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| खेलों मे भारतीय महिलाओ को प्रतिबिंबित |
प्रस्तावना
भारत के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आज खेल जगत मे नई पहचान बना रही है। पहले जहां भारत का खेल शहरी अकादमियों और महानगरीय स्टेडियमों तक सीमित थी वर्तमान मे यह गावों के खेल मैदानों,जनजातीय क्षेत्रों,कृषक समुदायों और छोटे कस्बों के प्रशिक्षण केंद्रों मे आकार ले रही है। और इसका अगुआई गांव की बेटियां कर रही है साथ ही वो राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर खेलों मे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही है।
भारत मे ग्रामीण महिला खिलाड़ियों के इस सशक्तिकरण मे तेजी से बढ़ते ग्रामीण खेल पारिस्थितिकी तंत्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जैसे -
- खेलों इंडिया केंद्र: वर्तमान मे ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी भारत मे करीब 1000 से अधिक "खेलों इंडिया केंद्र" कार्यरत है।ये केंद्र कोचिंग,उपकरण,पोषण सहायता और प्रतिस्पर्धा को अपने हब मे विकसित कर रहा है।
- तीन गुना भागीदारी: वर्ष 2017 के बाद से संगठित खेलों मे महिलाओ की भागीदारी तीन गुना से अधिक बढ़ चुकी है।
- Asmita लीग मे भागीदारी: अक्चीविंग स्पोर्ट्स माइलस्टोन बाय इंस्पायरिंग वुमन थ्रू एक्शन (Asmita)2024-25 के दौरान ही लीग खेलों मे 53,000 से अधिक महिला खिलाड़ियों ने भाग लिया।
इन खेल पारिस्थितिकी तंत्र के पहलों ने ग्रामीण भारत जो पहले खेल को पढ़ाई से भटकाने का माध्यम समझते थे उनके सोच को भी परिवर्तित कर दिया है। अब वे ग्रामीण भारत के लोग खेलों को शिक्षा,रोजगार,पहचान और सशक्तिकरण का माध्यम मानने लगे है।
प्रेरक ग्रामीण महिला खिलाड़ी
कुछ ऐसी ग्रामीण महिला खिलाड़ी है जो इन ग्रामीण खेल पारिस्थितिकी को और भी प्रेरणा प्रदान कर रही है। जिनसे प्रेरित होकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं बढ़ चढ़ कर खेलों मे भाग ले रही है -
- एमसी मैरी कॉम: मणिपुर के कंगाथेई गांव के गरीब परिवार से आनेवाली मैरी कॉम ने लंदन ओलंपिक 2012 मे कांस्य पदक जीता और आगे चलकर और भी कई अंतर्राष्ट्रीय खेल मेडल जीत कर प्रेरणा के स्रोत के रूप मे उभरी है।
- प्रीतम सिवाच: गुरुग्राम के पास झरना गांव से आने वाली प्रीतम सिवाच ने 2002 के मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों मे हॉकी मे भारत की स्वर्ण पदक जीत मे यहां भूमिका निभाई थी। सन्यास के बाद इन्होंने पानीपत मे प्रीतम सिवाच हॉकी अकादमी की स्थापना की है।
- मनु भाकर:हरियाणा के झझर जिले मे गोरिया गांव की मनु भाकर ने 'पेरिस ओलंपिक 2024' मे इतिहास रचते हुए 10 मीटर एयर पिस्टल(व्यक्तिगत और मिश्रित टीम) स्पर्धाओं मे दो कांस्य पदक जीती।
- अरुणिमा सिन्हा: उत्तर प्रदेश के छोटे कस्बे अंबेडकर नगर की रहने वाली 22 साल की उम्र मे 2011 मे ट्रेन से लखनऊ से दिल्ली जय रही अरुणिमा को बदमाशों ने उन्हे ट्रेन से बाहर फेक दिया। इसमें उनका बाया पैर शरीर से अलग हो गया।फिर भी मजबूत इरादों के साथ वर्ष 2013 मे एक पैर जो प्रोथेस्टिक और दूसरे पैर मे रॉड लगा हुआ था उसी के सहारे एवरेस्ट फतह को निकल पड़ी। प्रोथेस्टिक पैर रास्ते मे ही निकल गए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और एवरेस्ट की चोटी पर फतह करने का रिकार्ड बना डाला।
- दीप्ति जीवनजी: तेलंगाना के वारंगल जिले के कल्लेड़ा गांव मे सूर्य ग्रहण के दिन जन्मी दीप्ति जीवनजी जिनको जन्म के कुछ ही समय बाद बौद्धिक विकलांग घोषित कर दिया गया। ऐसी परिस्थितियों मे एक मजदूर की बेटी ने पैरा-एथलीट मे कदम रखा और उन्होंने "ऑल इंडिया इन्टर यूनिवर्सिटी चैम्पियनशिप" मे दो बार गोल्ड मेडल जीता। आगे उन्होंने 2022 मे जापान मे आयोजित "पैरा एशिया गेम" मे एक गोल्ड मेडल भारत के नाम कर दिया। बीते वर्ष उन्हे "अर्जुन अवॉर्ड" से सम्मानित किया गया।
- अवनी लेखरा: अवनी लेखरा गांव से तो नहीं बल्कि जयपुर की रहने वाली है। बचपन मे डांस का शौक था और एक डांस कार्यक्रम मे जाते समय दुर्घटना मे इसके दोनों पैर बेकार हो गए और ये व्हीलचेयर पर आ गई। लेकिन इन्होंने हौसला नहीं खोया और इसी व्हीलचेयर से निशाना साधते हुए शूटिंग मे 2020 के "टोकियो पैरालम्पिक खेल" मे दो पदक जिनमे एक स्वर्ण पदक और एक कांस्य पदक जीत कर भारत का नाम रौशन किया। इन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।
- शीतल देवी: जम्मू कश्मीर के किस्तवाड़ जिले से आने वाली शीतल देवी जो बिना बाहों के जन्मी है तीरंदाजी मे कठिन मेहनत किया जिससे उनको "ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट" ने 15 वर्ष की उम्र मे समर्थन देना शुरू कर दिया था। उन्होंने चेक गणराज्य मे आयोजित 'पैरा आर्चरी यूरोपिय कप' मे अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता मे ही कॉम्पाउंड ओपन व्यक्तिगत मे रजत पदक,मिक्स टीम मे स्वर्ण पदक,और महिला युगल मे कांस्य पदक जीता।
- दीप ग्रेस एक्का: ये ओडिसा के सुंदरगढ़ जिले के जनजातीय गांव लूलकिधी की रहने वाली है। इन्होंने मिट्टी के मैदानों पर नंगे पाँव खेलना शुरू किया और अब भारत के सबसे सम्मानित हॉकी डिफ़ेंडरो मे से एक स्थान प्राप्त करके 'अर्जुन पुरस्कार' प्राप्त किया।
- महिमा चौधरी: उत्तर प्रदेश के कलसी गांव मे जन्मी महिमा ने सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को पर करते हुए हॉकी मे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और भारत को एशिया कप मे सफलता दिलाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- वैष्णवी फाल्के: सातारा महाराष्ट्र के इस कृषक पुत्री ने सरकारी खेल अकादमी के माध्यम से राष्ट्रीय हॉकी टीम मे स्थान पाया।
- मीराबाई चानु: मणिपुर के नोंगपोंग कचिंग की मीराबाई चानु ने भारोत्तोलन मे भारत का पहला टोक्यो ओलंपिक पदक जीतकर पूरे क्षेत्र को खेल शक्ति अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इन महिला खिलाड़ियों के प्रेरणा का प्रभाव इतना बढ़ गया है की आए दिन सुनने मे आता है की अमुक ग्रामीण महिला खिलाड़ी ने अमुक पदक जीत लिया।
खेलों इंडिया (Khelo India) ने मजबूत आधार बनाया
खेलों इंडिया को भारत सरकार के द्वारा एक प्रमुख खेल विकास कार्यक्रम के तौर पर 2017-18 मे शुरू किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य खेल संस्कृति को पुनः जगाकर भारत को खेलों मे महाशक्ति के स्थान पर पहुंचाया जाए -
- आधारशिला: युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा 2017-18 मे शुरू किया गया जो गांव स्तर से सशक्त खेल पारिस्थितिकी का निर्माण जिनमे ग्रामीण भागीदारी का विस्तार,प्रारम्भिक प्रतिभा पहचान और उनके सहयोग पर बल दिया गया।
- प्रतिभा पहचान: स्कूल और समुदाय स्तर पर टैलेंट कमिटी के माध्यम से दूर दराज क्षेत्रों से भी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान की जाती है। फिर उनको चयन करके प्रशिक्षण,प्रतियोगिता और सतत निगरानी के माध्यम से उनका विकास किया जाता है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट: खेलों इंडिया देश भर के जिलों मे खेल सुविधाओ के निर्माण और उसके उन्नयन को समर्थन प्रदान करता है। इसके माध्यम से सैकड़ों खेलों इंडिया सेंटर को स्थापित किया जा रहा है।
- कोचिंग डेवलपमेंट: इसमें कम्युनिटी कोचिंग प्रोग्राम,पूर्व खिलाड़ियों से प्रशिक्षित कोच का चयन करके खिलाड़ियों को जमीनी स्तर पर नियमित मार्गदर्शन किया जाता है। चिन्हित खिलाड़ियों को वार्षिक छात्रवृति भी प्रदान किया जाता है। जिससे वे जीविका की चिन्ता के बजाय प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर सके।
- ग्रामीण महिलाओ पर फोकस: खेलों इंडिया दूर दराज की कमजोर आर्थिक पृष्टभूमि से आने वाली प्रतिभा महिला खिलाड़ियों के पहचान और उनके विकास पर ज्यादा फोकस कर रहा है।
इस प्रकार से खेलों इंडिया कार्यक्रम के पहुँच ने ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान मे देश के 750 जिलों मे 1000 से अधिक खेलों इंडिया केंद्र कार्यरत है। खेलों इंडिया कर्यक्रम के अंतर्गत "खेलों इंडिया राज्य उत्कृष्ठता केंद्र" खिलाड़ियों को अगले स्तर पर विकास करता है।
खेलों इंडिया कार्यक्रम इस प्रकार से "विकसित भारत 2047" के लक्ष्यों को प्राप्त करने मे सहायक बनते हुए भारत को विश्व के अग्रणी खेल राष्ट्रों मे स्थापित करने के संकल्प को मजबूती प्रदान करता है।
ASMITA:ग्रामीण महिलाओ का खेल मंच
अस्मिता(ASMITA)लीग को विशेषकर से ग्रामीण,जनजातीय और आर्थिक रूप से वंचित महिला खिलाड़ियों के चयन और विकास के रूप मे डिजाईन किया गया है -
- इसमे 27 खेल शामिल: अस्मिता लीग 27 खेल विधाओ मे आयोजित की जाती है। जिनमे एथलेटिक्स,कुस्ती,कबड्डी,भारोत्तोलन,तीरंदाजी,मुक्केबाजी,फुटबाल और जूड़ो प्रमुख है।
- महत्वपूर्ण महिला भागीदारी: वर्ष 2024-25 के दौरान 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों मे 550 से अधिक लीगो मे 53.000 से अधिक महिला एथलिक्ट ने भर लिया और भारत की सबसे बड़ी "केवल महिला खेल लीग" बन गई।
- सामाजिक विकास: अस्मिता केवल खालों मे ही नहीं बल्कि ये सामाजिक सोच विकास(Social Empowerment) को एक नया आकार भी प्रदान कर रहा है।इससे शारीरिक,आर्थिक और सामाजिक वंचित ग्रामीण भारत की बेटियों के प्रति लोगों मे सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ने लगी है।
KIRTI:करती है प्रारम्भिक पहचान
इसे मार्च 2024 मे Khelo India Rising Talent Identification -KIRTI के नाम से आरंभ किया गया।यह भी खेलों इंडिया कार्यक्रम का ही एक हिस्सा है। इसका उदेश्य 9 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों मे और विशेष रूप से जो ग्रामीण,जनजातीय और और दूर दराज क्षेत्रों के खेल प्रतिभाओ की पहचान करना -
- पहला चरण: इसके पहले चरण मे 3.6 लाख से अधिक पंजीकरण किए गए। साथ ही 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों मे 51,000 खिलाड़ियों को आँकलित किया गया। इसमे खेल के 11 विधाओ को शामिल किया गया।
- जिला स्तर मूल्यांकन: इसमे जिला स्तर मूल्यांकन किया जाता है ताकि जमीनी स्तर की प्रतिभा को खोजा जा सके।
इन दोनों Asmita और Kirti कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण भारत के कई क्षेत्र अब राष्ट्रीय महत्व के विशिष्ट क्षेत्रों के रूप मे उभरे है जिनमे -
- महाराष्ट्र के सातारा और कोल्हापूर भारतीय एथलेटिक्स विशेष रूप से माध्यम और लंबी दूरी की दौड़ के प्रमुख केंद्र माने जाते है।
- ओडिसा का सुंदरगढ़ जिला भारत की हॉकी नर्सरी के रूप मे पहचान बनाया है जहा से कई अंतर्राष्ट्रीय महिला हॉकी खिलाड़ी निकली है।
- हरियाणा का रोहतक-सोनीपत-हिसार क्षेत्र कुस्ती और मुक्केबाजी के लिए पहचान बना चुका है और लगातार ओलंपिक और विश्व स्तर के खिलाड़ी देश को दे रहा है।
- मणिपुर और मिजोरम के क्षेत्र मिलकर महिला खेलों मे भारत के लिए सबसे उर्वर भूमि बन गया है।यहाँ से भरोत्तोलन,मुक्केबाजी और फुटबाल मे अनेक चैम्पियन उभरे है।
भारत खेलों नीति 2025:एक सामाजिक आंदोलन
भारत खेलों नीति 2025 एक खेल विकास के केंद्र मे एक सामाजिक समावेशन और व्यापक भागीदारी को बढ़ावा दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली बालिकाओ और महिलाओ को प्राथमिक समूह मे स्थान दिया जा रहा है।
केवल पदक ही नहीं बल्कि खेल सुविधाये,छत्रवृतिया और हॉस्टल लड़कियों को स्कूलों मे लंबे समय तक रहने मे मदद कर रही है। सरकारी रोजगार,प्रयोजन और पुरस्कार के माध्यम से वित्तीय और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है।
साथ ही ये खेलने वाली महिलाये स्वयं सहायकता समूहों मे नेता,और आदर्श व्यक्ति के रूप मे उभर रही है। और खेल उपलब्धियों के माध्यम से पूरे गाँव को मान्यता और गौरव प्राप्त हो रहा है।
निष्कर्ष:
अब ग्रामीण भारत की बेटियाँ खेलों मे अपवाद के रूप मे शामिल होनेवाली नहीं रह गई है बल्कि ये भारतीय खेलों की रीढ़ बनती जा रही है। इनको सरकारी कर्यक्रमों यथा खेलों इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत अस्मिता और कीर्ति कर्यक्रम ने आगे बढ़ाने मे सार्थक भूमिका का निर्वहन और सहयोग प्रदान कर रहा है।
इसीलिए अब भारत की बेटियाँ महिला सशक्तिकरण(Women Empowerment) के रूप मे "गाँव की मिट्टी से लेकर ओलंपिक स्टेडियम तक" अंतर्राष्ट्रीय खेलों मे केवल पदक ही नहीं जीत रही है बल्कि समाज को एक नया आकार भी दे रही है।
सरकार के साथ साथ हम जैसे जागरूक नागरिक की भी ये जिम्मेवारी बनती है की हम भी अपने स्तर पर महिला खिलाड़ियों के उपलब्धियों पर गर्व करे और उनका समर्थन करे। यदि आपको भी कही ऐसी प्रतिभा मिले तो उन्हे आगे लाने और इन मंचों तक पहुचाने मे सहयोग करे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
प्रश्न 1. ग्रामीण भारतीय महिलाओ का खेलों मे भाग लेने का प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर: खेलों मे महिलाओ की भागीदारी का मुख्य कारण शिक्षा का प्रसार,बेहतर जागरूकता,सरकारी प्रोत्साहन जैसे खेलों इंडिया कार्यक्रम और आत्म निर्भर बनने की इक्छा है।
प्रश्न 2. ग्रामीण भारत मे महिलाओ को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
उत्तर: उन्हे बुनियादी ढांचे की कमी,पारंपरिक सामाजिक रूढ़ियाँ,परिवहन की समस्या,संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
प्रश्न 3. सरकार ग्रामीण महिला खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रही है?
उत्तर: सरकार खेलों इंडिया, फिट इंडिया,अस्मिता लीग जैसे योजनाओ के माध्यम से प्रशिक्षण,छात्रवृति और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
प्रश्न 4. खेलों इंडिया योजना ने ग्रामीण महिला एथलीटों को कैसे मदद की है?
उत्तर: खेलों इंडिया ने गाँव कस्बों मे खेल प्रतिभाओ की पहचान की है। उन्हे छात्रवृति प्रदान की है और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता मे स्थान प्रदान किया है। जिससे खिलाड़ियों को निखरने के मौका मिल है।
प्रश्न 5. क्या ग्रामीण महिला खिलाड़ियों को परिवार का समर्थन मिलता है?
उत्तर: हाँ जागरूकता बढ़ने के साथ अब माता-पिता लड़कियों को रोजगार और उनके प्रतिभा के लिए समर्थन प्रदान करने लगे है।
प्रश्न 6. ग्रामीण इलाकों मे खेल सुविधाओ की कमी से निपटने के लिए क्या किया जा रहा है?
उत्तर: गावों मे छोटे खेल केंद्र,सामुदायिक खेल मैदान,और जिला स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किये जा रहे है ताकि खिलाड़ियों को हमेशा शहर न जाना पड़े।
प्रश्न 8. अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाने वाली मुख्य ग्रामीण महिला खिलाड़ी कौन कौन सी है?
उत्तर: मीराबाई चानु(भरोत्तोलन),मैरिकॉम (मुक्केबाजी),लवलिना बोरोगेहन(मुक्केबाजी),हिमा दास(दौड़),गीता फोगट (कुश्ती) इसके अलावा बहुत सारे नाम है जो आए दिन देखने को मिलते है।
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