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| भारत में क्विक कॉमर्स तेजी से उभर रही है |
प्रस्तावना
भारत मे Quick Commerce का तेजी से विकास हो रहा है।देश के खुदरा बाजार मे 'क़्विक कामर्स" के उद्भव और इस नई अवधारणा ने देश मे चर्चा का विषय बन गई है। सच मे कहा जाय तो भारत मे डिजिटल क्रांति ने उपभोक्ता व्यवहार को पूरी तरह से बदल दिया है। पहले लोग जहां साप्ताहिक खरीददारी के लिए किराना बाजार जाते थे वही अब 10-20 मिनट मे घर तक डेलीवेरी हो जाती है।
आमतौर पर 'ई कॉमर्स' और 'क़्विक कामर्स' एक जैसे ही लगते है। लेकिन दोनों मे मूलभूत अंतर है।क़्विक कामर्स ई कामर्स का ही उन्नत रूप है जिसमे उपभोक्ता को अत्यंत तेज आवश्यक वस्तुए उपलब्ध कराई जाती है-
- ई कामर्स कंपनियां भंडारण के लिए औद्यौगीक क्षेत्रों मे स्थित बड़े बड़े गोदामों का उपयोग करती है वही क़्विक कामर्स कंपनियां भंडारण के लिए आवासीय क्षेत्रों मे छोटे छोटे गोदामों का उपयोग करती है।
- दूसरा ई कामर्स कंपनियां डेलीवेरी के लिए 3-4 दिनों का समय लेती है जबकि क़्विक कामर्स कंपनियां 10-30 मिनट के भीतर डेलीवेरी कर देती है।
मार्केटिंग की यह नई प्रणाली उपभोक्ताओ के लिए उच्च स्तर की सुविधा और गति प्रदान करती है। क़्विक कामर्स फार्मे छोटे गोदामों की एक सघन प्रणाली संचालित करते है जिन्हे 'डार्क स्टोर'(सूक्ष्म पूर्ति केंद्र) कहा जाता है।
हालिया बाजार अध्ययन बताते है की लगभग 31 प्रतिशत भारतीय ग्राहक अब अपनी मुख्य किराने की जरूरतों के लिए क़्विक कामर्स पर भरोसा करते है जबकि 39 प्रतिशत लोग इसका उपयोग टॉप अप खरीददारी के लिए करते है। दूसरी ओर 42 प्रतिशत लोग 'रेडी टू इट भोजन' के लिए और 45 प्रतिशत ग्राहक चटपटे खाद्य पदार्थों के लिए क़्विक कामर्स का उपयोग करते है।
क़्विक कामर्स का बढ़ता बाजार -
भारत मे क़्विक कामर्स का उदय 2020 के बाद तेजी से शुरू हुई। खासकर लाकडाउन मे लोगों ने सोशल डिस्टेनसिंग के चलते अनलाइन खरीददारी को बढ़ावा देने लगे थे। इस क्षेत्र मे प्रमुख कंपनियां है -
विश्वसनीय बाजार अध्ययनों के अनुसार भारत के क़्विक कामर्स बाजार का 2025 मे भारतीय राजस्व मे योगदान लगभग 5.38 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुचने की उम्मीद है। साथ ही 2025-2029 तक की अवधि मे इसके 16.07 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का अनुमान है। और इस तरह से 2029 मे भारत के राजस्व मे इसकी भागीदारी 137.20 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुच जाएगी।
- भारत मे क़्विक कामर्स उपयोगकर्ताओ की संख्या 2030 तक लगभग 65 मिलियन पहुचने की उम्मीद है।
- इसका सकल व्यापारिक मूल्य जो वर्तमान मे 64,000 करोड़ रुपया है वर्ष 2028 तक तीन गुना बढ़कर 2,00,000 करोड़ रुपये तक पहुचने का अनुमान है।
- क़्विक कामर्स का परिचालन टियर 2 और टियर 3 शहरों मे फैल रहा है इसलिए gig वर्कर्स का मांग आसमान छूने की उम्मीद है।
- वर्ष 2024 मे gig वर्कर्स की मांग मे 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि वर्ष 2019 मे यह 15 प्रतिशत ही थी।
क़्विक कामर्स के विकास का प्रमुख कारण -
कोविड महामारी से शुरू हुई क़्विक कामर्स वर्तमान मे तेजी से विकास कर रही है और इसके विकास मे ये नियमित कारक प्रमुख योगदान दे रहे है -
- स्मार्टफोन की बढ़ती पहुच: भारत मे उचित मूल्य पर उपलब्ध स्मार्टफोन ने क़्विक कामर्स के विकास मे मुख्य भूमिका निभाई है। साथ ही 5G के आने से इसमे और वृद्धि की उम्मीद है।
- ओपन नेटवर्क डिजिटल कामर्स: सरकार ने 2021 मे ओएनडीसी को लांच किया था और इसका नेटवर्क वर्तमान मे प्रतिदिन लगभग 5,90,000 लेनदेन औसत रहता है।
- यूनिफ़ाईड पेमेंट इंटेरफेस: यूपीआई को 'नैशनल पेमेंट कॉर्पोरेसन द्वारा विकसित रियल टाइम भुगतान प्रणाली ने भी क़्विक कामर्स के विकास मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वार्षिक रूप से यूपीआई लेनदेन मे 39.2 प्रतिशत की वृद्धि और मूल्य मे 28 प्रतिशत की वृद्धि देखि गई है।
- विदेशी निवेश: सरकार द्वारा विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र मे 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की मंजूरी दी गई है। यह पहल भारतीय क़्विक कामर्स फार्मों की विकास मे सहायकता प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय रसद नीति: इसके चलते कनेक्टिविटी मे सुधार और रसद का आसानी से पहुच होने से क़्विक कामर्स को बढ़ावा मिल रहा है।
- नये श्रम कोड 2025: 21 नवंबर 2025 को लागू हुए नये श्रम कोड गिग वर्कर्स को प्रोत्साहित करने मे सफल रहा है। जिससे क़्विक कामर्स कंपनियों को आसानी से गिग वर्कर्स मिल जा रहे है।
- भारत का जेन जी: भारत के जेन जी और बढ़ता शहरीकरण साथ मे एआई और मशीन लर्निंग का विकास ने भी क़्विक कामर्स को बढ़ावा दिया है।
इन सभी कारकों के साथ ही सोशल नेटवर्किंग का बढ़ता प्रभाव और भागदौड़ की अर्थव्यवस्था जिसमे समय का अभाव रहता है के चलते भी क़्विक कामर्स ने विकास का रूप ले लिया है।
क़्विक कामर्स की प्रमुख चुनौतिया -
मजबूत विकास के बावजूद भारत मे क़्विक कामर्स कंपनियों को कई चुनौतियों और बाधाओ का सामना करना पड़ता है। इन्हे निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जय सकता है -
- तेजी से वितरण मे रुकावट का सामना: खासकर विकेंद्रीकृत पूर्ति सिस्टम के कारण परिचालन लागत नियमित रूप से बढ़ रही है। साथ ही खराब सड़क और यातायात की स्थिति एवं प्रतिकूल मौसम कुशल और त्वरित डेलीवेरी मे बाधा बनकर सामने आती रहती है।
- नियमों और विनियमों की चुनौतिया: उपभोक्ता अधिकारों,श्रम संघर्षों,यातायात नियमों,रसद प्रबंधन,और डिजिटल डेटा संरक्षण अधिनियमों आदि के कारण क़्विक कामर्स फार्मों को कई प्रकार के दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साथ ही कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व आदि के कानून भी चुनौती पैदा करती है जिन्हे इन क़्विक कामर्स के अनुकूल बनाने की जरूरत है।
- कार्यबल प्रबंधन जरूरी: चूंकि भारत की गिग इकॉनोमी 2025 के बाद एक बड़ी छलांग लगाने की ओर है। यह आंदोलन गिग श्रमिकों के प्रबंधन के संबंध मे कई समस्याए और चुनौतिया पैदा कर सकती है। गिग श्रमिकों के कल्याण की चुनौतिया सबसे महत्वपूर्ण है जिन पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है।
- आरोपों और आपतियों के संबंध मे: पिछले अक्टूबर 2824 में ही वितरको के निकाय "आल इण्डिया कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन(एआईसीपीडीएफ)द्वारा एक आरोप लगा की की क़्विक कामर्स कंपनियां भारी छूट और प्रतिस्पर्धी को समाप्त करने जैसा अनैतिक आचरण कर रही है। ऐसे ही कई अन्य आरोप अन्य संगठनों द्वारा इन क़्विक कामर्स कंपनियों पर लगाए गए। सरकार को सामंजस्यपूर्ण नियम बनाकर इसका समाधान करना चाहिए।
- कड़ी प्रतिस्पर्धा की चिंता: सभी क़्विक कामर्स कंपनियां अधिक से अधिक ग्राहकों को आकर्षित करने की दिशा मे प्रयास कर रही है। और इस प्रतिस्पर्धा मे इन कंपनियों के लाभ के लक्ष्य प्रभावित हो रहे है। जिसके चलते इस क्षेत्र मे काम करने निकली नई कंपनियों को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- ग्राहकों को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण: तेजी से बदलती ग्राहक रुचि और अन्य कंपनियों के शॉर्ट टर्म उत्साहन नीति ने इन कंपनियों को ग्राहकों को बनाए रखने मे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- पूंजी की कमी: पूंजी को जुटाने कोल्ड स्टोरेज मे लागत आदि के चलते इन कंपनियों को चलाए रखने मे मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
निष्कर्ष:-
भारत मे क़्विक कामर्स का विकास डिजिटल अर्थव्यवस्था की एक बड़ी उपलब्धि है। इसने उपभोक्ता अनुभव को बेहतर बनाया है और रोजगार के अवसर पैदा किए है। हालांकि लाभप्रदता,लॉजिसटिक लागत और छोटे व्यापारियों पर प्रभाव अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
यदि तकनीकी नवाचार और लागत प्रबंधन पर ध्यान दे तो क़्विक कामर्स भारत के खुदरा व्यापार क्षेत्र का अच्छा भविष्य बन सकता है। आपको क्या लगता है और इस बारे मे आपका क्या सुझाव हो सकता है आप अवश्य कॉमेंट मे बताए। जिससे नीति निर्माताओ के पास देश के आम नागरिकों के सुझाव और सोच पहुच सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
प्रश्न 1. भारत मे क्विक कामर्स क्या है?
उत्तर:क्विक कामर्स एक ऐसा रीटेल मॉडल है जो हाईपर लोकल वेयरहाउसिंग के माध्यम से 10-20 मिनट मे ग्राहकों को समान का डेलीवेरी करता है।
प्रश्न 2. भारतीय क्विक कामर्स की वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर: वित्त वर्ष 2025 मे भारत का क्विक कामर्स बाजार लगभग 25,300 करोड़ रुपये का हो चुका है जिसमे 49% वार्षिक वृद्धि दर है। अनुमान है की अगले 3 वर्षों मे या 6 गुना बढ़कर 1.50 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा।
प्रश्न 3. डार्क स्टोर मॉडल क्या है क्विक कामर्स मे?
उत्तर: डार्क स्टोर छोटे स्थानीय वेयर हाउस होते है जो केवल अनलाइन ऑर्डर की पैकिंग और डेलीवेरी के लिए प्रयोग किये जाते है।
प्रश्न 4. क्विक कामर्स का विस्तार अब किं क्षेत्रों मे हो रहा है?
उत्तर: मेट्रो शहरों के अलावा अब क्विक कामर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों मे तेजी से फैल रहा है।
प्रश्न 5. क्विक कामर्स के परिचालन की मुख्य चुनौतिया क्या है?
उत्तर: मुख्य चुनौतियों मे शहरों मे भीड़ भाड़ मे ट्रैफिक जाम मे समय पर डेलीवेरी करना,खराब सड़के,डार्क स्टोर मे प्रबंधन की रहती है।
प्रश्न 6. डेलीवेरी पार्टनर के लिए क्या चुनौतिया है?
उत्तर: कम समय मे डेलीवेरी की चुनौतियों के चलते दिलीवेरी पार्टनर रिस्क लेते है,ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन भी करते है और दुर्घटनाओ का शिकार भी हो जाते है।
प्रश्न 7. क्या इससे किराना दुकानों पर प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: क्विक कामर्स को लेकर स्थानीय और किराना दुकानदारों के संघ ने कई विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है की ये कंपनियां अनैतिक आचरण का इस्तेमाल कर रही है। सरकार सामंजस्य बनाने का प्रयास कर रही है।
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