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एक नज़र में (Quick Summary)
ग्रामीण पर्यटन केवल शहरों की भागदौड़ से सुकून पाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह गाँव की आजीविका, महिला सशक्तिकरण और लुप्तप्राय जैव विविधता को बचाने का एक स्थायी मॉडल है।
🌱 स्थानीय आजीविका
🏡 कम्युनिटी होमस्टे
🦋 प्रकृति व वन्यजीव संरक्षण
🔄 रिवर्स माइग्रेशन
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| ग्रामीण पर्यटन के लिए होमस्टे अनुकूल प्रकृति के सान्निध्य में बसा गांव का घर |
प्रस्तावना (Introduction)
जब शहर से निकलकर इंसान माटी की सुगंध पाना चाहता है:
वर्तमान में आधुनिक शहरों और महानगरों के चमक दमक के पीछे एक अनकहा सच और तनाव छुपा हुआ है जैसे -- तेज रफ्तार जिंदगी, ट्रैफिक का शोर, प्रदूषण, भीड़ और लगातार डिजिटल स्क्रीन एवं कृत्रिम जीवन को जीना।
लोग इस माहौल को मानसिक सुकून में बदलने के लिए लोग छुट्टियों के दिनों को ऐसे जगहों पर बिताने को सोचने लगे हैं जहां सुबह की शुरुआत हार्न की आवाज से नहीं बल्कि पक्षियों की चहचहाहट से हो।
जहां भोजन किसी बड़े होटल की रसोई में नहीं बल्कि स्थानीय घर और चूल्हा में तैयार हो। ऐसे लोग पर्यटक के तौर पर खेतों में जाना चाहते हैं, स्थानीय कारीगर से मिलना चाहते हैं और स्थानीय ग्रामीण संस्कृति को करीब से देखना समझना और उसमें कुछ दिन जीना चाहते हैं।
यही से ग्रामीण पर्यटन (Rural Tourism) की अवधारणा शुरू होती है और महत्वपूर्ण हो जाती है।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की - National Strategy and Roadmap for Development of Rural Tourism in India के अनुसार ग्रामीण पर्यटन में ग्रामीण जीवन, कला, संस्कृति और विरासत को विशेष तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।
इन तरीकों में ध्यान दिया जाता है कि स्थानीय समुदाय को आर्थिक और सामाजिक लाभ मिले तथा पर्यटन स्थानीय जीवन से जुड़ सके।
पर्यटन मंत्रालय ने इस तरह के पर्यटन को कृषि पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन, प्रकृति पर्यटन, एडवेंचर और इको टूरिज्म से जोड़ दिया है।
इसीलिए ग्रामीण पर्यटन अब केवल "गांव में घूमना नहीं" बल्कि "गांव के जीवन को अनुभव करना" और उसके माध्यम से "स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना" हो गया है।
ग्रामीण पर्यटन क्या है? इसके मुख्य आयाम क्या है?
ग्रामीण पर्यटन पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था का एक ऐसा संगम है जो स्थानीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाए बिना ही टिकाऊ विकास की नींव को रखता है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन (UN Tourism) ने अपनी रिपोर्ट - Recommendations on Tourism and Rural Development,(2020) में ग्रामीण पर्यटन को परिभाषित करते हुए कहा कि -
"ग्रामीण पर्यटन वह पर्यटन गतिविधि है जिसमें आगंतुक का अनुभव प्रकृति आधारित गतिविधियों, कृषि, ग्रामीण जीवनशैली, स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प और दर्शनीय स्थलों से जुड़े ऊतकों एक विस्तृत श्रृंखला से जुड़ा होता है"
"यह पर्यटन स्थानीय समुदाय की स्वामित्व और उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी पर केंद्रित होता है "
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने अपनी "National Strategy and Roadmap for Rural Tourism (2021)" में इस बात पर विशेष बल दिया है कि ग्रामीण पर्यटन का मूल आधार कम्युनिटी ड्रिवन (समुदाय संचालित) मॉडल है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि पर्यटन से होने वाला वित्तीय लाभ का एक बड़ा हिस्सा बिचौलियों के पास जाने के जगह पर यह सीधे स्थानीय परिवारों, दस्तकारों और किसानों यह पहुंचना होना चाहिए।
ग्रामीण पर्यटन के तीन प्रमुख आधार स्तंभ:
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| शहर से गांव में आए हुए एग्री पर्यटक जैविक खेती को समझते हुए |
ऊपर के ग्रामीण पर्यटन की परिभाषा के आधार पर हम कह सकते हैं कि ग्रामीण पर्यटन मुख्य रूप से तीन जुड़े हुए आयामों का गुलदस्ता है -
1. एग्री - टूरिज्म (Agri - Tourism/Farm Tourism):
इसमें पर्यटक केवल गांव घूमने ही नहीं आते हैं बल्कि किसान परिवारों के साथ खेतों में जाकर सीधे कृषि कार्य का हिस्सा बनते हैं। फसल की कटाई, बुआई, बगान और बागवानी, गाय भैंस को दुहना और शुद्ध एवं सात्विक भोजन का आनंद लेना।
यह पर्यटन के साथ साथ किसानों को सहयोग प्रदान करता है उसके उपज को प्रदान करने की भागीदारी में। अद्भुत पर्यटन है यह और पर्यटक इसका जमकर मजा लेते हैं।
2. इको टूरिज्म और जैव विविधता संरक्षण (Eco - Tourism):
गांव और उसके आस पास मौजूद प्राकृतिक संसाधनों जैसे - स्थानीय वन, नदियां, आर्द्रभूमि और वन्यजीवों को बिना किसी प्रकार के क्षति पहुंचाए ही उनके बारे में संवेदनशीलता से अध्ययन करना।
इसमें वार्ड वाचिंग, नेचर ट्रेल्स और औषधीय पौधों की पहचान करना जैसी गतिविधियां शामिल है।
3. सांस्कृतिक एवं धरोहर पर्यटन (Cultural and Heritage Tourism):
हर गांव की अपनी अनूठी विरासत होती है। यह विरासत चाहे लोकनृत्य हो या पारंपरिक वास्तुकला एवं हस्तशिल्प ही क्यों न हो या स्थानीय त्योहार भी हो सकता है।
इस पर्यटन से विलुप्त हो रही कलाओं और पारंपरिक जीवनशैली को एक नया जीवन प्रदान करने में सहायक हो सकता है।
संक्षेप में यह वह दर्शन है जिसमें यात्री गांव से केवल यादें नहीं बल्कि अपनी पदचिह्न छोड़ता है और ग्रामीण संघर्ष एवं सामर्थ्य के प्रति एक गहरा सम्मान लेकर लौटता है।
जड़ों की ओर वापसी क्यों ?
यह पर्यटन अनुभवजन्य पर्यटन है। इसमें पर्यटक कोई प्रसिद्ध स्थल, कार्यक्रम, कला आदि को देखने के बाद उसका फोटो।लेने की जगह पर उसका प्रत्यक्ष अनुभव करना चाहता है।
वह जानना चाहता है कि -
- यह हस्तशिल्प कैसे बनता है?
- यह लोकगीत किस कहानी से जुड़ा हुआ है?
- गांव और खेतों में पानी का प्रबंधन कैसे होता है?
- यह जंगल स्थानीय लोगो के लिए क्यों और कैसे महत्वपूर्ण है?
इस अर्थ में ग्रामीण पर्यटन आधुनिक व्यक्ति को उसके अतीत से जोड़ने का माध्यम बन सकता है। अतः इसको जड़ों की ओर वापसी कहा जाता है।
ग्रामीण आजीविका को बढ़ाता और पलायन को घटता ग्रामीण पर्यटन
हमलोग जानते ही हैं कि भारतीय कृषि मानसून और बाजार के उतर चढ़ाव पर निर्भर करती है। मौसम के कुछ दिनों में गांवों में ज्यादा काम धाम भी नहीं रहता है।
इसी अनिश्चितता के कारण ग्रामीण युवक बड़े शहरों की ओर पलायन करने लगते हैं और इससे कई प्रकार की सामाजिक समस्याओं का सामना ग्रामीण और शहरी दोनों समाजों को करना पड़ता है।
ग्रामीण पर्यटन ने इसी चक्र को तोड़कर एक मजबूत गैर कृषि आय का ढांचा खड़ा करने में मदद पहुंचाया है और इसमें सहायक हुआ है।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के आजीविका अध्ययनों के अनुसार पर्यटन जैसी इस प्रकार की गतिविधियां ग्रामीण परिवारों की आय जोखिम को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर देती है।
जब एक पर्यटक गांव में कदम रखता है तब धन का प्रवाह किसी एक व्यक्ति तक ही सीमित नहीं रहता है बल्कि यह सीधे स्थानीय परिस्थितिकी तंत्र में फैल जाता है।
इससे दूध बेचने वाले से लेकर सब्जी उगाने वाले किसान तक और पारंपरिक शिल्पकार से लेकर गाइड तक में समाहित होता है।
केस स्टडी 1: सारमोली (उत्तराखंड)-- महिला सशक्तिकरण और रिवर्स पलायन:
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| सारमोली में स्थानीय महिला अपने होमस्टे में पर्यटक के स्वागत के लिए खड़ी |
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी के पास स्थित सारमोली गांव इसका सबसे जीवंत उदाहरण है। यहां की महिलाओं ने "माटी संगठन" के तहत एक अनूठा "कम्यूनिटी होम स्टे" का नेटवर्क को खड़ा किया। इसके माध्यम से -
आर्थिक स्वावलंबन:
ग्रामीण महिलाओं ने सीधे आतिथ्य सत्कार, ट्रेडिंग गाइड और वित्तीय प्रबंधन की बागडोर संभाली जिससे उनमें वित्तीय स्वावलंबन मजबूत हुई।
रिवर्स पलायन:
इसकी सफलता को देखते हुए शहरों में काम करने वाले कई युवा जो कम वेतन पर मजदूरी करते थे वापस गांव आ गए। उन्होंने इसमें शामिल होते हुए नेचर गाइडिंग और एग्रो - टूरिज्म को अपनी स्थाई आजीविका बना लिया।
परिणाम:
इससे महिलाओं को घरेलू फैसले लेने में आर्थिक रूप से आजादी मिलने लगी और पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला वाले घरों को खंडहर बनाने से बचाने में सहायता मिल गई।
इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों के लिए PM- JUGA के अंतर्गत Swadesh Drshan से जुड़ी Tribal Homestay पहल में 1,000 होमस्टे को विकसित करने का प्रावधान को शामिल किया है।
इसमें निर्माण, रेनोवेशन और ग्रामीण समुदाय की आवश्यकता के अनुसार वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।
जैव विविधता और पर्यावरण को संरक्षण कैसे मिल रही है?
आम धारणा तो यही रही है कि पर्यटन से पर्यावरण को नुकसान होता है और होता भी है। लेकिन यह "कम्युनिटी बेस्ड इको टूरिज्म" (CBET) की जो अवधारणा है इसमें उल्टा ही होता है।
इसका सीधा नियम है कि - "जब स्थानीय समुदाय को जीवित जंगल और स्वच्छ नदी से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलने लगता है तो वे स्वयं उसके सबसे बड़ा रक्षक बन जाते हैं"।
पहले की जो पारंपरिक जैव विविधता की संरक्षण की नीतियां है वह ग्रामीणों को जंगल पर अधिकार को कम करने पर जोर देती है। जबकि इसके उल्टा इको टूरिज्म उनको संरक्षण का प्राथमिक हितधारक बना देता है।
यह देशी बीजों जैसे - महुआ, कोदो सवा आदि और प्राकृतिक जल स्रोतों एवं स्थानीय वनस्पतियों के प्रति एक नया सम्मान का भाव को पैदा करता है।
⚠️ पारंपरिक दृष्टिकोण: जंगल का दोहन
लकड़ी / शिकार
➔
अल्पकालिक आय
➔
प्राकृतिक विनाश
बदलाव ▼
🌿 इको-टूरिज्म मॉडल: संरक्षण से आजीविका
जीवित प्रकृति
➔
सतत पर्यटक आय
➔
दीर्घकालिक सुरक्षा
केस स्टडी 2: खोनोमा (नागालैंड) - बंदूक का समर्पण कर बना एशिया का पहला ग्रीन विलेज:
नागालैंड के अंगामी जनजाति का "खोनोमा गांव" पर्यावरण संरक्षण का एक वैश्विक मॉडल है। करीब 1990 के दशक तक यहां शिकार करना पारंपरिक जीवनशैली का हिस्सा हुआ करता था।
इसके कारण राज्य का राज्यपक्षी "ब्लॉयथ्स ट्रागोपन" (Blyth's Tragopan) विलुप्ति के कगार पर पहुंच गया था।
इसके बाद सामुदायिक पहल शुरू किया गया। वर्ष 1998 में ग्राम परिषद् ने 20 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्र को "खोनोमा नेचर कंजर्वेशन एंड ट्रागोपन सेंच्युरी" (KNCTS) घोषित कर दिया और शिकार एवं अंधाधुंध कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।
अब ग्रामीणों को इको टूरिज्म से जोड़ा गया। उनको बंदूक की जगह दूरबीन थमाया गया। इससे जो पहले शिकारी थे वे अब देशी विदेशी वर्ड्स वॉचर्स के लिए कुशल नेचर गाइडिंग का काम करने लगे।
इतना ही नहीं बल्कि पर्यटन से होने वाली कमाई से गांव के स्कूलों और वन निगरानी दल को वित्तपोषण किया जाने लगा।आज वर्तमान में खोनोमा एशिया का पहला "ग्रीन विलेज" के रूप में जाना जाता है।
अब यहां जैव विविधता का फलना फूलना ही ग्रामीणों के कमाई का मुख्य रीढ़ है।
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| नागालैंड का राज्य का राज्यपक्षी "ब्लॉयथ्स ट्रागोपन" (Blyth's Tragopan) |
Best Tourism Villages: गांवों को नई पहचान
भारत में ग्रामीण पर्यटन अब सरकार के नीति का हिस्सा भी बन गया है। भारत के पर्यटन मंत्रालय के विजन में रूरल हेरिटेज का उपयोग करते हुए जिम्मेदार पर्यटन विकसित करना, स्थानीय नौकरी को बढ़ावा देना तथा हेरिटेज को संरक्षित करना शामिल किया गया है।
इसके साथ ही पर्यटन मंत्रालय ने National Strategy for Promotion of Rural Homestay -2022 और National Stretagy for Sustainable Tourism -2022 को प्रकाशित किया है।
अब सरकार के द्वारा ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए Best Tourism Villages Competition को शुरू किया गया है। वर्ष 2023 में इसके पहले संस्करण में 795 गांवों से आवेदन प्राप्त हुए थे।
इसी तरह से 2024 के दूसरे संस्करण में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 991 गावों से आवेदन प्राप्त हुए और इसमें से 8 श्रेणियों में 36 गांवों को विजेता चुना गया था।
इसका उद्देश्य ऐसे गांवों को पहचान देना था जो अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा को समुदाय आधारित मूल्य और सस्टेनेबिलिटी के साथ संरक्षित करते हैं।
वर्तमान में भारत में ग्रामीण पर्यटन की स्थिति क्या है?
📊 भारत में ग्रामीण पर्यटन की वर्तमान स्थिति
लेटेस्ट फैक्ट्स
🏔️ वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Villages):
सीमावर्ती क्षेत्रों में
₹145 करोड़ की लागत से
327 पर्यटन परियोजनाएं (इको-रिसॉर्ट, ट्रेक रूट, व्यू पॉइंट आदि) मंजूर की गई हैं।
[स्रोत: PIB] ↗
🌾 उत्तर प्रदेश (ग्रामीण पर्यटन हब):
प्रदेश के
234 गांवों को ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिनमें से
52 गांवों का विकास कार्य पूरा हो चुका है और 1900+ होमस्टे चिह्नित हैं।
[स्रोत: UP Tourism] ↗
✨ मध्य प्रदेश (एस्ट्रो-टूरिज्म):
प्रदेश ने
6 गांवों में डार्क-स्काई
‘Astro-Tourism’ शुरू किया है, जहां आधुनिक टेलिस्कोप और स्थानीय गाइडों के जरिए स्टार-गेजिंग अनुभव दिया जा रहा है।
[स्रोत: MP Tourism] ↗
💼 आजीविका व महिला सशक्तिकरण:
IBEF के विश्लेषण अनुसार ग्रामीण पर्यटन स्थानीय गैर-कृषि रोजगार, महिला उद्यमियों (SHGs) और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जमीनी मजबूती प्रदान कर रहा है।
[स्रोत: IBEF] ↗
वर्तमान समय में सरकार के द्वारा ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। अभी हाल ही में PIB की रिपोर्ट के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में ₹145 करोड़ की लगत से 327 पर्यटन परियोजनाएं स्वीकृत किया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा "एग्री रूरल एंड गंगे ग्राम रूरल टूरिज्म" योजना के तहत 334 गांवों में से 52 गांवों के विकास कार्य को पूरा किया जा चुका है।
मध्य प्रदेश में धार, छिंदवाड़, बैतूल, नर्मदापुरम, दमोह और उमरिया के 6 सुदूर गांवों में "एस्ट्रो टूरिज्म" हब को स्थापित किया जा रहा है।
ग्रामीण पर्यटन में गांव में कौन कौन कमाई कर सकता है?
ग्रामीण पर्यटन में सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसमें केवल होटल मालिक ही कमाई नहीं करता है। ग्रामीण पर्यटन से एक गांव में कई छोटे छोटे व्यवसाय विकसित हो सकते हैं।
इसको निम्नलिखित प्रकार से देख सकते हैं -
- होमस्टे (Homestay): गांव का परिवार अपने घर के एक हिस्से को पर्यटकों के रहने के लिए विकसित कर सकता है। इससे आय सीधे परिवार तक पहुंचती है।
- स्थानीय भोजन: बाजरे की रोटी, सत्तू, लिट्टी चोखा, महुआ से बने पारंपरिक व्यंजन, अचार, गुड़ शहद और अन्य स्थानीय उत्पाद पर्यटकों के लिए अनुभव बन सकते हैं।
- किसान: किसान खेती और बागवानी का अनुभव दे सकते हैं। गेहूं की कटाई कैसे होती है, सरसों का तेल कैसे बनता है, मधुमक्खी पालन कैसे होता है और जैविक खेती में क्या होता है आदि।
- महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs): इनके द्वारा बनाए गए स्थानीय हस्तशिल्प, खाद्य पदार्थ, अचार, मसाले, पापड़, प्राकृतिक उत्पाद, कपड़े, सजावटी सामानों आदि को बेच सकते हैं।
- स्थानीय युवा: स्थानीय युवा टूरिस्ट गाइड, फोटोग्राफर, डिजिटल मार्केटर, ड्राइवर, साइक्लिंग गाइड, ट्रैकिंग गाइड और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर जैसे कार्य कर सकते हैं।
- स्थानीय कारीगर: बांस, मिट्टी, लकड़ी, कपड़ा, धातु या अन्य पारंपरिक क्राफ्ट पर्यटकों को लुभा सकते हैं।
इस तरह से ग्रामीण पर्यटन एक नौकरी ही नहीं बल्कि कई छोटे छोटे रोजगार के इकोसिस्टम को बना सकता है।
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| पर्यटक गांव में महिला स्वयं सहायता समूह SHGs के बनते हुए उत्पादों को देखते हुए |
केस स्टडी 3: धोरडो गांव की पहचान पर्यटन की ताकत बन गई
गुजरात का धोरडो गांव (Dhordo) ग्रामीण पर्यटन का उल्लेखनीय और विश्वस्तरीय उदाहरण है।
यह गांव कच्छ के रन के पर्यटन से जुड़ा हुआ है। यह गांव वर्ष 2023 में UN Tourism द्वारा Best Tourism Village के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है।
UN Tourism के 2026 के लेख के अनुसार धोरडो गांव में वर्ष 2022 में 2,07,781 पर्यटक आए थे जो वर्ष 2023 में बढ़कर 7,28,615 हो गए और यही वर्ष 2024 में 9,50,759 हो गया फिर वर्ष 2025 में यह बढ़कर 9,90,593 तक पहुंच गई।
यह अकड़ा बताता है कि किसी ग्रामीण पर्यटन की पहचान और पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने पर पर्यटकों से होने वाली आय कितनी तेजी से बढ़ सकती है।
ग्रामीण पर्यटन की सबसे बड़ी चुनौती: गांव पर्यटन उत्पाद न बन जाए
यदि ग्रामीण पर्यटन अनियोजित तरीकों से होने लगेगा और इसपर कोई नियंत्रण भी नहीं रहेगा तब यह वरदान बनने की जगह कई तरह की चुनौतियां पैदा कर सकता है।
किसी भी संवेदनशील परिस्थितिकी तंत्र में पर्यटकों का अचानक एवं अधिक संख्या में आने से कई तरह की खतरा पैदा हो सकता है।
1. ओवर टूरिज्म और कचरा संकट हो सकता है:
पर्यटक अपने साथ शहरों से प्लास्टिक के कई प्रकार के सामानों और प्लास्टिक के पानी बोतलों को।साथ में ला सकते हैं। यह गावों एवं संवेदनशील जल स्रोतों को दूषित कर सकती है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की रिपोर्ट यह बताती है कि नाजुक पठारी और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का कोई बुनियादी ढांचा का न होने के कारण यह कचरा सीधे जैव विविधता को नुकसान पहुंचा सकता है।
2. पारंपरिक पहचान और वास्तुकला पर संकट:
जल्दी और अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में स्थानीय लोग अक्सर मिट्टी, पत्थर और लकड़ी के पारंपरिक जलवायु अनुकूल घरों को गिराकर कंक्रीट के कई मंजिल घर बनाने लगते हैं।
इससे गांव का मूल सौंदर्य नष्ट होने लगता है साथ ही वह क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के प्रति भी अधिक संवेदनशील हो सकता है।
3. संस्कृति का बाजारीकरण:
जब स्थानीय परंपराओं, लोक कलाओं और पवित्र अनुष्ठानों को केवल पर्यटकों के मनोरंजन का साधन बना दिया जाता है तब उनका वास्तविक आध्यात्मिक और सामाजिक मर्म खो सकता है।
साथ ही पर्यटन अधिक बढ़ने पर बाहरी कारपोरेट कंपनियों और बड़े रिसोर्ट्स के प्रवेश करने से स्थानीय ग्रामीण मूल उद्देश्य और लाभ से दूर हो सकते हैं।
इसीलिए ग्रामीण पर्यटन का लक्ष्य अधिक पर्यटक नहीं होना चाहिए।
बल्कि लक्ष्य होना चाहिए - "उचित संख्य में पर्यटक, बेहतर अनुभव, अधिक स्थानीय लाभ और कम से कम पर्यावरणीय दबाव"।
Green Rural Tourism हो सकता है सही समाधान
सवाल यह है कि क्या इन चुनौतियों से क्या निपटा नहीं जा सकता है? उत्तर बिल्कुल सीधा है कि नीति, नियत और जन भागीदारी के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए - "National Strategy and Roadmap for Rural Tourism (2021)" को जारी किया है।
यह नीति पर्यटकों की संख्या को बढ़ाने के बजाए स्थानीय परिस्थितिकी की वहन क्षमता के आधार पर पर्यटन के विकास पर जोर देती है।
स्थाई विकास के पांच प्रमुख सूत्र:
उपरोक्त चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मुख्य तीन सूत्र हैं जो स्थाई विकास को ध्यान से रख कर तैयार की गई है -
1. ग्राम पंचायतों का सशक्तिकरण:
होमस्टे का पंजीकरण, कचरा प्रबंधन और आगंतुकों की दैनिक सीमा को तय करने का अधिकार ग्राम सभा और वन प्रबंधन समितियों को प्रदान किया जाना चाहिए।
2. सर्कुलर इकॉनमी और स्थानीय सामग्री:
निर्माण कार्यों में स्थानीय बांस, पत्थर और मिट्टी को प्राथमिकता दिया जाना चाहिए। ऊर्जा के लिए सौर ऊर्जा और खाद के लिए गिले कचरे का पुनर्चक्रण अनिवार्य किया जाना चाहिए।
3. जिम्मेदार यात्री आचार संहिता:
पर्यटकों को गांव के सामाजिक तानें बाने को एवं जल संकट तथा प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करने के लिए पूर्व सचेत किया जाना चाहिए। स्थानीय संस्कृति को मनोरंजक की वस्तु बनाने की बजाय उसको सम्मानपूर्वक प्रस्तुति किया जाना चाहिए।
4. नेचर फर्स्ट की नीति:
जल, जंगल, जमीन और बायोडायवर्सिटी को पर्यटकों की शर्तों पर किसी तरह का नुकसान न हो इसकी नीति बनानी चाहिए। बल्कि पर्यटकों को इसके संरक्षण में भागीदार बनाने को भी अनिवार्य कर देना चाहिए।
5. छोटा और सस्टेनेबल पर्यटन:
छोटे पैमाने पर, नियंत्रित और लंबे समय तक चलने वाला पर्यटन पर फोकस करना चाहिए। यह कई बार पड़े पर्यटन से अधिक उपयोगी हो सकता है।
UN Tourism का रूरल टूरिज्म फ्रेमवर्क भी इकोनॉमिक, सोशल और पर्यावरण सस्टेनेबल को एक साथ देखने की आवश्यकता पर बल देता है।
कैसा होना चाहिए Green Rural Tourism?
एक आदर्श ग्रामीण पर्यटन मॉडल में पाँच बातें होनी चाहिए:
1
Community First
गाँव के लोगों की भागीदारी सबसे पहले हो।
2
Local Economy First
स्थानीय भोजन, उत्पाद, गाइड, परिवहन और हस्तशिल्प को प्राथमिकता मिले।
3
Nature First
जल, जंगल, मिट्टी और biodiversity को पर्यटन की कीमत पर नुकसान न हो।
4
Culture with Respect
स्थानीय संस्कृति को मनोरंजन की वस्तु बनाने के बजाय सम्मानपूर्वक प्रस्तुत किया जाए।
5
Small but Sustainable
छोटे पैमाने पर, नियंत्रित और लंबे समय तक चलने वाला tourism कई बार बड़े mass tourism से अधिक उपयोगी हो सकता है।
निश्चय ही यदि इन इन नीति और नियमों को नियत के साथ जन भागीदारी के साथ ही साथ पर्यटकों को भी जागरूक करके प्रयास किया जाए तो इन संभावित चुनौतियों से निपटा जा सकता है और सही दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
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| ग्रामीण पर्यटन भविष्य के सस्टेनेबल ग्रामीण पर्यटन को दर्शाता दृश्य |
निष्कर्ष (Conclusion)
ग्रामीण पर्यटन केवल वीकेंड बिताने या शहर के तनाव से भागने का अस्थाई माध्यम नहीं होना चाहिए। बल्कि इसको जलवायु परिवर्तन के दौर में भारत के समावेशी और सतत् विकास की रीढ़ बनानी चाहिए।
जब पर्यटक किसी गांव में कदम रखता है तब वह केवल एक अतिथि ही नहीं बल्कि उस गांव की परिस्थितिकी और संस्कृति का साझीदार भी बनता है।
यदि हम प्रकृति की वहन क्षमता का सम्मान करते हुए पर्यटन को स्थानीय समुदायों के हाथों में ही रखनी चाहिए। इससे स्थानीय युवाओं का पलायन भी रुकेगा और हमारी लुप्तप्राय जैव विविधता एवं माटी भी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहेगी।
अतः इस प्रकार से कहा जा सकता है कि - "शहरों की ओर जाने वाली विकास की सड़क के साथ अब एक दूसरी सड़क भी बन रही है -- जो लोगों को कुछ समय के लिए अपनी जड़ों की ओर वापस ले जा रही है"।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)
1. ग्रामीण पर्यटन क्या है?
"ग्रामीण पर्यटन वह पर्यटन गतिविधि है जिसमें आगंतुक का अनुभव प्रकृति आधारित गतिविधियों, कृषि, ग्रामीण जीवनशैली, स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प और दर्शनीय स्थलों से जुड़े ऊतकों एक विस्तृत श्रृंखला से जुड़ा होता है"
"यह पर्यटन स्थानीय समुदाय की स्वामित्व और उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी पर केंद्रित होता है "
2. क्या ग्रामीण पर्यटन और कृषि पर्यटन एक ही है?
नहीं! कृषि पर्यटन ग्रामीण पर्यटन का ही एक हिस्सा है।इसमें पर्यटक केवल गांव घूमने ही नहीं आते हैं बल्कि किसान परिवारों के साथ खेतों में जाकर सीधे कृषि कार्य का हिस्सा बनते हैं। फसल की कटाई, बुआई, बगान और बागवानी, गाय भैंस को दुहना और शुद्ध एवं सात्विक भोजन का आनंद लेता है।
3. क्या गांव में होमस्टे शुरू किया जा सकता है?
हां! लेकिन संबंधित राज्य या स्थानीय प्रशासन के नियमों और लागू रजिस्ट्रेशन और वर्गीकरण के आवश्यकताओं का पालन करना अनिवार्य है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने Rural Homestay के लिए राष्ट्रीय रणनीति भी जारी किया है।
4. ग्रामीण पर्यटन से गांव में कौन कौन कमाई कर सकता है?
ग्रामीण पर्यटन से होमस्टे संचालक, किसान, स्थानीय गाइड, महिला SHGs, कारीगर, दुकानदार, स्थानीय भोजन प्रदाता, परिवहन प्रदाता उर अन्य छोटे उद्यमी इससे जुड़े अवसर प्राप्त कर लाभ और आय कर सकते हैं।
5. Best Tourism Villages क्या है?
यह ऐसी पहल है जिसमें उत्कृष्ट ग्रामीण पर्यटन destinations को उनकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा, sustainability तथा community-based development के आधार पर पहचान दी जाती है। भारत में National Best Tourism Villages Competition और UN Tourism का अंतरराष्ट्रीय Best Tourism Villages programme अलग-अलग पहलें हैं।
6. क्या ग्रामीण पर्यटन से पलायन कम हो सकता है?
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के आजीविका अध्ययनों के अनुसार पर्यटन जैसी इस प्रकार की गतिविधियां ग्रामीण परिवारों की आय जोखिम को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर देती है। यह स्थानीय रोजगार और उद्यम का अवसर पैदा करके कुछ आर्थिक कारणों को कम करके पलायन को रोकने में मदद कर सकता है।
लेकिन इसे पलायन को रोकने का अकेला समाधान नहीं मानना चाहिए।
7. क्या ग्रामीण पर्यटन से पर्यावरण को नुकसान भी हो सकता है?
हां! यदि पर्यटकों की संख्या, पानी की खपत, कचरा निर्माण,और यातायात स्थानीय वहन क्षमता से अधिक हो जाए तो यह पर्यावरण पर दबाव डाल सकता है। इसीलिए सस्टेनेबल और जिम्मेदार पर्यटन जरूरी है।
8. क्या भारत में Tribal Homestay का कोई सरकारी पहल है?
हां !PM-JUGA के अंतर्गत Swadesh Darshan से जुड़ी Tribal Homestay पहल में 1,000 homestays विकसित करने का प्रावधान है, जिसमें निर्माण, renovation और village community requirements के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान बताया गया है।
संबंधित विषय:
स्रोत एवं संदर्भ (Sources & References)
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