SMAM योजना क्या है और किनके लिए है?
- छोटे और सीमांत किसानों को कृषि मशीनरी में सब्सिडी के लिए SMAM योजना
- 50-80% तक सब्सिडी प्राप्त कर सकते है किसान
- महिला किसान और SC/ST को विशेष और अधिक सब्सिडी
- किसानों का कृषि लागत कम और आमदनी अधिक होता है
- साथ में पर्यावरण सुरक्षा और मिट्टी को मजबूती भी
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| SMAM योजना से छोटे और सीमांत किसानों को महत्वपूर्ण लाभ मिल रहा है |
📑 Table of Contents
- ➤ प्रस्तावना (Introduction):🌾 SMAM योजना
- ➤ 🎯 SMAM योजना का उद्देश्य
- ➤ 🚜 SMAM योजना में मिलने वाली मशीनें
- ➤ 💰 SMAM योजना में सब्सिडी कितनी मिलती है?
- ➤ 👩🌾 SMAM योजना में कौन आवेदन कर सकता है?
- ➤ 📋 जरूरी दस्तावेज
- ➤ 📝 SMAM योजना में आवेदन कैसे करें?
- ➤ ⭐ SMAM योजना के फायदे
- ➤ निष्कर्ष
- ➤ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
प्रस्तावना (Introduction):🌾 SMAM योजना
क्या आप जानते है कि आधुनिक खेती की मशीनें अब केवल बड़े जमींदारों तक सीमित नहीं है ? भले ही आज के दौर में बढ़ती लागत और मजदूरों की कमी नें खेती को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। फिर भी इसीलिए भारत सरकार कि कई योजनाएं इन्हे आसान बना रही है।
इसी कड़ी में भारत सरकार कि SMAM (Sub-Mission on Agriculture Mechanization) योजना छोटे किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आप टैक्टर से लेकर रोटावेटर तक की मशीनों पर 80% तक सब्सिडी कैसे पा सकते है और इसके लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया क्या है।
ज्ञातव्य हो कि यह योजना भारत सरकार के Ministry of Agriculture & Farmers welfare मंत्रालय द्वारा संचालित की जाती है। साथ ही इसमें केंद्र के साथ साथ राज्य सरकारों का भी योगदान होता है।यह योजना 2014-15 में शुरू की गई थी।
🎯 SMAM योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उदेश्य खेती को आधुनिक बनाना और इसे शारीरिक श्रम के स्थान पर मशीनों पर आधारित करना है।चूंकि भारत में भूमि जोत का आकार बहुत छोटा होने के करण छोटे व मझोले किसान महंगी मशीनें नहीं खरीद पाते है। इसी समस्या को हल करने के लिए इसके उदेश्यों को इस प्रकार से दर्शाया गया है -
1. कृषि मशीनीकरण की पहुंच बढ़ाना:
इस योजना का सबसे प्राथमिक उदेश्य उन किसानों तक मशीनों को पहुंचाना है जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। इस प्रकार से -
- छोटे और सीमांत किसानों पर ध्यान: बड़े ट्रैक्टर या हार्वेस्टर खरीदना छोटे किसानों के लिए असंभव होता है। SMAM के माध्यम से उन्हे भारी सब्सिडी देकर मशीनें खरीदने योग्य बनाया जाता है।
- क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना: देश के जिन हिस्सों में अभी भी पुराने तकनीकों से खेती होती है,वहां आधुनिक उपकरणों को पहुंचाना और इसका लाभ सभी को प्रदान कराना।
2. कस्टमर हायरिंग सेंटर (CHCs) को बढ़ावा देना:
यह योजना केवल मशीन खरीदनें तक सीमित नहीं है,बल्कि 'किराये पर मशीन मॉडल' को भी बढ़ावा देती है। इसी बात और लक्ष्य को ध्यान में रखकर -
- किराये की सुविधा: इसमें ग्राम स्तर पर छोटे केंद्र(CHCs) बनाएं जाते है, जहां से किसान बहुत कम शुल्क पर मशीनों को किराये पर ले सकते है।
- ग्रामीण उद्यमिता: ग्रामीण युवाओं और किसानों के समूहों को ये केंद्र खोलने के लिए 40-80% तक की वित्तीय मदद दी जाती है, जिससे रोजगार के अवसर भी पैदा होती है।
3. कृषि इनपुट की दक्षता बढ़ाना:
मशीनों का उपयोग केवल काम को आसान करने के लिए ही नहीं,बल्कि संसाधनों को बचाने के लिए भी किया जाता है जैसे -
- समय की बचत: मशीनों के उपयोग से बुआई और कटाई समय से और कम समय में हो जाती है। इससे किसान अगली फसल के लिए जल्दी तैयार हो जाता है। साथ में किसानों के फसल का नुकसान भी खेतों में कम से कम हो पाता है।
- सटीकता: बीज ड्रिल और उर्वरक स्प्रेडर जैसी मशीनें यह सुनिश्चित करती है कि बीज और खाद सही मात्रा में और सही गहराई पर लगे। इससे बर्बादी भी कम होती है और पैदावार भी बढ़ता है।
4. खेती की लागत में कमी और आय बढ़ाना:
जब किसान मशीनों का उपयोग करता है, तो उसकी 'प्रति एकड़ लागत' कम हो जाती है -
- श्रम के लागत मे कमी: मजदूरों पर निर्भरता कम होने से खर्चा घटता है।
- फसल कटाई का नुकसान कम करना: आधुनिक थ्रेशर और हार्वेस्टर फसल की बर्बादी को बहुत हद तक रोकते है,जिससे किसानों के हाथों में अधिक अनाज आता है।
5. प्रदर्शन और जागरूकता :
सरकार इस योजना के तहत केवल पैसा ही नहीं देती है,बल्कि प्रशिक्षण भी प्रदान करती है -
- प्रदर्शनी केंद्र: कृषि संस्थानों और चयनित खेतों पर नयी मशीनों का प्रदर्शन किया जाता है ताकि किसान उनके लाभ को अपनी आखों से देख सके।
- क्षमता निर्माण: किसानों को यह सिखाया जाता है कि मशीनों का रख रखाव कैसे करें और उन्हें सुरक्षित तरीकें से कैसे चलाए।
🚜 SMAM योजना में मिलने वाली मशीनें
SMAM योजना के अंतर्गत खेती की तैयारी से लेकर इसकी कटाई और उसके बाद तक के प्रबंधन के लिए लगभग सभी आधुनिक मशीनों को शामिल किया गया है। सरकार इसपर 40% से लेकर 80% तक सब्सिडी प्रदान करती है।
यहां मुख्य मशीनों की सूची दी गई है जिन्हें आप इस योजना के तहत ले सकते है -
1. जुताई और खेती की तैयारी के लिए (Tillage & Land Prep):
ये मशीनें फसल बोने से पहले मिट्टी को तैयार करने के लिए उपयोग की जाती है जिनमें मुख्य ये है -
- पॉवर टिलर (Power Tiller): छोटे खेतों और बागवानी के लिए बहुत उपयोगी।
- रोटावेटर (Rotavator): मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए।
- कल्टीवेटर (Cultivator): गहरी जुताई के लिए।
- लेजर लैन्ड लेवलर (Laser Land Leveller): खेत को पूरी तरह समतल करने के लिए क्योंकि इससे पानी की बचत होती है और पूरा पानी फैलता है।
2. बुआई और रोपण के लिए (Sowing & Planting):
- सीड ड्रिल (Seed Drill): बीज और खाद को सही गहराई पर बोने के लिए।
- हैप्पी सीडर (Happy Seeder): पराली जलाए बिना गेहूं की बुआई के लिए।
- नयूमैटिक प्लांटर (Pneumatic Planter): मक्का या दालों जैसे बड़े बीजों कि सटीक बुआई के लिए।
- धान रोपाई मशीन (Rice Transplanter): चावल यानि धान के पौधों को लगाने के लिए।
3. पौधों की सुरक्षा के लिए (Plant Protection):
- पॉवर स्प्रेयर (Power Sprayer): कीटनाशकों के छिड़काव के लिए चालित पम्प।
- ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर (Tractor Mounted Sprayer): बड़े खेतों में तेजी से छिड़काव के लिए।
- कृषि ड्रोन (Agriculture Drone): अब SMAM के तहत ड्रोन पर भी विशेष सब्सिडी दी जा रही है।
4. कटाई और मढ़ाई के लिए (Harvesting & Threshing):
- कम्बाइन हार्वेस्टर (Combine Harvester): गेहूं और धान की कटाई मड़ाई एक साथ करने के लिए।
- मल्टी क्रॉप थ्रेसर (Multi Crop Thresher): विभिन्न फसलों के दानें निकालने के लिए।
- रीपर (Reaper): फसल को जमीन की सतह से काटने के लिए।
- ब्रश कटर (Brush Cutter): खर पतवार हटानें और छोटे फसलों को काटने के लिए।
5. अवशेष प्रबंधन (Crop Residue management):
- स्ट्रा बेलर (Straw Baler): पराली की गांठे बनाने के लिए।
- मल्चर (Mulcher): फसलों के अवशेष को खेत में ही बारीक काटकर मिलाने के लिए।
मशीनों के चयन में ध्यान देने वाली बात ये है की इसमें राज्यवार अंतर होता है जैसे कुछ राज्यों में किसी विशेष मशीनों पर अधिक ध्यान और सब्सिडी मिलता है। साथ ही आप मान्यता प्राप्त डीलर से मशीनों को खरीदें तभी सब्सिडी का लाभ मिल पाएगा।
साथ ही यह भी ध्यान रखे की खरीदी जाने वाली मशीनों का सरकारी संस्थानों से टेस्टिंग रिपोर्ट मिली होनी चाहिए,ये अनिवार्य है।
💰 SMAM योजना में सब्सिडी कितनी मिलती है?
SMAM योजना के तहत सरकार किसानों को मशीनरी खरीदनें पर भारी मात्रा में सब्सिडी प्रदान करती है -
- सामान्य श्रेणी: सामान्य श्रेणी में मशीन के लागत का-40-50% तक सब्सिडी मिलता है।
- विशेष श्रेणी: इसमें महिला,SC,ST और छोटे किसान शामिल है। इसमें 50% से लेकर कुछ मामलों में 80% तक सब्सिडी मिलती है।
- CHCs समूह: यदि कोई समूह या किसान "कस्टमर हायरिंग सेंटर" खोलता है,तो उसे प्रोजेक्ट लागत पर 80% तक सब्सिडी मिलता है।
👩🌾 SMAM योजना में कौन आवेदन कर सकता है?
SMAM योजना का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों को खेती को आधुनिक बनाने के लिए दिया जाता है। इसमें निम्न लोग और वर्ग शामिल है -
- छोटे और सीमांत किसान: जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है।
- महिला किसान: खेतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उनको अधिक सब्सिडी प्रदान की जाती है।
- एससी/एसटी वर्ग के किसान: अनुसूचित जाती और जनजाति वर्ग के किसानों को भी ज्यादा सब्सिडी प्रदान किया जाता है।
- स्वयं सहायता समूह (GHGs): गांवों में सक्रिय महिलाओं या पुरुषों के समूह को।
- FPOs (किसान उत्पादक संगठन): किसानों का ऐसा समूह जो सोसाइटी या कंपनी के रूप में पंजीकृत हो।
- सरकारी समितियां: ग्रामीण स्तर पर कार्य करने वाली सहकारी समितियां।
- ग्रामीण उद्यमी CHC: ऐसे ग्रामीण जो खेती नहीं करते लेकिन ग्रामीण स्तर पर CHC खोलकर किसानों को मशीन किराए पर देना चाहते है।
- पंचायते: विशेष स्थिति में पंचायतों को भी सब्सिडी मिलती है।
- बटाईदार किसान: जिनके पास खुद जमीन नहीं है लेकिन वैध लीज या समझौता है वे किसान भी SMAM योजना के तहत सब्सिडी अप्लाई कर सकते है।
आवेदन के लिए अनिवार्य शर्तें (Mandatory Criteria):
- नागरिकता:भारत का नागरिक होना चाहिए।
- पहली बार लाभ: उसी मशीन के लिए किसी अन्य सरकारी योजना से सब्सिडी न ली हुई हो।
- बैंक खाता: आधार से लिंक सक्रिय बैंक खाता होना अनिवार्य है।
📋 जरूरी दस्तावेज
व्यक्तिगत पहचान के लिए -
- आधार कार्ड: यह अनिवार्य है।
- पहचान पत्र: आधार के अतिरिक्त एक अन्य कोई भी विकल्प के रूप में।
- पासपोर्ट साइज फोटो: रंगीन फोटो आवेदन पत्र पर चिपकाने के लिए।
भूमि संबंधी दस्तावेज में -
- खतौनी या जमीन की नकल: इसमें जमीन का रकबा और मालिक का नाम स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।
- कब्जा प्रमाण पत्र: यह भी मांगा जा सकता है की आप वर्तमान में उस भूमि पर खेती कर रहे है।
बैंक विवरण में -
- बैंक पासबुक: जिसमें अकाउंट नंबर के साथ IFSC कोड हो।
- कैंसिल चेक: कभी कभी किसी राज्य में कैंसिल चेक भी मांगा जाता है।
विशेष श्रेणी प्रमाण पत्र में -
- जाती प्रमाण पत्र: एससी और एसटी वर्ग के लिए जाती प्रमाण पत्र अनिवार्य है।
- महिला किसान: आधार के साथ उनके नाम पर जमीन या सहभागी जमीन होनी चाहिए।
अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज में -
- मोबाईल नंबर: जो मोबाइल आधार से लिंक होगा उसी पर OTP आएगा।
- मशीन का कोटेशन: आप जहां से मशीन को खरीदना चाहते है वहां से मशीन की कीमत का आधिकारिक बिल।
📝 SMAM योजना में आवेदन कैसे करें?
SMAM योजना का आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार घर बैठे या अपने नजदीकी 'जन सेवा केंद्र' (CSC) से जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते है। आपके लिए नीचे स्टेप-बाइ-स्टेप प्रक्रिया दी गई है -
स्टेप 1.:
सबसे पहले आप आधिकारिक पोर्टल भारत सरकार के 'प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण'(DBT) पोर्टल पर जाए -
- वेबसाइट है -
agrimachinery.nic.in ।
स्टेप 2.:
वेबसाइट पर जाने के बाद आप पंजीकरण शुरू करें -
- होमपेज पर Registration के विकल्प पर जाए।
- वहां से Farmer (किसान) के विकल्प को चुने।
स्टेप 3.:
आधार और मोबाईल नंबर का सत्यापन करे।
- आधार नंबर डालें।
- इसके बाद आधार लिंक मोबाईल पर OTP जाएगा, इसे भरकर सबमिट कर दे।
स्टेप 4.:
अब पूरा आवेदन फार्म भरे -
- व्यक्तीगत विवरण - नाम,लिंग,जाती,श्रेणी आदि भरे।
- जमीन का विवरण - राज्य,जिला,ब्लॉक, गॉव और जमीन का क्षेत्रफल भरे।
- बैंक का विवरण -बैंक का नाम,खाता संख्या और IFSC कोड को ध्यान से भरे।
स्टेप 5.:
दस्तावेज अपलोड करे -
- आधार।
- बैंक पासबुक।
- खतौनी।
- जाती का प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)।
स्टेप 6.:
अब मशीन का चयन करे -
- मशीनों की सूची मे से जिस मशीन को खरीदना चाहते है उसे चुने।
स्टेप 7.:
आवेदन सबमिट करे -
- सभी जानकारी जांचने के बाद 'Submit' बटन पर क्लिक कर सबमिट कर दे। आपको एक 'Application Reference Number' मिलेगी। इसे आप संभाल कर रख ले,ताकि भविष्य में आवेदन का स्टेटस चेक कर सके।
आवेदन के बाद क्या होता है ?
- सत्यापन: आपके आवेदन को जिला कृषि अधिकारियों द्वारा सत्यापन किया जाएगा।
- अनुमोदन: सत्यापन के बाद विभाग की ओर से एक अनुमोदन पत्र जारी किया जाएगा।
- खरीद: अनुमोदन पत्र या परमिट लेकर आप सरकार द्वारा पंजीकृत डीलर से मशीन को खरीद कर उसका पक्का बिल लेना होगा। (ये खरीददारी अनुमोदन के 21 दिनों के भीतर हो जानी चाहिए)
- भौतिक सत्यापन: माशी खरीदने के बाद विभाग द्वारा उसका भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
- सब्सिडी भुगतान: सब कुछ सही पाए जाने के बाद आपका सब्सिडी अमाउन्ट आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
नोट:- 1. आप समय समय पर आधिकारिक पोर्टल पर जांच करते रहे। कोई भी अपडेट जानकारी वहां से आपको मिल सकती है।
नोट:- 2. अलग अलग राज्यों के अपने अलग अलग विशिष्ट पोर्टल भी हो सकते है। इसलिए अपने राज्य की कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर चेक कर ले यदि ये मेन पोर्टल काम न करे तो।
नोट:- 3. कई बार यह योजना "पहले आओ पहले पाओ" के आधार पर होती है। इसलिए सबसे पहले पोर्टल पर जाकर तुरंत अप्लाई कर दे।
⭐ SMAM योजना के फायदे
SMAM योजना का सबसे बाद फायदा यह है की ये खेती को पारंपरिक और थका देने वाले तरीकों से निकालकर "स्मार्ट और आधुनिक खेती" की ओर ले जाती है।
1. खेती की लागत में कमी आती है:
- मजदूरी पर निर्भरता समाप्त हो जाती है और मजदूरों की कमी का झंझट नहीं रहता है।
- संसाधनों की बर्बादी रुक जाती है और उसका अधिक से अधिक उपयोग भी हो पाता है।
2. पैदावार और मुनाफा में वृद्धि:
- समय पर खेती संभव हो पाती है जिससे पैदावार अधिक और गुणवता वाली होती है।
- कटाई के दौरान होने वाली अनाज की क्षति बहुत कम हो जाती है जिससे किसानों को मुनाफा होता है।
3. छोटे किसानों को आर्थिक सहारा:
- इसमें 50% से 80% तक की सब्सिडी मिलने से छोटे किसानों को बहुत अधिक आर्थिक सपोर्ट मिल जाता है।
- CHC की सुविधा मिलने से जो किसान मशीन नहीं खरीद सकते उन्हे कम भाड़ा पर मशीन मिल जाती है।
4. महिला और वंचित वर्ग का शशक्तिकरण:
- महिलाओं को सब्सिडी की दर ज्यादा मिलती है जिससे उन्हे शशक्तिकरण होता है।
- SC और ST वर्ग के लोगो को भी सब्सिडी मिलने से आधुनिक तकनीक से जुडने का मौका मिलता है।
5. पर्यावरण और मृदा संरक्षण:
- कई मशीनें मिट्टी में नमी और पोषक तत्वों को बनाए रखने में मदद करती है।
- सिंचाई के कई मशीनों से जैसे स्प्रिंकलर और ड्रिप से पानी की बचत होती है
- हैप्पी सीडर जैसी मशीनों से बिना पराली को जलाए खेत में बुआई की जा सकती है इससे वायु प्रदूषण में राहत मिलती है।
हां इसका सही लाभ केवल कागजों में नहीं होनी चाहिए बल्कि धरातल पर भी नजर आनी चाहिए। और ऐसा हो भी रहा है। लेकिन फिर भी बहुत से राज्यों या क्षेत्रों में बिचौलिए पूरी तरह से किसानों को लाभ प्रदान करने में रुकावटें पैदा करते है। फिर भी एक जागरूक किसान के लिए ये योजना बहुत ही लाभदायक है।
निष्कर्ष (Conclusion)
सच में कहा जाए तो SMAM योजना खेती को एक मेहनत वाले काम से निकाल कर एक व्यवसाय बना दिया है। इसके नतीजे दूरदर्शी है जो नजर भी आने लगे है और कृषि मशीनरी का पहुंच अब छोटे और सीमांत किसानों से लेकर देश के सभी क्षेत्रों में फैल गया है।
यदि आप भी अपनी खेती को आधुनिक बनाना चाहते है तो आज ही इस योजना के लिए आवेदन कर डाले।
या आपने कभी SMAMयोजना के तहत किसी कृषि मशीन पर सब्सिडी ली है तो आप कमेन्ट में जरूर बताए ताकि किसान भाईयों का हौसला बढ़े और वो भी इसके लिए अप्लाइ करे ?
कृषि हेल्पलाइन नंबर: अधिक जानकारी के लिए किसान भाई भारत सरकार के "किसान कॉल सेंटर नंबर" 1800-180-1551 पर भी संपर्क कर सकते है।
FAQ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1:क्या SMAM योजना के तहत ट्रैक्टर पर भी सब्सिडी मिलता है? ▼
उत्तर: हां! इस योजना के तहत ट्रैक्टर पर भी सब्सिडी प्रदान की जाती है। सब्सिडी की राशि ट्रैक्टर की HP श्रेणी और किसान की श्रेणी जैसे महिला SC ST आदि के आधार पर 40% से 50% तक होती है।
प्रश्न 2: एक किसान कितनी मशीनों पर सब्सिडी ले सकता है? ▼
उत्तर: एक किसान आमतौर पर एक वर्ष में एक ही बड़ी मशीन पर सब्सिडी ले सकता है। हालांकि अलग अलग राज्यों में कुछ सुविधा भी दी गई है की कुछ अंतराल के बाद या कोई विशेष मशीनों पर सब्सिडी दुबारा भी एक वर्ष के भीतर ले सकते है।
प्रश्न 3: क्या सब्सिडी मशीन खरीदनें से पहले मिलती है या बाद में? ▼
उत्तर: सब्सिडी हमेशा मशीन खरीदनें और उसका भौतिक सत्यापन होने के बाद ही मिलता है। लेकी उससे पहले उसका सब्सिडी का अनुमोदन मिल जाता है और किसान पहले पूरा पैसा देकर मशीन खरीद लेता है फिर बाद में सब्सिडी उसके आकॉउन्ट में आ जाती है।
प्रश्न 4: आवेदन करने के कितने दिनों बाद सब्सिडी मिल जाती है? ▼
उत्तर:आवेदन स्वीकृत होने और मशीन का बिल् जमा करने के बाद आमतौर पर 40-60 दिनों के भीतर सब्सिडी की राशि खाते में आ जाती है।
प्रश्न 5: क्या किराये के जमीन पर खेती करने वाले किसान भी सब्सिडी का आवेदन कर सकते है? ▼
उत्तर: हां! यदि उनके पास वैध लीज अग्रीमेंट है,और संबंधित राज्य के कृषि पोर्टल पर पंजीकृत है,तो आवेदन कर सकते है।
प्रश्न 6: क्या पुरानी मशीन खरीदनें पर भी सब्सिडी मिलती है? ▼
उत्तर: नहीं! SMAM योजना केवल नई और सरकार द्वारा प्रमाणित मशीनों की खरीद पर ही सब्सिडी प्रदान करती है।
प्रश्न 7: SMAM योजना कब शुरू हुई? ▼
उत्तर: यह योजना 2014-15 में शुरू हाई थी।
प्रश्न 8: अधिक जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर नंबर क्या है? ▼
उत्तर: भारत सरकार का 'किसान कॉल सेंटर नंबर' है-(1800-180-1551)इस नंबर पर किसान भाई संपर्क कर सकते है।
प्रश्न 9:ऑनलाइन आवेदन करने के लिए वेबसाइट क्या है?
उत्तर: इसके लिए भारत सरकार के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण पोर्टल का वेबसाइट -https://agrimachinery.nic.in/ है जिसपर ऑनलाइन आवेदन कर सकते है। यदि इसपर न हो तो अपने राज्य के कृषि विभाग की वेबसाइट पर चेक कर सकते है।
