नये दौर की ग्रीन फैशन और शशक्त होती खादी युवाओ मे भी लोकप्रिय
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| Khadi for Sustainable Growth and women empowerment in India |
ऐतिहासिक प्रमाण बताते है की मोहनजोदड़ों की प्राचीन
सभ्यता से लेकर मौर्यकल मे भी खादी का व्यापक प्रयोग होता था जिसको चाणक्य के अर्थशास्त्र मे भी स्थान दिया गया है। आधुनिक समय मे स्वतंत्रता आंदोलन मे गांधी जी द्वारा स्वदेशी आंदोलन के माध्यम से खादी को बढ़ावा मिला और चरखा चलना आत्मनिर्भर भारत का पहचान बन गया।
स्वतंत्र के बाद वर्ष 1957 मे "खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की स्थापना ने खादी को संस्थागत रूप दिया। लेकिन 1980 तक आते आते इसकी चमक फीकी पड़ने लगी। इस फीकी चमक और लोगों मे रुचि को जगाने के लिए "देविका भोजवानी" का 1989 मे खादी का उच्च फैशन शो और 1990 मे ऋतु कुमार का पहला खादी संग्रह ने लोगों मे कुछ जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया।
वही खादी वर्तमान समय मे मशहूर हस्तियों और जन प्रतिनिधियों से लेकर युवाओ मे डिजाईन और फैशन का पर्याय बनता जा रहा है।आज के समय मे जबकि फैशन उद्योग पूरी दुनिया मे 1.3 ट्रिलियन डॉलर का उद्योग और 30 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करती है उसमे खादी अपने लिए अवसर को चुनौतियों के साथ अपनाने का प्रयास कर रही है।
पर्यावरण अनुकूल है खादी
वस्त्र और फैशन का उद्योग आज के समय मे सबसे ज्यादा प्रदूषणकारी उद्योगों मे से एक बना हुआ है।विशेषज्ञों का कहना है की वर्ष 2030 तक फैशन उद्योग मे जल का उपयोग मे 50%, कार्बन उत्सर्जन मे 63% और अपशिष्ट उत्पादन मे 148 मिलियन टन वृद्धि होने का अनुमान है। ऐसी स्थिति मे खादी सबसे फिट बैठती है जैसे -
- इसमे कम बिजली का उपयोग होता है।
- इसका कार्बन फुटप्रिन्ट बेहद कम है।
- इसकी आपूर्ति शृंखला ग्रामीण कारीगरों का समर्थन करती है।
- इसमे प्राकृतिक रंग और रेशे का उपयोग किया जाता है।
- खादी मे नवाचार :खादी मे नवाचार को बढ़ाने के लिए "ASPIRE" नवाचार,ग्रामीण उद्योग और उगद्यमीट को बढ़ावा देने हेतु योजना" के माध्यम से बाल मिलता है। साथ ही "बाजार विकास सहायता योजना" संबंधित संस्थाओ और लोगों को विपणन और प्रतिस्पर्धात्मक सहयोग प्रदान करती है। "ekhadiindia.com" जैस ई कॉमर्स प्लेटफार्म जिसे वर्ष 2021 मे शुरू किया गया था उपभोक्ताओ मे इसकी ब्रांडिंग और विश्वसनीयता को बढ़ा रही है।
- वित्तीय सहायकता: केवीआईसी वित्तीय और अवसंरचनात्मक सहयोग को बनाए रखता है। वर्ष 2023-24 मे खादी के 1088 संस्थानों को बाजार विकास सहायता के रूप मे कुल 267.52 करोड़ रुपये और व्याज सब्सिडी 37.36 करोड़ वित्तीय सहायकता प्रदान किया गया। खादी कारीगरों के लिए "वर्क शेड स्कीम" के लिए 1,20,000 रुपये तक की वित्तीय सहायकता प्रदान की जाती है।
- खादी डेनिम उत्पाद: वर्ष 2017 मे खादी आयोग ने "अरविन्द मिल्स अहमदाबाद " के साथ समझौता ज्ञापन किया जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका से बार बार खादी डेनिम के ऑर्डर मिले। साथ ही आयोग ने 15 देशों मे ट्रैड्मार्क के लिए और 31 देशों मे प्रतीक चिन्ह के लिए पंजीयकरण करवाया है। जिसके परिणामस्वरूप 37.88 करोड़ रुपये का खादी का निर्यात हुआ जिनमे मुख्य रूप से चीन रूस और तंजानिया को हुआ।
- उत्कृष्ठता केंद्र: केवीआईसी की ये भी एक विशिष्ट पहल है जो NIFT दिल्ली मे स्थापित है और साथ ही उसके सात क्षेत्रीय केंद्र है। इसका उदेश्य खादी को एक विश्व ब्रांड के रूप मे स्थापित करना है। साथ ही खादी के लिए एक "ज्ञान पोर्टल" को भी लांच किया गया है जो डिजाइन जैसे मार्गदर्शन प्रदान करता है।
- खादी की डिजिटल क्रांति: भारत मे "डिजिटल इंडिया" की शुरुआत 2015 मे हुई जिसने खादी उद्योग की दिशा को बदल कर रख दिया। सबसे पहले वर्ष 2016 मे आधिकारिक पोर्टल "खादी इंडिया अनलाइन" को लांच किया गया। जिसका मुख्य फायदा ये हुआ की खादी के ग्राहक बिना बिचौलियों के सीधे खादी के समान अनलाइन खरीद सकते थे।
- इसे डायरेक्ट टू कस्टमर माडल कहा गया। यही नहीं 2016 मे ही अमेजॉन इंडिया और फ्लिपकार्ट से भी समझौता कर लिया जिससे खादी अनलाइन ग्राहकों तक पहुँच गया।जिसके परिणामस्वरूप कोविड के टाइम मे खादी की विक्री मे 300% की विक्री बढ़ गई।
- सोशल मीडिया ने किया प्रचार: खादी को बढ़ावा देने मे सोशल मीडिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इंस्टाग्राम खादी का सबसे बड़ा विसुअल स्टोरीटेलिंग बन गया। इंफ्लुएंसर ने सोशल मीडिया और ब्लॉग मे खादी का जमकर प्रचार किया और इसए एक ब्रांड बना दिया।
- अन्य तकनीक का योगदान: AI ने खादी को घर बैठे ग्राहकों को बात दिया की वे खादी के परिधान मे कैसे लगेंगे। साथ ही भारतीय खादी ने दुनिया मे चल रहे "हरित आंदोलन" से भी अपने को जोड़ लिया जिसके परिणामस्वरूप जहा 2015 मे निर्यात 15 करोड़ रुपये था वही 2023 तक 120 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया। डिजिटल माध्यमों के चलते अंतर्राष्ट्रीय आर्डर मे 450% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- गुजरात और महाराष्ट्र मे मजबूत हवा पारगम्य देशी खादी परंपरा।
- बिहार के मुंगेर क्षेत्र की चमकदार रेशमी खादी का परंपरा।
- राजस्थान के जलवायु अनुरूप खुरदरी मजबूत खादी की परंपरा।
- पूर्वोत्तर की एरी मूंगा मिश्रित खादी की सांस्कृतिक परंपरा।
- स्वदेशी का उद्घोष
- आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक
- जाती धर्म आदि से ऊपर उठकर सबको जोड़ने वाला
- सादगी सेवा और अनुशासन का अभ्यास का प्रतीक

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