"मिशन रंगीन मछली 2031"लक्ष्यद्वीप से शुरू हुई क्रांति जो किसानों की आय बदल देगी

🐠 मिशन रंगीन मछली 2031
भारत सरकार की Mission Rangeen Machhli 2031 रणनीतिक कार्ययोजना का उद्देश्य सजावटी मछली पालन को वैज्ञानिक, संगठित, जैव-सुरक्षित और निर्यात-उन्मुख बनाना है। इसमें Breeding, Rearing, Biosecurity, Quarantine, Traceability, Transport और Export जैसी पूरी Value Chain को मजबूत करने पर जोर है।
📌 इस लेख में जानें: मिशन क्या है, भारत की ornamental fish biodiversity, निर्यात के आंकड़े, सरकारी सहायता, युवाओं व महिलाओं के अवसर और 2031 का संभावित रोडमैप।

 

सजावटी मत्स्य पालन के लिए भारत सरकार का "मिशन रंगीन मछली 2031" योजना
युवा उद्यमी एक्वेरियम में सजावटी रंगीन मछलियों को देखते हुए 



 

प्रस्तावना (Introduction) 

जलीय जैव विविधता से आर्थिक समृद्धि की ओर: 

भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र पारंपरिक रूप से तो खाद्य उत्पादन और पोषण प्रदान करने वाला सुरक्षा का ही माध्यम रहा है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में ही "नीली क्रांति" (Blue Revolution) ने भारत को दुनियां का दूसरा सबसे बड़ा जलीय कृषि उत्पादक (Aquaculture) देश बना दिया है।

लेकिन अभी तक जलीय अर्थव्यवस्था का एक उच्च मूल्य (High-Value) वाला महत्वपूर्ण खंड --"सजावटी मत्स्य पालन" (Ornamental Fisheries) तो एक लंबे समय से ही असंगठित एवं अप्रयुक्त ही रहा है।

अब इसी अप्रयुक्त क्षमता को ओपचारिक रूप देने और वैश्विक पटल पर भारत की भी हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए भारत सरकार के "मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय" ने "मिशन रंगीन मछली 2031" (Mission Rangeen Machhli 2031) का एक खाका तैयार कर दिया है।

"सजावटी मत्स्य पालन केवल एक शौक नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं,तटीय समुदायों और युवाओं के लिए कम भूमि एवं कम पानी में उच्च लाभ प्रदान करने वाला एक बहु-आयामी उद्यम है" 
--- स्रोत: वार्षिक रिपोर्ट, मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार।

भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग के अनुसार इस खाका का रणनीतिक कार्ययोजना 31 अगस्त 2026 को "अगत्ती, लक्ष्यद्वीप" में आयोजित किया जाने वाला Outreach Programme के दौरान उपराष्ट्रपति "सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा जारी किए जाने का प्रोग्राम है।

अतः हम इस लेख में जानेंगे कि मिशन रंगीन मछली 2031 क्या है, इसकी जरूरत क्या है, भारत की स्थिति क्या है और अब तक से लेकर आगे तक की रणनीति क्या है।

मिशन रंगीन मछली 2031 क्या है? 

"Mission Rangeen Machhli 2031" सजावटी मत्स्य पालन के विकास के लिए तैयार किया गया एक "Strategic Action Plan" है।

यह कोई साधारण मछली पालन सब्सिडी योजना नहीं है। बल्कि इसका उद्देश्य सजावटी मत्स्य पालन की पूरी "Value Chain" को वैज्ञानिक,मानकीकृत, जैव सुरक्षित और बाजार के उन्मुख बनाना है।

सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इस कार्ययोजना में सजावटी मछलियों की पूरी श्रृंखला के लिए एक समान ढांचे को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

इसमें मुख्य रूप से ब्रूडस्टॉक प्रबंधन, वैज्ञानिक प्रजनन, हैचरी संचालन, उत्पादन प्रणाली,क्वारऺटीन, मछली स्वास्थ्य प्रबंधन, जैव सुरक्षा, ट्रेसेबिलिटी, एक्वेरियम संचालन, व्यापार, गुणवत्ता,प्रमाणन ,बाजार तक पहुंच और निर्यात के पूरे विषय को शामिल किया गया है।

PIB के अनुसार SOPs यानी "Standard Operating Procedures" के माध्यम से इन गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और मानकीकृत करने का लक्ष्य है।

मिशन का विचार है कि --"छोटे छोटे असंगठित व्यवसाय से आगे बढ़कर एक संगठित, वैज्ञानिक और निर्यात योग्य Ornamental Fisheries Value Chain को तैयार करना" 

🐟 मिशन रंगीन मछली 2031
↓
01
वैज्ञानिक ब्रूडींग
02
क्लस्टर-आधारित उत्पादन
03
जैव-सुरक्षा व क्वारंटीन
04
तटीय व महिला सशक्तिकरण
05
निर्यात व ब्रांडिंग

 

भारत में सजावटी मछलियों की कितनी जैव विविधता है? 

वैसे तो कहा जाता है कि भारत में लगभग 2500 से अधिक सजावटी मछलियों की प्रजातियां है जिनमें से 60% से अधिक मीठे पानी में मिलते हैं।

लेकिन मत्स्य पालन विभाग द्वारा 28 नवंबर 2024 को भारतीय संसद में दिए गए जानकारी के अनुसार -- "करीब 134 से अधिक स्वदेशी सजावटी मछलियों की प्रजातियां" और "करीब 700 से अधिक Indigenous Marine Ornamental Fish Species" पाई जाती है।

इसका मतलब यह है कि भारत के पास सजावटी मछलियों की एक विशाल प्राकृतिक जैव विविधता है।

भारत का सजावटी मछली निर्यात अभी कितना बड़ा है? 

भले ही भारत के पास सजावटी मछलियों की जैव विविधता बहुत अधिक है लेकिन इसकी वैश्विक व्यापार में हमारी हिस्सेदारी बहुत ही कम रही है।

मत्स्य पालन विभाग की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार दुनियां में सजावटी मछली पालन दूसरा सबसे लोकप्रिय Hobby Sector माना जाता है और लगभग 100 मिलियन लोग इससे जुड़े हुए बताए गए हैं।

उसी रिपोर्ट के अनुसार भारत की वैश्विक सजावटी मछलियों के निर्यात में हिस्सेदारी "लगभग 0.53%" ही है और इसके आयात में हिस्सेदारी "लगभग 0.42%" है।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार आंकड़ों के अनुसार -- वैश्विक सजावटी मछलियों का व्यापार के वार्षिक कारोबार लगभग "$15 से $20 बिलियन डॉलर" से अधिक का होता रहा है।

सिंगापुर को सजावटी मछलियों के निर्यात की राजधानी कहा जाता है और कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 15-20% का है।

भारत ने वर्ष 2023-24 में कितनी सजावटी मछलियों का निर्यात किया ? 

भारत सरकार ने संसद में दिए गए अपने जानकारी में "Marine Products Export Development Authority यानी MPED के आंकड़ों के आधार पर बताया कि वित्तीय वर्ष "2023-24 में भारत ने 144 मिटिक टन" सजावटी मछलियों का निर्यात किया।

और इस निर्यात का कुल मूल्य ₹28 करोड़ रुपए था।

वास्तव में यह बहुत ही कम है लेकिन यही से यह निष्कर्ष निकलता है कि यदि Value Addition और संगठित रूप से उत्पादन के चैन को पूरा किया जाए तो संभावना बहुत बड़ी है।


भारत की सजावटी मछली निर्यात में हिस्सेदारी लगभग आधा प्रतिशत ही है।
सजावटी मछली निर्यात केंद्र में पैकिंग करते हुए करते हुए मत्स्य पालक 


सरकार के द्वारा सजावटी मछलियों के उत्पादन पर कितना निवेश किया जा रहा है? 

सच कहा जाए तो मिशन रंगीन मछली अचानक से ही शुरू किया गया पहल नहीं है। बल्कि पहले से ही इसपर काम चल रहा है और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के माध्यम से इसका आधार बना दिया गया है।

भारत सरकार के अनुसार PMSSY के तहत वित्तीय वर्ष 20220-21 से 2023-24 तक और वर्ष 2024-25 के दौरान "सजावटी मछलियों के विकास प्रस्ताव के लिए "कुल ₹157.64 करोड़" का फंड स्वीकृत किया जा चुका है।

इस फंड में --
  • 193 Backysrd Ornamental Fish Rearing Units
  • 195 Medium Scale Ornamental Fish Rearing Units
  • 32 Integrated Ornamental Fish Units
  • 2 Ornamental Fish Brood Banks

को शामिल किया गया था।


भारत में वर्तमान स्थिति के मुख्य तत्व 

भारत विश्व की सबसे अधिक समृद्ध रंगीन मछली की जैव विविधताओं में से एक है। पूर्वोत्तर के ही हिमालयी क्षेत्रों में 250 से अधिक देशी मीठे पानी की सजावटी मछलियों के प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है।

वही पश्चिमी घाट के क्षेत्रों में 150 से अधिक स्थानीय प्रजातियों का घर है जिसमें -"Sahyadria Denisonii" भी है जिसे "मिस केरल" कहा जाता है।

लक्षद्वीप, अंडमान व निकोबार द्वीप और मन्नार की खाड़ी में 300 से अधिक रंगीन कोरल और रीफ मछलियों का घर है। लक्षद्वीप का अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) भारत में कुल EEZ का 17% है। यह समुद्री शैवाल और सजावटी मछली पालन के लिए बेहद अनुकूल है।

SOPs जो इस मिशन की रीढ़ है,क्या है? 

मिशन रंगीन मछली 2031 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसके "Standard Operating Procedures (SOPs)" है। ये SOPs पूरे देश में एक समान सर्वोत्तम प्रथाओं को लागू करने के लिए तैयार किया गया है।

इन SOPs को थोड़ा विस्तार से समझते हैं --


1. ब्रूडस्टॉक प्रबंधन (Broodstock Managment): 

सजावटी मछली पालन में अच्छी गुणवत्ता वाली मछलियों को पैदा करने के लिए केवल सामान्य मछली ही पर्याप्त नहीं है।

इसके लिए स्वास्थ्य और अनुवांशिक रूप से बेहतर माता पिता मछलियों का चयन महत्वपूर्ण है। इसीलिए इसमें चयन के मानदंड, आहार,पानी की गुणवत्ता, स्वास्थ्य जांच की आवृत्ति और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया को शामिल किया गया है।

साथ ही जो कमजोर या रोगग्रस्त मछलियां है उन्हें प्रजनन कार्य से बाहर रखने के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश भी शामिल किया गया है।


2.प्रजनन (Breeding): 

इसमें नियंत्रित वातावरण में मछलियों के प्रजनन की विधियां, स्पॉनिंग टैंक की तैयारी, पानी के पैरामीटर जैसे pH लेवल, तापमान और कठोरता को ध्यान रखने पर जोर दिया गया है।

साथ ही अंडो की देखभाल और सफलता दर बढ़ाने के उपायों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसमें प्राकृतिक और प्रेरित दोनों तरह के प्रजनन पर ध्यान देने को भी शामिल किया गया है।


3. हैचरी संचालन (Hatchery Oprations): 

इसमें अंडों से लार्वा और फ्राई निकलने की पूरी प्रक्रिया को रखा गया है। फिल्ट्रेशन, ऑक्सीजन सप्लाई, फीडिंग शेड्यूल, रोग निगरानी और हेचरी की स्वच्छता के कठोर मानक तय किए गए है।


4. उत्पादन प्रणालियां (Production Systems): 

इसमें मुख्य रूप से तीन तरह की यूनिट्स - बैकयार्ड यूनिट, माध्यम स्तर की यूनिट और एकीकृत केंद्रों के लिए अलग अलग दिशा निर्देश जारी किए गए है।

इसके माध्यम से स्टॉकिंग घनत्व, टैंक डिजाइन, पानी प्रबंधन, फीडिंग और कटाई की प्रक्रियाओं को मानकीकृत किए जाने की बात कही गई है।


5.क्वारंटाइन (Quarantine): 

नई तैयार मछलियों को मुख्य स्टॉक में लाने से पहले अलगाव की पद्धति को क्वारंटाइन कहा जाता है इसको अनिवार्य करना। निगरानी,प्रशिक्षण और उपचार के प्रोटोकॉल को तय करना भी शामिल है।

यह रोगों को रोकने का सबसे प्रभावशाली तरीका है।


6. स्वास्थ्य प्रबंधन (Health Managment): 

रोगों की पहचान, रोकथाम और उपचार के साथ स्वच्छता के मानक तय करना। दवाओं और रसायनों के सुरक्षित उपयोग, बायोसिक्योरिटी प्रोटोकॉल और नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करना शामिल है।


7.ट्रेसएबिलिटी (Traceability): 

हर मछली का बैच स्रोत रखना, पालन का इतिहास, स्वास्थ्य का रिकॉर्ड और परिवहन का डिजिटल या मैनुअल रिकॉर्ड रखना। इससे गुणवत्ता प्रमाणन आसान होगा और निर्यातकों में विश्वास बढ़ेगा।


8. एक्वेरियम संचालन (Aquarium Operations): 

घरेलू और व्यवसायिक एक्वेरियम के रख रखाव का मानक को तय करना -- जैसे पानी फिल्ट्रेशन, तापमान नियंत्रण, प्रकाश व्यवस्था, आहार और सफाई आदि।


9. हैंडलिंग (Handling): 

मछलियों को पकड़ने, छांटने, ग्रेडिंग करने और स्थानांतरित करने के दौरान तनाव और चोटों को कम करने के तरीकों को लागू करना। इसके लिए सही जाल, कंटेनर और तकनीक का उपयोग करना शामिल है।


10. परिवहन (Transportation): 

जीवित मछलियों के पैकिंग, आक्सीजन सप्लाई, तापमान नियंत्रण, यात्रा अवधि और गंतव्य पर रिलीज की प्रक्रिया के साथ लंबी दूरी की परिवहन के लिए विशेष दिशा निर्देश की व्यवस्था को शामिल किया गया है।


11. व्यापार (Trade): 

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियम, गुणवत्ता, जाँच, लेबलिंग, प्रमाणन और दस्तावेजीकरण की पूरी व्यवस्था करना। निर्यात के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन की व्यवस्था को सुनिश्चित करना शामिल है।

ये 11 SOPs न केवल उत्पादन की गुणवत्ता को बढ़ाएगी बल्कि पूरे क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही भी लाएगी।


मिशन रंगीन मछली 2031 के तहत SOPs आधुनिक Ornamental Fish Breeding Facility
आधुनिक Ornamental Fish Breeding Facility में मत्स्य पालक 

लक्ष्यद्वीप को "मिशन रंगीन मछली" से क्यों जोड़ा गया है? 

मिशन रंगीन मछली 2031 के लिए लक्ष्यद्वीप का चयन अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है।

भारत सरकार के अनुसार लक्ष्यद्वीप में विशाल समुद्री इकोसिस्टम मौजूद है। इसलिए यहां Marine Ornamental Fisheries के लिए काफी संभावनाएं है।

PIB के अनुसार भारत की तटरेखा लगभग 11,099 किलोमीटर है और Exclusive Economic Zone लगभग 2.4 मिलियन एक्वायर मीटर है।

साथ ही सरकारी जानकारी के अनुसार लक्ष्यद्वीप का EEZ लगभग 4 लाख एस्क्वायर किलोमीटर के करीब है जो भारत के कुल EEZ का करीब 17% है।


इसीलिए लक्ष्यद्वीप में --
  • Marine Ornamental Fisheries 
  • Mariculture 
  • Seaweed 
  • High Value Fisheries 
  • Sustainable Blue Economy 

की काफी अच्छी संभावनाएं है।

रंगीन मछली मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफार्म क्या है? 

"केंद्रीय मिठाजल जीव पालन संस्थान" (ICAR - CIFA) द्वारा कई भाषाओं में मोबाइल ऐप को विकसित किया गया है जिसे "रंगीन मछली मोबाइल ऐप" कहा गया है।

इसके माध्यम से किसानों, एक्वेरियम विक्रेताओं और और खरीददारों को सीधे जोड़ा गया है।

साथ ही इसमें एक्वेरियम रख रखाव, रोग पहचान, प्रजाति विशिष्ट मार्गदर्शिका और नजदीकी हेचरी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

सरकार ने "National Fisheries Digital Platform" (NFDL) को भी 11 सितंबर 2024 को PM-MKSSY के तहत ही लॉन्च किया था।

अगस्त 2026 की सरकारी जानकारी के अनुसार NFDP पर 35.85 लाख मछली पालक, किसान, फिश वेंडर और अन्य मछली स्टेकहोल्डर पंजीकृत हो गए थे।

तकनीकी और पारिस्थितिकीय वर्गीकरण 

सजावटी मत्स्य पालन को मिशन के तहत तीन मुख्य पारिस्थितिकीय तंत्रों में विभाजित किया गया है -
  1. मीठे पानी की विदेशी प्रजातियां (Exotic Freshwater)
  2. मीठे पानी की देशी प्रजातियां (Indigenous Freshwater)
  3. समुद्री व लैगून प्रजातियां (Marine/Reef Species)

यानी इस मिशन योजना में केवल समुद्री सजावटी मछलियों का ही नहीं बल्कि घरेलू स्तर पर मीठे पानी की सजावटी मछलियों के पालन को भी शामिल किया गया है।

नीचे दिए गए तालिका के माध्यम से इसको और भी विस्तृत रूप से समझा जा सकता है --
🐠 सजावटी मत्स्य पालन: वर्गीकरण एवं वाणिज्यिक क्षमता
श्रेणी (Category) प्रमुख प्रजातियाँ (Species) उपयुक्त क्षेत्र (Regions) निवेश एवं लाभ संरचना (Economics)
मीठे पानी की विदेशी प्रजातियाँ (Exotic Freshwater) गप्पी (Guppy), मौली (Molly), प्लैटी, स्वॉर्टेल, गोल्डफिश, एंजेलफिश, बेटा (Fighter) पूरे भारत में (विशेषकर उपनगरीय व ग्रामीण क्षेत्र)
लागत: ₹50,000 – ₹2,00,000 (कम)
चक्र: 30–60 दिन
लक्ष्य: घरेलू बाजार
मीठे पानी की देशी प्रजातियाँ (Indigenous Freshwater) डेनिसन बार्ब (Sahyadria denisonii), ज़ेबरा डैनियो, ड्वार्फ गौरमी, चन्ना प्रजातियाँ पूर्वोत्तर राज्य (असम, मणिपुर), केरल, पश्चिमी घाट
लागत: ₹2,00,000 – ₹5,00,000 (मध्यम)
मूल्य: उच्च निर्यात मूल्य ($2 – $25 प्रति मछली)
समुद्री व लैगून प्रजातियाँ (Marine/Reef Species) क्लाउनफिश (Amphiprion ocellaris), डैमसेलफिश, समुद्री घोड़ा (संरक्षित), डॉटबैक लक्षद्वीप, अंडमान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र व गुजरात तट
लागत: ₹5,00,000 – ₹20,00,000 (उच्च / उन्नत तकनीक)
लक्ष्य: उच्च स्तरीय प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बाजार

 

महिलाओं और SHGs के लिए एक अच्छा अवसर कैसे है? 

सजावटी मत्स्य पालन की एक सबसे बड़ी विशेषता यह भी है कि इसके कुछ इकाईयों को सीमित स्थान में भी स्थापित किया जा सकता है।

इस कारण से इसको प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं के समूह SHGs और छोटे उद्यमी एवं ग्रामीण युवा किसान भी शुरू कर सकते हैं।

इसे ग्रामीण क्षेत्रों में घर के पिछवाड़े में 100 से 200 वर्गफुट जमीन में 10-15 ग्लास टैंक्स या सीमेंटेड सिस्टर्न लगाकर इसे घर के काम को करते हुए भी संचालित किया जा सकता है।

महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (NRLM और DAY-NRLM) के माध्यम से सूक्ष्म वित्तपोषण के द्वारा बैकवार्ड यूनिट्स की स्थापना किया जा सकता है।

सबसे बड़ी बात यह भी है कि सजावटी मत्स्य पालन में नियमित तौर पर मासिक आय का प्रवाह बना रहता है।
📊 बैकयार्ड यूनिट: आर्थिक एवं उत्पादन चक्र
🏡
यूनिट का आकार 100 वर्ग फुट बैकयार्ड यूनिट
↓
🪟
सेटअप संरचना 20 ग्लास टैंक / 4 सीमेंट कुंड
↓
🐟
उत्पादन क्षमता मासिक उत्पादन: 1,500 – 2,000 मछली
↓
💰
अनुमानित आय शुद्ध मासिक लाभ: ₹15,000 – ₹25,000

 

ग्रामीण महिलाओं और SHGs के लिए सजावटी मछली पालन में अवसर
ग्रामीण महिलाओं के समूह SHGs के द्वारा छोटे स्तर पर सजावटी मत्स्य पालन केंद्र में 


वर्ष 2031 तक किन आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए? 

जब मिशन रंगीन मछली 2031 का पूर्ण एक्शन प्लान सार्वजनिक हो जाएगा तब हम सभी पाठकों और नीति विश्लेषकों को इन आंकड़ों पर विशेष ध्यान देना चाहिए --

📈 2031 तक के प्रमुख संकेतक एवं लक्ष्य
संकेतक (Indicator) वर्तमान संदर्भ (Current Status) 2031 में क्या देखना चाहिए (Target / Outlook)
Freshwater Indigenous Species 374+ Conservation + Captive Breeding
Marine Indigenous Species 700+ Sustainable Utilization
Ornamental Fish Export 244 MT (2023-24) भविष्य का लक्ष्य (उल्लेखनीय वृद्धि)
Export Value ₹28 करोड़ (2023-24) भविष्य का लक्ष्य (विस्तार)
Global Export Share लगभग 0.53% वैश्विक हिस्सेदारी में तेज बढ़ोतरी
PMMSY Ornamental Rearing Units 2,465 Approved आगे का विस्तार
Integrated Units 207 Approved Breeding Capacity निर्माण
Brood Banks 5 Approved Genetic / Quality Infrastructure
NFDP Stakeholders 35.85 लाख (Aug 2026) Formalisation (औपचारिकीकरण)
PM-MKSSY Outlay ₹6,000 करोड़ Value-Chain Support

 

चुनौतियां और रणनीतिक समाधान क्या है? 

भारत को इस "मिशन रंगीन मछली 2031" के समक्ष कई प्रकार की चुनौतियां भी मौजूद है। इस मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना आवश्यक है --


1. कोल्ड चेन और एयर कार्गो लॉजिस्टिक: 

मुख्य चुनौती यह है कि जीवित मछलियों के परिवहन में उच्च मृत्यु दर (Mortality Rate) जो करीब 20-30% तक है इसको कैसे कम किया जा सकता है।

इसका मुख्य समाधान यह हो सकता है कि इंसुलेटेड ऑक्सीजन पैकिंग तकनीक, हवाई अड्डों पर ग्रीन चैनल क्लियरेंस और कार्गो फ्रेड सब्सिडी की व्यवस्था को सक्षम बनाया जाए।


2. रोग प्रबंधन और विशिष्ट आहार: 

चुनौती यह है कि इन मछलियों के विभिन्न विकास चरणों के लिए उच्च प्रोटीन और रंग निखारने वाले संतुलित आहार का अभाव मौजूद है। इसे कैसे दूर किया जाए।

इसका समाधान यह हो सकता है कि ICAR संस्थानों द्वारा स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे मॉल से कम लागत वाले फ्लोटिंग पेलेट और इम्यूनोस्टिमुलेंट आहारों का उत्पादन शुरू करने का प्रक्रिया को विकसित किया जा सकता है।


3. प्राकृतिक आवासों का अत्यधिक दोहन: 

चुनौती यह है कि इन मछलियों के प्राकृतिक आवासों जैसे पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर राज्यों में बिना किसी संस्थागत प्रक्रिया के और अवैध शिकार भी हो रहा है।

समाधान के तौर पर यह कहा जा सकता है कि IUCN रेड लिस्ट के अनुसार प्रजाति वार कोटा प्रणाली विकसित करना चाहिए और जिओ टैगिंग एवं वाइल्ड टू कैप्टिव ब्रीडिंग रूपांतरण नियम बनाकर उसे लागू किया जाना चाहिए।


4.प्रशिक्षित मत्स्य पालकों का अभाव: 

यह चुनौती भी महत्वपूर्ण है। अभी भी प्रशिक्षित मत्स्य पालकों की भारी कमी है।

समाधान के लिए संबंधित संस्थानों के माध्यम से इस व्यवसाय को शुरू करने वाले मत्स्य पालकों के लिए और इसमें काम कर रहे अन्य श्रमिकों के निःशुल्क प्रशिक्षण की एक व्यापक व्यवस्था शुरू करनी चाहिए।

इसके अलावा भी और कई प्रकार की चुनौतियां मौजूद है।यदि इस योजना को व्यापक रूप से सफल बनाना है तो इन सभी चुनौतियों को पहचान कर इनके समाधान के उपाय तलाशने होंगे।

निष्कर्ष (Conclusion) 

छोटी रंगीन मछली और बड़ा आर्थिक अवसर: 

"मिशन रंगीन मछली 2031" भारत की सजावटी मछली को एक छोटे एक्वेरियम से निकाल कर "एक वैज्ञानिक, संगठित, जैव सुरक्षित, टिकाऊ और निर्यात उन्मुख" उद्योग बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

भारत पहले से ही PMMSY सजावटी मत्स्य पालन के लिए व्यापक रूप से प्रयास कर रही है और इसके लिए फंड भी प्रदान कर रही है।

और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मिशन केवल बड़ी कंपनियां के लिए ही अवसर नहीं है। ग्रामीण महिलाओं और उनके समूहों SHGs के लिए भी यह एक सुनहरा अवसर है।

मुख्य चुनौती प्रशिक्षण की है और संस्थाएं इस चुनौती से निपटने में सक्षम है। 

यदि ग्रामीण युवाओं, किसानों, मत्स्य पालकों और SHGs को सही प्रशिक्षण की व्यवस्था हो जाती है तो निश्चित रूप से यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी आय और रोजगार के महत्वपूर्ण साधन बन सकता है।

संभावित रूप से लाखों परिवारों की आजीविका उपलब्ध कराने की क्षमता रखने वाली इस ठोस मिशन की और विस्तृत जानकारी इसके लॉन्च होने और सरकारी घोषणा आने के बाद और व्यापक रूप में की जा सकती है।


Feature of India ornamental Fisheries
आधुनिक Ornamental Fisheries Facility Centre 



अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)

1. मिशन रंगीन मछली 2031 क्या है?

"Mission Rangeen Machhli 2031" सजावटी मत्स्य पालन के विकास के लिए तैयार किया गया एक "Strategic Action Plan" है।


यह कोई साधारण मछली पालन सब्सिडी योजना नहीं है। बल्कि इसका उद्देश्य सजावटी मत्स्य पालन की पूरी "Value Chain" को वैज्ञानिक,मानकीकृत, जैव सुरक्षित और बाजार के उन्मुख बनाना है।

2. मिशन रंगीन मछली 2031 कब और कहां लॉन्च किया जाएगा ?

भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग के अनुसार इस मिशन रंगीन मछली 2031का रणनीतिक कार्ययोजना 31 अगस्त 2026 को "अगत्ती, लक्ष्यद्वीप" में आयोजित किया जाने वाला Outreach Programme के दौरान उपराष्ट्रपति "सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा जारी किए जाने का प्रोग्राम है।

3. भारत में कितनी सजावटी मछलियों की प्रजातियां पाई जाती है?

मत्स्य पालन विभाग द्वारा 28 नवंबर 2024 को भारतीय संसद में दिए गए जानकारी के अनुसार -- "करीब 134 से अधिक स्वदेशी सजावटी मछलियों की प्रजातियां" और "करीब 700 से अधिक Indigenous Marine Ornamental Fish Species" पाई जाती है।

4. भारत में सजावटी मछली का निर्यात कितना होता है?

"Marine Products Export Development Authority यानी MPED के आंकड़ों के आधार पर बताया कि वित्तीय वर्ष "2023-24 में भारत ने 144 मिटिक टन" सजावटी मछलियों का निर्यात किया।


और इस निर्यात का कुल मूल्य ₹28 करोड़ रुपए था।

5. क्या मिशन रंगीन मछली 2031 योजना के तहत किसानों और युवाओं को लाभ मिलेगा?

हां! इस मिशन का उद्देश्य सजावटी मछली पालन में एंटरप्रेनरशिप और वैल्यू चैन को बढ़ाना है। इस योजना के तहत छोटे स्तर पर घर से भी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सजावटी मत्स्य पालन को किया जा सकता है जिसका लाभ ग्रामीण क्षेत्रों,किसानों और युवाओं को हो सकता है।

6. क्या महिलाओं और SHGs को भी सजावटी मत्स्य पालन का लाभ मिल सकता है?

सजावटी मत्स्य पालन की एक सबसे बड़ी विशेषता यह भी है कि इसके कुछ इकाईयों को सीमित स्थान में भी स्थापित किया जा सकता है।


इस कारण से इसको प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं के समूह SHGs और छोटे उद्यमी एवं ग्रामीण युवा किसान भी शुरू कर सकते हैंमहिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (NRLM और DAY-NRLM) के माध्यम से सूक्ष्म वित्तपोषण के द्वारा बैकवार्ड यूनिट्स की स्थापना किया जा सकता है।

7. रंगीन मछली मोबाइल ऐप क्या है?

"केंद्रीय मिठाजल जीव पालन संस्थान" (ICAR - CIFA) द्वारा कई भाषाओं में मोबाइल ऐप को विकसित किया गया है जिसे "रंगीन मछली मोबाइल ऐप" कहा गया है।


इसके माध्यम से किसानों, एक्वेरियम विक्रेताओं और और खरीददारों को सीधे जोड़ा गया है।

8. मिशन रंगीन मछली 2031 की मुख्य चुनौतियां क्या है?

मिशन रंगीन मछली 2031 की मुख्य चुनौतियां है -1. कोल्ड चेन और एयर कार्गो लॉजिस्टिक,2. रोग प्रबंधन और विशिष्ट आहार,3. प्राकृतिक आवासों का अत्यधिक दोहन और 4.प्रशिक्षित मत्स्य पालकों का अभाव।

 

संबंधित विषय: 



📚 प्रमुख स्रोत एवं आधिकारिक संदर्भ (Official Sources & Citations)
मंत्रालय

मत्स्यपालन विभाग (Department of Fisheries)

PMMSY operational guidelines, वार्षिक रिपोर्ट और सजावटी मत्स्य पालन विकास रूपरेखा।

dof.gov.in
ICAR-CIFA

केंद्रीय मीठाजल जीवपालन संस्थान (ICAR-CIFA)

'रंगीन मछली' मोबाइल एप्लिकेशन, मीठे पानी की सजावटी मछलियों का प्रजनन व रोग प्रबंधन।

cifa.nic.in
ICAR-CMFRI

केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI)

समुद्री सजावटी मछली (क्लाउनफिश, डैमसेलफिश) की कैप्टिव ब्रीडिंग तकनीक व समुद्री रीफ अध्ययन।

cmfri.org.in
बोर्ड / नोडल

राष्ट्रीय मत्स्यकी विकास बोर्ड (NFDB, हैदराबाद)

सजावटी रियरिंग व ब्रीडिंग यूनिट्स हेतु वित्तीय सब्सिडी, ट्रेनिंग मॉड्यूल व क्षमता निर्माण।

nfdb.gov.in
निर्यात व्यापार

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA)

ग्रीन सर्टिफिकेशन मानक, एक्वैरियम निर्यात आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दिशानिर्देश।

mpeda.gov.in
अंतरराष्ट्रीय

खाद्य एवं कृषि संगठन (UN-FAO)

The State of World Fisheries and Aquaculture (SOFIA) – वैश्विक सजावटी मत्स्य व्यापार रुझान।

fao.org/fishery

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