नये दौर की ग्रीन फैशन और शशक्त होती खादी युवाओ मे भी लोकप्रिय

Khadi for Sustainable Growth
Khadi for Sustainable Growth and women empowerment in India 


प्रस्तावना 

खादी सिर्फ कपड़ा नहीं है बल्कि ये आत्मनिर्भर भारत की ऐसी धड़कन है जो कुशल हाथों से होते हुए दिलों तक पहुचती है। खादी कारीगरों के लिए रोजगार का भरोसा है तो वही पर्यावरण का भविष्य है।

स्वतंत्रता आंदोलन को धार देने से लेकर आज पूरे विश्व मे समावेशी सतत विकास (Sustainable Growth) की वाहक बनी हुई है।वर्तमान मे यह एक गतिशील आर्थिक आंदोलन बन चुका है। वर्तमान मे सरकारी प्रयासों से लेकर स्टार्टअप की ऊर्जा ने खादी मे नए अवसरों के द्वार खोल रही है। 

ऐतिहासिक प्रमाण बताते है की मोहनजोदड़ों की प्राचीन
सभ्यता से लेकर मौर्यकल मे भी खादी का व्यापक प्रयोग होता था जिसको चाणक्य के अर्थशास्त्र मे भी स्थान दिया गया है। आधुनिक समय मे स्वतंत्रता आंदोलन मे गांधी जी द्वारा स्वदेशी आंदोलन के माध्यम से खादी को बढ़ावा मिला और चरखा चलना आत्मनिर्भर भारत का पहचान बन गया। 


स्वतंत्र के बाद वर्ष 1957 मे "खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की स्थापना ने खादी को संस्थागत रूप दिया। लेकिन 1980 तक आते आते इसकी चमक फीकी पड़ने लगी। इस फीकी चमक और लोगों मे रुचि को जगाने के लिए "देविका भोजवानी" का 1989 मे खादी का उच्च फैशन शो और 1990 मे ऋतु कुमार का पहला खादी संग्रह ने लोगों मे कुछ जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया। 


वही खादी वर्तमान समय मे मशहूर हस्तियों और जन प्रतिनिधियों से लेकर युवाओ मे डिजाईन और फैशन का पर्याय बनता जा रहा है।आज के समय मे जबकि फैशन उद्योग पूरी दुनिया मे 1.3 ट्रिलियन डॉलर का उद्योग और 30 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करती है उसमे खादी अपने लिए अवसर को चुनौतियों के साथ अपनाने का प्रयास कर रही है। 


पर्यावरण अनुकूल है खादी 

वस्त्र और फैशन का उद्योग आज के समय मे सबसे ज्यादा प्रदूषणकारी उद्योगों मे से एक बना हुआ है।विशेषज्ञों का कहना है की वर्ष 2030 तक फैशन उद्योग मे जल का उपयोग मे 50%, कार्बन उत्सर्जन मे 63% और अपशिष्ट उत्पादन मे 148 मिलियन टन वृद्धि होने का अनुमान है। ऐसी स्थिति मे खादी सबसे फिट बैठती है जैसे -


  • इसमे कम बिजली का उपयोग होता है। 
  • इसका कार्बन फुटप्रिन्ट बेहद कम है। 
  • इसकी आपूर्ति शृंखला ग्रामीण कारीगरों का समर्थन करती है। 
  • इसमे प्राकृतिक रंग और रेशे का उपयोग किया जाता है। 

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और उच्च उत्पादन लागत एवं इसके वितरण की चुनौतियों के बीच भी खादी ने आसाधरण रूप से प्रगति की है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने वर्ष 2024-2025 मे 1.70 लाख करोड़ रुपये का कारोबार करते हुए एक एतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है -
  

वर्तमान मे खादी का विकास 

पिछले एक दशक  मे खादी ने काफी विकास किया है और ये धीरे धीरे युवाओ मे भी लोकप्रिय होती जा रही है। इस दशक मे खादी के विकास को निम्न तालिका द्वारा भी समझा जा सकता है -

 

खादी विकास 


वर्ष 

उत्पादन 

(करोड़ रुपया )

विक्री 

(करोड़ रुपया)

रोजगार 

(करोड़ मे)

2013-14 

Rs 26,109.07 

Rs 31,154.19 

1.30 करोड़ 

2024-25 

Rs 1,16,599.75 

Rs 1,17,551.37 

1.94 करोड़ 


उपरोक्त तालिका से स्पष्ट हो जाता है की पिछले दसक मे इसमे उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां उत्पादन मे चार गुना वृद्धि दर 347% हुई है वही विक्री मे भी पाँच गुना बढ़ोतरी के साथ वृद्धि दर मे 447% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रोजगार मे भी 49.23% की वृद्धि हुई है। ज्ञातव्य है की 5 लाख खादी कारीगरों मे लगभग 80% महिला कारीगर कार्यरत है। 

साथ ही सरकार के द्वारा इस क्षेत्र मे मजदूरी सुधारों को भी मजबूत किया गया है और पिछले 11 महीनों मे कारीगरों के मजदूरी मे 275% की वृद्धि हुई है और अप्रैल 2025 के बाद 20% अतिरिक्त वेतन की वृद्धि की गई है। 


खादी मे विकास के उपाय 

  • खादी मे नवाचार :खादी मे नवाचार को बढ़ाने के लिए "ASPIRE" नवाचार,ग्रामीण उद्योग और उगद्यमीट को बढ़ावा देने हेतु योजना" के माध्यम से बाल मिलता है। साथ ही "बाजार विकास सहायता योजना" संबंधित संस्थाओ और लोगों को विपणन और प्रतिस्पर्धात्मक सहयोग प्रदान करती है। "ekhadiindia.com" जैस ई कॉमर्स प्लेटफार्म जिसे वर्ष 2021 मे शुरू किया गया था  उपभोक्ताओ मे इसकी ब्रांडिंग और विश्वसनीयता को बढ़ा रही है। 

  • वित्तीय सहायकता: केवीआईसी वित्तीय और अवसंरचनात्मक सहयोग को बनाए रखता है। वर्ष 2023-24 मे खादी के 1088 संस्थानों को बाजार विकास सहायता के रूप मे कुल 267.52 करोड़ रुपये और व्याज सब्सिडी 37.36 करोड़ वित्तीय सहायकता प्रदान किया गया। खादी कारीगरों के लिए "वर्क शेड स्कीम" के लिए 1,20,000 रुपये तक की वित्तीय सहायकता प्रदान की जाती है। 

  • खादी डेनिम उत्पाद: वर्ष 2017 मे खादी आयोग ने "अरविन्द मिल्स अहमदाबाद " के साथ समझौता ज्ञापन किया जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका से बार बार खादी डेनिम के ऑर्डर मिले। साथ ही आयोग ने 15 देशों मे ट्रैड्मार्क के लिए और 31 देशों मे प्रतीक चिन्ह के लिए पंजीयकरण करवाया है। जिसके परिणामस्वरूप 37.88 करोड़ रुपये का खादी का निर्यात हुआ जिनमे मुख्य रूप से चीन रूस और तंजानिया को हुआ। 

  • उत्कृष्ठता केंद्र: केवीआईसी की ये भी एक विशिष्ट पहल है जो NIFT दिल्ली मे स्थापित है और साथ ही उसके सात क्षेत्रीय केंद्र है। इसका उदेश्य खादी को एक विश्व ब्रांड के रूप मे स्थापित करना है। साथ ही खादी के लिए एक "ज्ञान पोर्टल" को भी लांच किया गया है जो डिजाइन जैसे मार्गदर्शन प्रदान करता है। 

  • खादी की डिजिटल क्रांति: भारत मे "डिजिटल इंडिया" की शुरुआत 2015 मे हुई जिसने खादी उद्योग की दिशा को बदल कर रख दिया। सबसे पहले वर्ष 2016 मे आधिकारिक पोर्टल "खादी इंडिया अनलाइन" को लांच किया गया। जिसका मुख्य फायदा ये हुआ की खादी के ग्राहक बिना बिचौलियों के सीधे खादी के समान अनलाइन खरीद सकते थे।

  • इसे डायरेक्ट टू कस्टमर माडल कहा गया। यही नहीं 2016 मे ही अमेजॉन इंडिया और फ्लिपकार्ट से भी समझौता कर लिया जिससे खादी अनलाइन ग्राहकों तक पहुँच गया।जिसके परिणामस्वरूप कोविड के टाइम मे खादी की विक्री मे 300% की विक्री बढ़ गई। 

  • सोशल मीडिया ने किया प्रचार: खादी को बढ़ावा देने मे सोशल मीडिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इंस्टाग्राम खादी का सबसे बड़ा विसुअल स्टोरीटेलिंग बन गया। इंफ्लुएंसर ने सोशल मीडिया और ब्लॉग मे खादी का जमकर प्रचार किया और इसए एक ब्रांड बना दिया।

  • अन्य तकनीक का योगदान: AI ने खादी को घर बैठे ग्राहकों को बात दिया की वे खादी के परिधान मे कैसे लगेंगे। साथ ही भारतीय खादी ने दुनिया मे चल रहे "हरित आंदोलन" से भी अपने को जोड़ लिया जिसके परिणामस्वरूप जहा 2015 मे निर्यात 15 करोड़ रुपये था वही 2023 तक 120 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया। डिजिटल माध्यमों के चलते अंतर्राष्ट्रीय आर्डर मे 450% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 

महात्मा गांधी जी के अनुसार खादी स्वतंत्रता प्राप्ति का एक शासक्त साधन था वही वर्तमान मे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रचारित मंत्र "फैशन के लिए खादी और परिवर्तन के लिए खादी" ने लोगों को प्रभावित किया है और यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा मे देश को अपना एक महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। 


खादी का सांस्कृतिक महत्व 

खादी भारत की सांस्कृतिक स्मृति,शिल्प,सौन्दर्य और सामूहिक धौरीय का जीवंत अभिलेख है। भारत के कई क्षेत्रों मे खादी को महत्वपूर्ण त्योहारों,पारिवारिक अवसरों और विशेष समारोहों मे उपयोग करना शुभ माना जाता है जैसे -
  • गुजरात और महाराष्ट्र मे मजबूत हवा पारगम्य देशी खादी परंपरा। 
  • बिहार के मुंगेर क्षेत्र की चमकदार रेशमी खादी का परंपरा। 
  • राजस्थान के जलवायु अनुरूप खुरदरी मजबूत खादी की परंपरा। 
  • पूर्वोत्तर की एरी मूंगा मिश्रित खादी की सांस्कृतिक परंपरा। 

इस सांस्कृतिक रूपांतरण का सबसे महत्वपूर्ण काल भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान देखने को मिला जब खादी पहनना और कताई करना आत्मसम्मान का पार्टिक बन गया। गांधीजी के नेतृत्व मे खादी सांस्कृतिक विरासत के साथ साथ स्वदेशी आत्मनिर्भरता और सादगी एवं अनुसाशन के पर्याय के रूप मे स्थापित हो गई -
  • स्वदेशी का उद्घोष 
  • आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक 
  • जाती धर्म आदि से ऊपर उठकर सबको जोड़ने वाला 
  • सादगी सेवा और अनुशासन का अभ्यास का प्रतीक 

वही खादी वर्तमान मे विश्व भर मे भारत की सांस्कृतिक पहचान बनकर उभरी है। राजनयिक उपहारों से लेकर अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों तक भारत की परंपरा, शिल्प कौशल और नैतिक फैशन का वाहक संदेश के रूप मे विश्व के मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। आज के युवा डिजाईनर पुरातनता और आधुनिकता का अनूठा मेल बनाकर खादी को नये रूप मे गढ़ रहे है। 


निष्कर्ष 


इस प्रकार से खादी अपने पारंपरिक वस्त्र मूल से आधुनिक फैशन और डिजाईन मे महत्वपूर्ण रूप से उभरी है। कुल मिलकर कहा जा सकता है की खादी का भविष्य आशाजनक प्रतीत होता है। बस सरकार और संस्थाओ को इस महत्वपूर्ण बदलाव के लाभ को उठान चाहिए। 

अभी हाल ही मे भारत और युरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रैड एग्रीमेंट हुए है जिसका फायदा खादी उद्योग को भी मिलने की उम्मीद है। 

हमे भी खादी को अपने स्तर से लोकप्रिय बनाने के लिए कम से कम एक कपड़ा तो खादी का जरूर उपयोग करना चाहिए। इससे हम न केवल खादी के विकास मे अपना योगदान दे पाएंगे, बल्कि साथ ही पर्यावरण और ग्रामीण महिलाओ एवं सतत विकास मे भी सहभागी बन पाएंगे। 


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ

प्रश्न 1. खादी कपड़ा क्या होता है?

उत्तर: खादी कपड़ा वैसा कपड़ा होता है जिसमे हाथ से काते गए सूत(कपास,रेशम या ऊन) से बिना किसी मशीन के हथकरघे पर बुना गया एक प्रकृतिक कपड़ा होता है जिसमे रंग भी प्राकृतिक रूप से ही मिलाया जाता है। 


प्रश्न 2. खादी की मुख्य विशेषताएं क्या है?

उत्तर: खादी पूरी तरह से हाथ(हथकरघा और चरखा)से बना होता है। जिससे यह त्वचा के लिए आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल होता है क्योंकि इसमे कोई प्रदूषण नहीं होता। 


प्रशं 3. खादी इंडिया डॉट कॉम क्या है?

उत्तर: खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा संचालित Khadiindia.com एक आधिकारिक ई-कामर्स पोर्टल है जहां से 1500 से अधिक खादी के प्रमाणिक उत्पादों को पूरे देश मे वितरित किया जाता है जिसमे 1000 रुपये से अधिक की खरीद पर डेलीवेरी चार्ज निःशुल्क होता है। 


प्रश्न 4. महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन मे खादी को बढ़ावा क्यों दिया?

उत्तर: क्योंकि यह आत्मनिर्भरता और स्वदेशी का प्रतीक था। खादी के प्रयोग से देश के लोगो को रोजगार मिल रहा था और देश का पैसा देश मे ही रहता था। 


प्रश्न 5. खादी ठंड है या गर्म:

उत्तर: खादी तापमान नियंत्रक है यह गर्मियों मे ठंडक और सर्दियों मे गर्मी प्रदान करता है। 


प्रश्न 6. खादी किस देश से आई थी?

उत्तर: खादी का मूल स्थान भारत ही है। भारत मे प्राचीन मोहनजोदड़ों की सभ्यता से खादी के प्रचलन के प्रमाण मिलते है। तब से लेकर अब तक खादी अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी है। 


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