📑 Table of Contents
- ➤ प्रस्तावना:स्वास्थ्य के क्षेत्र मे भारत की साइलेंट क्रांति क्या है ?
- ➤ स्वदेशी MRI तकनीक एक बड़ी उपलब्धि क्यों है ?
- ➤ आम आदमी के जेब पर क्या असर होगा ?
- ➤ प्रमुख खिलाड़ी:कौन बना रहा है ये मशीन ?
![]() |
| भारत की पाही 'आत्मनिर्भर भारत' की स्वदेशी MRI मशीन Voxelgrids द्वारा विकसित |
प्रस्तावना:स्वास्थ्य के क्षेत्र मे भारत की साइलेंट क्रांति क्या है ?
भारतीय बाजार मे MRI के क्षेत्र मे लंबे समय तक विदेशी कंपनियों (जैसे Siemens,GE,Philips) का दबदबा रहा है,लेकिन अब 'Make In India' और 'Atmanirbhar Bharat' पहल के तहत कई भारतीय कंपनियां और स्टार्टअप स्वदेशी MRI मशीनों को बनाने लगे है। इन 80% विदेशों से आयातित MRI मशीनों के करण देश मे इलाज के लिए मरीजों को MRI के लिए Rs 6,000 से Rs 15,000 तक फीस देना पड़ता था जो अब सस्ता हो जाएगा।
बेंगलुरू के Voxelgrids और सरकारी संस्था SAMEER जैसे भारतीय दिमागों ने मिलकर दुनियां को दिखा दिया है कि भारत न केवल स्वदेशी 1.5 Tesla MRI स्कैनर बना सकता है,बल्कि उसे दुनिया मे सबसे सस्ता और सुलभ भी बना सकता है।
अभी तक यानी 2025 तक भारत का अपना बनाया हुआ स्वदेशी MRI मशीन नहीं था लेकिन भारत का अपना स्वदेशी MRI मशीन का सपना साकार हो चुका है जो विदेशी मशीन से सस्ता और साथ में विदेशी मशीन से बेहतर भी है।
सच में कहा जाय तो ये समाचार बिल्कुल उत्साहवर्धक है।क्योंकि अभी तक भारत MRI मशीन के लिए विदेशों और इंपोर्ट पर ही निर्भर रहता था।अपने देश में बनाने की ज्यादा कोशिश भी नहीं किया गया था।
आइए विस्तार से जानते है कि,यह स्वदेशी तकनीक न केवल आपकी जांच का खर्चा आधा कर देगी बल्कि,भारत को ग्लोबल हेल्थकेयर का हब बना देगी।
स्वदेशी MRI तकनीक एक बड़ी उपलब्धि क्यों है ?
भारत के बेगलुरु स्थित स्टार्टअप Voxelgrids और सरकारी संस्था SAMEER ने मिलकर 1.5 टेस्ला की स्वदेशी MRI मशीन बनाई है।अब तक भारत पूरी तरह से विदेश कंपनियों के MRI मशीनों पर निर्भर था जो बेहद महंगे होते थे। इन स्वदेशी MRI की निम्न मुख्य विशेषताएं है -
- बिना हीलियम के काम (Helium Free): पारंपरिक मशीनों को ठंडे रखने हेतु बहुत महंगे लिक्विड हीलियम की जरूरत पड़ती है। भारतीय वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो बिना हीलियम के काम करता है और हीलियम का खर्चा न के बराबर होता है।
- हल्का वजन (Portable): विदेशी मशीनें 5-7 टन की होती है,जबकि भारत की यह स्वदेशी मशीन मात्र 2.5-3 टन की ही है। इसे आसानी से एक मोबाईल वैन में रखकर दूर दराज गांव मे ले जाया जा सकता है।
- कम बिजली की खपत: यह मशीन सामान्य मशीनों के मुकाबले बहुत कम बिजली खर्च करती है,जिससे छोटे अस्पतालों के लिए इसे चलाना आसान होगा।
आम आदमी के जेब पर क्या असर होगा ?
अभी एक सामान्य MRI स्कैन के लिए 5,000 से 15,000 तक खर्च करने पड़ते है। स्वदेशी मशीनों के आने से यह खर्चा कम हो जाएगा -
- स्कैन की लागत कम होगी: उम्मीद है की स्कैन की कीमते 50% तक कम हो जाएगी।
- उपलब्धता बढ़ेगी: छोटे शहरों और कस्बों के डायोग्नेस्टिक सेंटर भी अब ये मशीन खरीद पाएंगे।
- कम वेटिंग टाइम: सरकारी अस्पतालों मे लंबी लाईनों से छुटकारा मिलेगा।
प्रमुख खिलाड़ी:कौन बना रहा है ये मशीन ?
1. वाक्सलग्रीड्स(Voxelgrids) नामक स्टार्टअप कंपनी ने बनाया:
ये जानकारी Digital Health News की रिपोर्ट से मिली है जिसके अनुसार मेडिकल क्षेत्र में "मेक इन इंडिया" MRI मशीन एक बड़ी उपलब्धि और एक नया अध्याय बन गया है।और
- ये स्वदेशी MRI मशीन बनाने का कारनामा किया है "वाक्सलग्रीड"(VoxelGrids)नामक स्टार्टअप कंपनी और उनके संस्थापक अर्जुन अरुणाचलम और उनकी टीम ने।
- यह कंपनी स्वदेशी MRI तकनीक मे सबसे आगे है।
- इस "वाक्सलग्रीड" के स्वदेशी MRI मशीन बनाने को श्रीधर बम्बू की कंपनी Zoho द्वारा समर्थन था।
नागपुर में कैंसर केयर फाउंडेशन में लगाया गया है मशीन को -
फिलहाल इस MRI मशीन को नागपुर के "चंद्रपुर कैंसर केयर फाउंडेशन सेंटर" में लगाया गया है। इसमें सबसे खास बात यह है कि इसमें विदेशी कंपनियों की बनाई गई MRI मशीन स्कैनर का नकल नहीं किया गया है बल्कि पूरी तरह खुद की टेक्नोलॉजी से लैस किया गया है।
स्वदेशी MRI मशीन ज्यादा सस्ती और बेहतर भी है -
- पे पर यूज मॉडल से भुगतान: खासकर छोटे अस्पतालों के लिए ये पे पर यूज मॉडल बहुत ही सुविधाजनक है जिसमें अस्पताल स्वदेशी MRI मशीन के लिए धीरे धीरे भुगतान कर सकते है।
- सबसे शोचनीय बात गौर करने लायक है कि अभी भारत में 5,000 ही MRI मशीन है जो कि प्रति 10 लाख जनसंख्या पर केवल 3.5 मशीनें होती है।
- ऐसे में ये "पे पर यूज मॉडल" से देश में MRI मशीन की उपलब्धता और पहुंच बढ़ेगी एवं लोगों को बेहतर जांच की सुविधा मिल सकेगी
- आगे क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य: अभी "वाक्सलग्रीड" कंपनी बेंगलुरु में स्थिति अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में प्रति वर्ष 20 से 25 MRI स्कैनर मशीन बनाने की क्षमता रखता है।
- साथ ही इस कंपनी को श्रीधर बम्बू की कंपनी Zoho से 5 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी मिली हुई है।कंपनी का लक्ष्य अपनी क्षमता को बढ़ाकर उस स्थिति तक ले जाने तक की है कि अपनी जरूरतों को पूरा करने के बाद इसका निर्यात भी किया जा सके।
- अब बनाएगी मोबाइल कंटेनराइज्ड MRI स्कैनर: वाक्सलग्रीड कंपनी को फंडिंग सपोर्ट मिलने से आगे चलकर मोबाइल कंटेनराइज्ड MRI स्कैनर मशीन बनाने के काम में लग गई है।यदि ऐसा हो जाता है तो आसानी से MRI स्कैनर मशीन के निर्यात के लक्ष्य को भी हासिल कर लेगी।
- अब लगाया जाएगा AIIMS में: भारत द्वारा विकसित इस स्वदेशी MRI स्कैनर मशीन को अक्टूबर तक AIIMS नई दिल्ली में स्थापित किया जाएगा।जिसके बाद इसकी लोकप्रियता और भी बढ़ जाएगी।अभी से ही बहुत सारे अस्पतालों ने इस मशीन में दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है।
- इसे SAMEER का सहयोग मिला: इस स्वदेशी MRI स्कैनर मशीन को बनाने में SAMEER (Society for Applied Microwaves Electronics Engineering and Research) के सहयोग से विकसित किया गया है।
2. Time Medical India भी भारतीय कंपनी है
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम (AMTZ) मे स्थित इस कंपनी ने भारत मे MRI मशीन के निर्माण की शुरुआत की है। इसकी मुख्य विशेषताए निम्न है -
- उत्पाद: ये मुख्य रूप से EMMA ब्रांड नाम से MRI मशीनें बना रही है।
- निश (Niche)प्रोडक्टस: इसके पास नवजात शिशुओं (Neonatal MRI),स्तन कैंसर की जांच (Breast MRI), और पशु चकित्सा(Veterinary MRI)के लिए विशेष मशीनें है।
- कीमत: इसकी 1.5 Tesla मशीनों की कीमत लगभग 6 करोड़ से 10 करोड़ के बीच हो सकती है,जो ग्लोबल ब्रांड से काफी किफायती है।
3. SAMEER(समीर):सरकारी पहल क्यों है?
SAMEER(Society for Applied Microwave Electronics Engineering & Research) ने भारत का अपना स्वदेशी 1.5 Tesla System तैयार किया है।
- प्रोजेक्ट Scan-ERA: इस मिशन के तहत इस मशीन को AIIMS दिल्ली जैसे बड़े संस्थानों मे परीक्षण (Clinical Trials) के लिए लगाया गया है।
- लक्ष्य: इस स्वदेशी तकनीक को भारतीय निजी कंपनियों को ट्रांसफर करना ताकि देश मे बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हो सके।
4. अन्य प्रमुख नाम एवं असेंबलिंग यूनिट कौन से है?
- Wipro GE Healthcare: हालांकि GE एक अमेरिकन कंपनी है,लेकिन विप्रो के साथ मिलकर बेगुलुरु मे अपनी 'Next-Gen' फैक्ट्री मे MRI मशीनों की बड़ी असेंबलिंग और कुछ हिस्सों का निर्माण भारत मे ही कर रही है।
- Sanrad Medical Systems: यह कंपनी पुरानी मशीनों को रिफर्बिश (Refurbished) करने और भारत मे मेडिकल इमेजिंग उपकरणों के वितरण मे एक बड़ा नाम है।
भारतीय MRI मशीनों के आने से क्या बदलेगा?
MRI मशीन के प्रकार और भारत मे उसकी कीमत
भारत मे MRI मशीन की कीमत उसके मैग्नेटिक फील्ड स्ट्रेन्थ (Tesla-T) और उसकी स्थिति पर निर्भर करती है। ये निम्न चार्ट से स्पष्ट हो जाती है -
सरकारी योजनाएं एवं सहायता क्या है ?
भारत सरकार चिकित्सा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रहा है -
- PLI Scheme (Production Linked Incentive): चिकित्सा उपकरणों के निर्माण पर 5% तक की वित्तीय प्रोत्साहन।
- Medical Device Park: उत्तर प्रदेश,तमिलनाडु,मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश मे विशेष पार्क बनाए गए है जहां MRI जैसे उपकरणों के निर्माण के लिए बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जा रहा है।
- SBI Medical Equipment Finance: अस्पतालों और डाक्टरों को मेडिकल डिवाईस और MRI मशीनों को खरीदने के लिए कम ब्याज पर ऋण की सुविधा।
निष्कर्ष (Summries)
विक्सलग्रीड्स के फाउंडर अर्जुन अरुणाचलम और उनकी टीम पिछले 12 वर्षों से इस स्वदेशी MRI प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही थी जिसका मकसद MRI मशीन टेक्नोलॉजी को लोकली डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग करना था जिसमें अब जाकर सफलता मिली है।
इस स्वदेशी MRI स्कैनर मशीन के आ जाने से देश में टियर 2 और टियर 3 जैसे शहरों में और छोटे अस्पतालों में स्वास्थ्य एवं जांच सुविधाओं में बढ़ोतरी देखने को मिलेगा।क्योंकि MRI स्कैनर मशीन बहुत ही महंगी होती है और इसकी उपलब्धता बहुत ही कम है।
सस्ते और पे पर यूज मॉडल स्कीम से छोटे अस्पतालों में भी ये सुविधा आसानी से उपलब्ध होने लगेगी।सच में कहा जाय तो ये अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
दूसरे शब्दों मे कहा जाए तो,भारत मे बन रही स्वदेशी MRI मशीन सिर्फ एक मशीन नहीं है,बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद है।
स्वास्थ्य और तकनीक से जुड़ी ऐसी ही अन्य जानकारियों के लिए crackersuptop के साथ बने रहें!!
क्या आप भी मानते है की भारत को मेडिकल क्षेत्र मे आत्मनिर्भर होना चाहिए ? कमेन्ट मे अपनी राय जरूर दे !!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या भारत की स्वदेशी MRI मशीन विदेशी मशीनों जितनी सटीक है? ▼
उत्तर: हाँ, भारत में विकसित 1.5 Tesla स्वदेशी MRI मशीनें अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करती हैं। इनमें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग किया गया है, जो इमेज की स्पष्टता को और बेहतर बनाता है।
प्रश्न 2: स्वदेशी MRI आने से स्कैन की कीमत कितनी कम होगी? ▼
उत्तर: विशेषज्ञों का अनुमान है कि स्वदेशी तकनीक और कम रखरखाव (Helium-free technology) के कारण MRI स्कैन की कीमतें 30% से 50% तक कम हो सकती हैं
प्रश्न 3: Voxelgrids और SAMEER क्या हैं? ▼
उत्तर: Voxelgrids: बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप है जिसने भारत का पहला स्वदेशी 1.5T MRI स्कैनर बनाया है।
SAMEER: भारत सरकार की एक लैब (MeitY के तहत) है जिसने इस मशीन के डिजाइन और हार्डवेयर को विकसित करने में मुख्य भूमिका निभाई है।
प्रश्न 4: क्या यह मशीन सभी अस्पतालों में उपलब्ध है? ▼
उत्तर: फिलहाल ये मशीनें बड़े सरकारी संस्थानों (जैसे AIIMS) और चुनिंदा प्राइवेट सेंटर्स में ट्रायल और इंस्टॉलेशन के चरण में हैं। अगले 1-2 वर्षों में इनके पूरे भारत में उपलब्ध होने की उम्मीद है।
प्रश्न 5: 1.5 Tesla MRI का क्या मतलब होता है? ▼
उत्तर: Tesla' मैग्नेटिक फील्ड की शक्ति को मापने की इकाई है। 1.5 Tesla (1.5T) स्टैंडर्ड MRI स्कैन के लिए सबसे सटीक और लोकप्रिय पावर मानी जाती है, जो शरीर के लगभग हर हिस्से की स्पष्ट जांच कर सकती है।
प्रश्न 6: MRI मशीन मे हीलियम का क्या काम होता है? ▼
उत्तर: मशीनों को ठंडा रखने के लिए लाखों रुपये का 'लिक्विड हीलियम' लगता है। भारतीय स्वदेशी तकनीक ने हीलियम की जरूरत को न्यूनतम कर दिया है, जिससे रखरखाव का खर्च 40% तक कम हो गया है।
प्रश्न 7: MRI का फुल फार्म क्या है? ▼
उत्तर: MRI (Magnetic Resonance Imaging)
प्रश्न 8: स्वदेशी MRI क्यों है खास? ▼
उत्तर: कम लागत: विदेशी मशीनों के मुकाबले 40-50% सस्ती।
हीलीयम-मुक्त तकनीक (Helium-Free): समझाएं कि कैसे Voxelgrids की मशीन बिना महंगे लिक्विड हीलियम के चलती है।
पोर्टेबिलिटी: हल्की होने के कारण इसे मोबाइल वैन (Mobile Clinics) में गांव-गांव तक ले जाया जा सकता है।
प्रश्न 9: क्या स्वदेशी MRI मशीन मे भारतीय कंपनी ZOHO भी शामिल है ▼
उत्तर: हां! इस "वाक्सलग्रीड" के स्वदेशी MRI मशीन बनाने को श्रीधर बम्बू की कंपनी Zoho द्वारा समर्थन था।
साथ ही इस कंपनी को श्रीधर बम्बू की कंपनी Zoho से 5 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी मिली हुई है।
Last Updated On Sunday,29 March,2026
