📑 Table of Contents
- ➤ प्रस्तावना (Introduction)
- ➤ अमलगम क्या होता है
- ➤ अमलगम चार प्रकार से तैयार किया जाता है
- ➤ डेंटल अमलगम से पर्यावरण को नुकसान
- ➤ पारा पर मीनामाटा कन्वेंशन क्या है
- ➤ पारा है सबसे खतरनाक रसायनों में शामिल
- ➤ सम्मेलन में कुल 21 फैसले लिये गये
- ➤पारा आधारित डेंटल अमलगम के विकल्प पर फोकस
- ➤ निष्कर्ष
- ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
![]() |
| अब पर पर आधारित डेंटल अमलगम बंद हो जाएगा और उसके विकल्पों पर फोकस किया जाएगा |
दांतों को भरने के लिए पारा आधारित डेंटल अमलगम के उपयोग को 2034 तक पूरी तरह बंद करने का एक ऐतिहासिक निर्णय 7 नवंबर 2025 को "जिनेवा" में चल रहे "पारा पर मीनामाटा कन्वेंशन (Minamata Convention on Para) के छठे पक्षकार सम्मेलन (Cop -6) में लिया गया है।
इसमें करीब 150 देशों ने मिलकर सहमति जताई और निर्णय लिया कि मानव स्वास्थ्य और प्रकृति को पारे के प्रदूषण से बचाने के लिए 2034 तक चरणबद्ध तरीके से अमलगम का उत्पादन, आयात और निर्यात को भी बंद कर दिया जाएगा।
अमलगम क्या होता है
पारा (Mercury) का किसी अन्य धातु के मिलावट से बनी मिश्रधातु को अमलगम कहते है।यह पारा केवल लोहे के साथ अमलगम नहीं बनाती है बाकि सभी धातुओं के साथ अमलगम बनाती है।
दांतों को भरने के लिए जो अमलगम बनता है वो पारा के साथ चांदी,सोना,पीतल या जस्ता जैसे धातुओं के मिश्रण से बनाया जाता है।
अमलगम चार प्रकार से तैयार किया जाता है
- (1)किसी धातु को पारे के साथ रगड़कर।
- (2)जिस धातु के साथ अमलगम बनाना है उस धातु के कैथोड को पारे के किसी लवण में पारे के कैथोड डालकर सोडियम अमलगम बनाया जाता है फिर पानी के साथ क्रिया कराकर।
- (3)किसी धातु को केवल किसी पारे के लवण के साथ क्रिया कराकर।
- (4)किसी धातु के लवण को पारे के साथ क्रिया कराकर।
शोधकर्ताओं का कहना है कि पारा आधारित डेंटल अमलगम करते समय प्रतिदिन 27 माइक्रोग्राम पारा वाष्प उत्पन्न होता है जो जोखिमपूर्ण हो सकता है।
हालांकि इससे मरीजों को ज्यादा दिक्कत नहीं है क्योंकि उनके लिए ये मात्रा प्रतिदिन के हिसाब से जोखिम से कम है। लेकिन डेंटल अमलगम प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों के लिए यह जोखिमपूर्ण हो सकता है क्योंकि इन्हें प्रतिदिन इस प्रक्रिया को करना होता है।
आमतौर पर प्रतिदिन 3 से 5 माइक्रोग्राम पर प्रतिदिन शरीर को मिलता है इससे कोई नुकसान नहीं होता है।WHO ने 70 किलोग्राम के व्यक्ति के लिए प्रतिदिन 43 माइक्रोग्राम तक के पारा को सुरक्षित मानता है।अत्यधिक परिस्थितियों में जब दवाओं आदि का सेवन किया जाए यह मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रतिदिन हो सकती है लेकिन यह रोजाना नहीं होनी चाहिए।
लेकिन पारा वाष्प WHO के अनुसार नुकसानदायक होती है।
डेंटल अमलगम से पर्यावरण को नुकसान
- दंत कार्यालयों से निकले अपशिष्ट जल से - दंत अमलगम फिलिंग को रखने ,हटाने और साफ करने आदि में जो पानी का उपयोग किया जाता है उस अपशिष्ट जल से पर्यावरण और मिट्टी को नुकसान पहुंचता है।
- मानव अपशिष्ट से - चूंकि दंत अमलगम भरने में कुछ पर की मात्रा तो मरीज को जाता ही है इसलिए उनके मल में भी कुछ दिन पारा की मात्रा बढ़ जाती है जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।
- शमशान और दफन से - चूंकि डेंटल अमलगम वाले मरीज की जब मृत्यु होती है तब उन्हें जब अंतिम संस्कार किया जाता है जो भराव से पारा निकलकर हवा में छोड़ दिया जाता है या मिट्टी में जाकर मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है।
- पारा वाष्प से - डेंटल अमलगम भराई में पारा वाष्प का प्रयोग होता है जिससे दंत कार्यालयों और बाहर पर्यावरण में पारा पहुंच जाता जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।
कुल मिलाकर दंत अमलगम पारा प्रदूषण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि दंत चिकित्सा के लिए दंत अमलगम को बंद कर देना होगा।
पारा पर मीनामाटा कन्वेंशन क्या है
जापान के मीनामाटा शहर में 2013 में आयोजित कन्वेंशन जो पारे के द्वारा होनेवाले प्रदूषण पर चर्चा के लिए आयोजित की गई और इसमें लिए गए निर्णयों 2017 में लागू हुआ।इसका मुख्य उद्देश्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारे के हानिकारक प्रभावों से बचाना था।
यह कन्वेंशन जापान के मीनामाटा शहर जहां मीनामाटा की खड़ी अवस्थित है उसके नाम पर रखा गया है।मीनामाटा की खड़ी में 1950 के दशक में औद्योगिक पारे के द्वारा प्रदूषण से भयंकर महामारी आई थी और सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी।
इस मीनामाता कन्वेंशन में भारत सहित कुल 153 देश शामिल है।
पारा है सबसे खतरनाक रसायनों में शामिल
पारा को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सबसे खतरनाक दस प्रमुख रसायनों में शामिल किया है जो मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे हानिकारक है। पारा शरीर के लिए विषैला होता है और तंत्रिका तंत्र,गुर्दे एवं श्वसन प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
सम्मेलन में पहले 2030 की समय सीमा रखने पर बात चल रही थी लेकिन भारत , ईरान और ब्रिटेन ने 2030 की समय सीमा का विरोध किया था कि ये जल्दबाजी होगी।तब जाकर 2034 के समय सीमा पर सबकी सहमति बन गई।
सम्मेलन में कुल 21 फैसले लिये गये
इस सम्मेलन में मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारे के प्रदूषण से बचाने के लिए कुल 21 नए फैसले लिए गए है। सदस्य देशों ने पारे वाले स्किन लाइटिंग कॉस्मेटिस्क को खत्म करने के प्रयास तेज करने पर सहमति जताई। साथ ही इन उत्पादों की अवैध तस्करी पर रोक लगाकर निगरानी को मजबूत किया जाएगा।
पारे को कॉस्मेटिक में मिलाया जाता है ताकि यह मेलानिन हार्मोन को दबाकर त्वचा को हल्का बना देता है। लेकिन यह प्रभाव अस्थाई और स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है।
साथ ही छोटे पैमाने पर होनेवाली गोल्ड माइनिंग में भी पारे का इस्तेमाल किया जाता है।इसको धीरे धीरे कम करके बंद करने पर सदस्य देशों ने निर्णय लिया।वहीं PVC प्लास्टिक के निर्माण में इस्तेमाल होनेवाला "क्लोराइड मोनोमर" के उत्पादन में पारा उत्प्रेरक का प्रयोग किया जाता है इसे भी पारा मुक्त उत्प्रेरकों के उपयोग पर सहमति जताई गई है।
पारा आधारित डेंटल अमलगम के विकल्प पर फोकस
सवाल है कि पारा आधारित डेंटल अमलगम का विकल्प क्या है।तो इसके कई विकल्प मौजूद है जिनको अपनाकर हम पारा आधारित प्रदूषण और पारा आधारित डेंटल अमलगम के जगह इस्तेमाल करके पारा होनेवाले नुकसान को कम भी कर सकते है और 2034 तक इससे मुक्ति भी पा सकते है इनमें मुख्य ये है -
- कंपोजिट रेजिन(Composite Resin): यह दांतों के रंग के होते है जो प्राकृतिक भी दिखते है और दांतों के साथ मजबूती के साथ चिपकते भी है।इसको सबसे आम प्रयुक्त अमलगम के विकल्प के रूप मे माना जाता है।
- ग्लास आयनोमर (Glass Ionomer): ये भी बिल्कुल दांतों के रंग के ही होते है और साथ में यह फ्लोराइड को भी छोड़ते है।और फ्लोराइड को छोड़ने से दांत मजबूत बनते है।तो ये भी एक अच्छा विकल्प है।
- सिरेमिक या जिरकोनिया(Ceramic/Zirconia): ये भी बहुत मजबूत और टिकाऊ होते है जो अक्सर क्राउन कैप या बड़े फिलिंग के लिए उपयोग किए जाते है।
- सोना(Gold): भले ही यह एक महंगा विकल्प है लेकिन बहुत ही टिकाऊ और नुकसानमुक्त विकल्प है।
ये सभी विकल्प न केवल स्वास्थ्य के लिए सही विकल्प है बल्कि सुरक्षित और सौंदर्य के लिए भी बेहतर होते है क्योंकि ये दांतों के प्राकृतिक रंग रूप के होते है।
निष्कर्ष (Conclusion)
कुल मिलाकर निष्कर्षतः ये कहा जा सकता है कि इस संधि के तहत जिसमे 150 से अधिक देश शामिल है पारे के उत्पादन,उपयोग और विनिमय यानी व्यापार को नियंत्रित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।
जिससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की दिशा में एक मिल की पत्थर वाला वैश्विक लड़ाई ने एक निर्णायक भूमिका निभाएंगे और प्रकृति पर्यावरण एवं मानवता को बचाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1:डेंटल अमलगम क्या है,इसे बंद क्यों किया जा रहा है? ▼
उत्तर: डेंटल अमलगम जिसे "चांदी की फिलिंग" भी कहते है,पारे का एक मिश्रण है। पारे की विषाक्तता और पर्यावरण में इसके रिसाव के चलते इसे बंद किया जा रहा है।
प्रश्न 2: 2034 की समयसीमा क्या है? ▼
उत्तर: जिनेवा में हुए 'मिनामाता'कन्वेन्शन में के अनुसार 2034 तक अधिकांश देश पारे पर आधारित अमलगम को पूरी तरह से बंद करने पर सहमति जताई है।
प्रश्न 3: क्या यह प्रतिबंध तुरंत प्रभावी है? ▼
उत्तर: यह एक चरणबद्ध प्रक्रिया है। कई देशों में इसे धीरे धीरे कम किया जा रहा है,और यूरोपीय संघ में इसे 1 जनवरी 2025 से ही इसके उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
प्रश्न 4: अमलगम के मुख्य विकल्प क्या है? ▼
उत्तर: दंत चिकित्सक अब मुख्य रूप से कॉम्पोसीट रेजिन (Composite Resin - दांत के रंग की फिलिंग), ग्लास आयोनोमर सीमेंट (GIC), और चीनी मिट्टी (Ceramic) के विकल्पों का उपयोग कर रहे हैं।
प्रश्न 5: क्या पुरानी अमलगम फिलिंग को तुरंत हटवाना जरूरी है? ▼
उत्तर: नहीं! अगर फिलिंग में कोई समस्या नहीं है तो उसे हटवाना जरूरी नहीं है,यदि वह टूट गई है या उसमें रिसाव है या कोई दिक्कत है तभी उसे हटवाना जरूरी है।
प्रश्न 6: क्या अमलगम से कोई स्वास्थ्य को खतरा है? ▼
उत्तर: हां! अमलगम में लगभग 50% पारा होता है। खाना चबाने या बर्ष करने से बहुत कम मात्र में पारा निकल सकता है,जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
प्रश्न 7: क्या नए विकल्प अमलगम जीतने टिकाऊ है? ▼
उत्तर: हा! आधुनिक सामग्रियाँ बहुत टिकाऊ है,जो दांत में चिपक जाती है जिसे दांतों को मजबूती मिलती है और उन्हे दांतों के रंग के ही बनाए जाते है।
प्रश्न 8: प्रतिबंध से किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा? ▼
उत्तर: इससे पर्यावरण के साथ साथ बच्चों,महिलाओं, और किडनी की समस्या वाले रोगियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। क्योंकि वें पारे के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते है।
प्रश्न 9: क्या विकल्प की लागत अधिक होगी? ▼
उत्तर: शुरुआत में, कॉम्पोजिट फिलिंग की लागत अमलगम से अधिक हो सकती है, लेकिन वे सौंदर्य और स्वास्थ्य के मामले में बेहतर परिणाम देती हैं।
