टी में भी बिना जोखिम पनपता है।

🍏 बड़ा आकार एवं आकर्षक वजन

वैज्ञानिक परीक्षणों में इसका औसत फल भार 44.66 ग्राम दर्ज किया गया है (मैदानी बागानों में 60–100g तक)। सेब जैसी चमक और बड़ा आकार इसे प्रीमियम लुक देता है।

🛒 फ्रेश फ्रूट मार्केट में भारी मांग

कुरकुरापन, अधिक मिठास और छोटी गुठली के चलते ताजे फल की सीधी मंडियों और शहरी सुपरमार्केट्स में देसी बेर की तुलना में काफी ऊंचा थोक भाव मिलता है।

🥫 फूड प्रोसेसिंग व वैल्यू एडिशन की क्षमता

अधिक पल्प (गूदा) होने से जैम, कैंडी, पल्प, रेडी-टू-सर्व बेवरेज और सुखाकर ड्राई-फ्रूट उत्पाद बनाने के लिए यह खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का पसंदीदा विकल्प है।

🔬 अनुसंधान व परीक्षणों में श्रेष्ठ प्रदर्शन

बुंदेलखंड की कठोर जलवायु परिस्थितियों के परीक्षण में थाई एप्पल को व्यावसायिक बागवानी के लिए सबसे आशाजनक (Promising Commercial Cultivar) किस्म के रूप में प्रमाणित किया गया।

💡 किसानों के लिए निष्कर्ष: कम पानी, न्यूनतम लागत और पहले ही वर्ष से बंपर रिटर्न।


थाई एप्पल बेर की खेती की चुनौतियां क्या है? 


थाई एप्पल बेर को केवल "जल्दी अमीर बनने वाला फसल" भी समझ लेना चाहिए।

इसकी खेती से लेकर उत्पादन और देख रेख एवं फल कु तुड़ाई, ग्रेडिंग और मार्केटिंग एवं बिक्री तक में जगह जगह कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

मुख्य चुनौतियां कुछ इस प्रकार से हो सकती है -

  • प्रमाणित पौधों की उपलब्धता और इसको लगाने की जगह एवं दिशा निर्देश की कमी।
  • छटाई (Pruning) की सही तकनीक और प्रबंधन।
  • फलों की तुड़ाई और ग्रेडिंग।
  • बाजार तक पहुंच बनाना और कीमतों में होने वाला उतर चढ़ाव।
  • परिवहन और स्थानीय जलवायु का प्रभाव।

इन चुनौतियों में बाजार तक पहुंच बनाना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसके लिए सरकारी एजेंसियों को आगे आना होगा और उत्पादन में सफल किसानों की सहायता करनी होगी।

निष्कर्ष (Conclusion) 


थाई एप्पल बेर भले ही नाम में एप्पल लगा है लेकिन यह सेव की प्रजाति या कुल का पौधा नहीं है बल्कि यह बेर की ही उन्नत प्रजाति है।

भारत में इसकी खेती के प्रमाण उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे क्षेत्रों एवं राज्यों में शोध रिपोर्ट के भी माध्यमों से मिले हैं।

यह सेव जैसा बड़ा और स्वादिष्ट एवं कुरकुरा होने के साथ साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। देश में इसकी खेती धीरे धीरे बढ़ रही है और बाजारों में आए दिन यह देखने को भी मिल जा रही है।

यदि इसका व्यवसायिक खेती किया जाए और इसके खेती के क्षेत्रों में ही इससे संबंधित ग्रामीण व्यवसाय शुरू किया जाए तो इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं और SHGs एवं ग्रामीण युवाओं को रोजगार और आय के साधन भी सुलभ हो सकेंगे।

इतना ही नहीं बल्कि सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसको खेतों के किनारे बेकार पड़े हुए टीलों और मेड़ों आदि पर भी किया जा सकता है। जिससे इन जगहों का भी सदुपयोग हो जाएगा और किसानों को एक अतिरिक्त आय कमाने का जरिया बन जाएगा।

अतः यदि आप किसान है तो देर न करते हुए कुछ ही मात्रा में ही सही इसकी खेती जरूर कीजिए और यदि आप पाठक है तो अपने दोस्त, मित्र, रिश्तेदार और अन्य संबंधित किसान को यह जानकारी जरूर पहुंचा दीजिए।


थाई एप्पल बेर के फलदार बाग में खड़ा भारतीय किसान
थाई एप्पल बेर की खेती और फल उत्पादन से संतुष्ट किसान



अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)

1. Thai Apple Ber क्या है?

थाई एप्पल बेर Ziziphus Mauritiana Lamk यानी बेर की एक फसल किस्म है। मूलतः थाईलैंड का यह बेर सामान्य बेर की तुलना में बड़े फल आकार और कुरकुरापन भी स्वाद एवं बाहर से हरे सेव जैसा चमकीला और आकर्षक दिखने के कारण इसको Thai Apple Ber कहते हैं।

2. भारत में इसकी खेती कहां होती है?

भारत में इसकी खेती और रिसर्च के प्रमाण उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे क्षेत्रों एवं राज्यों में मिलते हैं। लेकिन इसका अलग से खेती की क्षेत्र का अकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध नहीं है।

3. थाई एप्पल बेर का फल कितना बड़ा हो सकता है?

2026 के Banda study में Thai Apple का औसत fruit weight 44.66 ग्राम और pulp weight 41.58 ग्राम दर्ज हुआ।

4. क्या थाई एप्पल बेर से ग्रामीण व्यवसाय बनाया जा सकता है? 

उपलब्ध रिपोर्ट और विवरणों के अनुसार इससे निम्नलिखित प्रकार के उत्पाद बनाए जा सकते हैं -


फ्रेश थाई एप्पल बेर पैक्ड

थाई एप्पल बेर कैंडी 

थाई एप्पल बेर जैम और जेली

थाई एप्पल बेर पल्प और मुरब्बा

सुखा थाई एप्पल बेर 

अन्य स्थानीय उत्पाद 


अब यदि ग्रामीण महिलाओं और इनके ग्रुप SHGs के माध्यम से इसको --


थाई एप्पल बेर का बाग ➠ ग्रेडिंग करना ➠ पैकेजिंग करना ➠ लोकल रिटेल सेल्स ➠ प्रोसेसिंग करना ➠ ब्रांडेड प्रोडक्ट  


यदि इस तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में SHGs के माध्यम से व्यवसाय शुरू किया जाता है तो यह निश्चित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए जीविका और आय उपार्जन का साधन भी बन सकता है।


हां इसके लिए लेवलिंग,FSSAI लाइसेंस और फूड बेस रेगुलेशन का पालन भी करना होगा।

5. थाई एप्पल बेर में उत्पादन कितना हो सकता है? 


Banda University of Agriculture and Technology के अध्ययन में सबसे अधिक कैथी में प्रति पौधा 58.28kg थाई एप्पल बेर का उत्पादन हुआ था।


वही तेलंगाना की सरकारी सक्सेस स्टोरी में 2 एकड़ में 70 टन उत्पादन का अकड़ा दर्ज है। यानी प्रति एकड़ 35 टन तक।


यह दोनों आकड़े एक सफल किसान के और अधिकतम उत्पादन के है। यह औसत उत्पादन के आंकड़े नहीं है। यह देखा गया है कि थाई एप्पल बेर पहले वर्ष में प्रति पौधा औसत रूप से 20 से 25kg रहता है जबकि दूसरे और तीसरे साल यह बढ़ जाता है।

6. Thai Apple Ber की खेती से कमाई की कितनी हो सकती है? 


सरकारी किसान सक्सेस केस स्टडी में तेलंगाना के सफल किसान ने 2 एकड़ में सफल खेती किया था -


क्षेत्रफल - 2 एकड़

उत्पादन - 70 टन

बाजार भाव - ₹15,000 प्रति टन

खर्च - 1,00,000 प्रति वर्ष 

कुल आय ₹10.50 लाख

शुद्ध आय - 9.50 लाख


इसी रिपोर्ट में प्रति एकड़ कुल आय ₹5.25 लाख और शुद्ध आय ₹4.75 लाख बताया गया है।

7. क्या थाई एप्पल बेर की खेती खेतों की मेडो पर किया जा सकता है?

हां! इसको धान और गेहूं आदि खेतों के मेड़ों पर लगाया जा सकता है। इसकी शाखाओं में कांटे नहीं होते हैं और यह ऊंचे टीलों पर भी आसानी से विकास कर लेता है।


मेड़ कम से कम 2 फिट ऊंची और 3 फिट चौड़ी होनी चाहिए। करीब 1 एकड़ की खेत के मेड़ के चारों तरफ 60 से 70 पौधों को लगाया जा सकता है।


यह खेतों के मिट्टी के बहाव को भी रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता

 है।

8. थाई एप्पल बेर का छटाई क्यों जरूरी होता है? 

थाई एप्पल बेर को छटाई करना बहुत जरूरी होता है। तेलंगाना की सरकारी थाई एप्पल बेर की सक्सेस स्टोरी में भी इसकी नियमित छटाई का उल्लेख किया गया है।


इसके अधिकतर फल नए शाखाओं में लगते हैं। अतः छटाई केने से अधिक नई शाखा बनती है और फल अधिक उगते है।


संबंधित विषय: 





📚

स्रोत एवं संदर्भ (Citations & References)

Verified
1. Indian Journal of Horticulture (2026)
खोजें ↗

“Flowering, yield and quality of ber cultivars” — बाँदा (UP) में थाई एप्पल सहित 7 किस्मों का 2024–25 फील्ड परीक्षण।

2. ICAR / IASH Review Report
वेबसाइट ↗

“Present status and future prospects of Ber” — बेर की पोषण वैल्यू, प्रवर्धन और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर विस्तृत रिव्यू।

3. Govt. of Telangana (MIDH)
पोर्टल ↗

कामारेड्डी जिला हॉर्टिकल्चर रिपोर्ट — 2 एकड़ क्षेत्र में एप्पल बेर ऑर्चर्ड की आधिकारिक फार्मर सक्सेस स्टोरी।

4. Scientific Reports (2026)
जर्नल ↗

Ber Rootstock & Scion Study — भारत में बेर का कुल रकबा, राष्ट्रीय उत्पादन और उत्पादकता से जुड़े सांख्यिकीय आंकड़े।

5. Tamil Nadu Agricultural University (TNAU)
एग्रीटेक ↗

TNAU Ber Cultivation Guide — किस्में, मृदा, रोपण दूरी (Spacing), सिंचाई, खाद और वार्षिक प्रूनिंग का तकनीकी मैनुअल।

6. Indian Journal of Agricultural Sciences (ICAR)
ई-पब्स ↗

Ber-based Agri-Horti System — शुष्क वर्षा आधारित क्षेत्रों में बेर बाग का कायाकल्प और इंटरक्रॉपिंग का वैज्ञानिक अध्ययन।

7. Int. Journal of Advanced Biochemistry Research (2024)
शोध पत्र ↗

Prayagraj Field Study — थाई एप्पल बेर सहित 7 किस्मों के वानस्पतिक विकास और प्राथमिक स्थापना पर प्रयोगात्मक शोध।

सभी संदर्भ वैज्ञानिक जनरल्स और आधिकारिक कृषि पोर्टल्स से उद्धृत हैं।

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