मानक वजन:
170 किलोग्राम (स्वीकार्य छूट: ±10 kg / 3%)
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मूल आधार (1870): ब्रिटिश काल में 1 खांडी (784 lb) की दो गांठें यानी 392 पाउंड (4.75 मन) तय हुआ था।
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मीट्रिक बदलाव (1956–77): 392 पाउंड का मीट्रिक रूपांतरण और मिलों की प्रेसिंग क्षमता को सुगम करने के लिए 1976-77 से 170 किग्रा तय किया गया।
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आधिकारिक मानक: BIS (IS 12171) और DGFT (अधिसूचना 113) के अनुसार भारत में अनिवार्य कानूनी मानक।
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वैश्विक अंतर: भारत व पाक में 170 किग्रा, जबकि अमेरिका में 218 किग्रा (480 lb) और चीन/ब्राजील में 227 किग्रा (500 lb)।
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| “मई 1870: बॉम्बे कॉटन चेंबर में कपास गांठों के मापन की ऐतिहासिक स्कीम—चेंबर की मुहर वाले कैलिपर्स का उपयोग। ” |
प्रस्तावना (Introduction)
कपास की एक गांठ (Bale) में 170 किलोग्राम कपास होता है --- यह अकड़ा अचानक से ही नहीं आ गया है बल्कि इसके पीछे - 150 सालों का इतिहास,सरकारी अधिसूचनाओं, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियम और व्यापारिक जरूरतों जैसे कारकों का योगदान रहा है।
इस लेख में हम इसी ऐतिहासिक सफर को रखेंगे।
कपास गांठ क्या है और यह इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
कपास भारत की दूसरी सबसे बड़ी नगदी फसल है जो 60 लाख किसानों और 4 से 5 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करती है। इसमें कपास निकलने से लेकर, प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और इसके निर्यात तक के कामों में लोग रोजगार में हैं।
इतना ही नहीं भारत कपास के क्षेत्रफल में विश्व में प्रथम स्थान पर है जबकि इसके उत्पादन और खपत में द्वितीय स्थान पर है। यह इसकी महत्ता का जीता जागता प्रमाण है।
कपास के सभी अकड़े, इसका MSP मूल्य निर्धारण और खरीद, निर्यात - आयात और बाजार रिपोर्टिंग -- ये सभी गांठ (Bale) में ही किया जाता है।
1 गांठ = 170kg के मानक को "कॉटन कार्पोरेशन ऑफ इंडिया" (CCI), भारतीय कपास संघ (CAI),NCDEX और PIB टेक्सटाइल मंत्रालय - इन सभी के द्वारा अपनाया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि यह 170 kg का आंकड़ा कैसे और किस आधार पर तय हुआ ? क्या यह कोई प्राकृतिक ज्ञान थी या कोई सरकारी या व्यवसायिक फैसला ? चलिए इसके इतिहास में चलते हैं।
कपास को गांठ (Bale) में क्यों बांधा जाता है?
खेत से चुनी गई कपास काफी हल्की, फूली हुई और आयतन में ज्यादा जगह घेरने वाली होती है। अतः इसको गांठ में ही बंधा जाता रहा है। मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से इसको गांठों में बंधा जाता है -
- वॉल्यूम और ढुलाई: बिना दबायी गई रुई को यदि बोरियो में भरकर गाड़ियों या पानी के जहाजों में भेजा जाए तो वजन तो कम रहेगा लेकिन जगह पूरी तरह से भर जाएगा।
- जहाजरानी का भाड़ा: जहाजरानी का भाड़ा वजन के साथ साथ आयतन पर भी निर्भर करता था।
- सुरक्षा: हवा के संपर्क में खुली रुई में आग लगने का डर बना रहता है। गांठों में बांधने से या सुरक्षित हो जाती है।
इन्हीं कारणों से ओटाई (Gunning) के बाद रुई (Lint) को भारी हाइड्रोलिक या मैकेनिकल प्रेस में अधिक दबाव देकर ठोस आयताकार बक्से जैसे रूप में कसा जाता है -- इसी को "कपास की गांठ" (Cotton Bale) कहते हैं।
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| हाइड्रोलिक प्रेस में रुई को अत्यधिक दबाव देकर 170 किग्रा की ठोस गांठ बनते हुए। |
1. ब्रिटिश काल और बॉम्बे कॉटन चेंबर (1870 का मोड़)
पहली शिकायत 1847 में गांठों के माप में गड़बड़ी का आया:
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत से कपास का निर्यात बढ़ रहा था। लेकिन जहाज मालिकों और निर्यातकों के बीच आए दिन विवाद होने लगे कि कपास के गांठों का सही माप क्या है।
इसी क्रम में 1847 में बम्बई चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स को शिकायत मिली कि कपास और उसकी गांठों के माप में असंगति है। इससे शुल्क और वजन का विवाद बढ़ने लगा था।
इसके बाद चेंबर ने आयातित कपास के वजन और नमूनों के जांच का जिम्मा भी अपने ऊपर ले लिया ताकि निर्यातकों और जहाज मालिकों दोनों को न्याय मिल सके।
मई 1870 का ऐतिहासिक फैसला: पेटेंट - प्रेस्ड गांठों का मापन:
मई 1870 में कपास गांठ के माप को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि बॉम्बे चैम्बर्स ने एक प्रयोगात्मक स्कीम को शुरू किया - इस स्कीम में चेंबर के मुहर वाले कैलिपर्स (Calipers) का उपयोग करके गांठों का माप लिया जाता था।
यह व्यवस्था दो सालों में ही स्थापित हो गई और जहाज मालिकों एवं निर्यातकों दोनों के लिए इसको निष्पक्ष माना गया।
तय यह किया गया था कि 4.76 मन जो 392 पाउंड होता था और यह मानक जहाज के शिपिंग स्पेस में फिट हो जाता था। अतः यही 392 पाउंड भारतीय उप महाद्वीप में कपास की गांठ का आधार बना।
इसी दौर में 1870 से 1955 तक बॉम्बे कॉटन टेक्सटाइल उद्योग में गांठों के मापन और वजन को लेकर कई नियम बने जो बाद में 1932 के Bombay Weights and Measures Act का आधार बने।
2. स्वतंत्रता के बाद -- मीट्रिकेशन और आंकड़ों का बदलाव (1956-1976)
वर्ष 1956 में संसद के फैसले से मीट्रिक प्रणाली अपनाई गई:
स्वतंत्रता के बाद भारत ने वजन और माप प्रणाली को आधुनिक बनाने का फैसला किया। इसी उद्देश्य से दिसंबर 1956 में संसद ने Standard of Weights and Measures Act को पारित किया गया।
इसी एक्ट के आधार पर 1 अक्टूबर 1958 से मीट्रिक प्रणाली (किलोग्राम, मीटर) पूरे देश में लागू हो गया। इसका सीधा असर कपास आंकड़ों पर हुआ -- अब गांठों का वजन "पाउंड (Ib) की जगह किलोग्राम (kg) में रिपोर्ट होने लगा।
1961 से 1976 में तीन चरणों में बदलाव:
कपास के आधिकारिक आंकड़ों (Directorate of Cotton Development) के अनुसार - 1961-62 तक कपास का उत्पादन 392 lb(पाउंड) प्रति गांठ में होता था। यानी यह किलोग्राम में 177.808 किलोग्राम होता था।
इसी को राउंड फिगर में 180kg कर दिया गया जो 1972-73 तक गांठ का मानक वजन बना रहा।
उसके बाद तत्कालीन भारतीय केंद्रीय कपास समिति (Indian Central Cotton Committee - ICCC) और कपड़ा आयुक्त कार्यालय (Office of the Textile Commissioner) ने मिलकर 170 किलोग्राम का एक गांठ के वजन को तय किया।
इसके दो मुख्य व्यवहारिक कारण थे - पहला कपास को गांठ में बनाने के लिए प्रेस करने वाले जिनिंग और प्रेसिंग मशीनों की क्षमता के हिसाब से 170 kg सबसे अधिक फिट बैठता था।
दूसरा 10 गांठ = 17 क्विंटल यह रेलवे वैगन में लोडिंग के लिए अधिक सुगम हो रहा था। साथ ही किसान के स्तर पर भी इससे सुविधा मिलती थी।
अतः इस प्रकार से 1976-77 से गांठ का मानक वजन 170kg के रूप में अधिसूचित हो गया।
3. वर्ष 2012 की DGFT अधिसूचना - 170kg को कानूनी मानक बनाना
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 4 मई 2012 को अधिसूचना संख्या -113 को जारी किया जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया कि -- अधिसूचना के पारा -2(iii) के अनुसार स्पष्ट रूप से कहा गया कि 1 गांठ = 170kgs है।
यह अधिसूचना कपास निर्यात अनुबंधों के पंजीकरण के लिए जारी किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य या था कि गैर मानक वजन वाले गांठों के कारण होने वाले विवादों, शिकायतों और धोखाधड़ी पर लगाम लगाया जाए।
इस अधिसूचना के ठीक 20 दिन बाद ही 24 मई 2012 को DGFT का फिर से स्पष्टीकरण आ गया। इस स्पष्टीकरण में कहा गया कि "हर गांठ का वजन 170kg की निर्धारित सीमा में होना अनिवार्य है"। भले ही जहाजों में कितनी ही गैर मानक गांठें क्यों न लदी हो।
या नियम सभी कपास निर्यातकों, शिपिंग कम्पनियों और विदेशी खरीददारों पर लागू हुआ।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह पहली बार था जब - 170kg को कानूनी तौर पर बाध्यकारी घोषित किया गया।
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| “CCI गोदाम में MSP खरीद के तहत 170 kg वाली कपास गांठें—2025–26 में 105.09 लाख गांठें खरीदी गईं। ” |
4. BIS मानक -- IS 12171:1999 और सहनशीलता
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने - IS 12171:1999 और संबंधित दस्तावेजों में कपास गांठ के आकार, आयाम और वजन का विस्तृत विवरण दिया है।
सामान्य किस्मों के लिए - 170kg ± 10kg की सहनशीलता (Tolerance) बताया।
कुछ विशेष किस्मों के लिए - 155kg ± 7kg की सहनशीलता (Tolerance) बताया। इन विशेष किस्मों में - V -797,Kalagin,CJ-73 और Waghad शामिल थे।
यह मानक जिनिंग प्रोसेसिंग यूनिट्स, CCI टेंडर्स और निर्यातकों के लिए बाध्यकारी है।
गौरतलब है कि BIS के मानक के बिना गांठों का MSP खरीद, निर्यात अनुबंध और NCDEX ट्रेडिंग में स्वीकार नहीं हो पाता है।
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| “1870 से 2026 तक: कपास गांठ के 170 kg मानक का ऐतिहासिक कालक्रम। ” |
| वर्ष / दिनांक |
महत्वपूर्ण घटना |
| 1847 |
बॉम्बे चैंबर को कपास गांठों के माप में गड़बड़ी की शिकायत |
| मई 1870 |
बॉम्बे चैंबर ने पेटेंट-प्रेस्ड गांठों के मापन हेतु प्रयोगात्मक स्कीम शुरू की |
| 1932 |
Bombay Weights and Measures Act पारित |
| दिसंबर 1956 |
संसद ने Standards of Weights and Measures Act पारित किया |
| 1 अक्टूबर 1958 |
मीट्रिक प्रणाली लागू |
| 1961–62 तक |
कपास आँकड़े 392 lb प्रति गांठ में |
| 1972–73 तक |
कपास आँकड़े 180 kg प्रति गांठ में |
| 1976–77 से |
कपास आँकड़े 170 kg प्रति गांठ में |
| 4 मई 2012 |
DGFT अधिसूचना संख्या 113: 1 bale = 170 kg |
| 24 मई 2012 |
DGFT स्पष्टीकरण: 170 kg अनिवार्य मानक |
| IS 12171:1999 |
BIS मानक: 170 kg ±10 kg (कुछ किस्मों के लिए 155 kg) |
| 2025–26 |
CCI ने 105.09 लाख गांठें (170 kg आधार) MSP पर खरीदीं |
| जुलाई 2026 |
PIB रिपोर्ट: “One bale is equivalent to 170 kg” |
5. वर्ष 2026 तक की स्थिति और 170kg का भविष्य
भारत में जिनिंग प्रोसेसिंग तकनीक और मिलों के आधुनिकीकरण के बावजूद 170 किलोग्राम का मानक जस का तस बना हुआ है। जबकि कई देशों में यह अलग अलग है।
पाकिस्तान में भी यह 170kg ही है लेकिन अमेरिका में यह 217.72kg, चीन में 226.8kg, ब्राजील में 220-227kg और मिस्र में 326.6 kg है।
अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (ICAC) जब वैश्विक रिपोर्ट को तैयार करती है तब भ्रम से बचने के लिए सभी आंकड़ों को मीट्रिक टन (MT) या 480 पाउंड (US मानक गांठ) में परिवर्तित करती है।
भारत में कच्चे जूट की गांठ - 180kg होती है। लेकिन जूट का रेशा कपास की तुलना में सख्त, भारी और सघन होता है। इसको दबाने पर कम जगह में ही अधिक समा सकती है।
यह पैमाना क्यों नहीं बदला गया?
भारत में कपास के गांठ के वजन का मानक 170kg रखा गया है और आगे भी यह जारी रहने वाला है। आखिर भारत ने यह मानक क्यों नहीं बदला। ऐसा सवाल होता है। इसके मुख्य कारण इस प्रकार से हो सकता है --
पहला कारण यह है कि सॉफ्टवेयर और अकाउंटिंग सेट हो चुका है। भारत की सभी मंडियों, कॉटन कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI), मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और कपड़ा मिलो के ERP सॉफ्टवेयर 170 kg गांठ पर कॉलिब्रेटेड हो गया है।
दूसरा कारण भारत की लॉजिस्टिक और ट्रको की क्षमता से है। यहां ट्रकों के मानक आकार में 170kg की 100 से 150 गांठें एक्सेल लोड नियमों के अनुसार पूरी तरह से फिट बैठती है।
तीसरा श्रमिकों और हाथ से ढुलाई में आसानी को लेकर है।भारतीय मिलो और गोदामों में आज भी अनलोडिंग के लिए काफी हद तक शारीरिक श्रम और हैंड ट्रालियों का उपयोग किया जाता है।
ऐसे में 227 किलो अमेरिकी गांठ की तुलना में 170 किलो की गांठ को संभालना भारतीय परिस्थितियों के लिए अधिक व्यवहारिक है।
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| “भारतीय कपास किसान—जिनके लिए 170 kg का मानक MSP, बिक्री और निर्यात में स्थिरता लाता है। ” |
निष्कर्ष (Conclusion)
इस प्रकार से भारत में कपास की गांठ का मानक 170kg एक दिन में तय नहीं हुआ है। यह 150 साल से अधिक के इतिहास का परिणाम है।
सन् 1870 में बॉम्बे चैम्बर ने मापन में मानकीकरण का शुरुआत किया था। यह 1956-58 में मीट्रिकेशन के बाद पाउंड से किलोग्राम में बदलाव के साथ आगे बढ़ा।
आजादी के बाद वर्ष 1976 में आंकड़ों में 170kg का आधिकारिक उपयोग शुरू हुआ। फिर 2012 में DGFT अधिसूचना ने 170kg को कानूनी मानक बनाया।
आज वर्तमान में CCI,CIA,NCDEX और PIB ये सभी 170kg गांठ के मानक का ही उपयोग करते हैं।
यह मानक किसानों, व्यापारियों, निर्यातकों और सरकारी एजेंसियों -- सभी के हित में है। क्योंकि यह पारदर्शिता, स्थिरता और व्यावहारिकता को सुनिश्चित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)
1. भारत में कपास की एक गांठ (Cotton Bale) का आधिकारिक वजन कितना होता है?
भारत में कपड़ा मंत्रालय, कॉटन कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI), और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार कपास की एक मानक गांठ का वजन 170kg तय है।
2. 170 किलोग्राम ही पैमाना क्यों चुना गया, कोई गोल संख्या जाए 150 या 200 क्यों नहीं?
ब्रिटिश काल (1870 के दशक) में एक गांठ का वजन 392 पाउंड (लगभग 4.75 मन) तय था। आजादी के बाद 1956 के माप-तौल अधिनियम के तहत मीट्रिक प्रणाली अपनाने और रेल वैगन की लोडिंग क्षमता तथा मिलों की प्रेसिंग क्षमता को सुगम बनाने के लिए इसे 1976-77 में आधिकारिक तौर पर 170 किलोग्राम पर मानकीकृत किया गया।
3. क्या अमेरिका और अन्य देशों में भी कपास की गांठ 170kg ही होती है?
नहीं। अमेरिका में कपास की मानक गांठ 480 पाउंड (लगभग 217.72 किग्रा) की होती है, जबकि चीन और ब्राजील में यह लगभग 227 किग्रा (500 पाउंड) की होती है। केवल भारतीय उपमहाद्वीप (भारत और पाकिस्तान) में ही 170 किलोग्राम का पैमाना चलता है।
4. कपास की गांठों में वजन का स्वीकार्य अंतर (Tolerance Limit) कितना होता है?
सामान्य किस्मों के लिए - 170kg ± 10kg की सहनशीलता (Tolerance) बताया।
कुछ विशेष किस्मों के लिए - 155kg ± 7kg की सहनशीलता (Tolerance) बताया। इन विशेष किस्मों में - V -797,Kalagin,CJ-73 और Waghad शामिल थे।
5. कपास की गांठ 170kg है तो जूट की गांठ 180kg की क्यों होती है?
भारत में कच्चे जूट की गांठ - 180kg होती है। लेकिन जूट का रेशा कपास की तुलना में सख्त, भारी और सघन होता है। इसको दबाने पर कम जगह में ही अधिक समा सकती है।
6. क्या निर्यात के लिए 170kg का नियम अनिवार्य है?
हां, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना संख्या 113 और 24 मई 2012 के स्पष्टीकरण के अनुसार भारत से कपास के व्यापार और निर्यात के आंकड़ों में प्रति गांठ 170 किलोग्राम का मानक अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाता है।
7. कपास को दबाकर गांठ (Bale) के रूप में बांधना क्यों जरूरी है?
कच्ची रुई बहुत अधिक जगह घेरती है। गांठ बनाने से रुई का आयतन (Volume) भारी मात्रा में घट जाता है, जिससे जहाजों और ट्रकों का माल भाड़ा कम लगता है, भंडारण आसान होता है और आग लगने का जोखिम घटता है।
8. क्या भारत में 170kg के इस पैमाने को बदलने की योजना है?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 227 किग्रा (500 पाउंड) की हाई-डेंसिटी गांठों की मांग के बावजूद, भारत में सभी एपीएमसी मंडियां, सीसीआई की एमएसपी खरीद और कपड़ा मिलों का संपूर्ण लॉजिस्टिक्स ढांचा 170 किलोग्राम के अनुसार सेट है, इसलिए घरेलू बाजार में इसे बदलने की कोई योजना नहीं है।
संबंधित विषय:
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BIS
भारतीय मानक ब्यूरो (IS 12171):
Cotton Bales Specification एवं भार मानक संबंधी दिशा-निर्देश।
services.bis.gov.in ↗
-
Textiles
वस्त्र मंत्रालय / Office of the Textile Commissioner:
Cotton Control Order, भारतीय कपास उद्योग सांख्यिकी एवं वार्षिक रिपोर्ट।
texmin.nic.in ↗
-
DGFT
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT):
अधिसूचना सं. 113 (4 मई 2012) एवं स्पष्टीकरण (1 Bale = 170 kg मानक)।
dgft.gov.in ↗
-
CCI
भारतीय कपास निगम (Cotton Corporation of India):
MSP खरीद आंकड़े, ग्रेडिंग नियम और मानक गांठ विनिर्देश।
cotcorp.org.in ↗
-
CAI
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI):
भारतीय कपास व्यापार इतिहास, बॉम्बे चैंबर रिकॉर्ड और खांडी रूपांतरण।
caionline.in ↗
-
PIB
पत्र सूचना कार्यालय (PIB India):
कपास उत्पादन, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और राष्ट्रीय आंकड़े।
pib.gov.in ↗
-
ICAC
अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (ICAC):
वैश्विक कपास गांठ मानक, 480 lb सांख्यिकीय माप एवं अंतरराष्ट्रीय तुलना।
icac.org ↗
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