ओलावृष्टि मुआवजा कैसे मिलता है?
- ओले गिरते ही 72 घंटे में सूचना दें
- पटवारी और कृषि विभाग खेत का सर्वे करते हैं
- 33% से ज्यादा नुकसान पर मुआवजा मिलता है
- सरकारी राहत + फसल बीमा दोनों मिल सकते हैं
- पैसा सीधे बैंक खाते में आता है
प्रस्तावना (Introduction)
भारत में हर साल लाखों किसान ओलावृष्टि के भारी नुकसान को झेलते है। कई बार सिर्फ 10-15 मिनट की ओलें की बारिश पूरी फसल को नष्ट कर देती है। ऐसे समय में सरकार किसानों को आर्थिक मदद देती है, लेकिन बहुत से किसानों को सही प्रक्रिया नहीं पता होती।
यही नहीं, वर्तमान समय में ओलावृष्टि से बचने के लिए और उसके होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कई आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक विकसित हो चुके है। जिनके बारे में अभी भी किसान भाइयों के बीच में जानकारी और जागरूकता का अभाव है।
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इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि ओलावृष्टि के बाद किसान मुआवजा कैसे प्राप्त करे।
भारत में ओलावृष्टि से कितना नुकसान होता है ?
भारत में हर साल ओलावृष्टि से हजारों करोड़ रुपये की फसल नष्ट हो जाती है।
आधिकारिक अनुमानों के अनुसार :-
- हर साल 10,000 करोड़ से 30,000 करोड़ तक का नुकसान।
- 20-40 लाख किसान प्रभावित होते है ओलावृष्टि से।
- रबी सीजन में सबसे ज्यादा खतरा होता है।
!!मौसम जानकारी को जारी करता है - भारत मौसम विज्ञान विभाग!!
हाल के आंकड़ों और रिपोर्टों के अनुसार,ओले गिरने से होनेवाले नुकसानों का विवरण इस प्रकार से है -
- प्रभावित क्षेत्र: सरकारी आंकड़ों के अनुसार,वर्ष 2024-25 में प्राकृतिक आपदाओं (जिसमें ओलावृष्टि मुख्य है) के कारण देश में लगभग 13.12 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
- ताजा नुकसान: अप्रैल 2026 में अब तक उत्तर और मध्य भारत में हुई ओलावृष्टि से कई जिलों में 20 से 70% तक फसल बर्बाद होने की खबरे है।
📉 हर साल प्रभावित क्षेत्र (औसत)
किन फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है ?
ओलावृष्टि का प्रभाव सभी फसलों पर एक जैसा नहीं होता। कुछ फसलें अपनी नाजुक संरचना और प्रकृति के कारण ओले की मार नहीं झेल पाती है।
1. रबी की प्रमुख फसलें:
- सरसों: यह ओले के प्रति सबसे संवेदनशील फसल है,ओला लगते हि फलिया फट जाती है और दाने जमीन पर गिर जाते है।
- गेहूं: ओले गिरने से बलिया टूट जाती है और दानें काले पड़ जाते है। जिससे उनका बिक्री भाव कम हो जाता है। साथ ही फसल भी गिर जाते है।
- चना और मटर: इनकी फूल और फलियां गिर जाती है, जिससे पैदावार में भारी कमी आती है।
2. बागवानी फसलें:
बागवानी मे एक बार ओला गिरने से पूरे साल की कमाई शून्य हो सकती है।
- आम: आम के टिकोले झड़ जाते है और फलों पर दाग पड़ने से वे बाजार में बिकने लायक नहीं रहते है।
- लीची: बिहार की शान लीची ओले पड़ने से लीची की कोमल त्वचा ओले से फट जाती है जिससे पूरा गुच्छा बर्बाद हो जाता है।
- अंगूर: ओले पड़ने से फल के साथ बेल की शाखाएं भी क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिससे अगले साल का भी फसल प्रभावित हो जाता है।
3. नगदी और सब्जी फसलें:
- आलू: ओले गिरनें से आलू की पत्तियां फट जाती है,जिससे आलू साइज में बड़ा नहीं हो पाता है।
- टमाटर और मिर्च: फल सड़ने लगते है और उनमें इंफैक्शन फैल जाता है।
- पत्तेदार सब्जियां: ओलावृष्टि से पूरी तरह मिट्टी में मिल जाती है,और बाजार में बिकने लायक नहीं रह जाती है।
ओलावृष्टि से बचाव के वैज्ञानिक तरीके
1. Anti Hail Net लगाए:
वर्तमान में सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक तरीका माना जाता है,विशेषकर बागवानी फसलों के लिए। इस तकनीक को बढ़ाने में Indian Council of Agriculture Research की महत्वपूर्ण भूमिका है।
- कार्यप्रणाली: विशेष प्रकार के नायलॉन जैसे धागे से बनी जालियों (Net) को पौधों के ऊपर लगाई जाती है।
- लाभ: ओले सीधे पौधों पर गिरने के बजाय जाली पर गिरते है,जिससे 80-90% नुकसान कम हो जाते है।
- फसल: आम,अंगूर,सेव,टमाटर,सब्जियों में लाभकारी।
- लागत: 3-5 लाख प्रति हेक्टेयर और 5-8 सालों तक उपयोग में आ जाता है।
2. मौसम अलर्ट ऐप डाउनलोड करे:
आज कल आप अपने मोबाईल से ही पता कर सकते है की ओले गिरने वाले है की नहीं। इसके लिए आप भारत सरकार के Indian Metrological Department के साइट से या भारत सरकार के ऐप Damini App को मोबाईल में जरूर डाउनलोड कर ले।
- इस ऐप मे 45 मिनट पहले ही ओले गिरने की चेतावनी मिल जाती है।
- चेतावनी मिलने पर तुरंत खेत की सिंचाई रोके,कटाई जल्दी कर ले,सब्जियों पर कवर लगा दे।
- पशुओं को सुरक्षित जगह पर कर दे।
- सही समय पर जानकारी 20-40% नुकसान को कम कर देता है।
3. फसल बीमा जरूर कराए:
ओले रोक नहीं सकते लेकिन, नुकसान की भरपाई हो सकती है। भारत सरकार की योजना "प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना" जरूर करा ले। इसमें ओलावृष्टि कवर होती है।
- ओलावृष्टि के 72 घंटे के अंदर क्लेम करके भरपाई कर सकते है।
4. जल्दी पकने वाली किस्में लगाए:
लंबी अवधि वाली फसल लगाने से जोखिम ज्यादा होती है। इसीलिए गेहूं व चना जैसी फसलों का ऐसी किस्मों का चयन करे और लगाए जो जल्दी ही पक जाती है।
- वैज्ञानिक अब ऐसा बीज तैयार कर रहे है जिसमें मजबूत तना, मोटी पत्तियां और गिरने की कम संभावना होती है।
- ICAR द्वारा विकसित कई गेहूं और दाल की किस्में ओला सहनशील है।
- फसल विविधीकरण और मिश्रित खेती करे। अगर एक फसल खराब हुई तो दूसरी बच जाती है।
- नुकसान को 40% तक कम किया जा सकता है।
5. खेत में ड्रेनेज बनाए:
ओले के बाद पानी जमा होना सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
- पानी जल्दी निकलने से फसल बचते है और जड़े सड़ने से बच जाती है।
6. खेत में विन्ड्ब्रेक पेड़ लगाना:
खेत के चारों तरफ पेड़ लगाने से तेज हवा धीमी हो जाती है और ओलों की गति कम हो जाती है।
- उपयोगी पेड़ ,नीम,शीशम, आदि।
7. पॉलिहाउस खेती:
यह आधुनिक तरीका तेजी से बढ़ रहा है।यह सब्जी और फूल किसानों के लिए सबसे सुरक्षित और सस्ता तकनीक है। इसमें -
- लोहे और बांस की संरचना बनाकर पारदर्शी प्लास्टिक या नेट लगा दिया जाता है।
- ओले तेज हवा और बारिश एवं तापमान से भी सुरक्षा मिलती है।
- छोटे किसानों के लिए बेस्ट विकल्प है।
8. मौसम देखकर कटाई की योजना:
IMD की भविष्यवाणी बहुत काम की होती है,और दामिनी ऐप में भी सूचना एवं अलर्ट मिलता रहता है। इसलिए हमेशा फसलों की कटाई की योजना मौसम को देख कर सही अनुमान लगा कर करे।
- अगर 3-4 दिनों में ओले का अनुमान हो तो जल्दी कटाई करे।
- आधी पकी फसल भी बचा सकते है।
9. ओलावृष्टि के बाद तुरंत स्प्रे:
जब ओला गिरता है तब फसल पर घाव बन जाता है। हवा में मौजूद बैक्टीरिया एवं फंगस इन घावों के जरिए पौधों के अंदर चले जाते है।
- इसलिए ओलावृष्टि के तुरंत बाद फफूंदनाशक का छिड़काव करनी चाहिए।
- इससे फसलें एवं फल बच जाती है।
ओलावृष्टि के बाद किसान क्या करे ?
सबसे पहले ओलावृष्टि रुकते ही किसान अपने खेत की तुरंत जांच करे और हुए नुकसान का फोटो एवं विडिओ बना ले। यह फोटो एवं विडिओ मुआवजे के लिए बहुत जरूरी है।
- टूटे पौधे एवं गिरे हुए फल फूल का फोटो विडिओ।
- खेत का पूरा दृश्य का फोटो एवं विडिओ।
- संभव हो तो लोकेशन मैप कैमरा का प्रयोग करें जिसमें तारीख और समय सब दिख जाता है।
1. 72 घंटे का गोल्डन प्लान:
चरण 1. :
नुकसान होने के 72 घंटों के भीतर सूचना देना अनिवार्य होता है। देर होने पर क्लेम खारिज हो सकता है। इसलिए सबसे पहले नुकसान का फोटो विडिओ बनाने के बाद तुरंत सूचना दे -
⚠️ महत्वपूर्ण सूचना:
ओलावृष्टि के 72 घंटे के अंदर सूचना नहीं देने पर मुआवजा क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
ओलावृष्टि के 72 घंटे के अंदर सूचना नहीं देने पर मुआवजा क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
- Crop Insurance App के माध्यम से, टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना दे या और
- ग्राम सचिव एवं पटवारी को।
- कृषि विभाग को।
- बीमा कंपनी और बैंक को।
- सूचना लिखित में जरूर दे।
चरण 2. :
सर्वेक्षण और पंचनामा महत्वपूर्ण होता है। इसमें सूचना देने के बाद बीमा कंपनी का प्रतिनिधि और अन्य राजस्व अधिकारी आपके खेत का दौरा करेंगे।
- सावधानी: सर्वे के दौरान स्वयं मौजूद रहे और सुनिश्चित करें की नुकसान का आकलन प्रतिशत सही दर्ज किया गया है।
- यह प्रक्रिया राज्य सरकार एवं State Disaster Response Fund के तहत होती है।
- इसे गिरदारी सर्वे कहते है। यह 7 से 15 दिनों के भीतर हो जाती है।
चरण 3. :
आवश्यक दस्तावेज जरूर तैयार रखे जैसे -
- आधार कार्ड और बैंक पासबुक।
- जमीन के कागजात जैसे खसरा और खतौनी।
- बुआई का प्रमाणपत्र।
- नुकसान वाली फसल के साथ किसान का फोटो।
- बीमा पॉलिसी नंबर यदि बीमा है।
चरण 4. :
अब क्लेम का भुगतान होता है। सर्वे रिपोर्ट जमा होने के बाद,बीमा कंपनियां नुकसान के अनुपात में राशि सीधे किसान के DBT लिंक बैंक कहते में भेजती है।
ओलावृष्टि का मुआवजा कैसे मिलता है ?
किसानों को दो तरह से पैसा मिलता है -
- 1. फसल बीमा क्लेम
- 2. राज्य सरकार राहत
भारत में ओलावृष्टि से नुकसान होने पर इन दोनों तरीकों से मुआवजा मिल सकता है।
दोनों अलग अलग है और दोनों भी मिल सकते है।
1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY):
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे 13 जनवरी 2016 को शुरू किया गया था।
मुख्य विशेषताएं:-
- न्यूनतम प्रीमियम: किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना होता है,बाकी का हिस्सा केंद्र एवं राज्य सरकारें वहन करती है।
- स्वैक्षिक योजना: वर्ष 2020 से यह योजना सभी किसानों के लिए स्वैक्षिक कर दी गई है।
- पूरी सुरक्षा: इसमें बुआई से लेकर कटाई के बाद तक का पूरी नुकसान को कवर किया जाता है।
- दावा भुगतान: नुकसान का आकलन होने के बाद पैसा सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक अकाउंट में भेज दिया जाता है।
- प्रीमियम दरें: किसानों के लिए प्रीमियम दरें फसल के आधार पर निर्धारित की गई है जो इस प्रकार से है -
- कवरेज: PMFBY केवल ओलावृष्टि ही नहीं,बल्कि निम्नलिखित स्थितियों में भी सुरक्षा प्रदान करती है-
- 1. बुआईं और रोपण में बाधा।
- 2. खड़ी फसल में बाधा।
- 3. कटाई के बाद नुकसान।
- 4. स्थानीय आपदाएं।
- क्लेम: क्लेम करने के लिए ऊपर बताए गए नियमों के अनुसार 72 घंटों के भीतर क्लेम करे।
- पोर्टल: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आधिकारिक पोर्टल - :
pmfby.gov.in है। इस पोर्टल पर जाकर सभी सूचनाएं एवं क्लेम कर सकते है।
2. उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि मुआवजा और राहत:
उत्तर प्रदेश सरकार ओलावृष्टि को 'राज्य आपदा' मानती है और इसके लिए राजस्व विभाग मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है।
(A) मुआवजा व दरें (SDRF के तहत):
उत्तर प्रदेश में मुआवजा तब मिलता है जब फसल नुकसान 33% या उससे ज्यादा हो। 2026 के नए मानकों के अनुसार राहत दरें कुछ इस प्रकार से है-
- सिंचित भूमि (Irrigated Land): ₨ 13,500 से Rs 15,000 प्रति हेक्टेयर।
- असिंचित भूमि (Unirrigated Land): रस 6,800 से Rs 7,500 प्रति हेक्टेयर।
- बारहमासी फसलें बागवानी: Rs 18,000 से 22,500 प्रति हेक्टेयर।
(B) राहत आयुक्त कार्यालय (Relief Commissioner):
उत्तर प्रदेश के किसान सीधे अपनी शिकायत या जानकारी 'राहत आयुक्त' के पोर्टल पर देख सकते है। यहां लेखपाल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है,जो 'पंचनामा' तैयार कर तहसील में जमा करता है।
3. बिहार में ओलावृष्टि सहायता:कृषि इनपुट सब्सिडी
बिहार सरकार बीमा के साथ-साथ "कृषि इनपुट सब्सिडी" पर जोर देती है,जो प्रत्यक्ष रूप से किसानों के खाते में भेजी जाती है।
(A) बिहार राज्य फसल सहायता योजना:(BSFSY):
बिहार सरकार ने केंद्र की PMFBY के स्थान पर अपनी खुद की योजना लांच की है जो इस प्रकार से है -
- निःशुल्क पंजीकरण: बिहार के BSFSY योजना में किसानों को कोई प्रीमियम नहीं देना होता है।
- मुआवजा राशि:
- *20% तक नुकसान होने पर Rs 7,500 प्रति हेक्टेयर।
- *20% से अधिक नुकसान होने पर Rs 10,000 प्रति हेक्टेयर।
- आवेदन: इसके लिए "प्रत्यक्ष लाभ अंतरण,कृषि विभाग"(DBT Agriculture Bihar) पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है।
(B) प्रभावित फसलों की सूची: बिहार में ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान मक्का,आम और लीची को होता है। सरकार नें इन फसलों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की है।
क्लैम रिजेक्ट होने के कारण
ये सबसे जरूरी और ध्यान रखने लायक बातें है नहीं तो क्लैम रिजेक्ट हो सकती है -
- नुकसान का फोटो विडिओ बनाकर जरूर रखें।
- 72 घंटे के भीतर सूचना जरूर दे दे।
- गलत फसल की सूचना न दे।
- बीमा और उसका प्रीमियम समय से जरूर कराए और पोर्टल पर पंजीकरण कराए।
- सही दस्तावेज और सर्वे कराए।
नोट: KCC का लाभ जरूर ले और इसे करा ले क्योंकि, यदि आपने 'किसान क्रेडिट कार्ड' लिया है तो आपकी फसल का बीमा स्वतः हो जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
ओलावृष्टि जैसे प्राकृतिक आपदाएं किसान के धैर्य और मेहनत की परीक्षा लेती है। लेकिन सही जानकारी और सरकार की PMFBY और राज्य सरकारों की SDRF जैसी योजनाएं इस कठिन समय में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।
उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में,जहां कृषि जीवन का आधार है,वहां किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बताए गए आधुनिक वैज्ञानिक विधियों जैसे एंटी हेल नेट को भी अपनाना चाहियें। नुकसान होने पर 72 घंटे के अंदर सूचना जरूर देनी चाहिए।
क्या अपकी फसल को भी इस साल ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है ? क्या आपको क्लेम लेने में कोई समस्या आ रही है? तो कॉमेंट में जरूर बताए, हम अवश्य ही आपको गाइड करेंगे।
महत्वपूर्ण सुझाव: मुआवजे की राशि और नियम समय-समय पर सरकारी नीतियों के अनुसार बदल सकते है,अतः आधिकारिक पोर्टल पर जांच अवश्य करें।
📌 पूरी जानकारी एक नजर में
- ओले गिरते ही 72 घंटे में सूचना दें
- 33% नुकसान पर मुआवजा मिलता है
- सरकारी राहत + बीमा दोनों मिल सकते हैं
- पैसा सीधे बैंक खाते में आता है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या किराएं पर खेती करने वाले किसानों (बटाईदारों)को मुआवजा मिलता है? ▼
उत्तर: हां! यूपी और बिहार दोनों राज्यों में बटाईदार किसानों को मुआवजा मिल सकता है,वशर्तें उसके पास भूस्वामी के साथ लिखित समझौते या ग्राम प्रधान का प्रमाणित पत्र हो।
प्रश्न 2: यदि बीमा कंपनी फोन नहीं उठा रही है तो काय करें? ▼
उत्तर: ऐसी स्थिति में अपने जिलें के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) या जिला कृषि अधिकारी (DAO) को लिखित शिकायत दें।
प्रश्न 3: क्या ओलावृष्टि से गिरें हुए फलों पर मुआवजा मिलता है? ▼
उत्तर: हां! बागवानी फसलों के लिए सर्वेक्षण में "फलों के गिरनें" को भी नुकसान की श्रेणी में रखा गया है।
प्रश्न 4: ओलावृष्टि का मुआवजा कितनें दिनों में मिलता है? ▼
उत्तर: इसका मुआवजा 1-3 महीनों में मिल जाता है।
प्रश्न 5: क्या बिना बीमा के मुआवजा मिलता है? ▼
उत्तर: हां! राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला राहत बिना बीमा के भी मिल सकता है।
प्रश्न 6: ओले से हुए नुकसान की सूचना कितने घंटे में देनी होती है? ▼
उत्तर: इसकी सूचना 72 घंटों के भीतर देनी होती है अन्यथा बीमा क्लैम रिजेक्ट हो सकता है।
प्रश्न 7:क्या एंटी हेल नेट ओलावृष्टि के नुकसान को रोकने में प्रभावी है? ▼
उत्तर: हां! एंटी हेल नेट से बागवानी और सब्जियों के फसलों को ओलावृष्टि के होने वाले नुकसानों को 80-90% तक कम कर देता है।
प्रश्न 8: ओले गिरने के बाद किसान को क्या कदम तुरंत उठाना चैये? ▼
उत्तर: ओले के बाद किसान की 3 जिम्मेदारियां:
1️⃣ नुकसान की सूचना
2️⃣ फसल को बीमारी से बचाना
3️⃣ रिकवरी के लिए पोषण देना
👉 सही कदम उठाकर 30–50% फसल बचाई जा सकती है।
प्रश्न 9: ओलावृष्टि की सूचना पहले से ही मालूम करने के लिए कौन से ऐप डाउनलोड करनी चाहिए? ▼
उत्तर: अपने मोबाईल में भारत सरकार का सरकारी ऐप "दामिनी"ऐप डाउनलोड करनी चाहिए ,ये 30-45 मिनट पहले ही ओला गिरने की सूचना एवं अलर्ट दे देती है।

