मौसम के हिसाब से खाए मोटा अनाज(Millets), जानिए श्री अन्न को सही तरह से खाने का तरीका

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अपने खाने मे मोटा अनाज को मौसम के हिसाब से शामिल करे 

भारत मे मोटा अनाज (Millets) जिसे "श्री अन्न" भी कहा जाता है अब केवल पारंपरिक भोजन ही नहीं,बल्कि सुपर फूड बन चुका है। बदलती जीवनशैली,बढ़ती बीमारियां और जलवायु परिवर्तन के दौर मे मोटा अनाज एक ऐसा विकल्प है जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद है। 

आज डायबिटीज,मोटापा,हृदय रोग और पाचन समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे मे मोटा अनाज एक प्राकृतिक समाधान देता है। भारत सरकार भी इसे बढ़ावा दे रही है और 'सुपर फूड' के रूप मे प्रचारित किया जा रहा है। 

मोटा अनाज (Millets) क्या होता है 

मोटा अनाज छोटे दानों वाली अनाज की खाद्य फसलों का एक समूह है जो सूखा पड़ने पर या अन्य प्रतिकूल मौसमिय परिस्थितियों को झेलने मे अत्यधिक सक्षम होता है। यही नहीं बल्कि इसके उत्पादन मे उर्वरकों और कीटनाशकों जैसे रासायनिक तत्वों का बहुत कम प्रयोग होता है या नहीं भी होता है। साथ ही इन फसलों मे खर- पतवार भी बहुत कम ही उगते है। 

एक लाईन मे कहा जाय तो मोटा अनाज कठिन जलवायु मे भी आसानी से उग जाते है और किसानों के लिए कम लागत मे अधिक उत्पादन देते है। 

भारत मे मोंटे अनाज को मोटे तौर पर दो श्रेणियों मे रखा जाता है बड़ा मोटा अनाज और छोटा मोटा अनाज। 

मुख्य मोटा अनाज -

  • ज्वार (Sorghum Millet)

  • बाजरा  (Pearl Millet)

  • रागी  (Finger Millet)

  • कोदो  (Kodo Millet)

  •  कुटकी (Little Millet)

  • सांवा    (Barnyard Millet)

  •  कंगनी (Foxtail Millet)


मोटा अनाज के स्वास्थ्य लाभ  

मोटा अनाज अन्य अनाजों की तुलना मे अधिक पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इसे "पोषक अन्न" भी कहा जाता है। इनमे कार्बन तथा जलकणों की मात्रा कम होती है। 

  • मोटा अनाज मे चावल से 100 गुना ज्यादा फाइबर होता है जो बेहतर पाचन मे सहायक होता है। 
  • इसमें चावल से 20 गुना ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है जो मांसपेशियों और स्वस्थ्य शरीर के निर्माण मे सहायक है। 
  • इसमें चावल से 300 गुना ज्यादा लोहा होता है जो रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। 
  • इसमें चावल से 600 गुना ज्यादा फोलेट होता है जो शरीर मे रक्त प्रवाह मे सहायक होते है। 

मोटा अनाज के स्वास्थ्य लाभ 


  • पाचन तंत्र की मदद करना 

  • कैंसर बृद्धि को रोकना 

  • कार्डियोवैस्कुलर प्रणाली को सपोर्ट करना 

  • हड्डियों को स्वास्थ्य बनाए रखना  

  • मूड मे सुधार करना 

  • घाव को भरने मे मदद 

  • मधुमेह को कम करना 

  • रोग प्रतिरोधक मे सहायक  होना 

  • मोटापे को नियंत्रित करना 

  • आक्सीडेटिव तनाव को कम करना 

डॉक्टर की राय:मोटा अनाज के बारे मे डाक्टरों का कहना है की ये ब्लड शुगर कंट्रोल करता है,दिल के रोगों के खतरों को कम करता है और वजन कम करने मे भी मदद करता है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते है की सप्ताह मे व्यक्ति को 3-4 बार मोंटे अनाज का सेवन जरूर करना चाहिए। 


मुख्य मोटा अनाज और उसके लाभ 


1.बाजरा (Pearl Millet)

बाजरा अपनी स्वादिष्ट रोटियों और मलीदा के लिए जाना जाता है जिसमे प्रति 100 ग्राम मे 361 कैलोरी ऊर्जा मिलता है। इसको भोजन मे शामिल करने से हमे बिना अतिरिक्त लागत के विटामिन B-12 मिल जाता है। 

प्रति 100 ग्राम बाजरा मे -

  • इसमें बीटा कैरोटीन प्रचुर मात्र मे पाया जाता है। 
  • इसमें दूध की तुलना मे 6 गुना ज्यादा मैग्नीशियम पाया जाता है। 
  • इसमें 1 अंडे के बराबर प्रोटीन होता है। 
  • एक सेव के बराबर फाइबर होता है। 
  • बाजरा मे आयरन की मात्र पालक से 3 गुना अधिक होता है। 

2.ज्वार (Sorghum Millet)

ज्वार न केवल लाखों भारतीयों का मुख्य भोजन है बल्कि ये स्वादिष्ट और पौष्टिक होने के साथ इसका चिकित्सकीय प्रयोग भी है। यह प्रोटीन और आयरन से भरपूर होता है।साथ मे यह उतना ही ये सुपाच्य भी होता है। 

प्रति 100 ग्राम बाजरा मे -

  • चावल की तुलना मे 2 गुना ज्यादा फाइबर होता है। 
  • एक अंडे के बराबर प्रोटीन होता है। 
  • केले की तुलना मे 4 गुना ज्यादा मैग्नेशियम होता है। 
  • बादाम की तुलना म 3 गुना ज्यादा आयरन होता है। 

3. रागी (Finger Millet)

यह अपने स्वाद के साथ ही सबसे ठंडा और समृद्ध मिलेट्स है। इसमें भरपूर मात्रा मे खनिज पदार्थ और कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों व दातों को मजबूत बनता है। इसमें प्रति 100 ग्राम मे 344 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है।साथ ही विटामिन B-1 और B-2 भरपूर मात्रा मे होता है। 

प्रति 100 ग्राम रागी मे - 

  • चावल और गेहूं की तुलना मे 4 गुना ज्यादा आयरन होता है। 
  • चावल की तुलना मे 4 गुना ज्यादा आयरन होता है। 
  • गेहूं की तुलना मे 2 गुना ज्यादा पोटैशियम होता है। 
  • गेहूं और चावल की तुलना मे 3 गुना फाइबर होता है। 

4. कोदो (Kodo Millet)

यह बंजर भूमि मे भी उग जाता है। इसमें विटामिन B विशेष रूप से नियासीन,विटामिन B-6 और फोलिक ऐसिड भरपूर मात्र मे पाया जाता है। 

  • साथ ही इसमें कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन भी प्रचुर मात्र मे पाया जाता है। यह एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा से भी भरपूर होता है। 
  • साथ ही इसमें, लेसिथिन की उच्च मात्र होती है जो तांत्रिक तंत्र को मजबूत बनाने मे सहायक होता है। 

5. कुटकी (Little Millet)

कुटकी एक हल्का और पौष्टिक मोटा अनाज है जो पाचन को बेहतर बनता है। यह बरसात के दिन मे खाने के लिए सबसे बेहतर है क्योंकि पेट पर ज्यादा भार नहीं डालता है। यह प्रोटीन,आयरन और नियासीन से भरपूर होता है। 

  • इसमें 5% वसा होती है और "पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी ऐसिड "(PUFA)होता हो जो हृदय के लिए अच्छा माना जाता है। 
  • इसमें आयरन प्रति 100 ग्राम मे 9.3 मिलीग्राम जो बहुत ज्यादा होता है पाया जाता है। यह एनीमिया को दूर करने मे बहुत प्रभावी है। 
  • यह विशेष रूप से महिलाओं के प्रजनन और हार्मोनल संतुलन के लिए वरदान जैसा होता है। 


6. सांवा (Barnyard Millet)

अन्य मोंटे अनाजों की तुलना मे सांवा मे फाइबर और आयरन की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसमें कार्बोहाईड्रेट कम होता है और धीरे धीरे पचता है जिससे मधुमेह रोगियों के लिए सबसे अच्छा विकल्प होता है। 

  • इसमें गामा अमीनो ब्यूटीरिक ऐसिड और बीटा-ग्लूकोन जैसे कार्यात्मक घटक होते है जो रक्त मे वसा के स्तर को कम करने के लिए आक्सीडेंट के रूप मे इस्तेमाल किया जाता है। 
  • इसमें फाइबर सबसे अधिक 12% पाया जाता है। 
  • ग्लाइसेमीक इंडेक्स बहुत कम होने से डाइबीटीज रोगियों के लिए बेहतर होता है। 

7. कंगनी (Foxtail Millet)

कंगनी मोटा अनाज आसानी से पचने योग्य और एलर्जी रहित होता है। इसमें भी भरपूर पोषक तत्व पाया जाता है। 

  • इसमें लगभग 12% प्रोटीन होता है और 8% फाइबर पाया जाता है। 
  • इसमें पॉलिफेनोल्स जैसे तत्व होते है जो शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकल देते है। 
  • यह ग्लूटेन मुक्त और लेसिथियान युक्त होता है जो नर्वस सिस्टम को मजबूत बनता है। 

मौसम के अनुसार कैसे खाए मोटा अनाज 

मोंटे अनाज की तासीर अलग-अलग होती है इसीलिए इन्हे आयुर्वेद और पोषण विज्ञान के अनुसार मौसम और मौसम का मिजाज देखकर खाना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। 

मौसम के अनुसार खाने का विवरण इस प्रकार से है -

1.सर्दियों के  लिए खाने वाले मोटा अनाज (Winter Millets)

सर्दियों मे शरीर के लिए अंदरूनी गर्माहट और अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। इस मौसम मे गरम तासीर वाले अनाज सर्वश्रेष्ठ होते है। 

  • बाजरा: इसकी तासीर ग्राम होती है और इसमें ओमेगा-3 फैटी ऐसिड एवं आयरन भरपूर मात्र मे होता है जो ठंड से लड़ने और ऊर्जा प्रदान करने मे मदद करता है। 
  • रागी: रागी कैल्शियम और विटामिन-D का भंडार है।सर्दियों मे धूप कम निकलने के कारण हड्डियों के लिए सबसे अच्छा होता है। 
  • मक्का: सर्दियों मे 'मक्के की रोटी और सरसों का साग' तो प्रसिद्ध ही है क्योंकि इसका तासीर गरम होता है। विटामिन A और C इसमें भरपूर मिलता है। 

 
  • सर्दी के लिए मोटा अनाज 

  • मोटा अनाज 

  • व्यंजन 

  • समय 

  • बाजरा 
  • खिचड़ी 
  • पूरी 
  • लड्डू  
  • दोपहर या रात मे 
  • शाम का नाश्ता
  • शाम का नाश्ता
  • रागी 
  • लड्डू
  • दलिया  
  • सुबह का नाश्ता
  • शाम का नाश्ता
  • मक्का 
  • रोटी 
  • सूप 
  • दलिया 
  • सुबह का नाश्ता 
  • शाम का नाश्ता 
  • सुबह और रात मे 


2.गर्मियों मे खाने के लिए मोटा अनाज (Summer Millets)

गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने और डिहाइड्रेशन से बचने वाले अनाज चुनने चाहिए जिसकी तासीर ठंडी हो। साथ ही हल्का और पचने मे भी आसान हो। 

  • ज्वार: यह शरीर को ठंडक देता है और पचने मे भी आसान होता है। 
  • सांवा: यह पचने मे बहुत हल्का और ठंडा होता है। गर्मियों मे पेट की जलन कम करने के लिए इसका सेवन लाभदायक होता है। 
  • कांगनी: इसकी भी तासीर ठंडी होती है और शरीर को डिटॉक्स करने मे मदद करता है जो चिलचिलाती गर्मी मे जरूरी होता है। 

  • गर्मियों के लिए मोटा अनाज 

मोटा अनाज 

व्यंजन 

समय 

  • ज्वार  
  • भाखरी 
  • ठालिपिथी  
  • दोपहर या रात मे 
  • शाम का नाश्ता

  • सांवा 
  • उपमा 
  • खड़वी 
  • सुबह का नाश्ता
  • शाम का नाश्ता
  • कांगनी  
  • उपमा  
  • सूप 
  • खिचड़ी 
  • सुबह का नाश्ता 
  • शाम का नाश्ता 
  • सुबह और रात मे 

 
3. बरसात के लिए मोटा अनाज (Monsoon Millets)

बरसात के मौसम मे ऐसा मोटा अनाज खाना चाहिए जो हल्का,जल्दी पचने वाला और पेट को सुरक्षित रखे, क्योंकि इस मौसम मे पाचन कमजोर हो जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

  • रागी: यह कैल्शियम और आयरन से भरपूर होता है और शरीर को ताकत देता है। इसको बरसात के साथ-साथ सर्दियों मे भी खाया जा सकता है। 
  • कोदो: कोदो मे औषधीय गुण होते है और यह मानसून के दौरान होने वाले संक्रमणों(Infections) से लड़ने मे मदद करता है। 
  • ज्वार: ज्वार पाचन मे हल्का होता है। इसको सर्दियों के साथ बरसात मे भी खाया जा सकता है। 

  • बरसात के लिए मोटा अनाज 

मोटा अनाज 

व्यंजन 

समय 

  • रागी   
  • सत्तू 
  • डोसा 
  • लड्डू   
  • नाश्ता 
  • नाश्ता या रात का भोजन 
  • शाम का नाश्ता 

  • कोदो 
  • रोटी 
  • खिचड़ी  
  • सुबह का नाश्ता
  • रात का खाना 
  • ज्वार   
  • दलिया 
  • रोटी 
  • खिचड़ी 
  • सुबह का नाश्ता 
  • शाम का नाश्ता 
  • सुबह और रात मे 


मौसम के हिसाब से मोटा अनाज का उपयोग करने से न केवल जरूरी पोषक तत्व उसी समय मिलते है जब शरीर को उसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, बल्कि यह खेती की पारंपरिक पद्धतियों और फसल चक्र के साथ भी सुंदर तालमेल बैठाता है। 

मोंटे अनाज को सही खाद्य संयोजनों के साथ खाना चाहिए और हर रूप मे खाना चाहिए। और हां यह चावल और गेहूं का पूर्ण विकल्प नहीं हो सकता है। इसलिए चावल और गेहूं को भी साथ मे खाना चाहिए। और मोंटे अनाज को ऊपर से सप्लीमेंट के रूप मे या चावल और गेहू के साथ मिला कर भी खा सकते है। 

मोंटे अनाज को सरकार द्वार प्रोत्साहन 

मोंटे अनाज को सरकार के द्वारा भी प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। भारत सरकार के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र ने 172 देशों के समर्थन से वर्ष 2023 को "अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष" के रूप मे मनाया था। सरकार के द्वारा निम्न प्रकार से मोंटे अनाज को प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है -

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मोंटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 8,000 करोड़ रुपए से अधिक का बजट आवंटित किया है। 
  • MSP(Minimum Support Price): सरकार ने रागी,ज्वार,बाजरा और मक्का जैसे अनाजों के लिए MSP मे काफी बढ़ोतरी की है जैसे -2025-26 मे रागी के लिए MSP मे 596 रुपए की वृद्धि की गई है। 
  • PDS(Public Distribution System): सरकार राशन कार्ड धारकों को मोंटे अनाज भी मुहैया करने लगी है और साथ मे ही मिड-डे-मिल मे भी स्कूलों मे बच्चों को मोटा अनाज दिया जाने लगा है। 
  • स्टार्टअप सपोर्ट: PLI(Production Linked Incentive) स्कीम के तहत सरकार ने मोंटे अनाज आधारित उत्पादों(बिस्कुट,पास्ता आदि)के लिए 800 करोड़ रुपए की स्कीम शुरू की है।देश के 21 जिलों मे मोंटे अनाज को 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' के तहत पहचान डि हई है ताकि मोंटे अनाज की ब्रांडिंग मे मदद मिल सके। 
  • उत्कृष्टता केंद्र: हैदराबाद स्थित "भारतीय मोटा अनाज अनुसंधान संस्थान "(IIMR) को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र घोषित किया गया है ताकि नई तकनीक और बेहतरीन चीजों पर शोध हो सके। 

वर्तमान समय मे मोटा अनाज केवल एक ट्रेंड ही नहीं बल्कि एक स्वास्थ्य जीवन की कुंजी है। इसे अपनाकर हम अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते है और किसानों व पर्यावरण को भी समर्थन दे सकते है। इसीलिए सरकार भी इसको 'श्री अन्न' के रूप मे पूरे विश्व मे प्रचारित कर रही है। 

निष्कर्ष 
मोंटे अनाज के बारे मे जानकारी पा कर आप समझ गए होने की कैसे इसे अपनाकर हम अपनी परम्पराओं से भी जुड़ सकते है। आप इस मौसम मे कौन सा मोटा अनाज पसंद करते है? या फिर आपकी कोई खास रेसिपी हो तो आप जरूर कमेन्ट मे बताए ताकि मुझे भी और जो नहीं जानते है उनको भी जानकारी मिल सके। 
माइ कमेंट बॉक्स मे आपका इंतजार कर रहा हूँ?

"और अगर आपको ये जानकारी उपयोगी लगा हो तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करना न भूले" 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1. क्या हम हर मोटा अनाज खा सकते है?
उत्तर: हां! आप हर रोज मोटा अनाज खा सकते है,लेकिन विविधता बनाए रखना जरूरी है। कोशिश करे की एक ही दिन मे विभिन्न प्रकार के मोटा अनाज न खाए। 

प्रश्न 2. क्या मोंटे अनाज की तासीर गरम होती है?
उत्तर: नहीं,सभी मोंटे अनाज की तासीर गरम नहीं होती है। ठंडे तासीर वाले भी मोंटे अनाज है। बाजरा,रागी और मक्का की तासीर गरम होती है। जबकि सांवा,कुटकी,कांगनी की तासीर सर्द होती है और बाजरे की तासीर सामान्य होती है। 

प्रश्न 3. मोंटे अनाज को पकाने से पहले भिंगोना क्यों जरूरी होता है?
उत्तर: मोंटे अनाज मे फाईटेटस होते है जो पोषक तत्वों के अवशोष को रोकते है। इसे 4-7 घंटे भिंगोने से ये तत्व निकल जाते है जिससे अनाज आसानी से पच जाते है और शरीर को पोषण प्रदान करते है। 

प्रश्न 4. वजन घटाने के लिए सबसे अच्छा मोटा अनाज कौन सा है?
उत्तर: वजन घटाने के लिए 'सांवा' और 'कुटकी' बेहतरीन है। इनमे फाइबर बहुत अधिक और कैलोरी बहुत कम होता है। जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती है। 

प्रश्न 5. क्या शुगर के मरीज मोटा अनाज खा सकते है?
उत्तर: बिल्कुल,मोंटे अनाज का 'गलाईमेसिक इंडेक्स' बहुत कम होता है। जिसका मतलब है की ये खून मे शुगर बहुत धीरे-धीरे छोड़ते है। कोदो और ज्वार डाइबीटीज को नियंत्रित करने मे बहुत सहायक माने जाते है। 

प्रश्न 6. क्या बच्चों को मोटा अनाज देना सुरक्षित है?
उत्तर: हां ! बच्चों के विकास के लिए ये बहुत फायदेमंद है। बच्चों के लिए 'रागी' सबसे उत्तम है क्योंकि इसमें कैल्शियम भरपूर मात्र मे होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। 

प्रश्न 7. क्या मिलेट्स महंगे होते है?
उत्तर: नहीं,बहुत सारे मिलेट्स सामान्य अनाजों की तुलना मे सस्ते ही होते है। 

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(अंतिम अपडेट:18 जुलाई 2026)

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