🍏 ग्रीन गांव डॉट इन (GreenGaon.In), सतत् विकास, स्वास्थ्य,भारतीय संस्कृति, वैदिक जीवनशैली, योग, स्वदेशी विचार,ग्रामीण भारत और पर्यावरण से जुड़ी उपयोगी जानकारी प्रदान करता है।
आजकल लोग शहरों की भाग दौड़ भरी जिंदगी, ट्रैफिक, प्रदूषण और स्क्रीन टाइम से ऊब चुके लोग छुट्टियों के दिन कुछ दिनों के लिए ऐसे जगह गुजारना चाहते हैं जहां सुकून की सांस ले सकें।
और इस सुकून भरी सांस को पाने के लिए वह गांवों में खुले खेत, मिट्टी की खुशबू, पक्षियों की चहचहाहट और चूल्हे की रोटी एवं बिल्कुल देशी भोजन करना चाहते हैं।
यही शहर के लोग जब पर्यटक बनकर गांवों में जाते हैं तो इसको रूरल टूरिज्म, इको टूरिज्म या एग्री टूरिज्म कहा जाता है।
इसी रूरल टूरिज्म के लिए गांवों में होटलों से अलग हटकर प्रकृति के सानिध्य वाला रहने का जो जगह होता है उसको होम स्टे कहा जाता है। यह आज के समय में ग्रामीण परिवारों के लिए एक उभरता हुआ व्यवसायिक अवसर है।
होमस्टे का मतलब कमरे को किराए पर देना नहीं है बल्कि इसकी असली ताकत है -- स्थानीय घर, स्थानीय भोजन, स्थानीय संस्कृति और स्थानीय अनुभव।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अनुसार - होमस्टे पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के सशक्त माध्यम के साथ साथ यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय युवाओं के लिए रिवर्स माइग्रेशन का मजबूत जरिया भी है।
इसीलिए भारत सरकार ग्रामीण और समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। फरवरी 2026 में पर्यटन मंत्रालय ने होमस्टे विकसित करने के लिए "स्वदेश योजना" के तहत दिशा निर्देश भी जारी किए हैं।
लेकिन पूरे भारत में होमस्टे खोलने के लिए एक ही लाइसेंस या एक ही नियम नहीं है। राज्य सरकार, स्थानीय निकाय, पर्यटन विभाग और स्थानीय व्यवसाय के अनुरूप अतिरिक्त अनुमति और लाइसेंस की आवश्यकता हो सकती है।
इस लेख में इन्हीं बातों को गहराई से समझने का प्रयास किया गया है। तो चलिए एक एक करके इन बातों को देखते और समझते हैं।
ग्रामीण होमस्टे क्या है? यह होटल से कैसे अलग है?
अक्सर लोगों को लगता है कि होमस्टे एक छोटा होटल या लॉज होता है जबकि यह मूल रूप से और मूल भावना के हिसाब से उसके ठीक उल्टा होता है।
होमस्टे ऐसी आवास व्यवस्था है जिसमें पर्यटक किसी स्थानीय परिवार के घर या उसके हिस्से में रहकर स्थानीय जीवन, भोजन, संस्कृति और वातावरण का अनुभव करता है।
होटल और होमस्टे में मुख्य अंतर यह है कि होमस्टे में केवल कमरा ही उत्पाद नहीं होता बल्कि स्थानीय अनुभव भी उत्पाद का हिस्सा होता है।
होमस्टे का परिवार भी वही रहता है और पर्यटक उस परिवार का हिस्सा बनकर स्थानीय जीवनशैली का अनुभव करते हैं। सरकारी दिशा निर्देश के अनुसार एक होमस्टे में 1-6 तक ही अतिथि कक्ष की अनुमति होती है।
वही होमस्टे को कमर्शियल टैक्स और कमर्शियल बिजली आदि से अलग रखा गया है और इसको घरेलू दरों के अंतर्गत रखा गया है।
गांव में होमस्टे शुरू करने के लिए कौन सी जगह सही है?
हर गांव होमस्टे शुरू करने के लिए सही नहीं हो सकता है। व्यवसाय शुरू करने से पहले इन 8 चीजों की जांच कर लेनी चाहिए -
क्या गांव के आस पास पर्यटन स्थल है?
क्या वहां पर्यटक नियमित रूप से आते हैं?
निकटतम रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड कितनी दूर है?
क्या सड़क से गांव आसानी से पहुंचा जा सकता है?
क्या मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट अच्छा है?
क्या पानी और बिजली की व्यवस्था अच्छा है?
क्या गांव में स्थानीय भोजन या विशेष सांस्कृतिक अनुभव है?
क्या आस पास के क्षेत्रों में होटल और लॉज की कमी है?
यदि इनमें से अधिकतर का उत्तर हां में है तब यहां होमस्टे की स्थापना करना बेहतर हो सकता है।
होमस्टे के लिए बुनियादी और जरूरी सुविधाएं
पुराने घर को रेनोवेशन करने के बाद बिल्कुल साफ सुथरा होमस्टे का रूम
गांव का सदा जीवन तो पसंद करना है ही लेकिन इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि पर्यटक बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छता के बिना रह लेंगे।
एक सफल होमस्टे के लिए निम्नलिखित बुनियादी सुविधाएं अत्यंत आवश्यक होती है --
1.स्वच्छ और आधुनिक शौचालय:
कमरों के साथ अटैच्ड वेस्टर्न टॉयलेट और 24 घंटे पानी एवं गर्म पानी के लिए गीजर की अनिवार्य व्यवस्था होनी ही चाहिए।
2. बिस्तर और स्वछता:
साफ सुथरे कॉटन गद्दे, हमेशा धूलि हुई और साफ प्रिंटेड चादरें और मच्छरदानी या नेट विंडो।
3. सुरक्षित पेयजल:
पर्यटकों के लिए RO या प्रमाणिक पारंपरिक फिल्टर का शुद्ध पानी जरूर होनी चाहिए।
4. वर्क फ्रॉम विलेज सेटअप:
डिजिटल प्रफेशनल्स और फ्रीलांसर्स शांत जगह पर रहकर काम भी करते रहते हैं। उनके लिए स्थिर वाईफाई कनेक्शन, इन्वर्टर या सोलर पावर बैकअप जरूर होनी चाहिए।
कमरे और बरामदें में आरामदायक कुर्सी टेबल इसी जरूरी चीज का हिस्सा है।
भारत में होमस्टे शुरू करने से पहले कानूनी कागजी कार्रवाई को पूरी करना पहला जरूरी कदम है ताकि भविष्य में किसी तरह का कोई परेशानी न खड़ा हो जाए।
लेकिन भारत में होमस्टे शुरू करने के लिए ऐसा कोई एक यूनिवर्सल कानून नहीं है जो हर गांव और हर राज्य में समान रूप से लागू होता हो।
इसीलिए शुरुआत में अपने राज्य के पर्यटन मंत्रालय और विभाग एवं स्थानीय प्रशासन से एप्लिकेशन रजिस्ट्रेशन और रिकग्निशन की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।
राज्य के अनुसार कुछ इस तरह की कानूनी नियम और जरूरत लागू हो सकती है -
पर्यटन मंत्रालय रजिस्ट्रेशन
होमस्टे रिकग्निशन
लोकल बॉडी परमिशन
प्रॉपर्टी ओनरशिप डॉक्यूमेंट्स
बिल्डिंग यूज्ड परमिशन
पुलिस वेरिफिकेशन या रिक्वायरमेंट
फायर सेफ्टी रिक्वायरमेंट
फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन
GST जहां जरूरी हो
विदेशी गेस्ट रिपोर्टिंग रिक्वायरमेंट
कचरा प्रबंधन आदि
साइनबोर्ड और ट्रेड परमिशन जहां लागू हो
यह अलग अलग राज्यों के लिए अलग अलग हो सकता है। यह स्थानीय निकाय और राज्य के कानून पर निर्भर करता है।
होमस्टे शुरू करने से पहले कानूनी कागजी कार्रवाई के लिए सबसे पहले इन पांच कामों को कर लेना चाहिए -
1.NIDHI+ पोर्टल पर पंजीकरण (पर्यटन मंत्रालय):
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के आतिथ्य उद्योग के लिए "NIDHI - National Integreted Database of Hospitality industry" पोर्टल बनाया गया है। इस पर आप अपने होमस्टे को - "Incredible India Bed & Breakfast Homestay" की श्रेणी में पंजीकृत करा सकते हैं।
2. राज्य पर्यटन विभाग में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन:
प्रत्येक राज्य का अपना पर्यटन विकास बोर्ड होता है। अतः राज्य पर्यटन विभाग की अधिकारिक वेबसाइट पर होमस्टे योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करें।
3. स्थानीय अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC):
स्थानीय ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव से एक साधारण अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है। इसमें यह होता है कि इस होमस्टे के संचालन में गांव को कोई आपत्ति नहीं है।
इसके साथ ही परिसर में चालू हालत में अग्निशामक सिलेंडर और आपातकालीन निकास की व्यवस्था होनी चाहिए। इसका भी प्रमाणपत्र ले लेना चाहिए। हालांकि होटल जैसा कड़ा नियम इसमें नहीं होता है।
4. विदेशी पर्यटकों के नियम:
यह नियम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सबसे पहले होमस्टे शुरू होने पर अपने निकटतम थाने में सूचना देनी चाहिए और साथ ही अतिथियों के भौतिक सत्यापन के लिए रजिस्टर होनी चाहिए।
Bureu of Immigration के अनुसार यदि आपके होमस्टे में विदेशी पर्यटक रुकते हैं तब विदेशी नागरिकों के संबंध में निर्धारित Form II, Form III यानी Form A/Form C -Reporting Requirment के लिए BoI (Bureau of Immigration) के पोर्टल पर उनका विवरण 24 घंटे के अंदर दर्ज करना अनिवार्य होता है।
इसीलिए यदि आप अपने होमस्टे में विदेशी पर्यटकों को ठहराने वाले हैं तो शुरुआत से ही संबंधित FRRO/FRO रिपोर्टिंग प्रक्रिया को समझ लेनी चाहिए।
5. FSSAI रजिस्ट्रेशन खाद्य सुरक्षा के लिए:
यदि आप अपने होमस्टे में मेहमानों को भोजन उपलब्ध कराते हैं और उनसे शुल्क लेते हैं तब "भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)" का ₹100 वाला बेसिक फूड रजिस्ट्रेशन अवश्य प्राप्त कर लीजिए।
यदि ₹12 लाख से ऊपर की आय भोजन से होती है तब फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य हो जाएगा।
6. क्या GST भी लेना होगा ?
हां GST रजिस्ट्रेशन तो करा ही लेनी चाहिए। कितना GST शुल्क लगेगा यह अपने CA से समझ सकते हैं। यदि आप ₹7,500 प्रति यूनिट प्रतिदिन का बिक्री करते हैं तो 12% GST लगता है।
होमस्टे में मेहमानों को पारंपरिक स्थानीय व्यंजन परोसता ग्रामीण परिवार
होमस्टे शुरू करने में कितनी लागत आएगी?
यदि आपके पास पहले से ही पुश्तैनी घर है तो आपको नए घर बनवाने की जरूरत नहीं है। आप उसी पुराने घर को रेनोवेशन करेंगे तो सबसे बढ़िया विकल्प रहेगा।
पर्यटकों को भी पुरातन का अहसास होगा।
अनुमानित खर्च तालिका 2 कमरों के लिए:
मद (Expense Head)
अनुमानित लागत (₹)
विवरण
बाथरूम निर्माण / नवीनीकरण
₹70,000 – ₹1,20,000
2 बाथरूम में वेस्टर्न सीट, टाइल्स, प्लंबिंग और गीजर
कमरे की साज-सज्जा व बिस्तर
₹50,000 – ₹80,000
लकड़ी की खाट/तख्त, हैंडलूम गद्दे, तकिए, पर्दे
पेंटिंग व पारंपरिक लुक
₹25,000 – ₹40,000
चूने की पुताई, गेरू/मिट्टी का प्लास्टर, स्थानीय कलाकारी
पावर बैकअप (इनवर्टर/सोलर)
₹35,000 – ₹60,000
1-2 kVA इनवर्टर, पंखे, लाइट और वाई-फाई बैकअप
आंगन व सिटिंग एरिया (Outdoor)
₹15,000 – ₹30,000
बांस की कुर्सियां, चारपाई, मिट्टी के गमले, लालटेन लुक
विविध (फर्स्ट एड, बर्तन, डेकोर)
₹10,000 – ₹20,000
बेसिक पीतल/कांसे या मिट्टी की क्रॉकरी, फर्स्ट-एड किट
कुल अनुमानित निवेश
₹2,05,000 – ₹3,50,000
न्यूनतम पूंजी में 2 कमरों की शुरुआत
इस प्रकार से तालिका से स्पष्ट हो जाता है कि अनुमानित कुल लागत करीब 2 से 4 लाख तक हो सकता है। यदि भवन निर्माण करना हो तो यह लागत और भी बढ़ जाएगी।
सरकारी योजनाओं से सब्सिडी और लोन कहा से मिल सकता है
सब्सिडी के मामले में यह ध्यान रखना है कि इंटरनेट पर देख कर किसी भी योजना को होमस्टे सब्सिडी नहीं मान लेना चाहिए। वास्तव में इसपर सहायता तीन स्तरों पर मिल सकती है --
1. राज्य पर्यटन विभाग:
कई राज्यों ने अपने पर्यटन और होमस्टे नीति के माध्यम से सब्सिडी और प्रोत्साहन प्रदान करते हैं। इसीलिए सबसे पहले अपने राज्य की पर्यटन नीति को देखना चाहिए।
2. केंद्रीय योजनाएं:
PMEGP जैसे क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम नए छोटे व्यवसायियों को स्पोर्ट करते हैं।MSME मंत्रालय की जानकारी में सामान्य वर्ग के लिए ग्रामीण श्रेणी में 25% तक मार्जिन मनी सब्सिडी और विशेष श्रेणी के लिए 35% तक की व्यवस्था दी गई है। कुछ शर्ते लागू होती है।
3. बैंक लोन:
यदि सब्सिडी उपलब्ध नहीं है तब व्यवसायी बैंक से टर्म लोन, MSME बिजनेस लोन, मुद्रा लोन और बैंक द्वारा सुझाए अन्य लोन पर विचार कर सकते हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा ग्रामीण स्तर पर होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए कुछ आकर्षक वित्तीय योजनाएं चला रही है जिनमें से निम्न प्रमुख है -
1. उत्तराखंड: दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास (होमस्टे) विकास योजना:
इस योजना के तहत "पर्वतीय क्षेत्रों" के लिए कुल प्रोजेक्ट लागत का 50% और अधिकतम ₹15 लाख तक कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान है। साथ ही पहले 5 वर्ष तक के लिए बैंक लोन के ब्याज पर ₹1.5 लाख तक की छूट का भी प्रावधान है।
वही "मैदानी क्षेत्रों" के लिए प्रोजेक्ट लागत का 25% और अधिकतम ₹7.5 लाख तक सब्सिडी का प्रावधान है। जबकि बैंकों के लोन के ब्याज में ₹1 लाख तक का छूट का प्रावधान भी है।
इसमें मुख्य शर्त यह है कि आवेदक उत्तराखंड राज्य का मूल निवासी होना चाहिए और 1 से 6 कमरों तक का निर्माण या रेनोवेशन कर रहा हो।
2. मध्य प्रदेश रूरल टूरिज्म पॉलिसी:
मध्य प्रदेश में इस पॉलिसी के तहत राज्य के चयनित ट्राइबल क्लस्टर और हेरिटेज में होमस्टे निर्माण के लिए 40% तक वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है।
3. राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना:
राजस्थान में ग्रामीण पर्यटन योजना के तहत स्टांप ड्यूटी में 100% तक का छूट और SGST पुनर्भरण और कमरों के लिए आवासीय बिजली दर ही लगने का लाभ प्रदान किया जाता है।
4. पीएम जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान:
जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे के विकास के लिए 2 नए कमरों के निर्माण पर ₹5 लाख तक और मौजूदा कमरा के नवीनीकरण करने पर ₹3 लाख तक की सहायता का प्रावधान है।
बिहार में होमस्टे शुरू करने वालों के लिए खास अवसर
बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2023 में नई पर्यटन नीति में पर्यटन प्रोजेक्ट्स और इससे संबंधित सेवाएं शुरू करने के लिए इंसेंटिव और सब्सिडी के प्रावधान की व्यवस्था की गई है।
बिहार पर्यटन विभाग वर्तमान में "CM HomeStay Scheme 2026" योजना चल रही है। इसके तहत पात्र होमस्टे प्रोजेक्ट के लिए ₹2.5 प्रति रूम तक और अधिकतम 4 कमरों के लिए ₹10 लाख तक वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।
महिलाओं,SHGs और 18-25 वर्ष के युवाओं के लिए अतिरिक्त ₹25,000 प्रति कमरा तक की इंसेंटिव प्रदान किया जाएगा। इस तरह से कुल सहायता ₹11 लाख तक हो सकता है।
यह होमस्टे नोटिफाइड किए गए पर्यटन क्षेत्रों के आस पास निर्धारित क्षेत्रों में ही होने चाहिए। अतः आवेदन करने से पहले आधिकारिक पर्यटन वेबसाइट पर पुष्टि कर लेना चाहिए।
बिहार में कौन कौन से क्षेत्र होमस्टे के लिए संभावित है?
वर्ष 2026 की मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना योजना में कई प्रमुख पर्यटन स्थलों के आस पास के क्षेत्रों में होमस्टे प्रोजेक्ट शुरू करने को शामिल किया गया है।
इसमें उदाहरण के तौर पर -
बोधगया - विष्णुपद - राजगीर
नालंदा - वैशाली - जमुई
वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व क्षेत्र
पूर्वी चंपारण
कैमूर - रोहतास - जहानाबाद
बांका - मुंगेर - नवादा
जैसे पर्यटन क्षेत्रों को शामिल किया गया है। हालांकि पात्रता पूर्ण पर लागू नहीं माननी चाहिए। योजना में अधिसूचित क्षेत्र और दूरी जैसी शर्ते महत्वपूर्ण हो सकती है।
पर्यटकों के लिए खास अनुभव वाला होमस्टे कैसे बनाएं?
पर्यटक गांव में सिर्फ अच्छे होटल में सोने नहीं आते हैं बल्कि वह "अनुभव" (Experiential Travels) खरीदने आते हैं। अगर आपका अनुभव अद्वितीय है तो लोग ज्यादा पैसा भी देने को तैयार होते हैं और आपका मार्केटिंग भी कर देते हैं।
पर्यटक होमस्टे संचालक के साथ ग्रामीण खेतों में व्यवहारिक भ्रमण करते हुए
इसके लिए आप निम्नलिखित बातों पर ध्यान रखें -
एग्री टूरिज्म का अनुभव कराएं:
पर्यटकों को साथ में लेकर खेत में सब्जियां तोड़ने जाए, मटर छिलने, गन्ने का रस पीने खेत पर, गाय भैंस को चारा खिलाने और दूध निकालने का अनुभव प्रदान करें।
इसी तरह का कोई विशेष अनुभव यदि आपके क्षेत्र में हो तो जरूर प्रदान करें।
देशी खान पान का अनुभव कराएं:
उपले पर बना लिट्टी चोखा, लाल दही और बिनोला यानी मथनी से मथ कर निकाली हुई मक्खन, गांव के खेत का साग भात, जंगली भोजन, महुआ का व्यंजन आदि देशी खान पान का अनुभव जरूर कराएं।
हस्तशिल्प और कला कार्यशाला:
यदि गांव में कोई कुम्हार है तो मेहमान को चाक पर मिट्टी के दिए या बर्तन बनाते हुए दिखाए और बनाने का अनुभव कराएं, खटिया बुनने का अनुभव, पटसन के रेशें से रस्सी बनाना आदि अनुभव जरूर कराएं।
विलेज वॉक हेरिटेज टूर का अनुभव:
शाम को सूर्यास्त के समय गांव की पगडंडियों, नहरों, तालाबों, पुरानी मंदिर और नदियों के किनारे या कोई विशेष जगह जो नजदीकी क्षेत्र में हो।
रात्रि अलाव और लोक संगीत:
सर्दियों में अलाव के चारों ओर बैठकर गांव का लोक गीत या लोक परंपराओं आदि का प्रदर्शन का अनुभव कराएं।
इस प्रकार की कोई और भी विशिष्ट सांस्कृतिक या स्थानीय कला और लोक कला प्रचलित हो सकती है, स्थानीय व्यंजन और मिठाइयां हो सकती है या GI Tags उत्पाद हो सकते हैं।
इनका करीब से व्यवहारिक अनुभव अपने मेहमानों को जरूर कराए।
होमस्टे के लिए मार्केटिंग कैसे करें?
होमस्टे खोल देना तो केवल आधा काम ही है बाकी आधा काम है पर्यटकों को अपना गांव तक लाना। इसके लिए आपको डिजिटल तकनीक का भी सहारा लेना होगा -
1.Google Business Profile:
अपने होमस्टे का Google Business Profile बनाए - गूगल मैप पर अपने होमस्टे का सटीक नाम दर्ज करके अपने कमरों, चूल्हों, व्यंजन, स्थानीय विशेषताओं आदि का हाई रिजॉल्यूशन तस्वीर को अपलोड करें।
जो भी मेहमान आए उनसे 5 स्टार गूगल रिव्यू लिखने के लिए विनम्रतापूर्वक आग्रह करें।
2. ऑनलाइन ट्रेवल एजेंसिया (OTAs):
Airbnb - यह ग्रामीण और इको स्टे के लिए भारत में सबसे लोकप्रिय मंच है। यहां "Farm Stay" या "Nature" कटेगरी को चुने और इसपर रजिस्टर कर दे।
इसी तरह से MakeMyTrip और Booking.com तथा Agoda प्लेटफार्म पर भी अपने होमस्टे का बढ़िया से रजिस्ट्रेशन कर दीजिए।
3. इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब कंटेंट:
इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर अपने होमस्टे का प्रोफाइल बनाइए। उसपर छोटे छोटे वीडियो अपलोड कीजिए -
चूल्हे पर फूलती रोटी की वीडियो
सुबह के कोहरे और फूलों पर ओस की बूंदों के विडियो
पक्षियों के आवाज का वीडियो
कुम्हार के चाक का वीडियो - आदि
इस तरह की विशेषताओं वाला अन्य विभिन्न वीडियो बनाकर अपलोड कीजिए और अपने होमस्टे को प्रमोट कीजिए।
होमस्टे से कमाई कितनी होगी ?
होमस्टे शुरू करने में लगत और आय का एक अनुमानित अकड़ा
होमस्टे से कमाई कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे - रूम रेंट, रूम की संख्या और महिने में कितना दिन बुक रहता है। इसके अलावा भोजन एवं अन्य वैल्यू एडिशन सेवाएं और स्थानीय उत्पादों की बिक्री से भी आय होती है।
इसके अलावा आप कैसी और किस तरह की सुविधाएं प्रदान करते हैं। आप तीन तरह के होमस्टे रख सकते हैं जैसे - छोटा होमस्टे प्रति कमरा ₹1200 से ₹1500, स्टैंडर्ड रूरल होमस्टे ₹2000 से ₹2200 और प्रीमियम रूरल होमस्टे एक्सपीरियंस ₹2500 से ₹2800 तक रख सकते हैं।
यदि मान लेते हैं आपके पास 2 कमरा है और रेट ₹2500 है और यदि महीने के 15 दिन बुक रहते हैं तो -
15 x 2500 = 30,000 x 2 = ₹60,000
यदि भोजन से अतिरिक्त मासिक आय ₹10,000 करते हैं तो कुल आय ₹70,000 होती है।
मासिक खर्चे क्या हो सकते हैं?
मासिक खर्चे कुछ इस तरह से हो सकते हैं -
राशन और भोजन सामग्री - ₹12,000
बिजली, वाईफाई और लांड्री - ₹6,000
मेंटेनेंस और लेबर सहायक - ₹12,000
अन्य - ₹5,000
इस तरह से अनुमानित कुल खर्च - ₹35,000 हो सकते हैं।
शुद्ध आय - कुल आय ₹70,000 - कुल खर्च ₹35,000 = ₹35,000
यह अनुमानित न्यूनतम आय है। यदि महीने के बुकिंग दिन और भी बढ़ जाए तो यह आय और अधिक हो सकती है। साथ ही यदि अन्य स्थानीय उत्पाद बिक्री करते हैं तो यह आय और भी बढ़ सकती है।
होमस्टे के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां क्या रखनी चाहिए?
होमस्टे शुरू करने के साथ कुछ मूल सावधानियां है जिसका पालन करना जरूरी होता है। साथ ही कुछ गलतियां भी जाने या अनजाने में लोग करते हैं उनसे भी बचना चाहिए।
मुख्य सावधानियां इस प्रकार से है -
1. गांव की संस्कृति और मर्यादा:
बिना इसके मूल उद्देश्य खो जाएगा और बिना बताए परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
अतः मेहमानों को पहले ही विनम्रता से बता देनी चाहिए कि वो गांव की रीति रिवाजों और शांति का सम्मान करेंगे। देर रात तक तेज आवाज में डीजे या अन्य अनुचित व्यवहार की अनुमति बिल्कुल ही न दे।
2. सुरक्षा सर्वप्रथम रखे:
सुरक्षा की दृष्टि से सबसे पहले "प्राथमिक सुरक्षा कीट" (First Aid) हमेशा अपडेट रहनी चाहिए। दूसरा सांप बिच्छू रोधी प्राथमिक दवाई और स्थानीय डाक्टर एवं आपातकालीन डाक्टर की व्यवस्था एवं फोन नं हमेशा रिसेप्शन और डायरी में रखें।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस का नं एवं संपर्क रखनी चाहिए। सभी आवश्यक नियमों का पालन करना चाहिए।
3. ग्रीन होमस्टे और प्लास्टिक मुक्त वातावरण:
अपने होमस्टे के पूरे परिसर को प्लास्टिक मुक्त रखे। प्लास्टिक की बोतलों की जगह कांच और तांबे के बोतलों को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही जितना संभव हो सके मिट्टी के बर्तनों का भी उपयोग करनी चाहिए।
आप ग्रीन होमस्टे के लिए -
सोलर बिजली, सोलर वाटर और हीटर।
होमस्टे को रेनवाटर हार्वेस्टिंग बनाए।
स्थानीय फूल, पत्तियां और फल लगाए।
नीम, सीता अशोक आदि पेड़ लगाए।
इन ग्रीन तकनीक का इस्तेमाल अपने होमस्टे में जरूर करनी चाहिए। इससे मेहमान भी प्रभावित होते हैं।
4. इन गलतियों से बचिए:
होमस्टे शुरू करने में हमेशा इन गलतियों से बचने का प्रयास करनी चाहिए -
केवल सुंदर कमरा बनाना
इंटीरियर में ज्यादा पैसा खर्च करना
साफ सफाई को हल्के में लेना
नियमों को ठीक से न जानना
सिर्फ एक बुकिंग प्लेटफार्म पर निर्भरता
गलत तस्वीर डालना
पानी, बिजली और इंटरनेट की बैकअप न रखना
पर्यावरण की अनदेखी करना
यदि आपको सच में होमस्टे व्यवसाय में सफल होना है और आने वाले दिनों में लाखों में इंकम को पहुंचना है तो ऊपर बताए गए गलतियों को भूलकर भी अपनानी नहीं चाहिए।
ग्रामीण होमस्टे से अच्छा अनुभव पाकर वापस जाते समय विदाई लेते पर्यटक
निष्कर्ष (Conclusion)
गांव में होमस्टे केवल कमरा किराए पर देने का व्यवसाय नहीं है। बल्कि यह अपनी संस्कृति, मिट्टी और मेहमानवाजी को दुनियां के सामने गर्व से प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
इसमें ग्रामीण पर्यटन, स्थानीय रोजगार, कृषि, संस्कृति, भोजन और पर्यावरण को एक साथ जोड़ने वाला भावपूर्ण मॉडल समाहित है। वह भी कम से कम निवेश में यह शुरू हो सकता है।
सरकार के स्तर पर भी ग्रामीण और समुदाय आधारित पर्यटन पर ध्यान बढ़ रहा है। पर्यटन मंत्रालय द्वारा 2026 में जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे के लिए जारी किया गया दिशा निर्देश इसका उदाहरण है।
लेकिन इसका असली ताकत सरकारी सहायता और सब्सिडी नहीं है। बल्कि लंबे समय की सफलता के लिए साफ सफाई, सुरक्षा, इको फ्रेंडली वातावरण, सांस्कृतिक और स्थानीय अनुभव एवं व्यंजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि आप भी किसी ऐसे गांव में रहते हैं और यदि अगल बगल कोई हेरिटेज या पर्यटन वाला जगह है और आपका पुराना मकान भी है तो आप होमस्टे खोल सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)
1. क्या गांव में होमस्टे शुरू करने के लिए कमर्शियल बिजली कनेक्शन लेना अनिवार्य है?
नहीं! भारत के अधिकांश राज्यों की होमस्टे नीति के अनुसार यदि कमरों की संख्या 1 से 6 के बीच है और मालिक वही रहता है तब संपति पर घरेलू यानी आवासीय बिजली और पानी की दरें ही लागू होती है।
2. अगर मेरे पास नया मकान नहीं है तो क्या पुराने मिट्टियाँ खपरैल के घर से होमस्टे की शुरुआत हो सकती है?
बिल्कुल हां! आजकल पर्यटक पक्के कंक्रीट के मकानों से ऊब चुके हैं।मिट्टी, पत्थर और लकड़ी के बने पारंपरिक घर पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं। आपको केवल छत की वाटरप्रूफिंग और आधुनिक अटैच्ड टायलेट बनवाने पर ध्यान देना होगा।
3. होमस्टे में विदेशी पर्यटकों को ठहराने के लिए क्या नियम है?
विदेशी पर्यटकों को ठहराने के लिए भारत सरकार के ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BoI) के e-FFRO पोर्टल पर होमस्टे का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी होता है। अतिथि के आने के 24 घंटे के अंदर ही पोर्टल पर ऑनलाइन Form -C सबमिट करना अनिवार्य होता है।
4. गांव में होमस्टे शुरू करने में कितनी लागत आ सकती है?
यदि घर पहले से बना हुआ है और 1–2 कमरों को तैयार करना है, तो लगभग ₹1.5–4 लाख से शुरुआत संभव हो सकती है। वास्तविक लागत भवन की स्थिति, सुविधाओं और renovation पर निर्भर करती है।
5. क्या सरकार होमस्टे शुरू करने के लिए सब्सिडी भी देती है?
हां, कुछ राज्यों में Tourism Department की homestay policies के तहत financial assistance या incentives उपलब्ध हो सकते हैं। इसके अलावा पात्रता के अनुसार कुछ credit-linked government schemes भी उपयोगी हो सकती हैं। योजना और राज्य के अनुसार शर्तें अलग होती हैं।
6. होमस्टे से महीने में कितनी कमाई हो सकती है?
कमाई location, room rate, occupancy, season और अतिरिक्त services पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए 2 कमरों का होमस्टे 50% occupancy और ₹2,500 प्रति कमरा प्रति रात की दर पर लगभग ₹60,000 का monthly accommodation revenue उत्पन्न कर सकता है। यह gross revenue है, शुद्ध profit नहीं।
7. क्या होमस्टे में पर्यटकों को खाना भी खिला सकते हैं?
हां, लेकिन यदि आप व्यावसायिक रूप से भोजन उपलब्ध कराते हैं तो लागू FSSAI registration/licensing और food-safety requirements का पालन करना पड़ सकता है।
8. क्या गांव में छोटा होमस्टे शुरू करने के बाद आगे चलकर बड़ा किया जा सकता है?
हां। शुरुआत में 1–2 कमरों से शुरू करना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। पर्याप्त bookings और अच्छे reviews मिलने के बाद अतिरिक्त कमरे, स्थानीय भोजन, village tour, farming experience और अन्य rural tourism activities जोड़कर व्यवसाय का विस्तार किया जा सकता है।
ग्रामीण माइक्रो-एंटरप्राइज और सर्विस यूनिट्स के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम की जानकारी।
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नोट: सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, टैक्स दरों, स्थानीय अनुमतियों और होमस्टे रजिस्ट्रेशन की शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं। आवेदन करने से पहले संबंधित राज्य पर्यटन विभाग, स्थानीय ग्राम पंचायत/निकाय, FSSAI/GST प्राधिकरण या बैंक की नवीनतम अधिसूचना अवश्य देखें।
📌 संक्षेप में(AI आधारित कृषि 2035) क्या है: अब भारतीय कृषि मानसून का जुआ से निकल कर साल 2035 तक बीज से लेकर मंडी तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी,ड्रोन और रोबोट मशीनों के माध्यम से इस धारणा को बदल देगी। मुख्य लाभ: कृषि में खाद(उर्वरक),पानी और कीटनाशक का बचत होने से लगत कम हो जाएगा।समय का बचत होगा।और उत्पादन बढ़ने से लाभ बढ़ जाएगा। किसके लिए उपयोगी: किसान, ग्रामीण युवा, ग्रामीण महिलाएं, ग्रामीण व्यवसायी। जरूरी जानकारी: Artificial Intelligence क्या है,विश्व और भारत में AI आधारित कृषि का वर्तमान स्थिति एवं भविष्य इस लेख में: पूरी जानकारी,AI आधारित कृषि के फायदे, चुनौतियां और उनका समाधान। 💡 2 मिनट में पढ़ें | नवीनतम जानकारी | आसान भाषा में वर्ष 2035 तक भारतीय कृषि AI ड्रोन और रोबोट पर आधारित हो जाएगी 📌AI खेती 2035: आने वाले 10 सालों में कैसे बदलेगी भारतीय कृषि ? 📑 Table of Contents: ➤ प्रस्तावना(Introduction) ➤AI क्या है ?(What is Artificial Intelligence) ➤ दुनिया...
🍌 केले का Waste-to-Wealth मॉडल केले की खेती से निकलने वाला तना, फूल, पत्तियां और अन्य Biomass केवल कृषि कचरा नहीं हैं। इनसे Banana Fibre, biodegradable plates, packaging, paper, handicrafts, compost और अन्य value-added products बनाए जा सकते हैं। 💡 मुख्य विचार: Banana Waste → Fibre → Products → Income → Zero-Waste Farming केले के बायोमास अपशिष्ट को केला फाइबर प्रोसेसिंग यूनिट ले जाते हुए 📑 विषय-सूची (Table of Contents) Quick Navigation 1. प्रस्तावना: कचरे से कंचन (Waste to Wealth) → 2. राष्ट्रीय उत्पादन व बायोमास आंकड़े (ICAR डेटा) → 3. तने के भीतरी कोर का रस: पोषण व स्वास्थ्य लाभ → 4. जूस प्रोसेसिंग व शेल्फ-लाइफ स्थिरीकरण विधि → 6. केले का फूल: पोषण, अचार व वेगन मीट ...
📑 Table of Contents ➤ प्रस्तावना ➤ क्या भविष्य है फॉरेंसिक साइंस मे करियर का ➤ फॉरेंसिक एक्सपर्ट की जरूरत कहाँ पड़ती है ➤ कहा से करे कोर्स फॉरेंसिक साइंस का ➤ क्या क्या होता है फॉरेंसिक साइंस में ➤ किनके लिए बन सकता है फॉरेंसिक साइंस विकल्प ➤ निष्कर्ष ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ हमलोगो ने देखा है कि कोई भी अपराध होता है तो क्राइम सीन पर छूटा हुआ एक बाल, फिंगरप्रिंट,नाखून में पाए जानेवाले एक कण या मोबाईल मैसेज और अन्य बारीक साक्ष्य किस तरह से अहम सुराग बनकर सच तक पहुंचाने में रास्ता बन जाते है। फोरेंसिक साइंस में करियर की संभावनाएं प्रस्तावना (Introduction) जो लोग इन सुरागों को इकठ्ठा करके इन्हें पढ़ना समझना जानते है वो जुड़े होते है फॉरेंसिक साइंस(Forensic Science) से जिसमें लॉजिक, टेक्नोलॉजी और साइंस इन तीनों पायदानों का योगदान सम्मिलित होता है। देश में बदलते तकनीकी समय के साथ अपराध मे साक्ष्य इकठ्ठा करनें जिसे कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जा सके इसके लिए फरेंसिक साइंस एक्सपर्ट की मांग बढ़ती जा रही है। इसलिए इस क्षेत्र ...
📑 Table of Contents ➤ प्रस्तावना ➤ लाइफ पहल(Mission LiFE) के प्रमुख क्षेत्र! ➤ वैदिक दर्शन और जिम्मेदार उपभोग ➤ वैदिक संस्कृति मे प्रकृति का महत्व और व्यवहार ➤ LiFE Mission के अनुरूप सरकार का पहल ➤ निष्कर्ष ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ LiFE पहल मे भारत के वैदिक जीवनशैली से लिया गया पर्यावरण सुरक्षा का संदेश प्रस्तावना वैश्विक स्तर पर सतत विकास(Sustainable Growth)और जलवायु परिवर्तन(Climate Changes)पर हो रहे चर्चाओ और प्रयासों के बीच भारत ने 3 अगस्त 2022 को राष्ट्रीय स्तर पर अपने LiFE (Life Style for Environment) पहल को शामिल करके अपने को जलवायु परिवर्तन पर एक प्रभावी विचार नेतृत्व के रूप मे स्थापित किया है। यह पहल एक क्रांतिकारी मॉडल है जो व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों का आह्वान करता है जिसमे मानव पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के साथ सामंजस्य स्थापित कर सके। इस 'लाइफ' पहल मे जो मूल सिद्धांतों को अपनाया गया है वे प्राचीन भारत मे सदियों से व्यावहारिक बुद्धिमता के रूप मे पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। वैदिक दर...
📑 Table of Contents ➤ प्रस्तावना ➤ हम खाना क्यों खाते है?र ➤ हमे क्या क्या खाना चाहिए? ➤ कब कब भोजन करना चाहिए? ➤ चरक संहिता के अनुसार भोजन करने के 10 अनमोल नियम ➤ स्वास्थ्य रहने के लिए खाना बनाने के नियम बदले ➤ उपवास रोग निवारक और शक्तिवर्धक ➤ रसाहर प्रकृति का चमत्कारष ➤विशिष्ट रसहार की सामग्री ➤ निष्कर्ष ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ भोजन करने के 10 अनमोल नियम आज की भागदौड़ भरी जिंदगी मे हम अपनी सेहत का ध्यान रखना लगभग भूल से गए है।लेकिन क्या आप जानते है की स्वस्थ्य रहने के लिए भोजन के नियम इतने ही जरूरी है जितना की खुद भोजन?अक्सर हम यह तो जानते है की क्या खाना चाहिए, लेकिन खाना कब,क्यों और कैसे खाना चाहिए इसपर हमारा ध्यान नहीं जाता। गलत खान-पान और गलत भोजन के तरीके हमारी पाचन शक्ति को कमजोर कर देते है,जिससे कई बीमारियां जन्म लेती है। अगर आप भी हमेशा फिट और ऊर्जावान रहना चाहते है तो आयुर्वेद और विज्ञान पर आधारित भोजन के ये 10 अनमोल नियम आपकी पूरी जीवनशैली बदल सकते है। हम खाना क्यों खाते है? ज ब से...
📌 संक्षेप में (Quick Summary) ZBNF- जिसमें किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जगह देशी गाय के गोबर एवं गोमूत्र पर आधारित खेती करता है जिसमे बाहरी लागत जीरो होती है। SPNF- सुभाष पालेकर जी के नाम पर "सुभाष पालेकर नेचुरल फार्मिंग" नामकरण हो गया है। इसका उदेश्य- खेती की लागत=0 के करीब। मिट्टी की सेहत=बेहतर। किसान की आय=ज्यादा रसायन=पूरी तरह से बंद इसके 4 पिलर- 1️⃣ बीजामृत (Beejamrit) 2️⃣ जीवामृत (Jeevamrit)। 3️⃣ आच्छादन (Mulching) 4️⃣ वाफसा (Waaphasa) परिणाम:किसानों की कर्जमुक्त खेती+सस्टैनबल और लाभदायक खेती+रसायन रहित खेती+मिट्टी की गुणवत्ता+अच्छा स्वास्थ्य और कैंसर से मुक्ति। पूरी तरह से देशी गाय के गोबर और गोमूत्र आधारित 'शून्य बजट प्राकृतिक खेती'करता किसान 📑 Table of Contents ➤ प्रस्तावना ➤सुभाष पालेकर कौन है ? उनका संघर्ष और शोध ➤ ZBNF/SPNF का मूल सिद्धांत क्या है ? ➤ एक गाय से 30 एकड़ खेती का गणित ➤ प्राकृतिक खेती के 4 मुख्य स्तम्भ (The 4 Pillars) ➤ प्राकृतिक खेती के अन्य घटक ➤ मिश्रित ख...
इस लेख में क्या है फ्लैक्स इंजन ट्रैक्टर क्या होते है BS6 प्रदूषण मानक क्या है E20 पेट्रोल क्या है निष्कर्ष अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न भारत मे अब CNG और एथेनॉल मिश्रित डीजल से चलेंगे ट्रैक्टर ( Flax Engine Tractor ) भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां आज भी बड़ी आबादी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। साथ ही खेती से संबंधित बहुत सारे व्यवसाय और खेती से संबंधित उत्पाद बनाने वाली बहुत सारी कंपनियां भी है जो अप्रत्ययक्ष रूप से खेती पर ही निर्भर है। लेकिन बदलते समय के साथ खेती मे नई तकनीक का उपयोग करना भी जरूरी हो गया है। बढ़ता प्रदूषण,महंगे ईंधन,और पर्यावरणीय चुनौतियाँ किसानों के सामने नई समस्या खड़ी कर रही है। ऊपर से विश्व की राजनीति मे होते रहने वाली अनिश्चितता ने भी किसानों के साथ साथ सरकार को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या हाल ही मे शुरू हुआ ईरान-अमेरिका,इस्राइल युद्ध इन हालातों मे ईंधन के साथ साथ उर्वरक और साथ में तकनीकी उत्पादों की कमी और उसके मूल्य वृद्धि का सामना करना पड़ता है।यदि ये समस्या ज्यादा बड़ी हो जाए उससे पहले ही हम तैयारी करना शुरू...
📑 Table of Contents ➤ भूमिका ➤ क्या कुसुम योजना सच मे खत्म हो रही है ? ➤ नई समय सीमा (New Deadline 2026-27) क्या है ? ➤ सरकार ने क्यों बढ़ायी डेडलाइन ? ➤ किसानों के लिए सलाह ➤ क्या है पीएम कुसुम योजना: जानिए पूरी जानकारी(Complete Details) ➤ निष्कर्ष ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ पीएम कुसुम योजना मार्च 2026 अपडेट डेडलाईं मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है भूमिका (Introduction) आजकल इंटरनेट और सोशल मीडिया पर किसानों के बीच एक बड़ी चिंता बनी हुई है की क्या प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान ( PM-KUSUM ) योजना मार्च 2026 मे खत्म हो जाएगी ? इसी विषय पर आज इसकी गहराई से पड़ताल करने के बाद ये जानकारी साझा किया जा रहा है। अगर आप भी सोलर पम्प लगवाने की सोच रहें है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। क्या कुसुम योजना सच मे खत्म हो रही है सीधा जवाब है--- नहीं!! भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy of India - ( MNRE ) ने स्पष्ट किया है कि...
📑 Table of Contents ➤ प्रस्तावना ➤ स्वदेशी और स्वावलम्बन का संबंध ➤ दंत मंजन व्यवसाय क्यों शुरू करे? ➤ व्यवसाय के लिए आवश्यक कच्चा माल ➤ कामधेनु दंत मंजन बनाने की विधि ➤ 2.हर्बल दंत मंजन (लाल दंत मंजन) बनाने की विधि ➤ 3.प्रज्ञा दंत मंजन बनाने की विधि ➤ स्वदेशी और हर्बल दंत मंजन का मार्केटिंग कैसे करे ➤ निष्कर्ष ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ स्वदेशी दंत मंजन का व्यवसाय स्वावलंबन के साथ प्रस्तावना आज के दौर मे जहां हर तरफ रसायनों(Chemicals)का बोलबाला है,लोग वापस अपनी जड़ों की ओर लौट रहे है। आज के दौर मे आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक जरूरत बन गई है। इसी बदलाव ने "स्वदेशी" और "स्वावलंबन" के मंत्र को एक नया आयाम दिया है। यदि आप घर से ही अपना छोटा व्यवसाय( Small Business )शुरू करने की सोच रहे है तो 'प्राकृतिक दंत मंजन' बनाना अत्यंत लाभकारी और कम निवेश वाला विकल्प हो सकता है। स्वदेशी और स्वावलम्बन का संबंध स्वदेशी का अर्थ है अपने देश मे बने वस्तुओ और उत्पादों क...
📑 Table of Contents ➤ प्रस्तावना ➤ रेडॉक्स फ्लो बैटरी क्या है ➤ भारत मे रेडॉक्स फ्लो बैटरी की स्थिति ➤ क्या आम घरों मे फ्लो बैटरी लगाई जा सकती है ➤ किसे अपने घरों मे फ्लो बैटरी लगवानी चाहिए ➤ निष्कर्ष ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ Redox Flow Battery क्या है और यह कैसे काम करती है? जानिए इसके फायदे,नुकसान,उपयोग और Renewable Energy Storage मे इसकी भूमिका Redox Flow Battery -AI Generated Image प्रस्तावना वर्तमान समय मे पूरे विश्व मे Renewable Energy का प्रचालन तेजी से बढ़ता जा रहा है और भारत मे भी। क्योंकि भारत ने जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुरूप 2070 तक नेट-ज़ीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन प्राप्त करने का महत्वकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसलिए देश मे तेजी से सोलर एनर्जी के साथ अन्य Renewable Energy का उत्पादन तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस बढ़ते रेन्युवल एनर्जी के उत्पादन ने इससे उत्पन्न ऊर्जा को स्टोर करने की चुनौती पैदा कर दी है। क्योंकि वर्तमा...
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