संक्षेप में:
बरसात के मौसम में सर्पदंश के अलावा बिच्छू, कनखजूरा, मधुमक्खी/ततैया और मकड़ी जैसे जीवों के काटने का खतरा बढ़ जाता है। इस लेख में जानिए इनके लक्षण, बचाव के उपाय और ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए, ताकि आप,आपके पशुधन और आपका परिवार सुरक्षित रह सके।
बरसात के मौसम में सर्पदंश के अलावा बिच्छू, कनखजूरा, मधुमक्खी/ततैया और मकड़ी जैसे जीवों के काटने का खतरा बढ़ जाता है। इस लेख में जानिए इनके लक्षण, बचाव के उपाय और ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए, ताकि आप,आपके पशुधन और आपका परिवार सुरक्षित रह सके।
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| बरसात में सर्पदंश सहित 5 खतरनाक जीवों से बचाव की पूरी जानकारी |
📌बरसात में सर्पदंश सहित इन 5 जीवों से रहे सावधान !!
📑 Table of Contents
- ➤ प्रस्तावना
- ➤ सांप (सर्पदंश):सबसे बड़ा और घातक खतरा
- ➤बिच्छू (Scorpion):असहनीय दर्द का करण
- ➤कनखजूरा या शतपदी (Centipede) से बचाव
- ➤जहरीलें कीड़े और ततैया (Wasps,Hornets and Bees) से बचाव
- ➤ मच्छड़,मक्खियां और मकड़ी
- ➤ ग्रामीणों के लिए विशेष मानसून सुरक्षा चेकलिस्ट
- मवेशियों का रखे खास ध्यान
- ➤ निष्कर्ष
- ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
प्रस्तावना (Introduction)
बरसात के मौसम का अपने देश में और खासकर अपने देश के किसान भाइयों में तो एक विशिष्ट स्थान प्राप्त है,क्योंकि बारिश की मौसम के साथ ही किसानों के चेहरों पर जो मुस्कान छा जाती है वह एकदम विशेष ही लगता है। पूरे सालों की मेहनत,इंकम और रोजगार की शुरुआत मानसून के साथ ही शुरू हो जाती है। लेकिन यही मौसम किसानों के लिए एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कई चुनौतियां और खतरों को भी अपने साथ ही लेकर आती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में चाहे कितना भी प्रकृति से जुड़ाव गहरा क्यों न हो इन खतरा और संकट का सामना तो करना ही पड़ता है ---और वह खतरा है 'बारिश के मौसम में विषैले जीवों' का।चारों ओर पानी भर जाता है,तालाब,गड्ढे,खेत और बिलों में भी पानी भर जाता है। ऐसी स्थिति में ही ये विषैले जीव अपने बिलों से बाहर निकलने पर मजबूर हो जाते है।
ये विषैले जीव सुरक्षित स्थानों की तलाश में अक्सर मानव बस्तियों,घरों,गो-शालाओं एवं खेत-खलिहानों की ओर रुख करते है। ऐसे में एक जरा सी चूक और लापरवाही बहुत ही खतरनाक साबित हो सकती है। और अक्सर ऐसे खतरा एवं चूक हो ही जाती है। लेकिन सावधानी एवं जागरूक रहने पर इस खतरे को कम किया जा सकता है।
यदि ये स्थिति आ ही जाए तो क्या करे ? इस लेख में इसी बात की जानकारी प्रदान की जा रही है। क्योंकि ये खतरा हजारों वर्षों से चला आ रहा है और इस खतरे का सामना भी हम करते आ रहे और और इसी से इसका समाधान भी विकसित होते हुए हमारे साथ चलता आ रहा है।
हम 5 मुख्य जीवों के बारें में विस्तार से जानेंगे जिनसे बरसात के मौसम में सभी को खतरा बना रहता है। हम जानेंगे उनके काटने या डंक मरने पर कैसे पहचाने,लक्षण और उनसे बचाव एवं आपातकालीन उपाय क्या हो सकते है। इन सबकी जानकारी विशेषज्ञों से बात के आधार पर तैयार किया गया है।
सांप (सर्पदंश):सबसे बड़ा और घातक खतरा
बरसात में खतरनाक जीव और उनके प्रमुख लक्षण
| जीव | मुख्य लक्षण | खतरे का स्तर |
|---|---|---|
| 🐍 सांप | सूजन, दर्द, चक्कर, सांस लेने में कठिनाई | अत्यधिक |
| 🦂 बिच्छू | तेज दर्द, जलन, सूजन | मध्यम से अधिक |
| 🐛 कनखजूरा | लालिमा, सूजन, तेज दर्द | मध्यम |
| 🐝 मधुमक्खी/ततैया | डंक, सूजन, एलर्जी | मध्यम |
| 🕷️ मकड़ी | खुजली, लालिमा, सूजन | कम से मध्यम |
भले ही हम सांपों की पूजा करते है,लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून के समय में 'सर्पदेव' बिल्कुल ही कृपा नहीं करते है और बहुत सारे लोग इनके कोप (Snakebite) के भाजन बन जाते है। बहुत सारे लोग तत्कालीन उपायों के अभाव में और झाड़-फुक के चक्कर में अपनी जान को भी गवां देते है।
खेतों में काम करते समय,घास काटते समय या रात को सोते समय अक्सर ही लोग इन सांपों का शिकार बन जाते है।
1. भारत के 'बिग-4' जहरीलें सांप:
यद्यपि भारत में सांपों की सैकड़ों और हजारों प्रजातियां पाई जाती है,लेकिन उनमें से अधिकांश बिना जहर वाली ही होती है। उसमें से भी बहुत सारे जहरीले सांप गावों में नहीं,बल्कि जंगलों,पहाड़ों समुद्रों आदि क्षेत्रों में ही पाए जाते होंगे।
लेकिन ग्रामीण इलाकों में मुख्य रूप से 'चार जहरीलें सांप' सबसे ज्यादा पाए जाते है ---
- रसेल वाइपर (कोरिवाला या चंद्रबाड़ा): यह गांवों में पाया जाने वाला सबसे आक्रमक सांप होता है और इसका जहर खून को बहुत जल्द ही जमा या सूखा देता है।
- स्पेक्टेकल्ड कोबरा (नाग): नागदेव भी गांवों में विचरण करते रहते है एवं इनके फन पर 'चश्में; जैसा निशान होता है। इनका जहर तांत्रिक-तंत्र पर जोरदार हमला करता है और हमें इसका उपाय करने का समय भी प्रदान नहीं करने देते है।
- सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसा): यह आकार में तो बहुत छोटा होता है और हमें ज्यादा डर देखने से नहीं लगता है,लेकिन यह बहुत घातक होता है। इसके रगड़ने से आरी जैसी आवाज आती है।
- कॉमन करैत: गावों के लिए ये तो सबसे परिचित नाम है। यह रात में सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है। इसका जहर 'कोबरा' यानि नाग से भी कई गुना ज्यादा खतरनाक होता है। इसके कांटने पर दर्द का आभास भी नहीं होता है और इंसान नींद में ही दम तोड़ देता है।
2. सर्पदंश के लक्षण:
सबसे पहले सर्पदंश के लक्षणों को जानना बहुत जरूरी होता है ताकि इन्हे पहचान कर तुरंत इलाज और उपाय पर ध्यान दिया जा सकें। करैत के मामलों में यह और भी जरूरी हो जाता है,क्योंकि कई बार करैत सांप के काटने के बाद समझ में ही नहीं आता है कि क्या हुआ है। और जब जान चली जाती है तब मालूम होता है कि सांप ने डस लिया था।
- दांतों के निशान: कांटे गए स्थान पर दो दांतों के निशान जरूर दिखते है। इन्हे बारीकी से देख कर चेक करनी चाहिए।
- काला या पीला रंग: सांप के काटने के बाद त्वचा का रंग 'काला' या 'पीला' पड़ने लगता है और तेज दर्द एवं सूजन भी होने लगता है।
- चक्कर: सांप काटने के बाद अक्सर चक्कर आना,धुंधला दिखना और आंखों की पलकों का भारी हो जाना जैसे लक्षण सामान्य है। इस तरह के लक्षण दिखे तो तुरंत सचेत हो जाना चाहिए।
- मुह से झाग: सांस लेने में दिक्कत होने के साथ ही मुहं से झाग आना शुरू हो जाता है।
- करैत के मामलों में: जब ---'करैत' सांप काटता है तब पेट में तेज दर्द एवं जोड़ों में जकड़न होता है। यह भी बिना किसी बाहरी चोट के निशान के होता है। यानि आपको लग सकता है की कोई आपको मारकर चोट पहुचाया है लेकिन ऐसा नहीं बल्कि करैत सांप ने काटा होता है।
3. सांपों से बचाव के उपाय:
उपाय सबसे बड़ी दवा है !! इस पर विशेष रूप से ध्यान देनी चाहिए। इन छोटी-मोटी उपायों से खतरा को 90% तक कम किया जा सकता है ---
- खेतों में सुरक्षा: किसान भाई जब भी खेतों में जाए --घुटनों तक ऊंचे रबर के जुतें,और मोंटे दास्तानें को जरूर पहन कर जाए।
- लाठी का प्रयोग: झाड़ियों,ऊंचे घास-फूँस या कबाड़ के पास जाने से पहले ही अपने पास एक लाठी को जरूर रख ले। यदि आप लंबी लाठी से जमीन को थपथपाते हुए जाते है तो कंपन से सांप खुद दूर भाग जाता है।
- जमीन पर सोने से बचे: बरसात के दिनों में जमीन पर चटाई बिछाकर सोने की गलती बिल्कुल भी न करें। हमेशा चारपाई या पलंग का इस्तेमाल करें। साथ ही मच्छरदानी लगाए और उसे चारों तरफ से गद्दों से दबा दे।
- रोशनी का इंतजाम रखे: रात के समय घर से बाहर निकलते समय टॉर्च या मोबाइल का फ़्लैश लाइट को जलाकर ही चला करें।
4. सांप काटने पर क्या करें और क्या न करें (Do's & Don'ts):
यदि आप उपरोक्त सभी सावधानी को करते हुए भी बच नहीं पाते है और सर्पदेव का शिकार हो ही जाते है तो क्या करें ?
सबसे पहली बात --"घबराए बिल्कुल नहीं' और उससे भी पहली बात ये है कि ---'झाड़-फुक के चक्कर में न पड़े' बिल्कुल भी नहीं। आप वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञों के बताए तरीकों और तुरंत नजदीकी डाक्टर या किसी अस्पताल जरूर पहुच लीजिए। लेकिन झाड़-फुक मत कीजिए।
🔔सबसे महत्वपूर्ण नियम:: सांप काटने पर केवल और केवल 'एंटी-स्नेक वेनम'(Anti-Snake Venom-ASV) ही जान को बचा सकता है। यह हरेक सरकारी अस्पताल में मुफ़्त में मिलता है।
➢ यदि आपके आसपास किसी को सांप ने काटा है,तो आपातकालीन मेडिकल नंबर जैसे '108' या '112' पर कॉल करके तुरंत मरीज को एम्बुलेंस से किसी नजदीकी अस्पताल ले जाए। यदि एम्बुलेंस उपलब्ध न हो तो किसी भी गाड़ी या मोटरसाइकल से ही पहले अस्पताल लेकर जाईए।
➢इतना ही नहीं,सर्पदंश होने पर कई लोग घरेलू इलाज आदि की बात करने लगते है। कई लोग 'होम्योपैथी' की मेडिसिन नाजा-200 के बारे में भी बोलते है। लेकिन इन सब के चक्कर में आपका समय बर्बाद होगा। सबसे पहले समय बर्बाद नहीं होने देना है और अस्पताल ले जाकर 'एंटी स्नेक वेनम' दिलाना है।
बिच्छू (Scorpion):असहनीय दर्द का करण
सर्पदंश के बाद जो सबसे ज्यादा खतरा बरसात के दिनों में गांवों में रहती है वह है --बिच्छू के डंक मारने का खतरा। हालांकि बिच्छू के डंक मरने से जान को खतरा नहीं होता है,लेकिन --'रेड बिच्छू' का डंक बच्चों एवं बुड्ढों के लिए खतरनाक और कभी कभी घातक साबित हो सकता है। अतः बिच्छू के डंक को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
गांवों में बरसात के मौसम में लोग खासकर नौजवान युवा 'जामुन के पेड़' पर जामुन तोड़ने के लिए चढ़ते रहते है। और बिच्छू सबसे ज्यादा पेड़ों के तनों के दरारों में चिपके रहते है। जामुन में तो जरूर ही चिपके रहते है। और मौका पाते ही ये डंक मार देते है।
इतना ही नहीं खेतों के मेड़ों पर,घरों,गोदामों और लकड़ी के ढेरों आदि में ये चिपके और छुपे रहते है। इनके काटने पर बहुत ही असहनीय दर्द होता है। वैसे तो बिच्छुओं की 1500 प्रजातियों में से केवल 25 प्रजातियां ही विषैली होती है।
1. बिच्छू के छिपने के मुख्य ठिकाने:
बिच्छू अक्सर अंधेरी,नरम एवं गर्म जगह को पसंद करते है। ये अक्सर --
- जुत्ते-चप्पलों के अंदर
- दीवारों एवं पेड़ों की दरारों में
- उपलों के ढ़ेर या लकड़ी के ढ़ेर के बीच
- बिस्तर या कपड़ों की तहों में भी छिपे रहते है।
2. बिच्छू के डंक मरने के लक्षण:
लक्षण जानना बहुत ही जरूरी होता है ताकि तुरंत इलाज और सावधानियां बरती जा सकें --
- तेज दर्द: डंक मरने वाली जगह पर तुरंत तेज एवं जलन पैदा कर देने वाला दर्द शुरू हो जाता है।
- लार टपकना: तेज पसीना आने लगता है,उल्टी होता है और लार टपकने लगता है।
- ब्लडप्रेशर: शरीर का ब्लडप्रेशर अचानक तेज या कम हो सकता है।
- फेफड़ों में पानी: बहुत गंभीर मामलों में फेफड़ों में पानी भर जाता है,जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। कुछ मामलों में सांस लेने में दिक्कत ज्यादा बढ़ जाने पर सांस रुक भी सकती है।
3. बचाव एवं प्राथमिक उपचार:
सबसे पहले हम बचाव की बात करते है,फिर इसके कुछ प्राथमिक उपचार की बात करेंगे।
- बचाव:
- जूते झाड़कर पहने: बरसात के दिनों में बिना ठीक से देखे हुए जूते चप्पलों को बिल्कुल ही न पहने। साथ ही उन्हे उल्टा करके अच्छे से ठोक कर तब पहने।
- लकड़ी-कंडे संभाल कर छूए:चूल्हे के लिए लकड़ी या उपलों को उठाते समय ध्यान रखे और सावधानी बरते।
- नंगे पैर न चले: बरसात के दिनों में घरों या आसपास कभी भी बिल्कुल नंगे पैर न चले। इससे खतरा कम हो जाता है।
बरसात के दिनों में गांवों में बिच्छू के डंक मरने पर कुछ घरेलू स्तर पर उपाय एवं प्राथमिक उपचार किए जा सकते है --
- अच्छी तरह धोए: दर्द वाली जगह को पानी एवं साबुन से अच्छी तरह से धो देनी चाहिए।
- बर्फ से सिकाई: यदि बर्फ उपलब्ध हो तो उससे सिकाई करने से दर्द में राहत मिलती है।
- ज्वेलरी उतार दे: बीछू के डंक मरने पर जगह बहुत फूल भी जाता है। अतः ज्वेलरी को शरीर एवं अंगों से उतार देनी चाहिए ताकि किसी तरह की और परेशानी न हो।
- दर्द का दवा न दे: अपने से दर्द का दवा न दे इससे दिक्कत और भी बढ़ सकती है। खासकर एस्प्रिन एवं आइब्रूफिन न दे।
- निर्मली या इमली का बीज: निर्मली या इमली के बीज को लेकर 'पत्थर' पर दो-तीन बूंद पानी डालकर बढ़िया से घिस कर फिर उस घिसे हुए पेस्ट को दर्द वाले स्थान पर लेप कर दे। एक बीज लेकर डंक के काटने वाले स्थान पर चिपका दे। 5 मिनट के अंदर असर दिखना शुरू हो जाएगा।
- पोटैशियम परमैगनेट: आप 'पोटैशियम परमैगनेट" एवं नींबू के फूल को बारीक पीसकर अलग-अलग बोतल में रखे। काटने वाली दर्द वाली जगह पर पहले नींबू के फूल का पाउडर मूंग के दाने के बराबर रखे। उसके ऊपर उतना ही पोटैशियम परमैगनेट का पाउडर को रखे और 2-3 बूँद पानी ऊपर से डाल दे। यह अद्भुत दवा है तुरंत दर्द दूर कर देता है और राहत प्रदान करता है।
- नजदीकी अस्पताल: यदि मरीज बच्चा हो तो,बिल्कुल देर न करें और तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर जानी चाहिए। वहां डाक्टर 'एंटी स्कॉर्पीअन वेनम' या कुछ विशिष्ट दवाएं देते है।
बिच्छुओं की कुछ हि ऐसी प्रजातियां है जो इंसानों के लिए ज्यादा घातक होती है। बहुत की तो अपने से ही 24 से 48 घंटों में असर कम हो जाता है। अतः फिर भी सावधानी बरते और अस्पताल एवं डाक्टर का सहारा ले। अपने से ही अंट-संट दवा न उपयोग करें।
कनखजूरा या शतपदी (Centipede) से बचाव
कनखजूरा जिसे बिहार में 'गोजर' भी कहा जाता है। यह एक 'बहु-चरणी' यानि कई पैर वाला जीव होता है। नमी वाले स्थानों में रहता है। ये बरसात में सीलन वाले स्थानों से निकलकर घरों में घुस जाता है। इसके आगे के दो पैर जहरीलें डंक का काम करते है,जिससे ये इंसानों को काटता है।
ये तेज चलते भी है और बच्चों को इससे बच निकलने में समय लगता है तब तक इसके चपेट में आ जाते है। अब हम इसके लक्षण और बचाव के उपाय के बारे में समझते है।
1. कनखजूरा काटने के लक्षण और खतरा:
कनखजूरा का कटना आमतौर पर जानलेवा नहीं होता है। लेकिन असहनीय दर्द होता है।
- तेज दर्द और लालिमा: काटने वाले जगह पर तेज दर्द एवं लालिमा हो जाती है।
- एलर्जी: कुछ लोगों को इसके काटने से एलर्जी और कुछ लोगों को गंभीर एलर्जी हो सकती है।
- बुखार: कई लोगों को इसके काटने से बुखार एवं चक्कर आने की समस्या हो सकती है।
- दो छेद के निशान: इसके काटने वाले जगह पर दो छेद के निशान भी होते है।
- झुनझुनी एवं रक्तस्राव: काटने के जगह पर हल्का झुनझुनी हो सकती है। एवं कुछ मामलों में हल्का रक्तस्राव भी हो सकता है।
2. तत्काल प्राथमिक उपचार:
इसके काटने पर दर्द कम करने और जटिलताओं को रोकने के लिए तुरंत इन उपायों का पालन करें --
- काटने वाले स्थान को साफ करें: धीरे-धीरे साबुन एवं पानी से धोना चाहिए।
- ठंड सेक लगाए: प्रभावित जगह पर ठंडे पानी से एवं संभव हो तो बर्फ से सेक लगानी चाहिए।
- दर्द निवारक दवा दे: दर्द को कम करने वाली दवा को दे सकते है। किसी स्थानीय मेडिकल से दर्द निवारक दवाएं लेकर देनी चाहिए।
- आकड़े का दूध: आकड़े का दूध लगाने से कनखजूरा का दर्द मिट जाता है।
यदि उपरोक्त उपायों के बाद भी दर्द बढ़ता जाए और एलर्जी भी बढ़ने लगे या घाव बढ़ने लगे तो तुरंत डाक्टर के पास लेकर जानी चाहिए।
3. बचाव के उपाय:
सबसे पहले कनखजूरा से पाला ही न पड़े इसके उपाय घरों में करनी चाहिए --
- घर की सीलन दूर करे: घरों के कोनों,बाथरूम एवं रसोईघर के सीलन को दूर रखे और सूखा रखने का प्रयास करे।
- दरारों को बंद करे: घरों में जगह जगह और दीवारों आदि जगहों पर जो दरारें हो जाती है बरसात से पहले सीमेंट आदि से भर देनी चाहिए।
- कबाड़ हटाकर सफाई रखे: बरसात के मौसम में घरों में कबाड़ तो बिल्कुल ही नहीं रखनी चाहिए। अच्छे से घरों में साफ-सफाई यानि कूड़ा कचरा एवं कबाड़ मुक्त रखनी चाहिए।
अक्सर लोग इन बचाव के उपायों पर ध्यान नहीं देते है जिससे खतरा बढ़ा हुआ रहता है। अतः सबसे पहला काम आज ही करें की अपने घरों के कबाड़ की सफाई कर दे। और बड़ी ही सावधानी से सफाई भी करनी चाहिए। हमेशा दस्ताना और जूता पहनकर एवं डंडे के साथ सफाई करनी चाहिए।
जहरीलें कीड़े और ततैया (Wasps,Hornets and Bees) से बचाव
बरसात के मौसम में पेड़ पौधों पर नए नए पत्ते और फूल आने लगते है,जिससे ततैया,मधुमखी एवं अन्य जहरीलें कीड़े बहुत ही सक्रिय हो जाते है। ये पानी से बचने के लिए घरों के छज्जों,दीवारों एवं खिड़कियों के कोनों में अपना छत्ता बना लेते है।
जब गलती से लोग इनकी छत्तों के पास जाते है,तो ये हमला कर देते है और अपना डंक मार देते है। हम कुछ मुख्य कीड़ों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे --
1. एनाफिलेक्टिक शॉक का खतरा:
भले ही ततैया या मधुमक्खी खतरनाक नहीं लगे लेकिन यदि एक साथ कई कई मधूमक्खी या ततैया किसी व्यक्ति को काट ले तो यह खतरनाक हो सकता है। इतना ही नहीं यदि किसी व्यक्ति को इसके विष से एलर्जी का शिकायत हो तो भी ये खतरनाक हो सकता है।
ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति के शरीर में --'एनाफिलेक्टिक शॉक' हो सकता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी होता है जिसमें ---
- अधिक सूजन: चहरें,होंठ एवं गले में बहुत अधिक सूजन हो सकती है।
- सांस लेने में परेशानी: सांस की नाली बंद होने लगती है और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
- बेहोशी: चूंकि ब्लडप्रेशर तेजी से गिरने लगता है और व्यक्ति बेहोश हो सकता है।
इसलिए कभी भी मधुमक्खियों को भी कम नहीं समझना चाहिए और हमेशा इनसे भी सावधान ही रहना चाहिए। इनके छत्ते से हमेशा बच कर रहने का प्रयास करना चाहिए।
2. बचाव एवं सावधानी:
जहां तक ततैया एवं मधुमक्खियों से बचाव का सवाल है,इसके लिए निम्नलिखित सावधानी एवं उपाय करनी चाहिए --
- छत्तों से छेड़छाड़ न करें: घर के आस पास ततैया या मधुमक्खियों के छत्ते दिखे तो बच्चों को उसके पास न जाने दे और उससे दूर ही रखे। कई बच्चे उसपर कंकड़ फेकने लगते है। अतः बच्चों को इसके बारे में समझाए और जागरूक कर दे।
- छत्ते हटवाएं: छत्तों को अपने से न हटाए,बल्कि इसके लिए किसी विशेषज्ञ से और वह भी रात में ही इन छत्तों को हटवानी चाहिए।
- चमकदार कपड़ों से बचे: बाहर काम करते समय बहुत गहरें एवं चमकदार कपड़े नहीं पहननी चाहिए क्योंकि ये कपड़े कीड़ों को आकर्षित करती है।
यदि ततैया काट ले तब क्या करें ---
- डंक को बाहर निकाले: अगर डंक त्वचा के अंदर रह गया हो तो उसे किसी सीधे कार्ड जैसे एटीएम कार्ड आदि से खुरच कर निकल दे। चिमटे से खिचकर न निकाले,क्योंकि इससे जायद जहर अंदर जा सकता है।
- बेकिंग सोडा का पेस्ट: डंक को निकालने के बाद बेकिंग सोडा का पेस्ट को लगानी चाहिए इससे काफी राहत मिलती है।
- एंटी-एलर्जी इंजेक्शन: जब ज्यादा असर हो तो डाक्टर के पास ले जाए और एंटी-एलर्जी इंजेक्शन को जरूर लगवाए।
इस प्रकार से सबसे पहले बचाव पर ही प्रमुखता से ध्यान देनी चाहिए। उसके बाद यदि ये काट ही ले तो बिना घबराए हुए इन उपायों को अपनाए।
मच्छड़,मक्खियां और मकड़ी
बाकी सब कीटो जो ऊपर बताए गए है के काटने से खतरा तो बना रहता है लेकिन, मच्छड़,मकड़ी और मक्खियों से भला क्या खतरा हो सकता है। सोचने पर तो यही लगता है न। लेकिन आपको ये जानकार हैरानी होगी की बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों का सबसे बड़ा करण मच्छड़ और मक्खियां ही होती है।
ग्रामीण इलाकों में जल-जमाव एवं खुले में शौच के करण इनकी आबादी भी तेजी से बढ़ती है। और जब इनकी तेज आबादी बढ़ती है तो ये घरों मानव एवं मवेशियों पर चिपके रहते है। साथ ही अपने साथ ये कई बीमारियों को जन्म देते है और उनमें से कई बीमारियां तो जानलेवा भी साबित हो सकती है।
अतः इन्हे हल्के में न लेते हुए सबसे पहले इनसे बरसात के मौसम में होने वाली संभावित बीमारियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेते है ---
- मलेरिया एवं डेंगू: ये दोनों बीमारियां मच्छड़ों से और उनके काटने से हो जाता है। इसमें कई दिनों तक बुखार,जोड़ों में दर्द आदि बनी रहती है और जिसका ठीक से एवं समय से इलाज नहीं किया जाए तो मौत का भी करण बन सकती है।
- चिकनगुनिया एवं जापानी इंसेफेलाइटीस (दिमागी बुखार): ये दोनों बीमारियां भी मच्छड़ों से ही होती है और बहुत ही घातक होती है।
- हैजा एवं डायरिया: ये दोनों रोग मक्खियों से पैदा होते है और ये भी जानलेवा साबित हो सकते है।
- टाइफाइड एवं पीलिया: इन दोनों रोगों का करण भी मक्खियां ही होती है। और मनुष्य के पूरे शरीर को चपेट में लेकर मौत के मुंह तक ले जाने की क्षमता रखती है।
1. मच्छड़ एवं मक्खियों से सुरक्षा के अचूक उपाय:
सबसे ज्यादा बीमारियों के वाहक मच्छड़ एवं मक्खियों से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय भी साबित होता है। क्योंकि जबतक इनकी बढ़ती संख्या पर रोक नहीं लगेगी और इनकी पहुंच हमारी तक आने में रुकावट नहीं डाली जाएगी तबतक हमेशा इसका खतरा बना ही रहेगा और हम दवाइयों पर खर्च करते ही रहेंगे।
अतः इनसे बचाव के ये उपाय बरसात के दिनों में हर घरों में करनी ही चाहिए --
- जलभराव को रोके: घर और उसके आस-पास गड्ढों,टूटे बर्तनों,टायरों,कुलर आदि कोई भी ऐसी चीज एवं जगह जहां पानी जमा हो जाता हो उसे खत्म कर दीजिए और कही भी पानी न जमा होने दीजिए।
- मिट्टी का तेल डाले: यदि कही पर पानी जमा हो तो उसपर मिट्टी का तेल या जला हुआ मोबिल को डाल दे ताकि मच्छड़ों के लार्वा मर जाए।
- नीम का धुआं: ग्रामीण क्षेत्रों में शाम के समय में घरों एवं मवेशियों के रहने के जगह में नीम की पत्तियों का धुआं करना एक बहुत ही बेहतरीन विकल्प है जो बहुत ही प्रभावी होता है।
- हमेशा मछड़दानी का प्रयोग: बरसात के मौसम में हमेशा मच्छड़ों से बचाव के लिए मच्छड़दानी का प्रयोग करनी चाहिए। बहुत लोग ज्यादा हवा के चक्कर में मच्छड़ों को न्योता देने के लिए बिना मच्छड़दानी के ही सो जाते है। ऐसा बिलकू ही न करें।
- खाद्य-पदार्थों को ढककर रखें: मक्खियों से बचाव के लिए खाद्य पदार्थों को हमेशा ढक कर ही रखे कभी भी गलती से भी उन्हे खुला न रखे।
- बासी को कहे ना: कभी भी बरसात के मौसम में बासी खाना को न खाए। ये लेना का देना कर सकता है।
काटने या डंक मारने पर क्या करें और क्या न करें?
| क्या करें (Do's) | क्या न करें (Don'ts) |
|---|---|
| पीड़ित को शांत रखें। | घाव को काटने या चूसने की कोशिश न करें। |
| तुरंत नजदीकी अस्पताल जाएं। | झाड़-फूंक या अंधविश्वास पर भरोसा न करें। |
| प्रभावित अंग को कम हिलाएं। | बहुत कसकर पट्टी न बांधें। |
| जरूरत पड़ने पर एम्बुलेंस बुलाएं। | डॉक्टर की सलाह बिना दवा न लें। |
ग्रामीणों के लिए विशेष मानसून सुरक्षा चेकलिस्ट
बरसात शुरू होने के पहले और बरसात के दौरान हर ग्रामीण परिवारों को नीचे दिए गए चेकलिस्ट का पालन जरूर करनी चाहिए ----
1. घर के आस-पास की सफाई (Outer Safety):
- घर के चारों तरफ के उगी हुई घास एवं झाड़ियों को काटकर साफ कर देनी चाहिए।
- घर की दीवारों से लगी हुई उपलों,लकड़ियों आदि के ढ़ेर को दूर हटा देनी चाहिए।
- नालियों की सफाई नियमित रूप से करनी चाहिए ताकि पानी जमा न होने पाए।
2. घर के अंदर की सुरक्षा (Indoor Safety):
- दरवाजे के नीचे के खाली जगह को बंद करने के लिए रबर की पट्टियों या दरी का इस्तेमाल करें ताकि रेंगने वाले जीव घर के अंदर न प्रवेश कर सकें।
- अंधेरे कोनों,खाट के नीचे और आलमारियों के पीछे समय समय पर फ़िनाइल का छिड़काव करते रहे।
- दीवारों के सुराखों एवं चूहों के बिलों को मिट्टी या सीमेंट से बंद कर दे क्योंकि सांप इन चूहों के चक्कर में बिलों में आते रहते है।
3. गो-शाला एवं मवेशियों की सुरक्षा:
- पशुओं को बांधने के स्थान पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था को रखनी चाहिए।
- चारा को निकालने से पहले उसे किसी लाठी से हिला लेनी चाहिए। क्योंकि भूसे के ढेर में सांप या बिच्छू होने का चांस बहुत ज्यादा होता है।
- पशुओं के खूटों के पास सफाई रखे और वहा पानी को जमा न होने दे।
मवेशियों का रखे खास ध्यान
बरसात के मौसम में जितना खतरा मानव को रहती है उतना ही ज्यादा खतरा मवेशियों को भी इन जीवों से रहती है। अतः इन्हे जहरीले जीवों एवं कीड़ों से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय जरूर करनी चाहिए --
1. गो-शाला की बनावट और साफ सफाई का ध्यान:
- दरारे और गड्ढे बंद कर दे: गो-शाला के अंदर के फर्श,दीवारों आदि के सभी गड्ढों एवं दरारों को सीमेंट से भर दे।
- जल जमाव को रोके: जहां पशु बैठते है वहां जल निकासी का उचित व्यवस्था रखे ताकि उनका मल-मूत्र जमा न हो और मच्छड़ों का प्रकोप न होने पाए।
- ऊंची घास और झाड़ियों को काटे: गो-शाला के 10 फिट के दायरों में सभी झाड़ियों को काटकर साफ-सफाई रखे और इन जीवों को शरण देने जैसा जगह न बनने देनी चाहिए।
2. चारे के भंडारण में सावधानी:
चूंकि यह सबसे मुख्य जगह होता है जहा सुबह शाम चारा डालने के लिए जाना ही होता है अतः यहां पशुओं एवं मनुष्य दोनों को खतरा रहता है यदि कोई जीव जाकर छुप जाए। इससे बचने के लिए ----
- सीधे जमीन पर चारा न रखे: इसे लकड़ी के तख्तों के ऊपर रखा करें क्योंकि इससे उसमें नमी भी नहीं आती है सीधे कोई जीव उसमें नहीं जा पाते है।
- लाठी का प्रयोग: पशुओं को चारा डालने से पहले भूसे के ढेर को लाठी के डंडे से अच्छी तरह हिला ले। लाठी की धमक से छुपे हुए जीव बहार निकल आते है।
3. मच्छरों,मक्खियों और किलनियों से बचाव:
- नीम और कपूर का धुँवा करे: यह पारंपरिक और प्रभावी उपाय है यह मच्छड़ों,मक्खियों और अन्य उड़ने वाले जीवों को तुरंत भगा देता है।
- नीम के तेल का छिड़काव: नीम के तेल को पानी में मिलाकर और उसमें थोड़ा साबुन मिलाकर पशुओं के शरीर पर छिड़काव करनी चाहिए। इससे मच्छरों एवं मक्खियों से बचाव होता है।
- बायो-सिक्योरिटी एवं दवाएं: डाक्टर की सलाह लेकर Amitraj या Flumethrin जैसी दवाओं का छिड़काव फर्श एवं पशुओं के शरीर पर करें। इससे पशुओं के खून चूसने वाले जीव भाग जाते है या मर जाते है। इसमें ध्यान रखनी चाहिए कि पशु कुछ देर तक खुद अपने छिड़काव किये गए आंग को चाटे नहीं।
4. सर्पदंश एवं बिच्छू से मवेशियों की सुरक्षा:
- पर्याप्त रोशनी: चूंकि सांप और बिच्छू अंधेरे में शिकार ज्यादा करते है अतः पशुओं के रहने के जगह पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था रखनी चाहिए। इससे ये जीव रोशनी में आने से डरते है।
- खूँटे और जंजीर की स्थिति: इसको लंबी रखनी चाहिए लेकिन इतनी लंबी नहीं की अगल बगल के कबाड़ तक उनकी पहुँच हो जाए।
- फिनाइल का छिड़काव: फिनाइल एवं ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव सप्ताह में दो से अधिक बार मवेशियों के रहने के जगह एवं कोनों आदि में करनी चाहिए इससे ये जीव यहां नहीं आते और भाग जाते है।
5. मवेशियों के लिए आपातकालीन लक्षण और उपाय:
यदि मवेशियों को सांप या बिच्छू ने काट लिया है,तो इन लक्षणों पर ध्यान दे ---
- पशु का अचानक छटपटाना या लगातार पैर पटकना एवं कपकपाना।
- मुंह से अत्यधिक लार या झाग का निकलना।
- आंखें लाल होना और सूजन होना।
- दूध देने वाले पशुओं के दूध के रंग में बदलाव होना या अचानक दूध में कमी हो जाना।
यदि ये लक्षण दिखे तो तुरंत सावधान हो जाए और निम्नलिखित उपाय करें---
- यदि सांप ने पैर पर काटा है,तो काटे गए जगह से थोड़ी ऊपर हल्की पट्टी बंधे ताकि जहर पूरे शरीर में तेजी से न फैले।
- बिना समय गंवाए -- पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) को बुलाए या नजदीकी पशु अस्पताल लेकर चले जाए। इंसानों की तरह ही पशुओं के लिए भी 'एंटी स्नेक वेनम' (ASV) आता है, और उसी से पशुओं की जान बच सकती है।
अतः इंसान के जैसे ही पशुओं पर भी इस बरसात के मौसम में विशेष ध्यान रखनी चाहिए। इससे अपनी पशुधन भी सुरक्षित रहती है और उनकी सेवा में लगे हुए इंसान भी सुरक्षित रहते है।
निष्कर्ष (Conclusion):और एक जरूरी अपील
इस प्रकार से बरसात का मौसम जो प्रकृति के कायाकल्प का समय होता है लेकिन साथ में यह ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष सजगता एवं सावधानी की भी मांग करता है। अतः इस सजगता और सावधानी को जरूर अपनानी चाहिए। क्योंकि सांप, बिच्छू या अन्य जीव दुश्मन नहीं है,लेकिन वे अपनी अस्तित्व एवं सुरक्षा के लिए बाहर निकलते है एवं डरकर हमला करते है।
जब हमारा पैर अनजाने में उनपर पड़ता है,तभी वे आत्मरक्षा में हम पर हमला करते है।
याद रखे --
- सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
- अंध विश्वास,झाड़-फूँक एवं घरेलू इलाज के चक्कर में अपना समय न बर्बाद करें।
- समय सबसे कीमती होता है इस स्थिति में जान बचाने के लिए। समय पर दवा और डाक्टर से भेट होना बहुत जरूरी होता है।
- अपने नजदीकी -'प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र'(PHC) या 'जिला अस्पताल' एवं 'एम्बुलेंस' का नंबर लिख कर रखे रहे। और संभाल कर रखे।
साथ ही इस जानकारी को अपने परिवार,पड़ोसियों एवं गांव के अन्य लोगों के साथ साझा जरूर कीजिएगा। इससे जागरूकता बढ़ेगी और भूले हुए लोग याद करके इन उपायों एवं सावधानियों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। इस मानसून में सुरक्षित रहें और सतर्क रहें !!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1:बरसात में सांप अधिक क्यों मिलते है? ▼
उत्तर:क्योंकि बरसात में बारिश के करण उनके बिल पानी से भर जाता है,इसीलिए वे सुखी जगहों की तलाश में अपने बिलों से बाहर निकलते है।
प्रश्न 2: क्या सभी बिछुओं का डंक जहरीला होता है? ▼
उत्तर: हां!आमतौर पर सभी बिछुओं का दर्द जहरीला होता है,लेकिन किसी किसी का ज्यादा खतरनाक रूप से जहरीला होता है। वैसे तो बिछुओं की सैकड़ों प्रजातियां होती है जिनमें से २५ से अधिक ही खतरनाक होती है जो गांवों आदि में ही पाई जाती है।
प्रश्न 3:सर्पदंश होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए? ▼
उत्तर: सबसे पहला काम तो ये करना चाहिए की किसी भी घरेलू इलाज या झाड़ फुक के चक्कर में पड़े बिना तुरंत अस्पताल लेकर जाना चाहिए और --'एंटी स्नेक वेनम' को ४ घंटों के अंदर दिला देने का प्रयास करनी चाहिए।
प्रश्न 4:क्या मधूमक्खी के डंक से जान का खतरा हो सकता है? ▼
उत्तर:हां! ये तब हो सकता है जब व्यक्ति एलर्जी से ज्यादा प्रभावित रहता हो और उसे एकसाथ बहुत सारी मधुमक्खियाँ काट देती है। तब उसे 'एनाफिलेक्टिक शॉक'का खतरा हो सकता है।
प्रश्न 5:क्या कॉमन करैत के काटने पर आभास नहीं होता है? ▼
उत्तर:हां! कॉमन करैत जब काटता है तब व्यक्ति को आभास भी नहीं होता है और इसके काटने के बाद कई बार व्यक्ति बिना कोई प्रयास कीये हुए सोये सोये जान गवा देता है। इसका जहर कोबरा यानि नाग से भी कई गुना ज्यादा होता है। जब ---'करैत' सांप काटता है तब पेट में तेज दर्द एवं जोड़ों में जकड़न होता है। यह भी बिना किसी बाहरी चोट के निशान के होता है। यानि आपको लग सकता है की कोई आपको मारकर चोट पहुचाया है लेकिन ऐसा नहीं बल्कि करैत सांप ने काटा होता है।
प्रश्न 6:कनखजूरा काटने का क्या लक्षण होता है? ▼
उत्तर: कनखजूरा का कटना आमतौर पर जानलेवा नहीं होता है। लेकिन असहनीय दर्द होता है।
तेज दर्द और लालिमा: काटने वाले जगह पर तेज दर्द एवं लालिमा हो जाती है।
एलर्जी: कुछ लोगों को इसके काटने से एलर्जी और कुछ लोगों को गंभीर एलर्जी हो सकती है।
बुखार: कई लोगों को इसके काटने से बुखार एवं चक्कर आने की समस्या हो सकती है।
दो छेद के निशान: इसके काटने वाले जगह पर दो छेद के निशान भी होते है।
झुनझुनी एवं रक्तस्राव: काटने के जगह पर हल्का झुनझुनी हो सकती है। एवं कुछ मामलों में हल्का रक्तस्राव भी हो सकता है।
प्रश्न 7:कनखजूरा काटने पर तत्काल प्राथमिक उपचार क्या है? ▼
उत्तर: इसके काटने पर दर्द कम करने और कतीलताओं को रोकने के लिए तुरंत इन उपायों का पालन करें --
काटने वाले स्थान को साफ करें: धीरे-धीरे साबुन एवं पानी से धोना चाहिए।
ठंड सेक लगाए: प्रभावित जगह पर ठंडे पानी से एवं संभव हो तो बर्फ से सेक लगानी चाहिए।
दर्द निवारक दवा दे: दर्द को कम करने वाली दवा को दे सकते है। किसी स्थानीय मेडिकल से दर्द निवारक दवाएं लेकर देनी चाहिए।
आकड़े का दूध: आकड़े का दूध लगाने से कनखजूरा का दर्द मिट जाता है।
यदि उपरोक्त उपायों के बाद भी दर्द बढ़ता जाए और एलर्जी भी बढ़ने लगे या घाव बढ़ने लगे तो तुरंत डाक्टर के पास लेकर जानी चाहिए।
प्रश्न 8:क्या मच्छड़ भी खतरनाक है इससे क्या हो सकता है? ▼
उत्तर: मलेरिया एवं डेंगू: ये दोनों बीमारियां मच्छड़ों से और उनके काटने से हो जाता है। इसमें कई दिनों तक बुखार,जोड़ों में दर्द आदि बनी रहती है और जिसका ठीक से एवं समय से इलाज नहीं किया जय तो मौत का भी करण बन सकती है।
चिकनगुनिया एवं जापानी इंसेफेलाइटीस (दिमागी बुखार): ये दोनों बीमारियां भी मच्छड़ों से ही होती है और बहुत ही घातक होती है।
